आपका स्वागत है

Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

और अधिक जानें

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम (एलएफएस)

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम क्या है?

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम (एलएफएस) एक विरल स्थिति है, प्रभावित व्यक्ति में उसके जीवनकाल के दौरान एक या एक से अधिक किस्म के कैंसर विकसित होने की संभावना होती है। आमतौर पर यह परिवार के सदस्य से वंशानुगत रूप से प्राप्त होती है।

एलएफएस से जुड़े सबसे आम कैंसर निम्नलिखित हैं:

सामान्यत: कम ही होता है कि ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले लोगों में अन्य प्रकार के कैंसर विकसित हों, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • मेलेनोमा
  • थायराइड कैंसर
  • फेफड़े का एडिनोकार्सिनोमा
  • पाचन तंत्रीय (भोजन-नली, पेट, पाचक-ग्रंथि या आंत) कैंसर
  • मूत्रतंत्रीय (गुर्दे, मूत्राशय) कैंसर
  • प्रजनन प्रणाली (गर्भाशय, अंडाशय, प्रोस्टेट, जनन-ग्रंथि) कैंसर

एलएफएस की पहचान सबसे पहले 1969 में फ़्रेडरिक ली, एमडी, और डॉ. जोसेफ़ फ़्रॉमेनी, जूनियर, एमडी, द्वारा राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में बाल-रोग और पारिवारिक कैंसर (वो कैंसर जो परिवारों में अनुवंशिक रूप से चलते हैं) का अध्ययन करते समय की गई थी।

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले लोगों के लिए कैंसर जोखिम क्या है?

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले बच्चों को प्रभावित कर सकने वाले विभिन्न प्रकार के कैंसरों के कारण, यह पूर्वानुमान लगाना मुश्किल होता है कि रोगी में कौन से प्रकार के कैंसर विकसित होंगे। यह पता लगाना भी मुश्किल होता है कि ये कैंसर कब होंगे।

  • 30 वर्ष की आयु तक के लोगों में, यह अनुमान लगाया गया है कि ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले सभी लोगों में से आधे (50%) लोगों को किसी प्रकार का कैंसर होगा ही।
  • 60 वर्ष की आयु तक, ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले लोगों में से लगभग 80%–90% लोगों में कैंसर होने की संभावना होती है।
  • ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले लोगों में एकाधिक कैंसर होने की अधिक संभावना होती है।

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम किन कारणों से होता है?

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम ज़्यादातर टीपी53 नामक वंशाणु में होने वाले परिवर्तनों के कारण होता है। एलएफएस से पीड़ित लगभग 70% परिवारों में टीपी53 वंशाणु में उत्परिवर्तन होगा। उत्परिवर्तन से वंशाणु की ठीक तरह से कार्य करने की क्षमता समाप्त हो जाती है। टीपी53 वंशाणु के प्रमुख कार्यों में से एक कार्य है, कैंसरों को बनने से रोकना।

ज़रूरी नहीं है कि टीपी53 वंशाणु उत्परिवर्तन वाले सभी व्यक्तियों को कैंसर हो। लेकिन आम लोगों की तुलना में इनमें कैंसर होने का काफी अधिक जोखिम होता है।

टीपी53 उत्परिवर्तन

सामान्यत:, कोशिकाओं में टीपी53 की 2 कार्यशील प्रतिकृतियां होती हैं। जिनमें से व्यक्ति को एक अपनी माता से और एक अपने पिता से वंशानुगत रूप से प्राप्त होती है। ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले लोगों की कोशिकाओं में टीपी53 की 1 कार्यशील प्रतिकृति होती है और एक प्रतिकृति बदल जाती है, या उत्परिवर्तित हो जाती है।

जब कोशिका में टीपी53 की शेष बची कार्यशील प्रतिकृति क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो उससे कैंसर हो सकता है।

एलएफएस से पीड़ित अधिकांश बच्चों को यह सिंड्रोम इस रोग से पीड़ित अपने माता-पिता से वंशानुगत रूप से प्राप्त होता है। लेकिन एलएफएस से पीड़ित कुछ बच्चों में नया (डी नोवो) टीपी53 उत्परिवर्तन हो सकता है जो उन्हें अपने माता-पिता से नहीं मिलता। ऐसे मामलों में, टीपी53 उत्परिवर्तन या तो बच्चे को बनाने वाले अंडे में या शुक्राणु कोशिका में उत्पन्न होता है या गर्भावस्था के दौरान बच्चे की किसी कोशिका में उत्पन्न होता है। ये बच्चे अपने परिवारों के वे पहले बच्चे होते हैं जिन्हें एलएफएस हुआ होता है।

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम रोग की पहचान कैसे की जाती है?

