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एटिपिकल टेराटॉइड / रबडॉइड ट्यूमर (एटी/आरटी)

एटी/आरटी क्या है?

एटिपिकल टेराटॉइड/रबडॉइड ट्यूमर (एटी/आरटी) एक तेज़ी से बढ़ने वाला ट्यूमर है जो मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस में होता है। एटी/आरटी एक बहुत ही दुर्लभ प्रकार का ट्यूमर है। बच्चों में होने वाले केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस) ट्यूमर में इसका अंश लगभग 1-2% ही है। संयुक्त राज्य अमेरिका में हर वर्ष एटी/आरटी लगभग 75 नए बच्चों में पाया जाता है और अंदाज़े से भारत में यह संख्या 200 से ऊपर होगा। एटी/आरटी अधिकतर 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों में होता है। 1 वर्ष से कम आयु के शिशुओं में होने वाला सबसे आम असाध्य सीएनएस ट्यूमर है।

एटी/आरटी क्या है? एटी/आरटी एक ट्यूमर है जो आमतौर पर सेरेबेलम और ब्रेनस्टेम में विकसित होता है।

एटी/आरटी एक ट्यूमर है जो आमतौर पर सेरेबेलम और ब्रेनस्टेम में विकसित होता है।

एटी/आरटी मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस के अलग-अलग भागों में हो सकते हैं। बच्चों में, लगभग आधे एटी/आरटी सेरेबेलम या ब्रेनस्टेम में विकसित होते हैं। वे रीढ़ की हड्डी में पानी (सीएसएफ) के माध्यम से मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस के अन्य भागों में भी फैल सकते हैं।

एटी/आरटी एक आक्रामक कैंसर है। इसके इलाज में आमतौर पर विभिन्न थेरेपी का संयोजन शामिल होता है जिसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी शामिल हो सकती हैं। वर्तमान इलाजों के साथ भी, एटी/आरटी का इलाज बहुत कठिन है।

एटी/आरटी के जोखिम कारक और कारण

अधिकांश एटी/आरटी 3 वर्ष या उससे कम आयु के बच्चों में होते हैं। हालांकि, ये ट्यूमर बड़े बच्चों और वयस्कों में भी हो सकते हैं। एटी/आरटी, शरीर के अन्य भागों जैसे गुर्दे में होने वाले ट्यूमर से काफी मिलते-जुलते होते हैं (गुर्दे का रबडॉइड ट्यूमर)। ये महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में थोड़े अधिक होते हैं।

एटी/आरटी एक प्रकार का भ्रूणीय ट्यूमर है। यह माना जाता है कि ये ट्यूमर विकसित हो रहे शिशु (भ्रूण) के मस्तिष्क में भ्रूण कोशिकाओं में शुरू होते हैं। भ्रूणीय ट्यूमर छोटे बच्चों में सबसे अधिक और वयस्कों में सबसे कम पाए जाते हैं। 1 वर्ष से कम आयु के शिशुओं में होने वाले लगभग आधे भ्रूणीय ट्यूमर एटी/आरटी होते हैं।

ट्यूमर कोशिकाओं के अंदर जीन्स और गुणसूत्रों में कुछ परिवर्तन एटी/आरटी के विकास से जुड़े हैं। आमतौर पर, यह ज्ञात नहीं है कि ये परिवर्तन क्यों होते हैं। कुछ स्थितियों में, बच्चों को ये वंशाणु परिवर्तन माता-पिता से मिलते हैं।

एटी/आरटी में वंशाणु परिवर्तन

एटी/आरटी सहित, कैंसर रबडॉइड ट्यूमर में एक समान असामान्य वंशाणु होता है। 95% से भी अधिक एटी/आरटी, स्मार्कबी1 वंशाणु (जिसे आईएनआई1, एसएनएफ5, और बीएएफ47 वंशाणु के रूप में भी जाना जाता है) में परिवर्तन से संबंधित हैं। लगभग 1-2% बार कैंसर रबडॉइड ट्यूमर स्मार्कए4 वंशाणु में उत्परिवर्तन के कारण होते हैं।

स्मार्कबी1 और स्मार्कए4 वंशाणु ट्यूमर सप्रेसर वंशाणु (ट्यूमर का शमन करने वाले वंशाणु) हैं। ट्यूमर सप्रेसर वंशाणु कोशिका को ट्यूमर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने के लिए प्रोटीन का निर्माण करने का संकेत देता है। जब वंशाणु कार्य नहीं करता, तब प्रोटीन नहीं बनता और ट्यूमर कोशिकाएं बढ़ना जारी रख सकती हैं।

