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Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

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नींद की बीमारी

कैंसर के मरीजों और उससे बचने वाले लोगों को नींद की समस्या होना सामान्य है। नींद आने में परेशानी होना, रात में जाग जाना, नींद में बैचेनी होना और दिन के समय नींद आना, ये सामान्य शिकायतें हैं। कई मरीजों को थकान होना और सीखने व याददाश्त से जुड़ी समस्याएं जैसे संबंधित दुष्प्रभाव भी होते हैं।

स्वास्थ्य और तंदरुस्ती के लिए पर्याप्त नींद लेना आवश्यक है। अच्छी नींद के बिना, दिन भर के काम करना मुश्किल हो जाता है। मरीजों को स्कूल या काम में समस्याएं आ सकती हैं। भावनात्मक या व्यवहार में बदलाव जैसे चिड़चिड़ापन, मिजाज़, अति सक्रियता या बात न मानना भी सामान्य है। 

कभी-कभी, नींद की आदतों को बेहतर बनाने के लिए कुछ कदम उठाकर नींद से जुड़ी समस्याओं का इलाज किया जा सकता है। कुछ मरीजों को नींद संबंधी विशिष्ट विकार के लिए इलाज की ज़रूरत हो सकती है।

अच्छी नींद लेने के लिए सुझाव जानें

सामान्य नींद की बीमारी कौन से हैं?

कैंसर से पीड़ित बच्चों और किशोर उम्र के बच्चों में अनींद, हाइपरसोम्निया (अधिक नींद), नींद रोग, नींद संबंधी अश्वसन और पैर हिलाने की बीमारी जैसे नींद संबंधी विशिष्ट बीमारी होने का जोखिम अधिक होता है।

नींद की बीमारी की पहचान कैसे करें?

नींद से जुड़ी समस्याओं का आंकलन करने और नींद संबंधी विशिष्ट विकारों की पहचान करने के लिए विभिन्न प्रकार की जांच की जाती है। इनमें शामिल है:

  • लक्षणों को जानने के लिए मरीज और परिवार से बातचीत या उनसे सवाल पूछना
  • चिकित्सकीय इतिहास और शारीरिक जांच
  • कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव के कारण नींद की समस्या हो रही है, यह जानने के लिए दवाइयों को जांचना
  • नींद और गतिविधि की डायरी
  • रक्त कोशिकाओं की संख्या, हार्मोन और अंग के काम करने में बदलाव की जांच करने के लिए खून की जांच
  • नींद की आदतें जांचने के लिए परीक्षण:

नींद का अध्ययन (पॉलीसोमनोग्राफ़ी)

पूरी रात की नींद का अध्ययन या पॉलीसोमनोग्राफ़ी, नींद के दौरान शरीर के विभिन्न कामों का आंकलन करती है। पूरी रात की नींद के दौरान मस्तिष्क की तरंगों, हलचल, हृदय गति, साँस लेना-छोड़ना और ऑक्सीजन स्तर को रिकॉर्ड करने के लिए विशेष मॉनिटर का इस्तेमाल किया जाता है। पॉलीसोमनोग्राफ़ी अक्सर नींद चिकित्सा केंद्र या अस्पताल में की जाती है। एक पोर्टेबल स्लीप मॉनिटर का इस्तेमाल करके घर पर कुछ उपाय किए जा सकते हैं।

मल्टीपल स्लीप लेटेंसी टेस्ट (एमएसएलटी)

मल्टीपल स्लीप लेटेंसी टेस्ट (एमएसएलटी) से यह पता चलता है कि मरीज को दिन में नींद आने में कितना समय लगता है। मरीज को आठ घंटे की अवधि में 4 या 5 बार झपकी लेने का अवसर दिया जाता है। एक अंधेरे, आरामदायक कमरे में परीक्षण किया जाता है और झपकी लेने समय निर्धारित किया जाता है। हर बार झपकी लेने पर, नींद आने में लगने वाले समय (स्लीप लेटेंसी) को रिकॉर्ड किया जाता है। उस समय की आयु के अनुसार सामान्य तौर पर कितना समय लगना चाहिए, उससे तुलना की जाती है। 

एक्टिग्राफ़ी

एक्टिग्राफ़ी से एक छोटे उपकरण (एक्टिग्राफ़) जिसे आमतौर पर कलाई या एड़ी पर बांधकर दिन भर की गतिविधि को मापा जाता है। व्यक्ति की गतिविधि और नींद के पैटर्न की जानकारी देने के लिए, उपकरण दिन और रात की पूरी गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। एक्टिग्राफ़ी का उपयोग अक्सर स्लीप लॉग जैसे अन्य उपायों के साथ किया जाता है। मेडिकल एक्टिग्राफ़ उपकरण अधिक सटीक होते हैं और अधिक विस्तार से जानकारी देते हैं। हालांकि नींद को ट्रैक करने के लिए अक्सर आम स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन वे सोने/जागने के पैटर्न के बारे में सटीक जानकारी नहीं देते हैं और मरीज की नींद के बारे में निर्णय लेने के लिए उनका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

नींद संबंधी विकारों के बारे में अधिक जानकारी के लिए संसाधन

नींद की बीमारी - नेशनल स्लीप फाउंडेशन

नींद की बीमारी- अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ स्लीप मेडिसिन


समीक्षा की गई: जून 2019