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ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर

अन्य नाम/उपप्रकार: आंख की नस (तंत्रिका) ट्यूमर, केयाज़्मेटिक ग्लिओमा, ऑप्टिक ग्लिओमा

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर क्या है?

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर एक प्रकार का ग्लिओमा है, यह ऐसा ट्यूमर है जो नस (तंत्रिका) कोशिकाओं को चारों और से ढकने और सहारा देने वाले ग्लायल सेल से विकसित होता है। बच्चों में होने वाले ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर आमतौर पर कम श्रेणी के ट्यूमर होते हैं। ये दृष्टि प्रणाली की संरचनाओं के साथ विकसित होते हैं जिसमें आंख की नस (तंत्रिका), ऑप्टिक ट्रैक्ट और/या ऑप्टिक केयाज़्म शामिल हैं।

ट्यूमर के बढ़ने के साथ-साथ, दृष्टि प्रणाली की संरचनाओं पर पड़ने वाले दबाव से दृष्टि से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऑप्टिक पाथवे ग्लिओमा पीयूष ग्रंथि और हाइपोथेलेमस के आसपास भी विकसित हो सकते हैं। स्थान के आधार पर, ट्यूमर एंडोक्राइन फ़ंक्शन और हार्मोन उत्पादन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

बच्चों में ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर दृष्टि प्रणाली की संरचनाओं के साथ विकसित होते हैं जिसमें आंख की नस (तंत्रिका), ऑप्टिक ट्रैक्ट और/या ऑप्टिक केयाज़्म शामिल हैं।

बच्चों में ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर दृष्टि प्रणाली की संरचनाओं के साथ विकसित होते हैं जिसमें आंख की नस (तंत्रिका), ऑप्टिक ट्रैक्ट और/या ऑप्टिक केयाज़्म शामिल हैं।

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर का अनुपात बाल चिकित्सा में होने वाले सभी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस) ट्यूमर का 5% तक होता है। ये छोटे बच्चों और न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (एनएफ1) वाले बच्चों में अधिक आम होता है।

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर का इलाज आयु, दृष्टि, एनएफ1 स्थिति, और ट्यूमर के स्थान जैसे कारकों पर निर्भर करता है। ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर का इलाज करने के लिए सर्जरी, कीमोथेरेपी, और/या रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, दृष्टि संबंधी प्रक्रिया और एंडोक्राइन फ़ंक्शन को पहुंचने वाली संभावित हानि के कारण इसका इलाज जटिल होता है। यह देखने के लिए कि बीमारी कैसे बढ़ती है, कुछ रोगियों को निगरानी में रखा जा सकता है।

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर के संकेत और लक्षण

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर के लक्षण निम्नलिखित सहित बहुत से कारकों पर निर्भर करते हैं:

  • शिशु की आयु और विकास का स्तर
  • ट्यूमर का आकार
  • ट्यूमर का स्थान

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर के निम्नलिखित संकेत और लक्षण हो सकते हैं:

  • दृष्टि और नेत्र संबंधित समस्याएं:
    • आंखों की रोशनी खो जाना
    • रंग दृष्टि में कमी आना
    • आंखों में उभार आना या उनका आगे की ओर निकल आना (प्रोप्टोसिस) 
    • तिर्यक नेत्र (भेंगापन)
    • ऑप्टिक डिस्क में सूजन या उसका क्षीण होना
    • दृश्य क्षेत्र या दृष्टि के क्षेत्र में कमी आना
  • सिर का एक ओर झुक जाना
  • असामान्य नेत्र संचालन
  • हार्मोन में गड़बड़ी होने के कारण भूख, वजन, नींद, विकास या अन्य एंडोक्राइन समस्याओं में बदलाव आना
स्थान के आधार पर, ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर एंडोक्राइन फ़ंक्शन और हार्मोन उत्पादन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

स्थान के आधार पर, ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर एंडोक्राइन फ़ंक्शन और हार्मोन उत्पादन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

रोग की पहचान करना, परीक्षण, प्रक्रियाएं

चिकित्सक विभिन्न तरीकों से ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर का आकलन करते हैं। 

