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Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

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कंप्लीट ब्लड काउंट जांच

बचपन में होने वाले कैंसर के अधिकांश रोगियों की उनके इलाज के दौरान नियमित कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) जांचें होती हैं।

कैंसर थेरेपी जैसे कि कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी से बोन मैरो की रक्त कोशिका बनाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए नियमित कंप्लीट ब्लड काउंट जांच से देखभाल-टीम को रोगी के स्वास्थ्य और संक्रमण से लड़ने की क्षमता को मॉनिटर करने में मदद मिलती है। जब काउंट कम होता है, तो देखभाल-टीम इलाज प्रदान कर सकती है।

बोन मैरो वाले कैंसर के रोगियों में, रोगी की बीमारी और उसके इलाज के तरीके के बारे में काउंटिंग और रक्त कोशिका का अध्ययन करके जानकारी मिलती है।

कैंसर से पीड़ित बच्चों के लिए, नियमित कंप्लीट ब्लड काउंट जांच से देखभाल-टीम को रोगी के स्वास्थ्य और संक्रमण से लड़ने की क्षमता को मॉनिटर करने में मदद मिलती है। इस छवि में, एक नर्स नस में सुई लगाकर खून निकाल रही है और संलग्न शीशी में खून एकत्रित कर रही है।

कैंसर से पीड़ित बच्चों के लिए, नियमित कंप्लीट ब्लड काउंट जांच से देखभाल-टीम को रोगी के स्वास्थ्य और संक्रमण से लड़ने की क्षमता को मॉनिटर करने में मदद मिलती है।

कंप्लीट ब्लड काउंट जांच के दौरान क्या होता है

कंप्लीट ब्लड काउंट जांच के लिए, एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता ब्लड का एक नमूना लेता है। अगर रोगी के पास सेंट्रल वेनस एक्सेस डिवाइस (सेंट्रल लाइन, पोर्ट, या पेरिफ़ेरली इंसर्टेड सेंट्रल कैथेटर (पिक) है, तो उससे खून निकाला जा सकता है। अगर रोगी के पास ऐसा कोई उपकरण नहीं है, तो प्रदाता एक पेरिफ़ेरल आईवी शुरू कर सकता है या नस में सुई डालकर खून खींच सकता है और खून को संलग्न शीशियों या ट्यूबों (वेनीपंक्चर) में एकत्रित करता है।

रक्त कोशिकाओं का प्रकार और संबंधित स्थितियां

खून में 3 विभिन्न प्रकार की रक्त कोशिकाएं होती हैं, साथ ही प्लाज़्मा होता है, जो कि खून का तरल भाग होता है। रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होने से गंभीर स्वास्थ्य स्थितियां हो सकती है जैसे कि सफ़ेद कोशिकाओं की कमी, खून की कमी और थ्रोम्बोसाइटोपेनिया

लाल रक्त कोशिकाएं और खून की कमी

लाल रक्त कोशिकाएं ऑक्सीजन को ऊतक और शरीर के अंगों तक ले जाती हैं। लाल रक्त कोशिका काउंट सामान्य से कम होने पर खून की कमी होता है। खून की कमी के संकेतों और लक्षणों में थकान, साँस लेने में कठिनाई, नींद आना, सिरदर्द, दिल की धड़कन तेज़ होना और/या त्वचा का पीला पड़ना शामिल है। इस स्थिति के रोगियों को लाल रक्त कोशिकाओं के ट्रांसफ्यूज़न की आवश्यकता पड़ सकती है।

प्लेटलेट्स और थ्रोम्बोसाइटोपेनिया

प्लेटलेट्स, जो खून का थक्का जमने में मदद करते हैं। प्लेटलेट्स सामान्य से कम होने पर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया होता है। थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के संकेतों और लक्षणों में असामान्य खुजली, त्वचा के नीचे छोटे धब्बे (लाल दाने), लाल या गुलाबी मूत्र और लाल या काला मल आदि शामिल है। प्लेटलेट्स काउंट कम होने पर प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूज़न की आवश्यकता पड़ सकती है। 

