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जी ट्यूब, जीजे ट्यूब और जे ट्यूब लगाना

पेट में छोटा-सा छेद करके जिसे स्टोमा कहा जाता है, जी ट्यूब, जीजे ट्यूब और जे ट्यूब को लगाया जाता है। छेद बनाने के प्रक्रिया को ओस्टोमी कहा जाता है। खिलाने वाली नली वाली ओस्टोमी प्रक्रिया 3 मुख्य तरीकों से की जा सकती है:

  1. एक्स रे की सहायता से
  2. सर्जिकल
  3. ऐंडोस्कोपी

प्रक्रिया का प्रकार अस्पताल के संसाधनों, चिकित्सीय टीम विशेषज्ञता, रोगी के स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य चीज़ों, क्या रोगी अन्य प्रक्रियाएं या सर्जरी करवा रहा है, जैसे कारकों सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।

यदि खिलाने वाली नली को सामान्य एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) का उपयोग करके लगाया जाता है, तो रोगियों को प्रक्रिया से पहले एक निर्दिष्ट समय के लिए मुंह से कुछ भी खाने-पीने से मना किया जा सकता है। इन एनपीओ (बिना खाए-पिए) निर्देशों का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण है।

रोगियों को आमतौर पर निगरानी और दर्द नियंत्रण के लिए रात भर अस्पताल में रहना पड़ता है। देखभाल करने वाली टीम खिलाने वाली नली लगाने के बाद विशिष्ट एनपीओ (बिना खाए-पिए) निर्देश देगी। रिकवरी के दौरान और/या गैस्ट्रोस्टोमी के बाद दवाइयों में बदलाव किया जा सकता है। परिवारों को एडमिन या शेड्यूल में दवाई में किसी भी बदलाव पर चर्चा करनी चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि खिलाने वाली नली ठीक से काम करती है और पाचन प्रणाली को समायोजित करने में मदद करने के लिए तरल पदार्थ और एंटरल फ़ीडिंग धीरे-धीरे शुरू की जाएगी।

गैस्ट्रोस्टोमी, गैस्ट्रो-जेजुनोस्टोमी और जेजुनोस्टोमी के बाद होने वाली उलझनें

कैंसर के इलाज के दौरान खिलाने वाली नली लगाना एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) और शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं में हमेशा जोखिम होते हैं। एक चिकित्सक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताएगा साथ ही जोखिम और लाभों पर चर्चा करेगा। संक्रमण के जोखिम को कम करने और खिलाने वाली नली को ठीक से काम करने के लिए सभी देखभाल निर्देशों का पालन करना ज़रूरी है।

इंसर्शन के मुख्य जोखिमों में एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) की समस्याएं या आस-पास के अंगों का घायल होना शामिल है। खिलाने वाली नली लगाने के बाद, सबसे आम जटिलताओं में ट्यूब का अपनी जगह से हिलना, ट्यूब ब्लॉकेज या रिसाव, पाचन संबंधी समस्याएं, ट्यूब के आस-पास की त्वचा में समस्याएं और संक्रमण शामिल हैं।

गंभीर समस्याएं बहुत कम ही होती हैं, लेकिन होती हैं। सवाल पूछना सुनिश्चित करें और देखभाल टीम द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का पालन करें। खिलाने वाली नली लगाए जाने के बाद दवाइयों में किसी भी बदलाव के बारे में अपने चिकित्सक से बात करें।

इमेजरी गाइडेड गैस्ट्रोस्टोमी और गैस्ट्रो-जेजुनोस्टोमी

एक्स रे की सहायता से गैस्ट्रोस्टोमी में आंत के रास्ते पेट में खिलाने वाली नली लगाने के लिए फ़्लोरोस्कोपी का उपयोग होता है। इस विधि को पर्क्यूटेनियस रेडियोलॉजिक गैस्ट्रोस्टोमी (पीआरजी) के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रक्रिया में, पेट और आंत का लाइव एक्स-रे एक वीडियो मॉनीटर पर दिखाया जाता है, ताकि प्रक्रिया के दौरान विकिरण चिकित्सक (रेडियोलॉजी) टीम प्रक्रिया को देख सके। शुरुआती ट्यूब आमतौर पर एक लंबी ट्यूब होती है, लेकिन इलाज के बाद इसकी जगह लो-प्रोफ़ाइल डिवाइस इस्तेमाल किया जा सकता है। कभी-कभी शुरुआत में लो-प्रोफ़ाइल डिवाइस इस्तेमाल किया जा सकता है।

