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बच्चों और किशोरों को होने वाला मेडुलोब्लास्टोमा

मेडुलोब्लास्टोमा क्या है?

मेडुलोब्लास्टोमा बच्चों में होने वाला सबसे आम कैंसर वाला मस्तिष्क का कैंसर है। मेडुलोब्लास्टोमा, सेरेबेलम में शुरू होता है जो मस्तिष्क के पीछे का एक भाग है।

मेडुलोब्लास्टोमा क्या है? मेडुलोब्लास्टोमा, सेरेबेलम का एक मस्तिष्क का कैंसर है। सेरेबेलम, मस्तिष्क के पोस्टेरियर फोसा नामक भाग में पाया जाता है।

मेडुलोब्लास्टोमा, सेरेबेलम का एक मस्तिष्क का कैंसर है। सेरेबेलम, मस्तिष्क के पोस्टेरियर फोसा नामक भाग में पाया जाता है।

अमेरिका में हर साल मेडुलोब्लास्टोमा, 500 बच्चों में पाया जाता हैं। बच्चों में होने वाले सभी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस) ट्यूमर में से 20% ट्यूमर यही होते हैं। मेडुलोब्लास्टोमा आमतौर पर 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों में अधिक पाया जाता है। यह ज़्यादातर 5 और 9 वर्ष से कम आयु के बच्चों में पाया जाता है। हालांकि, मेडुलोब्लास्टोमा बड़ी उम्र के किशोर बच्चों में अधिक और आमतौर पर वयस्कों में कम ही देखे जाता है।

मेडुलोब्लास्टोमा को ट्यूमर कोशिकाओं की आणविक विशेषताओं के आधार पर चार उपसमूहों में विभाजित किया जा सकता है:

  1. डब्लूएनटी उपप्रकार - "विन्ट" बोला जाता है
  2. एसएचएच उपप्रकार – जिसे सोनिक हेजहॉग (एसएचएच) मेडुलोब्लास्टोमा के रूप में भी जाना जाता है
  3. समूह 3 मेडुलोब्लास्टोमा
  4. समूह 4 मेडुलोब्लास्टोमा

विशिष्ट मेडुलोब्लास्टोमा उपसमूह पूर्वानुमान को प्रभावित करता है। चिकित्सक रोगियों को जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत करने के लिए उपसमूहों का उपयोग करते हैं। यह जानकारी चिकित्सकों को उचित इलाज योजना बनाने में मदद करती है।

मेडुलोब्लास्टोमा के इलाज में ट्यूमर को जितना संभव हो उतना निकालने के लिए सर्जरी शामिल है। सर्जरी के बाद शेष बची कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जाता है। सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी के साथ कीमोथेरेपी का भी उपयोग किया जाता है।

मेडुलोब्लास्टोमा तेज़ी से बढ़ने वाले ट्यूमर हैं और ये ट्यूमर अक्सर मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस के अन्य भागों में फैल जाते हैं। यदि बीमारी नहीं फैली है, तो बचपन में होने वाले मेडुलोब्लास्टोमा के लिए जीवित रहने की संपूर्ण दर 70-80% होती है। यदि बीमारी फैल गई है, तो जीवित रहने की औसत दर लगभग 60% है। हालांकि, आणविक उपसमूह सहित, विशिष्ट प्रकार का मेडुलोब्लास्टोमा ट्यूमर, इलाज और पूर्वानुमान को प्रभावित कर सकता है।

मेडुलोब्लास्टोमा को ट्यूमर कोशिकाओं की आणविक विशेषताओं के आधार पर चार उपसमूहों में विभाजित किया जा सकता है: डब्लूएनटी उपप्रकार ("विंट"), एसएचएच उपप्रकार (जिसे सोनिक हेजहॉग मेडुलोब्लास्टोमा भी कहा जाता है), समूह 3 और समूह 4।

