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ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा के अन्य नामों में शामिल हैं: एनाप्लास्टी ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा, आईडीएच-उत्परिवर्ती ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा, ओलिगोस्ट्रोसाइटोमा

ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा क्या है?

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा एक प्रकार का मस्तिष्क का कैंसर है जिसे ग्लियोमा के रूप में जाना जाता है। इसका नाम ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा इसलिए पड़ा क्योंकि ट्यूमर कोशिकाएं ऑलिगोडेंड्रोसाइट्स की तरह दिखती हैं, जो कोशिकाएं मस्तिष्क में नसों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाती हैं।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमास अक्सर सेरब्रम (मस्तिष्क) के सफेद पदार्थ में विकसित होता है। लगभग आधा फ़्रन्टल लोब (ललाट खंड) में होता है।

अधिकांश ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा वयस्कों में होते हैं। बच्चों और किशोर में बहुत कम होता है। 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मस्तिष्क का कैंसर के 1% से कम लक्षण ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा हैं।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमास अक्सर सेरब्रम (मस्तिष्क) के सफेद पदार्थ में विकसित होता है। लगभग आधा फ़्रन्टल लोब (ललाट खंड) में होता है।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमास अक्सर सेरब्रम (मस्तिष्क) के सफेद पदार्थ में विकसित होता है। लगभग आधा फ़्रन्टल लोब (ललाट खंड) में होता है।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा कम श्रेणी (श्रेणी II) या उच्च श्रेणी (श्रेणी III) के हो सकते हैं। ये ट्यूमर अक्सर फैलने वाले होते हैं और इनकी कोई विशिष्ट सीमाएँ नहीं हो सकती हैं। इसके इलाज में ट्यूमर को जितना संभव हो उतना निकालने के लिए आमतौर पर सर्जरी शामिल होती है। शेष बची कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए अक्सर रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जाता है। कीमोथेरेपी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा वाले बच्चों की बचने की दरें ट्यूमर की श्रेणी और सर्जरी की सफलता पर निर्भर करती हैं। कम श्रेणी के ट्यूमर वाले रोगी जिनके ट्यूमर सर्जरी द्वारा पूरी तरह से निकाल दिए जाते हैं, उनमें जीवित रहने की दर 90% से अधिक होती है।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा के लक्षण

ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा अक्सर धीमी गति से बढ़ने वाले होते हैं। समस्याएं उत्पन्न करने से पहले यह ट्यूमर कई वर्षों तक शरीर में मौजूद रह सकता है। ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा के संकेत और लक्षण बच्चे की उम्र, ट्यूमर के आकार, ट्यूमर के स्थान और तेजी से बढ़ने सहित कई कारकों पर निर्भर करते हैं।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • दौरा पड़ना (सर्वाधिक आम)
  • व्यक्तित्व या व्यवहार में परिवर्तन
  • सिरदर्द
  • दृष्टि से संबंधित समस्याएं
  • शरीर के एक ओर के भाग में कमज़ोरी या सुन्नपन

रोग की पहचान होने से पूर्व लगभग आधे रोगियों को दौरे पड़ने का अनुभव होता है। अधिकांश रोगियों को (लगभग 80%) को अपनी बीमारी के दौरान दौरे पड़ते हैं।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा के रोग की पहचान करना

चिकित्सक विभिन्न तरीकों से ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा की जाँच करते हैं।

