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Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

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बचपन में होने वाले कैंसर के महिला मरीजों में प्रजनन क्षमता की रक्षा करना

बचपन में होने वाले कैंसर के कुछ इलाज एक महिला मरीज की भविष्य में बच्चे पैदा करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।

कैंसर रोग की पहचान करने के बाद, मरीजों या माता-पिता के दिमाग में बच्चे पैदा होने की चिंता शायद ही सबसे ऊपर हो। लेकिन थेरेपी शुरू होने से पहले, परिवारों को कैंसर विशेषज्ञ के साथ मरीज की प्रजनन क्षमता पर इलाज के प्रभाव के बारे में चर्चा करनी चाहिए। बचपन में होने वाले कैंसर केंद्र में प्रजनन विशेषज्ञ भी होते हैं, जिनसे परिवार सलाह ले सकते हैं।

प्रजनन क्षमता किसी व्यक्ति की प्रजनन की क्षमता को दर्शाती है: पुरुष की पिता बनने की क्षमता और महिला के गर्भवती होने की क्षमता को बताती है।

महिला प्रजनन प्रणाली

महिलाओं में दो अंडाशय होते हैं। ये महिला के श्रोणि के क्षेत्र में स्थित होते हैं। यौवन के दौरान, मस्तिष्क में पीयूष ग्रंथि अंडाशय को अधिक एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन बनाने के लिए संकेत देती है। प्रजनन प्रणाली के कार्य करने के लिए ये हार्मोन ज़रूरी होते हैं।

एक लड़की उन सभी अंडों के साथ पैदा होती है जो उसके पास कभी भी होंगे। महीने में एक बार, अंडाशय आमतौर पर एक अंडा छोड़ते हैं। यदि पुरुष के शुक्राणु अंडे का गर्भाधान करते हैं, तो महिला गर्भवती हो जाती है।

इस चित्रण में एक किशोरावस्था वाली लड़की को उसके गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय, सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) और योनि को दर्शाया गया है। मुख्य चित्र के दाईं ओर, एक युवती के शरीर के छायाचित्र पर एंडोक्राइन तंत्र के अंगों को भी दर्शाया गया है: पीनियल ग्रंथि, हाइपोथेलेमस, पीयूष ग्रंथि, थायराइड और पैराथायराइड, बाल्यग्रन्थि, अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड) और पाचक-ग्रंथि।

महिला की प्रजनन प्रणाली के अंग मिलकर काम करते हैं, ताकि महिला गर्भवती हो सके, डिलिवरी का समय आने तक विकसित हो रहे मानव को रख सके और उसे जन्म दे सके।

कैंसर का इलाज महिलाओं में प्रजनन क्षमता को कैसे प्रभावित करता है

जो इलाज मरीज के श्रोणि के क्षेत्र, प्रजनन अंगों और पीयूष ग्रंथि के काम को प्रभावित करता है, वह मरीज की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इलाज से अंडों की संख्या कम हो सकती है या अंडों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

  1. अल्कायलेटिंग एजेंट्स और कुछ अन्य कैंसर विरोधी दवाइओं के रूप में जानी जाने वाली दवाओं से प्रजनन क्षमता में समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

    अल्कायलेटिंग दवाएं
    भारी धातु की दवाएं
    • ब्यूसल्फन
    • कर्मुस्टाइन (बीसीएनयू)
    • क्लोरैम्बुसिल
    • साइक्लोफॉस्फोमाइड (Cytoxan®)
    • इफोस्फामाइड
    • लूमोस्टाइन (सीसीएनयू)
    • मेक्लोरोथामाइन (नाइट्रोजन मस्टर्ड)
    • मेल्फलान
    • प्रोकार्बाज़िन
    • थाइओटेपा
    नॉन-क्लासिकल अल्कायलेटर्स
    • डकारबाज़िन (डीटीआईसी)
    • टेमोज़ोलोमाइड
  2. श्रोणि के क्षेत्र में रेडिएशन थेरेपी का प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि रेडिएशन आसपास के प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। यह इलाज महिला के अंडाशय को प्रभावित कर सकता है और उनके अंडों की संख्या और गुणवत्ता को कम कर सकता है। कुछ मामलों में रेडिएशन गर्भाशय को प्रभावित कर सकता है और गर्भावस्था को बनाए रखने की उसकी क्षमता को कम कर सकता है।

    सर्जिकल प्रक्रियाएं प्रजनन अंगों को प्रभावित करती हैं और ये प्रजनन क्षमता पर प्रभाव डाल सकती हैं।

    मस्तिष्क के पीयूष ग्रंथि वाले क्षेत्र का इलाज का प्रभाव प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है, क्योंकि यह हार्मोन पैदा करने को भी प्रभावित कर सकता है।

इलाज शुरू होने से पहले ये काम करें

इलाज शुरू होने से पहले, माता-पिता और मरीज यदि पर्याप्त बुजुर्ग हैं, तो मरीज की बच्चे पैदा करने की क्षमता पर कैंसर के इलाज के प्रभाव के बारे में चिकित्सीय टीम से बात करनी चाहिए।

  • यदि इलाज प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है, तो चिकित्सीय टीम से पूछें कि प्रजनन क्षमता की रक्षा के लिए क्या किया जा सकता है।
  • इलाज के शुल्क का और यह बीमा में कवर है या नहीं, इस बारे में पता लगाएं।