मेडुलोब्लास्टोमा को ट्यूमर कोशिकाओं की आणविक विशेषताओं के आधार पर चार उपसमूहों में विभाजित किया जा सकता है: डब्लूएनटी उपप्रकार ("विंट") यह 10% मामलों में होता है, एसएचएच उपप्रकार (जिसे सोनिक हेजहॉग मेडुलोब्लास्टोमा भी कहा जाता है) यह 30% मामलों में होता है, समूह 3 यह 25% मामलों में होता है और समूह 4 यह 35% मामलों में होता है।

मेडुलोब्लास्टोमा के लक्षण

मेडुलोब्लास्टोमा के संकेत और लक्षण कई कारकों पर निर्भर करते हैं जिसमें ट्यूमर का आकार और स्थान तथा बच्चे की उम्र व विकास का स्तर शामिल हैं।

मेडुलोब्लास्टोमा के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सिरदर्द, जो अक्सर सुबह के समय अधिक होता है या उल्टी करने के बाद थोड़ा ठीक हो जाता है
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • थकान या गतिविधि स्तर में परिवर्तन
  • चक्कर आना
  • संतुलन बिगड़ना, बेडौल होना
  • लिखने में समस्याएं
  • दृष्टि-संबंधी परिवर्तन

यदि ट्यूमर रीढ़ के अंदर की नस तक फैल गया है, तो इसके लक्षणों में निम्न लक्षण शामिल हो सकते हैं:

  • पीठ का दर्द
  • चलने में समस्याएं
  • मूत्र-त्याग करने में समस्याएं या मल-त्याग क्रिया में परिवर्तन

मेडुलोब्लास्टोमा के लक्षण ट्यूमर के आकार और स्थान पर निर्भर करते हैं। मेडुलोब्लास्टोमा एक सेरेबेलम ट्यूमर है। सेरेबेलम मस्तिष्क के पीछे के निचले भाग में होता है, वह क्षेत्र जिसे पोस्टेरियर फोसा के नाम से जाना जाता है। सेरेबेलम की क्रियाओं में गति, संतुलन, मुद्रा और समन्वय का नियंत्रण शामिल है।

अधिकांश मेडुलोब्लास्टोमा, सेरेबेलम के मध्य में चौथे निलय (वेन्ट्रीकल) के पास होते हैं। ट्यूमर के बढ़ने के साथ, रीढ़ की हड्डी में पानी का सामान्य प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है। इसके कारण मस्तिष्क के अंदर पानी जमा होने लगता है जिसे हाइड्रोसिफ़लस के रूप में जाना जाता है। इस तरल से मस्तिष्क पर अधिक दवाब पड़ता है (इंट्राक्रेनियल दबाव)। मेडुलोब्लास्टोमा के बहुत से लक्षण हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी आ जाना) के कारण उत्पन्न होते हैं।

मेडुलोब्लास्टोमा के लिए जोखिम कारक

ट्यूमर कोशिकाओं के अंदर वंशाणु और क्रोमोसोम (गुणसूत्र) में कुछ परिवर्तन मेडुलोब्लास्टोमा के विकास से जुड़े हैं। आमतौर पर, यह ज्ञात नहीं है कि ये आनुवंशिक परिवर्तन क्यों होते हैं।

अधिकांश मेडुलोब्लास्टोमा 5 और 9 साल के बीच की उम्र वाले बच्चों में होते हैं। नवजात शिशुओं और वयस्कों में यह मुश्किल से ही पाया जाता है। मेडुलोब्लास्टोमा लड़कियों की तुलना में लड़कों में थोड़ा अधिक आम है।

कुछ बच्चों में, दुर्लभ वंशानुगत स्थितियों या आनुवंशिक विकार के कारण मस्तिष्क के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इन सिंड्रोम में गोर्लिन का सिंड्रोम, टर्कोट सिंड्रोम और ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम शामिल हैं।

