आपका स्वागत है

Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

और अधिक जानें

हॉजकिन लिंफोमा

हॉजकिन लिंफोमा क्या है?

हॉजकिन लिंफोमा लसिका तंत्र में होने वाला एक कैंसर है। लसिका तंत्र, प्रतिरक्षा प्रणाली का एक भाग है।

यह अंगों और ऊतकों से मिलकर बनता है, जिनमें निम्नलिखित भी शामिल हैं:

  • लसिका ग्रंथियां
  • लसिका वाहिकाएं
  • टॉन्सिल
  • बाल्यग्रन्थि
  • बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है)
  • तिल्ली / प्लीहा

ये ऊतक लिंफोसाइट नामक सफेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन, भंडारण और वहन करते हैं। ये कोशिकाएं संक्रमण और बीमारी से लड़ती हैं।

हॉजकिन लिंफोमा लसिका तंत्र में होने वाला एक कैंसर है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली का एक भाग है। लसिका तंत्र अंगों और ऊतकों से मिलकर बना होता है, जिनमें लसिका ग्रंथियां, लसिका वाहिकाएं, टॉन्सिल, बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है), तिल्ली / प्लीहा और बाल्यग्रन्थि शामिल हैं। ये ऊतक लिंफोसाइट नामक सफेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन, भंडारण और वहन करते हैं, जो संक्रमण और बीमारी से लड़ती हैं।

लसिका तंत्र के भाग:

  • लसिका द्रव: रंगहीन, पानी जैसा द्रव जिसमें लिंफोसाइट्स नामक सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं। लिंफोसाइट्स कुछ प्रकार के संक्रमणों से शरीर की रक्षा करती हैं।
  • लसिका वाहिकाएं: पतली-पतली नलियों का एक संजाल जो लसिका द्रव को एकत्र करके उसे रक्त प्रवाह में वापस लाती है।
  • लसिका ग्रंथियां: सेम के बीज जैसी आकृति वाली छोटी-छोटी संरचनाएं जो लसिका द्रव को छानती हैं और संक्रमण व बीमारी से लड़ने वाली सफेद रक्त कोशिकाओं को संग्रहित करती हैं। लसिका ग्रंथियां संपूर्ण शरीर में फैली लसिका वाहिकाओं के संजाल के साथ स्थित होती हैं। लसिका ग्रंथियों के समूह गर्दन, बगल, पेट, श्रोणि और ऊसन्धि में होते हैं।
  • तिल्ली / प्लीहा: तिल्ली / प्लीहा पेट के ऊपरी बाएँ हिस्से में आमाशय के पास होता है। इस अंग के बहुत से कार्य होते हैं। यह:
    • लिंफोसाइट्स का निर्माण करता है
    • रक्त को छानता है
    • रक्त कोशिकाओं को संग्रहित करता है
    • पुरानी रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है
  • बाल्यग्रन्थि: वह अंग जिसमें लिंफोसाइट्स विकसित होते हैं और बढ़ते हैं। बाल्यग्रन्थि ब्रेस्टबोन (छाती की हड्डी) के पीछे छाती में होती है।
  • टॉन्सिल: गले के पीछे स्थित लसिका ऊतक के दो पिंड। ये टॉन्सिल लिंफोसाइट्स का निर्माण करते हैं।
  • बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है): बड़ी हड्डियों के मध्य में स्थित कोमल, स्पंजी ऊतक। बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) सफेद रक्त कोशिकाओं, लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स का निर्माण करती है।
  • पेयर्स पैचेज़: छोटी आंत में स्थित लसीका ऊतक के छोटे-छोटे क्षेत्र

लिंफोमा दो प्रकार के होते हैं: हॉजकिन और नॉन-हॉजकिन।

इसमें प्रमुख अंतर, शामिल किया गया लिंफोसाइट का प्रकार है। लिंफोमा हॉजकिन लिंफोमा है यदि बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) ऊतक की जांच हॉजकिन रीड-स्टर्नबर्ग कोशिका नामक बड़ी असामान्य कोशिकाओं के साथ कुछ ट्यूमर मार्कर को दर्शाती है। रीड-स्टर्नबर्ग कोशिकाएं विशिष्ट होती हैं क्योंकि उनमें दो नाभिक होते हैं। कुछ का कहना है कि ये कोशिकाएं “उल्लू की आंखों” जैसी दिखती हैं।

