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न्यूरोब्लास्टोमा

न्यूरोब्लास्टोमा क्या है?

न्यूरोब्लास्टोमा एक प्रकार का कैंसर है, जो न्यूरोब्लास्ट नामक अपरिपक्व तंत्रिका कोशिकाओं से विकसित होते हैं। यह एक सबसे आम प्रकार का ठोस ट्यूमर है जो बच्चों के मस्तिष्क के बाहर होता है।

न्यूरोब्लास्टोमा अनुकंपी तंत्रिका तंत्र (एसएनएस) के पास कहीं भी उत्पन्न हो सकते हैं। न्यूरोब्लास्टोमा ज़्यादातर पेट में होता है और अक्सर गुर्दों के ऊपरी भाग में स्थित अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) के तंत्रिका ऊतक में विकसित होता है। यह गर्दन, छाती या पेडू के तंत्रिका ऊतक में भी हो सकता है।

विशिष्ट रूप से अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) और गुर्दे को दर्शाते हुए और लेबल किए हुए अंगों के लेओवर के साथ एक नन्हे बच्चे का ग्राफ़िक

न्यूरोब्लास्टोमा ज़्यादातर पेट में होता है और अक्सर गुर्दों के ऊपरी भाग में स्थित अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) के तंत्रिका ऊतक में विकसित होता है।

न्यूरोब्लास्टोमा क्या हैं?

न्यूरोब्लास्ट वे कोशिकाएं हैं जो माता के अंदर शिशु बनना शुरू होने पर भ्रूण विकास के प्रांरभिक समय में ही विकसित होने लगती हैं। ये कोशिकाएं अनुकंपी तंत्रिका तंत्र (एसएनएस) की तंत्रिका कोशिकाएं बनने के लिए परिपक्व होती हैं। कभी-कभी, न्यूरोब्लास्ट सामान्य रूप से विकसित नहीं होते और ट्यूमर का निर्माण कर सकते हैं। न्यूरोब्लास्टोमा ट्यूमर आमतौर पर रीढ़ के अंदर की नस के दोनों तरफ और अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) में स्थित अनुकंपी तंत्रिका तंत्र के मुख्य मार्ग के पास में पाए जाते हैं।

न्यूरोब्लास्टोमा आमतौर पर 5 वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चों में पाया जाता है। यह शिशुओं में होने वाला सबसे आम ट्यूमर है। शिशुओं में होने वाले कैंसर में 50% कैंसर न्यूरोब्लास्टोमा के होते हैं और बच्चों में होने वाले कैंसर में इसका अनुपात 7-10% होता है। अमेरिका में हर वर्ष लगभग 650 बच्चों में न्यूरोब्लास्टोमा पाया जाता है।

न्यूरोब्लास्टोमा के लक्षण ट्यूमर के स्थान पर निर्भर करते हैं लेकिन इसमें गाँठ या पिंड, पेट में दर्द, भूख न लगना और चिड़चिड़ापन शामिल हो सकते है। अक्सर, न्यूरोब्लास्टोमा रोग की पहचान होने तक शरीर के अन्य भागों में फैल चुका होता है।

न्यूरोब्लास्टोमा का इलाज बीमारी के स्तर (मुख्य ट्यूमर से कैंसर कितना फैल चुका है) पर निर्भर करता है। कुछ बच्चों का इलाज अकेले सर्जरी से किया जा सकता है। अधिक गंभीर बीमारी वाले रोगियों में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और/या प्रतिरक्षा बढ़ाने के उपचार (इम्यूनोथेरेपी) सहित गहन इलाज की आवश्यकता होती है।

न्यूरोब्लास्टोमा के जोखिम कारक और कारण

कुछ कारकों से न्यूरोब्लास्टोमा होने का जोखिम बढ़ सकता है। न्यूरोब्लास्टोमा ज़्यादातर छोटे बच्चों में देखा जाता है और यह अक्सर महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में थोड़ा अधिक होता है।