मेडुलोब्लास्टोमा रोग की पहचान

चिकित्सक, मेडुलोब्लास्टोमा का कई तरह से आकलन करते हैं।

  • शारीरिक जांच और चिकित्सकीय इतिहास से चिकित्सकों को लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने में मदद मिलती है।
  • न्यूरोलॉजिकल परीक्षण में मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं के कार्यों का निरीक्षण किया जाता है। ये जांचें, स्मृति, देखने, सुनने, मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, समन्वय और प्रतिवर्ती क्रियाओं सहित मस्तिष्क के कार्यों के विभिन्न पहलुओं को मापती हैं।
  • इमेजिंग जांचों का उपयोग ट्यूमर की पहचान करने में मदद पाने के लिए किया जाता है। मस्तिष्क की मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) प्रमुख इमेजिंग तकनीक है जिसका उपयोग, मेडुलोब्लास्टोमा का आकलन करने के लिए किया जाता है। सर्जरी के बाद एक एमआरआई भी यह देखने के लिए किया जाता है कि कहीं कोई ट्यूमर बाकी तो नहीं रह गया है और रोग कहीं और तो नहीं फैला है।
  • सर्जरी के बाद रीढ़ की हड्डी के पानी (सीएसएफ) में कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने के लिए लंबर पंक्चर की प्रक्रिया की जा सकती है। करीब 1/3 भाग मेडुलोब्लास्टोमा, सीएसएफ के माध्यम से मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी के अन्य हिस्सों में फैल जाता है।
  • ट्यूमर से ऊतक की जांच मेडुलोब्लास्टोमा के पहचान के लिए की जाती है। सर्जरी में ट्यूमर निकाले जाने के बाद, एक रोगविज्ञानी (पैथोलॉजिस्ट) आकार और आकृति जैसी कोशिका विशेषताओं का पता लगाने के लिए उस ऊतक के नमूने को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर देखता है। यह जानकारी चिकित्सकों को मेडुलोब्लास्टोमा के प्रकार को पहचानने, जोखिम के आधार पर रोगियों को वर्गीकृत करने, और उचित इलाज की योजना बनाने में मदद कर सकती है।
सेरेबेलम में मेडुलोब्लास्टोमा दिखाने वाले चिह्नों के साथ एमआरआई स्कैन।

सेरेबेलम में मेडुलोब्लास्टोमा दिखाने वाले चिह्नों के साथ एमआरआई स्कैन।

सामने से देखते हुए एमआरआई में मेडुलोब्लास्टोमा। मेडुलोब्लास्टोमा बच्चों में होने वाला सबसे आम कैंसर वाला मस्तिष्क का कैंसर है।

सामने से देखते हुए एमआरआई में मेडुलोब्लास्टोमा। मेडुलोब्लास्टोमा बच्चों में होने वाला सबसे आम कैंसर वाला मस्तिष्क का कैंसर है।

मेडुलोब्लास्टोमा का वर्गीकरण और प्रकार

मेडुलोब्लास्टोमा को कुछ विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत या वर्णित किया जा सकता है जैसे कि शरीरकोष विज्ञान, आणविक विशेषताएं और कैंसर का फैलाव। शरीरकोष विज्ञान, ट्यूमर कोशिकाओं की आणविक विशेषता और स्तर का उपयोग, रोग के जोखिम और पूर्वानुमान के आधार पर मेडुलोब्लास्टोमा वाले रोगियों को वर्गीकृत करने के लिए किया जाता है। इससे चिकित्सकों को मेडुलोब्लास्टोमा जोखिम समूह के लिए इलाज योजनाएं बनाने में मदद मिलती है।

मेडुलोब्लास्टोमा शरीरकोष विज्ञान

मेडुलोब्लास्टोमा ट्यूमर को हिस्टोलॉजी (शरीरकोष विज्ञान) के अनुसार वर्गीकृत करने के लिए ट्यूमर कोशिकाओं के आकार और आकृति जैसे सूक्ष्म लक्षणों का उपयोग किया जाता है:

