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बच्चों और किशोरों में एस्ट्रोसाइटोमा

एस्ट्रोसाइटोमा क्या है?

एस्ट्रोसाइटोमा मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस के ट्यूमर हैं जो एस्ट्रोसाइट नामक कोशिकाओं से विकसित होते हैं। एस्ट्रोसाइट ग्लायल सेल का एक प्रकार हैं जो मस्तिष्क के सहायक ऊतक का निर्माण करती हैं। एस्ट्रोसाइटोमा बच्चों में होने वाला सबसे आम प्रकार का मस्तिष्क का कैंसर है। बच्चों में होने वाले सभी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस) ट्यूमर में से लगभग आधे ट्यूमर एस्ट्रोसाइटोमा के होते हैं।

एस्ट्रोसाइटोमा कहां विकसित होता है? एस्ट्रोसाइटोमा ट्यूमर सेरेबेलम, सेरेब्रम, ब्रेनस्टेम, हाइपोथेलेमस, ऑप्टिक पाथवे या रीढ़ के अंदर की नस में विकसित हो सकते हैं।

एस्ट्रोसाइटोमा कहां विकसित होता है? एस्ट्रोसाइटोमा ट्यूमर सेरेबेलम, सेरेब्रम, ब्रेनस्टेम, हाइपोथेलेमस, ऑप्टिक पाथवे या रीढ़ के अंदर की नस में विकसित हो सकते हैं।

बच्चों में होने वाले एस्ट्रोसाइटोमा के प्रकार

बच्चों में होने वाले एस्ट्रोसाइटोमा में ये ट्यूमर शामिल हैं:

  • पिलोसिटिक एस्ट्रोसाइटोमा (पीए)
  • डिफ्यूज़ एस्ट्रोसाइटोमा
  • प्लेमॉर्फिक ज़ैंथोएस्ट्रोसाइटोमा (पीएक्सए)
  • पिलोमिक्सॉइड एस्ट्रोसाइटोमा (पीएमए)
  • एनाप्लास्टिक एस्ट्रोसाइटोमा
  • ग्लिओब्लास्टोमा (जिसे ग्लिओब्लास्टोमा मल्टीफ़ॉर्म या जीबीएम भी कहा जाता है)
  • डिफ्यूज़ मिडलाइन ग्लिओमा (डीआईपीजी देखें)
 

एस्ट्रोसाइटोमा विकसित होने के स्थानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सेरेबेलम
  • सेरेब्रम
  • ब्रेनस्टेम
  • हाइपोथेलेमस
  • ऑप्टिक पाथवे - ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर भी देखें
  • रीढ़ के अंदर की नस

एस्ट्रोसाइटोमा को माइक्रोस्कोप के नीचे उनकी दिखावट के आधार पर कम-श्रेणी या उच्च-श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है। एस्ट्रोसाइटोमा के इलाजों में ट्यूमर को निकालने के लिए आमतौर पर सर्जरी शामिल होती है। किसी भी शेष बची कैंसर कोशिका को निकालने के लिए अक्सर सर्जरी के साथ कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जाता है। अन्य इलाजों का उपयोग ट्यूमर के प्रकार के आधार पर किया जा सकता है।

बाल चिकित्सा एस्ट्रोसाइटोमा के लिए जीवित रहने की दर टयूमर के प्रकार, इसके स्थान, क्या इसे सर्जरी से निकाला जा सकता है और क्या इस ट्यूमर प्रकार के लिए अन्य प्रभावी इलाज उपलब्ध हैं, इन सब पर निर्भर करती है।

एस्ट्रोसाइटोमा और ग्लिओमा

एस्ट्रोसाइटोमा, ग्लिओमा का एक प्रकार हैं। ग्लिओमा वे मस्तिष्क के कैंसर हैं जो ब्रेन के सहायक ऊतक का निर्माण करने वाली ग्लायल सेल से विकसित होते हैं। ग्लिओमा का नाम विशिष्ट प्रकार की ग्लायल सेल और मस्तिष्क में उनके होने के स्थान के आधार पर रखा जा सकता है। कभी-कभी, चिकित्सक इस मस्तिष्क के कैंसर का उल्लेख कम-श्रेणी ग्लिओमा या उच्च-श्रेणी ग्लिओमा के नाम से भी कर सकते हैं।