कुछ रोगियों (1-2%) में आनुवंशिक न्यूरोब्लास्टोमा पाया जाता है। इस प्रकार का न्यूरोब्लास्टोमा परिवारों में वंशागत स्थानांतरित हो सकता है। आनुवंशिक न्यूरोब्लास्टोमा अक्सर एएलके या पीएचओएक्स 2B वंशाणु में परिवर्तन या उत्परिवर्तन के कारण होता है। आनुवंशिक न्यूरोब्लास्टोमा से पीड़ित बच्चों में, अपने बच्चों तक इस बीमारी को वंशागत रूप से पहुँचाने की 50% संभावना होती है।

आनुवंशिक न्यूरोब्लास्टोमा के बारे में और अधिक जानें

न्यूरोब्लास्टोमा के संकेत और लक्षण

न्यूरोब्लास्टोमा के संकेत और लक्षण ट्यूमर के स्थान और बच्चे की आयु पर निर्भर करते हैं। इनमें ये शामिल हो सकते हैं:

  • गर्दन, छाती या पेट में गाँठ
  • आँखों का बाहर उभर आना या आँख के आसपास काले घेरे होना
  • पेट दर्द
  • चिड़चिड़ापन
  • भूख कम हो जाना
  • कब्ज
  • पैर में कमज़ोरी

न्यूरोब्लास्टोमा के अन्य लक्षणों में क्रॉनिक (पुराना)डायरिया, नेत्र संचालन में बदलाव, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, बुखार, घाव होना या होर्नर सिंड्रोम शामिल हैं।

होर्नर सिंड्रोम क्या है?

न्यूरोब्लास्टोमा से पीड़ित कुछ रोगियों में होर्नर सिंड्रोम विकसित हो सकता है। यह विकार तब होता है जब आँख के आसपास की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस सिंड्रोम के लक्षणों में पलक का गिरना, संकुचित पुतली और चेहरे के एक ओर के भाग में पसीना कम आना शामिल है। होर्नर सिंड्रोम के बारे में और अधिक जानें

ट्यूमर स्थान
लक्षण
आँख
आँख का बाहर उभर आना, आँख के आसपास काले घेरे (“रकून आँखें”), अंधापन, होर्नर सिंड्रोम
गर्दन
गाँठ या सूजन, होर्नर सिंड्रोम
पेट
गाँठ, भूख न लगना, उल्टी होना, कब्ज
श्रोणि
शौच-संबंधी व्यवहार में बदलाव; आंत या मूत्राशय संबंधी समस्याएं
रीढ़-संबंधी
कमजोरी, लकवा

न्यूरोब्लास्टोमा रोग की पहचान करना

न्यूरोब्लास्टोमा रोग की पहचान करने के लिए कई प्रकार की प्रक्रियाओं और जांचों का उपयोग किया जाता है। इनमें शामिल है:

  • लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों के बारे में जानने के लिए स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक जांच।
  • खून और मूत्र में पदार्थों को देखने के लिए लैब अध्ययन। इनमें कंप्लीट ब्लड काउंट तथा गुर्दे और जिगर की क्रिया के माप शामिल होते हैं।

न्यूरोब्लास्टोमा में, चिकित्सक वैनिल्लैंडैंडेलिक एसिड (वीएमए) और होमोवैनिलिक एसिड (एचवीए) के लिए मूत्र की जांच करेगा। ये पदार्थ अनुकंपी तंत्रिका तंत्र के कैटिकोलामाइंस नामक हार्मोन के टूटने से उत्पन्न होते हैं। कैटिकोलामाइंस, न्यूरोब्लास्ट द्वारा स्रावित होते हैं। इसलिए, न्यूरोब्लास्टोमा से पीड़ित बच्चों में अक्सर इन रसायनों के उच्च स्तर देखे जाते हैं। इन पदार्थों का उपयोग इलाज के प्रति प्रतिक्रिया को मॉनिटर करने के लिए भी किया जा सकता है।

