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Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

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कैंसर के बारे में अपने बच्चे से बात करना

अपने बच्चे के साथ कैंसर के बारे में बात करते समय तीन सिद्धांतों को ध्यान में रखें।

  • सच्चे रहें और खुलकर बात करें
  • ऐसे शब्दों का उपयोग करके अपने बच्चे को कैंसर और इलाज के बारे में समझायें, जिन्हें आपका बच्चा समझ सके
  • अपने बच्चे की आयु और विकास की अवस्था के अनुसार जानकारी साझा करें
अस्पताल के बिस्तर पर कैंसर पीड़ित छोटा बच्चा मुस्कुराते हुए, हाथों में कुत्ते का खिलौना पकड़े हुए और अपने पिता के साथ माथे को छूते हुए, जो कि फ़र्श पर घुटना टेक कर बिस्तर पर झुका हुआ है।

कैंसर से पीड़ित बच्चों को यह बताने की ज़रूरत होती है कि आपके लिए वे बहुत प्रिय हैं, आप उनके साथ हैं और उनके आस-पास ऐसे लोग हैं जो उनकी परवाह करते हैं।

सच्चा रहने और खुलकर बात करने का महत्व

आपके बच्चे के साथ सच्चा रहने और खुलकर बात करने से भरोसा बनेगा और आपके संबंध को मजबूत करेगा। अपने बच्चे को यह नहीं बताना कि वह कैंसर से पीड़ित है या उसे नकारात्मक जानकारी से बचाने की कोशिश करने की आपकी इच्छा हो सकती है। यह स्वाभाविक है कि आप अपने बच्चे को कुछ भी अप्रिय होने से बचाना चाहते हैं।

लेकिन बच्चे बहुत ही तेज़ निगरानी करने वाले वाले होते हैं। यहां तक कि ऐसा लगता है कि वे ध्यान नहीं दे रहे हैं लेकिन वे यह देखने के लिए कि क्या चल रहा है, अपने माता-पिता, देखभाल टीम के सदस्यों और परिवार के अन्य सदस्यों या बड़ो पर नज़र रखते हैं। यह बहुत संभव है कि आपके बच्चे के इलाज के दौरान एक समय पर, वह कैंसर शब्द (कर्मचारियों से, अस्पताल के किसी अन्य साथी या यहां तक कि परिवार और दोस्तों से भी) को सुनेंगे भले ही आप लोगों को इसका उपयोग न करने की चेतावनी दें। कई माता-पिता बताते हैं कि लोगों को कैंसर के बारे में बात करने से रोकने की कोशिश करने के बजाय बच्चे को कैंसर के बारे में समझाने में कम मेहनत लगती है और ऐसा करने से हर समय ध्यान रखने का तनाव दूर हो सकता है।

  • संवाद बनाए रखना कई कारणों से महत्वपूर्ण है क्योंकि जब कुछ गलत होता है,तो छोटे बच्चे भी यह समझ सकते हैं कि कुछ गलत है। यदि आप अपने बच्चे को यह नहीं बताएंगे कि क्या चल रहा है तो वे निश्चित रूप से धारणा बना लेंगे या अपनी कल्पना का उपयोग करेंगे। अक्सर वे जो कल्पना करते हैं वह सच्चाई से भी बदतर हो सकती है।
  • जब कुछ कठिनाई आती है तो बच्चे खुद को दोषी मानते हैं। उन्हें बताने की ज़रूरत होती है कि कैंसर उनकी गलती से नहीं हुआ है।
  • आपका बच्चा जितना ज़्यादा समझेगा चीज़ें उतनी ही कम डरावनी होंगी। बच्चे इलाज के साथ सहयोग करते हैं अगर वे जानते हैं कि यह उनकी मदद कैसे कर सकता है।
  • सच्चा होने से बच्चे की चिंता, भ्रम और अपराध की गलत धारणा कम होगी।

