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नरम ऊतक सारकोमा

नरम ऊतक सारकोमा क्या है?

नरम ऊतक सारकोमा एक प्रकार का कैंसर है जो शरीर की मांसपेशी, नसों, टेन्डन, वसा, और रक्त व लसिका वाहिकाओं जैसे नरम संयोजी ऊतक में विकसित होते हैं। नरम ऊतक सारकोमा को दो मुख्य प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है:

  • राबडोमायोसार्कोमा
  • नॉन-राबडोमायोसार्कोमा नरम ऊतक सारकोमा (एनआरएसटीएस)

नरम ऊतक सारकोमा बच्चों में होने वाले कैंसरों के 7% कैंसर के लिए उत्तरदायी है। राबडोमायोसार्कोमा छोटे बच्चों में अधिक पाया जाता है, और एनआरएसटीएस अधिकतर किशोरावस्था के लोगों में पाया जाता है। नरम ऊतक सारकोमा का रोगलाक्षणिक व्यवहार स्थानीय रूप से आक्रामक होने से लेकर अत्यधिक  फैला हुआ कैंसर (मेटास्टैटिक) हो सकता है।

नरम ऊतक सारकोमा को उस ऊतक के लिए नामित किया गया है जिससे वे सबसे अधिक मेल खाते हैं:

  • कंकाल पेशी: राबडोमायोसार्कोमा
  • चिकनी पेशी: लेयोमायोसार्कोमा
  • उपास्थि या कार्टिलेज: कोंड्रोसारकोमा
  • सिनोवियम: सिनोवियल सार्कोमा
  • वसा: लाइपोसारकोमा
  • रक्त और लसिका वाहिकाएं: एंजियोसारकोमा 
  • परिसरीय तंत्रिकाएं: घातक परिसरीय तंत्रिका आवरण ट्यूमर
  • तंतुमय ऊतक: फाइब्रोसार्कोमा

कुछ वंशानुगत स्थितियां नरम ऊतक सारकोमा के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। आयनीकृत रेडिएशन के प्रभाव में आने वाले बच्चों को भी अधिक जोखिम होता है। नरम ऊतक सारकोमा के इलाज में आमतौर पर सर्जरीकीमोथेरेपी, और/या रेडिएशन थेरेपी शामिल होती है।

 
  1. राबडोमायोसार्कोमा क्या है?

    राबडोमायोसार्कोमा एक प्रकार का नरम ऊतक ट्यूमर है जो अक्सर मांसपेशी में निर्मित होता है। हालांकि, यह शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है और यह बच्चों में होने वाला सबसे आम प्रकार का नरम ऊतक सारकोमा है। यह आमतौर पर 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करता है और जन्म से पहले विकसित हो सकता है। 

    राबडोमायोसार्कोमा दो प्रकार के होते हैं:

    1. एम्ब्रायोनल राबडोमायोसार्कोमा – यह ट्यूमर 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में सबसे अधिक आम है और अक्सर सिर, गर्दन, मूत्राशय, योनि, प्रोस्टेट या वीर्यकोष के अंदर बनता है।
    2. एल्वियोलर राबडोमायोसार्कोमा – यह ट्यूमर सभी आयु समूहों को प्रभावित करता है और आमतौर पर बाजुओं, टांगों और धड़ की बड़ी मांसपेशियों में बनता है।

    राबडोमायोसार्कोमा के जोखिम कारक और कारण

    आयु, लिंग और नस्ल सहित कुछ अन्य कारकों से राबडोमायोसार्कोमा होने का जोखिम बढ़ सकता है। 

    • 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों में लगभग 2/3 राबडोमायोसार्कोमा टयूमर पाए जाते हैं। 
    • राबडोमायोसार्कोमा अक्सर महिलाओं की तुलना में पुरुषों में थोड़ा ज़्यादा होता है।
    • अफ़्रीकी-अमेरिकी बच्चों की तुलना में कोकेशियान में राबडोमायोसार्कोमा होने का अधिक जोखिम होता है।
    • कुछ वंशागुनत स्थितियां, ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम (पी53 उत्परिवर्तन), डाईसर1 उत्परिवर्तन, न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (एनएफ1), कोस्टेलो सिंड्रोम, बेकविथ वेइडमैन सिंड्रोम और नोनन सिंड्रोम सहित राबडोमायोसार्कोमा के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

    राबडोमायोसार्कोमा के संकेत और लक्षण

    राबडोमायोसार्कोमा के लक्षण ट्यूमर के स्थान पर निर्भर करते हैं। राबडोमायोसार्कोमा के संकेतों और लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

    • सूजन या गाँठ जो कभी जाती नहीं है और कभी-कभी दर्दनाक होती है
    • सिरदर्द
    • आँख का बाहर उभर आना
    • नाक, योनि या मलाशय से खून निकलना
    • कब्ज होना या पेशाब करने में कठिनाई होना