ग्लिओमा के प्रकारों में निम्नलिखित शामिल हैं:

 

एस्ट्रोसाइटोमा के लक्षण

बच्चों में होने वाले एस्ट्रोसाइटोमा के संकेत और लक्षण भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। कुछ ट्यूमर जब तक बहुत अधिक बढ़ नहीं जाते हैं तब तक उनके कोई लक्षण दिखाई नही देते। कुछ स्थितियों में, लक्षण बहुत धीरे-धीरे उत्पन्न हो सकते हैं और उनका पता लगाना मुश्किल हो सकता है, विशेष रूप से कम-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा में। और कभी-कभी, लक्षण बहुत अधिक गंभीर और तेज़ी से विकसित होने वाले हो सकते हैं, विशेष रूप से उच्च-श्रेणी या तेज़ी से बढ़ने वाले ट्यूमर की स्थितियों में।

एस्ट्रोसाइटोमा के लक्षण निम्नलिखित कारकों पर निर्भर कर सकते हैं जैसे बच्चे की आयु, ट्यूमर का स्थान, ट्यूमर का आकार और ट्यूमर के बढ़ने की गति।

बच्चों में एस्ट्रोसाइटोमा लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • सिरदर्द, जो अक्सर सुबह के समय अधिक होता है या उल्टी करने के बाद थोड़ा ठीक हो जाता है
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • दृष्टि से संबंधित समस्याएं
  • संतुलन में कमी और चलने में समस्या
  • कमज़ोरी, सुन्नपन, झुनझुनी या शरीर के एक ओर के भाग में परिवर्तन
  • व्यक्तित्व या व्यवहार में परिवर्तन
  • दौरे पड़ना
  • बोलने में परिवर्तन
  • सुनने में परिवर्तन
  • थकान या उनींदापन
  • स्कूल या कार्य प्रदर्शन में परिवर्तन
  • वजन में अकारण परिवर्तन (बढ़ना या कम होना)
  • एंडोक्राइन समस्याओं के कारण उत्पन्न होने वाले लक्षण जैसे अकारण ही अधिक प्यास लगना या समय से पहले जवानी शुरु होना
  • शिशुओं में सिर का आकार बढ़ जाना
  • तालू का पूरी तरह बढ़ा हुआ होना (खोपड़ी के शीर्ष पर मौजूद "कोमल भाग")

ट्यूमर जैसे-जैसे बढ़ता है, वह अक्सर रीढ़ की हड्डी में पानी के सामान्य प्रवाह को अवरुद्ध कर देता है। इसके कारण मस्तिष्क के अंदर पानी जमा होने लगता है जिसे हाइड्रोसिफ़लस के रूप में जाना जाता है। इस तरल से मस्तिष्क पर अधिक दवाब पड़ता है (इंट्राक्रेनियल दबाव)। एस्ट्रोसाइटोमा के कुछ लक्षण हाइड्रोसिफ़लस के कारण उत्पन्न होते हैं।

एस्ट्रोसाइटोमा रोग की पहचान

एस्ट्रोसाइटोमा रोग की पहचान करने में निम्नलिखित जांचें शामिल हैं:

  • शारीरिक जांच और चिकित्सकीय इतिहास से चिकित्सकों को लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने में मदद मिलती है।
  • जोखिम कारक: अधिकांश बच्चों के लिए, एस्ट्रोसाइटोमा का कोई ज्ञात कारण नहीं होता है। हालांकि, कुछ ऐसे कारक हैं जिनसे खतरा बढ़ सकता है। इन वंशागुनत स्थितियों में न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (एनएफ1) और ट्यूबरस स्क्लेरोसिस शामिल हैं। ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम से ग्रस्त बच्चों में एस्ट्रोसाइटोमा होने की संभावना भी अधिक होती है। मस्तिष्क में पहले दी गई रेडिएशन थेरेपी से भी खतरा बढ़ सकता है।
  • तंत्रिका-सम्बंधित जाँच, स्मृति, देखने, सुनने, मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, समन्वय और प्रतिवर्ती क्रियाओं सहित मस्तिष्क के कामों के विभिन्न पहलुओं को मापता है।
  • एक व्यापक नेत्र परीक्षण, नेत्र स्वास्थ्य और दृष्टि के विभिन्न पहलुओं का आकलन करता है। नेत्र परीक्षण से मस्तिष्क के आस-पास में बढ़े दबाव का भी पता लगाया जा सकता है।
  • ट्यूमर की पहचान करने, ट्यूमर कितना बड़ा है यह देखने और मस्तिष्क के कौन से भाग प्रभावित हो सकते हैं यह पता लगाने में मदद के लिए इमेजिंग जांचों का उपयोग किया जाता है।
  • मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) वह प्रमुख इमेजिंग तकनीक है जिसका उपयोग आमतौर पर एस्ट्रोसाइटोमा का आकलन करने के लिए किया जाता है। एमआरआई से बनी छवियों से ट्यूमर के प्रकार और रोग के संभावित प्रसार के बारे में अधिक जानकारी मिल सकती है। सर्जरी के बाद यह देखने के लिए भी एमआरआई किया जाता है कि कोई ट्यूमर बाकी तो नहीं रह गया है।
  • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी स्कैन) शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की अनुप्रस्थ परिच्छेदन (क्रॉस-सेक्शनल) छवियां बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करता है। इसमें मशीन एक बहुत ही विस्तृत छवि का निर्माण करने के लिए बहुत सी तस्वीरें लेती है। इससे अत्यधिक छोटे ट्यूमर भी दिखाई दे सकते हैं।
  • एस्ट्रोसाइटोमा रोग की पहचान करने के लिए आमतौर पर बायोप्सी का उपयोग किया जाता है। बायोप्सी में, सर्जरी के दौरान ट्यूमर का एक छोटा सा नमूना निकाला जाता है। उसके बाद रोगविज्ञानी एस्ट्रोसाइटोमा के विशिष्ट प्रकार और श्रेणी का पता लगाने के लिए उस ऊतक के नमूने को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर उसकी जांच करता है।
एस्ट्रोसाइटोमा के लिए आकार चिह्नांकनों के साथ अक्षीय एमआरआई

अक्षीय एमआरआई में चिह्नांकित एस्ट्रोसाइटोमा

चिह्नांकनों के साथ कोरोनल एमआरआई जो एक एस्ट्रोसाइटोमा का आकार दिखाते हैं

एस्ट्रोसाइटोमा के लिए आकार चिह्नांकनों के साथ कोरोनल एमआरआई

एस्ट्रोसाइटोमा की ओर इंगित करते तीरों के साथ एक ओर देखते हुए एमआरआई

एस्ट्रोसाइटोमा की एक ओर देखते हुए एमआरआई

एस्ट्रोसाइटोमा का श्रेणीकरण और स्तर का पता लगाना

एस्ट्रोसाइटोमा को माइक्रोस्कोप के नीचे उनकी दिखावट के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। ट्यूमर को श्रेणी I से लेकर श्रेणी IV तक में श्रेणीबद्ध किया जाता है। कोशिकाएं जितनी अधिक असामान्य दिखती हैं, उनकी श्रेणी उतनी ही उच्च होती है।

श्रेणी I और II के ट्यूमर को कम-श्रेणी का माना जाता है। कोशिकाएं कम आक्रामक दिखती हैं और धीमी गति से विकसित होने वाली होती हैं। कम-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा के लिए रोग का पूर्वानुमान सामान्य तौर पर ठीक होता है, विशेष रूप से बच्चों में।