इसकी योजना बनाएं कि क्या कहना है और कैसे कहना है

आप जो कहने जा रहे हैं उसका अभ्यास करें। अपने बच्चे की देखभाल टीम से या आप जैसी स्थिति में रहने वाले किसी अन्य माता-पिता से सलाह लें।

आपके द्वारा जानकारी साझा करने का तरीका भी महत्वपूर्ण होता है। आपका बच्चा आपकी आवाज़ और चेहरे के भावों से बहुत कुछ जानेगा। जब आप अपने बच्चे के साथ बात करें तो शांत रहें। आँसू आना ठीक है लेकिन अगर आँसू आते हैं तो आप रोने की वजह बताएं। आप बच्चों को बता सकते हैं कि जब उनका बच्चा बीमार होता है तो माता-पिता का दुखी होना स्वाभाविक है या कि जब बहुत सारे बदलाव होते हैं तो लोगों का परेशान होना सामान्य है। आँसू भावनाओं को व्यक्त करने का एक ज़रिया हैं। बच्चों को आश्वस्त करना ज़रूरी है कि वे कैंसर का कारण नहीं हैं और लोगों के दुखी होने में उनकी कोई गलती नहीं है।

यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे से उनके कैंसर के रोग की पहचान करने के बारे में कैसे बात करते हैं। जब आप अपने बच्चे से बात करें तो शांत रहें। इस तस्वीर में बचपन में होने वाले कैंसर का मरीज अपनी माँ के साथ गेम खेल रहा है।

यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे से उनके कैंसर के रोग की पहचान करने के बारे में कैसे बात करते हैं। जब आप अपने बच्चे से बात करें तो शांत रहें।

सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे को कौन और कब बताएगा

कई माता-पिता को चिकित्सक से अपने बच्चे के रोग की पहचान करने के बारे में जैसे ही पता चलता हैं, उसी समय बच्चे को भी इस बारे में पता चल जाता है। लेकिन अगर आप अपने बच्चे को इसके बारे में सबसे पहले बताना चाहते हैं तो आपके बच्चे की देखभाल टीम आपको यह तय करने में मदद कर सकती है कि आपके बच्चे के सवालों के जवाब में क्या कहना है और कैसे जवाब देना है।

बच्चों को जल्द से जल्द बताएं। यह भरोसा बनाने में मदद करेगा।

जब आप पहली बार अपने बच्चे के साथ बात करते हैं, तो किसी दूसरे व्यक्ति को अपने साथ रहने के लिए कहें। यह व्यक्ति परिवार का अन्य सदस्य या विश्वसनीय दोस्त हो सकता है जो सहयोग दे सकता है। यह कोई चिकित्सक, नर्स, शिशु जीवन विशेषज्ञ या सामाजिक कार्यकर्ता भी हो सकता है जो कैंसर के बारे में अधिक विस्तार से बताने में मदद कर सकता है।

अपने बच्चे को कैंसर के बारे में क्या बताएं

अधिकांश बच्चों और किशोर उम्र के बच्चों के कुछ आम सवाल होते हैं:

  • कैंसर क्या है?
  • यह मुझे क्यों हुआ?
  • क्या मैं ठीक हो जाऊँगा/जाऊँगी?
  • क्या होने जा रहा है?
  • हम घर कब जा सकते हैं?
  • स्कूल की पढ़ाई का क्या होगा?

बच्चों को इलाज या प्रक्रियाओं को प्रबंधित करने, भावनाओं का सामना करने और उनकी स्थिति पर कुछ नियंत्रण रखने के लिए जानकारी की ज़रूरत होती है। सबसे ज़्यादा उन्हें यह बताने की ज़रूरत होती है कि आपके लिए वे बहुत प्रिय हैं, आप उनके साथ हैं और उनके आस-पास ऐसे लोग हैं, जो उनकी परवाह करते हैं।

अपने अंतर्मन पर विश्वास करें। आप अपने बच्चे को किसी और से बेहतर जानते हैं। आप उन्हें बताने का सबसे अच्छा तरीका जानते हैं। यहाँ पर कुछ उपयोगी सुझाव दिए गए हैं।