इस चित्र में एक लड़के के लसिका तंत्र के नामांकित अंग दिखते हैं: गर्दन की गाँठ, लसिका वाहिकाएं, बगल में गांठ, ऊसंधी संबंधित गांठ, तिल्ली, बाल्यग्रन्थि और टॉन्सिल।

लसिका तंत्र अंगों और ऊतकों से मिलकर बना होता है, जिनमें लसिका ग्रंथियां, लसिका वाहिकाएं, टॉन्सिल, बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है), तिल्ली / प्लीहा और बाल्यग्रन्थि शामिल हैं।

रीड-स्टर्नबर्ग कोशिकाएं, जो उल्लू की आंखों की तरह दिखती हैं, एक नील-हरित रंग के घेरे में दिखाई देती हैं।

रीड-स्टर्नबर्ग कोशिकाएं विशिष्ट होती हैं क्योंकि उनमें दो नाभिक होते हैं, जो कुछ लोगों के अनुसार “उल्लू की आंखों” की तरह दिखती हैं। रीड-स्टर्नबर्ग कोशिकाओं की उपस्थिति लिंफोमा को हॉजकिन लिंफोमा के रूप में वर्गीकृत करती है।

हॉजकिन लिंफोमा के उपप्रकार

हॉजकिन लिंफोमा में, दो प्रमुख उपप्रकार होते हैं: क्लासिकल और नॉड्यूलर (गांठदार) लिंफोसाइट प्रीडॉमिनेंट।

  • क्लासिकल हॉजकिन लिंफोमा सबसे आम है। क्लासिकल हॉजकिन लिंफोमा के 4 प्रकार हैं और सभी ट्यूमर मार्कर सीडी30 के लिए सकारात्मक हैं।
    • लिंफोसाइट-रिच
    • नॉड्यूलर स्क्लेरोसिस
    • मिश्रित कोशिकीयता
    • लिंफोसाइट-डिप्लीटिड
  • नॉड्यूलर लिंफोसाइट प्रीडॉमिनेंट हॉजकिन लिंफोमा। यह उपप्रकार ट्यूमर मार्कर सीडी20 के लिए सकारात्मक और सीडी30 के लिए नकारात्मक है।

सर्वोत्तम प्रकार का इलाज निर्धारित करने में चिकित्सकों की मदद करने के लिए हॉजकिन लिंफोमा के विशिष्ट प्रकार का जानना बहुत आवश्यक है। क्लासिकल हॉजकिन लिंफोमा के सभी प्रकारों का इलाज समान तरीके से किया जाता है। नॉड्यूलर लिंफोसाइट-प्रीडॉमिनेंट हॉजकिन लिंफोमा में भिन्न मार्कर होते हैं। यह अधिक धीमी गति से बढ़ने वाला होता है। इसके लिए एक भिन्न इलाज पद्धति अपनाई जाती है।

हॉजकिन लिंफोमा कितना आम है?

यूएस में हॉजकिन लिंफोमा के प्रति वर्ष कुछ 6,000-7,000 नए मामले पाए जाते हैं।

बचपन में होने वाले हॉजकिन लिंफोमा के कारण/ जोखिम कारक क्या हैं?

