आपका स्वागत है

Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

और अधिक जानें

एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया (एएमएल)

बच्चों और किशोर में एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया क्या है?

एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया (एएमएल) खून और बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) में होने वाला एक कैंसर है। एएमएल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (एएलएल) के बाद बचपन में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर खून का कैंसर है।

यूएस में प्रतिवर्ष लगभग 500 बच्चे एएमएल से पीड़ित पाए जाते हैं। यह वयस्कों में बहुत आम है।

बचपन में होने वाला एएमएल आमतौर पर जीवन के पहले 2 वर्षों के दौरान और किशोरावस्था वर्षों के दौरान सबसे अधिक पाया जाता है।

एएमएल माइलॉयड स्टेम सेल नामक रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। सामान्यतः, बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) रक्त-उत्पादन करने वाली स्टेम सेल का निर्माण करती है जो या तो माइलॉयड स्टेम सेल या लिम्फॉइड स्टेम सेल बन जाते हैं। माइलॉयड स्टेम सेल निम्नलिखित तीन प्रकार में से एक प्रकार की परिपक्व रक्त कोशिका बन जाती है:

  • लाल रक्त कोशिका
  • ग्रैनुलोसाइट्स नामक सफेद रक्त कोशिकाएं
  • प्लेटलेट्स
माइक्रोस्कोप की छवि में सामान्य, बोनमैरो दिखता है

यह छवि दर्शाती है कि एक सामान्य, स्वस्थ बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) माइक्रोस्कोप के माध्यम से कैसी दिखती है।

माइक्रोस्कोप छवि एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया से पीड़ित रोगी के बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) को दर्शाती है

यह एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया से पीड़ित एक बाल रोगी की बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) है।

एएमएल उपप्रकार

एएमएल के कई उपप्रकार हैं। यह महत्वपूर्ण होता है क्योंकि एएमएल का प्रकार रोग पूर्वानुमान और इलाज का निर्धारण करता है।

एएमएल का उपप्रकार जानने पर चिकित्सक एएमएल मामलों को निम्न-जोखिम या उच्च-जोखिम में वर्गीकृत कर सकते हैं, जिससे उन्हें सबसे अधिक उपयुक्त इलाज का चयन करने में मदद मिलती है। एएमएल का इलाज आमतौर पर कीमोथेरेपी और कभी-कभी बोन मैरो ट्रांसप्लांट होता है। जोखिम श्रेणी पर आधारित इलाज (जोखिम-अनुकूलित चिकित्सा) निर्धारित करने से कैंसर से जीवित रहने की दर में वृद्धि हुई है। अधिक उच्च-जोखिम प्रकार के कैंसर से पीड़ित रोगियों को सर्वाधिक गहन चिकित्सा दी जा सकती है जबकि निम्न-जोखिम मामले वाले रोगियों को निम्न-गहनता वाली चिकित्सा दी जा सकती है जिसके कम दुष्प्रभाव होते हैं। एएमएल उपप्रकार के बारे में अधिक जानकारी के लिए, अपने चिकित्सक से संपर्क करें।

बच्चों में देखे गए एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया (एएमएल) और संबंधित ट्यूमर (विश्व स्वास्थ्य संगठन, 2016):

दुबारा होने वाला आनुवंशिक असामान्यताओं के साथ एएमएल

  • गुणसूत्र 8 और 21, RUNX1-RUNX1T1 के बीच स्थानीकरण के साथ एएमएल
  • गुणसूत्र 16, CBFB-MYH11 में स्थानीकरण या उत्क्रमण
  • पीएमएल-आरएआरए के साथ एपीएल (एक्यूट प्रोमाइलोसाइटिक ल्युकेमिया)
  • गुणसूत्र 9 और 11, MLLT3-KMT2A के बीच स्थानीकरण के साथ एएमएल
  • गुणसूत्र 6 और 9, DEK-NUP214 के स्थानीकरण के साथ एएमएल
  • गुणसूत्र 3, GATA2, MECOM में स्थानीकरण या उत्क्रमण
  • गुणसूत्र 1 और 22, RBM15-MKL1 के बीच स्थानीकरण के साथ एएमएल (मेगाकार्योब्लास्टिक)
  • उत्परिवर्तित एनपीएम1 के साथ एएमएल
  • सीईबीपीए के द्वियुग्मविकल्पी उत्परिवर्तनों के साथ एएमएल
  • अनंतिम इकाई: उत्परिवर्तित आरयूएनएक्स1 के साथ एएमएल