किसी व्यक्ति में ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम होने की शंका उसका चिकित्सकीय इतिहास या उनके परिवार के चिकित्सकीय इतिहास को देखने के बाद हो सकती है। इतिहास प्राप्त करने के लिए, चिकित्सक या आनुवंशिक सलाहकार व्यक्ति के स्वास्थ्य के बारे में या परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य के बारे में प्रश्न पूछेंगे।

आनुवंशिक सलाहकार या चिकित्सक यह रिकॉर्ड करेगा कि परिवार के कौन से सदस्य को कैंसर हुआ है, साथ ही ये किस प्रकार के कैंसर हैं और ये कैंसर किस आयु में हुए हैं। इस जानकारी से, आनुवंशिक सलाहकार या चिकित्सक एक वंश-वृक्ष बनाएगा और निम्नलिखित का पता लगाने के लिए इसका निरीक्षण करेगा कि क्या:

  • इसमें सामान्य से अधिक कैंसर हैं।
  • कैंसर अपेक्षित आयु से पहले हुए हैं।
  • कैंसर के प्रकार ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम से जुड़े हैं।

यदि एलएफएस होने की शंका है, तो रोगी को खून का नमूना देने और उसे जाँच के लिए भेजना चुन सकते हैं। जाँच करवाना हमेशा वैकल्पिक होता है। इसमें कोशिकाओं में से डीएनए को अलग किया जाएगा। संभावित त्रुटियों (जिन्हें उत्परिवर्तन भी कहा जाता है) के लिए टीपी53 वंशाणु की जाँच की जाएगी। यदि टीपी53 उत्परिवर्तन पाया जाता है, तो आनुवंशिक सलाहकार परिवार के साथ काम करेगा और मालूम करेगा कि क्या परिवार के अन्य सदस्यों की जाँच करने पर विचार करना चाहिए या नहीं।

एलएफएस रोग की पहचान करने के लिए सामान्य मापदंड क्या है?

क्लासिक एलएफएस रोग की पहचान तब की जाती है जब व्यक्ति निम्नलिखित सभी मापदंड पूरे करता है:

  • 45 वर्ष की आयु से पहले सारकोमा रोग की पहचान होना
  • 45 वर्ष की आयु से पहले किसी भी कैंसर से पीड़ित पहले दर्जे का कोई रिश्तेदार (माता-पिता, भाई या बहन या बच्चा) होना
  • 45 वर्ष की आयु से पहले किसी भी कैंसर से या किसी भी आयु में सारकोमा से पीड़ित पहले दर्जे का या दूसरे दर्जे का कोई रिश्तेदार (दादा-दादी, चाची/चाचा, भतीजी/भतीजा, या पोता-पोती) होना

इस क्लासिक मापदंड से परे प्रभावित परिवारों की पहचान करने के लिए प्रस्तावित किया गया एक और मापदंड समूह है जिसे ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम बीमारी के पहचान करने के लिए कॉम्प्रेट क्राइटेरिया कहा जाता है। निजी या पारिवारिक इतिहास वाले किसी भी ऐसे व्यक्ति के लिए जो इन 3 में से किसी 1 मापदंड को पूरा करता है, उसके लिए एलएफएस रोग की पहचान करने और टीपी53 वंशाणु उत्परिवर्तन की जाँच करने पर विचार किया जाता है:

  • स्तन कैंसर को छोड़कर, 46 वर्ष की आयु से पहले एलएफएस से संबद्धित कोई ट्यूमर होना या परिवार में एलएफएस-संबंधित ट्यूमर से पीड़ित कम से कम 1 पहले दर्जे या दूसरे दर्जे का रिश्तेदार होना। यदि किसी को स्तन कैंसर है, तो यह 56 वर्ष की आयु से पहले या कई ट्यूमर के साथ हुआ है।
  • व्यक्ति, एकाधिक स्तन ट्यूमर को छोड़कर, एकाधिक ट्यूमर से पीड़ित है जिनमें से 2 ट्यूमर एलएफएस ट्यूमर स्पेक्ट्रम से संबंधित हैं और कम से कम 1 ट्यूमर 46 वर्ष की आयु से पहले हुआ है
  • वह व्यक्ति जिसमें, पारिवारिक इतिहास पर ध्यान दिए बिना, एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर या कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर रोग की पहचान हुई है

क्या ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम का इलाज हो सकता है?

