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मूत्राशय पर देरी से होने वाले प्रभाव

बचपन में होने वाले कैंसर को हराने वाले अधिकतर लोगों को अपने कैंसर के इलाज के कारण मूत्राशय से जुड़ी परेशानियों का अनुभव नहीं होता है।

लेकिन कुछ थेरेपी मूत्राशय के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकती हैं।

मूत्राशय के काम करने का तरीका

  • मूत्राशय वह अंग है जो शरीर के मूत्र को संग्रहीत करता है।
  • गुर्दे खून से अपशिष्टों (ऐसे पदार्थ जिनकी ज़रूरत शरीर को नहीं है) को निकालते हैं और मूत्र यानी पेशाब बनाते हैं।
  • मूत्र, यूरेटर्स नामक नलिकाओं से होकर मूत्राशय तक पहुंचता है।
  • फिर मूत्र, मूत्रमार्ग के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है।
गुर्दे और मूत्राशय का आपस में जुड़े होने के तरीके से संबंधित एक ग्राफ़िक। गुर्दे के ऊपर अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) होती हैं। सबसे नीचे, यूरेटर्स के माध्यम से जो गुर्दे से जुड़ा है, वो मूत्राशय है।

गुर्दे खून से अपशिष्टों (ऐसे पदार्थ जिनकी ज़रूरत शरीर को नहीं है) को निकालते हैं और मूत्र यानी पेशाब बनाते हैं। मूत्र, यूरेटर्स नामक नलिकाओं से होकर मूत्राशय तक पहुंचता है। फिर मूत्र, मूत्रमार्ग के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है।

ऐसे कैंसर इलाज जो मूत्र से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकते हैं

पेशाब से जुड़ी परेशानियां, जो उभर सकती हैं

  1. मूत्राशय में जलन होने के कारण जब पेशाब में खून आने लगता है, तब ब्लैडर में रक्तस्राव (मूत्राशय से रक्तस्रावी) होता है।

    संकेतों और लक्षणों मे निम्नलिखित शामिल हैं:

    • पेशाब का रंग हल्के गुलाबी से हल्का लाल होता है।
    • कुछ लोगों को तुरंत पेशाब करने की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
    • कुछ लोगों को ऐसा महसूस हो सकता है कि वे अपने मूत्राशय में मौजूद पेशाब को पूरी तरह से अपने शरीर से नहीं निकाल सकते हैं।
    • आमतौर पर कोई दर्द नहीं होता है।

    इन संकेतों और लक्षणों के दिखाई देने पर रोगियों को अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को बताना चाहिए।

    कभी-कभी पेशाब में खून की मौजूदगी का पता लगाने के लिए परीक्षण करने आवश्यक होते हैं।

    हो सकता है कैंसर के इलाज के बाद सालों तक कभी यह स्थिति दिखाई दे, तो कभी न दिखाई दे। मूत्राशय से रक्तस्रावी के अधिकांश मामले कैंसर थेरेपी देने के दौरान सामने आते हैं। लेकिन यह एक गंभीर समस्या भी बन सकती है।

  2. ब्लैडर फ़ाइब्रोसिस असल में मूत्राशय में मौजूद टूटा-फूटा टिशू (ऊतक) है। ये टूटे-फूटे ऊतक बन सकते हैं और इनके कारण मूत्राशय की दीवारें मोटी हो सकती हैं। मूत्राशय के अंदर दबाव बढ़ सकता है और पेशाब को संग्रहीत करने और खाली करने की इसकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

    लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

    • मूत्राशय को खाली करने में कठिनाई
    • हल्के से पेशाब का निकल जाना
    • पेशाब में खून निकलना

    कभी-कभी इस समस्या के होने पर भी लक्षण नहीं दिखाई देते हैं।

    अगर रोगी में ब्लैडर फ़ाइब्रोसिस के लक्षण दिखाई देते हैं, तो प्राथमिक देखभाल प्रदाता उन्हें किसी मूत्र रोग विशेषज्ञ यानी यूरोलॉजिस्ट के पास भेज सकते हैं।

    अल्ट्रासाउंड में ये टूटे-फूटे ऊतक दिखाई दे सकते हैं। यूरोलॉजिस्ट एक सिस्टोस्कोपी कर सकता है। इसमें चिकित्सक पतले, हल्के ट्यूब की सहायता से सीधे मूत्राशय के अंदर देख पाते हैं।

  3. कैंसर के इलाज के परिणामस्वरूप मूत्राशय का कैंसर बहुत ही कम होता है।

    पेशाब में खून नज़र आना, इसका सबसे आम लक्षण है। रोगियों को तुरंत या बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता भी महसूस हो सकती है। एडवांस्ड कैंसर के लक्षणों में मूत्राशय के ऊपरी हिस्से पर, जननांग में या हड्डियों में दर्द होना शामिल है।

    इन लक्षणों को हराने वाले लोगों को अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से मिलना चाहिए।

अपने जोखिम को जानें और अपने स्वास्थ्य की निगरानी करें

बचपन में होने वाले कैंसर को हराने वाले लोगों की वार्षिक शारीरिक जांच होनी चाहिए। उन्हें अपने कैंसर से ठीक हुए लोगों की देखभाल की योजना (सर्वाइवर केयर प्लान) की एक कॉपी अपने चिकित्सक से साझा करनी चाहिए। इस प्लान में आपके कैंसर के इलाज से संबंधित विवरण शामिल होता है, जिसमें खून देने (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) और स्वास्थ्य से जुड़ी वे परेशानियां शामिल हैं जो आपके इलाज के कारण हो सकती हैं।

प्राथमिक देखभाल प्रदाता को पेशाब से जुड़े लक्षणों के बारे में तुरंत बताएं। इन लक्षणों में निम्न शामिल हैं:

  • पेशाब में खून (गुलाबी या लाल पेशाब)
  • बार-बार पेशाब करना या तुरंत पेशाब करने की आवश्यकता महसूस करना
  • पेशाब करने में परेशानी
  • मूत्राशय का पूरा खाली नहीं होना
  • पेशाब के दौरान दर्द होना

प्रदाता, पेशाब की जांच करने और संक्रमण की जांच करने के लिए पेशाब की जांच (यूरीन टेस्ट) कर सकते हैं।

अधिक तरल पीने से मूत्राशय को खाली होने में मदद मिल सकती है। लेकिन अगर आपको किडनी या दिल की समस्या है, तो अतिरिक्त तरल पीने से पहले अपने चिकित्सक से इस बारे में पूछें।

कॉफ़ी, चाय, कोला पेय और कैफ़ीन वाले अन्य पेय लेने से बचें।


समीक्षा की गई: दिसंबर 2019