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सब्क्यूटेनियस पोर्ट (त्वचा के नीचे पोर्ट)

सब्क्यूटेनियस पोर्ट क्या होता है?

एक सब्क्यूटेनियस पोर्ट एक केंद्रीय शिरापरक कैथेटर होता है, जो कि पूरी तरह से त्वचा के नीचे स्थित होता है। इस पोर्ट के ज़रिए एक विशेष सुई की मदद से, जिसे ह्यूबर सुई कहा जाता है, दवाई दी जाती है। सुई लगाने से पहले उस स्थान पर सुन्न करने वाली क्रीम का उपयोग किया जा सकता है। इस उपकरण को पोर्ट-ओ-कैथ, इम्प्लांटेबल पोर्ट या सब्क्यूटेनियस इन्फ़्यूज़ापोर्ट भी कहा जाता है।

यह पोर्ट बिल्कुल त्वचा के नीचे, आमतौर पर सीने में स्थित होता है। यह एक छोटी डिस्क होती है और इसका केंद्र उभरा हुआ होता है। कैथेटर को पोर्ट के आधार से जोड़ा जाता है और नसों तक ले जाया जाता है। डिस्क का केंद्र, जिसे सेप्टम कहा जाता है, रबर से बना हुआ उभरा हुआ हिस्सा होता है। दवाएं या अन्य द्रवों को सेप्टम में डाला जाता है और वह कैथेटर से होते हुए नसों में जाते हैं। इस पोर्ट के 1 या 2 एक्सेस पॉइंट हो सकते हैं (सिंगल ल्यूमेन या डबल ल्यूमेन)।

इस उदाहरण में एक बच्चा दिखाया गया है जिसकी सबक्लेवियन नस में एक पोर्ट लगा हुआ है। पोर्ट के हिस्सों पर लेबल लगा होता है: कैथेटर, सेप्टम, डिस्क और ह्यूबर सुई। पास से दिखाया गया है कि ह्यूबर सुई को पोर्ट में डाला जा रहा है। ह्यूबर सुइयों की मदद से दवाई को सेप्टम के ज़रिए अंदर डाला जाता है।

एक सब्क्यूटेनियस पोर्ट एक केंद्रीय शिरापरक कैथेटर होता है जो कि पूरी तरह से त्वचा के नीचे स्थित होता है। सब्क्यूटेनियस पोर्ट को पोर्ट-ओ-कैथ, इम्प्लांटेबल पोर्ट या सब्क्यूटेनियस इन्फ़्यूज़ापोर्ट भी कहा जाता है। इस पोर्ट के ज़रिए एक तरह की सुई की मदद से जिसे ह्यूबर सुई कहा जाता है, दवाई दी जाती है।

सब्क्यूटेनियस पोर्ट के लाभ

  • यह पोर्ट दवाई देने, द्रव पदार्थ देने, भोजन देने, रक्त उत्पाद और खून के नमूने लेने के लिए बार बार सुई लगाने की आवश्यकता को कम करता है। हालांकि, इस उपकरण तक पहुंच प्राप्त करने के लिए एक बार सुई लगानी पड़ती है।
  • पोर्ट बहुत लंबे समय तक शरीर के अंदर रह सकता है।
  • कुछ दवाओं से रक्त वाहिकाओं को नुकसान हो सकता है। इसलिए पोर्ट की नली बड़ी नस में रखा जाता है जहाँ उच्च रक्त प्रवाह होता है ताकि नस को नुकसान न पहुँचे।
  • पोर्ट के कुछ प्रकारों से, एक ही समय पर एक से अधिक प्रकार की दवाई या सॉल्यूशन दिए जा सकते हैं।
  • इस पोर्ट का रखरखाव व इस पर ध्यान देने की ज़रूरत कम होती है क्योंकि यह पूरी तरह से त्वचा के अंदर होता है।
  • अन्य वेनस कैथेटर की तुलना में इसके लंबे समय तक लगे रहने से संक्रमण होने का जोखिम कम होता है।
  • अगर स्वास्थ्य ठीक हो तो पोर्ट लगाकर बच्चे नहा सकते हैं और तैराकी भी कर सकते हैं।
बचपन में होने वाले कैंसर के इलाज में अक्सर अंदर डाले जाने वाले सिंगल-लुमेन टनल वाले सब्क्यूटेनियस पोर्ट का चित्र।

