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Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

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कैंसर से ग्रस्त बच्चों का एक्स-रे

एक्स-रे एक ऐसी जांच है जिसमें शरीर के अंदर की संरचनाओं की एक तस्वीर बनाने के लिए रेडिएशन की एक छोटी मात्रा का इस्तेमाल किया जाता है।

एक्स-रे द्वारा बनाई गई तस्वीरें शरीर के अलग-अलग हिस्सों को काले और सफेद रंग के विभिन्न रंगों  में दिखाती हैं। ये रंग इस बात पर निर्भर करते हैं कि कोई खास  ऊतक (टिशू) कितना विकिरण (रेडिएशन) सोखता करता है। एक्स-रे में  हड्डियां सफेद दिखती हैं क्युकि हड्डियों में कैल्शियम होने से वे एक्स-रे को सबसे ज़्यादा सोखती हैं। वसा और अन्य नरम ऊतक (टिशू) कम सोखते हैं, इसलिए वे स्लेटी दिखाई देते हैं. हवा सबसे कम सोखती है, इसलिए फेफड़े काले दिखाई देते हैं.

जिस बच्चे को कैंसर है उसे, एक्स-रे टेक्नोलॉजिस्ट एक्स-रे की जगह पर खड़ा कर रहा है और उसकी मां सीसेवाला एप्रन पहने पास ही खड़ी है.

क्या एक्स-रे सुरक्षित हैं?

लोग सामान्य वातावरण में हर दिन रेडिएशन के संपर्क में आते हैं. किसी भी एक्स-रे के दौरान इस्तेमाल की गई रेडिएशन की मात्रा बहुत कम होती है. एक्स-रे के चिकित्सीय लाभ रेडिएशन की थोड़ी मात्रा के खतरे की तुलना में बहुत ज़्यादा हैं. सीसे के कवच  (जैसे एप्रन या थायरॉयड शील्ड) का इस्तेमाल शरीर के कुछ हिस्सों की सुरक्षा के लिए किया जा सकता है.

बचपन के कैंसर की देखभाल में एक्स-रे तस्वीरों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

डॉक्टर जिन्हें रेडियोलॉजिस्ट कहा जाता है, वे एक्स-रे देखते हैं और उनका विश्लेषण करते हैं. ये खास तौर पर, रोग की पहचान करने वाली इमेजिंग जांच का विश्लेषण करने के लिए प्रशिक्षित होते हैं.

रोग की पहचान

एक्स-रे कैंसर, संक्रमण, टूटी हड्डियां और असामान्यताएं दिखा सकते हैं, इसलिए प्रारंभिक कैंसर की तस्वीर पाने के लिए और उसका पता लगाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है. उपचार से फ़ायदा हो रहा है या नहीं, यह पता लगाने के लिए डॉक्टर इन तस्वीरों को आधार बना सकते हैं.

उपचार 

उपचार के दौरान, कैंसर के उपचार से बच्चे को फ़ायदा हो रहा है या नहीं और उपचार के दौरान होने वाली समस्याओं की पहचान करने के लिए एक्स-रे का इस्तेमाल किया जा सकता है.

स्क्रीन पर कृत्रिम अंग के साथ एक्स-रे की समीक्षा की जा रही है

उपचार पूरा होने के बाद

रोगियों का उपचार पूरा होने के बाद, उनका एक्स-रे हो सकता है ताकि यह जांच की जा सके कि कैंसर कम हो रहा है.

लंबे समय तक जीवित रहने के लिए

कैंसर से बचे लोगों में दूसरे तरह का कैंसर और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं होने का खतरा बना रहता है. इसलिए उनका नियमित नैदानिक इमेजिंग स्कैन होते रहना चाहिए, जिसमें उनके स्वास्थ्य की निगरानी के लिए एक्स-रे भी किया जा सकता है. नियमित स्कैन की मदद से समस्याओं का पहले ही पता लगाया जा सकता है जब वे  उपचार के ज़्यादा योग्य हो.

जिस बच्चे को कैंसर है वह मेज पर लेट जाता है और जब बच्चो का स्पेशलिस्ट पेट के एक्स-रे के लिए एक आईपैड शेयर करता है तब एक्स-रे टेक्नोलॉजिस्ट मशीन को सही जगह पर लाता है.

बचपन  में होने वाले कैंसर का पता लगाने, उसका इलाज करने और इलाज के बाद फॉलो-अप के लिए एक्स-रे का इस्तेमाल किया जाता है.

एक्स-रे जांच के दौरान क्या होता है?

जांच के दौरान, एक एक्स-रे मशीन शरीर में रेडिएशन की किरण भेजती है और कंप्यूटर या खास फिल्म पर एक तस्वीर आ जाती है. मशीन के प्रकार के हिसाब से रोगी को एक मेज पर खड़े होने, बैठने या लेटने के लिए कहा जाएगा. रोगी की साफ़ तस्वीर लेने के लिए एक्स-रे टेक्नोलॉजिस्ट उसे सही जगह पर करने के बाद ही तस्वीर लेगा. रोगी को बहुत स्थिर रहना चाहिए और अपनी सांस रोककर रखनी चाहिए क्योंकि हिलने से एक्स-रे धुंधला हो सकता है. दूसरा एक्स-रे लेते  टेक्नोलॉजिस्ट समय जगह बदलने में रोगी की मदद कर सकता है.

जिस बच्चे को कैंसर है उसे, एक्स-रे टेक्नोलॉजिस्ट एक्स-रे की जगह पर खड़ा कर रहा है और उसकी मां सीसेवाला एप्रन पहने पास ही खड़ी है.

बचपन में होने वाले कैंसर का पता लगाने, उसका इलाज करने और इलाज के बाद फॉलो-अप के लिए एक्स-रे का इस्तेमाल किया जाता है.

आप एक्स-रे लेने की तैयारी कैसे करते हैं?

एक्स-रे  से जांच में दर्द नहीं होता है, लेकिन साफ़ तस्वीर के लिए रोगी को एक पल के लिए स्थिर होना पड़ता है. जांच के बीच न हिलने के महत्व के बारे में अपने बच्चे से बात करें. माता-पिता को कमरे में रहने की अनुमति दी जा सकती है ताकि रोगी की सहायता की हो सके और उसे आराम मिले. अगर बच्चा आरामदेह नहीं  है, तो माता-पिता को टेक्नोलॉजिस्ट को बताना चाहिए.

यह महत्वपूर्ण है कि एक्स-रे के कमरे में रोगी या माता में से अगर कोई गर्भवती है, तो वह स्टाफ़ को बताना चाहिए , क्योंकि एक्स-रे से अजन्मे भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है.

रोगी को गहने, घड़ियां या चश्मा निकालने के लिए कहा जा सकता है और अस्पताल का गाउन पहनने के लिए कहा जा सकता है.

कुछ एक्स-रे जांचों  में एक कंट्रास्ट पदार्थ – जैसे आयोडीन या बेरियम – को निगलने के लिए कहा जाता है या इंजेक्ट किया जाता है ताकि तस्वीरें ज्यादा  से ज्यादा विस्तृत हो. अगर आपके बच्चे को कभी एक्स-रे कंट्रास्ट से कोई  प्रतिक्रिया हुई है, तो कृपया टेक्नोलॉजिस्ट या अपनी चिकित्सीय देखभाल टीम के सदस्य को बताएं.


समीक्षा की गई: जून 2018