वर्तमान में, एलएफएस से जुड़े टीपी53 उत्परिवर्तन को ठीक करने का कोई तरीका नहीं है। सिंड्रोम के कारण होने वाले कैंसरों का आमतौर पर इलाज हो सकता है। विशेष रूप से यह सलाह दी जाती है कि यदि संभव हो तो रेडिएशन लेने से बचना चाहिए।

क्या ऐसी चीज़ें उपलब्ध हैं जिन्हें ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले लोग कैंसर से बचने के लिए कर सकते हैं?

ली-फ़्रॉमेनी वाले लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित रूप से अपनी शारीरिक जाँच और स्क्रीनिंग करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

स्वस्थ जीवनशैली में निम्नलिखित आदतें शामिल हैं:

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले लोगों को संकेतों और लक्षणों पर नज़र रखनी चाहिए जो कैंसर होने का संकेत दे सकते हैं और उनके बारे में तुरंत अपने चिकित्सक को सूचित करना चाहिए। इन संकेतों और लक्षणों मे निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अनपेक्षित रूप से वजन घटना
  • भूख न लगना
  • पीड़ा, दर्द, गाँठें या सूजन जिनका कारण नहीं बताया जा सकता
  • सिरदर्द होना या दृष्टि अथवा तंत्रिका क्रिया में परिवर्तन होना जो जल्दी से नहीं जाते
  • नए तिल होना या पहले से मौजूद तिलों में परिवर्तन होना

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले बच्चों के माता-पिता को बीमारी के संकेतों और लक्षणों पर नज़र रखनी चाहिए और कुछ भी असामान्य दिखने पर चिकित्सीय मदद लेनी चाहिए।

जिन लोगों को एलएफएस होने का संदेह है उन्हें इस बारे में अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। चूंकि एलएफएस बहुत कम ही पाया जाता है, तो हो सकता है कि कुछ चिकित्सकों को इसके बारे में जानकारी न हो।

क्या एलएफएस से पीड़ित लोगों की कैंसर के लिए जाँच परीक्षण या स्क्रीनिंग होनी चाहिए?

यह सलाह दी जाती है कि ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले बच्चों और वयस्कों पर संभावित कैंसर के लिए बारीकी से नज़र रखी जाए। इसका उद्देश्य शीघ्रातिशीघ्र एवं उपचार की सबसे अधिक योग्य स्तर में कैंसर का पता लगाना है। यह सलाह दी जाती है कि कैंसर स्क्रीनिंग या जाँच परीक्षणों के बारे में ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम से अवगत चिकित्सक से ही चर्चा की जाए।

सुझाई गई कैंसर स्क्रीनिंग या जाँच परीक्षण:

बच्चे (18 वर्ष की आयु तक)

  • प्रत्येक 3-4 महीने में पूरी शारीरिक जाँच
  • किसी भी चिकित्सा संबंधी समस्याओं के लिए प्राथमिक देखभाल चिकित्सक के साथ शीघ्र आकलन
  • एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर स्क्रीनिंग— प्रत्येक 3-4 महीने में पेट और श्रोणि का अल्ट्रासाउंड
    • असंतोषजनक अल्ट्रासाउंड की स्थिति में, प्रत्येक 3-4 महीने में खून की जाँच
  • मस्तिष्क के कैंसर की स्क्रीनिंग — मस्तिष्क का वार्षिक रूप से एमआरआई (पहला एमआरआई कंट्रास्ट के साथ – उसके बाद यदि पिछले एमआरआई में कोई साधारण असामान्यता है या कोई भी नई असामान्यता नहीं है तो बिना कंट्रास्ट के एमआरआई)
  • नरम ऊतक और हड्डी का सारकोमा — वार्षिक रूप से पूरे शरीर का एमआरआई

वयस्क

  • प्रत्येक 6 महीने में पूरी शारीरिक जाँच
  • किसी भी चिकित्सा संबंधी समस्याओं के लिए प्राथमिक देखभाल चिकित्सक के साथ शीघ्र आकलन
  • स्तन कैंसर
    • स्तन जागरूकता (18 वर्ष की आयु से शुरू) – परिवर्तनों के बारे में स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को सूचित करें।
    • वर्ष में दो बार नैदानिक (स्वास्थ्य सेवा प्रदाता द्वारा) स्तन जाँच (20 वर्ष की आयु से शुरू)
    • वार्षिक रूप से स्तन की एमआरआई स्क्रीनिंग (आयु 20-75) – आदर्श स्थिति में, वार्षिक रूप से पूरे शरीर के एमआरआई के साथ बारी-बारी से (प्रत्येक 6 महीने में एक स्कैन)। एमआरआई में रेडिएशन शामिल नहीं है।
  • मस्तिष्क का कैंसर – 18 वर्ष की आयु से शुरू करते हुए, वार्षिक रूप से मस्तिष्क का एमआरआई
  • नरम ऊतक और हड्डी का सारकोमा – 18 वर्ष की आयु से शुरू करते हुए, वार्षिक रूप से पूरे शरीर का एमआरआई तथा पेट और श्रोणि का अल्ट्रासाउंड
  • जठरांत्रीय कैंसर – 25 वर्ष की आयु से आरंभ करते हुए, प्रत्येक 2-5 वर्ष में अपर ऐंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी
  • मेलेनोमा– 18 वर्ष की आयु से आरंभ करते हुए, वार्षिक रूप से त्वचा की जाँच

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम कितना आम है?

