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एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर क्या है?

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर (एसीटी) अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) का एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है। ये ट्यूमर सौम्य ट्यूमर से लेकर आक्रामक, घातक कैंसर तक हो सकते हैं। एसीटी के अन्य नाम एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर, एड्रेनोकोर्टिकल कैंसर, एड्रेनल कोर्टेक्स या अधिवृक्क वल्कुट का कैंसर, एड्रेनोकोर्टिकल एडनोमा और एड्रेनोकोर्टिकल कार्सिनोमा हैं।

अधिवृक्क ग्रंथियां (एड्रेनल ग्लैंड) प्रत्येक गुर्दे के सबसे ऊपरी भाग पर स्थित होती हैं। अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) की बाहरी परत को एड्रेनल कोर्टेक्स या अधिवृक्क वल्कुट कहते हैं। अधिवृक्क ग्रंथियों (एड्रेनल ग्लैंड) का कार्य हार्मोनों का उत्पादन करना है जैसे कोर्टिसोल औरएल्डोस्टीरोन। इन हार्मोन के विभिन्न आवश्यक कार्य होते हैं जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • शरीर द्वारा ऊर्जा के लिए कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के उपयोग करने के तरीके को नियंत्रित करना
  • तनाव से बचने में शरीर की मदद करना
  • रक्त चाप नियंत्रित करना
  • शरीर में पानी, पोटैशियम और नमक को नियंत्रित करना
एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर क्या है? एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) का एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है। अधिवृक्क ग्रंथियां (एड्रेनल ग्लैंड) प्रत्येक गुर्दे के सबसे ऊपरी भाग पर स्थित होती हैं। अधिवृक्क ग्रंथियों (एड्रेनल ग्लैंड) का कार्य हार्मोनों का उत्पादन करना है जैसे कोर्टिसोल औरएल्डोस्टीरोन।

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) का एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है। अधिवृक्क ग्रंथियों (एड्रेनल ग्लैंड) का कार्य हमारे शरीर के अंदर की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाले हार्मोनों का उत्पादन करना है।

अधिवृक्क वल्कुट (एड्रेनल कोर्टेक्स) थोड़ी मात्रा में नर और मादा सेक्स हार्मोन का उत्पादन भी करता है, जिन्हें एंड्रोजन और एस्ट्रोजन हार्मोन कहते हैं। ये हार्मोन नर और मादा विशेषताओं के विकास को प्रभावित करते हैं।

एड्रेनोकोर्टिकल कैंसर बच्चों में बहुत ही कम पाया जाता है। बचपन में होने वाले कैंसर में इसका अनुपात केवल 0.2% है। अमेरिका में हर वर्ष इसके लगभग 25 नए मामले पाए जाते हैं।

वयस्कों में, एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर को एड्रेनोकोर्टिकल कार्सिनोमा (घातक या जो कैंसर है) अथवा एड्रेनोकोर्टिकल एडनोमा (सौम्य या जो कैंसर नहीं है) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। हालांकि, बच्चों में,एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के प्रकार का पता लगाना और इसकी आक्रामकता का पूर्वानुमान लगाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, बच्चों में एसीटी की इलाज योजना ऐसे ट्यूमर में आक्रामकता के संभावित दायरे की पहचान करने और सिर्फ़ इस बात पर निर्भर करने की बजाय कि ट्यूमर को शुरुआत में “कार्सिनोमा” के रूप में वर्गीकृत किया गया है या “एडनोमा” के रूप में, ट्यूमर जैविकी के साथ-साथ क्लीनिकल कोर्स पर निर्भर करती है।

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के इलाज में आमतौर पर अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) को निकालने के लिए सर्जरी शामिल होती है। ट्यूमर को सर्जरी द्वारा पूरी तरह से काट कर निकालने से रोगी के ठीक होने की बहुत अधिक संभावना होती है। यदि कैंसर अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) के बाहर तक फैल जाता है, तो इलाज में कीमोथेरेपी शामिल होगी।

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के जोखिम कारक और कारण

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर आमतौर पर लड़कों की बजाय लड़कियों में अधिक पाया जाता है। यह कैंसर ज़्यादातर छोटे बच्चों में होता है, आमतौर पर 1 से 4 वर्ष की बीच की आयु के बच्चों में।

कुछ आनुवंशिक कारकों से इसके होने का जोखिम बढ़ सकता है, तथा एसीटी के विकसित होने की प्रवृत्ति आगे परिवारों में जा सकती है।

