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Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

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बायोप्सी (टुकड़ा निकालना)

कैंसर के इलाज में सबसे पहले कैंसर रोग की पहचान करना पड़ती है। कैंसर रोग की पहचान करने के लिए अक्सर बायोप्सी की जाती है। बायोप्सी एक सर्जिकल प्रक्रिया होती है जिसमें ट्यूमर से ऊतक का एक छोटा टुकड़ा निकाला जाता है। एक रोगविज्ञानी माइक्रोस्कोप की सहायता से ऊतक देखता है। ऊतक की शरीरकोष विज्ञान से या कोशिका कैसी दिखाई देती है, इससे हमें कैंसर के विशिष्ट प्रकार को पहचानने संबंधी जानकारी मिलती है।

एक रोगविज्ञानी बचपन में होने वाला कैंसर के विशिष्ट प्रकार की पहचान करने के लिए ऊतक शरीरकोष विज्ञान की जांच करने हेतु एक माइक्रोस्कोप पर काम करता है।

अधिकांश रोगी अपने रोगविज्ञानी से नहीं मिलते, लेकिन ये चिकित्सक के लिए रोग की पहचान और इलाज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शरीरकोष विज्ञान स्लाईड में बाल चिकित्सा एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया के रोगी का बोन मैरो एक माइक्रोस्कोप में दिखता है।

यह शरीरकोष विज्ञान स्लाइड एक एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया के रोगी का बोन मैरो एक माइक्रोस्कोप में दिखाती है।

बायोप्सी करने के लिए उपयोग की गई विधि ट्यूमर की स्थिति, ऊतक की आवश्यक मात्रा और नियोजित अन्य प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है। बायोप्सी के प्रकार में टीके से कैंसर का टुकड़ा निकालने वाली बायोप्सी और सर्जिकल बायोप्सी शामिल है।

  • टीके से कैंसर का टुकड़ा निकालने वाली बायोप्सी – त्वचा के ज़रिए या सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान सुई से बायोप्सी की जा सकती है। ट्यूमर के स्थान पर निर्भर करते हुए, इमेजिंग स्कैन से चिकित्सक ट्यूमर को और सुई की स्थिति को देख सकते हैं। कुछ टीके से होने वाली बायोप्सी में, बायोप्सी होने वाली जगह को सुन्न करने के लिए केवल स्थानीय एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) का ही उपयोग होता है।
  • सर्जिकल बायोप्सी – बायोप्सी करने के लिए चिकित्सक को त्वचा को थोड़ा सा काटना पड़ सकता है। यह अक्सर ट्यूमर वाली जगह पर होता है। सर्जन ट्यूमर का पता लगाने में मदद के लिए एमआरआई, सीटी या अन्य स्कैन का उपयोग करेंगे। कभी-कभी, शरीर के अंदर देखने के लिए एक छोटा सा वीडियो कैमरा भी उपयोग किया जाता है। कुछ बायोप्सी में सिर्फ़ छोटा-सा चीरा लगाने की आवश्यकता होती है। अन्य बायोप्सी में बड़े चीरे लगाने पड़ते हैं। कुछ विशेष स्थितियों में, चिकित्सक बायोप्सी के समय ही ट्यूमर को निकाल सकते हैं। स्थानीय लसिका ग्रंथि और अन्य ऊतक नमूनों का परीक्षण यह देखने के लिए किया जाता है कि क्या कैंसर फैल चुका है।

माइक्रोस्कोप के नीचे रोगविज्ञानी कोशिकाओं को देखता है। अगर कैंसर की कोशिकाएं होती हैं, तो ट्यूमर असाध्य है। अगर कोई कैंसर की कोशिकाएं नहीं हैं, तो ट्यूमर कैंसर नहीं है। कोशिकाएं कैसी दिखती हैं, उनके कितनी तेज़ी से बढ़ने की संभावना है और कोशिकाएं कितनी फैल चुकी हैं, इस आधार पर ट्यूमर का मूल्यांकन होता है।

  • स्तर का मतलब है कि शरीर में कैंसर कहां है, जिसमें उसके शुरू होने का स्थान और वह कहां तक फैला है वह स्थान शामिल है।
  • श्रेणी इसका वर्णन करता है कि कोशिकाएं, सामान्य कोशिका से किस तरह अलग दिखती हैं, कोशिकाएं कितनी तेज़ी से बढ़ती हैं और उनके फैलने की संभावना कितनी है।

इलाज की योजना बनाने के लिए चिकित्सक बायोप्सी से प्राप्त जानकारी का उपयोग करेंगे। इसके लिए कई कारकों पर विचार किया जाता है जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • कैंसर का प्रकार
  • ट्यूमर का आकार
  • क्या कैंसर की कोशिकाएं लसिका ग्रंथि या शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल गई हैं

कैंसर रोग की पहचान और इलाज के बारे में और जानें।

एनेस्थीसिया देकर किया जाने वाला परीक्षण (ईयूए)

कुछ मामलों में, चिकित्सक सामान्य एनेस्थीसिया के अंतर्गत रोगी का परीक्षण कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को कहा जाता है: एनेस्थीसिया देकर किया जाने वाला परीक्षण। चूंकि रोगियों को एनेस्थीसिया देने के दौरान उन पर नज़र रखी जानी चाहिए, इसलिए ईयूए को एक एनेस्थीसियोलॉजिस्ट (बेहोश करने वाला डॉक्टर) की देखरेख में ऑपरेटिंग कमरे के अंदर किया जाता है। बचपन में होने वाले कैंसर में, इस प्रक्रिया का आमतौर पर उपयोग रेटिनोब्लास्टोमा, जो कि आंख का कैंसर होता है, उसकी पहचान करने के लिए किया जाता है। कभी-कभी, ईयूए को अन्य परीक्षणों में जैसे कि पेल्विक परीक्षण में उपयोग किया जाता है। जितना हो सकता है, चिकित्सक एनेस्थीसिया का उपयोग कम करने का प्रयास करते हैं। हालांकि, कुछ परीक्षणों में बच्चे को पूरी तरह से सुन्न करना पड़ता है। परीक्षण का प्रकार, बच्चे की आयु और/या संभावित शारीरिक या भावनात्मक परेशानी के कारण बेहोशी की दवा का उपयोग ज़रूरी हो जाता है।


समीक्षा की गई: जून 2018