एलएफएस की आवृत्ति का अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण है।

अमेरिका में, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन के आनुवंशिकी होम संदर्भ के अनुसार, ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम रोगियों की एक रजिस्ट्री दर्शाती है कि 64 परिवारों से लगभग 400 लोगों में यह विकार है।

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम एसोसिएशन के अनुसार, दुनियाभर में एलएफएस से पीड़ित 1,000 से अधिक पीढ़ीगत परिवारों के होने की संभावना है।

यदि मुझे ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम है, तो क्या मेरे बच्चे में भी यह होगा?

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम वाले लोगों में, अपने बच्चों में इस विकार को देने की, 2 में 1 की या 50% संभावना होती है।

क्या मुझे मेरी या मेरे बच्चे की जाँच करवाने के बारे में सोचना चाहिए?

जाँच करवाने का निर्णय एक निजी विकल्प है। टीपी53 आनुवंशिक जाँच करवाने का विचार रखने वाले लोगों को निर्णय लेने से पहले ज़रूर से पेशेवर आनुवंशिक सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

एलएफएस से पीड़ित वाले परिवार में किसी बच्चे की जाँच करना एक जटिल स्थिति है चूंकि यह निर्णय, देखभाल टीम की सहायता से बच्चों के परिवार द्वारा लिया जाना चाहिए। परामर्श से भावनात्मक प्रभावों से उबरने में भी मदद मिल सकती है जो तब उत्पन्न होती हैं जब लोगों को पता चलता है कि वे इस बीमारी के वाहक हैं।

यदि जाँच के कीमत से जुड़ी कोई समस्या है, तो बहुत सी आनुवंशिक जाँच कंपनियां हैं जो इन आनुवंशिक जाँच लागतों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर सकती हैं। आनुवंशिक सलाहकार रोगियों को इन सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं।

मैं ली-फ़्रॉमेनी से संबंधित देखभाल के लिए कैसे भुगतान करूं?

चूंकि एलएफएस बहुत ही कम पाया जाता है, इसलिए स्वास्थ्य सेवा उद्योग में, कुछ चिकित्सकों सहित, बहुत से लोग रोगियों के लिए स्वास्थ्य सेवा सुझावों से परिचित नहीं हैं। इसका अर्थ यह हो सकता है कि एलएफएस से जुड़ी कुछ लागतें बीमा कंपनियों द्वारा कवर नहीं की जाती हैं।

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम एसोसिएशन के पास संसाधनों की एक सूची है जो परिवारों के लिए मददगार हो सकती है।

स्वास्थ्य देखभाल टीम से पूछे जाने वाले प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न पूछने का ध्यान रखें:

  • मुझे कैंसर होने का कितना जोखिम है?
  • क्या मुझे आनुवंशिक जाँच के बारे में सोचना चाहिए?
  • मैं आनुवंशिक सलाहकार का पता कैसे लगा सकता/सकती हूँ?
  • मैं अपने कैंसर जोखिम को कम करने के लिए क्या कर सकता/सकती हूँ?
  • कैंसर स्क्रीनिंग और रोकथाम के लिए मेरे विकल्प क्या हैं?
  • क्या मेरा पारिवारिक इतिहास मेरे कैंसर होने के जोखिम को बढ़ाता है?
  • क्या मेरे परिवार के सदस्यों को एलएफएस हो सकता है?
  • क्या आप मुझे किसी आनुवंशिक सलाहकार और अन्य आनुवंशिकी विशेषज्ञों से मिलने के लिए आनुवंशिक कैंसर क्लिनिक में भेजेंगे।
  • यदि मेरे बच्चे में एलएफएस रोग की पहचान हो जाती है तो क्या उसकी कैंसर देखभाल में परिवर्तन होना चाहिए?

अन्य संसाधन

अनुशंसित स्क्रीनिंग का समर्थन करने वाले शैक्षणिक पत्र/ अध्ययन:

एनसीआई ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम अध्ययन


समीक्षा की गई: नवंबर, 2018