सफेद रक्त कोशिका और सफ़ेद कोशिकाओं की कमी

सफेद रक्त कोशिकाएं संक्रमण से लड़ती हैं। सफेद रक्त कोशिका का सामान्य से कम काउंट होने से हानिकारक बैक्टीरिया, फफूंदी, विषाणु और बाहरी तत्वों से शरीर की लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है। सफेद रक्त कोशिका के कम काउंट के प्रकार को न्यूट्रोफ़िल कहा जाता है जिसके कारण सफ़ेद कोशिकाओं की कमी नामक स्थिति बनती है, जिसके होने पर अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है।

कंप्लीट ब्लड काउंट जांच क्या मापता है

कंप्लीट ब्लड काउंट जांच से निम्न चीजों को मापा जाता है:

  • लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) – लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या, आकार और लाल रक्त कोशिकाओं के प्रकार
  • सफेद रक्त कोशिका (डब्लूबीसी) – सफेद रक्त कोशिका की संख्या और प्रकार
  • प्लेटलेट्स – प्लेटलेट्स की संख्या और आकार
  • हीमोग्लोबिन – लाल रक्त कोशिकाओं में होने वाला एक लौह युक्त प्रोटीन जो ऑक्सीजन का वाहक होता है
  • हेमाटोक्रिट – खून में लाल रक्त कोशिकाएं कितना स्थान लेती हैं
  • रेटीक्यूलोसाइट काउंट – खून में नई लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या
  • मीन कॉर्पसकुलर वॉल्यूम (एमसीवी) – लाल रक्त कोशिकाओं का औसत माप

कंप्लीट ब्लड काउंट के साथ डिफ्रेंसल

कंप्लीट ब्लड काउंट के साथ डिफ्रेंसल में विभिन्न प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाओं का परीक्षण भी होते हैं:

  • न्यूट्रोफिल्स – ये कोशिकाएं सफेद रक्त कोशिका का सबसे आम प्रकार होती हैं। ये हमलावर विषाणु या कीटाणु से लड़ने के लिए संक्रमण के स्थान तक जाती हैं और एंज़ाइम नामक पदार्थों को छोड़ती हैं। न्यूट्रोफिलिस की एक गणना सारी न्युट्रोफिल की संख्या, जिसे एएनसी भी कहा जाता है। एएनसी काउंट को जानने से हमें यह देखने में सहायता मिलती है कि प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से कितनी अच्छी तरह से लड़ सकती है।
  • लिंफ़ोसाइट्स - लिंफ़ोसाइट्स के दो प्रमुख प्रकार होते हैं: बी सेल और टी सेल। बी सेल हानिकारक विषाणु, कीटाणु और विषैले तत्व से लड़ती हैं। टी सेल शरीर की ही उन कोशिकाओं को लक्षित और नष्ट करती हैं जो वायरस या कैंसर की कोशिकाओं द्वारा संक्रमित हो चुकी हैं।
  • मोनोसाइट्स – ये कोशिकाएं बाहरी चीज़ें निकालती हैं, मृत कोशिकाओं को निकालती हैं और शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाती हैं।
  • इयोस्नोफिल्स – ये कोशिकाएं संक्रमण, सूजन और एलर्जी की प्रतिक्रियाओं से लड़ती हैं। ये शरीर को किसी परजीवी और बैक्टीरिया से भी बचाती हैं।
  • बेसोफ़िलिस – ये कोशिकाएं एलर्जी प्रतिक्रियाओं और अस्थमा के दौरे को नियंत्रित करने में मदद करने वाले एंज़ाइम छोड़ती हैं।

इन विभिन्न प्रकार की रक्त कोशिकाओं के लिए सामान्य श्रेणियां, बच्चे की उम्र के आधार पर व्यापक रूप से भिन्न हो सकती हैं। देखभाल टीम अक्सर परिवारों के साथ इन परिणामों की समीक्षा कर सकती है।

रक्त कोशिकाओं की संख्या की निगरानी करना रोगी की इलाज योजनाओं का एक महत्वपूर्ण भाग है।

इस चित्रण में न्यूट्रोफ़िल कोशिकाएं कीटाणुओं को पहचान कर, रक्त वाहिकओं में घुसकर संक्रमण के स्थान पर जाती हैं और चिह्नित कीटाणुओं को नष्ट करती हैं।

न्यूट्रोफ़िल्स सबसे सामान्य प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं। ये हमलावर विषाणु या कीटाणु से लड़ने के लिए संक्रमण के स्थान तक जाती हैं और एंज़ाइम नामक पदार्थों को छोड़ती हैं।


समीक्षा की गई: जून 2018