  • क्लासिक मेडुलोब्लास्टोमा छोटी, गोल कोशिकाओं से बना होता है। यह कोशिकाएं एक दूसरे से सटी होती हैं और इनके केंद्रक गहरे रंग के होते हैं।
  • डेस्मोप्लास्टिक/नॉड्यूलर मेडुलोब्लास्टोमा, घनिष्ठ रूप से एकसाथ जुड़ी हुई कोशिकाओं के साथ संयोजित ऊतक के घेरे से घिरे वृत्ताकार नॉड्यूल या ग्रंथिका के रूप में दिखाई देता है।
  • बहुत अधिक मात्रा में नॉड्यूल या ग्रंथिका वाले मेडुलोब्लास्टोमा (एमबीईएन) में ऊतक के अंदर अधिक नॉड्यूलर या ग्रंथिल क्षेत्र दिखाई देते हैं।
  • एनाप्लास्टिक मेडुलोब्लास्टोमा अनियमित आकृति वाली कोशिकाओं से बना होता है।
  • बड़ी कोशिका मेडुलोब्लास्टोमा में बड़े केंद्रक वाली ट्यूमर कोशिकाएं होती हैं।

एनाप्लास्टिक और बड़ी कोशिकाएं अक्सर एक साथ उत्पन्न होती हैं और वे बड़ी कोशिका एनाप्लास्टिक (एलसीए) ट्यूमर के रूप में समूहीकृत होती हैं।

मेडुलोब्लास्टोमा के आणविक उपप्रकार

ट्यूमर से आनुवांशिक और आणविक विशेषताओं के बारे में जानने के लिए ट्यूमर से ऊतक का परीक्षण भी किया जाता है। आणविक रूपरेखा के आधार पर, मेडुलोब्लास्टोमा को डब्लूएनटी, एसएचएच, समूह 3 या समूह 4 के रूप में समूहीकृत किया जाता है।

सेरेबेलम के अंदर मेडुलोब्लास्टोमा ट्यूमर का स्थान, मेडुलोब्लास्टोमा के आणविक प्रकार के बारे में भी संकेत प्रदान कर सकता है। विंट मेडुलोब्लास्टोमा ट्यूमर अक्सर सेरेबेलम की मध्यरेखा के पास होते हैं। एसएचएच मेडुलोब्लास्टोमा ट्यूमर अक्सर सेरेबेलम के पश्चवर्ती भाग में पाए जाते हैं।

मेडुलोब्लास्टोमा स्तर का पता लगाना

मेडुलोब्लास्टोमा को मेटास्टेसिस या कैंसर का फैलाव के अनुसार भी वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • M0: ट्यूमर, कैंसर को फैलाए बिना एक जगह या अंग तक सीमित रहता है।
  • M1: ट्यूमर कोशिकाएं रीढ़ की हड्डी के पानी (सीएसएफ) में पाई जाती हैं।
  • M2: इसमें मस्तिष्क के अंदर (इंट्राक्रेनियल) कैंसर के फैलने के प्रमाण मिलते हैं।
  • M3: ट्यूमर रीढ़ की हड्डी तक फैल जाता है।
  • M4: ट्यूमर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस) के बाहर तक फैल गया है। कैंसर के फैलाव (मेटास्टेसिस) के सामान्य स्थानों में हड्डियां, फेफड़े और जिगर शामिल हैं।

मेडुलोब्लास्टोमा पूर्वानुमान

अगर बीमारी नहीं फैली है, तो बच्चों में होने वाले मेडुलोब्लास्टोमा के लिए 5 साल तक जीवित रहने की संपूर्ण दर लगभग 70-80% होती है। अत्यधिक जोखिम वाले रोगियों के लिए, जीवित रहने की दर लगभग 60-65% है।