कारणों और जोखिम कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आयु: बपन में होने वाला हॉजकिन लिंफोमा ज़्यादातर 15-19 वर्ष की आयु के किशोरावस्था वाले बच्चों को प्रभावित करता है। यह युवा वयस्कों और 50 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों में भी अधिक आम है।
  • वायरल संक्रमण: एपस्टीन बार वायरस (EBV) को, जिसके कारण मोनोन्यूक्लियोसिस होता है, हॉजकिन लिंफोमा से जोड़ा गया है। ईबीवी बहुत से लोगों को होता है। लेकिन ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं जिनमें हॉजकिन लिंफोमा विकसित होता है।
  • कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली: कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति को अधिक खतरा हो सकता है। प्रतिरक्षा संबंधी समस्याएं वंशानुगत बीमारियों, कुछ दवाओं या ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) संक्रमण के कारण हो सकती हैं।
  • पारिवारिक इतिहास: भाई, बहन या माता-पिता में हॉजकिन लिंफोमा होने से व्यक्ति को हॉजकिन लिंफोमा होने का खतरा थोड़ा बढ़ जाता है। लेकिन यह इसका इलाज करना कठिन नहीं बनाता।

हॉजकिन लिंफोमा के संकेत और लक्षण

इसका सबसे आम लक्षण गर्दन , छाती, बगल या ऊसन्धि भाग में दर्दरहित, फूली हुई लसिका ग्रंथियों का होना है।

अन्य सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • बिना किसी कारण से 6 महीने में शरीर के कुल वजन का 10 प्रतिशत से अधिक वजन कम होना
  • रात में अत्यधिक पसीना आना (इतना अधिक कि व्यक्ति को चादरें या पजामा भी बदलना पड़ सकता है)
  • लगातार 3 या अधिक दिन तक 100.4 डिग्री फेरनहाइट (38 डिग्री सेल्सियस) या उससे अधिक बुखार आना जिसका कोई ज्ञात कारण नहीं है
  • अनपेक्षित खांसी या सांस की तकलीफ

हॉजकिन लिंफोमा रोग की पहचान करना

हॉजकिन लिंफोमा रोग की पहचान करने के लिए लसिका ग्रंथि ऊतक की बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) करने की आवश्यकता पड़ती है।

  1. रोगी की आमतौर पर शारीरिक जांच की जाएगी। शारीरिक जांच के दौरान, चिकित्सक स्वास्थ्य के सामान्य संकेतों की जांच करेगा और देखेगा कि कोई असामान्य गाँठ या लसिका ग्रंथि तो नहीं है। चिकित्सक बढ़े हुए तिल्ली / प्लीहा या जिगर के संकेतों के लिए रोगी के पेट की जांच कर सकता है। प्रदाता चिकित्सकीय इतिहास भी देखेगा।

  2. खून की जाँच में एक कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) और रक्त पदार्थ की जाँच शामिल हो सकता है।

    हॉजकिन लिंफोमा में अधिकांश रक्त कार्य सामान्य होता है। लेकिन कभी-कभी रोगियों में ईएसआर (एरिथ्रोसाइट अवसादन दर) या सीआरपी (सी-रिएक्टिव प्रोटीन) स्तर बढ़ा हुआ होता है। रोग की पहचान करने में कई रोगियों में एल्ब्यूमिन के स्तर बहुत कम हो सकते हैं।

  3. हॉजकिन लिंफोमा से पीड़ित लगभग दो-तिहाई रोगियों में छाती में एक पिंड विकसित होता है जो एक्स-रे में दिखाई देता है।

बायोप्सी (टुकड़ा निकालना)

एक सर्जन बढ़ी हुई लसिका ग्रंथि से ऊतक निकालने के लिए बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) करेगा। रोगविज्ञानी माइक्रोस्कोप के नीचे उस ऊतक की जांच करते हैं और रोग की पहचान से संबंधित एक विवरण प्रदान करते हैं।

बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) का प्रकार संदिग्ध कैंसर के स्थान पर निर्भर करता है:

  • काट कर केंसर का टुकड़ा निकालना: संपूर्ण लसिका ग्रंथि या ऊतक की गाँठ को हटाना। इस प्रकार की बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) को प्राथमिकता दी जाती है। रोगविज्ञानी रोग की पहचान करने में मदद के लिए ग्रंथि की संरचना की जांच कर सकता है।
  • काट कर टुकड़ा निकालना: एक गांठ, लसिका ग्रंथि, या ऊतक के नमूने का हिस्सा निकालना।
  • छोटा टुकड़ा निकालना: एक बड़ी सुई का उपयोग करके ऊतक के छोटे टुकड़े या एक लसिका ग्रंथि का एक हिस्सा निकालना।
  • बारीक-सुई से कैंसर का टुकड़ा निकालना: एक बारीक सुई का उपयोग करके ऊतक या लसिका ग्रंथि का हिस्सा निकालना।