श्रेणी III और IV ट्यूमर को उच्च-श्रेणी का माना जाता है। वे आक्रामक होती हैं और अधिक तेज़ी से विकसित होती हैं। कम-श्रेणी के ट्यूमर की अपेक्षा उच्च-श्रेणी के ट्यूमर का पूर्वानुमान अधिक खराब होता है। हालांकि, यह विशिष्ट प्रकार के ट्यूमर के लिए उपलब्ध इलाजों पर निर्भर करता है। 

बच्चों में अधिकांश एस्ट्रोसाइटोमा कम-श्रेणी के होते हैं। वयस्कों में, एस्ट्रोसाइटोमा अक्सर उच्च-श्रेणी का होता है।

ट्यूमर श्रेणी द्वारा एस्ट्रोसाइटोमा का वर्गीकरण

कम-श्रेणी के ट्यूमर
(श्रेणी I या II)
पिलोसिटिक एस्ट्रोसाइटोमा (पीए) / जुवेनाइल पिलोसिटिक एस्ट्रोसाइटोमा (जेपीए)
पिलोमिक्सॉइड एस्ट्रोसाइटोमा (पीएमए)
डिफ्यूज़ एस्ट्रोसाइटोमा / फ़ाइब्रिलेरी एस्ट्रोसाइटोमा
प्लेमॉर्फिक ज़ैंथोएस्ट्रोसाइटोमा (पीएक्सए)
सबएपेंडिमल जाइंट सेल एस्ट्रोसाइटोमा
उच्च-श्रेणी के ट्यूमर
(श्रेणी III या IV)
एनाप्लास्टिक एस्ट्रोसाइटोमा (एए)
एनाप्लास्टिक प्लेमॉर्फिक ज़ैंथोएस्ट्रोसाइटोमा
ग्लिओब्लास्टोमा / ग्लिओब्लास्टोमा मल्टीफ़ॉर्म (जीबीएम)
डिफ्यूज़ मिडलाइन ग्लिओमा (डीआईपीजी)

पिलोसिटिक एस्ट्रोसाइटोमा क्या है?

पिलोसिटिक एस्ट्रोसाइटोमा (या जुवेनाइल पिलोसिटिक एस्ट्रोसाइटोमा) बच्चों में पाया जाने वाला सबसे आम प्रकार का मस्तिष्क का कैंसर है। यह एक कम-श्रेणी का ट्यूमर है। इसके बढ़कर उच्च श्रेणी के ट्यूमर में बदलने की संभावना बहुत कम होती है। पिलोसिटिक एस्ट्रोसाइटोमा में 10 वर्ष के बच्चों में जीवित रहने की दर 90% है। हालांकि, बड़े बच्चों की अपेक्षा शिशुओं में रोग का पूर्वानुमान अक्सर मुश्किल ही होता है।

पिलोसिटिक एस्ट्रोसाइटोमा एक धीमी गति से बढ़ने वाला ट्यूमर है जो चरणों में विकसित होता प्रतीत होता है। बच्चों में, ये ट्यूमर अक्सर सेरेबेलम और ऑप्टिक पाथवे में होते हैं। पिलोसिटिक एस्ट्रोसाइटोमा का प्रमुख इलाज सर्जरी है। हालांकि, ट्यूमर के आस-पास की मस्तिष्क संरचना को नुकसान पहुंचने का खतरा होने के कारण सर्जरी से सभी ट्यूमर (जैसे ऑप्टिक पाथवे ग्लिओमा) को पूरी तरह से नहीं निकाला जा सकता है।

एस्ट्रोसाइटोमा के लिए पूर्वानुमान

निरोगी होने की संभावना, ट्यूमर के विशिष्ट प्रकार और उसके स्थान के आधार पर काफी भिन्न हो सकती है। कुछ कम-श्रेणी एस्ट्रोसाइटोमा में सफल सर्जरी के साथ जीवित रहने की दर 95% या उससे अधिक होती है। हालांकि, कुछ उच्च-श्रेणी एस्ट्रोसाइटोमा में जीवित रहने की दर 10-30% है।

