आपका स्वागत है

Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

और अधिक जानें

जिगर का कैंसर

जिगर का कैंसर क्या है?

बच्चों और किशोरों में जिगर का कैंसर बहुत कम ही पाया जाता है। बच्चों में होने वाले कैंसरों में से इसका अनुपात लगभग 1-2% है। बच्चों में होने वाले जिगर के कैंसर प्रकारों में हेपाटोब्लास्टोमा,हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा और जिगर का अविभेदित भ्रूणीय सारकोमा शामिल है।  

  • हेपाटोब्लास्टोमा (एचबी) एक प्रकार का जिगर का कैंसर है जो आमतौर पर नवजात शिशुओं और 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों में देखा जाता है। यह बच्चों में होने वाला सबसे आम प्रकार का जिगर का कैंसर है।
  • हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा (एचसीसी) बड़े बच्चों और किशोरावस्था के बच्चों में होता है। यह छोटे बच्चों में बहुत ही कम होता है। यह आमतौर पर 12-14 वर्ष की आयु के बच्चों में पाया जाता है।
  • जिगर का अविभेदित भ्रूणीय सारकोमा (यूईएस) एक दुर्लभ प्रकार का जिगर का कैंसर है जो आमतौर पर 6-10 वर्ष के बीच की आयु के बच्चों में विकसित होता है। यह हेपाटोब्लास्टोमा और हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा के बाद बच्चों में होने वाला तीसरा सबसे आम प्रकार का जिगर का कैंसर है। बच्चों में होने वाले लगभग 15% जिगर के कैंसर का कारण यही कैंसर होता है।

यूईएस में, सीरम एएफपी आमतौर पर सामान्य होता है। इस ट्यूमर पर अक्सर कीमोथेरेपी से असर पड़ता है। हालांकि, इलाज के लिए अभी भी सर्जरी इसका मूल इलाज है।

जिगर पेट के ऊपरी दाहिनी ओर स्थित एक बड़ा अंग है। इसके कई महत्वपूर्ण कार्य हैं। जिगर खून से अपशिष्ट पदार्थों को निकालने में मदद करता है, भोजन को पचाने में मदद के लिए पित्त बनाता है, शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए ऊर्जा को संग्रहित करता है। जिगर का कैंसर तब होता है जब कैंसर कोशिकाएं जिगर के ऊतक में ट्यूमर का निर्माण करती हैं।

सर्जरी जिगर के कैंसर का प्रमुख इलाज विकल्प है। सर्जरी का लक्ष्य ट्यूमर को जितना संभव हो उतना अधिक निकालना होता है। जिन रोगियों के ट्यूमर को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है उनके ठीक होने की अच्छी संभावना होती है।

कीमोथेरेपी का उपयोग सर्जरी से पहले ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए या सर्जरी के बाद कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने या धीमा करने के लिए किया जा सकता है। जिगर के कैंसर से बच कर जीवित रहना इस बात पर निर्भर करता है कि सर्जरी ट्यूमर को निकाल सकती है या नहीं और कैंसर जिगर के बाहर तक फैला है या नहीं।

विशिष्ट रूप से जिगर को दर्शाते हुए और लेबल किए हुए अंगों के लेओवर के साथ एक नन्हे बच्चे का ग्राफ़िक

जिगर पेट के ऊपरी दाहिनी ओर स्थित एक बड़ा अंग है। जिगर खून से अपशिष्ट पदार्थों को निकालने में मदद करता है, भोजन को पचाने में मदद के लिए पित्त बनाता है, शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए ऊर्जा को संग्रहित करता है।

जिगर के कैंसर के संकेत और लक्षण

जिगर के कैंसर के संकेत और लक्षण ट्यूमर के आकार और इस बात पर निर्भर करते हैं कि यह जिगर के बाहर तक फैला है या नहीं। जिगर के कैंसर के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अक्सर बिना लक्षणों के, पेट (उदर) में गांठ या सूजन होना
  • पेट या कमर में दर्द होना
  • भूख न लगना
  • वजन घटना
  • त्वचा में खुजली होना
  • आँखों और/या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
  • त्वचा और होंठों का फीका पड़ना (यानी यह खून की कमी हो सकती है)
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • बुखार

हेपाटोब्लास्टोमा, ट्यूमर द्वारा स्रावित हार्मोन के कारण जल्द यौवनारंभ (समय से पूर्व यौवनारंभ) के संकेतों से जुड़ा हो सकता है।

