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गुर्दे के ट्यूमर

गुर्दे के ट्यूमर क्या हैं?

रीनल (गुर्दे) के ट्यूमर तब होते हैं जब कैंसर कोशिकाएं गुर्दे के ऊतकों में बनने लगती हैं। बच्चों में विभिन्न प्रकार के रीनल (गु्रदे के) ट्यूमर होते हैं। कुल मिलाकर, बच्चों में होने वाले ट्यूमर में से इन ट्यूमर का अनुपात लगभग 7% है। बच्चों को होने वाले गुर्दे के ट्यूमर के सामान्य प्रकारों में विल्म्स ट्यूमर (नेफरोब्लास्टोमा) और रीनल सेल कार्सिनोमा शामिल हैं।

गुर्दे पेट के पीछे की रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित अंगों की एक जोड़ी हैं। इनका प्रमुख कार्य खून को फ़िल्टर व साफ़ करना और मूत्र बनाना है।

विशिष्ट रूप से गुर्दे को दर्शाते हुए और लेबल किए हुए अंगों के लेओवर के साथ एक नन्हे बच्चे का ग्राफ़िक

गुर्दे पेट के पीछे की रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित अंगों की एक जोड़ी हैं। इनका प्रमुख कार्य खून को फ़िल्टर व साफ़ करना और मूत्र बनाना है।

विल्म्स ट्यूमर, जिसे नेफरोब्लास्टोमा के नाम से भी जाना जाता है, बच्चों में होने वाला एक सबसे आम प्रकार का गुर्दे का कैंसर है। अमेरिका में प्रति वर्ष लगभग 500 बच्चे विल्म्स ट्यूमर से पीड़ित पाए जाते हैं। यह ज़्यादातर 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में पाया जाता है। 15-19 वर्ष की आयु के किशोरों में होने वाला सबसे आम गुर्दे का ट्यूमर रीनल सेल कार्सिनोमा है। गुर्दे के अन्य ट्यूमर में, गुर्दे का क्लीयर सेल सार्कोमा, मैलिग्नेंट रबडॉइड ट्यूमर और मेसोब्लास्टिक नेफ्रोमा शामिल हैं। गुर्दे में अन्य कैंसर हो सकते हैं जैसे कि सार्कोमा, लेकिन ये शरीर के अन्य भागों में भी हो सकते हैं।

रीनल ट्यूमर के सामान्य संकेतों और लक्षणों में गाँठ, पेट में सूजन या दर्द, मूत्र में खून आना, उच्च रक्तचाप, बुखार, कब्ज, वजन कम होना या भूख न लगना शामिल हैं। कुछ आनुवंशिक सिंड्रोम या अन्य स्थितियां होने से रीनल ट्यूमर होने का जोखिम बढ़ सकता है।

ट्यूमर के प्रकार के आधार पर, कैंसर एक या दोनों गुर्दों में पाया जा सकता है। कभी-कभी रोग की पहचान करने के समय कैंसर फेफडों, जिगर, हड्डियों, मस्तिष्क या लसिका ग्रंथियों तक फैला हुआ हो सकता है।

अधिकांश रीनल (गुर्दे के) ट्यूमर का इलाज ट्यूमर पर निर्भर करता है और इसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी और/या रेडिएशन थेरेपी का संयोजन शामिल हो सकता है। वृक्क उच्छेदन, गुर्दे के संपूर्ण (समूल वृक्क उच्छेदन) या आंशिक भाग (आंशिक वृक्क उच्छेदन) को निकालने की सर्जरी है। रीनल (गुर्दे के) ट्यूमर का प्रकार और रोग की अधिकता, रोग पूर्वानुमान और इलाज विकल्पों को प्रभावित करते हैं।

गुर्दे के ट्यूमर के संकेत और लक्षण

गुर्दे के ट्यूमर के सामान्य संकेतों और लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पेट में गाँठ या सूजन
  • पेशाब में खून निकलना
  • पेट में दर्द
  • उच्च रक्तचाप
  • बुखार
  • भूख न लगना
  • वजन घटना
  • कब्ज

रोगियों को खून में कैल्शियम की उच्च मात्रा (हाइपरकैल्सीमिया) होने के कारण थकान, संभ्रम होना, अत्यधिक प्यास लगना और/या उल्टी होने की समस्या हो सकती है। कुछ रोगियों में अधःस्थ उदर पिंड के कारण, लक्षणों में राहत के बिना कब्ज के लिए इलाज किया जा सकता है।