    • जी या जीजे ट्यूब लगाने से पहले, रोगियों के खून की जांच और शारीरिक जांच होगी। देखभाल टीम के सदस्य कागज़ी कार्रवाई पूरी करने और सवालों के जवाब देने के लिए परिवार से मिलते हैं।
    • रोगी को गाउन पहनाया जाता और प्रक्रिया के लिए एक पारंपरिक विकिरण चिकित्सक (रेडियोलॉजी) या ऑपरेशन करने वाले कमरे में ले जाया जाता है। चिकित्सा केंद्र की नीतियों के आधार पर, एक अभिभावक प्रक्रिया के लिए ले जाने के समय तक रोगी के साथ रह सकता है।
    • प्रक्रिया के लिए बच्चों को सामान्य एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) दिया जाता है।
    • अल्ट्रासाउंड इमेजिंग का उपयोग जिगर का पता लगाने और उसे चोट से बचाने के लिए किया जाता है।
    • देखभाल टीम गाउन, मास्क और दस्ताने पहनती है। पेट के चीरे के क्षेत्र को छोड़कर रोगी के शरीर को ढंकने के लिए एक नीले रंग की कागज़ की जाली का उपयोग किया जाता है। यह जगह को साफ़ रखने और संक्रमण को रोकने में मदद करता है।
    • पेट को हवा से फुलाया जाता है, आमतौर पर नासोगैस्ट्रिक ट्यूब के ज़रिए।
    • फ़्लोरोस्कोपी का उपयोग पेट की इमेजिंग और ट्यूब लगाने के लिए सही जगह चुनने के लिए किया जाता है।
    • पेट की त्वचा को साफ़ किया जाता है। फिर, दर्द को कम करने के लिए उस भाग को सुन्न करने वाली दवाई का उपयोग करके जगह को सुन्न किया जाता है। आमतौर पर इसके लिए लिडोकाइन इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है।
    • फुलाए गए पेट के साथ, पेट की दीवार पर पेट को पकड़े रखने के लिए 2-4 रिटेंशन टांके या फ़ास्टनर उपयोग किए जाते हैं। यह वर्ग या त्रिकोण के आकार में एक छोटा-सा क्षेत्र बनाता है। 10-14 दिन बाद ये टांके निकाल दिए जाएंगे।
    • एक खोखली सुई को त्वचा के माध्यम से पेट में डाला जाता है। सुई के माध्यम से एक गाइड तार डाला जाता है और सुई को निकाल दिया जाता है।
    • इमेजिंग का उपयोग गाइड वायर को पेट या आंत में उसकी सही स्थिति में बैठाने के लिए किया जाता है।
    • एक छोटा खोखला उपकरण जिसे डाइलेटर कहा जाता है, गाइड वायर पर फिट किया जाता है और चीरे को चौड़ा करने के लिए त्वचा से होते हुए पेट में डाल दिया जाता है। जब तक चीरा, खिलाने वाली नली डालने जितना बड़ा नहीं हो जाता, एक के बाद एक डाइलेटर इस्तेमाल किेए जाते हैं।
    • फिर खिलाने वाली नली को गाइड वायर के ऊपर रखा जाता है। एक बार खिलाने वाली नली लगाने के बाद, पेट की दीवार से ट्यूब लगाए रखने के लिए ट्यूब पर लगे छोटे-से गुब्बारे में पानी भर दिया जाता है।
    • जब खिलाने वाली नली सही स्थिति में होती है, तो गाइड तार निकाल दिया जाता है।
    • प्रक्रिया के बाद, त्वचा को साफ़ किया जाता है और उस जगह ड्रेसिंग की जाती है जहां ट्यूब त्वचा से बाहर निकलती है।
    • रोगियों को रिकवर होने में कम समय लगता है, आमतौर पर लगभग एक घंटा।