  • स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक जाँच से चिकित्सक को लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी, पारिवारिक इतिहास और जोखिम कारकों के बारे में जानने में मदद मिलती है। कुछ ट्यूमर के जोखिम बढ़ाने वाली वंशानुगत स्थितियों की जाँच करने के लिए आनुवंशिक जाँच की जा सकती है। खून और मूत्र में पदार्थों को देखने के लिए रक्त रसायन और हार्मोन अध्ययनों का उपयोग किया जाता है।
    • अधिकांश ऑप्टिक पाथवे ग्लिओमा 10 वर्ष की आयु के बच्चों में होते हैं। वंशानुगत स्थिति न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (एनएफ1) इन ट्यूमर के जोखिम को बढ़ाती है। एनएफ1 से पीड़ित लगभग 15-20% बच्चों में ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर विकसित होता है।
  • यदि ट्यूमर पीयूष ग्रंथि के पास है तो एंडोक्राइन फ़ंक्शन की व्यापक जाँचें की जाएंगी।
  • तंत्रिका-सम्बंधित जाँच, स्मृति, देखने, सुनने, मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, समन्वय और प्रतिवर्ती क्रियाओं सहित मस्तिष्क के कामों के विभिन्न पहलुओं को मापता है।
  • दृष्टि प्रक्रिया के विभिन्न पहलूओं का आकलन करने के लिए व्यापक नेत्र परीक्षण का उपयोग किया जाता है जिसमें नेत्र संरचनाओं की दिखावट, दृष्टि-संबंधी तीक्ष्णता, दृष्टि क्षेत्र, और रंग बोध शामिल हैं।
  • ट्यूमर की पहचान करने, ट्यूमर कितना बड़ा है यह देखने और मस्तिष्क के कौन से भाग प्रभावित हो सकते हैं यह पता लगाने में मदद के लिए इमेजिंग जांचों का उपयोग किया जाता है। 
    • मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) शरीर के विस्तृत चित्र बनाने के लिए रेडियो तरंगों और चुम्बकों का उपयोग करती है। एमआरआई से बनी छवियों से ट्यूमर के प्रकार और रोग के संभावित प्रसार के बारे में अधिक जानकारी मिल सकती है। यह ऑप्टिक पाथवे ग्लिओमा का आकलन करने की सबसे प्रमुख इमेजिंग विधि है।
    • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी स्कैन) शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की अनुप्रस्थ परिच्छेदन (क्रॉस-सेक्शनल) छवियां बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करता है। इसमें मशीन एक बहुत ही विस्तृत छवि का निर्माण करने के लिए बहुत सी तस्वीरें लेती है। छवियां शरीर की विभिन्न “स्लाइस” की श्रृंखला के रूप में ली जाती हैं और उन्हें कंप्यूटर में सहेज लिया जाता है।
  • जब इमेजिंग और इतिहास नैदानिक साबित नहीं होते तब ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर रोग की पहचान करने के लिए आमतौर पर बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) का उपयोग किया जाता है। बायोप्सी में, सर्जरी के दौरान ट्यूमर का एक छोटा सा नमूना निकाला जाता है। उसके बाद एक रोगविज्ञानी ट्यूमर के विशिष्ट प्रकार और श्रेणी का पता लगाने के लिए ऊतक के नमूने को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर उसकी जाँच करता है।

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर का श्रेणीकरण और उसके स्तर का पता लगाना

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर को, माइक्रोस्कोप के नीचे वे कैसे दिखते हैं इस आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। ट्यूमर कोशिकाएं जितनी अधिकअसामान्य दिखती हैं, ट्यूमर उतनी ही उच्च श्रेणी का होता है। बच्चों में होने वाले अधिकांश ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर कम श्रेणी के होते हैं। इसकी कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं से अधिक भिन्न नहीं दिखती हैं और ये धीमी गति से बढ़ती हैं। सीएनएस के अन्य भागों में इनके फैलने की संभावना कम होती है।

ऐसा बहुत ही कम होता है कि बच्चों में होने वाले ट्यूमर उच्च-श्रेणी के हों। ये ट्यूमर बहुत ही आक्रामक होते हैं, तेज़ी से बढ़ते हैं और पूरे मस्तिष्क व रीढ़ के अंदर की नस में फैल सकते हैं।