गुर्दे के ट्यूमर के रोग की पहचान करना

गुर्दे के ट्यूमर के रोग की पहचान करने और उनका आकलन करने के लिए कई प्रकार की जांचों का उपयोग किया जाता है। इन जाँचों में शामिल है:

  • लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने के लिए स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक जांच। यह पता लगाने के लिए कि कैंसर आनुवंशिक है या गैर-आनुवंशिक पारिवारिक इतिहास आवश्यक होता है। कुछ वंशानुगत स्थितियां कुछ कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
  • निम्नलिखित सहित खून और मूत्र परीक्षण के लिए लैब जांचें:
    • लाल रक्त कोशिकाओं, सफ़ेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की संख्या; लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा और लाल रक्त कोशिकाओं से बने रक्त के अंश की जांच करने के लिए कंप्लीट ब्लड काउंट
    • जिगर और गुर्दे कैसे काम रहे हैं, यह आकलन करने के लिए जिगर और गुर्दे की क्रिया की जांचें।
    • सोडियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम के स्तर को देखने के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स जांचें।
    • मूत्र में शर्करा, प्रोटीन, खून और जीवाणु की जांच करने के लिए पेशाब की जाँच
  • पिंड की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए, यह देखने के लिए कि ट्यूमर कितना बड़ा है और यह निर्धारित करने के लिए कि यह फैला है या नहीं, पेट की इमेजिंग जांचें।
    • एक्स-रे शरीर के छाती और पेट जैसे विभिन्न भागों के 2-आयामी चित्र लेने के लिए विद्युत चुंबकीय ऊर्जा का उपयोग करता है।
    • अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग़्राफ़ी गुर्दे की छवि बनाने के लिए ध्वनि तंरगों का उपयोग करती है।
    • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी स्कैन) शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की 3-आयामी छवियां बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करती है। अंगों को अधिक स्पष्ट रूप से देखने में मदद के लिए शिरा में डाई को इंजेक्ट किया जा सकता है।
    • मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) रेडियो तरंगों और चुंबकों का उपयोग करते हुए पेट के विस्तृत 3-आयामी चित्र बनाती है।
    • यह पता लगाने के लिए कि कैंसर गुर्दे के बाहर फैला है या नहीं, छाती, मस्तिष्क और हड्डियों का परीक्षण करने के लिए अतिरिक्त इमेजिंग जांचें की जा सकती हैं।
  • कोशिकाओं के शरीरकोष विज्ञान और कैंसर के प्रकार के बारे में अधिक जानने के लिए ट्यूमर से लिए गए ऊतक की जांच। इसे बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) द्वारा या सर्जरी करके ट्यूमर निकालने के बाद किया जा सकता है।
अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग जांचों से चिकित्सकों को ट्यूमर का आकार जानने में मदद मिलती है। अल्ट्रासाउंड यह भी दर्शाता है कि ट्यूमर फैला है या नहीं।

अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग जांचों से चिकित्सकों को ट्यूमर का आकार जानने में मदद मिलती है। अल्ट्रासाउंड यह भी दर्शाता है कि ट्यूमर फैला है या नहीं।

गुर्दे के ट्यूमर के स्तर का पता लगाना

कैंसर का स्तर ट्यूमर के आकार को और कैंसर फैला है या नहीं, यह इंगित करता है। इमेजिंग जांचें, सर्जरी और रोग लक्षण परीक्षण बीमारी के स्तर से संबंधित जानकारी देते हैं। गुर्दे के सभी ट्यूमर प्रकारों के लिए:

  • स्तर I और स्तर II एक जगह या अंग तक सीमित बीमारी को इंगित करते हैं जो गुर्दे के बाहर नहीं फैली होती। 
  • स्तर III की बीमारी गुर्दे के बाहर तक फैल चुकी होती है, लेकिन कैंसर पेट के अंदर ही रहता है। 
  • स्तर IV की बीमारी पेट के बाहर छाती, हड्डियों, मस्तिष्क, जिगर या अन्य लसिका ग्रंथियों तक फैल चुकी होती है। 
  • स्तर V की बीमारी (केवल विल्म्स ट्यूमर के लिए) का अर्थ है कि दोनों गुर्दे प्रभावित हैं।

सभी रीनल (गुर्दे के) ट्यूमर के लिए, उन्नत स्तर बीमारी (कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल या अपररूपांतरण (मेटास्टेसाइज) हो गया है) वाले रोगियों में खराब पूर्वानुमान होता है क्योंकि बीमारी अधिक गंभीर होती है और उसका इलाज करना कठिन होता है।

  1. विल्म्स ट्यूमर क्या है?