एक सब्क्यूटेनियस पोर्ट एक केंद्रीय शिरापरक कैथेटर होता है जो कि पूरी तरह से त्वचा के नीचे स्थित होता है। इस पोर्ट के ज़रिए ह्यूबर सुई नाम की एक विशेष सुई का इस्तेमाल करके दवाई दी जाती है।

कैंसर के इलाज के दौरान सब्क्यूटेनियस पोर्ट को लगाना एक आम प्रक्रिया है और इससे रोगी और उसके परिवार को महत्वपूर्ण लाभ मिलता है। हालांकि, एनेस्थीसिया और सर्जरी में हमेशा जोखिम बना रहता है। सुई डालने के दौरान होने वाले मुख्य जोखिमों में खून का बहना, फेफड़ों या रक्त वाहिकाओं में छेद होना, खून का थक्का जमना, दिल की धड़कन का अनियमित होना, तंत्रिकाओं को चोट पहुंचना और संक्रमण शामिल हैं। लाइन प्लेसमेंट के बाद, खून का थक्का जमना, कैथेटर का अपने जगह से हिलना और संक्रमण सबसे आम जटिलताएं हैं। पोर्ट को निकालने के लिए सर्जरी की भी आवश्यकता होती है। गंभीर समस्याएं बहुत कम ही होती हैं, लेकिन होती हैं। देखभाल टीम से सवाल ज़रूर पूछें और उनके द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का पालन करें।

इम्प्लांटेबल पोर्ट लगाना

पोर्ट को लगाने के लिए बच्चों को एनेस्थीसिया दिया जाएगा। उन्हें प्रक्रिया के दौरान कोई दर्द नहीं होगा न ही वे पूरे होश में रहेंगे। प्रक्रिया के पहले रोगियों को भोजन और पानी कम करने के लिए एनपीओ निर्देश दिए जाएंगे। इन दिशानिर्देशों का पालन करना बहुत ज़रूरी है। एनेस्थीसिया और रिकवरी के समय को मिलाकर प्रक्रिया में लगभग कुल 1-2 घंटे लगते हैं।

  • प्रक्रिया होने के पहले, रोगियों के खून की जांच की जाएगी और उनका शारीरिक जांच होगी। देखभाल टीम के सदस्य कागज़ी कार्रवाई पूरी करने और सवालों के जवाब देने के लिए परिवार से मिलेंगे।
  • प्रक्रिया के लिए रोगी को एक ऑपरेशन करने के कमरे में ले जाया जाता है। चिकित्सा केंद्र की नीतियों के आधार पर, एक अभिभावक पोर्ट को लगाने के लिए ले जाने के समय तक रोगी के साथ रह सकता है।
  • सेंट्रल लाइन प्लेसमेंट के लिए बच्चों को सामान्य एनेस्थीसिया दिया जाता है। संपूर्ण प्रक्रिया और रिकवरी के दौरान हृदय की गति और रक्तचाप को मॉनिटर किया जाता है।
  • उस जगह की त्वचा को साफ़ किया जाएगा और रोगी को एक कपड़े से ढंक दिया जाएगा ताकि उस जगह को साफ़ रखा जा सके और संक्रमण को रोकने में मदद मिले।
  • नस का पता अल्ट्रासाउंड इमेजिंग या एनाटोमिकल लैडमार्क्स का उपयोग करके लगाया जाएगा। कॉलरबोन या गर्दन के पास की त्वचा में एक बहुत ही छोटा सा चीरा लगाया जाएगा।
  • छाती के ऊपरी हिस्से में एक इंच जितना लंबा दूसरा चीरा लगाया जाएगा। पोर्ट के लिए चिकित्सक त्वचा के अंदर एक जगह या पॉकेट बनाएगा। नली के लिए एक छोटी टनल (सुरंग) बनाई जाएगी।
  • नली को पोर्ट से और नसों के माध्यम से एक्स-रे की सहायता से अंदर डाला जाएगा, जब तक कि टिप दिल के पास अपने उचित स्थान तक नहीं पहुंच जाती।
  • पोर्ट त्वचा के अंदर अपनी जगह पर ही रहेगा और चीरे को टांके लगाकर बंद कर दिया जाएगा।
  • प्रक्रिया के दौरान एक्स-रे की मदद से कैथेटर और पोर्ट की स्थिति जांची जाएगी और सुनिश्चित किया जाएगा कि फेफड़े को चोट (न्यूमोथोरेक्स) नहीं पहुंचा। पोर्ट सही तरीके से काम कर रहा है इसे सुनिश्चित करने के लिए उसका परीक्षण किया जाएगा।
  • रोगी को एक रिकवरी कमरे में ले जाया जाएगा। इस समय के दौरान रोगियों पर नज़र रखी जाएगी। पोर्ट लगाने पर रिकवरी होने में आमतौर पर करीब एक घंटा लगता है। अगर केवल पोर्ट लगाना ही एकमात्र प्रक्रिया होती है, तो रोगी रिकवरी के बाद अस्पताल से जा सकते हैं। घर पर देखभाल के लिए एक नर्स जाती है।