जिगर के कैंसर रोग की पहचान करना

चिकित्सक जिगर के ट्यूमरों का आकलन करने और रोग की पहचान करने के लिए विभिन्न प्रकार की जांचों का उपयोग करते हैं। इन जाँचों में शामिल है:

  • लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने के लिए स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक जांच। पारिवारिक इतिहास यह निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण होता है कि क्या इसमें कोई वंशानुगत जोखिम हो सकता है।
  • निम्नलिखित सहित खून और मूत्र परीक्षण के लिए लैब जांचें:
    • लाल रक्त कोशिकाओं,सफ़ेद रक्त कोशिकाओं, और प्लेटलेट्स की संख्या; लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा; और लाल रक्त कोशिकाओं से बने रक्त के अंश की जांच करने के लिए कंप्लीट ब्लड काउंट
    • जिगर के कार्य का परीक्षण करने के लिए और जिगर की सूजन या संक्रमण (हेपेटाइटिस) की जांच करने के लिए अन्य खून की जांचें। 
    • उच्च स्तरों की जांच करने के लिए अल्फा-फेटोप्रोटीन (एएफपी) जांच। बढ़ा हुआ एएफपी आमतौर पर हेपाटोब्लास्टोमा में देखा जाता है। जिगर का कैंसर (हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा) से पीड़ित कुछ रोगियों में उच्च एएफपी देखा जा सकता है, लेकिन ऐसा बहुत कम ही होता है। यूईएस वाले बच्चों में एएफपी आमतौर पर सामान्य होता है।
  • कैंसर का पता लगाने के लिए, ट्यूमर कितना बड़ा है यह देखने के लिए और यह फेफड़ों जैसे अन्य स्थानों तक फैला है या नहीं यह मालूम करने के लिए इमेजिंग जांचें। 
  • कोशिकाओं में कैंसर के संकेतों की जांच करने और शरीरकोष विज्ञान के बारे में और अधिक जानने के लिए ट्यूमर के कुछ ऊतक की बायोप्सी (टुकड़ा निकालना)। एक माइक्रोस्कोप में कोशिकाएं जिस प्रकार की दिखाई देती हैं वह प्रकार रोग की पहचान करने और इलाज की योजना बनाने में महत्वपूर्ण होता है। उच्च एएफपी वाले बहुत छोटे बच्चों में, बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) करने की आवश्यकता नहीं भी हो सकती है।

जिगर के कैंसर के स्तर का पता लगाना

चिकित्सक जिगर के ट्यूमरों को अक्सर, रोगी के इलाज से पहले कैंसर कहां स्थित है, इसके आधार पर वर्गीकृत करते हैं। इस प्रणाली को इलाज से पहले रोग की अधिकता (प्रीटेक्सट) कहा जाता है। प्रीटेक्सट समूह (I, II, III, IV) इस बात पर निर्भर करते हैं कि जिगर के कौन से भागों में कैंसर है। समहू जितना उच्च स्तर का होता है, जिगर के उतने ही अधिक भागों में ट्यूमर होता है। 

प्रीटेक्स्ट समूह जिगर का शामिल भाग
प्रीटेक्स्ट समूह I
 जिगर का एक भाग शामिल है।                                                                                 
प्रीटेक्स्ट समूह II  जिगर के एक या दो भाग शामिल हैं।
प्रीटेक्स्ट समूह III  जिगर के दो या तीन भाग शामिल हैं।
प्रीटेक्स्ट समूह IV
 जिगर के सभी चार भाग शामिल हैं।

सर्जरी जिगर के कैंसर का प्रमुख इलाज विकल्प है। जिन रोगियों के ट्यूमर को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है उनके ठीक होने की अच्छी संभावना होती है।

जिगर के कैंसर के प्रकार

  1. हेपाटोब्लास्टोमा कम ही होता है, लेकिन यह बच्चों में होने वाले जिगर के कैंसर का सबसे आम प्रकार है। यह आमतौर पर नवजात शिशुओं और 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों में पाया जाता है। 

    हेपाटोब्लास्टोमा के जोखिम कारक और कारण

    जिगर के कैंसर से पीड़ित अधिकांश बच्चों में इसका कोई ज्ञात कारण नहीं है। हालांकि, कुछ रोगियों में कुछ कारकों से इसका जोखिम बढ़ सकता है। हेपाटोब्लास्टोमा के जोखिम कारकों में ये शामिल है:

    • बहुत कम वजन के साथ समयपूर्व जन्म
    • हेमी-हाइपरप्लासिया (हेमीहाइपरट्रॉफ़ी), एक ऐसी अवस्था जिसमें शरीर का एक ओर का भाग दूसरे ओर के भाग की तुलना में तेजी से बढ़ता है
    • फीटल अल्कोहल सिंड्रोम
    • पारिवारिक एडिनोमेटस पॉलीपोसिस (एफएपी), एक वंशागुनत अवस्था जिसमें आंत में पॉलिप्स विकसित होते हैं
    • बेकविथ-विडमेन सिंड्रोम, एक दुर्लभ प्रकार का अतिवृद्धि विकार जिसमें जन्म के समय बड़ा आकार, निम्न रक्त शर्करा और अन्य शारीरिक समस्याएं शामिल हैं
    • ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम, कैंसर के बढ़े हुए जोखिम के साथ जुड़ी वंशागत अवस्था
    • ट्राइसॉमी 18, एकाधिक शारीरिक विकारों और स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़ी एक आनुवंशिक स्थिति

    हेपाटोब्लास्टोमा के लिए पूर्वानुमान

    हेपाटोब्लास्टोमा के बाद ठीक होना, सभी ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालने पर निर्भर करता है। यह रोग की पहचान किए जाने पर लगभग 1/3 रोगियों में संभव होता है। अन्य 1/3 रोगियों में कीमोथेरेपी के कारण सफल सर्जरी संभव हो पाती है। कभी-कभी सभी ट्यूमर को निकालने के लिए जिगर प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ती है।

    हेपाटोब्लास्टोमा के संबंध में यदि ट्यूमर को सर्जरी से सफलतापूर्वक निकाला जा सकता है तो इसके लिए पांच साल तक जीवित रहने की कुल दर लगभग 70% है। यदि कैंसर जिगर के अधिक भागों (प्रीटेक्स्ट IV) में पाया जाता है या यह जिगर के बाहर तक फैल गया है, तो रोगियों की ठीक होने की संभावना कम होती है। 

    खराब परिणाम के साथ जुड़े कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

    • रोग की पहचान किए जाने के समय अधिक आयु (>8 वर्ष की आयु)
    • 100 ng/mL से कम का निम्न अल्फा-फेटोप्रोटीन (एएफपी) स्तर
    • लघु कोशिका शरीरकोष विज्ञान

    कम आयु और भ्रूण कोशिका शरीरकोष विज्ञान वाले रोगियों के ठीक होने की अधिक संभावना होती है।

    हेपाटोब्लास्टोमा का इलाज

    सर्जरी जिगर के कैंसर का प्रमुख इलाज विकल्प है। 

    हेपाटोब्लास्टोमा में सर्जरी से पहले ट्यूमर को सिकोड़ने और उसे निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कीमोथेरेपी का उपयोग किया जा सकता है। हेपाटोब्लास्टोमा के लिए सिस्प्लेटिन प्रमुख कीमोथेरेपी है। संयोजन चिकित्सा (एक से अधिक प्रकार की कीमोथेरेपी के साथ इलाज) का भी उपयोग किया जाता है।

  2. बच्चों में होने वाला जिगर का कैंसर (हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा) बहुत ही कम पाया जाता है। इस रोग की पहचान आमतौर पर 12 और 14 वर्ष के बीच की आयु के बच्चों में की जाती है और अक्सर 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में इस रोग की पहचान नहीं की जाती है।

    जिगर का कैंसर (हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा) के जोखिम कारक और कारण

    जिगर का कैंसर (हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा) आमतौर पर उन वयस्क लोगों में पाया जाता है जिनमें संक्रमण, कुछ स्वास्थ्य स्थितियों के कारण जिगर संबंधित बीमारी या जिगर खराब (सिरोसिस) होने की समस्या होती है या जिनका जिगर दवाओं अथवा अल्कोहल का सेवन करने के कारण खराब हो जाता है। बड़े बच्चों और किशोरों में यह कैंसर हो सकता है। हालांकि, अधिकांश में कोई ज्ञात जोखिम कारक नहीं होते। लेकिन जिगर का कैंसर (हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा) से पीड़ित लगभग 1/3 बच्चों में एक जोखिम कारक होता है जिससे उन्हें यह कैंसर होने की अधिक संभावना होती है। इनमें शामिल है:

    • हेपेटाइटिस बी या सी संक्रमण
    • इथेनॉल (अल्कोहल) के संपर्क में आना
    • विनाइल क्लोराइड के संपर्क में आना
    • एफ़्लाटॉक्सिन बी1 के संपर्क में आना
    • एंड्रोजेनिक एनाबॉलिक स्टेरॉयड का उपयोग
    • मधुमेह/डायबीटीज़ मेलिटस
    • कुछ वंशानुगत या जन्मजात स्थितियां:
      • टाइरोसिनेमिया और ग्लाइकोजन स्टोरेज रोग सहित मेटाबोलिज्म (चयापचय) स्थितियां
      • अलागिल सिंड्रोम और बिलीएरी अट्रेसिया सहित फैमिलियल कोलेस्टैटिक सिंड्रोम
      • न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस
      • अटेक्सिया-टलेन्जियिअकटेज़ा
      • फ़ैंकोनी एनीमिया