  • स्मृति, देखने, सुनने, मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, समन्वय और प्रतिवर्ती क्रियाओं सहित मस्तिष्क के कार्यों के विभिन्न पहलुओं को मापने के लिए तंत्रिका संबंधी परीक्षण।
  • ट्यूमर का पता लगाने तथा अन्य जांचों और इलाज का निर्धारण करने में मदद के लिए इमेजिंग जांचें।
    • एक्स-रे शरीर के छाती और पेट जैसे विभिन्न भागों के चित्र लेने के लिए विद्युत चुंबकीय ऊर्जा का उपयोग करता है।
    • अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग़्राफ़ी शरीर के ऊतकों की छवि बनाने के लिए ध्वनि तंरगों का उपयोग करती है।
    • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी या कैट स्कैन) शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की अनुप्रस्थ परिच्छेदन (क्रॉस-सेक्शनल) छवियां बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करती है। इसमें मशीन एक बहुत ही विस्तृत छवि का निर्माण करने के लिए बहुत सी तस्वीरें लेती है। छवियां शरीर की विभिन्न “स्लाइस” की श्रृंखला के रूप में ली जाती हैं और उन्हें कंप्यूटर द्वारा एक साथ रखा जाता है। इन स्लाइस या खंड से छोटे से छोटे ट्यूमर भी देखे जा सकते हैं।
    • मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) रेडियो तरंगों और चुंबकों का उपयोग करते हुए शरीर के विस्तृत रूप से वर्णित चित्र बनाती है। छवियों से चिकित्सकों को ट्यूमर का बेहतर अवलोकन प्राप्त करने और इलाज की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
    • शरीर के अन्य भागों में बीमारी का पता लगाने के लिए हड्डी के स्कैन, पैट स्कैन, या एमआईबीजी स्कैन सहित पूरे शरीर की इमेजिंग का उपयोग किया जाता है।
एमआईबीजी स्कैन छवि में दर्शाया गया न्यूरोब्लास्टोमा

एमआईबीजी स्कैन छवि में दर्शाया गया न्यूरोब्लास्टोमा।

एक न्यूरोब्लास्टोमा रोगी का, सामने की ओर से पूरे शरीर का एमआईबीजी स्कैन या अग्रभाग दृश्य।

एक न्यूरोब्लास्टोमा रोगी का, सामने की ओर से पूरे शरीर का एमआईबीजी स्कैन या अग्रभाग दृश्य।

एमआईबीजी स्कैन क्या है?

एमआईबीजी अक्षरों का अर्थ है मेटा- आयोडोबेंज़िलग्विनडाइन, एक ऐसा प्रोटीन जिसे अधिकांश न्यूरोब्लास्टोमा कोशिकाओं द्वारा अवशोषित किया जाता है। रोगियों को एक ट्रेसर का इंजेक्शन दिया जाता है जिसमें एमआईबीजी होता है। एक विशेष कैमरा शरीर की छवियां बनाता है और जहां कोशिकाओं द्वारा एमआईबीजी लिया जाता है उस स्थान को हाइलाइट करता है। स्कैन पूरे शरीर में स्थित न्यूरोब्लास्टोमा कोशिकाओं को दिखा सकता है।

  • बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) में कैंसर कोशिकाएं हैं या नहीं यह देखने के लिए हड्डी के अंदर से बोन मैरो और टुकड़ा निकालना। चिकित्सक कूल्हे की हड्डी में एक पतली, खोखली सुई डालकर बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) के नमूने प्राप्त करेंगे। उस नमूने की एक रोगविज्ञानी माइक्रोस्कोप में जांच करता है।
  • रोग की सही पहचान करने के लिए अक्सर ट्यूमर की बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) की आवश्यकता पड़ती है। बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) में, चिकित्सक ट्यूमर से ऊतक का एक छोटा सा भाग निकालता है। उसके बाद कैंसर के संकेतों को देखने के लिए कोशिकाओं की माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। ट्यूमर के स्थान के आधार पर इन्सिज़्नल बायोप्सी (काट कर टुकड़ा निकालना) या कोर नीडल बायोप्सी (टीके से कैंसर का टुकड़ा निकालना) का उपयोग किया जा सकता है।