आनुवंशिक प्रवृत्ति और एसीटी

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के जोखिम को बढ़ाने वाले आनुवंशिक सिंड्रोम में ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम (टीपी53 वंशाणु) और बेकविथ-विडमेन सिंड्रोम शामिल है। इन अवस्था वाले बच्चों की नियमित जांच की जाएगी, जिसमें एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर को देखने के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड करना भी शामिल है।

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के संकेत और लक्षण

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर से पीड़ित अधिकांश बच्चों में संकेत और लक्षण हार्मोन की अधिकता के कारण उत्पन्न होते हैं। यदि कैंसर के कारण सामान्य से अधिक हार्मोन का उत्पादन होता है, तो इसे क्रियाशील एसीटी कहा जाता है। बच्चों में, अधिकांश (90%) एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर “क्रियाशील” होते हैं। किशोरावस्था के लोगों में, लगभग आधे एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर ही “क्रियाशील” होते हैं।

  • एंड्रोजन - बच्चों में होने वाले एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर में, अधिकांश ट्यूमर नर सेक्स हार्मोन (एंड्रोजन) की सामान्य मात्रा से अधिक हार्मोन का स्राव करते हैं। लड़कों में, इसके कारण समय से पूर्व यौवनारंभ हो सकता है जिसमें चेहरे और शरीर के बाल बढ़ना, जघन या बगल के बालों का समय से पहले निकल आना, शरीर की गंध, मुहाँसे और आवाज भारी होना शामिल है। महिलाओं में अधिक एंड्रोजन के कारण चेहरे और शरीर के बाल बढ़ सकते हैं और आवाज में भारीपन आ सकता है। बड़ी आयु की लड़कियों में मासिक-धर्म आना भी बंद हो सकता है।
  • एस्ट्रोजन - यदि मादा हार्मोन (एस्ट्रोजन) अधिक मात्रा में उत्पन्न होते हैं, तो लड़कियों में समय से पूर्व यौवनारंभ होने के संकेत दिख सकते हैं जिसमें स्तन विकास और माहवारी आना (शायद ही कभी) शामिल है। लड़कों में एस्ट्रोजन की अधिक मात्रा होने से वक्ष ऊतक की वृद्धि हो सकती है।
  • कोर्टिसोल - कोर्टिसोल वह हार्मोन है जिसका उत्पादन अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) के कोर्टेक्स या वल्कुट द्वारा किया जाता है। यह हार्मोन तनाव के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए कार्य करता है। एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के परिणामस्वरूप कोर्टिसोल का अत्यधिक उत्पादन हो सकता है, एक ऐसी अवस्था जिसे कुशिंग सिंड्रोम कहते हैं। बहुत अधिक कोर्टिसोल के संकेतों में चेहरा गोल होना, वजन बढ़ना, पीठ के ऊपरी भाग में असामान्य रूप से वसा के जमने के कारण कूबड़ ("बफेलो हम्प") निकल आना, खिंचाव के निशान, उच्च रक्त शर्करा और उच्च रक्तचाप शामिल हैं।
  • एल्डोस्टीरोन - एल्डोस्टीरोन वह हार्मोन है जो गुर्दे की क्रिया के लिए आवश्यक होता है। यह शरीर मे पानी, नमक और पोटैशियम को संतुलित रखने में मदद करता है। एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर अधिक मात्रा में एल्डोस्टीरोन उत्पन्न कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उच्च रक्तचाप, प्यास लगना, कमजोरी और मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है।

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के अन्य सामान्य संकेतों और लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पेट (उदर) में गाँठ या सूजन।
  • पेट या कमर में दर्द होना।
  • पेट पर ट्यूमर का दबाव पड़ने के कारण भारीपन लगना।
बच्चों में होने वाले एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर (एसीटी) के हार्मोन-संबंधित संकेत और लक्षण
एंड्रोजन या नर हार्मोन एस्ट्रोजन कोर्टिसोल एल्डोस्टीरोन
अधिक एंड्रोजन या एस्ट्रोजन के कारण समय से पूर्व यौवनारंभ होने के संकेत उत्पन्न हो सकते हैं या
आमतौर पर परिवर्तन उस लिंग के बच्चों में नहीं देखे जाते हैं
   
