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मेलेनोमा

मेलेनोमा क्या है?

मेलेनोमा एक प्रकार का त्वचा का कैंसर है जो ज़्यादातर वयस्क लोगों में देखा जाता है। हालाँकि, दुर्लभ होने के बावजूद, यूएस में प्रति वर्ष लगभग 300-400 बच्चों और किशोरों को मेलेनोमा प्रभावित करता है। मेलेनोमा त्वचा के किसी भी भाग में विकसित हो सकते हैं। ये आँख में भी हो सकते हैं। यदि इलाज नहीं किया जाता है, तो मेलेनोमा शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है।

मेलेनोमा एक प्रकार का त्वचा कैंसर है जो कि त्वचा के किसी भी भाग पर हो सकता है। यदि इलाज नहीं किया जाता है, तो मेलेनोमा शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है। मेलेनोमा में, कैंसर त्वचा की मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाओं में निर्मित होता है। मेलानोसाइट्स, मेलेनिन का उत्पादन करते हैं जो त्वचा को रंग (वर्णक) प्रदान करता है।

मेलेनोमा में, कैंसर त्वचा की मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाओं में निर्मित होता है। मेलानोसाइट्स, मेलेनिन का उत्पादन करते हैं जो त्वचा को रंग (वर्णक) प्रदान करता है।

मेलेनिन मेलानोसाइट्स नामक कुछ त्वचा कोशिकाओं द्वारा उत्पादित एक वर्णक है। मेलेनिन त्वचा को धूप की अल्ट्रावायोलेट (यूवी) रेडिएशन से बचाने में मदद करता है। जिन लोगों की त्वचा गहरे रंग की होती है उनमे अधिक मेलेनिन होता है और उनमे मेलेनोमा होने की संभावना कम होती है।

हालांकि आमतौर पर इसे वयस्क लोगों की बीमारी माना जाता है, लेकिन 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों में होने वाले कैंसर में से लगभग 1% कैंसर का कारण मेलेनोमा होता है। यह अधिकतर बड़ी आयु वर्ग के लोगों में होता है, जो 15-19 वर्ष की आयु के किशोरों में होने वाले कैंसर में से लगभग 7% कैंसर का कारण बनता है। 

मेलेनोमा के लक्षणों में त्वचा के असामान्य परिवर्तन शामिल हैं जैसे कि एक तिल जिसके आकार में वृद्धि होती है, रंग में परिवर्तन होता है, जिसमें से खून निकलता है या जिसमें खुजली होती है। मेलेनोमा एल हल्के पीले या लाल रंग के गुमड़ या उभार के रूप में भी दिखाई दे सकता है। 

मेलेनोमा का इलाज बीमारी के स्तर पर निर्भर करता है। आमतौर पर मेलेनोमा रोगियों का इलाज कैंसर को निकालने के लिए सर्जरी द्वारा किया जाता है। अधिक गंभीर बीमारी में लक्षित इलाज, कीमोथेरेपी और/या प्रतिरक्षा बढ़ाने का उपचार (इम्यूनोथेरेपी) सहित अतिरिक्त इलाज की आवश्यकता पड़ सकती है।

समय से पूर्व पता लग जाने पर, मेलेनोमा में ठीक होकर जीवित रहने की दर बहुत अच्छी होती है। हालांकि, मेलेनोमा लसिका ग्रंथियों और शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है, जिससे इसका इलाज करना कठिन हो सकता है। इस वजह से, मेलेनोमा के बारे में जागरूकता होना और इसकी जल्दी पहचान करना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

मेलेनोमा के जोखिम कारक और कारण

कुछ कारक मेलेनोमा के जोखिम को बढ़ाते हैं। इसमें शामिल है गोरी त्वचा का होना जो आसानी से जल जाती है, कुछ त्वचा संबंधी स्थितियां, मेलेनोमा और/या असामान्य तिलों के संबंध में पारिवारिक इतिहास तथा धूप से होने वाली त्वचा संबंधी समस्या या धूप से त्वचा के झुलसने से संबंधित इतिहास। मेलेनोमा किशोरावस्था के बच्चों में अधिक पाया जाता है।