माइलोडिस्प्लेज़िया-संबंधित परिवर्तनों के साथ एएमएल

इलाज-संबंधित माइलॉयड नियोप्लाज़्म

एएमएल, जब तक कि कुछ और निर्दिष्ट न किया जाए

  • न्यूनतम विभेदन के साथ एएमएल
  • परिपक्वता के बिना एएमएल
  • परिपक्वता के साथ एएमएल
  • एक्यूट माइलोमोनोसाइटिक ल्यूकेमिया
  • एक्यूट मोनोब्लास्टिक/मोनोसाइटिक ल्यूकेमिया
  • प्योर एरिथ्रॉइड ल्यूकेमिया
  • एक्यूट मेगाकार्योब्लास्टिक ल्यूकेमिया
  • एक्यूट बेसोफिलिक खून का कैंसर
  • माइलोफिब्रोसिस के साथ एक्यूट पैनीमेलोसिस

माइलॉयड सार्कोमा

डाउन सिंड्रोम से संबंधित माइलॉयड प्रोलिफेरेशन

  • ट्रान्ज़िएंट एब्नॉर्मल माइलोपोइसिस(टीएएम)
  • डाउन सिंड्रोम से संबंधित माइलॉयड ल्यूकेमिया

एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया क्या है?

खून के कैंसर में, कैंसर कोशिकाएं बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) में तेजी से बढ़ती हैं। ये कैंसर कोशिकाएं अपरिपक्व सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं जिन्हें ब्लास्ट कहा जाता है। जब ऐसा होता है, तो स्वस्थ रक्त कोशिकाएं - श्वेत रक्त कोशिकाएं, लाल रक्त कोशिकाएं, और प्लेटलेट्स - अपने कार्य सही ढंग से नहीं कर पाती हैं।

खून बनाने की प्रक्रिया और उसमे ब्लास्ट कोशिकाएँ उत्पन्न कैसे होती हैं, यह रेखा-चित्र में दिखाया गया है। रेखा-चित्र में ब्लड स्टेम सेल से शुरू होता है। बाईं ओर, यह माइलॉयड स्टेम सेल में विभाजित होती है, जो प्लेटलेट्स, लाल रक्त कोशिकाओं, माइलोब्लास्ट, और मोनोब्लास्ट में विभाजित हो जाती है। माइलोब्लास्ट सफेद रक्त कोशिकाओं में बदल जाती है (जिसे ग्रैन्यूलोसाइट्स भी कहा जाता है) और मोनोब्लास्ट, मोनोसाइट में बदल जाती है। ब्लड स्टेम सेल की दाईं शाखा लिम्फॉइड स्टेम सेल में जाती है, जो लिम्फोब्लास्ट (जो सफेद रक्त कोशिकाओं में बदलती है) और ब्लास्ट कोशिकाओं में बदल जाती है।

एएमएल माइलॉयड स्टेम सेल नामक रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। सामान्यतः, बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) रक्त-उत्पादन करने वाली स्टेम सेल का निर्माण करती है जो या तो माइलॉयड स्टेम सेल या लिम्फॉइड स्टेम सेल बन जाते हैं।

एएमएल माइलॉयड स्टेम सेल नामक रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। सामान्यतः, बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) रक्त-उत्पादन करने वाली स्टेम सेल का निर्माण करती है जो या तो माइलॉयड स्टेम सेल या लिम्फॉइड स्टेम सेल बन जाते हैं। माइलॉयड स्टेम सेल निम्नलिखित तीन प्रकार में से एक प्रकार की परिपक्व रक्त कोशिका बन जाती है:

  • लाल रक्त कोशिका
  • ग्रैनुलोसाइट्स नामक सफेद रक्त कोशिकाएं
  • प्लेटलेट्स

बचपन में होने वाला एएमएल के जोखिम कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • खून के कैंसर (ल्यूकेमिया) से पीड़ित, विशेष रूप से एक जुड़वां, भाई या बहन होना
  • अतीत में कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी से हुआ इलाज
  • माईइलॉडिसप्लास्टिक सिंड्रोम
  • कई तरह के वंशानुगत विकार

कुछ वंशानुगत विकार होना, जैसे:

  • डायमंड-ब्लैकफैन सिंड्रोम
  • पारिवारिक प्लेटलेट विकार
  • फ़ैंकोनी एनीमिया
  • ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम
  • मिसमैच रिपेयर सिंड्रोम
  • मोनामैक सिंड्रोम
  • रोथमंड-थॉमसन सिंड्रोम
  • श्वाकमैन-डायमंड सिंड्रोम

एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया लक्षण

एएमएल में, निम्नलिखित संकेत और लक्षण हो सकते हैं:

  • बुखार
  • थकान
  • संक्रमण
  • आसानी से खून का बहना और चोट होना
  • नाक से बार-बार खून बहना
  • हड्डियों या जोड़ों में दर्द
  • रिब केज (पिंजर) के नीचे दर्द होना या भारीपन महसूस होना
  • सूजी हुई लसिका ग्रंथियां
  • भूख न लगना

एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया की पहचान

खून का कैंसर (ल्यूकेमिया) रोग की पहचान के लिए आमतौर पर बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) जाँच की आवश्यकता होती है। कई बार शारीरिक जाँच करके, चिकित्सकीय इतिहास जान कर और खून की जाँच के परिणामों को देखने के बाद चिकित्सक ल्यूकेमिया (खून का कैंसर) का शक करने लगते हैं। खून के कैंसर (ल्यूकेमिया) से पीड़ित बच्चों के खून में आमतौर पर अपरिपक्व सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बहुत अधिक होती है।

  1. परीक्षण और इतिहास जाँच के दौरान, चिकित्सक निम्न कार्य करेगा:

    • स्वास्थ्य के सामान्य संकेतों की जाँच करेगा, जिसमें बीमारी के लक्षण, जैसे कि गांठ या कुछ और, जो असामान्य हो।
    • आंखों, मुंह, त्वचा और कानों की जांच करेगा। चिकित्सक रोगी के पेट को छू कर तिल्ली / प्लीहा या जिगर के बढ़े हुए होने के संकेतों की जाँच करेगा। लड़कों में, चिकित्सक, वीर्यकोष की जांच भी कर सकता है।
    • रोगी को होने वाली अन्य बीमारियों के बारे में पूछेगा और ऐसे रोगों के बारे में पता करेगा जो माता-पिता, भाई-बहन और दादा-दादी जैसे रिश्तेदारों को हो सकते हैं। चिकित्सक उन संभावित अंतर्निहित वाली स्थितियों की तलाश कर रहा है जिनमें कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  2. कंप्लीट ब्लड काउंट

    चिकित्सक एक खून जाँच कराने को कहेंगे जिसे कंप्लीट ब्लड काउंट कहा जाता है। खून का नमूना लिया जाता है और उसकी जांच की जाती है ताकि निम्न चीजों का पता लगाया जा सके:

    • लाल रक्त कोशिकाओं (रेड ब्लड सेल) और प्लेटलेट्स की संख्या
    • सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की संख्या और प्रकार
    • लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा
    • लाल रक्त कोशिकाओं से बने खून के नमूने का हिस्सा।

    खून के कैंसर में, खून में उच्च संख्या में सफेद रक्त कोशिकाएं हो सकती हैं। इन कोशिकाओं में से अधिकतर कोशिकाएं ब्लास्ट हो सकती हैं, कोशिका का वह प्रारंभिक रूप जो आमतौर पर केवल स्वस्थ बच्चों की बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) में ही पायी जाती हैं।

    रक्त पदार्थ का अध्ययन (ब्लड कैमिस्ट्री)

    इसमें शरीर के अंगों और ऊतकों द्वारा खून में बहने वाले कुछ पदार्थों की मात्राओं को मापने के लिए खून की जाँच की जाती है। किसी पदार्थ का असामान्य (सामान्य से अधिक या कम) मात्रा में होना बीमारी होने का संकेत हो सकता है।

    एक नर्स द्वारा खून का नमूना लेने के दौरान एक युवा रोगी अपने पास खड़े माता-पिता के साथ परीक्षण मेज़ पर बैठी है।

    कई बार शारीरिक जाँच करके, चिकित्सकीय इतिहास जान कर और खून की जाँच के परिणामों को देखने के बाद चिकित्सक ल्यूकेमिया (खून का कैंसर) का शक करने लगते हैं।

कैंसर का पता लग जाने पर, कैंसर के सही उपप्रकार का पता लगाने के लिए और अधिक जांच की जाएंगी। इन जाँचों में शामिल है:

  1. इम्यूनोफिनोटायपिंग का उपयोग, प्रतिरक्षा प्रणाली की सामान्य कोशिकाओं से कैंसर कोशिकाओं की तुलना करते हुए खून का कैंसर (ल्यूकेमिया) के विशेष प्रकारों की पहचान करने के लिए किया जाता है।

    इम्युनोहिस्टोकैमिस्ट्री और फ़्लो साइटोमेट्री लेबोरेट्री में होने वाले जाँच हैं।

    • इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री एक ऐसी जाँच है जिसमें ऊतक के नमूने में विशिष्ट प्रोटीनों को दिखाने के लिए एंटीबॉडी का उपयोग किया जाता है। प्रोटीन और एंटीबॉडी के संकुलों पर कत्थई या लाल रंग लगा कर उन्हें माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर देखा जा सकता है।
    • फ़्लो साइटोमेट्री में, कोशिकाओं को एक प्रकाश संवेदनशील डाई से रंगा जाता है इस डाई को एक तरल में डाला जाता है और धारा के रूप में किसी लेज़र या अन्य प्रकार के प्रकाश के सामने प्रवाहित किया जाता है। जाँच में कोशिकाओं की संख्या, जीवित कोशिकाओं का प्रतिशत और कोशिकाओं की निश्चित विशेषताओं, जैसे आकार, आकृति और कोशिका की सतह पर ट्यूमर मार्करों की उपस्थिति को मापा जाता है।
  2. साइटोजेनेटिक विश्लेषण में लेबोरेट्री जाँच शामिल होती हैं जिनमें रोगविज्ञानी (पैथालॉजिस्ट) क्रोमोसोम (गुणसूत्र) में हुए कुछ परिवर्तनों की खोज करते हैं।

    एक ऐसी ही जाँच है एफ़आईएसएच (फ्लोरेंसेंस इन सीतु ह्यब्रिडिजाशन)। इस जाँच में कोशिकाओं और कैंसर के टुकड़े में जीन्स या गुणसूत्र की जाँच की जाती है। डीएनए के वे खंड जिनमें फ्लोरोसेंट डाई होती है, लेबोरेट्री में बनाए जाते हैं और फिर उन्हें कांच की स्लाइड पर कोशिकाओं या ऊत्तकों में मिलाया जाता है। जब डीएनए के ये खंड स्लाइड पर रखे कुछ जीन्स या गुणसूत्रों के हिस्सों से जुड़ते हैं, तो वे चमक उठते हैं।

  3. चिकित्सक विशिष्ट वंशाणुओं, प्रोटीनों और खून के कैंसर में शामिल अन्य कारकों की पहचान करने के लिए प्रयोगशाला में जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं। यह परीक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि कैंसर, कोशिकाओं के जीन्स में दोषों (उत्परिवर्तन) के कारण होता है।

    इन दोषों की पहचान करने से खून का कैंसर (ल्यूकेमिया) के विशिष्ट उपप्रकार रोग की पहचान करने में मदद मिलती है। उस जानकारी के आधार पर, चिकित्सक व्यक्तिगत मामले के अनुरूप इलाज विकल्पों का चयन कर सकते हैं। जिन बच्चों का खून का कैंसर अच्छे परिणाम से जुड़े उत्परिवर्तनों को दर्शाता है, उनके लिए कम विषाक्त इलाज निर्धारित किया जा सकता है। दूसरी ओर, चिकित्सक खराब परिणामों के साथ जुड़े उत्परिवर्तनों वाले खून का कैंसर (ल्यूकेमिया) से पीड़ित रोगियों के लिए अधिक गहन इलाज निर्धारित कर सकते हैं। उन उत्परिवर्तनों की पहचान की जा सकती है, जिनके लिए उस विशिष्ट उत्परिवर्तन का लक्षित इलाज उपलब्ध है।

कैंसर फैलने का पता लगाने के लिए कुछ जाँचें इस प्रकार हैं:

  1. यह पता लगाने के लिए कि कैंसर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक फैला है या नहीं, रीढ़ की हड्डी से रीढ़ की हड्डी के पानी का नमूना लेने के लिए लंबर पंक्चर किया जाता है। इस प्रक्रिया को LP या स्पाइनल टैप (रीढ़ की हड्डी के अंदर से पानी निकालना) भी कहा जाता है।