अधिकांश स्थितियों में, वंशाणु उत्परिवर्तन केवल ट्यूमर की कोशिकाओं में ही होता है। हालांकि, एटी/आरटी से पीड़ित लगभग 30% बच्चों में रबडॉइड ट्यूमर प्रीडिस्पोज़िशन सिंड्रोम (आरटीपीएस) होता है। इस सिंड्रोम से ग्रस्त रोगियों में उनके शरीर की प्रत्येक कोशिका में वंशाणु परिवर्तन के साथ जनन-रेखा उत्परिवर्तन होता है। यह उत्परिवर्तन माता-पिता से वंशानुगत रूप से प्राप्त हो सकता है या संयोगवश यह एक नया उत्परिवर्तन हो सकता है।

रबडॉइड ट्यूमर वाले रोगियों और परिवार के सदस्यों के लिए आनुवंशिक जाँच और परामर्श महत्वपूर्ण है। आरटीपीएस से कई विभिन्न प्रकार के कैंसर और श्वाननोमा नामक बिनाइन (जो कैंसर नहीं है) ट्यूमर का जोखिम बढ़ सकता है। एटी/आरटी और रबडॉइड ट्यूमर प्रीडिस्पोज़िशन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों में दूसरे ट्यूमरों के विकसित होने का अधिक खतरा होता है। रबडॉइड ट्यूमर प्रीडिस्पोज़िशन सिंड्रोम में वंशाणु परिवर्तन आगे बच्चों में जा सकते हैं।

रबडॉइड ट्यूमर प्रीडिस्पोज़िशन सिंड्रोम के बारे में और अधिक जानें:

एटी/आरटी के लक्षण

एटी/आरटी के संकेत और लक्षण बच्चे की आयु और ट्यूमर स्थान के आधार पर भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। ये ट्यूमर तेज़ी से बढ़ते हैं और बहुत ही कम समय में इसके अधिक खराब लक्षण हो सकते हैं। एटी/आरटी लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • सिरदर्द, जो अक्सर सुबह के समय अधिक होता है या उल्टी करने के बाद थोड़ा ठीक हो जाता है
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • गतिविधि स्तर या सतर्कता में कमी
  • थकान या उनींदापन
  • संतुलन में कमी और चलने में समस्या
  • आँख या चेहरे की असामान्य गतिविधि
  • व्यक्तित्व या व्यवहार में परिवर्तन, चिड़चिड़ापन
  • शिशुओं में सिर का आकार बढ़ जाना
  • तालू का पूरी तरह बढ़ा हुआ होना (खोपड़ी के शीर्ष पर मौजूद "कोमल भाग")
एटिपिकल टेराटॉइड/रबडॉइड ट्यूमर (एटी/आरटी) एक आक्रामक और तेज़ी से फैलने वाला ट्यूमर है। मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) का उपयोग करके, चिकित्सक ट्यूमर का आकार और स्थान देख सकते हैं।

एटिपिकल टेराटॉइड/रबडॉइड ट्यूमर (एटी/आरटी) एक आक्रामक और तेज़ी से फैलने वाला ट्यूमर है। मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) का उपयोग करके, चिकित्सक ट्यूमर का आकार और स्थान देख सकते हैं।

एटी/आरटी रोग की पहचान करना

एटी/आरटी रोग की पहचान करने में निम्नलिखित जांचें शामिल हो सकती हैं:

  • शारीरिक जांच और चिकित्सकीय इतिहास से चिकित्सकों को लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने में मदद मिलती है।
  • एटी/आरटी से पीड़ित रोगियों के लिए आनुवंशिक जाँच और परामर्श की सलाह दी जाती है। स्मार्कबी1 (आईएनआई1) और स्मार्कए4 वंशाणुओं के लिए रोगियों की जांच की जाती है।
  • न्यूरोलॉजिकल परीक्षण में मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं के कार्यों का निरीक्षण किया जाता है। ये जांचें, स्मृति, देखने, सुनने, मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, समन्वय और प्रतिवर्ती क्रियाओं सहित मस्तिष्क के कार्यों के विभिन्न पहलुओं को मापती हैं।
  • इमेजिंग जांचें जैसे मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस की विस्तृत तस्वीरें बनाती हैं। एटी/आरटी, इमेजिंग पर बने अन्य ट्यूमर के समान ही दिख सकते हैं, इसलिए रोग की पहचान के लिए अन्य जांचों की आवश्यकता होती है। गुर्दे के अल्ट्रासाउंड का उपयोग गुर्दे के रबडॉइड ट्यूमर की जांच करने के लिए किया जा सकता है।
  • रीढ़ की हड्डी के पानी में कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने के लिए लंबर पंक्चर की प्रक्रिया की जा सकती है।
  • एटी/आरटी रोग की पहचान करने के लिए बायोप्सी का उपयोग किया जाता है। बायोप्सी में, सर्जरी के दौरान ट्यूमर का एक छोटा सा नमूना निकाला जाता है। उसके बाद एक रोगविज्ञानी ट्यूमर के विशिष्ट प्रकार का पता लगाने के लिए उस ऊतक के नमूने को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर देखता है। एटी/आरटी की कोशिकाएं स्वस्थ कोशिकाओं से भिन्न दिखाई देती हैं। कोशिका में विशिष्ट प्रोटीनों की जांच करने के लिए ऊतक में कोशिकीय मार्कर का उपयोग किया जाता है। कैंसर कोशिकाओं में स्मार्कबी1 या स्मार्कए4 प्रोटीन की जांच करने के लिए एक विशिष्ट एंटीबॉडी अभिरंजक का उपयोग किया जाता है। एटी/आरटी कोशिकाओं में इस प्रोटीन की कमी होती है, जो ट्यूमर की पहचान की पुष्टि करता है।
अल्ट्रासाउंड का उपयोग गुर्दे के रबडॉइड ट्यूमर की जांच करने के लिए किया जा सकता है।

