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मेडुलरी थायराइड कैंसर

मेडुल्लारी थायराइड कैंसर क्या है?

मेडुल्लारी थायराइड कार्सिनोमा (एमटीसी) डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसरों से भिन्न एक विशेष प्रकार का थायराइड कैंसर है। यह कैंसर थायराइड ग्रंथि के पैराफॉलिक्युलर सी सेल में शुरू होता है। ये कोशिकाएं एक कैल्सिटोनिन नामक हार्मोन का निर्माण करती हैं। अन्य थायराइड हार्मोन से भिन्न कैल्सिटोनिन हार्मोन आयोडीन से नहीं बनता है।

एमटीसी बच्चों में बहुत ही कम पाया जाता है। अधिकांश समय, बच्चों को होने वाला एमटीसी आनुवंशिक प्रवृत्ति से जुड़ा होता है: फैमिलियल एमटीसी या टाइप 2 मल्टीपल एंडोक्राइन निओप्लेज़िया (एमईएन सिंड्रोम)।

विशिष्ट रूप से थायराइड ग्रंथि को दर्शाते हुए और लेबल किए हुए अंगों के लेओवर के साथ एक वयस्क महिला के शरीर का ग्राफ़िक।

थायराइड ग्रंथि गर्दन के सामने के भाग में गले के आधार पर स्थित एक तितली के आकार का अंग होता है। यह दोनों ओर के भागों में व्यवस्थित होता है, एक दाईं ओर और एक बाईं ओर।

मेडुल्लारी थायराइड कैंसर के जोखिम कारक और कारण

आनुवंशिक या फैमिलियल एमटीसी, आरईटी वंशाणु के जनन-रेखा उत्परिवर्तनके कारण होता है। आरईटी वंशाणु उत्परिवर्तनों के कारण मल्टीपल एंडोक्राइन निओप्लेज़िया(एमईएन) भी हो सकता है। ये स्थितियां एंडोक्राइन तंत्र को प्रभावित करती हैं और इसमें फियोक्रोमोसाइटोमा और हाइपरपैराथीरोइडिस्म शामिल हो सकते हैं। विशिष्ट प्रकार का उत्परिवर्तन एमटीसी और संबंधित स्वास्थ्य स्थितियों के प्रबंधन को प्रभावित कर सकता है। आरईटी उत्परिवर्तनों वाले रोगियों को आनुवंशिक परामर्श प्राप्त करना चाहिए और आनुवंशिक जांच करवानी चाहिए।

मेडुल्लारी थायराइड कैंसर के संकेत और लक्षण

थायराइड कैंसर का प्रमुख लक्षण, थायराइड ग्रंथि में नॉड्यूल या गांठ का होना है। कभी-कभी, गर्दन में लसिका ग्रंथियां सूजी हुई दिखाई देंगी। अन्य संभावित लक्षणों में सांस लेने से संबंधित समस्याएं, निगलने में कठिनाई या दर्द होना और गला बैठना शामिल है। हालांकि, अक्सर थायराइड कैंसर के कोई लक्षण उत्पन्न नहीं होते और यह एक नियमित जांच के भाग के रूप में पाया जा सकता है।

बच्चों में, मेडुल्लारी थायराइड कैंसर को अक्सर आनुवंशिक सिंड्रोम के भाग के रूप में देखा जाता है। कुछ स्थितियों में, एमटीसी होने से रोकने के लिए थायराइड ग्रंथि को कैंसर के कोई भी संकेत मिलने से पहले ही निकाला जा सकता है।

मेडुल्लारी थायराइड कैंसर रोग की पहचान करना

चिकित्सक कई तरीकों से थायराइड कैंसर की जांच करते हैं। इन जाँचों में शामिल है:

  • स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक जांच से चिकित्सक को लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने में मदद मिलती है। पारिवारिक इतिहास यह पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण होता है कि क्या इसमें कोई वंशानुगत जोखिम हो सकता है। कुछ प्रकार के थायराइड कैंसर में, बच्चे और परिवार के लिए आनुवंशिक जांच करवाने और आनुवंशिक परामर्श लेने की सलाह दी जाती है। चिकित्सक कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले कुछ वंशाणु परिवर्तनों (आरईटी उत्परिवर्तन) के लिए जांच करेंगे।
  • लैब अध्ययन खून में उन पदार्थों की जांच करेंगे जो थायराइड और ट्यूमर के बारे में जानकारी देते हैं (ट्यूमर मार्कर)।
    • कैल्सिटोनिन, थायराइड ग्रंथि द्वारा उत्पादित एक हार्मोन। यह हड्डी के निर्माण को नियंत्रित करने में मदद करता है। मेडुल्लारी थायराइड कैंसर कैंसर में कैल्सिटोनिन बहुत अधिक हो सकता है।
    • कार्सिनो एम्ब्रायोनिक एंटीजन (सीईए), एक प्रोटीन जो सामान्य रूप से खून में कम मात्रा में होता है। मेडुल्लारी थायराइड कैंसर में सीईए के उच्च स्तर देखे जा सकते हैं।
  • ट्यूमर का पता लगाने के लिए, ट्यूमर कितना बड़ा है यह देखने के लिए और यह अन्य स्थानों तक फैला है या नहीं यह मालूम करने के लिए इमेजिंग जांचें। 
    • अल्ट्रासाउंड शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की छवि बनाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है। गर्दन का अल्ट्रासाउंड मुख्य जांचों में से एक है जिसका उपयोग अक्सर चिकित्सक यह देखने के लिए करते हैं कि क्या थायराइड ग्रंथि में कोई ट्यूमर है। असामान्य रूप से बढ़ी हुई लसिका ग्रंथियों की जांच करने के लिए गर्दन के दोनों ओर के भागों की इमेजिंग का उपयोग किया जाता है। थायराइड नॉड्यूल और गर्दन की लसिका ग्रंथियों का आकलन करने के लिए एक अनुभवी सोनोग्राफर के द्वारा किया गया उच्च गुणवत्ता का अल्ट्रासाउंड महत्वपूर्ण होता है। इस जानकारी का उपयोग रोग की पहचान करने और इलाज के अगले चरणों की योजना बनाने के लिए किया जाएगा। अधिकतर समय, गर्दन और थायराइड का अल्ट्रासाउंड मुख्य इमेजिंग होती हैं जिनका उपयोग सर्जरी से पहले किया जाता है।
  • थायराइड ग्रंथि के बाहर तक फैली विकसित बीमारी के संकेतों/लक्षणों वाले रोगियों के लिए कुछ स्थितियों में, अतिरिक्त इमेजिंग में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
    • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी स्कैन) शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की अनुप्रस्थ परिच्छेदन (क्रॉस-सेक्शनल) छवियां बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करती है। इसमें मशीन एक बहुत ही विस्तृत छवि का निर्माण करने के लिए बहुत सी तस्वीरें लेती है। छवियां शरीर की विभिन्न “स्लाइस” की श्रृंखला के रूप में ली जाती हैं और उन्हें कंप्यूटर में सहेज लिया जाता है। इन स्लाइस या खंड से छोटे से छोटे ट्यूमर भी देखे जा सकते हैं। अधिक बढ़े हुए रोग वाली स्थितियों में, सीटी स्कैन चिकित्सकों की ट्यूमर का बेहतर अवलोकन प्राप्त करने और इलाज की योजना बनाने में मदद कर सकता है। सीटी स्कैन का उपयोग फेफड़ों या जिगर में कैंसर के फैलाव को देखने के लिए किया जा सकता है।
    • मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) रेडियो तरंगों और चुंबकों का उपयोग करते हुए गर्दन के विस्तृत रूप से वर्णित चित्र बनाती है। बढ़े हुए रोग में, कैंसर का फैलाव देखने के लिए जिगर और अक्षीय कंकाल के एमआरआई का उपयोग किया जा सकता है।
    • हड्डी का स्कैन, न्यूकलियर बोन सिन्टीग्राफ़ी भी कहा जाता है, हड्डियों के चित्र लेने के लिए एक विशेष स्कैनर का उपयोग करता है। इस जांच में, रोगी को एक कम मात्रा में रेडियोधर्मी पदार्थ, या ट्रेसर का इंजेक्शन दिया जाता है जो पूरे शरीर में खून में संचारित होता है। हड्डियों में ट्रेसर अवशोषित हो जाने के बाद, स्कैनर छवियां बनाने के लिए रेडिएशन का पता लगाता है। ट्रेसर हड्डियों में उन स्थानों को उजागर करता है जहां कोशिकाएं तेजी से विभाजित होती हैं और यह उन भागों को दिखा सकता है जहां कैंसर फैला हुआ है।
  • कोशिकाओं में कैंसर के संकेतों की जांच करने और शरीरकोष विज्ञान के बारे में और अधिक जानने के लिए ट्यूमर के कुछ ऊतक की बायोप्सी (टुकड़ा निकालना)। अल्ट्रासाउंड निर्देशित पतली सुई के द्वारा नमूना निकालने की प्रक्रिया से चिकित्सक एक पतली सुई का उपयोग कर उसे त्वचा में डालकर थायराइड ऊतक का एक नमूना लेते हैं। उसके बाद एक रोगविज्ञानी यह देखने के लिए कि क्या उसमें कैंसर कोशिकाएं हैं, ऊतक के नमूनों को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर उनकी जांच करता है। माइक्रोस्कोप में कोशिकाएं जिस प्रकार की दिखाई देती हैं वह रोग की पहचान करने में महत्वपूर्ण होता है।