  • शारीरिक जांच और चिकित्सकीय इतिहास से चिकित्सकों को लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने में मदद मिलती है।
    • जोखिम कारक: ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा होने का कारण अभी तक अज्ञात है, लेकिन कोशिकाओं में होने वाले कुछ आनुवंशिक परिवर्तनों को इन ट्यूमर से जोड़ा गया है। ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा वयस्कों में उत्पन्न होते हैं और आमतौर पर ये पुरुषों में अधिक पाए जाते हैं। बाल चिकित्सा ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा ज़्यादातर बच्चों और युवा वयस्कों में पाए जाते हैं।
  • तंत्रिका-सम्बंधित जाँच, स्मृति, देखने, सुनने, मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, समन्वय और प्रतिवर्ती क्रियाओं सहित मस्तिष्क के कामों के विभिन्न पहलुओं को मापता है।
  • विद्युत मस्तिष्क लेखी या इलेक्ट्रोइलेक्ट्रोएन्केफेलोग्राम (ईईजी), मस्तिष्क की विद्युतीय गतिविधि को मापता है। यह जांच स्कैल्प इलेक्ट्रोड के माध्यम से दौरे पड़ने की गतिविधि की निगरानी करती है और उसे रिकॉर्ड करती है।
  • ट्यूमर की पहचान करने, ट्यूमर कितना बड़ा है यह देखने और मस्तिष्क के कौन से भाग प्रभावित हो सकते हैं यह पता लगाने में मदद के लिए इमेजिंग जांचों का उपयोग किया जाता है। ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा में अक्सर ट्यूमर के अंदर कैल्शियम जमा होने वाले (कैल्सीफिकेशन) क्षेत्र शामिल होते हैं। इन कैल्शियम जमावों को कुछ इमेजिंग जांचों में देखा जा सकता है जो रोग की पहचान करने में मदद कर सकती हैं। मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) वह प्रमुख इमेजिंग तकनीक है जिसका उपयोग आमतौर पर ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा का आकलन करने के लिए किया जाता है। एमआरआई से बनी छवियों से ट्यूमर के प्रकार और रोग के संभावित प्रसार के बारे में अधिक जानकारी मिल सकती है। सर्जरी के बाद यह देखने के लिए भी एमआरआई किया जाता है कि कोई ट्यूमर बाकी तो नहीं रह गया है।
  • ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा रोग की पहचान करने के लिए आमतौर पर बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) का उपयोग किया जाता है। बायोप्सी में, सर्जरी के दौरान ट्यूमर का एक छोटा सा नमूना निकाला जाता है। उसके बाद एक रोगविज्ञानी ट्यूमर की विशिष्ट श्रेणी का पता लगाने के लिए ऊतक के नमूने को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर उसकी जाँच करता है। ऊतक का परीक्षण आण्विक लक्षणों और आनुवंशिक मार्कर का पता लगाने के लिए भी किया जाता है जिनसे ट्यूमर के बारे में अधिक जानकारी मिलती है।
ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा, ओलिगोडेन्ड्रोसाइट्स से विकसित होते हैं, जो वे कोशिकाएं हैं जो मस्तिष्क में नसों (तंत्रिकाओं) के लिए एक सुरक्षात्मक आवरण का निर्माण करती हैं।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा, ओलिगोडेन्ड्रोसाइट्स से विकसित होते हैं, जो वे कोशिकाएं हैं जो मस्तिष्क में नसों (तंत्रिकाओं) के लिए एक सुरक्षात्मक आवरण का निर्माण करती हैं।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा के स्तर का पता लगाना और उसका श्रेणीकरण

ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा ट्यूमर को माइक्रोस्कोप में उनके दिखने के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। कोशिकाएं जितनी अधिक असामान्य दिखती हैं, उनकी श्रेणी उतनी ही उच्च होती है। ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा आमतौर पर श्रेणी II या III के होते हैं।

  • श्रेणी II के ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा को कम श्रेणी का माना जाता है। इसमें कोशिकाएं बिल्कुल सामान्य कोशिकाओं की तरह दिखती हैं और बहुत धीरे-धीरे बढ़ती हैं। मस्तिष्क के अन्य भागों में इनके फैलने की संभावना कम होती है।
  • श्रेणी III के ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा को उच्च-श्रेणी का माना जाता है। इन ट्यूमर को एनाप्लास्टिक ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा कहा जाता है। ये अधिक आक्रामक होते हैं और बहुत आसानी से फैल सकते हैं।

पहले, ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा की पहचान मुख्य रूप से इस बात पर आधारित थी कि ट्यूमर कोशिकाएं माइक्रोस्कोप के नीचे कैसे दिखती हैं। हालांकि, चिकित्सक विशिष्ट आणविक परिवर्तनों और वंशाणु उत्परिवर्तन (डीएनए परिवर्तन) के बारे में अधिक जान रहे हैं जो ट्यूमर की कोशिकाओं में होते हैं। अधिकांश ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा में एक विशिष्ट आणविक मार्कर होता है जो रोग की पहचान में मदद करता है। पहला है, वंशाणु उत्परिवर्तन जिसे आईडीएच-उत्परिवर्तन के रूप में जाना जाता है, विभिन्न प्रकार के ग्लियोमा में देखा जा सकता है। ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा की पहचान एक आईडीएच1 या आईडीएच2 उत्परिवर्तन के आधार पर की जाती है। आमतौर पर, ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा में गुणसूत्रों में भी परिवर्तन होता है जिसे 1p/19q कोडलेशन कहा जाता है। हालांकि, बाल चिकित्सा ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा, विशेष रूप से छोटे बच्चों में, ये आणविक विशेषताएं नहीं हो सकती हैं। इन स्थितियों में, चिकित्सक रोग की पहचान करने के लिए इमेजिंग जांच, रोग लक्षण विद्या और नैदानिक विशेषताएं पर भरोसा करते हैं। ट्यूमर कोशिकाओं में विशिष्ट परिवर्तनों को समझने से चिकित्सक को इलाज की योजना बनाने और भविष्य में बेहतर इलाज विकसित करने में मदद मिल सकती है।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा के लिए पूर्वानुमान

