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पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग)

इसे इन नामों से में भी जाना जाता है: सेरिबेलर म्यूटिज़म, सेरिबेलर म्यूटिज़म सिंड्रोम, सेरिबेलर कॉग्निटिव अफ़ेक्टिव सिंड्रोम, ट्रांज़िएंट सेरिबेलर म्यूटिज़म, गूंगापन और अनुवर्ती शब्दोच्चारण दोष या डिसआर्थ्रिआ

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) क्या है?

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) या सेरिबेलर म्यूटिज़्म, वह स्थिति है जो कभी-कभी दिमाग के पिछले भाग पोस्टेरियर फोसा में मस्तिष्क के कैंसर को निकालने की सर्जरी के बाद विकसित होती है। पोस्टेरियर फोसा, सिर का पिछला हिस्सा है जिसमें सेरेबेलम और ब्रेन स्टेम होते हैं।

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) से पीड़ित बच्चों में आमतौर पर लक्षणों का एक समूह पाया जाता है। इसके सबसे प्रमुख लक्षण सीमित वाक् शक्ति या गूंगापन है। यद्यपि बच्चों में भावबोधक वाणी की कमी होती है, फिर भी वे जानकारी को संसाधित करने और समझने में समर्थ होते हैं। पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के अन्य लक्षणों में वाणी, संचलन, भावनाएं और व्यवहार में परिवर्तन शामिल हैं।

आमतौर पर लक्षण ट्यूमर सर्जरी के बाद 1-10 दिनों में दिखाई देते हैं और ये कई हफ़्तों या महीनों तक रह सकते हैं। सुधार के साथ भी रोगियों में कुछ हद तक समस्याएं जारी रह सकती हैं।

बच्चों में होने वाले लगभग आधे मस्तिष्क के कैंसर, दिमाग के पिछले भाग (पोस्टेरियर फोसा) में होते हैं। वे बच्चे जिनकी मेडुलोब्लास्टोमा, पोस्टेरियर फोसा ट्यूमर हटाने के लिए सर्जरी की गई है, उनमें से लगभग 25% बच्चों को पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) होने की शिकायत होगी।

बच्चों में होने वाले लगभग आधे मस्तिष्क के कैंसर, दिमाग के पिछले भाग (पोस्टेरियर फोसा) में होते हैं। वे बच्चे जिनकी मेडुलोब्लास्टोमा, पोस्टेरियर फोसा ट्यूमर हटाने के लिए सर्जरी की गई है, उनमें से लगभग 25% बच्चों को पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) होने की शिकायत होगी।

बच्चों में होने वाले लगभग आधे मस्तिष्क के कैंसर, दिमाग के पिछले भाग (पोस्टेरियर फोसा) में होते हैं। वे बच्चे जिनकी मेडुलोब्लास्टोमा, पोस्टेरियर फोसा ट्यूमर निकालने के लिए सर्जरी की गई है, उनमें से लगभग 25% बच्चों को पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) होने की शिकायत होगी। अन्य ट्यूमर की सर्जरी से भी, जैसे एस्ट्रोसाइटोमा और एपिन्डाइमोमा, पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) हो सकता है, जो कि आमतौर पर कम ही होता है।

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के बारे में पूरी तरह से पता नहीं लग पाया है। चिकित्सकों को पता नहीं है कि यह हालत कुछ बच्चों को क्यों प्रभावित करती है और दूसरों को नहीं। यद्यपि कुछ कारकों से खतरा बढ़ सकता है, लेकिन पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) का समय से पहले पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है। पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के लिए कोई इलाज ज्ञात नहीं है और स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया व्यापक रूप से अलग-अलग होती है।

वे बच्चे जिनकी मेडुलोब्लास्टोमा, पोस्टेरियर फोसा ट्यूमर निकालने के लिए सर्जरी की गई है, उनमें से लगभग 25% बच्चों को पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) (जिसे सेरेबेलर म्यूटिज्म भी कहा जाता है) होने की शिकायत होती है। इस छवि में, मेडुलोब्लास्टोमा से पीड़ित एक युवा रोगी ब्लॉक गेम खेलता है।