  • आयु के अनुसार उचित जानकारी दें। कैंसर केंद्र में शिशु जीवन विशेषज्ञ के साथ बात करने पर विचार करें। वे शिशु विकास में विशेषज्ञ होते हैं। वे आपको आयु के अनुसार उचित शब्दों का उपयोग करके कैंसर के बारे में  बताने में मदद कर सकते हैं और बच्चों को उनके विकास के स्तर के आधार पर कैंसर का सामना करने में मदद कर सकते हैं। वे खेलों के माध्यम से इलाज और चिकित्सा और विजुअल एड्स (उपकरण जो आँखों को देखने में सहायता करते हैं) का उपयोग करके  कैंसर के बारे में बता सकते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता, मनोविज्ञानी (साइकोलॉजिस्ट) और धार्मिक गुरु भी सहायता प्रदान कर सकते हैं।
  • एक समय में कितनी जानकारी साझा करनी है इस बारे में ध्यान से विचार करें। आमतौर पर यह अच्छा है कि "अति महत्वपूर्ण" जानकारी के साथ शुरू करें। अपने बच्चे को एक बार में ही बहुत सारी जानकारी देकर उन पर ज़्यादा दबाव डालने की कोशिश न करें। कई छोटी बातचीत करें। कई बच्चों के लिए बहुत सारी जानकारियों को एक साथ समझ पाना कठिन हो सकता है। आप समय के साथ-साथ और अधिक जानकारी साझा कर सकते हैं। अपने बच्चे के संकेतों पर नज़र रखें। अगर वे विषय को बदलते हैं या ध्यान भटकाने लगते हैं, तो शायद उन्हें उस समय पर्याप्त जानकारी मिल गई है। उन्हें भी सवाल पूछने का मौका दें ताकि बातचीत आगे बढ़ सके। प्रश्न पूछने के लिए सुरक्षित महसूस करना उनके लिए एक शानदार तरीका है जिससे वे दिखा सकते हैं कि वे अधिक जानकारी चाहते हैं और आपके लिए यह की वह क्या जानना चाहते हैं ।
  • अपने बच्चे की बीमारी, इलाज के बारे में बुनियादी तथ्यों को समझने और अपेक्षाओं को जानने में मदद करें।
  • उन सामान्य शब्दों के बारे में बताएं जिन्हें बच्चा नियमित रूप से सुनेगा, जैसे कि कैंसर, ट्यूमर, कीमोथेरेपी और दुष्प्रभाव
  • अपने बच्चे को भावनाओं को साझा करने और सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। अपने बच्चे के सवालों का जवाब देने और सच्चीबातचीत करते रहने से आपके बच्चे को कैंसर से डटकर मुकाबला करने में मदद मिल सकती है।
  • आप यह जान लें कि बच्चे कभी-कभी सवाल पूछने से डरते हैं। विभिन्न परिस्थितियों में उनकी प्रतिक्रियाएँ देखें। उदाहरण के लिए अगर बच्चे किसी बच्चे को बिना बाल के देखते हैं तो वे परेशान हो जाते हैं। इसका उपयोग उनकी भावनाओं के बारे में पूछने के अवसर के रूप में करें या अगर उनके कोई सवाल हों तो उन्हें जानने के लिए करें।
  • सत्य की और गलत जानकारी को दुरुस्त करके उनकी  पुष्टि करें। आपका बच्चा अपने स्वयं के रोगनिदान से पहले ही टीवी पर देखी परिस्थितियों या परिवार या दोस्तों से सुनी गई जानकारी के आधार पर कैंसर के बारे में पहले से ही विचार बना सकता है। अपने बच्चे से पूछें कि उसे कैंसर के बारे में पहले से पता है या नहीं।
  • आशा जगाएँ। कैंसर का सामना करने में उनकी मदद के लिए देखभाल टीम वहां मौजूद होती है। कैंसर को खत्म करने के लिए कई इलाज उपलब्ध हैं।
  • भाई-बहनों को न भूलें। याद रखें कि भाइयों और बहनों को भी समझाने की ज़रूरत होती है।