    नोट: अस्पताल की नीतियों, संसाधनों, विशेषज्ञता और रोगी की ज़रूरतों के आधार पर प्रक्रिया और शल्य चिकित्सा तकनीक भिन्न हो सकती हैं। अपनी देखभाल टीम के साथ अपनी प्रक्रिया पर चर्चा करना सुनिश्चित करें।

सर्जिकल गैस्ट्रोटोमी, गैस्ट्रोजेजुनोस्टोमी और जेजुनोस्टोमी

सर्जिकल खिलाने वाली नली लगाने की प्रक्रिया (जी ट्यूब, जीजे ट्यूब, या जे ट्यूब) ऑपरेशन करने वाले कमरे में की जाती है। इस दौरान रोगी को सामान्य एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) दिया जाता है। खिलाने वाली नली को सीधे पेट की दीवार के माध्यम से पेट (जी ट्यूब) या छोटी आंत (जीजे ट्यूब) तक पहुंचाया जाता है। जेजुनोस्टोमी (जे) ट्यूब को सीधे आंत की दीवार के माध्यम से अंदर पहुंचाया जाता है। ये ट्यूब आमतौर पर लो प्रोफ़ाइल या बटन वाले डिवाइस होते हैं। यदि शुरुआत में लंबी ट्यूब लगाई जाती है, तो इसे 6 सप्ताह में ट्रैक्ट के ठीक होने के बाद लो प्रोफ़ाइल डिवाइस से बदला जा सकता है।

सर्जरी कई छोटे चीरों का उपयोग करके न्यूनतम-इनवेसिव (लेप्रोस्कोपिक) या बड़े चीरे का उपयोग करके ओपन सर्जरी हो सकती है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में, प्रक्रिया में मार्गदर्शन के लिए एक छोटा कैमरा डाला जाता है। एक खुली प्रक्रिया में, पेट या आंत तक पहुंचने के लिए पेट की दीवार में एक बड़ा चीरा लगाया जाता है।

सामान्य तौर पर, ओपन सर्जरी पर लेप्रोस्कोपिक जी ट्यूब प्लेसमेंट को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, एडहेशन, स्कार ऊतक या बीमारी-संबंधी कारक होने पर ओपन सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) और रिकवरी के समय को मिलाकर प्रक्रिया में लगभग कुल 1-2 घंटे लगते हैं।

    • जी या जीजे ट्यूब लगाने से पहले, रोगियों के खून की जांच और शारीरिक जांच होगी। देखभाल टीम के सदस्य कागज़ी कार्रवाई पूरी करने और सवालों के जवाब देने के लिए परिवार से मिलते हैं।
    • रोगी को गाउन पहनाया जाता और प्रक्रिया के लिए ऑपरेशन करने वाले कमरे में ले जाया जाता है। चिकित्सा केंद्र की नीतियों के आधार पर, एक अभिभावक प्रक्रिया के लिए ले जाने के समय तक रोगी के साथ रह सकता है।
    • मरीजों को सामान्य एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) दिया जाता है और प्रक्रिया के दौरान उनकी बारीकी से निगरानी की जाती है।
    • देखभाल टीम गाउन, मास्क और दस्ताने पहनती है। पेट के चीरे के क्षेत्र को छोड़कर रोगी के शरीर को ढंकने के लिए एक नीले रंग की कागज़ की जाली का उपयोग किया जाता है। यह जगह को साफ़ रखने और संक्रमण को रोकने में मदद करता है।
    • सर्जरी के लिए, पेट की त्वचा को साफ़ करके तैयार किया जाता है। बेली बटन के पास एक छोटा-सा चीरा लगाया जाता है। एक छोटे कैमरे वाला पतला सर्जिकल उपकरण चीरे के माध्यम से डाला जाता है और इसका उपयोग पेट और आस-पास के अंगों की लाइव इमेज पाने के लिए किया जाता है।
    • सर्जन पेट के बाईं ओर ऊपर 2-3 चीरे लगाएगा। पेट को पकड़कर पेट की दीवार की ओर खींचने के लिए एक सर्जिकल उपकरण का उपयोग किया जाता है। इसे 2 टांकों से जकड़ा जाता है जिससे वह जगह बनती है जहां खिलाने वाली नली लगानी है।
    • एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) टीम द्वारा नासोगैस्ट्रिक ट्यूब से पेट को हवा से फुलाया जाता है।
    • एक खोखली सुई को त्वचा से होते हुए पेट में उस जगह पर डाला जाता है जहां पर खिलाने वाली नली को डायरेक्ट लैप्रोस्कोपिक विज़ुअलाइज़ेशन से लगाया जाएगा। एक गाइड तार सुई के माध्यम से पेट में डाला जाता है और सुई निकाल दी जाती है।
    • एक छोटा खोखला उपकरण जिसे डाइलेटर कहा जाता है, गाइड वायर पर फिट किया जाता है और चीरे को चौड़ा करने के लिए त्वचा से होते हुए पेट में डाल दिया जाता है। जब तक चीरा, खिलाने वाली नली डालने जितना बड़ा नहीं हो जाता, एक के बाद एक डाइलेटर इस्तेमाल किेए जाते हैं।
    • फिर खिलाने वाली नली को गाइड वायर के ऊपर रखा जाता है। एक बार खिलाने वाली नली लगाने के बाद, पेट की दीवार से ट्यूब लगाए रखने के लिए ट्यूब पर लगे छोटे-से गुब्बारे में पानी भर दिया जाता है।
    • जब खिलाने वाली नली सही स्थिति में होती है, तो गाइड तार निकाल दिया जाता है।
    • पेट की दीवार के साथ पेट को चिपकाए रखने में मदद के लिए टांके लगाए जाते हैं।
    • प्रक्रिया के बाद, त्वचा को साफ़ किया जाता है और उस जगह ड्रेसिंग की जाती है जहां ट्यूब त्वचा से बाहर निकलती है।
    • रोगियों को रिकवर होने में कम समय लगता है, आमतौर पर लगभग एक घंटा।