मेडुल्लारी थायराइड कैंसर के स्तर का पता लगाना

मेडुल्लारी थायराइड कैंसर का स्तर या रोग की अधिकता, ट्यूमर के आकार और इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैंसर लसिका ग्रंथियों या शरीर के अन्य भागों तक फैला है या नहीं।

स्तर बीमारी की अधिकता
स्तर 1 ट्यूमर थायराइड में सर्वत्र या सीमित रूप से 2 सेंटीमीटर का या उससे छोटा होता है। इसमें कैंसर का फैलना नहीं होता।
स्तर 2 ट्यूमर सर्वत्र 2 सेंटीमीटर से बड़ा होता है। यह मुख्य रूप से थायराइड तक सीमित होता है जो लसिका ग्रंथियों और अन्य भागों तक नहीं फैलता।
स्तर 3 ट्यूमर थायराइड ग्रंथि के बाहर की ओर से थोड़ा बढ़ा हुआ हो सकता है और कैंसर गर्दन की लसिका ग्रंथियों के आसपास फैला हुआ होता है।
स्तर 4 इसमें मध्यम या उन्नत बीमारी के प्रमाण मिलते हैं। ट्यूमर थायराइड के बाहर अन्य ऊतकों में फैला हुआ होता है; क्षेत्रीय लसिका ग्रंथियों तक फैला हुआ होता है; और/या ट्यूमर शरीर के दूरस्थ भागों में फैल चुका होता है।

मेडुल्लारी थायराइड कैंसर के लिए पूर्वानुमान

जिन बच्चों में एमटीसी होने की प्रवृत्ति पहले से ज्ञात होती है, उनमें प्रमुख उद्देश्य एमटीसी के विकसित होने से पहले, और विशेष रूप से एमटीसी के दूरस्थ प्रसार से पहले, थायराइड को सफलतापूर्वक निकालने की योजना बनाना होता है। पूर्वानुमान का संबंध बीमारी की अधिकता (स्तर) से है।

रोग के पूर्वानुमान को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रोग की पहचान करने के समय रोग का स्तर।
  • आरंभिक सर्जरी की सीमा।
  • बीमारी फेफड़े या हड्डियों जैसे अन्य भागों तक फैली है या नहीं।
  • अन्य कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाले वंशाणु उत्परिवर्तन या आनुवंशिक कारक।
  • सर्जरी के बाद कैल्सिटोनिन स्तर