निरोगी होने के अवसर को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ट्यूमर का प्रकार और श्रेणी। कम-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा बहुत अधिक धीमी गति से विकसित होते हैं और इनके दोबारा होने की संभावना कम होती है। उच्च-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा का इलाज करना कठिन हो सकता है और यह अक्सर दोबारा हो जाते हैं।
  • ट्यूमर का स्थान। मस्तिष्क या ब्रेनस्टेम में स्थित होने वाले ट्यूमर की अपेक्षा सेरेब्रम या सेरेबेलम में होने वाले ट्यूमर के ठीक होने की अधिक संभावना होती है। यह मुख्य रूप से ट्यूमर को सर्जरी से निकालने की जटिलता के आधार पर निर्भर करता है।
  • यदि सर्जरी ट्यूमर को पूरी तरह निकाल सकती है। रोग का पूर्वानुमान लगाने के लिए एक सबसे बड़ा कारक यह अनुमान लगाना है कि क्या सर्जरी से ट्यूमर को पूरी तरह निकाला जा सकता है। जिन बच्चों में ट्यूमर को पूरी तरह से काट कर निकाला गया है और सर्जरी के बाद उनमें कोई ट्यूमर नहीं देखा गया है, उनके ठीक होने की संभावना सबसे अधिक होती है।
  • रोग की पहचान के समय आयु। पूर्वानुमान पर आयु का प्रभाव विशिष्ट ट्यूमर प्रकार पर निर्भर करता है। छोटे बच्चों की तुलना में रोग की पहचान के समय 3 वर्ष से अधिक आयु वाले कम-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा से पीड़ित बच्चों में अक्सर बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं। उच्च-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा में, जिन रोगियों के रोग की पहचान छोटी आयु में ही हो जाती है वे बेहतर परिणाम देते हैं।
  • कैंसर फैला है या नहीं। वह कैंसर जो पूरे शरीर में अथवा मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी के अन्य भागों में फैल चुका है, उसका इलाज करना अधिक कठिन होता है।
  • क्या बच्चे को एनएफ1 है। कम-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा से पीड़ित रोगी जिन्हें न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (एनएफ1) है, वे उन रोगियों की अपेक्षा अक्सर बेहतर परिणाम देते हैं जो एनएफ1 से ग्रस्त नहीं हैं।
  • यदि कैंसर नया है या यदि यह फिर से हुआ है। पुनरावर्ती रोग का इलाज करना अधिक कठिन होता है।
  • ट्यूमर के आणविक लक्षण। ट्यूमर के वंशाणुओं और कोशिका आकृतियों में कुछ परिवर्तन रोग का इलाज करना सरल बना सकते हैं या इनसे कुछ नए उभरते इलाजों (जिसे लक्षित इलाज कहा जाता है) के अवसर मिल सकते हैं।

एस्ट्रोसाइटोमा का इलाज

एस्ट्रोसाइटोमा का इलाज ट्यूमर के प्रकार, उसके स्थान और क्या यह फैल चुका है या वापस हुआ है, इन सब बातों पर निर्भर करता है। आक्रामक ट्यूमर के लिए अधिक गहन इलाज की आवश्यकता होती है। डॉक्टर रोगी की आयु को भी ध्यान में रखते हैं। चिकित्सक कोशिश करते हैं कि बहुत छोटे बच्चों को रेडिएशन थेरेपी न देनी पड़े क्योंकि इससे गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने का अधिक खतरा होता है।

  1. एस्ट्रोसाइटोमा में ट्यूमर को यथासंभव अधिक से अधिक निकालने के लिए सर्जरी प्रमुख इलाज है। श्रेणी I ट्यूमर से पीड़ित रोगियों के लिए अकेले सर्जरी ही एक प्रभावी इलाज हो सकता है। इसका लक्ष्य ट्यूमर को पूरी तरह से सर्जरी/काट कर निकालना या उसे पूर्ण रूप से निकालना है। हालांकि, ट्यूमर के आस-पास की मस्तिष्क संरचना को नुकसान पहुंचने का खतरा होने के कारण सर्जरी से पूरे ट्यूमर को निकालना हमेशा संभव नहीं हो सकता है। कुछ स्थितियों में, ट्यूमर के स्थान की वजह से सर्जरी करना संभव नहीं होता।