ट्यूमर का अध्ययन उन लक्षणों को देखने के लिए किया जाएगा जो न्यूरोब्लास्टोमा रोग की पहचान करने और उसके इलाज के लिए आवश्यक होते हैं। कुछ न्यूरोब्लास्टोमा ट्यूमर अधिक आक्रामक होते हैं और उनके लिए गहन इलाज की आवश्यकता होती है। चिकित्सक कोशिकाओं की दिखावट और ट्यूमर में कुछ वंशाणु परिवर्तन हुए हैं या नहीं, इसके आधार पर ट्यूमर इलाज के प्रति कैसे प्रतिक्रिया कर सकता है इसकी पूर्व-सूचना दे सकते हैं।

न्यूरोब्लास्टोमा के स्तर का पता लगाना

न्यूरोब्लास्टोमा में, कई तरीके हैं जिनसे बीमारी को वर्गीकृत किया जा सकता है।

इंटरनेशनल न्यूरोब्लास्टोमा स्टेजिंग सिस्टम (आईएनएसएस) ट्यूमर के स्थान, कैंसर के फैलने और सर्जरी के परिणाम के आधार पर न्यूरोब्लास्टोमा के स्तर का निर्धारण करता है। 

स्तर कैंसर का फैलना
स्तर I ट्यूमर एक ही क्षेत्र तक सीमित रहता है और यह सर्जरी द्वारा पूरी तरह से निकल जाता है।
स्तर II 2A: ट्यूमर एक ही क्षेत्र तक सीमित रहता है लेकिन यह सर्जरी द्वारा पूरी तरह से नहीं निकलता है।
2B: ट्यूमर को सर्जरी द्वारा पूरी तरह से निकाला जा सकता है, लेकिन आसपास की लसिका ग्रंथियों में कैंसर कोशिकाएं पायी जाती हैं।
स्तर III ट्यूमर को सर्जरी द्वारा पूरी तरह से नहीं निकाला जा सकता है और कैंसर शरीर के दूसरी तरफ लसिका ग्रंथियों या अन्य ऊतक में फैला होता है। यदि ट्यूमर शरीर की मध्यरेखा (मध्य भाग) के पास में है, तो कैंसर शरीर के दोनों ओर की लसिका ग्रंथियों या ऊतक तक फैल जाता है।
स्तर IV 4: ट्यूमर दूर स्थित लसिका ग्रंथियों, हड्डी, बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है), जिगर, त्वचा और/या अन्य अंगों में फैल चुका होता है
4S: बच्चा 1 वर्ष से कम आयु का है। मूल ट्यूमर वहीं स्थित रहता है जहां वह शुरू हुआ था (स्तर 1 या 2)। ट्यूमर केवल त्वचा, जिगर या बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) में (कम मात्रा) तक फैला है। आमतौर पर बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) का 10% से भी कम भाग प्रभावित होता है।

इंटरनेशनल न्यूरोब्लास्टोमा रिस्क समूह स्टेजिंग सिस्टम (आईएनआरजीएसएस), सर्जरी के परिणामों का उपयोग किए बिना कैंसर के स्तर का निर्धारण करता है। यह सिस्टम ट्यूमर के स्थान और कैंसर के फैलाव पर आधारित है। इमेजिंग जांचों का उपयोग छवि निर्धारित जोखिम कारकों (ट्यूमर को निकालना कितना जोखिमपूर्ण होगा इसका एक पूर्वानुमान) के आधार पर स्तर का निर्धारण करने के लिए किया जाता है।

स्तर कैंसर का फैलना
स्तर L1
एक जगह या अंग तक सीमित
ट्यूमर जिस जगह पर उत्पन्न हुआ था वहां से फैला नही है। यह महत्वपूर्ण संरचनाओं में विकसित नहीं हुआ है। यह शरीर के एक कम्पार्टमेंट तक सीमित है जैसे गर्दन, छाती, पेट या पेडू।
स्तर L2
एक जगह या अंग तक सीमित
इमेजिंग जांचें छवि निर्धारित एक या अधिक जोखिम कारकों की उपस्थिति को दर्शाती हैं। ट्यूमर आसपास की संरचनाओं में फैला हुआ हो सकता है या शरीर के दो कम्पार्टमेंट में पाया जा सकता है।
स्तर M
मेटास्टैटिक (कैंसर फैला हुआ है)
ट्यूमर शरीर के दूरस्थ भागों तक फैल गया है। इसमें MS के रूप में वर्गीकृत ट्यूमर के अलावा सभी मेटास्टैटिक रोग शामिल होते हैं।
स्तर MS
मेटास्टैटिक (कैंसर फैला हुआ है)
18 महीने से कम आयु के बच्चों के लिए: मेटास्टैटिक रोग जो त्वचा, जिगर और/या केवल बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) के छोटे से भाग तक सीमित होता है।