यदि हॉजकिन लिंफोमा में छाती में बहुत गहराई में स्थित लसिका ग्रंथियां शामिल हैं, तो बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) में मीडियास्टिनोस्कोप को शामिल किया जा सकता है। यह एक पतला, नली जैसा उपकरण है जो फेफड़ों के बीच के भाग में मौजूद ऊतक और लसिका ग्रंथियों को जांचने और निकालने के लिए उपयोग किया जाता है। यदि कोई अन्य लसिका ग्रंथि मौजूद नहीं है जिसका नमूना लेना आसान हो, तो चिकित्सक इस विधि का उपयोग करेगा।

बायोप्सी ऊतक का विश्लेषण

रोगविज्ञानी कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने के लिए ऊतक की जांच करेगा। हॉजकिन रीड-स्टर्नबर्ग कोशिकाएं क्लासिकल हॉजकिन लिंफोमा को दर्शाती हैं।

यदि असामान्य कोशिकाएं उपस्थित हैं, तो रोगविज्ञानी असामान्य कैंसर कोशिकाओं पर उपस्थित विशिष्ट मार्कर देखने के लिए ऊतक के नमूने की और अधिक जांच करेंगे। इस प्रक्रिया में कुछ दिन लग सकते हैं।

चिकित्सक बीमारी का स्तर निर्धारित करने के लिए और अधिक जांच करेंगे। यह चरण दर्शाता है कि शरीर में कैंसर कहां स्थित है।

हॉजकिन लिंफोमा में स्तर का अर्थ थोड़ा अलग होता है क्योंकि पूरे शरीर में लसिका ग्रंथियां एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। कैंसर शरीर के कई या बहुत से स्थानों पर हो सकता है लेकिन अन्य प्रकार के कैंसर की तरह इसका इलाज करना मुश्किल नहीं होता और न ही अधिक जोखिमपूर्ण होता है। हॉजकिन लिंफोमा के स्तर का पता लगाना निम्नलिखित चीजों पर निर्भर करता है।

  • प्रभावित लसिका ग्रंथि क्षेत्रों की संख्या
  • रोगी के संकेत और लक्षण
  • क्या ट्यूमर भारी है
  • क्या लिंफोमा लसिका तंत्र के बाहर तक फैल गया है
स्तर जिसमें कैंसर का पता चलता है
स्तर 1 एक लसिका ग्रंथि समूह में 1 या अधिक लसिका ग्रंथियों में
स्तर 2 डायाफ्राम के केवल एक तरफ के भाग में 2 या अधिक लसिका ग्रंथि समूहों में। या तो ऊपर या नीचे।
स्तर 3 डायाफ्राम के ऊपर और नीचे की लसिका ग्रंथि समूहों में
स्तर 4 शरीर के उन हिस्सों में जो लसिका ग्रंथि तंत्र के भाग नहीं हैं, जैसे जिगर, फेफड़े या बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है)। कैंसर शरीर में अधिक दूरवर्ती स्थानों से इन क्षेत्रों में फैल गया है।

प्रत्येक रोगी के लिए, स्तर के अतिरिक्त ए या बी चिह्न का उपयोग भी किया जाता है।

का अर्थ है कि आप में कोई “बी” लक्षण नहीं हैं।

बी को तब जोड़ा जाता है जब रोगी में निम्नलिखित में से कोई एक लक्षण मौजूद होता है:

  • रात में अत्यधिक पसीना आना
  • बिना किसी वजह के लगातार 3 दिन तक 38°C या 100.4°F से अधिक बुखार रहना
  • बिना किसी अन्य कारण के पिछले 6 महीने में शरीर के कुल वजन का 10 प्रतिशत से अधिक वजन कम हो जाना