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा वयस्कों में बहुत अधिक आम है, और बाल चिकित्सा रोगियों के लिए पूर्वानुमान कम जाना जाता है। कुल मिलाकर, बच्चों में वयस्कों की तुलना में बेहतर परिणाम होते हैं। बाल चिकित्सा ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा के लिए, कुल 5-वर्ष तक जीवित रहने की दर 80% से अधिक है। हालांकि, इलाज के परिणाम सर्जरी की सफलता, रोग की पहचान के समय उम्र, ट्यूमर की आणविक विशेषताओं और अन्य कारकों के आधार पर भिन्न हो सकती है। इसके अलावा, लंबे समय तक जीवित रहने वालों में भी बीमारी का दुबारा होना, वापस आना आम है।

परिणाम को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ट्यूमर का प्रकार और श्रेणी। कम-श्रेणी के ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा बहुत अधिक धीमी गति से विकसित होते हैं और इनके दोबारा होने की संभावना कम होती है। उच्च-श्रेणी के ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा का इलाज करना कठिन हो सकता है और यह अक्सर दोबारा हो जाते हैं।
  • यदि सर्जरी ट्यूमर को पूरी तरह निकाल सकती है। रोग का पूर्वानुमान लगाने के लिए एक सबसे बड़ा कारक यह अनुमान लगाना है कि क्या सर्जरी से ट्यूमर को पूरी तरह निकाला जा सकता है। जिन बच्चों में ट्यूमर को पूरी तरह से काट कर निकाला गया है और सर्जरी के बाद उनमें कोई ट्यूमर नहीं देखा गया है, उनके ठीक होने की संभावना सबसे अधिक होती है।
  • कैंसर फैला है या नहीं। वह कैंसर जो मस्तिष्क के अन्य भागों में फैल चुका है, उसका इलाज करना अधिक कठिन होता है।
  • ट्यूमर का स्थान। मस्तिष्क या ब्रेनस्टेम में स्थित होने वाले ट्यूमर की अपेक्षा सेरेब्रम या सेरेबेलम में होने वाले ट्यूमर के ठीक होने की अधिक संभावना होती है। यह मुख्य रूप से ट्यूमर को सर्जरी से निकालने की जटिलता के आधार पर निर्भर करता है।
  • यदि कैंसर नया है या यदि यह फिर से हुआ है। पुनरावर्ती रोग का इलाज करना अधिक कठिन होता है।
  • ट्यूमर की आणविक और आनुवंशिक विशेषताएं वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं कि क्या ट्यूमर के वंशाणुओं और कोशिका आकृतियों में कुछ परिवर्तन रोग का इलाज करना सरल बना सकते हैं या इनसे कुछ नए उभरते इलाजों (जिसे लक्षित इलाज कहा जाता है) के अवसर मिल सकते हैं।

ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा का इलाज

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा का इलाज ट्यूमर के प्रकार, उसके स्थान और क्या यह फैल चुका है या वापस आया है, इन सब बातों पर निर्भर करता है। आक्रामक ट्यूमर के लिए अधिक गहन इलाज की आवश्यकता होती है। डॉक्टर रोगी की आयु को भी ध्यान में रखते हैं। संभावित दुष्प्रभावों के कारण बहुत छोटे बच्चों में रेडिएशन थेरेपी का उपयोग नहीं किया जाता।

  1. ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा में ट्यूमर को जितना संभव हो उतना निकालने के लिए सर्जरी एक प्रमुख इलाज है। इसका लक्ष्य ट्यूमर को पूरी तरह से सर्जरी/काट कर निकालना या उसे पूर्ण रूप से निकालना है। हालांकि, ट्यूमर के आस-पास की मस्तिष्क संरचना को नुकसान पहुंचने का खतरा होने और ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा की फैलती प्रकृति के कारण सर्जरी से पूरे ट्यूमर को निकालना हमेशा संभव नहीं हो सकता है। कुछ स्थितियों में, ट्यूमर के स्थान की वजह से हो सकता है कि सर्जरी करना संभव न हो। कम श्रेणी के ट्यूमर वाले कुछ रोगियों में अकेले सर्जरी हो सकती है, जिसके बाद अवलोकन किया जा सकता है। अन्य रोगियों की सर्जरी हो सकती है और फिर रेडिएशन और/या कीमोथेरेपी हो सकती है।

  2. सर्जरी के बाद शेष बची कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है। रेडिएशन थेरेपी ट्यूमर के प्रकार और स्थान तथा बच्चे की आयु पर निर्भर करती है।

    यह थेरेपी ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएशन किरणों, एक्स-रे या प्रोटोन का उपयोग करती है। रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को क्षति पहुंचाते हुए कार्य करता है।