    राबडोमायोसार्कोमा रोग की पहचान करना

    राबडोमायोसार्कोमा रोग की पहचान करने के लिए कई प्रकार की प्रक्रियाओं और जांचों का उपयोग किया जाता है। इनमें शामिल है: 

    • लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने के लिए स्वास्थ्य इतिहास, शारीरिक जांच, और खून की जांचें
    • केंद्रीय ट्यूमर का आकलन करने के लिए एमआरआई, सीटी स्कैन और/या अल्ट्रासाउंड सहित इमेजिंग जांचें आवश्यकता पड़ने वाली अन्य जांचों का निर्धारण करती हैं। 
      • केंद्रीय ट्यूमर का आकलन करने के लिए एमआरआई का उपयोग किया जाता है।
      • राबडोमायोसार्कोमा फेफड़ों तक फैला है या नहीं, यह देखने के लिए छाती के सीटी स्कैन का उपयोग किया जाता है। यदि ट्यूमर शरीर के निचले भाग में होता है, तो पेट और पेडू के सीटी स्कैन की ज़रूरत पड़ सकती है।
      • हड्डी और शरीर के अन्य भागों में कैंसर का पता लगाने के लिए हड्डी के स्कैन या पैट स्कैन का इस्तेमाल करते हुए पूरे शरीर की इमेजिंग का उपयोग किया जाता है।
    • यह देखने के लिए कि कैंसर फैला है या नहीं हड्डी के अंदर से बोन मैरो और टुकड़ा निकालना। चिकित्सक कूल्हे की हड्डी में एक पतली, खोखली सुई डालकर बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) का नमूना लेंगे। रोगविज्ञानी (पैथोलॉजिस्ट) बोनमैरो को माइक्रोस्कोप के नीचे देखकर कैंसर के संकेतों की जाँच करेंगे।
    • रोग की सही पहचान करने के लिए ट्यूमर की बायोप्सी (टुकड़ा निकालना)। बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) में, चिकित्सक ट्यूमर से ऊतक का एक छोटा सा भाग निकालता है। उसके बाद कैंसर के संकेतों को देखने के लिए कोशिकाओं की माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। ट्यूमर के स्थान के आधार पर इन्सिज़्नल बायोप्सी (काट कर टुकड़ा निकालना) या कोर नीडल बायोप्सी (टीके से कैंसर का टुकड़ा निकालना) का उपयोग किया जा सकता है।

    ट्यूमर के स्थान के आधार पर, निम्नलिखित सहित अतिरिक्त जांचों की आवश्यकता हो सकती है:

    • आसपास की लसिका ग्रंथियों में राबडोमायोसार्कोमा के प्रसार की जांच करने के लिए सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी। इस प्रक्रिया में, एक विशेष डाई या रेडियोधर्मी पदार्थ को ट्यूमर के पास इंजेक्ट किया जाता है। डाई लसिका तंत्र से होते हुए केंद्रीय ट्यूमर के निकट स्थित पहली लसिका ग्रंथियों तक पहुँचती है। उन लसिका ग्रंथियों को निकाला जा सकता है और कैंसर के संकेतों के लिए उनका आकलन किया जा सकता है। यह प्रक्रिया राबडोमायोसार्कोमा के स्तर का पता लगाने और इलाजों की योजना बनाने में मदद के लिए ज़रूरी होती है।
    • मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस की झिल्लियों के पास ट्यूमर होने की स्थिति (पैरामैनिनजीएल) में रीढ़ की हड्डी के पानी में कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने के लिए लंबर पंक्चर

    ट्यूमर के स्थान के आधार पर स्थल-विशिष्ट आकलनों की आवश्यकता हो सकती है। संपूर्ण इलाज के दौरान सर्वोत्तम देखभाल प्रदान करने के लिए एक बहुविषयक चिकित्सीय टीम आवश्यक होती है।

    बच्चों में होने वाले राबडोमायोसार्कोमा से पीड़ित रोगी के चिह्नांकित ट्यूमर के साथ अग्रभुजा का एमआरआई

    बच्चों में होने वाले राबडोमायोसार्कोमा से पीड़ित रोगी की अग्रभुजा का एमआरआई

    बच्चों में होने वाले राबडोमायोसार्कोमा से पीड़ित रोगी के चिह्नांकित ट्यूमर के साथ पेट का एमआरआई

    बच्चों में होने वाले राबडोमायोसार्कोमा से पीड़ित रोगी के पेट का एमआरआई

    बच्चों में होने वाले राबडोमायोसार्कोमा से पीड़ित रोगी के पेट का अनुप्रस्थ परिच्छेद या ऊपर का दृश्य (अक्षीय दृश्य) से एमआरआई

    बच्चों में होने वाले राबडोमायोसार्कोमा से पीड़ित रोगी के पेट का अंदर का दृश्य (अनुप्रस्थ परिच्छेद) या अक्षीय, दृश्य से एमआरआई