नर विशेषताएं जैसे कि चेहरे और शरीर पर बाल, मुँहासे, आवाज में भारीपन, वर्धित वृद्धि
मादा विशेषताएं जैसे स्तन विकास
गोलाकार “चांद” जैसा चेहरा, वजन बढ़ना, पीठ के ऊपरी भाग में वसा युक्त उभार या कूबड़, अविकसित लंबाई, उच्च रक्त शर्करा, उच्च रक्तचाप
उच्च रक्तचाप, प्यास लगना, मांसपेशियों में ऐंठन या कमजोरी

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर रोग की पहचान करना

चिकित्सक कई तरीकों से एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर की जांच करते हैं। इनमें शामिल है:

  • स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक जांच से चिकित्सकों को एड्रेनल कोर्टेक्स हार्मोन के अत्यधिक उत्पादन के संकेतों और लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने में मदद मिलती है। कैंसर से संबंधित पारिवारिक इतिहास महत्वपूर्ण होता है क्योंकि निकट संबंधियों में कैंसर वंशानुगत जोखिम की उपस्थिति का संकेत दे सकता है। जब किसी बच्चे में एसीटी होने का पता चलता है, तो उस बच्चे और परिवार को आनुवंशिक जाँच और परामर्श लेने की सलाह दी जाती है। चिकित्सक कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले कुछ वंशाणु परिवर्तनों (उत्परिवर्तन) के लिए जांच करेंगे जैसे टीपी53 वंशाणु।
  • खून और मूत्र में पदार्थों को देखने के लिए लैब अध्ययनों का उपयोग किया जाता है। चिकित्सक खून में ग्लूकोज़ की और पोटैशियम व सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तरों की जांच करेंगे। अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) की दुष्क्रिया का पता लगाने में अक्सर पहला चरण एड्रेनल हार्मोन के खून और मूत्र के स्तर को मापना होता है।
  • ट्यूमर का पता लगाने के लिए, ट्यूमर कितना बड़ा है यह देखने के लिए और यह जिगर, फेफड़ों, लसिका ग्रंथियों या हड्डियों जैसे अन्य स्थानों तक फैला है या नहीं, यह मालूम करने के लिए इमेजिंग जांचें। 
    • अल्ट्रासाउंड शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की छवि बनाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है। पेट का अल्ट्रासाउंड सबसे पहले की जाने वाली जांचों में से एक है जिसका उपयोग अक्सर चिकित्सक यह देखने के लिए करते हैं कि क्या बच्चे की अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) में कोई ट्यूमर है। ये यह भी दर्शाता है कि ट्यूमर नाड़ी तंत्र तक फैला है या नहीं।
    • मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) शरीर के विस्तृत चित्र बनाने के लिए रेडियो तरंगों और चुम्बकों का उपयोग करती है। एमआरआई से बनी छवियों से ट्यूमर के प्रकार और रोग के संभावित प्रसार के बारे में अधिक जानकारी मिल सकती है। पेट की एमआरआई से चिकित्सक अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) और ट्यूमर को देख पाते हैं।
    • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी स्कैन) शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की अनुप्रस्थ परिच्छेदन (क्रॉस-सेक्शनल) छवियां बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करती है। इसमें मशीन एक बहुत ही विस्तृत छवि का निर्माण करने के लिए बहुत सी तस्वीरें लेती है। छवियां शरीर की विभिन्न “स्लाइस” की श्रृंखला के रूप में ली जाती हैं और उन्हें कंप्यूटर में सहेज लिया जाता है। इन स्लाइस या खंड से छोटे से छोटे ट्यूमर भी देखे जा सकते हैं। छाती के सीटी स्कैन से चिकित्सकों को यह देखने में मदद मिल सकती है कि यह फेफड़ों तक फैला है या नहीं।
    • पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी (पैट स्कैन) शरीर की कंप्यूटरीकृत छवियां बनाने के लिए शिरा के माध्यम से दिए गए रेडियोधर्मी ग्लूकोज़ (शर्करा) का उपयोग करती है। यह ग्लूकोज़ शरीर में संचरण करता है और ऊर्जा के लिए शर्करा का उपयोग करने वाली कोशिकाओं द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है। इससे विभिन्न ऊतक और अंग कंप्यूटर स्क्रीन पर रंगीन चित्रों के रूप में प्रदर्शित हो पाते हैं। कैंसर कोशिकाएं अक्सर अन्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती और विभाजित होती हैं और ये अधिक ग्लूकोज़ ग्रहण करती हैं। इससे ट्यूमर को पैट स्कैन पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। पैट कई बार शरीर के उन भागों में कैंसर का पता लगा सकता है जो सीटी स्कैन या एमआरआई पर दिखाई नहीं देते।
    • हड्डी का स्कैन शरीर के चित्र लेने के लिए एक विशेष स्कैनर का उपयोग करता है। इस जांच में, रोगी को एक कम मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ का इंजेक्शन दिया जाता है जो पूरे शरीर में खून में संचारित होता है। यह पदार्थ हड्डियों में इकट्ठा हो जाता है, जहां वह कैंसर फैले हुए भागों को उजागर कर सकता है। इस जांच का उपयोग आमतौर पर एसीटी से पीड़ित बच्चों में नहीं किया जाता, विशेषकर वहां जहां पैट स्कैन की सुविधा आसानी से उपलब्ध होती है।
  • कोशिकाओं में कैंसर के संकेतों की जांच करने और शरीरकोष विज्ञान के बारे में और अधिक जानने के लिए ट्यूमर से प्राप्त ऊतक की जांच की जाएगी। उसके बाद एक रोगविज्ञानी यह देखने के लिए कि क्या उसमें कैंसर कोशिकाएं हैं, ऊतक के नमूनों को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर उनकी जांच करता है। माइक्रोस्कोप में कोशिकाएं जिस प्रकार की दिखाई देती हैं वह रोग की पहचान करने में महत्वपूर्ण होता है। ट्यूमर कितना आक्रामक हो सकता है, यह आकलन करने के लिए भी इस जानकारी का उपयोग किया जाता है। आमतौर पर, सर्जरी से पहले बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) नहीं की जाती है। इसके बजाय,अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) को निकालने (अधिवृक्क-उच्छेदन) की सर्जरी के बाद ऊतक की जांच की जाती है।