    इस प्रक्रिया में रीढ़ की दो हड्डियों के बीच में और रीढ़ के अंदर की नस के आसपास के पानी में एक सुई लगाई जाती है। उस पानी का नमूना निकाल लिया जाता है। उसे माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर, मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस तक खून का कैंसर (ल्यूकेमिया) कोशिकाओं के फैलने के संकेतों की जाँच की जाती है। हमारे शरीर लगातार रीढ़ में द्रव का निर्माण करते रहते हैं, इसलिए शरीर लंबर पंक्चर द्वारा लिए गए थोड़े से पानी के स्थान को तुरंत दुबारा भर देता है।

  2. एक्स-रे एक प्रकार की ऊर्जा किरण है जो शरीर से गुजरकर फ़िल्म पर जा सकती है, जो शरीर के अंदर के भागों की कंप्यूटर स्क्रीन पर या विशेष फ़िल्म पर तस्वीर बनाती है। छाती का एक्स-रे यह देखने के लिए किया जाता है कि क्या खून का कैंसर (ल्यूकेमिया) कोशिकाओं से छाती के बीच में कोई गाँठ/पिंड बनी है।

एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया इलाज

इलाज, एएमएल के प्रकार पर निर्भर करता है। एएमएल के तीन प्रकार — एक्यूट प्रोमाइलोसाइटिक ल्युकेमिया (एपीएल), डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त बच्चों में एएमएल, और एफएलटी3-उत्परिवर्तित एएमएल — का इलाज एएमएल के अन्य प्रकारों की तुलना में अलग तरीके से किया जाता है।

कीमोथेरेपी एक प्राथमिक एएमएल इलाज है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी एक विकल्प हो सकता है।

इंडक्शन

इस इंडक्शन चरण का लक्ष्य खून और बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) में मौजूद खून के कैंसर वाली कोशिकाओं को नष्ट करना और रोगी को कैंसर-मुक्त करना है। चूंकि एएमएल रोगी संक्रमण के प्रति अति संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें जीवाणु नाशक दवाई (एंटीबायोटिक) दवाओं के साथ सहायक इलाज भी दिया जाता है।

इस समय के दौरान, मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस में मौजूद खून के कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस) सैंक्चुअरी थेरेपी भी दी जा सकती है (जिसे सीएनएस प्रोफिलैक्सिस भी कहा जाता है)। दवाओं को इंजेक्शन से मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस को कवर करने वाले ऊतक की पतली परतों के बीच तरल से भरे स्थान में डाला जाता है (इंट्राथेकल)।

कैंसर के शुरूआती इलाज में विशिष्ट रूप से साइट्राबाइन और एंथ्रासाइक्लिन जैसी दवाओं का संयोजन, आमतौर पर डॉनोरूबिसिन शामिल होती है। कैंसर के शुरूआती इलाज के दौरान इटॉप्साइड, थायोगुएनिन या जेमटुजुमाब ओजोगैमिकिन भी दिया जा सकता है।

कन्सॉलिडेशन (दृढ़ीकरण)/ इन्टेंसीफ़िकेशन (तीव्रीकरण)/ पोस्ट-इंडक्शन

इस चरण का लक्ष्य उन सभी शेष बची कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना है जो आगे विकसित होना शुरू हो सकती हैं और खून के कैंसर के रोग के वापस आने का कारण बन सकती हैं। कैंसर केंद्र ऐसी जांचें कर सकते हैं जो 1,000 सामान्य कोशिकाओं में से एक एएमएल कोशिका का पता लगा सकते हैं। जिन बच्चों में इंडक्शन चरण को पूरा करने के बाद 1,000 में एक से अधिक कोशिकाएं होती हैं, उनमें रोग के वापस आने का सबसे अधिक खतरा होता है।

यह कन्सॉलिडेशन चरण रोगी के कैंसर-मुक्त होने के बाद शुरू होता है। इसमें कीमोथेरेपी के 2-4 चक्र शामिल होते हैं और यह 4 से 6 महीने तक चलता है। इस तरह की चिकित्सा में नॉन-क्रॉस-प्रतिरोधी दवाओं और साधारणतः उच्च-खुराक साइट्राबाइन के समावेशन के साथ-साथ इंडक्शन में उपयोग की जाने वाली कुछ दवाएं भी शामिल होती हैं।