  • त्वचा का रंग: गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में मेलेनोमा होने की संभावना कम होती है। जिन लोगों की त्वचा गोरी होती है, बाल हल्के या लाल होते हैं, आँखें हल्के रंग की होती हैं और जिनकी त्वचा आसानी से धूप में झुलस जाती है, उनमें इसके होने का जोखिम अधिक होता है।
  • त्वचा संबंधी स्थितियां: जिन लोगों की त्वचा पर जन्म से ही बड़े काले दाग होते हैं उनमें मेलेनोमा विकसित होने की अधिक संभावना होती है, इन दागों को मेलानोसाइटटिक नेवी कहा जाता है। कुछ वंशानुगत स्थितियां जैसे ज़ेरोडर्मा पिगमेंटोसम, रेटिनोब्लास्टोमा और वर्नर सिंड्रोम भी इसके होने के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
  • पारिवारिक इतिहास: मेलेनोमा या असामान्य तिलों का पारिवारिक इतिहास होने से व्यक्ति में मेलेनोमा होने का जोखिम अधिक होता है।
  • यूवी एक्सपोज़र: अल्ट्रावायोलेट (यूवी) रेडिएशन त्वचा की कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुँचाती है। यूवी एक्सपोज़र का मुख्य स्रोत धूप है। टैनिंग बेड भी यूवी रेडिएशन के अन्य स्रोत हैं। धूप के संपर्क में आना और टैनिंग बेड का उपयोग मेलेनोमा का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है।
  • धूप से झुलस जाना या सनबर्न: धूप से त्वचा पर फफोले पड़ने के इतिहास वाले लोगों में मेलेनोमा होने की अधिक संभावना होती है।
  • रेडिएशन थेरेपी और पूर्व कैंसर: रेडिएशन थेरेपी से इलाज किए रोगियों में भविष्य में मेलेनोमा होने का अधिक जोखिम होता है।
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली: गंभीर बीमारी या प्रत्यारोपण के कारण रोग प्रतिरोधक शक्ति का कम होना मेलेनोमा होने के जोखिम को बढ़ा सकता है।

मेलेनोमा के लक्षण

मेलेनोमा के संकेतों में निम्नलिखित सहित त्वचा में परिवर्तन होना शामिल है:

  • त्वचा पर तिल या गुमड़ होना जो आकार में बढ़ता है या जिसकी आकृति बदल जाती है, विशेष रूप से यदि परिवर्तन लघु अवधि में ही होने लगते हैं।
  • एक अनियमित आकार का तिल या एक ऐसा तिल जिसका आकार बड़ा है।
  • त्वचा पर एक हल्के पीले या लाल रंग का गुमड़ होना
  • तिल या गुमड़ जिसमें खुजली होती है या खून निकलता है

मेलेनोमा के संकेतों को याद रखने का एक उपयोगी तरीका इन एबीसी को याद रखना है:

: एसिमिट्री या विषमता
बी: बॉर्डर अनियमितता या अनियमित किनारे
सी: कलर वेरिएशन या रंग भिन्नता
डी: डायामीटर या व्यास (> 5 मिलीमीटर)
: परिवर्तन का क्रमागत विकास या प्रमाण

मेलेनोमा रोग की पहचान करना

मेलेनोमा रोग की पहचान करने के लिए कई प्रकार की प्रक्रियाओं और जांचों का उपयोग किया जाता है। इनमें शामिल है: 

  • लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों के बारे में जानने के लिए स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक जांच। 
  • तिल, गुमड़ और त्वचा के असामान्य दिखने वाले भागों की जांच करने के लिए त्वचा की जांच।
  • मेलेनोमा रोग की पहचान करने के लिए त्वचा के ऊतक की बायोप्सी (टुकड़ा निकालना)। उसके बाद कैंसर के संकेतों को देखने के लिए कोशिकाओं की माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। मेलेनोमा के लिए बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) में, यह देखने के लिए कि त्वचा की सतह से ट्यूमर कितना दूर है, ऊतक को त्वचा के गहरे स्तरों से एकत्र करना आवश्यक होता है। यह प्रक्रिया मेलेनोमा का आकलन करने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण और विशेषज्ञता प्राप्त त्वचा विशेषज्ञ द्वारा की जानी चाहिए। 

यदि चिकित्सकों को लगता है कि मेलेनोमा फैला हुआ हो सकता है, तो अतिरिक्त जांचों की आवश्यकता हो सकती है। इनमें शामिल है:

  • खून की जांचों में लैक्टेट डीहाइड्रोजिनेज (एलडीएच) के स्तर भी शामिल हैं, यह खून में मौजूद एक पदार्थ होता है जिसका स्तर मेलेनोमा होने पर बढ़ सकता है।
  • आसपास की लसिका ग्रंथियों में मेलेनोमा के प्रसार की जांच करने के लिए लसिका ग्रंथि का नक़्शा और बायोप्सी (टुकड़ा निकालना)। इस प्रक्रिया में, जिसे सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी कहा जाता है, एक विशेष डाई या रेडियोधर्मी पदार्थ को मेलेनोमा के स्थान के निकट इंजेक्ट किया जाता है। डाई लसिका तंत्र से होते हुए मूल ट्यूमर के निकट स्थित पहली लसिका ग्रंथियों तक पहुँचती है। उन लसिका ग्रंथियों को निकाला जा सकता है और कैंसर के संकेतों के लिए उनका आकलन किया जा सकता है। यह प्रक्रिया मेलेनोमा के स्तर का पता लगाने और इलाजों की योजना बनाने में मदद के लिए ज़रूरी होती है।
  • शरीर के अन्य भागों में मेलेनोमा के फैलाव को देखने के लिए इमेजिंग जांचों का उपयोग किया जाता है। जांचों को, ट्यूमर के विशिष्ट गुणों और लसिका ग्रंथियों की भागीदारी के आधार पर चयनित स्थितियों में किया जाता है। कुछ इमेजिंग जांचों में एमआरआई, पैट स्कैन या सीटी स्कैन शामिल हो सकते हैं।
    • मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) रेडियो तरंगों और चुंबकों का उपयोग करते हुए शरीर के विस्तृत रूप से वर्णित चित्र बनाती है।
    • पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी (पैट) स्कैन शरीर की कंप्यूटरीकृत छवियां बनाने के लिए शिरा के माध्यम से दिए गए रेडियोधर्मी ग्लूकोज़ (शर्करा) का उपयोग करती है। यह ग्लूकोज़ शरीर में संचरण करता है और ऊर्जा के लिए शर्करा का उपयोग करने वाली कोशिकाओं द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है। इससे विभिन्न ऊतक और अंग कंप्यूटर स्क्रीन पर रंगीन चित्रों के रूप में प्रदर्शित हो पाते हैं। कैंसर कोशिकाएं अक्सर अन्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती और विभाजित होती हैं और ये अधिक ग्लूकोज़ ग्रहण करती हैं। पैट कई बार शरीर के उन भागों में कैंसर का पता लगा सकता है जो सीटी स्कैन या एमआरआई पर दिखाई नहीं देते।
    • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी या कैट स्कैन) शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की छवियां बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करती है।
कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) मेलेनोमा से पीड़ित बाल रोगी का पैट स्कैन। छवि को मेलेनोमा फैलने वाले भागों को दर्शाने के लिए चिह्नित किया जाता है।

एक बाल रोगी में कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) मेलेनोमा को दर्शाता हुआ पैट स्कैन। हरे रंग के तीर उन भागों को चिह्नित करते हैं जिनमें कैंसर फैला हुआ है।

मेलेनोमा के कई उपप्रकार हैं:

  • नॉड्यूलर मेलेनोमा – ट्यूमर के पहलू त्वचा में बहुत गहराई में विकसित होते हैं
  • सुपरफिशियल स्प्रेडिंग मेलेनोमा – अधिक सपाट और चौड़ा होने की प्रवृति होती है।
  • लेंटिगो मालिग्न मेलानोमा
  • एक्रल लेंटिजिनस मेलानोमा – पैरों के तलवों जैसे स्थानों पर होते हैं
  • स्पिट्ज़ॉइड मेलेनोमा (स्पिट्ज नेवस मेलेनोमा)

स्पिट्ज़ॉइड मेलेनोमा सबसे आम प्रकार का मेलेनोमा है जो छोटी आयु के रोगियों में देखा जाता है।

मेलेनोमा के स्तर

मेलेनोमा को स्तर I या II (केवल त्वचा में मेलेनोमा), स्तर III (मेलेनोमा लसिका ग्रंथियों में फैल चुका होता है) या स्तर IV (कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) मेलेनोमा) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

मेलेनोमा का स्तर निर्धारित करने वाले कारकों में निम्नलिखित कारक शामिल हैं:

  • ट्यूमर की मोटाई या त्वचा में मेलेनोमा कितनी गहराई में स्थित है
  • यदि ट्यूमर फट कर या टूटकर त्वचा की ऊपरी परत से बाहर निकल आया है (फ़ोड़ा हो गया है)
  • ट्यूमर लसिका ग्रंथियों में फैला है या नहीं
  • ट्यूमर शरीर के अन्य भागों में फैला है या नहीं
मेलेनोमा स्तर 0, स्तर I और स्तर II
मेलेनोमा स्तर III और स्तर IV
स्तर विवरण
स्तर 0

मेलेनोमा अपने मूल स्थान में: असामान्य मेलानोसाइट्स केवल त्वचा की बाहरी परत पर ही पाए जाते हैं।