वे बच्चे जिनकी मेडुलोब्लास्टोमा, पोस्टेरियर फोसा ट्यूमर निकालने के लिए सर्जरी की गई है, उनमें से लगभग 25% बच्चों को पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) होने की शिकायत होती है।

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के लक्षण हल्के से गंभीर प्रकार तक के होते हैं। लक्षण आमतौर पर मस्तिष्क के स्वस्थ होने के साथ-साथ सुधरते जाते हैं। अधिकांश बच्चों में फिर से बातचीत करने और बिना किसी सहारे के चलने की क्षमता वापस आ जाती है। स्वास्थ्य लाभ आमतौर पर एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें लगभग हफ़्ते, महीने या साल भी लग जाते हैं। रोगियों को अक्सर एक या अधिक क्रियाशील भागों में लंबे समय तक समस्याएं रहती हैं, विशेषकर चाल, समन्वय, वाणी स्पष्टता और बोध। अधिक गंभीर लक्षणों वाले बच्चों में स्थायी कमी होने की संभावना भी अधिक होती है।

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के लिए देखभाल में आमतौर पर शारीरिक चिकित्सा, संयोजन चिकित्सा और वाक् संबंधी थेरेपी सहित पुनर्सुधार सेवाओं का संयोजन शामिल है। पोषण-संबंधी सहायता, मनोविज्ञान और स्कूल-संबंधी सहायता भी महत्वपूर्ण हैं।

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के सामान्य लक्षण

  • वाणीघात या म्यूटिज़म (गूंगापन)
  • मांसपेशियों पर नियंत्रण या समन्वय में कमी
  • आंख की असामान्य हरकतें
  • भावनात्मक अस्थिरता, चिड़चिड़ापन या व्यवहार में परिवर्तन
  • निगलने में कठिनाई
  • मांसपेशी का कमज़ोर होना या मांसपेशी की शक्ति कम होना
  • ऐच्छिक क्रियाओं में अस्थायी कमी
  • ज्ञान-संबंधी समस्याएं
 

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के लक्षण

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग), लक्षणों का एक समूह है जिसमें वाणी, संचलन, भावनात्मक, व्यवहार और/या बोधता में परिवर्तन शामिल हैं।

    • गूंगापन (म्यूटिज़्म): कुछ बच्चे पूरी तरह से बोलने की क्षमता खो देते हैं। अन्य बच्चे कुछ शब्द बोल पाते हैं या बहुत छोटे वाक्य बोल पाते हैं। यह वाणीघात समस्या आमतौर पर सर्जरी के बाद 1-2 दिनों में उत्पन्न होती है। अधिकांश बच्चों में, अगले कुछ हफ़्तों या महीनों में बोलने की शक्ति वापस आ जाती है, लेकिन इसमें वाणी संबंधी कुछ स्थायी विकार रह सकते हैं। क्योंकि यह इस स्थिति का प्रमुख लक्षण है, इसलिए पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) को सेरेबेलर म्यूटिज्म भी कहा जाता है।
    • मांसपेशी की कमज़ोरी या मांसपेशी पर खराब नियंत्रण के कारण होने वाली वाक् संबंधी समस्याएं (शब्दोच्चारण दोष या डिसआर्थ्रिआ): पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) से पीड़ित बहुत से बच्चों में वाक् संबंधी समस्याएं हो सकती हैं क्योंकि उन्हें मुंह, जीभ, तालु और स्वरतंत्रियों की मांसपेशियों को नियंत्रित करने में कठिनाई होती है। धीमी गति से बोलने, अस्पष्ट उच्चारण, आवाज़ निकालने में कठिनाई या आवाज़ की प्रबलता, लहज़ा, स्वर की ऊंचाई के स्तर से संबंधित समस्याओं के कारण भाषा को समझना मुश्किल हो सकता है।
    • वाक् संबंधी समस्याएं, बोलने की शक्ति के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क मार्गों के क्षतिग्रस्त होने के कारण होती हैं (चेष्टा-अक्षमता या एप्रेक्सिया): कुछ बच्चों को, वे जो कहना चाहते हैं उसे सही ढ़ंग से कहने में परेशानी होती है। उन्हें सुसंगत रूप से बोलने या लक्ष्य ध्वनियों अथवा शब्दों को कहने के लिए मुंह की संचलन क्रियाओं में तालमेल बिठाने में समस्याएं हो सकती हैं। उन्हें अपने मुंह को ऐच्छिक रूप से चलाने में भी कठिनाई हो सकती है। जैसे कि, हो सकता है कि बच्चे आदेश पर अपने मुंह को खोल न सकें या मुस्करा न सकें। हालांकि, वे अनैच्छिक रूप से उबासी आने पर जम्हाई ले सकते हैं और हंसते समय मुस्करा सकते हैं।
    • निगलने में कठिनाई (डिसफेजिया): हो सकता है कि बच्चे निगलने के लिए उपयोग की जाने वाली मांसपेशियों पर नियंत्रण न रख पाएं। इसके लिए आहार परिवर्तन की, विशेषीकृत उपकरणों या रणनीतियों की, अथवा समस्याओं में सुधार आने तक नली द्वारा भोजन देने की आवश्यकता पड़ सकती है।