    राबडोमायोसार्कोमा के स्तर का पता लगाना

    राबडोमायोसार्कोमा में, विभिन्न तरीकों से रोग को वर्गीकृत किया जा सकता है। इससे चिकित्सकों को रोग को समझने और उपयुक्त इलाजों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

    राबडोमायोसार्कोमा को ट्यूमर के स्थान, कैंसर के फैलने और सर्जरी के परिणाम के आधार पर समूहीकृत किया जा सकता है।

    समूह कैंसर का फैलना
    समूह I
    सर्जरी के बाद कोई बीमारी नहीं
    ट्यूमर एक ही क्षेत्र तक सीमित रहता है और यह सर्जरी से पूरी तरह से निकल जाता है।
    समूह II
    सर्जरी के बाद सूक्ष्म बीमारी
    ट्यूमर एक ही क्षेत्र तक सीमित रहता है और यह सर्जरी से पूरी तरह से निकल जाता है, लेकिन ट्यूमर (मार्जिन) और/या लसिका ग्रंथियों को घेरने वाले आसपास के ऊतक में कैंसर कोशिकाएं पायी जाती हैं।
    समूह III
    सर्जरी के बाद अधिक विकसित बीमारी
    ट्यूमर एक ही क्षेत्र तक सीमित रहता है और इसे सर्जरी से पूरी तरह से नहीं निकाला जा सकता।
    समूह IV
    कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) बीमारी
    रोग की पहचान करने के समय ट्यूमर शरीर के अन्य भागों तक फैला हुआ होता है (मेटास्टैटिक)।

    राबडोमायोसार्कोमा का स्तर निर्धारण टीएनएम सिस्टम का उपयोग करते हुए भी किया जा सकता है। इस प्रणाली में 3 कारक शामिल होते हैं:

    1. ट्यूमर (टी) – केंद्रीय ट्यूमर का आकार और स्थान
    2. नोड (एन) – लसिका ग्रंथियों में कैंसर का फैलना
    3. कैंसर का फैलाव या मेटास्टैटिस (एम) – शरीर के अन्य भागों में कैंसर का फैलाव

    टीएनएम सिस्टम का उपयोग करते हुए, राबडोमायोसार्कोमा को 4 स्तरों में विभाजित किया जा सकता है।

    स्तर स्थान ट्यूमर का आकार लसिका ग्रंथियां कैंसर का फैलाव
      केंद्रीय ट्यूमर कहां स्थित है? ट्यूमर कितना बड़ा है?            
    क्या लसिका ग्रंथियों में कैंसर कोशिकाएं मिली हैं? क्या कैंसर शरीर के अन्य भागों तक फैल गया है?
    1 अनुकूल: ट्यूमर आँख, सिर या गर्दन के क्षेत्र में या जननमूत्रीय पथ में होता है
    अपवाद: ट्यूमर मस्तिष्क या रीढ़ के अंदर की नस के पास या मूत्राशय या प्रोस्टेट में स्थित होता है
    कोई भी आकार
    हाँ या नहीं नहीं
    2 प्रतिकूल: अन्य सभी स्थल
    5 सेंटीमीटर से छोटा
    नहीं नहीं
    3 प्रतिकूल: अन्य सभी स्थल

    5 सेंटीमीटर से छोटा

    5 सेंटीमीटर से बड़ा

    हाँ

    हाँ या नहीं

    नहीं
    4 कोई भी स्थल
    कोई भी आकार हाँ या नहीं हाँ

    राबडोमायोसार्कोमा के लिए पूर्वानुमान

    राबडोमायोसार्कोमा के बाद स्वास्थ्य लाभ होने की संभावना कई कारकों पर निर्भर करती है:

    • ट्यूमर का आकार और स्थान
      • बड़े ट्यूमर (5 सेंटीमीटर से बड़े) का इलाज करना अधिक कठिन होता है। 
      • कुछ ट्यूमर में स्थान के आधार पर बेहतर पूर्वानुमान होता है। शरीर में निम्नलिखित स्थानों पर स्थित होने पर ट्यूमर को अनुकूल (ठीक होने की अधिक संभावना) माना जाता है:
        • आँख का क्षेत्र (नेत्र-कोटर)
        • सिर और गर्दन (मस्तिष्क या रीढ़ के अंदर की नस की झिल्लियों के पास होने की स्थिति को छोड़कर)
        • प्रजनन या मूत्र मार्ग (मूत्राशय या प्रोस्टेट को छोड़कर)
        • पित्त नलिकाएं
    • रोगी की आयु (छोटी या बड़ी आयु के रोगियों में अक्सर खराब परिणाम होते हैं) 
    • राबडोमायोसार्कोमा का प्रकार: एल्वियोलर ट्यूमर की तुलना में भ्रूणीय ट्यूमर अक्सर बेहतर परिणाम देते हैं।
    • कैंसर लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों में फैला है (मेटास्टैटिक रोग) या नहीं 
    • ट्यूमर को पूरी तरह से निकालने की सर्जरी की क्षमता