न्यूरोब्लास्टोमा जोखिम समूह

चिकित्सक न्यूरोब्लास्टोमा को वर्गीकृत करने और इलाजों की योजना बनाने के लिए जोखिम समूहों का भी उपयोग करते हैं। उच्च जोखिम का अर्थ ट्यूमर के वापस आने की अधिक संभावना होना है। उच्च जोखिम न्यूरोब्लास्टोमा वाले रोगियों को अधिक गहन चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

जोखिम समूह निर्धारित करने वाले कारकों में निम्नलिखित कारक शामिल हैं:

  • रोगी की आयु
  • बीमारी का स्तर
  • ट्यूमर की विशेषताएं

बच्चों के ऑन्कोलॉजी समूह द्वारा रोग के वापस आने वाले समूहों के जोखिम के बारे में और अधिक जानें।

ट्यूमर की विशेषताएं और न्यूरोब्लास्टोमा जोखिम

न्यूरोब्लास्टोमा ट्यूमर की जैविक और शरीरकोष विज्ञान संबंधी विशेषताएं इलाज के परिणामों को प्रभावित करती हैं। MYCN जीन प्रवर्धन सहित ट्यूमर की कुछ आनुवंशिक विशेषताएं उच्च जोखिम के साथ जुड़ी हुई हैं। ट्यूमर का शरीरकोष विज्ञान, और माइक्रोस्कोप में कोशिकाएं जिस प्रकार की दिखाई देती हैं, वे जोखिम को प्रभावित करते हैं।

पहचाने गए जोखिम कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • उम्र
  • स्तर 
  • ट्यूमर हिस्टोलॉजी (शरीरकोष विज्ञान)
  • MYCN स्थिति 
  • ट्यूमर गुणसूत्र
  • डीएनए इंडेक्स – एक सामान्य कोशिका में डीएनए सामग्री की तुलना में एक ट्यूमर कोशिका में डीएनए सामग्री की मात्रा।

न्यूरोब्लास्टोमा के लिए पूर्वानुमान

न्यूरोब्लास्टोमा के बाद स्वास्थ्य लाभ होने की संभावना कई कारकों पर निर्भर करती है:

  • रोग की पहचान करने के समय बच्चे की आयु (छोटी आयु बेहतर परिणामों के साथ जुड़ी होती है)
  • शरीरकोष विज्ञान, वंशाणु परिवर्तन और कोशिकाओं के बढ़ने की तीव्रता सहित ट्यूमर की विशेषताएं। 
  • जोखिम समूह: निम्न, मध्यम या उच्च
  • ट्यूमर का स्थान
  • कैंसर लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों में फैला है (मेटास्टैटिक) या नहीं
  • ट्यूमर को पूरी तरह से निकालने की सर्जरी की क्षमता
  • ट्यूमर इलाज के प्रति कैसी प्रतिक्रिया करता है
  • क्या कैंसर दुबारा हुआ है (वापस आया है) और पुनरावृत्ति से पहले कितना समय गुजर चुका है

न्यूरोब्लास्टोमा का इलाज

न्यूरोब्लास्टोमा का इलाज बच्चे की आयु, ट्यूमर के स्थान, ट्यूमर की विशेषताओं (वंशाणु परिवर्तन और शरीरकोष विज्ञान)और बीमारी के स्तर पर निर्भर करता है। ये कारक न्यूरोब्लास्टोमा जोखिम समूह (कम, मध्यम या उच्च) और इलाज की योजनाओं को निर्धारित करने में मदद करते हैं।

न्यूरोब्लास्टोमा के इलाज विकल्पों में निम्नलिखित शामिल हैं:

बहुत छोटी आयु के, निम्न जोखिम वाले रोगियों को सक्रिय इलाज देने के बजाए उन पर नज़र रखकर उनकी निगरानी की जा सकती है। कुछ स्थितियों में, न्यूरोब्लास्टोमा अपने आप ही जा सकता है (कम होना)। हालांकि, ऐसा बहुत कम ही होता है, इसके लिए ट्यूमर के विकास को देखने हेतु रोगियों पर बहुत बारीकी से नज़र रखी जाएगी।

  1. संभव होने पर ट्यूमर को निकालने के लिए सर्जरी का उपयोग किया जाता है। पीछे बिल्कुल भी कैंसर न छोड़ने के प्रयास में ट्यूमर को घेरने वाले आसपास के ऊतक को थोड़ी मात्रा में निकाला जा सकता है। एकल ट्यूमर जो फैले नहीं हैं, उनसे ग्रस्त रोगियों का इलाज अकेले सर्जरी से ही किया जा सकता है। हालांकि, ट्यूमर को, विशेषकर कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) न्यूरोब्लास्टोमा में, पूरी तरह से निकालना संभव नहीं हो सकता है। ऐसी स्थितियों में, अतिरिक्त इलाज की आवश्यकता होती है।

  2. कीमोथेरेपी (“कीमो”) न्यूरोब्लास्टोमा का प्रमुख इलाज है, खासतौर पर मध्यम और उच्च जोखिम वाली बीमारी में। ये दवाइयां कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं या उन्हें बढ़ने से तथा और अधिक कैंसर कोशिकाएं बनाने से रोकती हैं। कैंसर का इलाज करने के लिए एक से अधिक प्रकार की दवाइयों का उपयोग किया जाएगा। अधिकांश कीमोथेरेपी इंजेक्शन के माध्यम से दी जाती हैं लेकिन कुछ कीमोथेरेपी मुंह के जरिए भी दी जा सकती हैं। उच्च जोखिम वाली बीमारी में, ट्यूमर को छोटा करने के लिए आमतौर पर कीमोथेरेपी सर्जरी से पहले दी जाती है। कीमोथेरेपी को अक्सर, शेष बची कैंसर कोशिकाओं को निकालने के लिए और ट्यूमर को वापस होने से रोकने में मदद के लिए सर्जरी के बाद भी दिया जाता है।

    न्यूरोब्लास्टोमा में अक्सर उपयोग की जाने वाली कीमोथेरेपी दवाओं में कार्बोप्लैटिन, साइक्लोफॉस्फोमाइड, डॉक्सोरूबिसिन, इटॉप्साइड, टोपोटेकन, सिस्प्लेटिन, और विन्क्रिस्टाईन शामिल हैं।

  3. उच्च-जोखिम वाले कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) बीमारी के इलाज के रूप में अक्सर स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के साथ उच्चस्तरीय कीमोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। इस इलाज में, रोगियों से इलाज के आरंभिक चरणों में ही स्टेम सेल एकत्र कर लिए जाते हैं और उन्हें भावी प्रत्यारोपण के लिए संग्रहित कर लिया जाता है। आरंभिक इलाजों (आमतौर पर कीमोथेरेपी और सर्जरी) के बाद, शेष बची कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कीमोथेरेपी की बहुत अधिक खुराकें दी जाती हैं। रोगी को इसके बाद उनकी बोन मैरो कोशिकाओं को इस अत्यधिक उच्च खुराक वाली (‘माइलोएबलेटिव’) थेरेपी से बचाने के लिए निषेचन द्वारा स्टेम सेल दिए जाते हैं।

  4. रेडिएशन थेरेपी का उपयोग अक्सर उच्च जोखिम वाले न्यूरोब्लास्टोमा के इलाज के लिए अन्य इलाजों के संयोजन में किया जाता है। क्योंकि इन ट्यूमर में अक्सर महत्वपूर्ण अंग, संरचनाएं और रक्त वाहिकाएं शामिल होती हैं, इसलिए अक्सर इन्हें सर्जरी के द्वारा पूरी तरह से निकाला नहीं जा सकता। इसलिए, मुख्य ट्यूमर के स्थल पर उपस्थित शेष कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने और कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) रोग का इलाज करने के लिए रेडिएशन दी जाती है।