    वाक् संबंधी थेरेपी के बारे में जानें

    • ऐच्छिक क्रियाओं में कमी (चेष्टा-अक्षमता या एप्रेक्सिया): पहली बार में, अधिकांश बच्चों को क्रियाएं (ऐच्छिक क्रियाएं) करने के लिए कहे जाने पर क्रिया करने में काफी कठिनाई होगी। हालांकि, वे अनैच्छिक या स्वचालित क्रियाओं का प्रदर्शन कर सकते हैं, जैसे कि उबासी लेना या मुंह बनाना। इससे हाथ और पैर जितने कमज़ोर होते हैं उसकी तुलना में अधिक कमज़ोर प्रतीत हो सकते हैं। मांसपेशी तालमेल से संबधित समस्याएं केवल चेष्टा-अक्षमता या एप्रेक्सिया में सुधार होने और ऐच्छिक क्रियाएं करने की क्षमता वापस आने के बाद ही स्पष्ट होती हैं।
    • गतिवाही क्रियाओं को नियंत्रित करने में समस्याएं (गतिभंग): पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) में गति, संतुलन और मांसपेशी तालमेल से संबंधित विभिन्न प्रकार की समस्याएं देखी जाती हैं। बच्चों को अधिक गतिवाही क्रियाओं को करने के साथ-साथ शारीरिक गतिविधियों में छोटी मांसपेशियों का समन्वय करने में परेशानी हो सकती है। बच्चे में सुधार होने पर हाथ आंख के तालमेल में कमी, छोटी वस्तुओं को संभालने में परेशानी और अस्थिर चाल स्पष्ट दिखाई देती है। पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) से पीड़ित बच्चों में कुछ हद तक ये समस्याएं बनी रहती हैं। पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) की आरंभिक अवस्थाओं के दौरान, अधिकांश बच्चों में आंतों और मूत्राशय पर नियंत्रण बिगड़ जाता है, यद्यपि ये क्रियाएं आमतौर पर समय के साथ बेहतर हो जाती हैं।
    • शरीर के एक ओर के भाग में कमज़ोरी (हेमिपैरेसिस): कुछ बच्चों में शरीर के एक या दोनों ओर के भागों में कमज़ोरी हो सकती है।
    • मांसपेशी शक्ति में परिवर्तन (हाइपोटोनिया या हाइपरटोनिया): मांसपेशी शक्ति मांसपेशियों के आराम की स्थिति में मांसपेशियों के तनाव के संतुलन को दर्शाती है। हाइपोटोनिया या कम मांसपेशी शक्ति से मांसपेशियां “ढीली-ढाली” हो सकती हैं और शारीरिक मुद्रा को नियंत्रित करने या सीधे बैठने में असमर्थता हो सकती है। हाइपरटोन या अत्यधिक मांसपेशी शक्ति से मांसपेशियों में बहुत कसाव हो सकता है।
    • अनैच्छिक क्रियाएं: कुछ बच्चों में अनैच्छिक क्रियाएं विकसित हो सकती हैं। इनमें कंपकंपी आना, मांसपेशियों या अंग में अचानक झटके लगना या अनैच्छिक नेत्र संबंधी क्रियाएं शामिल हो सकती हैं।
    • कपाल तंत्रिकाओं में समस्याएं (कपाल तंत्रिका घात): पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) में अक्सर कपाल तंत्रिका VI और VII शामिल होती हैं। छठी कपाल तंत्रिका नेत्र संबंधी क्रियाओं को नियंत्रित करती है। इस तंत्रिका में समस्याएं होने से दोहरा दिखाई दे सकता है और आंख “तिरछी” हो सकती है। सातवीं कपाल तंत्रिका चेहरे से संबंधित तंत्रिका है। इस तंत्रिका के क्षतिग्रस्त होने से चेहरा “लटक” सकता है। बच्चों में लार बहने की और चेहरे के भाव उत्पन्न करने में समस्या हो सकती है।