    विल्म्स ट्यूमर (डबल्यूटी), जिसे नेफरोब्लास्टोमा भी कहा जाता है, बच्चों में होने वाला एक सबसे आम प्रकार का गुर्दे का कैंसर है। अमेरिका में हर वर्ष इसके लगभग 500 नए मामले पाए जाते हैं। विल्म्स ट्यूमर से ग्रस्त लगभग 75% रोगी 5 वर्ष से कम आयु के होते हैं।

    विल्म्स ट्यूमर एक या दोनों गुर्दों को प्रभावित कर सकता है। विल्म्स ट्यूमर से पीड़ित बच्चों में दोनों गुर्दे (दोनों तरफ के) प्रभावित होने की स्थिति में आमतौर पर 2-3 वर्ष की आयु के आसपास रोग का पता लगा लिया जाता है और एक गुर्दा (एकतरफा) प्रभावित होने की स्थिति में 3-4 वर्ष की आयु में रोग का पता लगा लिया जाता है। 5-10% रोगियों में रोग की पहचान करने के दौरान दोनों तरफ या बहुकेंद्रित बीमारी (गुर्दे के अंदर एकाधिक ट्यूमर) होती है।

    विल्म्स ट्यूमर के संकेत और लक्षण

    विल्म्स ट्यूमर के सामान्य संकेतों और लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

    • पेट में गाँठ या सूजन 
    • पेशाब में खून निकलना
    • पेट में दर्द
    • उच्च रक्तचाप
    • बुखार 
    • भूख न लगना
    • वजन घटना
    • कब्ज

    रोगियों को खून में कैल्शियम की उच्च मात्रा (हाइपरकैल्सीमिया) होने के कारण थकान, संभ्रम होना, अत्यधिक प्यास लगना और/या उल्टी होने की समस्या हो सकती है। कुछ बच्चों में विल्म्स ट्यूमर रोग की पहचान करने से पहले कुछ महीनों तक कब्ज का इलाज किया जा सकता है।  

    विल्म्स ट्यूमर के जोखिम कारक और कारण

    विल्म्स ट्यूमर से पीड़ित अधिकांश बच्चों में, इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं है। यह महिलाओं तथा पुरुषों दोनों को समान रूप से प्रभावित करता है। कोकेशियान बच्चों की तुलना में अफ़्रीकी अमेरिकी बच्चों में विल्म्स ट्यूमर अधिक आम है। यह एशियाई लोगों में कम पाया जाता है। विल्म्स ट्यूमर वाले लगभग 10% रोगियों में वंशागुनत चिकित्सीय स्थितियां या दुर्लभ आनुवंशिक सिंड्रोम होते हैं जो जोखिम को बढ़ाते हैं। इन स्थितियों में हेमिहाइपरप्लासिया, एनीरिडिया, डेनिस-ड्रैश सिंड्रोम, मूत्र मार्ग संबंधी विकृतियां (डब्ल्यूएजीआर सिंड्रोम), और अतिवृद्धि सिंड्रोम (बेकविथ-विडमेन सिंड्रोम) शामिल हैं।

    विल्म्स ट्यूमर के लिए पूर्वानुमान

    सामान्यतया, विल्म्स ट्यूमर एक इलाज योग्य बीमारी है। विल्म्स ट्यूमर से पीड़ित अनुकूल (कम आक्रामक) शरीरकोष विज्ञान वाले रोगियों की पांच वर्ष की जीवित रहने की दरें 90% से अधिक हैं।

    पूर्वानुमान बहुत से कारको पर निर्भर करता है। इनमें शामिल है:

    • रोग की पहचान के समय उम्र। कम आयु (10 वर्ष से कम आयु) में रोग की पहचान किए गए रोगियों का आमतौर पर एक बेहतर पूर्वानुमान होता है।
    • रोग की पहचान करने के दौरान बीमारी की अधिकता (कैंसर का स्तर) जिसमें ट्यूमर का आकार और यह कितना फैला है शामिल हैं।
    • ट्यूमर का शरीरकोष विज्ञान (माइक्रोस्कोप में कोशिकाएं कैसी दिखती हैं) और/या आणविक लक्षण। कोशिकाओं की पहचान अनुकूल या प्रतिकूल के रूप में की जाती है। प्रतिकूल शरीरकोष विज्ञान का अर्थ अधिक एनाप्लास्टिक कोशिकाएं होना है (कैंसर कोशिकाएं जो तेजी से विभाजित होती हैं और सामान्य कोशिकाओं से बहुत भिन्न दिखाई देती हैं)। इन कोशिकाओं का इलाज करना कठिन होता है और इसमें जीवित रहने की दरें कम होती हैं। 
    • आनुवंशिक कारक और ट्यूमर के आणविक मार्कर।
    • क्या कैंसर दुबारा हुआ है (वापस आया है)।