एडनोमा बनाम कार्सिनोमा

ट्यूमर की जांच की जाएगी और शरीरकोष विज्ञान के अनुसार उसे, मुख्यत: एडनोमा और कार्सिनोमा के रूप में, वर्गीकृत किया जाएगा। हालांकि, बच्चों में, एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर की विभिन्न प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं: सभी कार्सिनोमा समान रूप से आक्रामक नहीं होते और कुछ ट्यूमर जिनका वर्णन आरंभ में एडनोमा के रूप में किया गया है, उनमें ऐसी विशेषताएं हो सकती हैं जो अधिक आक्रामक हों या जिन्हें अपेक्षा से अधिक फॉलो-अप की आवश्यकता हो।

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के स्तर का पता लगाना

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर का स्तर या रोग की अधिकता कई कारकों पर निर्भर करती है:

  • ट्यूमर का आकार
  • क्या ट्यूमर को सर्जरी द्वारा पूरा निकाला जा सकता है
  • ट्यूमर फैला है या नहीं

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर से पीड़ित आधे से ज़्यादा रोगियों में रोग की पहचान करने के समय मेटास्टैटिक रोग होता है। इस रोग के फैलने के सबसे आम स्थान जिगर और फेफड़े हैं। एसीटी लसिका ग्रंथियों, हड्डियों और पेट के अन्य भागों में भी फैल सकता है।

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के लिए पूर्वानुमान

एसीटी से आरोग्य-प्राप्ति इस बात पर निर्भर करती है कि सर्जरी ट्यूमर को पूरी तरह निकालती है या नहीं। सर्जरी द्वारा कैंसर के पूर्ण विच्छेदन या उसे पूरी तरह से निकालने के साथ जीवित रहने की संभावना अधिक होती है। रोग को जल्दी पकड़ने और सफल सर्जरी के साथ, एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर में पांच साल तक जीवित रहने की कुल दर 85% है। अधिक उन्नत कैंसर के लिए, जीवित रहने की दर 40% से कम है। सभी रोगियों को एक बहुविषयक टीम द्वारा दीर्घकालिक निगरानी और देखभाल की आवश्यकता होती है।

निरोगी होने के अवसर को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ट्यूमर का आकार
  • आरंभिक सर्जरी से ट्यूमर पूरी तरह निकल सकता है या नहीं
  • रोगी की आयु (3 वर्ष से कम आयु के बच्चों में बेहतर पूर्वानुमान होता है।)
  • शरीरकोष विज्ञान संबंधी विशेषताएं
  • कैंसर शरीर के अन्य भागों तक फैला है या नहीं (जिगर, फेफड़े, हड्डियां, लसिका ग्रंथियां)
  • ट्यूमर में कुछ वंशाणुओं में परिवर्तन
  • यदि कैंसर वापस हुआ है (दुबारा होना)