  2. यदि सर्जरी करना संभव नहीं होता तो अक्सर सर्जरी के साथ या प्रमुख इलाज के रूप में कीमोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। बहुत छोटे बच्चों में, बच्चे के बड़े होने तक रेडिएशन थेरेपी को स्थगित करने के लिए कीमोथेरेपी का उपयोग किया जा सकता है।

    कीमोथेरेपी इलाज योजना, कैंसर के फैलने और ट्यूमर के आणविक लक्षणों जैसे कारकों पर निर्भर करती है। कम-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा के लिए उपयोग की जाने वाली कीमोथेरेपी में कार्बोप्लैटिन और विन्क्रिस्टाईन, साप्ताहिक विनाब्लास्टाइन या थायोगुआनिन, प्रोकार्बाज़िन, लोमुस्टिन और विन्क्रिस्टाईन (टीपीसीवी-नियम) शामिल हैं। अन्य प्रकार की कीमोथेरेपी का भी उपयोग किया जा सकता है, विशेष रूप से बीमारी के परीक्षण में। हालांकि, आमतौर पर अकेले कीमोथेरेपी कम-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा का इलाज नहीं करती है। यदि सर्जरी द्वारा नहीं निकाला जाए तो एस्ट्रोसाइटोमा एक दीर्घकालिक या क्रॉनिक रोग बन सकता है।

  3. रेडिएशन थेरेपी का उपयोग ट्यूमर के प्रकार, ट्यूमर के स्थान, और बच्चे की आयु के आधार पर किया जा सकता है। इसे अक्सर उच्च-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा की सर्जरी के बाद शेष बची कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है।

  4. लक्षित इलाज ट्यूमर कोशिकाओं के विशिष्ट लक्षणों पर क्रिया करते हुए या उन पर लक्ष्य साधते हुए कार्य करती हैं। ये दवाइयां कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने, विभाजित होने या संचारित होने से रोकने के लिए आणविक संकेतों और प्रक्रियाओं में परिवर्तन कर देती हैं। लक्षित इलाज मुख्य रूप से कम-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा के इलाज के रूप में उभर कर आ रही हैं।

    अधिकांश कम-श्रेणी एस्ट्रोसाइटोमा में, ट्यूमर की कोशिकाओं में बीआरएएफ वंशाणु में परिवर्तन होता देखा जाता है। बीआरएएफ वंशाणु, कोशिका वृद्धि और क्रिया के लिए आवश्यक प्रोटीन को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह वंशाणु परिवर्तन एक बीआरएएफ वी600ई बिंदु उत्परिवर्तन है या एक बीआरएएफ संलयन/द्विगुणन है। उत्परिवर्तन के प्रकार के आधार पर, ट्यूमर कोशिकाओं के बढ़ने में मदद करने वाले संकेतों को अवरोधित करने के लिए कुछ दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।

    एस्ट्रोसाइटोमा में अध्ययन की जा रही लक्षित इलाज में निम्नलिखित शामिल हैं:

    • बीआरएएफ वी600 वंशाणु उत्परिवर्तन वाले ट्यूमर के लिए बीआरएएफ इनहिबिटर जैसे वेमुराफेनिब और डब्राफेनिब का उपयोग किया जा सकता है।
    • एनएफ1 से ग्रस्त रोगियों में बीआरएएफ संलयन/द्विगुणन या कम-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा की स्थितियों में मेक इनहिबिटर जैसे सैलुमेटिनिब या ट्रैमेटिनिब का उपयोग किया जा सकता है। 
    • एमटोर इनहिबिटर एवरोलिमस या सिरोलिमस कम-श्रेणी के एस्ट्रोसाइटोमा में, विशेष रूप से ट्यूबरस स्क्लेरोसिस कॉम्प्लेक्स (टीएससी) वाले रोगियों में प्रभावी हो सकता है।
  5. प्रतिरक्षा बढ़ाने का उपचार (इम्यूनोथेरेपी) इलाज का वह प्रकार है जो कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उन पर हमला करने के लिए शरीर की खुद की प्रतिरक्षा प्रणाली का उपयोग करता है। एस्ट्रोसाइटोमा में अध्ययन की जा रही प्रतिरक्षा बढ़ाने का उपचार (इम्यूनोथेरेपी) दवाओं के उदाहरण चेकपॉइंट इनहिबिटर हैं। ये दवाइयां कैंसर कोशिकाओं से मिलने वाले आवेगों को अवरोधित करती हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को हमला न करने के संकेत देते हैं।