स्तर IA

मेलेनोमा की मोटाई 1 मिलीमीटर या उससे कम होती है; कोई घाव या फोड़ा नहीं होता

स्तर IB
  • मेलेनोमा की मोटाई 1 मिलीमीटर या उससे कम होती है, इसमें घाव या फोड़ा होता है
  • मेलेनोमा की मोटाई 1-2 मिलीमीटर की होती है; कोई घाव या फोड़ा नहीं होता
स्तर IIA
  • मेलेनोमा की मोटाई 1-2 मिलीमीटर की होती है, इसमें घाव या फोड़ा होता है
  • मेलेनोमा की मोटाई 2-4 मिलीमीटर की होती है; कोई घाव या फोड़ा नहीं होता
स्तर IIB
  • मेलेनोमा की मोटाई 2-4 मिलीमीटर की होती है; इसमें घाव या फोड़ा होता है
  • मेलेनोमा की मोटाई >4 मिलीमीटर की होती है; कोई घाव या फोड़ा नहीं होता
स्तर IIC

मेलेनोमा की मोटाई >4 मिलीमीटर की होती है, इसमें घाव या फोड़ा होता है

स्तर III
  • मेलेनोमा लसिका ग्रंथियों तक फैला हुआ होता है;
  • लसिका ग्रंथियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई या गुँथी हुई हो सकती हैं;
  • कैंसर लसिका तंत्र में मुख्य ट्यूमर से 2 सेंटीमीटर की दूरी पर होता है; या
  • मुख्य ट्यूमर से 2 सेंटीमीटर के अंदर छोटे-छोटे ट्यूमर होते हैं
स्तर IV

मेलेनोमा फेफड़े, जिगर, मस्तिष्क, हड्डी, कोमल ऊतक या त्वचा पर दूरस्थ स्थानों सहित शरीर के अन्य भागों में फैला हुआ होता है

मेलेनोमा के लिए पूर्वानुमान

मेलेनोमा से स्वास्थ्य लाभ की संभावना विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है जैसे:

  • ट्यूमर की मोटाई
  • ट्यूमर का स्थान
  • कैंसर लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों (कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक)) और मेटास्टैटिक स्थानों तक फैल गया है।
  • ट्यूमर को पूरी तरह से निकालने की सर्जरी की क्षमता
  • खून में लैक्टेट डीहाइड्रोजिनेज (एलडीएच) का स्तर

कुल मिलाकर, रोग पूर्वानुमान के लिए बीमारी का स्तर सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है। एक जगह या अंग तक सीमित मेलेनोमा जो फैला नहीं है, उससे पीड़ित रोगियों में 90% से अधिक की जीवित रहने की दर के साथ रोग पूर्वानुमान बहुत ही उत्तम होता है। हालांकि, दूरस्थ भागों तक फैले कैंसर वाले रोगियों का इलाज करना अधिक कठिन होता है।

मेलेनोमा का इलाज

मेलेनोमा का इलाज मेलेनोमा के स्थान, ट्यूमर की विशेषताओं (वंशाणु परिवर्तन और शरीरकोष विज्ञान) और बीमारी के स्तर पर निर्भर करता है। 

  1. मेलेनोमा का प्रमुख इलाज सर्जरी है। मेलेनोमा त्वचा की कई परतों तक फैल सकता है। संपूर्ण कैंसर को निकालने के लिए, मेलेनोमा के आसपास की त्वचा का एक बड़ा भाग निकाला जा सकता है। घाव को बंद करने के लिए त्वचा निरोपण की ज़रूरत पड़ सकती है। लसिका ग्रंथि बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) करने और लसिका ग्रंथि को निकालने (विच्छेदन) की भी ज़रूरत पड़ सकती है। एक जगह या अंग तक सीमित ट्यूमर (स्तर I और II) जो फैले नहीं हैं, उनसे ग्रस्त रोगियों का इलाज अकेले सर्जरी से ही किया जा सकता है।

    यदि मेलेनोमा लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों में फैल गया है, तो प्रतिरक्षा बढ़ाने के उपचार (इम्यूनोथेरेपी) और/या कीमोथेरेपी सहित अतिरिक्त इलाजों की आवश्यकता होती है।

  2. प्रतिरक्षा बढ़ाने का उपचार (इम्यूनोथेरेपी) कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली का उपयोग करता है। मेलेनोमा में विभिन्न प्रकार के प्रतिरक्षा बढ़ाने का उपचार (इम्यूनोथेरेपी) एजेंटों का अध्ययन किया जा रहा है। कुछ दवाइयां कैंसर कोशिकाओं के विकास को नियंत्रित करने वाले संकेतों को रोकने का कार्य करती हैं। अन्य एजेंट विशेष प्रोटीनों का उपयोग करते हैं जो कैंसर कोशिकाओं से जुड़ जाते हैं जिससे प्रतिरक्षा कोशिकाएं कैंसर की पहचान कर उन्हें नष्ट कर पाती हैं।