प्रक्रियाएं, जिनसे प्रजनन क्षमता को संरक्षित किया जा सकता है

  1. गर्भाशय के ऊतक फ्रीज़ करना

    गर्भाशय के ऊतक फ्रीज़ करने की प्रक्रिया (क्रायोप्रिज़र्वेशन) में अंडाशय से ऊतक को निकाला जाता है। ऊतक को स्लाइस में काटकर फ्रीज़ किया जाता है। कैंसर के इलाज के बाद, चिकित्सक ऊतक को पिघलाकर उसका एक टुकड़ा वापस शरीर में डाल सकते हैं। ऊतक में कैंसर कोशिकाएं होने की संभावना होती है। प्रत्यारोपित करने के बाद कैंसर कोशिकाएं फैलने का जोखिम हो सकता है। इस इलाज को प्रायोगिक माना जाता है।

  2. अंडे (अंडक) फ्रीज़ करना (क्रायोप्रिज़र्वेशन)

    अंडा फ्रीज़ करना (जिसे एग या ओओसाइट क्रायोप्रिज़र्वेशन भी कहा जाता है) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें अंडे को अंडाशय से निकालकर फ्रीज़ किया जाता है। अंडाशय को अंडे देने के लिए उत्तेजित करने के लिए मरीज को हार्मोन मिलता है। अंडे निकाल दिए जाते हैं। बाद में अंडे को पिघलाया जा सकता है, भ्रूण बनाने के लिए लैब में उसे शुक्राणु के साथ गर्भाधान किया जाता है और उसे महिला के गर्भाशय में डाला जाता है। यह केवल उन लड़कियों के लिए एक विकल्प है, जिनका माहवारी चक्र शुरू हो गया है।

    यह विकल्प हमेशा संभव नहीं है, क्योंकि अंडों की उत्पत्ति के लिए कैंसर के इलाज में कुछ हफ़्तों की देरी करनी पड़ती है। यह ट्यूमर वाले उन मरीजों के लिए भी जोखिम हो सकता है, जो हार्मोन को लेकर संवेदनशील होते हैं।

    भ्रूण को फ्रीज़ करना (क्रायोप्रिज़र्वेशन)

    भ्रूण को फ्रीज़ करना (क्रायोप्रिज़र्वेशन), प्रजनन क्षमता को संरक्षित करने का एक और तरीका है। हालाँकि, यह विकल्प केवल उन महिलाओं के लिए उपलब्ध है, जो युवावस्था के दौर से गुज़र चुकी हैं। इसके अलावा, इसे स्पर्म डोनर (शुक्राणु दाता) की आवश्यकता होती है।

    इस विकल्प के लिए, महिला इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) नाम की एक प्रक्रिया से गुज़रती है। महिला को अंडे को पैदा करने हेतु अंडाशय को उत्तेजित करने के लिए हार्मोन मिलता है। अंडे निकाल दिए जाते हैं। शुक्राणु और अंडों को मिलाकर भ्रूण बनाया जाता है। इन्हें फ्रीज़ किया जाता है। जीवन में बाद में, महिलाओं के गर्भाशय (कोख) में एक या दो भ्रूण को चिकित्सा की मदद से या बगैर चिकित्सा के डाला जा सकता है।

    अंडे को फ्रीज़ करने की तरह ही, इस विकल्प में इलाज में देरी की ज़रूरत होती है और इसमें हार्मोन का इस्तेमाल शामिल होता है।

    अंडाशय प्रतिस्थापन (ऑओफोरोपेक्सी)

    यह विकल्प आमतौर पर केवल तभी बताया जाता है, अगर मरीज का एक और ऑपरेशन हो रहा है, क्योंकि यह शरीर में काफ़ी अंदर तक किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, सर्जन रेडिएशन थेरेपी से प्रभावित होने वाले क्षेत्र से अंडाशय को दूर हटा देते हैं। लक्ष्य श्रोणि के भीतर अंडाशय को स्थानांतरित करना होता है, जहां वे अभी भी सुचारु रुप से काम कर सकते हैं लेकिन रेडिएशन के संपर्क में नहीं आ सकते हैं।
     

  3. अंडाशय की रक्षा करना

    जब मरीजों का रेडिएशन इलाज या इमेजिंग जांच होती है, जिसमें रेडिएशन शामिल होता है, तो चिकित्सीय टीम अंडाशय को क्षति से बचाने के लिए शरीर के बाहर सुरक्षात्मक आवरण रख सकती है। यह शील्ड अंडाशय को रेडिएशन से बचाती है, जबकि शरीर के अन्य भागों को रेडिएशन मिलता है।

इलाज शुरू होने से पहले पूछे जाने वाले प्रश्न

जब आपकी बेटी बहुत छोटी होती है, तो प्रजनन विकल्पों के बारे में चर्चा करना थोड़ा अजीब लग सकता है। लेकिन कई स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं का मानना है कि इलाज शुरू होने से पहले चर्चा करना सबसे अच्छा समय होता है।

इस तरह के सवाल पूछने पर विचार करें:

  • क्या इलाज से बांझपन का खतरा बढ़ सकता है या इससे बांझपन हो सकता है?
  • क्या अन्य सुझावित कैंसर के इलाज हैं, जिनसे प्रजनन की समस्याएं पैदा न हों?
  • आप मेरे लिए कौन से प्रजनन के संरक्षण का विकल्प देने की सलाह देंगे?
  • इस अस्पताल में प्रजनन के संरक्षण के लिए कौन से विकल्प उपलब्ध हैं? प्रजनन क्लिनिक में?
  • क्या आप प्रजनन विशेषज्ञ (जैसे कि प्रजनन संबंधी एंडोक्राइन विशेषज्ञ) की सलाह देंगे, जिससे मैं ज़्यादा सीखने के लिए बात कर सकूं?
  • क्या गर्भनिरोधक की भी सलाह दी जाती है?
  • इस बात की कितनी संभावनाएं हैं कि इलाज के बाद मेरी प्रजनन क्षमता वापस आ जाएगी?


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समीक्षा की गई: जून 2018