    जोखिम समूह

    चिकित्सक इलाजों की योजना बनाने में मदद के लिए राबडोमायोसार्कोमा के रोगियों को जोखिम समूहों में वर्गीकृत करते हैं। समूह, रोग के स्तर पर और ट्यूमर को निकालने की सर्जरी की क्षमता पर आधरित होते हैं।

    • निम्न जोखिम – यदि रोगियों में भ्रूणीय ट्यूमर को सर्जरी से पूरी तरह निकाला जा सकता है तो उन्हें निम्न जोखिम के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
    • मध्यम जोखिम – रोगियों को मध्यवर्ती या मध्यम जोखिम के रूप में वर्गीकृत किया जाता है यदि उनमें:
      • एक भ्रूणीय ट्यूमर है जिसे सर्जरी से पूरी तरह नहीं निकाला जा सकता या
      • एक एल्वियोलर ट्यूमर है जो शरीर के दूरस्थ भागों तक नहीं फैला है।
    • उच्च जोखिम – यदि रोगियों में स्तर 4 या कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) बीमारी है तो उन्हें उच्च जोखिम के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

    यह जानकारी चिकित्सकों की यह तय करने में कि कौन से इलाजों का उपयोग करना है, दवा की खुराक निर्धारित करने में और कितने इलाजों की आवश्यकता है यह निर्धारित करने में मदद करती है।

    यदि राबडोमायोसार्कोमा दुबारा हुआ है, तो रोग का पूर्वानुमान इस चीज से प्रभावित हो सकता है कि शरीर में कैंसर कहां हुआ है, मूल कैंसर और दुबारा हुए कैंसर के बीच कितना समय बीत चुका है और कैंसर का इलाज करने के लिए मूल रूप से कौन सी थेरेपी का उपयोग किया गया था।

    एक जगह या अंग तक सीमित राबडोमायोसार्कोमा से पीड़ित बच्चों में लंबे समय तक ठीक रहने की संभावना 70% से अधिक होती है। रोग की पहचान करते समय लगभग 20% रोगियों में कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) रोग होता है। यदि रोग की पहचान करते समय कैंसर पहले से ही फैला हुआ होता है (मेटास्टैटिक राबडोमायोसार्कोमा), तो इसमें जीवित रहने की संभावना 30% से भी कम होती है।

    राबडोमायोसार्कोमा के लगभग 30% रोगियों में कैंसर की पुनरावृत्ति होगी। राबडोमायोसार्कोमा, प्रारंभिक ट्यूमर के स्थान पर या अन्य स्थानों पर दुबारा हो सकता है। दुबारा होने वाले राबडोमायोसार्कोमा का इलाज करना कठिन होता है और इसके ठीक होने की संभावना कम होती है।

    राबडोमायोसार्कोमा का इलाज

    राबडोमायोसार्कोमा के लिए कीमोथेरेपी, सर्जरी और/या रेडिएशन थेरेपी सहित इलाजों के संयोजन की आवश्यकता होती है। सभी बच्चों को राबडोमायोसार्कोमा के इलाज के भाग के रूप में पूरे शरीर में कीमोथेरपी दी जाती है। यह कैंसर के उस सूक्ष्म प्रसार का इलाज करने के लिए महत्वपूर्ण है जिसका पता नहीं लगाया जा सकता है। इमेजिंग पर दिखाई देने वाले ट्यूमर का इलाज सर्जरी और/या रेडिएशन थेरेपी द्वारा भी किया जाता है। 

    • संभव होने पर ट्यूमर को निकालने के लिए सर्जरी का उपयोग किया जाता है। ट्यूमर को घेरने वाले और लसिका ग्रंथियों के आसपास के ऊतक को भी थोड़ी मात्रा में निकाला जाता है। क्योंकि राबडोमायोसार्कोमा शरीर में कहीं भी हो सकता है, इसलिए प्रत्येक सर्जरी भिन्न होती है। किसी भी शेष बचे कैंसर को नष्ट करने के लिए सर्जरी के बाद रोगियों का इलाज कीमोथेरेपी से किया जाता है। 
    • कीमोथेरेपी (“कीमो”) कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने या उन्हें बढ़ने तथा नई कैंसर कोशिकाएं बनाने से रोकने के लिए शक्तिशाली दवाइयों का उपयोग करती है। अक्सर, कैंसर का इलाज करने के लिए एक से अधिक प्रकार की दवाइयों का उपयोग किया जाएगा। अधिकांश कीमोथेरेपी इंजेक्शन के माध्यम से दी जाती हैं लेकिन कुछ कीमो मुंह के जरिए भी दी जा सकती हैं। ट्यूमर को छोटा करने के लिए कीमोथेरेपी सर्जरी से पहले दी जा सकती है। कीमोथेरेपी को किसी भी शेष बची कैंसर कोशिकाओं को ख़त्म करने के लिए और ट्यूमर को वापस होने से रोकने में मदद के लिए सर्जरी के बाद दिया जाता है।