हेमाटोपोईएटिक कोशिका प्रत्यारोपण 

हेमाटोपोईएटिक कोशिका प्रत्यारोपण (जिसे बोन मैरो ट्रांसप्लांट या स्टेम सेल ट्रांस्पलांट के रूप में भी जाना जाता है) की सलाह उन बच्चों के लिए दी जा सकती है जिनमें रोग के वापस आने का खतरा अधिक है या जिनके एएमएल पर इलाज का असर नहीं हो रहा है। चिकित्सक यह तय करने के लिए कि रोगी को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है या नहीं, कभी-कभी यह देखते हैं कि इंडक्शन कीमोथेरेपी ने रोगी पर कितनी अच्छी तरह काम किया है।

एएमएल रोगियों में एलोजेनिक प्रत्यारोपण किया जा सकता है।

एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट में, बच्चों को एक स्वस्थ डोनर से रक्त कोशिका-उत्पादन करने वाली कोशिकाएं दी जा सकती हैं। प्रत्यारोपण का पात्र होने के लिए रोगियों के पास एक उपयुक्त डोनर होना आवश्यक है। डोनर कोशिकाओं को प्राप्त करने से पहले, रोगी में कीमोथेरेपी के द्वारा और कई बार रेडिएशन के द्वारा उनकी बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) में मौजूद रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर दिया जाता है। रोगी को निषेचन प्रक्रिया के माध्यम से रक्त और मैरो कोशिकाएं दी जाती हैं। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो शरीर में ये नई डोनर कोशिकाएं आगे विकसित होंगी और रोगी की रक्त और मैरो कोशिकाओं की जगह ले लेंगी। परिणामस्वरूप, रोगी की बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) को स्वस्थ रक्त कोशिकाएं बनाना शुरू कर देना चाहिए।

एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया पूर्वानुमान

बचपन में होने वाले एएमएल के लिए पांच साल की जीवित रहने की दर लगभग 70 प्रतिशत है।

एएमएल से पीड़ित लगभग 90 प्रतिशत बच्चों में आरंभिक इलाज के बाद उनके खून में कोई कैंसर कोशिका नहीं होती। एएमएल से पीड़ित लगभग 30 प्रतिशत बच्चों में रोग वापस आ जाता है या उनमें ऐसी बीमारी हो जाती है जो इलाज के प्रति प्रतिरोधक होती है (जिस पर प्रभाव न पड़े)।

एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया के देरी से दिखाई देने वाले प्रभाव

कुछ एएलएल रोगियों पर देर से प्रभाव पड़ सकता है। देरी से दिखाई देने वाला प्रभाव एक स्वास्थ्य-संबंधी समस्या है जो इलाज समाप्त होने के कई महीनों या वर्षों बाद दिखाई देता है।

कैंसर इलाज के बाद, उनकी उपचार केंद्र देखभाल टीम और/या समुदाय के प्राथमिक देखभाल चिकित्सक को, कैंसर रोगियों की निगरानी रखनी चाहिए। देर से होने वाले प्रभावों का अक्सर इलाज किया जा सकता है या कुछ स्थितियों में, रोका जा सकता है।

विभिन्न इलाज के अलग-अलग देर के प्रभाव हो सकते हैं। सभी रोगियों पर देर से प्रभाव नहीं पड़ेगा। जिन रोगियों का एक ही इलाज हुआ है, उनपर भी अलग-अलग देर से प्रभाव पड़ सकते हैं।

एएमएल रोगियों के लिए खतरा हो सकता है:

  • एएमएल का दुबारा होना
  • दूसरे कैंसर जैसे त्वचा, ब्रेन कैंसर, हड्डी, स्तन, मुलायम ऊत्तक और थायराइड।
  • हृदय संबंधी समस्याएं
  • जिगर संबंधी समस्याएं
  • गर्भधारण संबंधी समस्याएं
  • ज्ञान-संबंधी समस्याएं

हेमेटोपोएटिक सेल प्रत्यारोपण से गुजरने वाले रोगियों को, देर से होने वाले कुछ के प्रभाव से जोखिम हो सकता है।

क्रॉनिक एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया के वर्तमान अनुसंधान का मुख्य प्रयास

एएमएल के इलाज के लिए शोधकर्ता नई दवाओं का परीक्षण कर रहे हैं। इनमें शामिल है:

  • सेलिनेक्सोर
  • वेनेटोक्लाक्स
  • फ्लोटेजुमैब
  • विक्स्सिओस


समीक्षा की गई: जून 2020