    विल्म्स ट्यूमर का इलाज

    अमेरिका में, विल्म्स ट्यूमर से पीड़ित रोगी आमतौर पर कैंसर का पता लगते ही गुर्दा निकलवाने (वृक्क उच्छेदन) के लिए सर्जरी करवाते हैं। यदि केवल एक ही गुर्दा प्रभावित होता है, तो अक्सर पूरे गुर्दे को निकाल दिया जाता है। लोग केवल एक गुर्दे के साथ सामान्य, स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

    रोगियों को सर्जरी के बाद पूरे शरीर में संयोजन कीमोथेरेपी प्राप्त होती है।

    सर्जरी और शरीरकोष विज्ञान परिणामों के आधार पर, इलाज में रेडिएशन थेरेपी भी शामिल हो सकती है।

    अनुकूल शरीरकोष विज्ञान वाले विल्म्स ट्यूमर के लिए कीमोथेरेपी में ज़्यादातर दो दवाएं शमिल होती हैं: प्रारंभिक स्तर की बीमारी (स्तर I और II) के लिए विन्क्रिस्टाईन और डैक्टिनोमाइसिन। बाद के स्तर की बीमारी (स्तर III और IV) के लिए, आमतौर पर तीन दवाएं उपयोग की जाती हैं: विन्क्रिस्टाईन, डैक्टिनोमाइसिन, और डॉक्सोरूबिसिन। ट्यूमर शरीरकोष विज्ञान और इलाज के प्रति प्रतिक्रिया के आधार पर अतिरिक्त दवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है।

    सभी विल्म्स ट्यूमर वाले रोगियों में, यदि ट्यूमर दोनों गुर्दों (दोनों तरफ के) में है या उसे निकालना कठिन है, तो हो सकता है कि रोग की पहचान करते समय सर्जरी संभव न हो। ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए पूरे शरीर में कीमोथेरपी दी जाती है, जिसके साथ बाद में इलाज योजना में शामिल सर्जरी और रेडिएशन दी जाती है। नेफ्रॉन स्पेरिंग सर्जरी, गुर्दे के स्वस्थ ऊतक को बचाते हुए ट्यूमर को निकालने की एक सर्जरी विधि है। यह रोगी की गुर्दे की क्रिया को यथासंभव बनाए रखने देती है। यह विशेष रूप से दोनों तरफ (बाइलेटरल) विल्म्स ट्यूमर में गुर्दे की संभावित विफलता, डायलिसिस और प्रत्यारोपण से बचने का प्रयास करने के लिए महत्वपूर्ण होती है। नेफ्रॉन स्पेरिंग सर्जरी आरंभिक कीमोथेरेपी के बाद की जाती है। यह आवश्यक है कि सर्जिकल टीम को इस प्रक्रिया का पहले से अनुभव हो।

    जिन बच्चों में रीनल (गुर्दे के) ट्यूमर होने का जोखिम होने के बारे में पहले से पता है, जैसे कि वे बच्चे जिनमें पारिवारिक इतिहास या किसी आनुवंशिक स्थिति के कारण आनुवंशिक प्रवृत्ति है, उनके लिए ट्यूमर की नियमित जांच करवाने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर 8 वर्ष की आयु तक हर 3 महीने में पेट का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। यह उच्च जोखिम वाले रोगियों में शुरू में ही रोग की पहचान करने में मदद करता है।

  2. रीनल सेल कार्सिनोमा क्या है?

    रीनल सेल कार्सिनोमा (आरसीसी) बच्चों में बहुत कम पाया जाता है। बचपन में होने वाले कैंसर में, गुर्दे से संबंधित होने वाले सभी ट्यूमर का अनुपात लगभग 7% है। गुर्दे के उन ट्यूमर में केवल 5% ट्यूमर आरसीसी के होते हैं। यह 15-19 वर्ष की आयु के किशोरों में अधिक आम है और वयस्कों में सबसे आम गुर्दे का कैंसर है। आरसीसी के उप प्रकारों में स्थानान्तरण प्रकार, स्वच्छ-कोशिका, पैपिलरी और अवर्गीकृत प्रकार शामिल हैं। रोग की पहचान करते समय वयस्कों की तुलना में, अक्सर रीनल सेल कार्सिनोमा से पीड़ित बच्चों में अधिक विकसित बीमारी देखी जाती है (लसिका ग्रंथियों तक फैली हुई)। हालांकि, वयस्कों की तुलना में बच्चों के परिणाम बेहतर होते हैं, यहां तक कि स्थानीय लसिका ग्रंथि शामिल होने पर भी। यदि कैंसर गुर्दे और लसिका ग्रंथियों से बाहर फेफड़ों या जिगर जैसे अन्य भागों तक फैल गया है, तो ऐसे में रोग का पूर्वानुमान खराब होता है।