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर का इलाज

  1. अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) को निकालने (अधिवृक्क-उच्छेदन) के लिए सर्जरी एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर का प्रमुख इलाज है। संभव होने पर, इलाज का लक्ष्य ट्यूमर को पूरी तरह से निकालना (सर्जरी कर निकालना) होता है। इस प्रकार के ट्यूमर में सर्जरी के दौरान विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) एक नाजुक (भंगुर) ग्रंथि होती है जो सर्जरी के दौरान आसानी से टूट कर बिखर सकती है। यदि ट्यूमर के कुछ हिस्से टूट जाते हैं (ट्यूमर टूट कर बिखर जाता है), तो कैंसर के फैलने की संभावना अधिक होती है। इस कारण से, एसीटी का सर्जरी से पहले पता लगाने के लिए आमतौर पर बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) का उपयोग नहीं किया जाता।

    जिन बच्चों में एसीटी होने की आशंका है उनके लिए बाल-रोग एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर से परिचित निपुण सर्जन द्वारा प्रबंधन और प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग को अत्यधिक अनुशंसित किया जाता है। रक्त चाप को या इलेक्ट्रोलाइट्स, शरीर के तरल पदार्थों और हार्मोन में होने वाले परिवर्तनों को, जो कि एक बड़े या हार्मोन-उत्पादक अधिवृक्क पिंड से प्रभावित हो सकते हैं, नियंत्रित करने में मदद के लिए ऑपरेशन से पहले की देखभाल के लिए कैंसर विशेषज्ञ, एंडोक्राइन विशेषज्ञ और एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) विशेषज्ञों सहित एक बहुविषयक टीम का होना भी ज़रूरी होता है।

    एक रोगविज्ञानी, सर्जरी से ट्यूमर निकाले जाने के बाद उस ट्यूमर की जांच करेगा। उसके बाद एक बहुविषयक टीम उन जांच-परिणामों की समीक्षा करेगी और स्तर का पता लगाने और रोगी के लिए इलाज की योजना बनाने के कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यकतानुसर अतिरिक्त जांचों का आयोजन करेगी।

    यदि ट्यूमर को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है, तो रोगी के ठीक होने की अच्छी संभावना होती है। छोटे-छोटे ट्यूमर से पीड़ित रोगियों के लिए, अकेले सर्जरी ही एक प्रभावी इलाज हो सकता है।

  2. बड़े ट्यूमर या विकसित रोग वाले रोगियों के लिए, सर्जरी के अतिरिक्त पूरे शरीर में दी जाने वाली कीमोथेरपी का उपयोग किया जाता है। एसीटी के लिए उपयोग की जाने वाली दवाइयों में मिटोटेन के साथ-साथ अन्य कीमोथेरेपी एजेंट शामिल हैं जैसे सिस्प्लेटिन

  3. एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के लिए रेडिएशन थेरेपी देने पर विचार किया जा सकता है, विशेषकर तब जब कैंसर फैल गया हो। रेडिएशन थेरेपी शुरू करने से पहले, रोगियों की टीपी53 वंशाणु उत्परिवर्तन के लिए जांच की जानी चाहिए।

    उन्नत कैंसर वाले वे रोगी जिन पर अन्य इलाजों का असर नहीं होता, वे बीमारी के परीक्षण में भाग लेने पर विचार कर सकते हैं।

हार्मोन की निगरानी और थेरेपी उन रोगियों की मदद कर सकती है जिनमें ट्यूमर या इलाज के कारण हार्मोन के स्तर असामान्य हो जाते हैं। क्रियाशील ट्यूमर के कारण होने वाले हार्मोन असंतुलन (अतिरिक्त हार्मोन) की समस्याओं को दूर करने अथवा ट्यूमर या अन्य इलाजों से प्रभावित हुए हार्मोन स्तरों को सुधारने में मदद के लिए दवाइयां दी जा सकती हैं।

रोगियों को, अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) निकाले जाने के बाद और/या मिटोटेन अथवा अन्य कीमोथेरेपी से इलाज के बाद, जिससे हार्मोन उत्पादन प्रभावित हो सकता है, हार्मोन रिप्लेसमेंट उपचार की आवश्यकता हो सकती है। एड्रेनल हार्मोन के निम्न स्तर से रक्त चाप और रक्त शर्करा नियंत्रित करने की समस्याओं सहित विभिन्न प्रकार की अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