निरोगी होने के अवसर को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • मेडुलोब्लास्टोमा शरीरकोष विज्ञान
    • 3 साल से कम उम्र के बच्चे: क्लासिक या एलसीए ट्यूमर की तुलना में डेस्मोप्लास्टिक ट्यूमर बेहतर परिणाम के साथ जुड़े होते हैं।
    • 3 साल से या ज़्यादा उम्र के बच्चे: एलसीए ट्यूमर की तुलना में डेस्मोप्लास्टिक या क्लासिक ट्यूमर बेहतर परिणाम के साथ जुड़े होते हैं।
  • मेडुलोब्लास्टोमा के आणविक उपप्रकार ट्यूमर के आणविक लक्षण और जीन तथा क्रोमोसोम (गुणसूत्र) में परिवर्तन जिसमें मेडुलोब्लास्टोमा उपप्रकार (डब्ल्यूएनटीट, एसएचएच, समूह 3 या समूह 4) शामिल है। डब्ल्यूएनटी, ट्यूमर का एक बहुत अच्छा पूर्वानुमान है। एसएचएच और समूह 4 मेडुलोब्लास्टोमा ट्यूमर को मध्यवर्ती जोखिम माना जाता है। समूह 3 मेडुलोब्लास्टोमा ट्यूमर एक बदतर पूर्वानुमान है
  • कैंसर फैला है या नहीं। मेडुलोब्लास्टोमा वह कैंसर है जो पूरे शरीर में अथवा मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी के अन्य भागों में फैल चुका है, उसका इलाज करना अधिक कठिन होता है। एक जगह या अंग तक सीमित मेडुलोब्लास्टोमा एक बेहतर पूर्वानुमान के साथ जुड़ा होता है।
  • यदि सर्जरी ट्यूमर को पूरी तरह निकाल सकती है। जिन बच्चों को सर्जरी के बाद कोई दिखाई देने वाला ट्यूमर नहीं है (सकल कुल स्नेह) उनके इलाज का बेहतर मौका है।
  • रोग की पहचान के समय आयु। रोग के मेडुलोब्लास्टोमा पूर्वानुमान पर उम्र का प्रभाव मेडुलोब्लास्टोमा के उपप्रकार और अन्य लक्षणों पर निर्भर करता है। हालांकि, नवजात शिशुओं और 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए आमतौर पर रेडिएशन थेरेपी का उपयोग नहीं किया जाता है।
  • यदि कैंसर नया है या यदि यह फिर से हुआ है। वापस आने वाले मेडुलोब्लास्टोमा को खराब परिणामों से जोड़ा जाता है।

मेडुलोब्लास्टोमा और पूर्वानुमान के प्रकार

  डब्ल्यूएनटी उपप्रकार एसएचएच उपप्रकार समूह 3 समूह 4
% स्थितियाँ 10% मेडुलोब्लास्टोमा 30% मेडुलोब्लास्टोमा 25% मेडुलोब्लास्टोमा 35% मेडुलोब्लास्टोमा
रोगी के लक्षण बड़े बच्चों और किशोरों में सर्वाधिक आम; नवजात शिशुओं में दुर्लभ 3 साल से कम उम्र के बच्चों और बड़ी उम्र के किशोरों और वयस्कों में आम नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में सर्वाधिक आम; किशोरों में दुर्लभ; पुरुषों में अधिक आम है उम्र के सभी समूहों में पाया गया लेकिन नवजात शिशुओं में मुश्किल से ही पाया गया; पुरुषों में अधिक आम है
मेडुलोब्लास्टोमा शरीरकोष विज्ञान • क्लासिक (सबसे अधिक बार)
बड़ी कोशिका एनाप्लास्टिक (बहुत कम)
• डेस्मोप्लास्टिक / गांठदार
• एमबीईएन
क्लासिक
बड़ी कोशिका एनाप्लास्टिक
क्लासिक
बड़ी कोशिका एनाप्लास्टिक
क्लासिक
बड़ी कोशिका एनाप्लास्टिक (बहुत कम)
रोग की पहचान पर मेटास्टेसिस (कैंसर का फैलाव) रोग की पहचान के दौरान लगभग 5-10% रोगियों में कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) रोग होता है रोग की पहचान के दौरान लगभग 15-20% रोगियों में कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) रोग होता है रोग की पहचान के दौरान लगभग 30-45% रोगियों में कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) रोग होता है रोग की पहचान के दौरान लगभग 35-40% रोगियों में कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) रोग होता है
दुबारा होना, वापस आना बहुत कम बार वापस आना यदि यह वापस आता है, तो यह आमतौर पर स्थानीय बीमारी है यदि यह वापस आता है, तो आमतौर पर कैंसर फैला हुआ है यदि यह वापस आता है, तो आमतौर पर कैंसर फैला हुआ है
मेडुलोब्लास्टोमा के लिए 5 साल तक बचने की दरें >90% उत्तरजीविता 75% उत्तरजीविता 50% उत्तरजीविता 75% उत्तरजीविता
कुल मिलाकर मेडुलोब्लास्टोमा पूर्वानुमान बहुत अच्छा मध्यवर्ती, लेकिन नवजात शिशुओं में बेहतर पूर्वानुमान होता है खराब मध्यवर्ती