    यह थेरेपी ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएशन किरणों, एक्स-रे या प्रोटोन का उपयोग करती है। रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को क्षति पहुंचाते हुए कार्य करता है।

  3. सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी के अलावा कभी-कभी कीमोथेरेपी का भी उपयोग किया जाता है, खासतौर से उच्च-श्रेणी के ट्यूमर में। कीमोथेरेपी का उपयोग शिशुओं और छोटे बच्चों में रेडिएशन थेरेपी के उपयोग को विलंबित करने के लिए किया जा सकता है। ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कीमोथेरेपी में प्रोकार्बाज़िन, लोमुस्टिन (सीसीएनयू), और विन्क्रिस्टाईन (पीसीवी नियम), और टेमोज़ोलोमाइड शामिल हैं। अन्य प्रकार की कीमोथेरेपी का भी उपयोग किया जा सकता है, विशेष रूप से बीमारी के परीक्षण में। ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ कीमोथेरेपी दवाएं भविष्य में प्रजनन समस्याओं का कारण हो सकती हैं। नियोजित कीमोथेरेपी के प्रकार के आधार पर, परिवार प्रजनन क्षमता को बचाने में मदद करने के विकल्पों के बारे में अपनी देखभाल टीम के साथ बात कर सकते हैं।

  4. लक्षित इलाज, ट्यूमर के विशिष्ट लक्षणों जैसे वंशाणु और प्रोटीनों पर क्रिया करते हुए या उन पर लक्ष्य साधते हुए कार्य करते हैं।

फॉलो-अप देखभाल

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा से पीड़ित रोगियों की देखभाल में सहायता सेवाओं के उपयुक्त संदर्भ शामिल होने चाहिए जैसे तंत्रिकाविज्ञान / स्नायुविज्ञान, पुनर्सुधार इलाज, स्कूल सेवाएं और मनोविज्ञान। ओलिगोडेन्ड्रोग्लिओमा के इलाज के बाद, रोगियों में रोग के दुबारा होने को मॉनिटर करने के लिए उनके नियमित रूप से एमआरआई स्कैन किए जाएंगे। कुछ अवधि तक स्टेरॉयड और दौरा-रोधी की दवाइयां देने की आवश्यकता पड़ सकती है।

बाल ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा के बाद जीवन

ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा से पीड़ित बच्चों और किशोरों में स्वास्थ्य लाभ और उसके दीर्घकालिक प्रभाव ट्यूमर की विशेषता और प्राप्त इलाजों पर निर्भर करते हैं। रोगी में रोग की पुनरावृत्ति या प्रगति पर नज़र रखने के लिए जारी फॉलो-अप देखभाल, लेबोरेट्री जांचें और नियमित एमआरआई स्कैन की आवश्यकता होती है। देखभाल टीम, रोगी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के आधार पर एक कार्य-योजना निर्धारित करेगी।

एक दीर्घकालिक रोग के रूप में बाल-रोग कम-श्रेणी का ग्लियोमा

कम-श्रेणी का ग्लियोमा साथ ही कुछ ओलिगोडेन्ड्रोग्लियोमा, अक्सर एक क्रॉनिक या दीर्घकालिक रोग होता है। हालांकि, कम-श्रेणी ग्लियोमा से जीवित रहने की संपूर्ण दर उच्च होती है, ट्यूमर अक्सर वापस आ जाता है या समय के साथ बढ़ता जाता है। रोगी को कई वर्षों तक चलने वाली अनुवर्ती कार्रवाई में अतिरिक्त इलाजों की आवश्यकता पड़ सकती है। जिसका अर्थ यह है कि रोगी को अधिक इलाज- या ट्यूमर- संबंधित जटिलताओं का खतरा रहता है। कई बार ऐसा भी हो सकता है जब स्कैन पर ट्यूमर बढ़ा हुआ दिखाई दे, लेकिन देखभाल टीम इलाज की बजाय निगरानी (सतर्क प्रतीक्षा) की सलाह दे। रोगी, परिवार और देखभाल टीम के बीच अच्छा संवाद और विश्वास, निर्णय लेने और रोग प्रबंधन में सहायता करने के लिए महत्वपूर्ण होता है।

 

दीर्घकालिक स्वास्थ्य और जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए एक बहुविषयक टीम व्यक्तिगत देखभाल योजना बनाने मदद कर सकती है। थेरेपी के बाद के वर्षों में हो सकने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और इलाज के देरी से होने वाले प्रभाव पर नज़र रखने के लिए, उत्तरजीविता के दौरान नियमित जांच और स्क्रीनिंग आवश्यक होती हैं।

और अधिक जानकारी: मस्तिष्क के कैंसर के बाद जीवन


समीक्षा की गई: जनवरी 2020