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर के लिए पूर्वानुमान

बच्चों में होने वाले ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर के संबंध में लंबे समय तक जीवित रहने की दर उच्च (>90%) है। एनएफ1 वाले बच्चों में धीमी गति से बढ़ने वाले ट्यूमर हो सकते हैं जिन्हें निगरानी में रखते हुए देखा जा सकता है। जीवित रहने की उच्च दर होने के बावजूद, इन ट्यूमर का इलाज और प्रबंधन जटिल है। ऑप्टिक पाथवे ग्लिओमा से बचने वाले लोगों में दृष्टि से संबंधित समस्याएं होना आम होता है। ट्यूमर के स्थान के आधार पर, एंडोक्राइन फ़ंक्शन भी प्रभावित हो सकता है। इलाज और जीवन शैली में संतुलन बनाए रखने के लिए इलाजों की योजना बनाने हेतु एक बहुविषयक देखभाल टीम की आवश्यकता होती है।

रोग के पूर्वानुमान को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रोग की पहचान करते समय बच्चे की आयु
  • ट्यूमर का प्रकार और श्रेणी
  • कैंसर एक जगह या अंग तक सीमित है या नहीं अथवा मस्तिष्क के अन्य भागों तक फैल गया है
  • क्या सर्जरी ट्यूमर को पूरी तरह निकाल सकती है
  • एनएफ1 जैसे कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाली वंशानुगत स्थिति की उपस्थिति
  • यदि कैंसर नया है या यदि यह फिर से हुआ है (दुबारा होना, वापस आना)

प्रारंभिक समय में ही रोग की पहचान करने से दृष्टि और नेत्र संबंधी स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। दृष्टि प्रणाली पर पड़ने वाले दबाव को जितनी जल्दी कम किया जा सकता है, दृष्टि में सुधार होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर का इलाज

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर के लिए कोई एकल इलाज योजना नहीं है। क्योंकि आमतौर पर ये कम श्रेणी के ट्यूमर होते हैं, इसलिए इसमें पर्याप्त दृष्टि को बचाए रखना प्रमुख चिंता का विषय होता है। आंख की नस (तंत्रिका) ग्लिओमा का इलाज करने के लिए उपयोग किए जाने वाले इलाज बच्चे की आयु, दृष्टि हानि की सीमा, ट्यूमर के स्थान और आकार तथा इस बात पर निर्भर करते हैं कि बच्चे को एनएफ1 है या नहीं।

इलाज के विकल्पों में निम्नलिखित शामिल हैं:

चिकित्सक नेत्र परीक्षण और समय-समय पर एमआरआई स्कैन का उपयोग करते हुए रोगियों को मॉनिटर करते हैं। रोग बढ़ने के संकेतों में दृष्टि का खराब होना, ट्यूमर का आकार बढ़ना या कैंसर का फैलना शामिल है।

  1. ट्यूमर को जितना संभव हो उतना निकालने के लिए सर्जरी का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, अकेले सर्जरी से ही इलाज नहीं हो सकता। कुछ स्थितियों में, ट्यूमर के स्थान की वजह से सर्जरी करना संभव नहीं होता। सर्जरी के जोखिमों में दृष्टि का खराब होना और हाइपोथेलेमस सहित आस-पास की संरचनाओं को संभावित हानि पहुंचना शामिल है।

  2. ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर का इलाज करने के लिए अक्सर कीमोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। यह विशेष रूप से युवा रोगियों के इलाज में रेडिएशन थेरेपी को विलंबित करने या उससे बचने के लिए उपयोगी होती है। इसका उपयोग तब भी किया जा सकता है जब सर्जरी एक अच्छा विकल्प न हो या जब ट्यूमर को सर्जरी करके निकालना पूरा न हुआ हो। हालांकि, सभी ट्यूमर कीमोथेरेपी पर प्रतिक्रिया नहीं दिखाते हैं।

    इलाजों की योजना बनाने में कीमोथेरेपी से जुड़ा बहरापन एक महत्वपूर्ण विचारणीय मुद्दा है। यह हमेशा एक विचार करने योग्य महत्वपूर्ण जोखिम है। हालांकि, ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर से पीड़ित रोगियों में संभावित दृष्टि दोष होने का अतिरिक्त बोझ होता है, इसलिए उन्हें बहरेपन से बचाना विशेष रूप से आवश्यक होता है।