मेडुलोब्लास्टोमा का इलाज

मेडुलोब्लास्टोमा इलाज में सर्जरी, मस्तिष्क और रीढ़ में रेडिएशन (3 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को छोड़कर), और कीमोथेरेपी शामिल हैं।

मेडुलोब्लास्टोमा के इलाज के लिए वर्तमान जोखिम-आधारित पद्धतियाँ, रोगी को ट्यूमर लक्षणों तथा पूर्वानुमानित परिणामों के आधार पर वर्गीकृत करती हैं। चिकित्सक निम्नलिखित पर विचार करते हैं:

  • मेडुलोब्लास्टोमा के आणविक उपप्रकार
  • सर्जरी से ट्यूमर पूरी तरह निकला है या नहीं
  • ट्यूमर फैला है या नहीं
  • ट्यूमर हिस्टोलॉजी (शरीरकोष विज्ञान)
  • ट्यूमर के आनुवंशिक लक्षण

जोखिम-आधारित पद्धति का लक्ष्य इलाज के कारण होने वाले दुष्प्रभावों के जोखिम को कम करते हुए उत्तरजीविता प्राप्त करना है। उन रोगियों के लिए जिनको अच्छे परिणाम मिलने की पूर्वसूचना दी गई है, कम तीव्रता वाली थेरेपी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी की दीर्घकालिक समस्याओं को कम कर सकती है। उच्च-जोखिम वाले रोगियों के लिए, अधिक गहन थेरेपी जीवित रहने की संभावना को बढ़ा सकती है।

रोगियों को बीमारी के परीक्षण के अंतर्गत इलाज का सुझाव दिया जा सकता है।

  1. मेडुलोब्लास्टोमा में ट्यूमर को जितना संभव हो उतना निकालने के लिए सर्जरी एक प्रमुख इलाज है। इसका लक्ष्य ट्यूमर को पूरी तरह से सर्जरी/काट कर निकालना या उसे पूर्ण रूप से निकालना है। मेडुलोब्लास्टोमा की कई स्थितियों में, अधिकांश या सभी ट्यूमर को सर्जरी से हटाया जा सकता है। हालांकि, कुछ स्थितियों में, ट्यूमर कितना निकाला जा सकता है यह ट्यूमर के स्थान के कारण सीमित हो सकता है।

    मेडुलोब्लास्टोमा सर्जरी के बाद पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग)

    पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) या सेरेबेलर म्यूटिज्म (दिमाग के पिछले हिस्से की सर्जरी के बाद का गूंगापन), वह दुर्लभ स्थिति है जो कभी-कभी दिमाग के पिछले भाग पोस्टेरियर फोसा में मस्तिष्क के कैंसर को निकालने की सर्जरी के बाद विकसित होती है। वे बच्चे जिनकी मेडुलोब्लास्टोमा के लिए सर्जरी हुई है, उनमें से लगभग 25% बच्चों को पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) होने की शिकायत होगी। इसके लक्षणों में, बोलने में, निगलने में, गतिवाही क्रियाओं में और भावनाओं में परिवर्तन होना शामिल है। आमतौर पर लक्षण ट्यूमर सर्जरी के बाद 1-10 दिनों में दिखाई देते हैं और ये कई हफ़्तों या महीनों या लंबे समय तक रह सकते हैं। ये लक्षण हल्के या गंभीर हो सकते हैं और अधिकांश बच्चे समय के साथ बेहतर होते जाते हैं। स्थिति पूरी तरह से समझ में नहीं आती है, और चिकित्सक को नहीं पता चलता कि क्यों यह कुछ बच्चों को क्यों प्रभावित करता है और दूसरों को नहीं। पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के लिए देखभाल में आमतौर पर शारीरिक चिकित्सा, संयोजन चिकित्सा और वाक् संबंधी थेरेपी सहित पुनर्सुधार सेवाओं का संयोजन शामिल है।