अल्ट्रासाउंड का उपयोग गुर्दे के रबडॉइड ट्यूमर की जांच करने के लिए किया जा सकता है।

एटी/आरटी का श्रेणीकरण और स्तर का पता लगाना

एटी/आरटी के लिए स्तर का पता लगाने की कोई मानक प्रणाली नहीं है। ट्यूमर को हाल ही में पहचान किए गए या पुनरावर्तन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

एटी/आरटी एक उच्च-श्रेणी (श्रेणी IV) का ट्यूमर है। यह एक आक्रामक कैंसर है। रोग की पहचान के समय लगभग 15-30% रोगियों में यह रोग रीढ़ की हड्डी में पानी (सीएसएफ) या मस्तिष्कावरण तक फैल चुका होता है। इस कैंसर के मस्तिष्कावरण तक फैलने को लेप्टोमेनिंजियल मेटास्टेसिस कहा जाता है।

एटी/आरटी से पीड़ित बच्चों के लिए रोग का पूर्वानुमान

एटी/आरटी तेज़ी से फैलते हैं और इनका इलाज करना मुश्किल होता है। एटी/आरटी से पीड़ित बच्चों के लिए दीर्घकालिक संभावना आमतौर पर बहुत ही खराब है, लेकिन थेरेपी के क्षेत्र में प्रगति से कुछ बच्चों को इसमें मदद मिली है।

रोग के पूर्वानुमान को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बच्चे की आयु। 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों में रोग का पूर्वानुमान बहुत ही खराब था।
  • रोग की पहचान के समय यह पता लगाना कि कैंसर मस्तिष्क और रीढ़ के अंदर की नस के अन्य भागों में या गुर्दे तक फैला है या नहीं। यदि एटी/आरटी फैल गया है तो इसका इलाज करना मुश्किल है।

एटी/आरटी से पीड़ित बच्चों के लिए 5-वर्ष तक जीवित रहने की दर लगभग 50% है। हालांकि, इस रोग की पहचान पर आयु के और रोग के फैलने के आधार पर बदलती रहती है। फैले हुए कैंसर रोग से पीड़ित 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों में रोग का पूर्वानुमान सबसे खराब होता है जिसमें दीर्घकालिक इलाज की संभावना 10% से भी कम होती है।

एटी/आरटी का इलाज

इलाज कई कारकों पर निर्भर करता है जिसमें ट्यूमर का आकार और स्थान, बच्चे की आयु और कैंसर का फैलना शामिल है। एटी/आरटी एक बहुत ही आक्रामक कैंसर है और अधिकांश रोगियों को विभिन्न प्रकार के इलाज प्राप्त होते हैं। एटी/आरटी इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन शामिल हो सकते हैं। एटी/आरटी का इलाज अक्सर बीमारी के परीक्षण के माध्यम से होता है।

  1. सर्जरी का उपयोग एटी/आरटी रोग की पहचान और इलाज दोनों के लिए ही किया जाता है। यदि बायोप्सी से एटी/आरटी की पुष्टि हो जाती है, तो सर्जन जितना संभव हो सकता है उतना ट्यूमर को निकालेगा। इन ट्यूमर को उनके स्थान और उनके फैलने की तीव्रता के कारण पूरी तरह से निकालना मुश्किल होता है।

  2. एटी/आरटी का इलाज करने के लिए अक्सर सर्जरी और/या रेडिएशन के साथ कीमोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। कीमोथेरेपी पूरे शरीर में, ट्यूमर के आस-पास या इंट्राथेकल हो सकती है। इस कैंसर का इलाज करने के लिए स्टेम सेल बचाव के साथ उच्चस्तरीय कीमोथेरेपी का भी उपयोग किया जाता है।