    रीनल सेल कार्सिनोमा के संकेत और लक्षण

    आरसीसी के सामान्य संकेतों और लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

    • पेट में गाँठ या सूजन
    • पेशाब में खून निकलना
    • पेट में दर्द

    अन्य लक्षणों में उच्च रक्तचाप, बुखार, भूख न लगना, वजन कम हो जाना और कब्ज जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं।

    रीनल सेल कार्सिनोमा के जोखिम कारक और कारण

    कुछ वंशानुगत सिंड्रोम बच्चों में रीनल सेल कार्सिनोमा के जोखिम को अधिक बढ़ाते हैं। आरसीसी से जुड़ी स्थितियों में वॉन हिप्पेल-लिंडाऊ बीमारी, ट्युबरस स्क्लेरोसिस और परिवारों में वंशागत स्थानांतरित होने वाले अन्य वंशाणु परिवर्तन शामिल हैं। रीनल सेल कार्सिनोमा, रीनल मेडुल्लारी कार्सिनोमा, सिकल सेल रोग से संबद्धित हो सकते हैं। बचपन में होने वाले कैंसर के लिए रेडिएशन या कीमोथेरेपी से किया गया पिछला इलाज भी, आरसीसी सहित, रीनल (गुर्दे के) ट्यूमर का एक जोखिम कारक होता है।

    रीनल सेल कार्सिनोमा के लिए पूर्वानुमान

    रीनल सेल कार्सिनोमा से पीड़ित रोगियों के लिए रोग पूर्वानुमान कई कारकों पर निर्भर करता है:

    • लसिका ग्रंथियों या उससे आगे भी कैंसर के फैलाव सहित रोग की पहचान करते समय रोग की अधिकता (कैंसर का स्तर)
    • क्या सर्जरी से ट्यूमर पूरी तरह निकल सकता है या नहीं
    • क्या कैंसर दुबारा हुआ है (वापस आया है)

    रोग की अधिकता, रोग पूर्वानुमान को बहुत प्रभावित करती है। बच्चों में होने वाले आरसीसी के लिए पांच साल की जीवित रहने की दर:

    • स्तर I: 90%
    • स्तर II: 80%
    • स्तर III: 70%
    • स्तर IV: 15%

    रीनल सेल कार्सिनोमा का इलाज

    गुर्दे और प्रभावित लसिका ग्रंथियों को निकालने के लिए सर्जरी रीनल सेल कार्सिनोमा का एक प्रमुख इलाज है।

    आरसीसी कीमोथेरेपी के प्रति बहुत अच्छी प्रतिक्रिया नहीं देता और इस कैंसर के लिए किसी भी मानक कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी का उपयोग नहीं किया जाता। छोटे ट्यूमर का इलाज कैंसर कोशिकाओं को फ़्रीज़ करने या उन्हें जलाने के लिए अंशोच्छेदन द्वारा किया जा सकता है।

    अधिक विकसित आरसीसी वाले रोगियों के लिए प्रतिरक्षा बढ़ाने का उपचार (इम्यूनोथेरेपी) का उपयोग किया जा सकता है।

    रोगियों में स्थानान्तरण जैसे आनुवंशिक कारकों के लिए ट्यूमर की जांच की जानी चाहिए। योग्य रोगी बीमारी के परीक्षण के बारे में विचार कर सकते हैं जिसमें लक्षित इलाज शामिल हैं, जैसे टायरोसिन किनेज इनहिबिटर, एमटोर इनहिबिटर या एएलके इनहिबिटर थेरेपी।

  3. बच्चों में होने वाले गुर्दे संबंधी दुर्लभ ट्यूमर में निम्नलिखित शामिल हैं:

    • मैलिगनैन्ट रबडॉइड कैंसर।
    • गुर्दे का क्लीयर सेल सार्कोमा।
    • मेसोब्लास्टिक नेफ्रोमा। 