मेडुल्लारी थायराइड कैंसर का इलाज

मेडुल्लारी थायराइड कैंसर (एमटीसी) के आकलन और इलाज के लिए एक बहुविषयक टीम की आवश्यकता होती है। देखभाल के निर्णय सतत बीमारी और अवांछित इलाज प्रभावों के जोखिम को कम करते हुए उत्तरजीविता पर केंद्रित होते हैं। रोग की पुनरावृत्ति के जोखिम और अन्य कारणों की वजह से (जैसे कि, हार्मोन फ़ंक्शन, द्वितीयक कैंसर, आनुवंशिक प्रवृत्ति), सभी रोगियों के लिए निरंतर फॉलो-अप की आवश्यकता होती है। थायराइड ग्रंथि को निकालने के लिए संपूर्ण थायराइड की सर्जरी या कुल थायराइड की सर्जरी एमटीसी का अनुशंसित इलाज है। डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर से भिन्न, मेडुल्लारी थायराइड कैंसर आयोडीन का अवशोषण नहीं करता। इसलिए, इमेजिंग के लिए और एमटीसी के इलाज के लिए रेडियोधर्मी आयोडीन का उपयोग नहीं किया जाता। थायराइड निकालने की सर्जरी के बाद, रोगियों को आजीवन थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट दवा (लेवोथायरोक्सिन) की आवश्यकता होती है। टीएसएच को मॉनिटर किया जाता है और उसकी मात्रा को सामान्य सीमा में बनाए रखा जाता है। मेडुल्लारी थायराइड कैंसर में टीएसएच सप्रेशन की आवश्यकता नहीं होती।

  1. थायराइड ग्रंथि को निकालने (थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी) के लिए सर्जरी मेडुल्लारी थायराइड कैंसर का प्रमुख इलाज है। संपूर्ण थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी की सलाह दी जाती है। थायराइड को पूरी तरह से निकालना कैंसर के फैलाव या सतत रोग के जोखिम को कम करने में मदद करता है। रोग के दुबारा होने के जोखिम को कम करने हेतु लसिका ग्रंथियों और अन्य ऊतकों को निकालने के लिए गर्दन का विच्छेदन भी किया जा सकता है। थायराइड कैंसर की सर्जरी में अनुभव प्राप्त सर्जन सहित एक बहुविषयक बाल चिकित्सा टीम द्वारा मूल्यांकन और देखभाल करना महत्वपूर्ण होता है।

    एमईएन सिंड्रोम के लिए निवारक सर्जरी
    एमटीसी के इलाज का सबसे अच्छा तरीका इसे होने से रोकना है। ज्ञात आनुवंशिक उत्परिवर्तनों वाले बच्चों के लिए रोग निरोधक थायराइड सर्जरी करवाने की सलाह दी जाती है। इसका मतलब यह हुआ कि कैंसर होने का उच्च जोखिम होने के कारण थायराइड ग्रंथि को कैंसर का पता लगने से पहले ही सर्जरी करके निकाल दिया जाता है। एमईएन2A उत्परिवर्तन वाले बच्चों के लिए, 5 वर्ष की आयु से पहले रोग निरोधक थायराइड सर्जरी करवाने की सलाह दी जाती है। एमईएन2B उत्परिवर्तन वाले बच्चों में रोग निरोधक थायराइड सर्जरी 1 वर्ष की आयु से पहले की जानी चाहिए। एमईएन2B उत्परिवर्तन वाले रोगियों में एमटीसी समय से पूर्व शुरू हो जाता है और बहुत आक्रामक होता है।

    थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी एक ऐसे अनुभवी सर्जन द्वारा की जानी चाहिए जो नियमित रूप से इन प्रक्रियाओं को बाल रोगियों पर करता है। इलाज संबंधित दिशा-निर्देशों में यह अनुशंसा की जाती है कि सर्जरी एक ऐसे अधिक सर्जरी करने वाले थायराइड सर्जन द्वारा की जाए जो प्रति वर्ष कम से कम 30 समान सर्जरी प्रक्रियाएं करता है। इससे सर्जिकल जटिलताओं का जोखिम कम होता है। सर्जरी के जोखिमों में गर्दन क्षेत्र की संरचनाओं की क्षति शामिल है जैसे नसें और पैराथाइराइड ग्रंथियां।

    थायराइड कैंसर में लसिका ग्रंथियों को सर्जरी करके निकालना

    गर्दन में मौजूद लसिका ग्रंथियों को सर्जरी से निकालने की प्रक्रिया को गर्दन का विच्छेदन कहते हैं। मध्यवर्ती गर्दन का विच्छेदन आमतौर पर तब किया जाता है जब प्राथमिक थायराइड टयूमर का आकार 4 सेंटीमीटर से बड़ा होता है या जब ट्यूमर थायराइड ग्रंथि (थायराइड कैप्सूल) को आच्छादित करने वाले ऊतक के बाहर तक फैल चुका होता है।