  3. लक्षित इलाज वे दवाइयां हैं जो ट्यूमर के वंशाणुओं और प्रोटीनों जैसे विशिष्ट लक्षणों पर क्रिया करते हुए या उन पर लक्ष्य साधते हुए कार्य करती हैं। कुछ मेलेनोमा रोगियों में बीआरएएफ वंशाणु में परिवर्तन या उत्परिवर्तन होता है। इसके कारण कोशिकाएं एक असामान्य प्रोटीन बन जाती हैं। असामान्य बीआरएएफ प्रोटीन को अवरुद्ध करने वाली दवाइयों में बीआरएएफ इनहिबिटर (वेमुराफेनिब, डब्राफेनिब) और एमईके प्रोटीन इनहिबिटर (ट्रैमेटिनिब, कोबिमेटिनिब) शामिल हैं। लगभग आधे मेलेनोमा में बीआरएएफ उत्परिवर्तन होता है और इन रोगियों के लिए लक्षित इलाज सहायक हो सकता है।

  4. कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) मेलेनोमा का इलाज करने के लिए कीमोथेरेपी (“कीमो”) का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, मेलेनोमा पर कीमोथेरेपी का असर हमेशा नहीं होता है। ट्यूमर के स्थान और बीमारी के स्तर के आधार पर, कीमोथेरेपी पूरे शरीर में दी जाने वाली या ट्यूमर के आस-पास की जगह में दी जाने वाली हो सकती है। पूरे शरीर में दी जाने वाली कीमोथेरपी पूरे शरीर में काम करती है। इसे इंजेक्शन द्वारा दिया जा सकता है या मुंह से लिया जा सकता है। ट्यूमर के आस-पास की जगह की कीमोथेरपी मुख्य रूप से शरीर के एक भाग में मौजूद कैंसर कोशिकाओं पर काम करती है।

  5. रेडिएशन थेरेपी का उपयोग उस मेलेनोमा का इलाज करने के लिए किया जा सकता है जो लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों तक फैल चुका है जैसे मस्तिष्क।

बच्चों को बीमारी के परीक्षण के भाग के रूप में मेलेनोमा का इलाज दिया जा सकता है।

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मेलेनोमा के बाद जीवन

मेलेनोमा की रोकथाम

मेलेनोमा से ठीक होकर जीवित रहने वाले लोगों में यह बीमारी दुबारा होने का अधिक जोखिम होता है। मेलेनोमा से ठीक होकर जीवित रहने वाले लोगों को कम से कम हर 6 महीने में एक त्वचा विशेषज्ञ द्वारा नियमित रूप से जांच करवाते रहना चाहिए। जीवित रहने वाले लोगों को अपनी त्वचा की नियमित रूप से जांच करनी चाहिए और परिवर्तन का कोई भी संकेत दिखने पर चिकित्सक को दिखाना चाहिए। मेलेनोमा की रोकथाम करने में मदद के लिए यहां कुछ सरल तरीके दिए गए हैं:

  • धूप के संपर्क में कम आएं। 
  • सनस्क्रीन लगाएं।
  • टैनिंग बेड का उपयोग न करें।
  • अपनी त्वचा को जानें।
  • धूप के प्रति बढ़ी हुई संवेदनशीलता के लिए दवाइयों की जांच करें।

मेलेनोमा रिसर्च फाउंडेशन की किड्स गाइड टू सेल्फ स्क्रीनिंग देखें।

क्या आपको पता है कि स्लिप, स्लॉप, स्लैप कैसे करना है? धूप से सुरक्षा के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करें:

इलाज के बाद देरी से दिखाई देने वाले प्रभाव

सामान्य स्वास्थ्य और बीमारी की रोकथाम के लिए, कैंसर से बचे सभी लोगों को स्वस्थ जीवन शैली और खान-पान की आदतें अपनानी चाहिए, साथ ही प्राथमिक चिकित्सक द्वारा कम से कम हर वर्ष नियमित रूप से शारीरिक परीक्षण और जांचें भी करवाते रहना चाहिए।

बचपन में होने वाले कैंसर से बचे लोग जिनका इलाज पूरे शरीर में कीमोथेरेपी या रेडिएशन देने के द्वारा किया गया है, उनके तीव्र या देर से होने वाले दुष्प्रभावों के लिए उन्हें मॉनिटर किया जाना चाहिए। 


समीक्षा की गई: जून 2018