    गुर्दे का मैलिगनैन्ट रबडॉइड कैंसर

    मैलिगनैन्ट रबडॉइड कैंसर ज़्यादातर छोटे बच्चों और शिशुओं में पाया जाता है। यह कैंसर गुर्दे के साथ-साथ शरीर के अन्य स्थानों में हो सकता है। अक्सर, इन ट्यूमर का तब तक पता नहीं लग पाता जब तक कि बीमारी अधिक विकसित नहीं हो जाती। गुर्दे के रबडॉइड ट्यूमर (आरटीके) मस्तिष्क और फेफड़ों तक फैल सकते हैं। कभी-कभी, गुर्दे के रबडॉइड ट्यूमर सीएनएस में एटिपिकल टेराटॉइड/रबडॉइड ट्यूमर (एटीआरटी) के साथ उत्पन्न हो सकते हैं।

    इन ट्यूमर में एक समान आनुवंशिक असामान्यता होती है: स्मार्कबी1 वंशाणु (जिसे आईएनआई1, एसएनएफ5 और बीएएफ 47 वंशाणु के रूप में भी जाना जाता है) में परिवर्तन। आमतौर पर कम ही होता है कि मैलिगनैन्ट रबडॉइड ट्यूमर स्मार्कए4 वंशाणु में उत्परिवर्तन के कारण होता हो। बच्चों में यह उत्परिवर्तन उनके शरीर की हर कोशिका में हो सकता है (जनन-रेखा उत्परिवर्तन)। रबडॉइड ट्यूमर से पीड़ित रोगियों की वंशाणु उत्परिवर्तनों के लिए जांच होनी चाहिए और उन्हें आनुवांशिक सलाह लेनी चाहिए।

    प्रतिकूल शरीरकोष विज्ञान और एनाप्लास्टिक कोशिकाएं (कैंसर कोशिकाएं जो तेजी से विभाजित होती हैं और सामान्य कोशिकाओं से बहुत भिन्न दिखाई देती हैं) जीवित रहने की कम दर से जुड़ी हैं। रबडॉइड ट्यूमर में, बड़ी आयु के रोगियों को स्वास्थ्य लाभ होने की अधिक संभावना होती है। मैलिगनैन्ट रबडॉइड ट्यूमर से पीड़ित बच्चों में जीवित रहने की कुल दर 50% से कम है। कैंसर फैला हुआ (मेटास्टैटिक) बीमारी वाले बच्चों में बहुत ही खराब पूर्वानुमान होता है।

    मैलिगनैन्ट रबडॉइड ट्यूमर (एमआरटी) में सर्जरी की आवश्यकता होती है। सर्जरी में देरी जीवित रहने की कम संभावना के साथ जुड़ी हुई है। हालांकि इलाज के भाग के रूप में कीमोथेरेपी दवाइयों का उपयोग किया जा सकता है, फिर भी सर्जरी इसका मुख्य इलाज है। शोधकर्ता बहुविध इलाज का अध्ययन कर रहे हैं, जिसमें विन्क्रिस्टाईन, साइक्लोफॉस्फोमाइड, डॉक्सोरूबिसिन, कार्बोप्लैटिन और इटॉप्साइड के साथ पूरे शरीर में दी जाने वाली कीमोथेरपी शामिल है। बीमारी के परीक्षण के माध्यम से लक्षित इलाज की भी जांच चल रही है। 

    गुर्दे का क्लीयर सेल सारकोमा

    गुर्दे का क्लीयर सेल सारकोमा (सीसीएसके) एक बहुत दुर्लभ प्रकार का कैंसर है। यह कैंसर बच्चों में होने वाले गुर्दे के 3% से कम ट्यूमर का प्रतिनिधित्व करता है। अमेरिका में हर वर्ष लगभग केवल 20 बच्चों में ही क्लीयर सेल सारकोमा पाया जाता है। यह अक्सर 1-4 वर्ष की आयु के बच्चों में पाया जाता है, और यह अधिकतर लड़कों में पाया जाता है। रोग की पहचान करने के दौरान छोटी आयु और रोग का अधिक विस्तार कम अनुकूल परिणाम से जुड़े हैं। गुर्दे के अन्य ट्यूमर की तुलना में, सीसीएसके की हड्डियों में फैलने की अधिक संभावना होती है। हालांकि, रोग की पहचान करने की आरंभिक प्रक्रिया के समय 5% से कम रोगियों में कैंसर का फैलाव (मेटास्टैटिस) दिखता है। कैंसर के फैलने के आम स्थानों में फेफड़े, हड्डी, मस्तिष्क और कोमल ऊतक शामिल हैं।