  3. कई बार अन्य इलाजों के अतिरिक्त रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जाता है। रेडिएशन थेरेपी का उपयोग कैसे किया जाए, यह बच्चे की आयु, ट्यूमर के स्थान और यह फैला है या नहीं, इसके आधार पर निर्धारित किया जाता है।

    रेडिएशन थेरेपी ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएशन किरणों, एक्स-रे या प्रोटॉन का उपयोग करती है। रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को क्षति पहुंचाते हुए कार्य करता है।

    रेडिएशन थेरेपी ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएशन किरणों, एक्स-रे या प्रोटॉन का उपयोग करती है। रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को क्षति पहुंचाते हुए कार्य करता है।

  4. लक्षित इलाज ट्यूमर कोशिकाओं के विशिष्ट लक्षणों पर क्रिया करते हुए या उन पर लक्ष्य साधते हुए कार्य करती हैं। लक्षित इलाज का उपयोग करते हुए, एटी/आरटी से पीड़ित बच्चों में बीमारी के परीक्षणों को जारी रखा जा सकता है। इन थेरेपी का उपयोग रोग की पहचान या रोग की पुनरावृत्ति के समय किया जाता है। एटी/आरटी में अध्ययन की जा रही लक्षित इलाज में एलिसर्टिब और टेज़ीमिटोस्टेट शामिल है।

लक्षणों के प्रबंधन में मदद के लिए स्टेरॉयड और दौरे की दवाओं की ज़रूरत पड़ सकती है। प्रशामक देखभाल और पुनर्सुधार, मनोविज्ञान और सामाजिक कार्य जैसी सहायक सेवाओं को शामिल करने से रोगियों और परिवारों को लक्षणों का प्रबंधन करने, जीवन शैली को बढ़ाने और देखभाल निर्णयों को लेने में मदद मिल सकती है। सीखने, विकासात्मक अवस्थाओं और कैंसर का सामना करने से संबंधित समस्याओं को संबोधित करने के लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।

एटी/आरटी के बाद जीवन

रोगी में रोग की पुनरावृत्ति या प्रगति पर नज़र रखने के लिए जारी फॉलो-अप देखभाल, लेबोरेट्री जांचें और नियमित इमेजिंग की आवश्यकता होती है। देखभाल टीम, इलाज की प्रतिक्रिया और रोगी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के आधार पर एक कार्य-योजना निर्धारित करेगी।

एटी/आरटी रोगियों और परिवार के सदस्यों को आनुवंशिक जाँच करवाना चाहिए और परामर्श प्राप्त करना चाहिए। जनन-रेखा स्मार्कबी1 या स्मार्कए4 परिवर्तनों वाले बच्चों में रबडॉइड ट्यूमर प्रीडिस्पोज़िशन सिंड्रोम होता है और उनमें रबडॉइड ट्यूमर विकसित होने का अधिक खतरा होता है। रबडॉइड ट्यूमर प्रीडिस्पोज़िशन सिंड्रोम से ग्रस्त रोगियों को नियमित चिकित्सा देखभाल और गुर्दे के ट्यूमर देखने के लिए आवधिक अल्ट्रासाउंड जांचों की आवश्यकता होती है।

एटी/आरटी का इलाज ले रहे बच्चों में इलाज के प्रतिकूल प्रभावों को देखने के लिए उनकी निगरानी की जानी चाहिए। देरी से होने वाले प्रभावों में रेडिएशन के कारण होने वाली तंत्रिका-बोध संबंधी और एंडोक्राइन समस्याएं शामिल हो सकती हैं। कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी से दूसरी बार कैंसर के होने का खतरा भी बढ़ जाता है। परिवारों को अपने चिकित्सकों से बच्चों को मिलने वाले विशेष इलाज से संबंधित जोखिमों के बारे में बात करनी चाहिए।

एटी/आरटी से पीड़ित बच्चों के लिए प्रशामक देखभाल

विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए, एटी/आरटी रोग का पूर्वानुमान बहुत मुश्किल होता है। कैंसर-निर्देशित थेरेपी के साथ जीवन शैली को संतुलित बनाए रखना आवश्यक है। परिवारों को अपनी देखभाल टीम से बात करनी चाहिए कि आगे कौन सी समस्याएं आ सकती हैं और कौन से तरीके उनका प्रबंधन करने में मदद कर सकते हैं। प्रशामक देखभाल या जीवन शैली संबंधी सेवाओं को शामिल करने से परिवारों को लक्षणों का प्रबंधन करने, मुश्किल बातचीत का संचालन करने और देखभाल के लक्ष्यों के साथ परिवार की इच्छाओं को संरेखित करने वाले निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

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समीक्षा की गई: नवंबर, 2019