    गैस्ट्रो-जेजुनोस्टोमी खिलाने वाली नली लगाना:

    जीजे ट्यूब को लगाने का तरीका भी जी ट्यूब लगाने जैसा ही है। हालांकि, फ़्लोरोस्कोपी का उपयोग पेट में गाइड वायर को आगे बढ़ाने और जेजुनम में इसकी स्थिति सही करने के लिए किया जाता है। फिर जीजे ट्यूब को गाइड वायर के ऊपर रखा जाता है। अक्सर, कोशिश के बावजूद जी ट्यूब न लग पाने पर जीजे ट्यूब लगाई जाती है। अगर ऐसा है, तो जीजे ट्यूब को जी ट्यूब के लिए बनाई गई जगह से लगाया जाता है।

    नोट: अस्पताल की नीतियों, संसाधनों, विशेषज्ञता और रोगी की ज़रूरतों के आधार पर प्रक्रिया और शल्य चिकित्सा तकनीक भिन्न हो सकती हैं। अपनी देखभाल टीम के साथ अपनी प्रक्रिया पर चर्चा करना सुनिश्चित करें।

पर्कुटेनियस ऐंडोस्कोपी गैस्ट्रोस्टोमी (पीईजी)

पर्कुटेनियस ऐंडोस्कोपी गैस्ट्रोस्टोमी (पीईजी) में ऐंडोस्कोप का उपयोग करके खिलाने वाली नली लगाई जाती है। ऐंडोस्कोप एक पतला, लंबा, लचीला उपकरण होता है जिसमें एक कैमरा होता है और सिरे पर लाइट लगी होती है। ऐंडोस्कोप मुंह, इसोफेगस (भोजन-नली) से होते हुए पेट में ले जाया जाता है। एक वीडियो मॉनीटर पेट के अंदर की तस्वीर दिखाता है, ताकि खिलाने वाली नली को सही स्थिति में लगाया जा सके। पेट में एक छोटे चीरे माध्यम से खिलाने वाली नली को पेट से होते हुए त्वचा से बाहर निकाला जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर सामान्य एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) के अंतर्गत की जाती है। एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) और रिकवरी के समय को मिलाकर प्रक्रिया में लगभग कुल 1-2 घंटे लगते हैं। पीईजी आमतौर पर एक लंबी ट्यूब होती है, लेकिन ट्रैक्ट के ठीक होने के इसे लो-प्रोफ़ाइल डिवाइस से बदला जा सकता है।