सब्क्यूटेनियस पोर्ट के लिए देखभाल

एक नर्स परिवार के लोगों को सब्क्यूटेनियस पोर्ट के लिए की जाने वाली देखभाल के बारे में जानकारी देगी। पोर्ट में प्रत्येक 4 सप्ताह हेपरिन डाल कर साफ़ किया जाना चाहिए। हेपरिन एक ऐसी दवा होती है जो खून का थक्का जमने से रोकती है ताकि नली खुली रहे। इलाज के दौरान, पोर्ट में एक खास सुई डाली जाती है और उस स्थान पर ड्रेसिंग की जाती है। प्रत्येक 7 दिनों में सुई बदलना आवश्यक है और ड्रेसिंग को साफ़ और सूखा रखना चाहिए। जब पोर्ट का उपयोग नहीं हो रहा है तो सुई को निकाल लिया जाता है और रोगी अपनी ज़रूरी दैनिक काम कर सकता है।

पोर्ट सही तरीके से काम करे इसके लिए परिवार के सदस्यों को कैसे देखभाल करनी है इसे वे जानेंगे और संक्रमण को रोकने में मदद करेंगे। इस फ़ोटो में, कैंसर के एक रोगी के पोर्ट को हेपरिन से साफ़ किया गया है।

पोर्ट सही तरीके से काम करे इसके लिए परिवार के सदस्यों को कैसे देखभाल करनी है इसे वे जानेंगे और संक्रमण को रोकने में मदद करेंगे।

क्या उम्मीद की जाती है

घाव का जल्दी से भरना

कुछ दिनों के लिए उस स्थान पर घाव रहेगा। जहां चीरा लगाया गया था वहां कुछ टांके लगाए जाएंगे। उस स्थान पर थोड़ी सूजन या घाव रह सकता है। 6 सप्ताह के लिए कोई मेहनत वाला काम न करें या जब तक चिकित्सक न सलाह दे, ऐसा कोई काम न करें।

दवाई लेना

जब ह्यूबर सुई का इस्तेमाल करके कैथेटर तक पहुंचा जाता है, तो वहां चुभेगा यानी के “पोक” लगेगा। सिरिंज या किसी आईवी बैग के ज़रिए दवाई दी जा सकती है। अपनी दवाएं लेते समय अगर आपको कोई दर्द या परेशानी होती है तो नर्स को बताएं।

सामान्य देखभाल

लाइन सही तरीके से काम करें और संक्रमण होने न पाए इसके लिए देखभाल संबंधी सभी निर्देशों का पालन करें। खेल कूद जैसी गतिविधियां न करें जिससे कि प्रत्यारोपण की गई कैथेटर की जगह पर प्रभाव पड़े।

सेंट्रल लाइन असोसिएटे़ड ब्लड स्ट्रीम इन्फेक्शन (क्लाब्सी) जानलेवा हो सकता है। दर्द होना, लाल होना, सूजन आना या बुखार आने जैसे किसी भी संक्रमण के लक्षण होने पर अपने चिकित्सक को कॉल करें।


समीक्षा की गई: जून 2018