का उपयोग तब किया जाता है जब कैंसर एक अंग या भाग में लसिका तंत्र के बाहर पाया जाता है।

रोग की पहचान करने की आरंभिक क्रिया के समय स्तर का पता लगाने के लिए इमेजिंग जांचों में निम्नलिखित जांचें शामिल हो सकती हैं:

हड्डी के अंदर से बोन मैरो और टुकड़ा निकालना

यह देखने के लिए कि कैंसर बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) में स्थित है या नहीं हड्डी के अंदर से बोन मैरो और टुकड़ा निकालने की प्रक्रिया की जा सकती है। कभी-कभी केवल इमेजिंग से ही यह जानकारी मिल जाती है और यह प्रक्रिया करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

जोखिम समूह

जोखिम समूहों का निर्धारण रोग की पहचान करने की प्रक्रिया के समय ही कर दिया जाता है और इलाज की योजना बनाने में इनका उपयोग किया जाता है। चिकित्सक कैंसर के संकेतों, लक्षणों और स्तर के आधार पर जोखिम समूहों का निर्धारण करते हैं। यदि जोखिम समूह के आधार पर समुचित इलाज किया जाता है तो सभी जोखिम समूहों के समान परिणाम होते हैं। इसीलिए सही स्तर का पता लगाने की क्रिया द्वारा सही जोखिम समूह की पहचान करना इतना महत्वपूर्ण होता है।

जोखिम समूह:

  • निम्न
  • मध्यवर्ती
  • उच्च

हॉजकिन लिंफोमा का इलाज

  1. हॉजकिन लिंफोमा का प्रमुख इलाज कीमोथेरेपी है। बच्चों में इलाज की पद्धति वयस्कों से अलग होती है। इसका लक्ष्य इलाज के लिए कम से कम संभव इलाज का उपयोग करना है। कम इलाज का उपयोग करने से इलाज के दीर्घकालिक और देरी तक होने वाले प्रभावों को रोकने में मदद मिलती है।

    वयस्कों में हॉजकिन लिंफोमा के लिए इलाज की सबसे आम योजना एबीवीडी है। इसका आमतौर पर बच्चों में उपयोग नहीं किया जाता है। इस संयोजन के कई चक्र बाद में जीवन में लंबे समय तक हृदय की गंभीर क्षति का कारण बन सकते हैं। एबीवीडी चार दवाओं का संयोजन है — एड्रियामाइसिन® (डॉक्सोरूबिसिन), ब्लीओमाइसिन, विनाब्लास्टाइन, और डकारबाज़िन (डीटीआईसी)।

    बच्चों का इलाज करने के लिए कैंसर केंद्र कई दवाइयों का उपयोग विभिन्न संयोजनों में करते हैं। विभिन्न दवाएं कैंसर से विभिन्न तरीकों से लड़ते हुए उसका सफलतापूर्वक इलाज करती हैं। इस तरीके से हर दवा का कम उपयोग होता है, जिससे लंबे समय तक और देर से होने वाले प्रभावों सहित, कई दुष्प्रभावों से बचने में मदद मिल सकती है।

    यूएस में, बच्चों में होने वाली हॉजकिन बीमारी के लिए सामान्य कीमोथेरेपी संयोजनों में निम्नलिखित संयोजन शामिल होते हैं:

    • बीईएसीओपीपी: ब्लीओमाइसिन, इटॉप्साइड, डॉक्सोरूबिसिन (एड्रियामाइसिन®), साइक्लोफॉस्फोमाइड, विन्क्रिस्टाईन (ओन्कोविन), प्रोकार्बाज़िन, और प्रेडनिसोन
    • स्टैनफोर्ड वी: डॉक्सोरूबिसिन, विनाब्लास्टाइन, मेक्लोरऐथेमिन, विन्क्रिस्टाईन, ब्लीओमाइसिन, इटॉप्साइड, और प्रेडनिसोन।

    यूरोप में सामान्य कीमोथेरेपी संयोजनों में निम्नलिखित संयोजन शामिल होते हैं:

    • ओईपीए: विन्क्रिस्टाईन (ओन्कोविन), इटॉप्साइड, प्रेडनिसोन, और डॉक्सोरूबिसिन
    • सीओपीडीएसी: साइक्लोफॉस्फोमाइड, विन्क्रिस्टाईन, प्रेडनिसोन, और डकारबाज़िन

    कैंसर केंद्र सबसे प्रभावी चिकित्साओं को खोजने के लिए नई दवाओं को जोड़ भी सकते हैं या दवाओं को हटा भी सकते हैं।

    विभिन्न सहयोगी बाल चिकित्सा कैंसरविज्ञान (ऑन्कोलॉजी) समूहों ने बच्चों में होने वाले हॉजकिन लिंफोमा के लिए इलाज के प्रोटोकॉल विकसित किए हैं। ये समूह इलाज विधियों में सुधार करने के लिए आपस में जानकारी साझा करते हैं। उनके इलाज प्रोटोकॉल में सभी की उच्च सफलता दर है। इन समूहों में बच्चों का ऑन्कोलॉजी समूह (सीओजी), सेंट जूड-स्टैनफ़ोर्ड-डाना फ़ार्बर कंसोर्टियम, यूरोपियन नेटवर्क फ़ॉर पीडियाट्रिक हॉजकिन लिंफोमा ग्रुप (यूरोनेट-पीएचएल) शामिल हैं।

  2. कुछ रोगियों को उनके इलाज के भाग के रूप में रेडिएशन थेरेपी भी मिल सकती है। पिछले समय में, सभी रोगियों को कीमोथेरेपी पूरी हो जाने के बाद रेडिएशन थेरेपी प्राप्त होती थी क्योंकि यह हॉजकिन लिंफोमा का इलाज करने में बहुत अच्छी तरह से काम करती है। आज, यह इलाज के दौरान कैंसर के प्रतिक्रिया देने के तरीके पर निर्भर करती है।

  3. चिकित्सक जोखिम समूह के आधार पर इलाज योजनाएं चुनते हैं। सामान्य रूप से:

    • निम्न-जोखिम: कीमोथेरेपी के 2 चक्र
    • मध्यम-जोखिम: कीमोथेरेपी के 4 चक्र
    • उच्च-जोखिम: कीमोथेरेपी के 6 चक्र
    • सभी हॉजकिन लिंफोमा रोगी आमतौर पर कीमोथेरेपी के 2 चक्र से शुरुआत करते हैं जिसमें लगभग 8 सप्ताह का समय लगता है
    • उसके बाद यह देखने के लिए कि इलाज के प्रति कैंसर ने कितनी अच्छी प्रक्रिया दी है, रोगियों की इमेजिंग जांचें की जाती हैं, आमतौर पर पैट स्कैन। इलाज प्रतिक्रिया निर्धारित करती है कि क्या रोगी को सभी कीमोथेरेपी के अंत में उनके इलाज के भाग के रूप में रेडिएशन इलाज की आवश्यकता है।

    जिन रोगियों के कैंसर ने अच्छी प्रतिक्रिया दी है, हो सकता है कि उन्हें रेडिएशन की आवश्यकता न पड़े।

    जिन रोगियों के कैंसर ने अच्छी प्रतिक्रिया नहीं दिखाई है उन्हें आमतौर पर अपनी कीमोथेरेपी समाप्त होने के बाद रेडिएशन प्राप्त होगी।

  4. कुछ मामलों में, रोगियों को अन्य, अतिरिक्त इलाज प्राप्त हो सकते हैं।

    लक्षित इलाज और प्रतिरक्षा बढ़ाने का इलाज(इम्यूनोथेरेपी)

    हॉजकिन लिंफोमा के कुछ मामलों में लक्षित इलाज का उपयोग किया जाता है। ब्रेंटुक्सीमैब वेडोटिन और रिटुक्सीमैब इसके उदाहरण हैं। कई अन्य इलाज अध्ययन के अधीन हैं। ब्रेंटुक्सीमैब वेडोटिन सीडी30 मार्कर पर लक्ष्य साधती है। रिटुक्सीमैब सीडी20 को लक्ष्य बनाती है।