    • पीईजी ट्यूब लगाने से पहले, रोगियों के खून की जांच और शारीरिक जांच होगी। देखभाल टीम के सदस्य कागज़ी कार्रवाई पूरी करने और सवालों के जवाब देने के लिए परिवार से मिलेंगे।
    • रोगी को अस्पताल का गाउन पहनाया जाएगा।
    • प्रक्रिया इलाज रूम या ऑपरेशन करने के कमरे में की जा सकती है।
    • मरीजों को सामान्य एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) दिया जाता है और प्रक्रिया के दौरान उनकी बारीकी से निगरानी की जाती है।
    • देखभाल टीम गाउन, मास्क और दस्ताने पहनेगी। पेट के चीरे के क्षेत्र को छोड़कर रोगी के शरीर को ढंकने के लिए एक नीले रंग की कागज़ की जाली का उपयोग किया जाता है। यह जगह को साफ़ रखने और संक्रमण को रोकने में मदद करता है।
    • पेट की त्वचा को साफ़ किया जाएगा। फिर, दर्द को कम करने के लिए उस भाग को सुन्न करने वाली दवाई का उपयोग करके जगह को सुन्न किया जाता है। आमतौर पर इसके लिए लिडोकाइन इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है।
    • ऐंडोस्कोप मुंह के माध्यम से अंदर डाला जाएगा, भोजन-नली के नीचे और पेट के अंदर। ऐंडोस्कोप के सिरे पर लगी लाइट से उस जगह की पहचान की जाती है जहां ट्यूब लगानी है।
    • ट्यूब को ऐंडोस्कोपिक रूप से लगाने के लिए दो मुख्य तकनीकों का उपयोग किया जाता है:
      • पुल मेथड: ट्यूब लगाने की जगह चुने जाने के बाद, पेट में त्वचा से होते हुए एक खोखली सुई डाली जाती है। आगे, एक गाइड तार को सुई से पास किया जाता है। ऐंडोस्कोप का उपयोग तार को जोड़ने और पेट, भोजन-नली और मुंह के माध्यम से बाहर खींचने के लिए किया जाता है। फिर, खिलाने वाली नली को गाइड तार पर रखा जाता है और मुंह से होते हुए उसे पेट में नीचे ले जाया जाता है। ट्यूब का पतला छोर धीरे-धीरे पेट की दीवार से होते हुए आगे ले जाया जाता है और एक छोटे-से चीरे से बाहर निकाला जाता है।
      • पुश मेथड: ट्यूब लगाने की जगह चुने जाने के बाद, पेट पर त्वचा से होते हुए एक लंबी सुई डाली जाती है। सुई के माध्यम से एक गाइड तार लगाया जाता है और खिलाने वाली नली को गाइड तार पर पुश किया जाता है।
    • एक बार खिलाने वाली नली लगाने के बाद, ट्यूब पर लगे छोटे-से गुब्बारे में पानी भर दिया जाता है। जब खिलाने वाली नली सही स्थिति में होती है, तो गाइड तार निकाल दिया जाता है। एक बाहरी बंपर या डिस्क इसे त्वचा के बाहरी सतह पर रखने में मदद करती है।
    • प्रक्रिया के बाद, त्वचा को साफ़ किया जाएगा और उस जगह ड्रेसिंग की जाएगी है जहां ट्यूब त्वचा से बाहर निकलती है।
    • खिलाने वाली नली की स्थिति की जांच के लिए ऐंडोस्कोपी, फ़्लोरोस्कोपी या एक्स-रे का उपयोग किया जाएगा।
    • सामान्य एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) लेने वाले रोगियों को रिकवर होने में कम समय लगता है, आमतौर पर लगभग एक घंटा।

    नोट: अस्पताल की नीतियों, संसाधनों, विशेषज्ञता और रोगी की ज़रूरतों के आधार पर प्रक्रिया और शल्य चिकित्सा तकनीक भिन्न हो सकती हैं। अपनी देखभाल टीम के साथ अपनी प्रक्रिया पर चर्चा करना सुनिश्चित करें।


समीक्षा की गई: दिसंबर 2018