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डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर क्या होता है?

वयस्कों की तुलना में, थायराइड नॉड्यूल बच्चों और किशोरों में बहुत कम पाए जाते हैं। हालांकि, बचपन में होने वाले थायराइड नॉड्यूल के घातक होने की अधिक संभावना होती है। कुछ स्थितियों में, बच्चों में होने वाला थायराइड कैंसर रोग की पहचान करने के समय आसपास की लसिका ग्रंथियों और दूर के स्थानों (फेफड़े) ‌तक फैला हुआ होता है। इसकी फिर से होने की संभावना भी अधिक होती है। वयस्कों की तुलना में बच्चों में इसके फैलने की अधिक प्रवृत्ति होने के बावजूद, 95% से अधिक जीवित रहने की दर के साथ डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर का परिणाम बहुत बढ़िया है।

बच्चों में होने वाले अधिकांश थायराइड कैंसर डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर (डीटीसी) होते हैं, जो थायराइड ग्रंथि की फॉलिक्युलर या पुटक कोशिकाओं से उत्पन्न होते हैं। डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर दो प्रकार के होते हैं: पैपिलरी और फॉलिक्युलर। बच्चों में होने वाले लगभग 90% थायराइड कैंसर पैपिलरी थायराइड कैंसर होते हैं।

पैपिलरी थायराइड कैंसर अक्सर एक से अधिक नॉड्यूल के साथ उपस्थित हो सकता है और इसमें थायराइड के दोनों तरफ के भाग (द्विपक्षीय) शामिल होते हैं। बहुत सी स्थितियों में, यह रोग की पहचान करने के समय थायराइड के बाहर क्षेत्रीय (ग्रीवा या सर्वाइकल) लसिका ग्रंथियों तक फैल चुकी होती है। फॉलिक्युलर थायराइड कैंसर आमतौर पर गर्दन में ही स्थिर रहता है लेकिन इसकी फेफड़ों और हड्डियों में फैलने की संभावना अधिक होती है।

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कार्सिनोमा, आयोडीन-एविड होते हैं। इसका अर्थ है कि वे आयोडीन ग्रहण करते हैं। यह लक्षण रेडियोधर्मी आयोडीन से स्क्रीनिंग और इलाज करने के लिए ज़रूरी होता है।

विशिष्ट रूप से थायराइड ग्रंथि को दर्शाते हुए और लेबल किए हुए अंगों के लेओवर के साथ एक वयस्क महिला के शरीर का ग्राफ़िक।

थायराइड ग्रंथि गर्दन के सामने के भाग में गले के आधार पर स्थित एक तितली के आकार का अंग होता है। यह दोनों ओर के भागों में व्यवस्थित होता है, एक दाईं ओर और एक बाईं ओर।

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर के जोखिम कारक और कारण

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर ज़्यादातर बड़े बच्चों और किशोरों में होता है। युवा बच्चों की तुलना में किशोरावस्था के बच्चों में थायराइड कैंसर होने की संभावना 10 गुना अधिक होती है। ये कैंसर पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाए जाते हैं। कुछ आनुवंशिक कारकों से इसके होने का जोखिम बढ़ सकता है तथा थायराइड व अन्य कैंसरों के विकसित होने की प्रवृत्ति आगे परिवारों में जा सकती है। डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर से ग्रस्त बच्चों में अक्सर आरईटी वंशाणु का, वंशाणु पुनर्विन्यास होता है।

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर से जुड़े आनुवंशिक सिंड्रोम

आनुवंशिक सिंड्रोम
वंशाणु
पारिवारिक एडिनोमेटस पॉलीपोसिस (एफएपी)
एपीसी
पीटीईएन हमर्टोमा ट्यूमर सिंड्रोम
पीटीईएन
डाईसर1 सिंड्रोम
डाईसर1
कार्ने कॉम्प्लेक्स
पीआरकेएआर1A