    लक्षित प्रतिरक्षा बढ़ाने का उपचार (इम्यूनोथेरेपी)

    पेम्ब्रोलिज़ुमाब एक लक्षित इम्युनोथेरेपी दवा है जो कि कभी-कभी दुबारा हुए या इलाज का प्रभाव न पड़ने वाले हॉजकिन लिंफोमा के इलाज का भाग होती है। यह एक पीडी1 इनहिबिटर है। यह पीडी1 नामक कोशिकाओं में मार्ग को अवरुद्ध करती है। यह मार्ग कैंसर कोशिकाओं को प्रतिरक्षा प्रणाली से छुपा कर रखता है। यदि मार्ग अवरुद्ध होता है, तो यह कैंसर कोशिकाओं को प्रतिरक्षा प्रणाली से छुपा कर रखने से रोक सकता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाएं नष्ट करने की सुविधा दे सकता है।

    हेमाटोपोईएटिक कोशिका प्रत्यारोपण

    जिन रोगियों का हॉजकिन लिंफोमा इलाज के प्रति प्रतिक्रिया नहीं देता है या जो इलाज के बाद वापस हो जाता है, उनमें हेमाटोपोईएटिक कोशिका प्रत्यारोपण (जिसे कभी-कभी बोन मैरो ट्रांसप्लांट या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट भी कहा जाता है) किया जा सकता है।

    सर्जरी

    हॉजकिन लिंफोमा में रोग की पहचान करने के लिए आरंभिक बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) को छोड़कर आमतौर पर सर्जरी का उपयोग नहीं किया जाता है। हालांकि नॉड्यूलर लिंफोसाइट-प्रीडॉमिनेंट हॉजकिन लिंफोमा के कुछ मामलों में, यदि सभी कैंसरकारी लसिका ग्रंथियों को सुरक्षित रूप से निकालना संभव है, तो यह प्रक्रिया की जा सकती है।

    इलाज में आमतौर पर 2-6 महीने का समय लगता है। इलाज की समयावधि हॉजकिन लिंफोमा के जोखिम समूह पर निर्भर करती है और यदि रेडिएशन थेरेपी की आवश्यकता पड़ती है, तो यह सभी कीमोथेरेपी के अंत में दी जाती है और आमतौर पर इसमें लगभग 3 सप्ताह का समय लगता है।

हॉजकिन लिंफोमा का पूर्वानुमान

यूएस में हॉजकिन लिंफोमा में जीवित रहने की दर 95 प्रतिशत से अधिक है।

हॉजकिन लिंफोमा इलाज के बाद देरी से दिखाई देने वाले प्रभाव

कैंसर के इलाजों में दीर्घकालिक और देरी से होने वाले प्रभाव हो सकते हैं।

दीर्घकालिक प्रभाव इलाज के दौरान होना शुरू हो जाते हैं और इलाज समाप्त हो जाने के बाद जारी रहते हैं।

देरी से होने वाले प्रभाव जीवन में बाद में शुरू होते हैं।

दीर्घकालिक और देरी से होने वाले प्रभाव उपयोग की गई दवाइयों पर, रेडिएशन इलाज की मात्रा और स्थान पर, तथा रोगी की आयु पर निर्भर करते हैं।

हॉजकिन लिंफोमा के वर्तमान अनुसंधान का मुख्य प्रयास

अनुसंधान ऐसे इलाज विकसित करना जारी रखता है जो कैंसर से बचे लोगों में दीर्घकालिक और देरी से होने वाले प्रभावों को कम करते हैं।

अनुसंधान ऐसे दुर्लभ मामलों के लिए और अधिक प्रभावी इलाजों को विकसित करने पर भी ध्यान देते हैं जिनमें बच्चे का कैंसर वास्तविक चिकित्सा के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है या जो इलाज के बाद दुबारा हो जाता है।


टूगेदर
इस आलेख में उल्लेखित किसी भी ब्रांडेड उत्पाद का समर्थन नहीं करता है।


समीक्षा की गई: सितंबर, 2019