  2. रेडिएशन थेरेपी का उपयोग आमतौर पर मेडुलोब्लास्टोमा की सर्जरी के बाद किया जाता है। रेडिएशन थेरेपी की खुराक रोग और रोगी जोखिम श्रेणी के चरण पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर, प्राथमिक ट्यूमर साइट पर उच्च खुराक (बूस्ट) के साथ मस्तिष्क और रीढ़ (क्रानियोस्पाइरल रेडिएशन करना) को रेडिएशन पहुंचाया जाता है। संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के कारण, बहुत छोटे बच्चों में रेडिएशन थेरेपी का उपयोग नहीं किया जाता है।

    चिकित्सक मेडुलोब्लास्टोमा के इलाज के लिए नए प्रकार की रेडिएशन थेरेपी, जैसे प्रोटॉन बीम रेडिएशन का उपयोग कर सकते हैं। इस प्रकार की रेडिएशन थेरेपी में, प्रत्येक ट्यूमर के आकार और आकृति से मेल करके ऊर्जा की मात्रा और इसे ट्यूमर में कितना अंदर तक भेजना है, इसे अनुकूलित किया जा सकता है। इससे चिकित्सकों को ट्यूमर पर रेडिएशन की अधिक मात्रा को लक्षित करने और आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं को होने वाली क्षति को कम करने में सुविधा होती है। हालांकि, प्रोटॉन थेरेपी हर केंद्र पर उपलब्ध नहीं होती।

    रेडिएशन थेरेपी ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएशन किरणों, एक्स-रे या प्रोटॉन का उपयोग करती है। रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को क्षति पहुंचाते हुए कार्य करता है।

    रेडिएशन थेरेपी ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएशन किरणों, एक्स-रे या प्रोटॉन का उपयोग करती है। रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को क्षति पहुंचाते हुए कार्य करता है।

    प्रोटॉन थेरेपी अपने ऊर्जा स्रोत के रूप में प्रोटॉन का उपयोग करती है। प्रोटॉन रेडिएशन में उसकी किरण ट्यूमर वाली जगह पर रुक सकती है। इससे चिकित्सकों को ट्यूमर पर रेडिएशन की अधिक मात्रा का उपयोग करने और आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं को होने वाली क्षति को कम करने में सुविधा होती है।

    प्रोटॉन थेरेपी अपने ऊर्जा स्रोत के रूप में प्रोटॉन का उपयोग करती है। प्रोटॉन रेडिएशन में उसकी किरण ट्यूमर वाली जगह पर रुक सकती है। इससे चिकित्सकों को ट्यूमर पर रेडिएशन की अधिक मात्रा का उपयोग करने और आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं को होने वाली क्षति को कम करने में सुविधा होती है।

  3. मेडुलोब्लास्टोमा के इलाज के लिए कीमोथेरेपी का उपयोग आमतौर पर रेडिएशन थेरेपी और सर्जरी के साथ किया जाता है। बहुत छोटे बच्चों में, बच्चे के बड़े होने तक रेडिएशन देने की प्रक्रिया को स्थगित करने में मदद के लिए कीमोथेरेपी का उपयोग किया जा सकता है। इसमें स्टेम सेल बचाव के साथ उच्चस्तरीय कीमोथेरेपी का भी उपयोग किया जा सकता है।

    मेडुलोब्लास्टोमा का इलाज करने के लिए कीमोथेरेपी दवाओं के संयोजन का उपयोग किया जाता है। इन दवाओं में अक्सर कार्बोप्लैटिन, विन्क्रिस्टाईन, साइक्लोफॉस्फोमाइड, सिस्प्लेटिन, लोमुस्टाइन और मेथोट्रिक्सेट शामिल होते हैं।