  5. न्यूरोब्लास्टोमा के इलाज में प्रतिरक्षा बढ़ाने के उपचार (इम्यूनोथेरेपी) का अध्ययन किया जा रहा है। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी इलाज विशेष प्रोटीनों का उपयोग करता है जो कैंसर कोशिकाओं से जुड़ जाते हैं। प्रतिरक्षा कोशिकाएं तब कैंसर कोशिका को पहचानने और मारने में सक्षम होती हैं।

बच्चों को बीमारी के परीक्षण के भाग के रूप में न्यूरोब्लास्टोमा का इलाज दिया जा सकता है।

न्यूरोब्लास्टोमा इलाजों की योजना जोखिम समूहों के अनुसार बनाई जाती है:

जोखिम श्रेणी
% नए रोगी
मुख्य इलाज
पूर्वानुमान
निम्न जोखिम
40%
  • निगरानी
  • सर्जरी
>95% उत्तरजीविता
मध्यम जोखिम
15%
  • सर्जरी
  • कीमोथेरेपी
>90% उत्तरजीविता
उच्च जोखिम
45-50%
  • सर्जरी
  • कीमोथेरेपी
  • स्टेम सेल बचाव के साथ उच्चस्तरीय कीमोथेरेपी
  • प्रतिरक्षा बढ़ाने का उपचार (इम्यूनोथेरेपी)
  • रेडिएशन थेरेपी
<60% उत्तरजीविता

न्यूरोब्लास्टोमा के बाद जीवन

रोग के दुबारा होने की निगरानी

उच्च जोखिम रोग वाले रोगियों को रोग के वापस आने का अधिक खतरा होता है। निम्न-जोखिम के रोग वाले रोगियों में, रोग के दुबारा होने की संभावना 5-15% तक होती है। हालांकि, उच्च जोखिम वाले रोगियों के लिए, रोग के वापस आने का जोखिम 50% जितना अधिक होता है। न्यूरोब्लास्टोमा में रोग की पुनरावृत्ति इलाज समाप्त होने के बाद के पहले 2 वर्षों में सबसे अधिक आम होती है। इलाज पूरा होने के 5 वर्ष बाद तक कैंसर का कोई प्रमाण न होने पर रोग का वापस आना दुर्लभ होता है। 

रोगियों को इलाज समाप्त होने के बाद, रोग के दुबारा होने की जांच के लिए नियमित फॉलो-अप देखभाल की जाएगी। चिकित्सीय टीम आवश्यक जांचों की बारंबारता और प्रकारों के लिए विशेष सुझाव देगी।

कैंसर के बाद स्वास्थ्य 

रोग से बचे लोग जिनका इलाज पूरे शरीर में कीमोथेरेपी या रेडिएशन द्वारा किया गया था, उनकी तीव्र या देर से होने वाले प्रभावों के लिए निगरानी की जानी चाहिए। इलाज के कारण होने वाली संभावित समस्याओं में सुनाई न देना, हृदय से संबंधित समस्याएं और गुर्दे खराब होना शामिल हैं। 

बचपन में होने वाले कैंसर के उत्तरजीविता अध्ययन के अनुसार, रोग से ठीक होकर जीवित रहने वाले लगभग 25% लोगों में रोग की पहचान किए जाने के 25 वर्ष बाद भी गंभीर क्रॉनिक (पुराना) स्वास्थ्य संबंधित स्थितियां मौजूद रहती हैं। इन स्थितियों में दूसरी बार होने वाले कैंसर (रेडिएशन के संपर्क में आने के बाद जोखिम में वृद्धि), कोंजेस्टिव हृदय विफलता, बांझपन या गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं और अंतिम-स्तर की गुर्दे की बीमारी या गुर्दे का काम न करना शामिल हैं।

एक प्राथमिक देखभाल चिकित्सक द्वारा नियमित शारीरिक जांच करवाना स्वास्थ्य समस्याओं पर नज़र रखने के लिए महत्वपूर्ण है जो इलाज के कई साल बाद विकसित हो सकती हैं।


समीक्षा की गई: जून 2018