    राबडोमायोसार्कोमा की कीमोथेरेपी इलाज योजना में विन्क्रिस्टाईन, एक्टिनोमाइसिन डी और साइक्लोफॉस्फोमाइड और इरिनोटेकान शामिल हैं। इलाज का सामान्य कोर्स 14-16 चक्र (इलाज की अवधि और उसके बाद विश्राम की अवधि) का होता है।

    • राबडोमायोसार्कोमा का इलाज करने के लिए कीमोथेरेपी और/या सर्जरी के संयोजन में रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है। रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए या उन्हें बढ़ने से रोकने के लिए उच्च ऊर्जा वाली कणिकाओं का उपयोग करती है। रेडिएशन थेरेपी राबडोमायोसार्कोमा में कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) बीमारी का मुख्य इलाज है।

    अन्य इलाजों में अन्य कीमोथेरेपी दवाएं जैसे डॉक्सोरूबिसिन और प्रायोगिक एजेंट जैसे लक्षित इलाज, कोशिका चक्र को बाधित करने वाली दवाएं और प्रतिरक्षा बढ़ाने का उपचार (इम्यूनोथेरेपी) शामिल होते हैं।

    कई बच्चों को एक बीमारी के परीक्षण के भाग के रूप में राबडोमायोसार्कोमा के इलाज की पेशकश की जाती है।

    लक्षित इलाज वे नई दवाएं हैं जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के लिए उनके विशेष लक्ष्य क्षेत्रों पर कार्य करती हैं। राबडोमायोसार्कोमा के इलाज में काइनेज़ इनहिबिटर और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का अध्ययन किया जा रहा है। काइनेज़ इनहिबिटर, कैंसर कोशिकाओं को वृद्धि करने का संकेत देने वाले प्रोटीन को अवरुद्ध करने का कार्य करते हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी इलाज विशेष प्रोटीनों का उपयोग करती है जो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने या उनकी वृद्धि को धीमा करने के लिए उन कोशिकाओं से जुड़ जाते हैं।

  2. नॉन-राबडोमायोसार्कोमा नरम ऊतक सारकोमा (एनआरएसटीएस) उन ट्यूमर का एक समूह है जो शरीर के नरम ऊतक में विकसित होते हैं। हालांकि एनआरएसटीएस कई प्रकार के होते हैं, लेकिन उनका इलाज आमतौर पर एक समान तरीके से किया जाता है।

    बच्चों में होने वाले सभी कैंसरों में एनआरएसटीएस का अनुपात लगभग 4% है। वे किशोरावस्था के लोगों में सर्वाधिक पाए जाते हैं। अमेरिका में हर वर्ष लगभग 500-600 रोगी एनआरएसटीएस से पीड़ित पाए जाते हैं।

    एनआरएसटीएस शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है लेकिन ये ज़्यादातर बाजुओं और टांगों में पाया जाता है। एनआरएसटीएस सिर और गर्दन, छाती, पेट तथा पेडू में भी हो सकता है।

    बच्चों में होने वाले एनआरएसटीएस के सबसे आम प्रकारों में निम्नलिखित शामिल हैं:

    • फाइब्रोसार्कोमा
    • सिनोवियल सार्कोमा 
    • घातक परिसरीय तंत्रिका आवरण ट्यूमर

    एनआरएसटीएस के अन्य प्रकार हैं क्लीयर सेल सार्कोमा, एपिथेलिऑइड सार्कोमा, हेमैन्जिओपेरिसाइटोमा, लेयोमायोसार्कोमा, लाइपोसारकोमा, मैलिग्नैंट फाइब्रस हिस्टियोसाइटोमा, नॉन-सिनोवियल सेल सार्कोमा और अनडिफ़रेंशिएटेड सार्कोमा।

    एनआरएसटीएस के जोखिम कारक और कारण

    बच्चों में एनआरएसटीएस अक्सर दो आयु वर्गों में सबसे अधिक देखा जाता है: शिशु और किशोरावस्था के बच्चे। वे अक्सर पुरुषों में थोड़े अधिक होते हैं। रेडिएशन थेरेपी से किए गए पिछले इलाज से एनआरएसटीएस होने का जोखिम बढ़ भी सकता है। 

    कुछ वंशानुगत स्थितियां राबडोमायोसार्कोमा के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इनमें शामिल हैं ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम (पी53 उत्परिवर्तन), न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (एनएफ1), पारिवारिक एडिनोमेटस पॉलीपोसिस (एफएपी), वर्नर सिंड्रोम, रेटिनोब्लास्टोमा 1 (आरबी1) वंशाणु परिवर्तन और स्मार्कबी1 (आईएनआई1) वंशाणु परिवर्तन।

    एनआरएसटीएस के संकेत और लक्षण

    एनआरएसटीएस के लक्षण ट्यूमर के स्थान पर निर्भर करते हैं। अक्सर दर्द रहित गाँठ के अलावा शुरुआती चरणों में कोई लक्षण नहीं होते। ट्यूमर के बढ़ने के कारण अन्य संरचनाओं पर दबाव पड़ने से दर्द या कमज़ोरी जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। अधिक उन्नत बीमारी से कई बार बुखार, पसीना आना या वजन कम होने के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं।