  4. लक्षित इलाज ट्यूमर कोशिकाओं के विशिष्ट लक्षणों पर क्रिया करते हुए या उन पर लक्ष्य साधते हुए कार्य करती हैं। ये दवाइयां कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने, विभाजित होने या संचारित होने से रोकने के लिए आणविक संकेतों और प्रक्रियाओं में परिवर्तन कर देती हैं। मेडुलोब्लास्टोमा में अध्ययन किए जा रहे लक्षित इलाजों में विज़मोडेगिब (Erivedge® (एरीवेज)) शामिल हैं।

नवजात शिशुओं में मेडुलोब्लास्टोमा

एसएचएच उपसमूह 3 साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाला सबसे आम मेडुलोब्लास्टोमा का प्रकार है उसके बाद समूह 3 के ट्यूमर की बारी आती है। नवजात शिशुओं में एसएचएच ट्यूमर की अक्सर अनुकूल शरीरकोष विज्ञान (हिस्टोलॉजी) और आणविक रूपरेखा होती है। ये बच्चे अक्सर सर्जरी के बाद रेडिएशन के बिना कीमोथेरेपी से सफल प्रदर्शन करते हैं।

नवजात शिशुओं में एसएचएच-रहित मेडुलोब्लास्टोमा का इलाज करना कठिन होता है, खासकर तब जब उसे मेटास्टेटिक (कैंसर फैला हुआ) बीमारी हो। फ़ोकल रेडिएशन थेरेपी और स्टेम सेल बचाव के साथ उच्चस्तरीय कीमोथेरेपी जैसे इलाजों का प्रयास किया जा सकता है, लेकिन इससे रोग का निदान होना कठिन होता है। उच्च जोखिम वाले मेडुलोब्लास्टोमा वाले छोटे बच्चों को इलाज के दुष्प्रभाव का अनुभव हो सकता है जो इलाज के संभावित लाभों से आगे निकल जाते हैं।

 

मेडुलोब्लास्टोमा के बाद जीवन

मेडुलोब्लास्टोमा की बढ़ती समझ ने हाल के वर्षों में बेहतर इलाज और जीवित रहने की दर में सुधार किया है। हालांकि, मेडुलोब्लास्टोमा से बचने वाले लोगों को अक्सर विभिन्न प्रकार की इलाज-संबंधित मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उपचार के पूरा होने के बाद रोगियों की निगरानी के लिए फॉलो-अप देखभाल, प्रयोगशाला परीक्षण और नियमित एमआरआई स्कैन का उपयोग किया जाता है। निगरानी में रोग के दुबारा होने का पता लगाने और दीर्घकालिक और इलाज के देरी से प्रभाव पर ध्यान देना चाहिए। देखभाल में उपयुक्त पुनर्सुधार और तंत्रिका-सम्बंधित चिकित्सक से सलाह लेना भी शामिल होना चाहिए।

मेडुलोब्लास्टोमा इलाज के बाद देरी से दिखाई देने वाले प्रभाव

मेडुलोब्लास्टोमा से जीवित बचे लोगों को कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी सहित इलाज के आधार पर कुछ देरी से होने वाले प्रभावों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें निम्नलिखित समस्याएं शामिल हो सकती हैं:

मेडुलोब्लास्टोमा के लिए इलाज किए गए बच्चों को दैनिक जीवन के क्षेत्रों जैसे स्कूल, काम और रिश्तों में, भविष्य में समस्याएं हो सकती हैं। वे कम तंदुरुस्त हो सकते हैं और शारीरिक रूप से कम काम कर पाते हैं। एक प्राथमिक देखभाल चिकित्सक द्वारा नियमित परीक्षण और जांच करवाना स्वास्थ्य समस्याओं पर नज़र रखने के लिए महत्वपूर्ण है जो थेरेपी के कई साल बाद विकसित हो सकती हैं। दीर्घकालिक स्वास्थ्य और जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए एक बहुविषयक टीम व्यक्तिगत देखभाल योजना बनाने मदद कर सकती है। मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक संसाधनों जैसी सहायता सेवाएं भी जीवित लोगों के जीवन शैली की गुणवत्ता को बढ़ा सकती हैं।

और अधिक जानकारी: मस्तिष्क के कैंसर के बाद जीवन


समीक्षा की गई: फरवरी, 2020