आयनीकृत रेडिएशन

चिकित्सा इलाज के रूप में रेडिएशन द्वारा इलाज किए गए रोगियों में थायराइड कैंसर विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है। नाभिकीय आपदाओं से हुई रेडियोधर्मिता जैसी रेडिएशन के प्रति पर्यावरणीय प्रभावन से भी यह जोखिम बढ़ जाता है। रेडिएशन की उच्च खुराकें और प्रभावन के दौरान कम आयु, उच्च जोखिम से जुड़े हुए हैं।

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर के संकेत और लक्षण

थायराइड कैंसर का प्रमुख संकेत, थायराइड ग्रंथि में नॉड्यूल या गांठ का होना है। कभी-कभी, गर्दन में लसिका ग्रंथियां सूजी हुई दिखाई देंगी। बहुत ही कम स्थितियों में, इसके लक्षणों में सांस लेने से संबंधित समस्याएं, निगलने में कठिनाई या दर्द होना और गला बैठने जैसे लक्षण शामिल होते हैं।

हालांकि, अक्सर थायराइड कैंसर के कोई लक्षण उत्पन्न नहीं होते और यह एक नियमित जांच के भाग के रूप में पाया जा सकता है।

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर रोग की पहचान करना

  • स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक जांच से चिकित्सक को लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने में मदद मिलती है। पारिवारिक इतिहास यह पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण होता है कि क्या इसमें कोई वंशानुगत जोखिम हो सकता है। कुछ प्रकार के थायराइड कैंसर में, बच्चे और परिवार के लिए आनुवंशिक जांच करवाने और आनुवंशिक परामर्श लेने की सलाह दी जाती है। चिकित्सक कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले कुछ वंशाणु परिवर्तनों (उत्परिवर्तन) के लिए जांच करेंगे।
  • लैब अध्ययन खून में उन पदार्थों की जांच करेंगे जो थायराइड और ट्यूमर के बारे में जानकारी देते हैं। इन जांचों में निम्नलिखित के मात्राएं शामिल होती हैं:
    • थायराइड स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (टीएसएच), टी3 और फ़्री टी4 (थायरोक्सिन) सहित थायराइड फ़ंक्शन को दर्शाने वाले हार्मोन। आमतौर पर, थायराइड फंक्शन को मापने वाली खून का जांचें सामान्य होती हैं।
    • थायरोग्लोबुलिन (टीजी) सहित ट्यूमर मार्कर। थायरोग्लोबुलिन थायराइड ग्रंथि में बनने वाला एक प्रोटीन है। थायराइड ग्रंथि को निकालने (थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी) की सर्जरी के बाद, टीजी के असामान्य स्तर डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर (पैपिलरी और फॉलिक्युलर) की उपस्थिति या पुनरावृत्ति होने का संकेत देने में मदद कर सकते हैं।
  • ट्यूमर का पता लगाने के लिए, ट्यूमर कितना बड़ा है यह देखने के लिए और यह अन्य स्थानों तक फैला है या नहीं यह मालूम करने के लिए इमेजिंग जांचें।
    • अल्ट्रासाउंड शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की छवि बनाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है। गर्दन का अल्ट्रासाउंड मुख्य जांचों में से एक है जिसका उपयोग चिकित्सक यह देखने के लिए करते हैं कि क्या थायराइड ग्रंथि में कोई ट्यूमर है। असामान्य रूप से बढ़ी हुई लसिका ग्रंथियों की जांच करने के लिए गर्दन के दोनों ओर के भागों की इमेजिंग का उपयोग किया जाता है। थायराइड नॉड्यूल और गर्दन की लसिका ग्रंथियों का आकलन करने के लिए एक अनुभवी सोनोग्राफर के द्वारा किया गया उच्च गुणवत्ता का अल्ट्रासाउंड महत्वपूर्ण होता है। इस जानकारी का उपयोग रोग की पहचान करने और इलाज के अगले चरणों की योजना बनाने के लिए किया जाएगा।
    • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी स्कैन) शरीर के अंदर के अंगों और ऊतकों की अनुप्रस्थ परिच्छेदन (क्रॉस-सेक्शनल) छवियां बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करता है। इसमें मशीन एक बहुत ही विस्तृत छवि का निर्माण करने के लिए बहुत सी तस्वीरें लेती है। छवियां शरीर की विभिन्न “स्लाइस” की श्रृंखला के रूप में ली जाती हैं और उन्हें कंप्यूटर में सहेज लिया जाता है। इन स्लाइस या खंड से छोटे से छोटे ट्यूमर भी देखे जा सकते हैं। अधिक बढ़े हुए रोग वाली स्थितियों में, ट्यूमर का बेहतर अवलोकन प्राप्त करने और इलाज की योजना बनाने में चिकित्सकों की मदद करने के लिए सीटी स्कैन का उपयोग किया जा सकता है। फेफड़ों में कैंसर के फैलाव को देखने के लिए आरंभिक छाती के एक्स-रे या विशेष स्थितियों में छाती के सीटी स्कैन का उपयोग किया जा सकता है। अधिकतर समय, गर्दन और थायराइड का अल्ट्रासाउंड मुख्य इमेजिंग होती हैं जिनका उपयोग सर्जरी से पहले किया जाता है।
  • कोशिकाओं में कैंसर के संकेतों की जांच करने और शरीरकोष विज्ञान के बारे में और अधिक जानने के लिए संदिग्ध ट्यूमर के कुछ ऊतक की बायोप्सी (टुकड़ा निकालना)। उसके बाद एक रोगविज्ञानी यह देखने के लिए कि क्या उसमें कैंसर कोशिकाएं हैं, ऊतक के नमूनों को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर उनकी जांच करता है। माइक्रोस्कोप में कोशिकाएं जिस प्रकार की दिखाई देती हैं वह रोग की पहचान करने में महत्वपूर्ण होता है। ऊतक के नमूने को आमतौर पर अल्ट्रासाउंड निर्देशित एक पतली सुई के द्वारा निकालकर प्राप्त किया जाता है। इस प्रक्रिया में, चिकित्सक गर्दन से त्वचा में एक पतली सूई को डालते हुए थायराइड ऊतक और/या बढ़ी हुई लसिका ग्रंथि (ग्रंथियों) का एक नमूना लेंगे। कुछ स्थितियों में, रोग की पहचान करने के लिए ओपन बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) की आवश्यकता पड़ती है, जिसमें नॉड्यूल को सर्जरी करके निकाला जाता है।