    एनआरएसटीएस रोग की पहचान करना

    राबडोमायोसार्कोमा रोग की पहचान करने के लिए कई प्रकार की प्रक्रियाओं और जांचों का उपयोग किया जाता है। इनमें शामिल है:

    • लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने के लिए स्वास्थ्य इतिहास, शारीरिक जांच और खून की जांचें
    • केंद्रीय ट्यूमर का आकलन करने के लिए एमआरआई या सीटी स्कैन सहित इमेजिंग जांचें।
    • रोग की पहचान करने के लिए ट्यूमर की बायोप्सी (टुकड़ा निकालना)। बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) में, चिकित्सक ट्यूमर से ऊतक का एक छोटा सा भाग निकालता है। उसके बाद कैंसर के संकेतों को देखने के लिए कोशिकाओं की माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। ट्यूमर के स्थान के आधार पर इन्सिज़्नल बायोप्सी (काट कर टुकड़ा निकालना) या कोर नीडल बायोप्सी (टीके से कैंसर का टुकड़ा निकालना) का उपयोग किया जा सकता है।
    • यदि कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) बीमारी से संबंधित चिंताएं हैं, तो सार्कोमा फेफड़ों तक फैला है या नहीं, यह देखने के लिए छाती के सीटी स्कैन का उपयोग किया जाता है। हड्डी और शरीर के अन्य भागों में कैंसर के फैलने का पता लगाने के लिए हड्डी के स्कैन या पैट स्कैन का इस्तेमाल करते हुए पूरे शरीर की इमेजिंग का उपयोग किया जाता है। लसिका ग्रंथियों की इमेजिंग और बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) भी की जा सकती है।

    एनआरएसटीएस के स्तर का पता लगाना

    नरम ऊतक सारकोमा को उसके स्तर द्वारा वर्गीकृत किया जाता है। स्तर निर्धारण की प्रक्रिया ट्यूमर की विशेषताओं पर आधारित होती है जैसे आकार, यह फैला हुआ है कि नहीं, और ट्यूमर की श्रेणी

    श्रेणी माइक्रोस्कोप में कोशिकाओं के दिखने के तरीके को दर्शाती है। श्रेणी, कैंसर के फैलने की कितनी संभावना है इसका पूर्वानुमान लगाने में मदद करती है। निम्न श्रेणी के ट्यूमर की तुलना में उच्च श्रेणी के ट्यूमर की प्रवृत्ति अधिक तेजी से बढ़ने और फैलने की होती है।

    नरम ऊतक सारकोमा के लिए, ट्यूमर की श्रेणी 3 कारकों पर आधारित होती है: अलग करना (विभेदन), समसूत्री गणना, और खत्म होना (ऊतकक्षय)

    1. अलग करना (विभेदन) (1-3): यह दर्शाता है कि कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं से कितनी अलग दिखती हैं। उच्च अंक का अर्थ है कि कोशिकाएं माइक्रोस्कोप में बहुत ही असामान्य दिखती हैं।
    2. समसूत्री गणना (1-3): यह एक माप है जो बताता है कि माइक्रोस्कोप में देखने पर कितनी ट्यूमर कोशिकाएं विभाजित होती हैं। उच्च अंक का अर्थ है कि इसमें विभाजित होने वाली कोशिकाएं अधिक हैं।
    3. ट्यूमर ऊतकक्षय (0-2): यह एक माप है जो बताता है कि ट्यूमर का कितना भाग मृत या मरणशील कोशिकाओं से बना हुआ है। उच्च अंक का अर्थ है कि उसमें अधिक मरणशील ऊतक उपस्थित हैं।

    प्रत्येक कारक को एक अंक दिया जाता है। कुल अंक जितना अधिक होगा, ट्यूमर की श्रेणी उतनी ही अधिक उच्च होगी।

    नरम ऊतक सारकोमा को चार स्तरों में वर्गीकृत किया जा सकता है। अमेरिकन जॉइंट कमेटी ऑन कैंसर (एजेसीसी) निम्नलिखित मानदंडों का उपयोग करती है:

    स्तर विवरण
    ट्यूमर की श्रेणी
    स्तर IA ट्यूमर सर्वत्र 5 सेंटीमीटर से अधिक बड़ा नहीं होता है। यह लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों तक फैला हुआ नहीं होता। 1
    स्तर IB
    ट्यूमर सर्वत्र 5 सेंटीमीटर से बड़ा होता है। यह लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों तक फैला हुआ नहीं होता।
    1
    स्तर IIA
    ट्यूमर सर्वत्र 5 सेंटीमीटर से अधिक बड़ा नहीं होता है। यह लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों तक फैला हुआ नहीं होता।
    2 या 3
    स्तर IIIA
    ट्यूमर सर्वत्र 5-10 सेंटीमीटर का होता है। यह लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों तक फैला हुआ नहीं होता।
    2 या 3
    स्तर IIIB
    ट्यूमर सर्वत्र 10 सेंटीमीटर से बड़ा होता है। यह लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों तक फैला हुआ नहीं होता।
    2 या 3
    स्तर IV
    ट्यूमर किसी भी आकार या श्रेणी का होता है। यह लसिका ग्रंथियों और/या शरीर के अन्य भागों तक फैल चुका होता है।
    कोई भी