    गुर्दे के क्लीयर सेल सारकोमा के इलाज में गुर्दे को निकालने की सर्जरी (वृक्क उच्छेदन) शामिल है। सीसीएसके रोग की पहचान ट्यूमर के शरीरकोष विज्ञान के आधार पर की जाती है। बहुविध इलाज में सर्जरी, डॉक्सोरूबिसिन सहित कीमोथेरेपी और सर्जरी के बाद रेडिएशन शामिल है। बच्चों के ऑन्कोलॉजी समूह के हाल के अध्ययन में, बच्चों ने सर्जरी और रेडिएशन के साथ विन्क्रिस्टाईन, डॉक्सोरूबिसिन, साइक्लोफॉस्फोमाइड और इटॉप्साइड सहित संयोजन कीमोथेरेपी प्राप्त की।

    गुर्दे के क्लीयर सेल सारकोमा के लिए इलाज किए गए रोगियों को देर से रोग के दुबारा होने का जोखिम होता है। रोग के दुबारा होने के सबसे आम स्थान मस्तिष्क और फेफड़े हैं। इमेजिंग जांचों सहित नियमित स्क्रीनिंग, फॉलो-अप देखभाल का हिस्सा है। रोगियों को, गुर्दे की क्रिया और देर से होने वाले प्रभावों के लिए मॉनिटर किया जाना चाहिए।

    गुर्दे के क्लीयर सेल सारकोमा (सीसीएसके) में बीसीओआर वंशाणु के आंतरिक अनुक्रमिक द्विगुणन होने की जानकारी मिली है, लेकिन यह वंशाणु असामान्यता किसी आनुवंशिक सिंड्रोम या नैदानिक स्थिति से संबद्धित नहीं है। ट्यूमर आनुवंशिकी से भावी इलाज के लिए लक्षित इलाज निर्धारित किए जा सकते हैं।

    मेसोब्लास्टिक नेफ्रोमा या जन्मजात मेसोब्लास्टिक नेफ्रोमा

    मेसोब्लास्टिक नेफ्रोमा वह ट्यूमर है जो आमतौर पर नवजात बच्चों और शिशुओं में देखा जाता है। इसका प्रमुख लक्षण पेट में गाँठ या पिंड का होना है। लगभग 90% रोगियों में इस रोग की पहचान जीवन के प्रथम वर्ष में कर ली जाती है। यह लड़कों में अधिक आम होता है। कभी-कभी जन्म से पहले ही प्रीनेटल अल्ट्रासाउंड के माध्यम से रोग की पहचान कर ली जाती है। छोटी आयु (<3 महीने) मेसोब्लास्टिक नेफ्रोमा वाले रोगियों के लिए अधिक अनुकूल होती है।

    मेसोब्लास्टिक नेफ्रोमा के दो प्रमुख प्रकार हैं: क्लासिक और सेल्युलर। क्लासिक मेसोब्लास्टिक नेफ्रोमा रोग की पहचान प्रसव-पूर्व या 3 महीने की आयु से पहले कर ली जाती है। सेल्युलर मेसोब्लास्टिक नेफ्रोमा का संबंध आनुवंशिक स्थानान्तरण से है और इसके दुबारा होने का अधिक जोखिम होता है।

    गुर्दा निकालने के लिए सर्जरी (वृक्क उच्छेदन) प्रमुख इलाज है। कुछ स्थितियों में, कीमोथेरेपी का उपयोग भी किया जा सकता है। आनुवंशिक कारकों वाले ट्यूमर के लिए, बीमारी के परीक्षण में लक्षित इलाजों का अध्ययन किया जा रहा है। मेसोब्लास्टिक नेफ्रोमा के लिए रोग का पूर्वानुमान बहुत अच्छा है और जीवित रहने की दर 95% से अधिक है।

गुर्दे के कैंसर के बाद जीवन

रोग के दुबारा होने की निगरानी

रोगियों को इलाज के बाद, रोग के दुबारा होने की जांच करने के लिए लंबे समय तक फॉलो-अप देखभाल प्राप्त होगी। चिकित्सीय टीम आवश्यक जांचों की बारंबारता और प्रकारों के लिए विशेष सुझाव देगी। वे रोगी जो कुछ वंशानुगत सिंड्रोम या आनुवंशिक स्थितियों से ग्रस्त हैं, उनमें भविष्य में कैंसर होने का जोखिम हो सकता है और उन्हें अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता हो सकती है।