    शारीरिक चिकित्सा के बारे में जानें

    संयोजन चिकित्सा के बारे में जानें

  1. पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) से पीड़ित बच्चों में अक्सर भावनात्मक अस्थिरता होती है। वे अप्रत्याशित या स्थिति से मेल नहीं खाने वाली प्रतिक्रियाएं दे सकते हैं, जैसे कि बिना बात के हंसना या रोना। बच्चों की मनोदशा बदलती रहती है या उन्हें शांत करना कठिन होता है। कभी-कभी, बच्चे अलग-थलग से रहते या कम प्रतिक्रिया देते हुए दिख सकते हैं। चिड़चिड़ापन, उदासी की बीमारी / निराशा की बीमारी, चिंता और लापरवाही भी आम लक्षण हैं। नींद के पैटर्न या सोने के समय में परिवर्तन सहित, नींद संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) से पीड़ित कुछ बच्चों में, स्पर्श, प्रकाश, ध्वनियों, या हरकतों जैसी संवेदनाओं के प्रति उनके जवाब देने के तरीके में परिवर्तन हो सकते हैं। वे वातावरण में मौजूद उन कुछ चीज़ों से परेशान हो सकते हैं जो पहले उनकी किसी प्रतिक्रिया का कारण नहीं बनते थे।

    इन परिवर्तनों के कारण बच्चे की खेल-कूद, दैनिक क्रियाकलापों या पुनर्सुधार की प्रक्रिया में भाग लेने इच्छा कम हो सकती है।

    मनोविज्ञान के बारे में जानें

  2. पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) से पीड़ित बच्चे अक्सर कम संज्ञानात्मक प्रक्रिया दर्शाते हैं, जिसमें फ़ोकस, ध्यान, प्रक्रिया करने की गति और स्मृति संबंधी समस्याएं शामिल हैं। हो सकता है कि वे कार्यों को बहुत धीमी गति से करें और उन्हें व्यवस्थित करने और योजना बनाने में कठिनाई होती हो। बच्चे समस्या को सुलझाने में और अपने विचारों को बतलाने में कम समर्थ हो सकते हैं। संज्ञानात्मक क्रिया में कुछ हद तक कमियां बने रहने की संभावना होती है। हालांकि, यह पता लगाना कठिन हो सकता है कि इन सबका कारण पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) है या ये लक्षण ट्यूमर अथवा इलाज से संबंधित संज्ञानात्मक संबंधी देरी से होने वाले प्रभावों के कारण होते हैं।

    संज्ञानात्मक संबंधी देर से होने वाले प्रभाव

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के लक्षण जटिल होते हैं और वे अक्सर एक दूसरे से संबंधित होते हैं। जैसे कि, बच्चे बात करने में असमर्थ होने पर अशांत या निराश हो सकते हैं। वाक् शक्ति और भाषा विकारों के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें मांसपेशी की कमज़ोरी, चेष्टा-अक्षमता या एप्रेक्सिया और संज्ञानात्मक क्षति शामिल हैं। इसके अलावा, रोगियों को कैंसर इलाज प्राप्त होते रहते हैं जिनसे अतिरिक्त समस्याएं हो सकती हैं, लक्षण बदतर हो सकते हैं या स्वास्थ्य लाभ में देरी हो सकती है। हालांकि, यह जानना आवश्यक है कि अधिकांश रोगियों में समय के साथ लक्षणों में काफी सुधार होता है और वे दैनिक जीवन के क्रियाकलापों में आत्मनिर्भर हो जाते हैं।