    एनआरएसटीएस के लिए पूर्वानुमान

    एनआरएसटीएस का पूर्वानुमान या इसके बाद स्वास्थ्य लाभ होने की संभावना कई कारकों पर निर्भर करती है:

    • ट्यूमर का प्रकार
    • शरीर के किस भाग में ट्यूमर का निर्माण हुआ है
    • ट्यूमर की श्रेणी और कोशिकाएं माइक्रोस्कोप में कैसी दिखती हैं (शरीरकोष विज्ञान); निम्न श्रेणी के ट्यूमर में बेहतर पूर्वानुमान होता है।
    • ट्यूमर का आकार - बड़े ट्यूमर (5 सेंटीमीटर से बड़े) का इलाज करना कठिन होता है।
    • ट्यूमर, त्वचा में कितनी गहराई में स्थित है
    • कैंसर लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों में फैला है (मेटास्टैटिक रोग) या नहीं 
    • क्या सर्जरी से ट्यूमर पूरी तरह निकल सकता है या नहीं
    • कैंसर पहली बार हुआ है या दोबारा हुआ है (वापस आया है) 
    • क्या कैंसर का इलाज करने के लिए रेडिएशन का उपयोग किया गया है

    कुछ स्थितियों से मेल खाने वाले अनुकूल ट्यूमर से ग्रस्त रोगियों में बेहतर पूर्वानुमान होता है:

      अनुकूल प्रतिकूल
    ट्यूमर की श्रेणी (शरीरकोष विज्ञान)
    कम श्रेणी का उच्च-श्रेणी का
    ट्यूमर का आकार
    5 सेंटीमीटर से छोटा 5 सेंटीमीटर से बड़ा
    कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक)
    नहीं हाँ
    सर्जरी से पूर्ण निष्कासन
    हाँ नहीं

    रोग की पहचान करते समय लगभग 15% रोगियों में कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) रोग होता है। एनआरएसटीएस कैंसर के फैलाव का सबसे आम स्थान फेफड़ा है। ऐसा बहुत ही कम होता है कि एनआरएसटीएस हड्डी या लसिका ग्रंथियों तक फैलता हो।

    यदि रोग की पहचान करते समय कैंसर पहले से ही फैला हुआ होता है (मेटास्टैटिक रोग), तो इसमें लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना 20% से भी कम होती है।

    पुनरावर्ती एनआरएसटीएस का इलाज करना कठिन होता है और इसके ठीक होने की संभावना कम होती है।

    एनआरएसटीएस का इलाज

    कैंसर को जितना संभव हो उतना निकालने के लिए सर्जरी का उपयोग किया जाता है। सर्जरी के बाद पीछे कोई कैंसर कोशिका शेष न बचे, यह सुनिश्चित करने के लिए ट्यूमर को घेरने वाले और लसिका ग्रंथियों के आसपास के ऊतक को भी थोड़ी मात्रा में निकाला जाता है। यदि बिना किसी कैंसर कोशिकाओं को छोड़े ट्यूमर को पूरी तरह निकाला जा सकता है तो कम जोखिम वाले रोगियों का इलाज केवल सर्जरी से हो सकता है। 

    जिन एनआरएसटीएस को सर्जरी से पूरी तरह नहीं निकाला जा सकता उनका इलाज करने के लिए रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है। कुछ स्थितियों में, ट्यूमर को निकालना आसान बनाने के लिए सर्जरी से पहले रेडिएशन का उपयोग किया जा सकता है। 

    कीमोथेरेपी (“कीमो”) कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने या उन्हें बढ़ने तथा नई कैंसर कोशिकाएं बनाने से रोकने के लिए शक्तिशाली दवाइयों का उपयोग करती है। एनआरएसटीएस के लिए कीमोथेरेपी उतनी प्रभावी नहीं होती है। इसका उपयोग ज़्यादातर उच्च जोखिम वाले रोगियों के इलाज में किया जाता है जिनमें मेटास्टैटिक रोग से पीड़ित रोगी या वे रोगी भी शामिल हैं जिनका इलाज सर्जरी से नहीं किया जा सकता।

    लक्षित इलाज

    एनआरएसटीएस के इलाज में लक्षित इलाजों का अध्ययन किया जा रहा है। ये दवाएं कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के लिए उनके विशेष लक्ष्य क्षेत्रों पर कार्य करती हैं। कुछ चिकित्साएं विशिष्ट रूप से एनआरएसटीएस के उपप्रकारों के लिए होती हैं। इनमें से कई इलाजों का बीमारी के परीक्षणों में अध्ययन किया जा रहा है।