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर के स्तर का पता लगाना

रोग का स्तर या अधिकता इस बात पर निर्भर करती है कि कैंसर फैल चुका है या नहीं। थायराइड कैंसर का स्तर थायराइड नॉड्यूल के लक्षणों के साथ-साथ लसिका ग्रंथियों और शरीर के अन्य भागों (फेफड़ों) में बीमारी के फैलाव पर निर्भर करता है।

जिन रोगियों में बीमारी गर्दन के बाहर नहीं फैलती है उन्हें स्तर I का रोगी माना जाता है।
जिन रोगियों में बीमारी गर्दन के बाहर दूर तक के भागों में फैली होती है उन्हें स्तर II का रोगी माना जाता है।

रोगियों को जोखिम समूहों में वर्गीकृत करने के लिए पोस्ट-ऑपरेटिव स्टेजिंग (सर्जरी के बाद स्तर का पता लगाना) का उपयोग किया जाता है। बच्चों में होने वाले सभी थायराइड कैंसर में मृत्यु होने का जोखिम बहुत ही कम होता है। हालांकि, कुछ रोगियों में सर्जरी के पश्चात्‌ बीमारी बने रहने या बीमारी फैलने (कैंसर का फैलाव) का अधिक जोखिम हो सकता है।

जोखिम कैंसर का फैलना
निम्न जोखिम लसिका ग्रंथियों में थोड़े या कोई प्रसार नहीं के साथ कैंसर केवल थायराइड ग्रंथि में होता है
मध्यम जोखिम कैंसर का आसपास की लसिका ग्रंथियों में थोड़ा सा फैलना
उच्च जोखिम कैंसर का आसपास की लसिका ग्रंथियों में काफी फैल जाना, थायराइड के बाहर तक के ऊतकों में पहुँच जाना या दूर तक के भागों में फैल जाना (फेफड़ों तक)