अच्छी प्रशामक देखभाल और प्रोत्साहन, संभव सर्वोत्तम स्वास्थ्य लाभ को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं।

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के जोखिम कारक और कारण

कोई भी बच्चा जिसकी पोस्टेरियर फोसा ट्यूमर निकालने के लिए सर्जरी की गई है, उसे पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) होने का खतरा होता है। यह सिंड्रोम कैसे और क्यों होता है, इसे समझने के लिए अधिक शोध की आवश्यकता है।

सर्जरी के बाद पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के सबसे शक्तिशाली जोखिम कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • मेडुलोब्लास्टोमा का निदान
  • ट्यूमर की मध्यरेखा स्थिति
  • ब्रेन स्टेम का समावेश

कुछ शोधों से पता चला है कि छोटी आयु, बड़े ट्यूमर आकार, हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी आ जाना) या सर्जरी के पहले भाषा की कठिनाइयों से जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, शोध के निष्कर्ष असंगत रहे हैं।

शोधकर्ता सक्रिय रूप से कारणों, लक्षणों, देखभाल और परिणामों का अध्ययन कर रहे हैं। सेरेबेलम से सेरेब्रल कॉर्टेक्स (दांतेदार नाभिक और बेहतर अनुमस्तिष्क पेडंकिल) तक आगे और पीछे की ओर जाने वाले तंत्रिका पथों पर होने वाला घाव संभावित रूप से पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के विकास में प्रमुख योगदानकर्ता होता है। मेडुलोब्लास्टोमा ट्यूमर इन मस्तिष्क संरचनाओं के बहुत पास होते हैं और यह पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) से पीड़ित रोगियों में सबसे आम प्रकार का ट्यूमर है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि सर्जिकल तकनीकों में सुधार इस स्थिति के पैदा होने को कम करेगा।

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) से पीड़ित बच्चों के लिए देखभाल

प्रशामक देखभाल पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के लिए उपलब्ध प्रमुख इलाज है। विशिष्ट लक्षणों को विभिन्न इलाजों के संयोजन का उपयोग करते हुए संबोधित किया जाता है, जिसमें निम्नलिखित थेरेपी शामिल हैं: 

  • वाक् संबंधी थेरेपी
  • शारीरिक चिकित्सा
  • व्यावसायिक थेरेपी
  • संज्ञानात्मक आकलन और पुनर्सुधार
  • मनोविज्ञान और व्यवहार
  • स्कूल संबंधी सहायता और आवास
  • नैदानिक-उपचारात्मक पोषण

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) का सामना कर रहे परिवारों के लिए सुझाव

सहायता प्राप्त करें। पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) विशेष रूप से रोगियों और परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। माता पिता तब असहाय और हताश महसूस करते हैं जब वे अपने बच्चे को राहत नहीं पहुंचा पाते या उनसे बात नहीं कर पाते। जब बच्चे ठीक होने लगते हैं, तब वे निराश होने के बारे में भी बताते हैं कि वे समझ तो रहे थे लेकिन अपने विचारों और अपनी भावनाओं को बता या व्यक्त नहीं कर सकते थे। क्या अपेक्षा की जाए और अपने बच्चों की मदद के लिए क्या किया जाए, परिवारों के लिए यह समझना मुश्किल होता है। ऐसे ही अनुभवों से गुज़र रहे अन्य परिवार, समर्थन और सलाह के स्रोत बन सकते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए एक अनुभवी देखभाल टीम का होना भी आवश्यक है कि रोगियों और पारिवारों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के दौरान जिन संसाधनों की आवश्यकता है उनके पास वे उपलब्ध हैं।

अपेक्षाओं को प्रबंधित करें। पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के बारे में पहले से कुछ नहीं कहा जा सकता। प्रत्येक रोगी में स्वास्थ्य लाभ अलग-अलग दिखता है और प्रत्येक लक्षण का एक अलग समय हो सकता है। यद्यपि अन्य परिवार मदद और प्रोत्साहन के स्रोत हो सकते हैं, लेकिन किसी और रोगी की अनुभव के आधार पर अपेक्षाएं रखने से बचना चाहिए।