    ट्यूमर उपप्रकार दवा कार्रवाई
    एडिपोसाइटिक लिपोसारकोमा
    पाल्बोसिक्लिब
    काइनेज़ इनहिबिटर
    एल्वियोलर सॉफ़्ट पार्ट सार्कोमा
    सूनिटीनीब
    काइनेज़ इनहिबिटर
    पेरिवस्कुलर एपिथेलिऑइड सेल ट्यूमर (PEComa)
    सिरोलिमस
    एमटोर इनहिबिटर
    इन्फ़्लेमेटरी मायोफिब्रोब्लास्टिक ट्यूमर
    क्राइज़ोटिनिब
    सेरेटिनिब
    काइनेज़ इनहिबिटर
घुटने के बल बैठा राबडोमायोसार्कोमा से पीड़ित छोटी आयु का रोगी जो एक टूर्नामेंट में एक गोल्फ़र से बात कर रहा है

"दो साल की थेरेपी के बाद, हम कैंसर से तो मुक्त हो गए हैं लेकिन अभी तक 5-साल के चिह्न तक नहीं पहुँचे हैं। जैसे-जैसे समय बीतता है, मुझे लगता है कि मेरी चिंताएं भी बदल रही हैं। कैंसर का तनाव अभी भी बना हुआ है। हमारे 6 महीने के चेकअप का समय करीब आते ही 'स्कैनज़ाइटी' परेशान करने लगती है। लेकिन अभी मैं थेरेपी के बाद के और प्रभावों के बारे में सोच रही हूं, खासतौर से प्रोटॉन बीम रेडिएशन से संबंधित प्रभावों के बारे में, क्योंकि इसे आए हुए अभी ज़्यादा समय नहीं हुआ है इसलिए इससे आगे क्या होने वाला है इसका अनुमान लगाना मुश्किल है।"

– मिशेल, री की माँ

रीड का इलाज उसकी आँख के पीछे हुए दो दुर्लभ कैंसर के लिए किया गया था: राबडोमायोसार्कोमा और एक्टोमेसिनकाईमोमा। उसके इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी, और प्रोटॉन बीम रेडिएशन शामिल थे।

नरम ऊतक सारकोमा के बाद जीवन

रोग के दुबारा होने की निगरानी

नरम ऊतक सारकोमा उत्तरजीविता के वर्षों के दौरान दुबारा हो सकता है। ट्यूमर उसी स्थान पर (स्थानीय पुनरावृत्ति) या शरीर के अन्य भाग (दूरस्थ पुनरावृत्ति) में दुबारा हो सकता है।

रोगियों को इलाज समाप्त होने के बाद, रोग के दुबारा होने की जांच के लिए फॉलो-अप देखभाल प्राप्त होगी। चिकित्सीय टीम आवश्यक प्रकार की जांचों के लिए और रोगियों को जांच के लिए कितनी बार देखा जाना चाहिए, इसके लिए विशेष सुझाव देगी।

कैंसर के बाद स्वास्थ्य

नरम ऊतक सारकोमा के लिए इलाज किए गए बच्चों को इलाज संबंधित देरी से होने वाले प्रभावों का जोखिम होता है। विशिष्ट समस्याएं ट्यूमर के स्थान और प्राप्त हुए इलाज के प्रकार पर निर्भर करती हैं।

सर्जरी के दीर्घकालिक प्रभावों में अंग क्रिया में कमी और रूप-रंग संबंधित परिवर्तन शामिल हो सकते हैं।

रोग से बचे वे लोग जिनका इलाज रेडिएशन थेरेपी से किया गया था, उनमें इलाज के कारण विकास में कमी, हड्डी का रोग और अन्य समस्याएं हो सकती हैं तथा साथ ही दूसरी बार होने वाले कैंसर का जोखिम भी अधिक हो सकता है।

रोग से बचे लोग जिनका इलाज पूरे शरीर में कीमोथेरेपी देने के द्वारा किया गया था, उनकी दवा-विशिष्ट देर से होने वाले प्रभावों के लिए निगरानी की जानी चाहिए, इन प्रभावों में हृदय-संबंधी समस्याएं, गुर्दे खराब होना, बांझपन, एंडोक्राइन सिस्टम का ठीक से काम न करना और दूसरी बार होने वाले कैंसर का जोखिम शामिल हो सकता है। 

रोग से ठीक होकर जीवित बचे सभी लोगों को एक प्राथमिक चिकित्सक द्वारा अपनी नियमित शारीरिक जांच करवानी चाहिए। सामान्य स्वास्थ्य और बीमारी की रोकथाम के लिए, रोग से ठीक होकर जीवित बचे लोगों को स्वस्थ जीवन शैली और खान-पान की आदतें अपनानी चाहिए।


समीक्षा की गई: जून 2018