वृक्क उच्छेदन के बाद जीवन

जिन रोगियों का गुर्दा निकाल दिया गया है, वे एक गुर्दे के साथ सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। हालांकि, यह आवश्यक है कि परिवार अपने चिकित्सक से चिकित्सीय आवश्यकताओं और जीवन शैली आदतों के बारे में चर्चा करें। रोगियों की कम से कम वार्षिक रूप से जांच के साथ नियमित चिकित्सा देखभाल होनी चाहिए। जांचों में रक्त चाप, किडनी फ़ंक्शन (बीयूएन, क्रिएटिन), और पेशाब की जाँच शामिल होनी चाहिए। यदि समस्याएं हैं, तो रोगी को गुर्दा रोग विशेषज्ञ के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

गुर्दे की सेहत की रक्षा करने के तरीके

  • पर्याप्त पानी पीएं, प्रतिदिन लगभग 6-8 कप पानी पीएं और पानी की कमी से बचें। विशेषकर खेल-कूद के समय या गर्मी के मौसम में हाइड्रेट रहने का ध्यान रखें।
  • कैफीन का सेवन कम करें।
  • नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-फ्लेमैट्री दवाओं (एनएसएआईडी) का उपयोग करने में सावधानी बरतें, चूंकि इन दवाओं का अधिक उपयोग करने से, अधिक मात्रा की खुराक लेने या अक्सर उपयोग करने पर, गुर्दों को नुकसान पहुँच सकता है। संभव होने पर इन दवाओं को लेने से बचें और इन्हें लेने से पहले चिकित्सक से सलाह लें।
  • नई दवाइयां लेते समय चिकित्सक या दवा विक्रेता से परामर्श लें। इसमें पर्चे में लिखी गई या बिना पर्ची वाली दवाइयां और साथ ही हर्बल पूरक भी शामिल हैं। सुनिश्चित करें कि सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और दवा विक्रेताओं को पता हो कि रोगी के केवल एक ही गुर्दा है।
  • हाइड्रेट रहते हुए और फ़ाइबर युक्त खाद्य सामग्री का सेवन करने के द्वारा कब्ज से बचें। यदि चिकित्सक द्वारा सलाह दी गई है तो मल को नरम करने के लिए दवाएं लें।
  • पेशाब रोकने से संबंधित समस्याओं से बचने के लिए सुनिश्चित करें कि बच्चे पॉटी ट्रेनिंग शुरू करने से पहले तैयार हैं। 
  • मूत्र मार्ग (यूटीआई) या गुर्दे के संक्रमण का कोई भी संकेत दिखने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
  • शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। अधिकांश शारीरिक गतिविधियों और खेलों (संपर्क वाले खेलों सहित) से गुर्दे की सेहत को जरा भी जोखिम नहीं होता। गतिविधियों और किसी भी समस्या के बारे में स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करें।

देरी से दिखाई देने वाले प्रभाव

जो बच्चे गुर्दे के ट्यूमर के लिए इलाज प्राप्त करते हैं उन बच्चों को थेरेपी से संबंधित देरी से होने वाले प्रभावों का जोखिम होता है। सामान्य स्वास्थ्य और बीमारी की रोकथाम के लिए, कैंसर से बचे सभी लोगों को स्वस्थ जीवन शैली और खान-पान की आदतों को अपनाना चाहिए, साथ ही उन्हें प्राथमिक चिकित्सक द्वारा नियमित रूप से शारीरिक परीक्षण और जांच भी करवाते रहना चाहिए। रोग से बचे लोग जिनका इलाज पूरे शरीर में कीमोथेरेपी या रेडिएशन द्वारा किया गया था, उनकी तीव्र या देर से होने वाले प्रभावों के लिए निगरानी की जानी चाहिए। बचपन में होने वाले कैंसर के उत्तरजीविता अध्ययन के अनुसार, रोग से ठीक होकर जीवित रहने वाले लगभग 25% लोगों में रोग की पहचान किए जाने के 25 वर्ष बाद भी गंभीर क्रॉनिक (पुराना) स्वास्थ्य संबंधित स्थितियां मौजूद रहती हैं। इन स्थितियों में दूसरी बार होने वाले कैंसर (रेडिएशन और कुछ कीमोथेरेपी दवाओं के प्रभाव में आने के बाद जोखिम में वृद्धि), कोंजेस्टिव हृदय विफलता (डॉक्सोरूबिसिन का प्रभाव), बांझपन या गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं (एकाधिक कीमोथेरेपी एजेंटो के प्रभाव में आने के बाद जोखिम में वृद्धि) और अंतिम-स्तर की गुर्दे की बीमारी या गुर्दे का काम न करना शामिल हैं। रोग से बचने वाले वे लोग जिनका वृक्क उच्छेदन हुआ है, उनमें गुर्दे की समस्याएं होने का अधिक जोखिम रहता है।


समीक्षा की गई: जून 2018