जानकारी प्राप्त करें और प्रश्न पूछें। पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) एक दुर्लभ स्थिति है। कई पुनर्सुधार विशेषज्ञों ने इस स्थिति वाले किसी बच्चे के साथ कभी भी काम नहीं किया है। माता-पिता अपने बच्चे के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाहकार होते हैं। वे देखभाल टीम के साथ काम कर सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके बच्चे के पास उचित विशेषज्ञ और सहायक सेवाएं हों, विशेष रूप से जब बच्चे को बाह्य रोगी विभाग में या लंबी देखभाल के लिए ले जाया जाता है।

पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के बारे में देखभाल टीम से पूछे जाने वाले प्रश्न:

  • क्या मेरे बच्चे में कोई अतिरिक्त जोखिम कारक हैं?
  • सर्जरी के बाद मुझे किस चीज़ पर नज़र रखनी चाहिए?
  • सर्जरी के बाद मेरे बच्चे की निगरानी कैसे की जाएगी?
  • यदि मेरे बच्चे में पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसके लिए कौन से इलाज उपलब्ध हैं?
  • स्वास्थ्य लाभ के दौरान मैं अपने बच्चे की मदद करने के लिए क्या कर सकता/सकती हूं?

आपकी देखभाल टीम द्वारा सुझाए गए सहायक उपकरणों और रणनीतियों का उपयोग करें। रोगियों और परिवारों के लिए संचार, शारीरिक गतिशीलता और दैनिक जीवन की गतिविधियों में सहायता करने के लिए विभिन्न प्रकार के संसाधन उपलब्ध हैं।

एक स्पीच थेरेपिस्ट बच्चों को अपनी इच्छाओं और ज़रूरतों को व्यक्त करने में मदद करने के लिए इशारों, हाथों के संकेतों, सांकेतिक भाषा, बोर्ड या उपकरणों जैसे संचार साधनों के उपयोग का सुझाव दे सकता है।

एक फिज़िकल थेरेपिस्ट परिवारों की गतिशीलता वाले उपकरणों के बारे में निर्णय लेने और रोगियों की व्हीलचेयर, वॉकर, बेंत या लेग ब्रेसिज़ जैसे उपकरण का माप लेने और उसे फ़िट करने में मदद कर सकता है। रोगी अक्सर अपने स्वास्थ्य लाभ वाले समय के दौरान बहुत से अलग-अलग प्रकार के उपकरणों का उपयोग करते हैं। वे कुछ उपकरणों का उपयोग कुछ गतिविधियों के लिए कर सकते हैं, लेकिन दूसरी गतिविधियों के लिए नहीं। जैसे की, बच्चा घर पर चलने के लिए वॉकर का उपयोग कर सकता है लेकिन वह दूर के स्थान के लिए, जैसे मार्केट या स्कूल जाने के लिए, व्हीलचेयर का इस्तेमाल करेगा।

एक व्यावसायिक थेरेपिस्ट स्नान करने और शौचालय का इस्तेमाल करने जैसी दैनिक गतिविधियों में मदद के लिए विशेषीकृत उपकरण का सुझाव दे सकता है। कार्यों को आसान बनाने के लिए संशोधित की गई पेंसिल और भोजन के लिए अनुकूलित बर्तनों जैसे साधनों का भी सुझाव दिया जा सकता है। कुछ मामलों में, बेहतर गतिवाही/चालक कार्यों में मदद हेतु बच्चे के हाथों के लिए ओर्थोटिक्स का उपयोग निर्धारित किया जा सकता है।

थेरेपी के दौरान धैर्य बनाए रखें। कोई प्रगति दिखाई न देने पर रोगियों और परिवारों को निराशा हो सकती है। फिर भी, थेरेपी जारी रखना ज़रूरी है, भले ही प्रगति धीमी प्रतीत होती हो। लगातार निगरानी और लंबे समय तक सहायता, शैक्षणिक सहायता सहित, पोस्टेरियर फोसा सिंड्रोम (दिमाग के पिछले भाग) के बाद के जीवन शैली को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।


समीक्षा की गई: सितंबर 2018