    जिगर का कैंसर (हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा) के लिए पूर्वानुमान

    जिगर का कैंसर (हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा) का इलाज करना अधिक कठिन होता है क्योंकि इस पर कीमोथेरेपी का असर कभी-कभार ही होता है। सर्जरी या जिगर प्रत्यारोपण के द्वारा ट्यूमर को पूरी तरह से निकालने से रोगी के ठीक होने की संभावना सबसे अधिक होती है। जीवित रहने की कुल दर 30% से भी कम है। स्वास्थ्य लाभ के अवसर को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

    • कैंसर शरीर के अन्य भागों में फैला है या नहीं।
    • सर्जरी से ट्यूमर पूरी तरह निकल सकता है या नहीं।

    जिगर का कैंसर (हेपेटोसेल्यूलर कार्सिनोमा) का इलाज

    जिगर का कैंसर (हेपोटोसेल्यूलर कार्सिनोमा) का इलाज करने का एकमात्र तरीका केवल सर्जरी ही है। कीमोथेरेपी का उपयोग ट्यूमर को काफी हद तक कम करने की कोशिश करने के लिए किया जाता है ताकि इसे पूरी तरह से निकाला जा सके। हालांकि, यह कैंसर कीमोथेरेपी के प्रति अधिक संवेदनशील नहीं होता। 
    यदि रोग की पहचान करते समय ट्यूमर पहले से ही जिगर के बाहर तक फैल चुका है, तो कीमोथेरेपी या स्थानीय चिकित्साओं की कोशिश की जा सकती है।

    सोराफीनिब दवा इस कैंसर को धीमा करने में मदद कर सकती है। रेगोराफीनिब को उन रोगियों के लिए स्वीकृत किया गया है जिनका इलाज पहले सोराफीनिब से किया गया था। कुछ दवाएं जैसे कि सिस्प्लेटिन वयस्कों की तुलना में बच्चों में बेहतर काम कर सकती हैं।

    सीमित जगह या अंग का इलाज़ उन रोगियों की मदद कर सकते हैं जो जिगर प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इन चिकित्साओं का मुख्य उद्देश्य कैंसर वृद्धि को धीमा करना और जीवन-काल को बढ़ाना होता है, न कि कोई इलाज करना।

जिगर के कैंसर के बाद जीवन

जिगर प्रत्यारोपण

जिन रोगियों का जिगर प्रत्यारोपण हुआ है, उन्हें आजीवन प्रतिरक्षा कम करने की दवा की आवश्यकता होती है। ये दवाएं शरीर को नए जिगर पर आक्रमण करने या उसे अस्वीकर करने से रोकती हैं। क्योंकि ये दवाइयां शरीर की स्वाभाविक प्रतिरक्षाओं को कम करने का काम करती हैं, इसलिए रोगियों में संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, अंग प्रत्यारोपण के बाद, बहुत से रोगी सामान्य, स्वस्थ जीवन जीते हैं। यह आवश्यक है कि नियमित रूप से चिकित्सा देखभाल ली जाए और बताए अनुसार दवाइयों का सेवन किया जाए।

इलाज के बाद देरी से दिखाई देने वाले प्रभाव

सामान्य स्वास्थ्य और बीमारी की रोकथाम के लिए, कैंसर से बचे सभी लोगों को स्वस्थ जीवन शैली और खान-पान की आदतें अपनानी चाहिए, साथ ही प्राथमिक चिकित्सक द्वारा कम से कम हर वर्ष नियमित रूप से शारीरिक परीक्षण और जांचें भी करवाते रहना चाहिए। बचपन में होने वाले कैंसर से बचे लोग जिनका इलाज पूरे शरीर में कीमोथेरेपी देने के द्वारा किया गया था, उनकी तीव्र या देर से होने वाले प्रभावों के लिए निगरानी की जानी चाहिए। संभावित स्वास्थ्य समस्याओं में सुनाई न देना और गुर्दे से संबंधित समस्याएं (सिस्प्लेटिन) तथा हृदय से संबंधित समस्याएं (एंथ्रासाइक्लिन) शामिल हैं।


समीक्षा की गई: जून 2018