बच्चों की कैंसर के प्रति सामान्य प्रतिक्रियाएँ

प्रत्येक बच्चा अलग होता है। कैंसर के रोग की पहचान में वे कैसे व्यवहार करते हैं, यह उनकी उम्र, विकास का स्तर और व्यक्तित्व के आधार पर अलग-अलग होगा और उनकी प्रतिक्रियाएं भी इन्हीं बातों पर निर्भर करती हैं।

  • कुछ में स्पष्ट प्रतिक्रिया दिख सकती है जैसे कि रोना या गुस्सा करना।
  • कुछ बच्चे शांत हो सकते हैं।
  • कुछ अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करते हैं, कुछ अपनी क्रियाओं से व्यक्त करते हैं।
  • कुछ बच्चे फिर से वैसे ही व्यवहार करने लगते हैं जैसा वे अपने बचपन में करते हैं।
  • हर दिन अलग होता है। बच्चों का कार्यक्रम, उनके देखने और महसूस करने का तरीका और उनकी दोस्ती, सबकुछ बदल सकता है।
  • कुछ दिन कठिन होंगे। कुछ दिन ठीक-ठाक होंगे।

आप जैसा करेंगे बच्चे भी वैसा ही करेंगे। शांत और आश्वस्त रहने की कोशिश करें। अपने बच्चों  (भाई-बहनों सहित) को यह बताने और दिखाने के तरीके खोजें कि आप हमेशा उनके साथ रहेंगे।

कैंसर के बारे में सामान्य डर और गलत धारणाएं

कुछ सामान्य डर हैं जो कई बच्चों को कैंसर के बारे में जानने के बाद होते हैं। आपका बच्चा इन चिंताओं के बारे में बात करने से डर सकता है। आप बात करके उनके डर को बाहर ला सकते हैं। इन शब्दों से वाक्य की शुरुआत करें जैसे: कुछ बच्चे सोचते हैं ..., क्या आपने सुना है ...?

  • ग़लतफ़हमी — कैंसर उनकी गलती है। छोटे बच्चों में इस तरह से सोचना आम बात है कि कुछ “बुरा” करने, कहने या सोचने के कारण उन्हें कैंसर हुआ है। अपने बच्चे को बताएं कि उसने कुछ भी ऐसा नहीं किया, कहा या सोचा है जिसके कारण उसे कैंसर हुआ है। कैंसर कोई सजा नहीं है।
  • ग़लतफ़हमी — कैंसर संक्रामक है। अपने बच्चे को समझाएं कि लोग किसी और से कैंसर नहीं "पाते" हैं। बच्चों को कैंसर के बारे में आयु के अनुसार तथ्य बताएं।
  • ग़लतफ़हमी — हर कोई कैंसर से मर जाता है। आप समझा सकते हैं कि कैंसर एक गंभीर बीमारी है लेकिन लाखों लोग कैंसर से बच जाते हैं। अगर बच्चे किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो कैंसर से मर चुका है तो आप उन्हें बताए कि कैंसर कई प्रकार के होते हैं। हर किसी का कैंसर अलग-अलग होता है और उसके अलग-अलग नाम होते हैं और उसके लिए अलग-अलग तरह की दवाई की ज़रूरत होती है। आपको अपने बच्चे के इलाज के दौरान कई बार इन बातों को दोहराने की ज़रूरत पड़ सकती है।

जैसा कि आप अपने बच्चे को उनकी भावनाओं और सवालों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं वैसे हीअपनी भावनाओं और सवालों के बारे में खुलकर बात करें और सच्चे रहें।

आप अपने बच्चे के लिए जानकारी और सहारे का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं। 


समीक्षा की गई: जून 2018