एसीटी एक जटिल बीमारी है और इसीलिए इसमें बाल चिकित्सा ऑन्कोलॉजी, नैदानिक इमेजिंग, सर्जरी, रोग लक्षण विद्या, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, आहार-पोषण और आनुवंशिक सलाहकार सहित एक बहुविषयक देखभाल टीम ज़रूरी होती है।

21 वर्ष और उससे कम आयु के सभी एसीटी रोगियों को इस दुर्लभ कैंसर के निगरानी की जाने वाली अध्ययन रजिस्ट्री में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

इंटरनेशनल पीडिऐट्रिक एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर रजिस्ट्री (आईपीएसीटीआर)

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर के बाद जीवन

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर बच्चों में बहुत ही कम पाया जाने वाला एक कैंसर है। इस कैंसर से पीड़ित बच्चों में हार्मोन स्तरों पर निगरानी रखने और कैंसर के दुबारा होने पर नज़र रखने के लिए निरंतर देखभाल की ज़रूरत होती है।

एंडोक्राइन क्रिया पर निगरानी रखना

एसीटी वाले रोगियों में एंडोक्राइन क्रिया पर निगरानी रखना आवश्यक होता है। क्रियाशील ट्यूमर वाले रोगियों में हार्मोन के अत्यधिक उत्पादन के लक्षणों का इलाज करने के लिए दवाइयों की ज़रूरत पड़ती है। जिन लोगों में अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) कम काम करती है, उन्हें तनाव के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया सहित, शरीर की सामान्य क्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद के लिए हार्मोन की आवश्यकता होती है।

आनुवंशिक जाँच और परामर्श

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर से पीड़ित बच्चों की टीपी53 वंशाणु के लिए जांच की जानी चाहिए। इस वंशाणु में जनन-रेखा उत्परिवर्तन वाले रोगियों में ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम नामक अवस्था होती है। पहचाने गए उत्परिवर्तन वाले रोगियों के परिवार के सदस्यों की भी जांच की जानी चाहिए। टीपी53 वंशाणु पूरे शरीर की कोशिकाओं में स्थित होता है। इसका कार्य कोशिकाओं को ट्यूमर सप्रेसर प्रोटीन का निर्माण करने के बारे में सूचित करना है जो खराब या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को विभजित होने से रोकता है। टीपी53 में परिवर्तन से लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर होने का जोखिम अधिक हो जाता है क्योंकि इससे "खराब" कोशिकाओं को रोकने का संकेत सही तरह से कार्य नहीं करता है। इस वंशाणु में उत्परिवर्तन वाले लोगों को जब भी संभव हो रेडिएशन के संपर्क में आने से बचना चाहिए। कैंसर के उच्च जोखिम के कारण आजीवन निगरानी आवश्यक होती है।

एड्रेनोकोर्टिकल ट्यूमर थेरेपी के बाद देर से दिखाई देने वाले प्रभाव

सामान्य स्वास्थ्य और बीमारी की रोकथाम के लिए, कैंसर से बचे सभी लोगों को स्वस्थ जीवन शैली और खान-पान की आदतों को अपनाना चाहिए, साथ ही उन्हें प्राथमिक चिकित्सक द्वारा नियमित रूप से शारीरिक परीक्षण और जांच भी करवाते रहना चाहिए। बचपन में होने वाले कैंसर से बचे लोग जिनका इलाज पूरे शरीर में कीमोथेरेपी देने के द्वारा किया गया था, उनकी तीव्र या देर से होने वाले प्रभावों के लिए निगरानी की जानी चाहिए।

रोग से बचे लोग जिनका इलाज पूरे शरीर में कीमोथेरेपी या रेडिएशन द्वारा किया गया था, उनकी तीव्र या देर से होने वाले प्रभावों के लिए निगरानी की जानी चाहिए। बचपन में होने वाले कैंसर के उत्तरजीविता अध्ययन के अनुसार, रोग से ठीक होकर जीवित रहने वाले लगभग 25% लोगों में रोग की पहचान किए जाने के 25 वर्ष बाद भी गंभीर क्रॉनिक (पुराना) स्वास्थ्य संबंधित स्थितियां मौजूद रहती हैं। इन स्थितियों में दूसरी बार होने वाले कैंसर (रेडिएशन के संपर्क में आने के बाद जोखिम में वृद्धि), कोंजेस्टिव हृदय विफलता (डॉक्सोरूबिसिन का प्रभाव), बांझपन या गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं और अंतिम-स्तर की गुर्दे की बीमारी या गुर्दे का काम न करना शामिल हैं।


समीक्षा की गई: जून 2018