    पार्श्विक गर्दन के विच्छेदन ज़्यादातर तब किए जाते हैं जब थायराइड कैंसर गर्दन में मौजूद लसिका ग्रंथियों तक फैल चुका होता है\ गर्दन के दोनों प्रकार के विच्छेदनों में उन लसिका ग्रंथियों को निकालना शामिल होता है जिनकी थायराइड ग्रंथि के संपर्क में आने की सबसे अधिक संभावना होती है और जिनमें वे कैंसर कोशिकाएं होने की संभावना सबसे अधिक होती है जो फैल चुकी हैं।

    सर्जरी के जोखिम

    प्रत्येक व्यक्ति में 4 पैराथाइराइड ग्रंथियां होती हैं, जो थायराइड के पीछे स्थित छोटी-छोटी संरचनाएं होती हैं और जो शरीर में कैल्शियम के सामान्य स्तरों को बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होती हैं। यहां तक कि सर्जिकल क्षति न होने पर भी ये पैराथाइराइड ग्रंथियां अक्सर थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी के बाद "अचेत" हो जाती हैं; प्रभावित रोगी हाथ, पैर और चेहरे की मांसपेशियों में ऐंठन, सुन्नपन और झुनझुनी सहित कैल्शियम की कमी (या हाइपोकैल्सीमिया) के लक्षणों का अनुभव करते हैं। इलाज के लिए, इस अवस्था (ट्रान्ज़िएंट पोस्ट-सर्जिकल हाइपो-पैराथाइराइडिज़्म) का समाधान होने तक अतिप्रभावशाली प्रकार के विटामिन डी (कैल्सिट्रीओल) और कैल्शियम सप्लीमेंट की आवश्यकता होती है। जब पैराथाइराइड ग्रंथियों को निकाल दिया जाता है या वे स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो हाइपो-पैराथाइराइडिज़्म स्थायी बन जाता है और इसके लिए आजीवन इलाज की आवश्यकता होती है।

    थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी के बाद नसों को क्षति पहुँचना

    थायराइड सर्जरी का एक अन्य जोखिम रेकररंट लरयंजील नर्व को चोट पहुँचना है। यह नस वाक्‌ तंतुओं को हिलाने और उच्चारण क्रिया को करने में मदद करती है। कभी-कभी, रेकररंट लरयंजील नर्व को ट्यूमर होने की वजह से निकालना पड़ सकता है।

    सर्जरी से पहले, ओटोलैरिंगोलॉजिस्ट आमतौर पर वाक्‌ तंतु क्रिया की जांच करने के लिए कार्यालय में एक “स्कोप” परीक्षण करते हैं। इस प्रक्रिया में वाक्‌ तंतुओं को देखने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे ठीक से काम कर रही हैं, नाक के जरिए एक लचीला कैमरा डाला जाता है। वाक्‌ तंतु फ़ंक्शन का आकलन करने के लिए सर्जरी के पश्चात् प्रक्रिया को दोहराया जाता है।

    सर्जरी के दौरान नस को पहुँचने वाली क्षति का जोखिम कम करने के लिए, एक विशेष एंडोट्रेकियल ट्यूब (श्वसन ट्यूब) का उपयोग किया जा सकता है। इस श्वसन ट्यूब में एक इलेक्ट्रोड होता है जो सर्जरी के दौरान नसों का पता लगाता है और उन्हें मॉनिटर करता है।

    यदि सर्जरी के दौरान वाक्‌ तंतु क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो यह अक्सर अस्थायी होता है। हालांकि, इसे ठीक होने में डेढ़ वर्ष तक लग सकता है। यदि रोगी की आवाज़ में बदलाव आ जाता है या उसे सांस लेने अथवा निगलने में कठिनाई होती है, तो उन क्रियाओं को सुधारने के लिए वाक्‌ तंतुओं को एक अस्थायी सामग्री के साथ इंजेक्ट किया जा सकता है। यदि नस ठीक नहीं हो पाती तो फिर से तंत्रिका वितरण प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है। यह प्रक्रिया प्रभावित वाक्‌ तंतु की क्रिया को सुधारने के लिए कार्य नहीं कर रही रेकररंट लरयंजील नर्व को कार्य कर रही नस के साथ को जोड़ती है।

    थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी के कारण होने वाली ये तंत्रिका जटिलताएं बहुत कम ही होती हैं और 1.4% - 14% की दर से होती हैं। सर्जन जितना अधिक अनुभवी होता है, जटिलताओं का जोखिम उतना ही कम होता है।

  2. थायराइड कैंसर के इलाज में लक्षित इलाजों का अध्ययन किया जा रहा है। ये दवाएं कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के लिए उनके विशेष लक्ष्य क्षेत्रों पर कार्य करती हैं। कुछ रोगियों के लिए काइनेज़ इनहिबिटर उपयोगी हो सकते हैं।

    उन्नत स्तर रोग वाले या रोग दुबारा होने वाले रोगी बीमारी के परीक्षण में भाग लेने पर विचार कर सकते हैं।

मेडुल्लारी थायराइड कैंसर के बाद जीवन

रोग के दुबारा होने और फॉलो-अप देखभाल के लिए निगरानी करना

रोगियों को थायराइड कैंसर के इलाज के बाद एक अंतःविषय चिकित्सीय टीम द्वारा आजीवन निगरानी और फॉलो-अप देखभाल की आवश्यकता होती है। जांचों की आवृत्ति और प्रकारों के लिए विशेष सुझाव, रोगी की ज़रूरतों और थायराइड कैंसर के प्रकार व स्तर के अनुसार अलग-अलग होते हैं। विचार करने योग्य अतिरिक्त बातों में थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट उपचार के पालन के लिए सहायता शामिल है।

निरंतर निगरानी में शारीरिक जांचें, कैल्सिटोनिन स्तरों का मापन और गर्दन का अल्ट्रासाउंड शामिल है। ज्ञात आनुवंशिक उत्परिवर्तनों से संबंधित अन्य कैंसरों के संकेतों के लिए भी रोगियों की जांच की जानी चाहिए।

दीर्घकालिक देखभाल के प्रमुख पहलू:

  • नियमित शारीरिक जांचें
  • गर्दन की अल्ट्रासाउंड इमेजिंग
  • थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट (लेवोथायरोक्सिन)
  • टीएसएच की निगरानी करना; उसकी मात्रा को सामान्य सीमाओं के अंतर्गत बनाए रखना
  • कैल्सिटोनिन और कार्सिनो एम्ब्रायोनिक एंटीजन (सीईए) का मापन

थायराइड और गर्दन की सर्जरी के बाद देखभाल

रोगियों को इलाज और उत्तरजीविता के दौरान मनोसामाजिक सहायता से लाभ मिल सकता है। मनोविज्ञान, बाल जीवन, सामाजिक कार्य और अन्य विषयों का प्रतिनिधित्व करने वाले देखभाल टीम के सदस्य, रोगियों को जीवन शैली को प्रभावित करने वाले इलाजों के अनुरूप ढलने और उनका पालन करने में सहायता कर सकते हैं। संभावित समस्याओं में दैनिक रूप से दवा का उपयोग करने के प्रति खुद को ढालना, सर्जरी से पड़े घाव के निशानों को लेकर शरीर की छवि से संबंधित समस्याएं और अन्य समायोजन आवश्यकताएं शामिल हैं।

रोगियों की गर्दन की गतिशीलता और उसे हिलाने के विभिन्न स्तरों में सहायता करने के लिए सर्जरी के बाद उन्हें शारीरिक चिकित्सा की भी ज़रूरत पड़ सकती है।

कैंसर के बाद स्वास्थ्य

सामान्य स्वास्थ्य और बीमारी की रोकथाम के लिए, कैंसर से बचे सभी लोगों को स्वस्थ जीवन शैली और खान-पान की आदतें अपनानी चाहिए, साथ ही प्राथमिक चिकित्सक द्वारा कम से कम हर वर्ष नियमित रूप से शारीरिक परीक्षण और जांचें भी करवाते रहना चाहिए।


समीक्षा की गई: जून 2018