लक्षणों के प्रबंधन में मदद के लिए स्टेरॉयड और दौरे की दवाओं की ज़रूरत पड़ सकती है। एस्ट्रोसाइटोमा के कारण हाइड्रोसिफ़लस से ग्रस्त कुछ बच्चों में रीढ़ की हड्डी में पानी को जमा होने से रोकने के लिए उनके मस्तिष्क में शंट लगाया जा सकता है। शंट एक छोटी सी नली होती है जो मस्तिष्क से पानी को निकालती है।

एस्ट्रोसाइटोमा से पीड़ित रोगियों की देखभाल में सहायता सेवाओं के उपयुक्त संदर्भ शामिल होने चाहिए जैसे अंतःस्रावविकी, नेत्र विज्ञान, पुनर्सुधार इलाज, स्कूल सेवाएं और मनोविज्ञान

बाल-रोग एस्ट्रोसाइटोमा के बाद जीवन

एस्ट्रोसाइटोमा से पीड़ित बच्चों में स्वास्थ्य लाभ और उसके दीर्घकालिक प्रभाव ट्यूमर के प्रकार और प्राप्त इलाजों पर निर्भर करते हैं। रोगी में रोग की पुनरावृत्ति या प्रगति पर नज़र रखने के लिए जारी फॉलो-अप देखभाल, लेबोरेट्री जांचें और नियमित इमेजिंग की आवश्यकता होती है। देखभाल टीम, ट्यूमर के प्रकार, इलाज की प्रतिक्रिया और रोगी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के आधार पर एक कार्य-योजना निर्धारित करेगी।

एक दीर्घकालिक रोग के रूप में बाल-रोग कम-श्रेणी का एस्ट्रोसाइटोमा

कम-श्रेणी का एस्ट्रोसाइटोमा या ग्लिओमा अक्सर एक क्रॉनिक या दीर्घकालिक रोग होता है। यद्यपि कम-श्रेणी ग्लिओमा से जीवित रहने की संपूर्ण दर उच्च होती है, ट्यूमर अक्सर वापस आ जाता है या समय के साथ बढ़ता जाता है। रोगी को कई वर्षों तक चलने वाली अनुवर्ती कार्रवाई में अतिरिक्त इलाजों की आवश्यकता पड़ सकती है। जिसका अर्थ यह है कि रोगी को अधिक इलाज- या ट्यूमर- संबंधित जटिलताओं का खतरा रहता है। कई बार ऐसा भी हो सकता है जब स्कैन पर ट्यूमर बढ़ा हुआ दिखाई दे, लेकिन देखभाल टीम इलाज की बजाय निगरानी (सतर्क प्रतीक्षा) की सलाह दे। रोगी, परिवार और देखभाल टीम के बीच अच्छा संवाद और विश्वास, निर्णय लेने और रोग प्रबंधन में सहायता करने के लिए महत्वपूर्ण होता है।

 

दीर्घकालिक स्वास्थ्य और जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत रोगी की ज़रूरतों को पूरा करने में एक बहुविषयक टीम मदद कर सकती है। थेरेपी के बाद के वर्षों में हो सकने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर नज़र रखने के लिए उत्तरजीविता के दौरान नियमित जांच और स्क्रीनिंग आवश्यक होती हैं।

और अधिक जानकारी: मस्तिष्क के कैंसर के बाद जीवन


समीक्षा की गई: जुलाई 2019