    ऐसी कोई एकल कीमोथेरेपी योजना नहीं है जिसका उपयोग सभी ऑप्टिक पाथवे ग्लिओमा के लिए किया जाता है। चिकित्सीय टीम ट्यूमर के प्रकार और स्थान, लक्षण, रोगी की आयु और अन्य कारकों को देखते हुए रोगियों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त योजना तय करेगी। इस कैंसर के इलाज में उपयोग की जाने वाली कुछ कीमोथेरेपी दवाओं में विन्क्रिस्टाईन, कार्बोप्लैटिन, विनाब्लास्टाइन, लोमुस्टिन और टेमोज़ोलामाइड शामिल हैं।

  3. लक्षित इलाज ट्यूमर कोशिकाओं के विशिष्ट लक्षणों पर क्रिया करते हुए या उन पर लक्ष्य साधते हुए कार्य करती हैं। कुछ ट्यूमर में , ट्यूमर कोशिका वृद्धि और विभाजन को नियंत्रित करने वाले प्रोटीनों में वंशाणु परिवर्तन होते हैं। कुछ दवाओं की यह देखने के लिए जाँच की जा रही है कि क्या वे कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को बढ़ावा देने वाले संकेतों को रोक सकती हैं। इनमें एमईके प्रोटीन इनहिबिटर ट्रैमेटिनिब और सैलुमेटिनिब शामिल हैं। वी600ई बीआरएएफ इनहिबिटर वेमुराफेनिब और डब्राफेनिब का भी अध्ययन किया जा रहा है।

    कुछ ऑप्टिक पाथवे ग्लिओमा में, ट्यूमर की कोशिकाओं में बीआरएएफ वंशाणु में परिवर्तन होता देखा जाता है। इस परिवर्तन को वी600ई बीआरएएफ उत्परिवर्तन कहा जाता है। बीआरएएफ वंशाणु, कोशिका वृद्धि और क्रिया के लिए आवश्यक प्रोटीन को नियंत्रित करने में मदद करता है। कुछ दवाएं इस विशिष्ट संकेतन मार्ग को अवरुद्ध कर सकती हैं। इन वी600ई बीआरएएफ इनहिबिटर में वेमुराफेनिब और डब्राफेनिब शामिल हैं। यह उत्परिवर्तन ऑप्टिक पाथवे ग्लिओमा में इतना आम नहीं है; 10% से भी कम रोगियों में यह वंशाणु परिवर्तन होता है।

  4. बड़े बच्चों में, ट्यूमर के प्रकार और स्थान के आधार पर रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है। ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर में, रेडिएशन थेरेपी एक सर्वाधिक प्रभावी इलाज है और यह दृष्टि बनाए रखने में मदद करती है। हालांकि, इसमें देरी से प्रभाव पड़ने का जोखिम होता है, खासतौर पर युवा रोगियों में।

ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर के बाद का जीवन

रोगियों को लंबी अवधि तक मॉनिटर करने के लिए समय-समय पर इमेजिंग जांचें और व्यापक नेत्र परीक्षण का उपयोग किया जाता है। बहुविषयक देखभाल में पुनर्सुधार, स्नायुविज्ञान और एंडोक्रिनोलॉजी सहित विभिन्न प्रकार के विशेष क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। ऑप्टिक पाथवे ट्यूमर से बचने वाले सभी लोगों में नेत्र संबंधी स्वास्थ्य खासतौर से महत्वपूर्ण होता है। नेत्र विशेषज्ञ द्वारा नियमित स्वास्थ्य देखभाल के भाग के रूप में वर्ष में कम से कम एक बार नेत्र परीक्षण करवाने की सलाह दी जाती है। बहुत से बच्चों में आजीवन काल तक दृष्टिहीनता रहती है और उन्हें दृष्टि संबंधी सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। अल्प दृष्टि से संबंधित विशेषज्ञ और स्कूल आवास, बच्चों को दृष्टि हानि के अनुकूल ढ़लने में मदद कर सकते हैं। आंखों को क्षति पहुंचने से बचाने के लिए सुरक्षात्मक चश्मा भी पहना जाना चाहिए।

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समीक्षा की गई: जून 2018