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर के लिए पूर्वानुमान

बाल रोगियों में थायराइड कैंसर में जीवित रहने की दर >95% है। 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों और उन रोगियों में रोग की पुनरावृत्ति होने की अधिक संभावना होती है जिनमें रोग की पहचान करने के समय क्षेत्रीय लसिका ग्रंथियों का समावेशन होता है। हालांकि, रोग के दुबारा होने के जोखिम के साथ भी, जीवित रहने की संभावना बहुत अधिक होती है।

रोग के पूर्वानुमान को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आरंभिक सर्जरी की सीमा
  • बीमारी फेफड़े या हड्डियों जैसे अन्य भागों तक फैली है या नहीं
  • अन्य कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाले वंशाणु उत्परिवर्तन या आनुवंशिक कारक

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर का इलाज

बच्चों में होने वाले थायराइड कैंसर से पीड़ित रोगियों के निर्धारण, इलाज और लंबे समय तक निगरानी के प्रबंधन के लिए एक बहुविषयक बाल चिकित्सा टीम द्वारा देखभाल की आवश्यक होती है। देखभाल के निर्णय इलाज के दुष्प्रभावों के कारण होने वाले सतत बीमारी के जोखिम और नुकसान को संतुलित करने पर केंद्रित होते हैं। रोग के दुबारा होने के जोखिम और अन्य कारणों की वजह से (जैसे कि, हार्मोन फ़ंक्शन, आनुवंशिक प्रवृत्ति), सभी रोगियों के लिए निरंतर फॉलो-अप की आवश्यकता होती है।

  1. थायराइड ग्रंथि को निकालने (थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी) के लिए सर्जरी थायराइड कैंसर का प्रमुख इलाज है। यदि ट्यूमर छोटा है, तो आंशिक थायराइडेक्टॉमी या थायराइड की सर्जरी एक विकल्प हो सकता है। इसमें आमतौर पर थायराइड ग्रंथि के एक ओर के भाग और इस्थमस को निकालना शामिल होता है।

    अक्सर अधिकतर, संपूर्ण थायराइडेक्टॉमी या थायराइड की सर्जरी की सलाह दी जाती है। थायराइड को पूरी तरह से निकालना सतत बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद करता है और इमेजिंग और इलाज में रेडियोधर्मी आयोडीन का उपयोग करते हुए फॉलो-अप देखभाल में सहायता करता है।

    सर्जरी की योजना बनाने में मदद के लिए गर्दन और थायराइड के विस्तृत अल्ट्रासाउंड और एक पतली सुई के द्वारा संदिग्ध लसिका ग्रंथियों को निकालने का उपयोग किया जाता है। थायराइड नॉड्यूल निकालने के अलावा, सर्जन गर्दन के मध्यवर्ती क्षेत्र या किनारों पर मौजूद लसिका ग्रंथियों और अन्य ऊतकों को निकाल सकता है। इस प्रक्रिया को गर्दन का विच्छेदन कहते हैं। अधिक व्यापक सर्जरी उच्च जोखिम वाले रोगियों में रोग के दुबारा होने को कम करने में मदद कर सकती है।

    थायराइड कैंसर में लसिका ग्रंथियों को सर्जरी करके निकालना

    गर्दन में मौजूद लसिका ग्रंथियों को सर्जरी से निकालने की प्रक्रिया को गर्दन का विच्छेदन कहते हैं। मध्यवर्ती गर्दन का विच्छेदन आमतौर पर तब किया जाता है जब प्राथमिक थायराइड टयूमर का आकार 4 सेंटीमीटर से बड़ा होता है या जब ट्यूमर थायराइड ग्रंथि (थायराइड कैप्सूल) को आच्छादित करने वाले ऊतक के बाहर तक फैल चुका होता है।

    पार्श्विक गर्दन के विच्छेदन ज़्यादातर तब किए जाते हैं जब थायराइड कैंसर गर्दन में मौजूद लसिका ग्रंथियों तक फैल चुका होता है\ गर्दन के दोनों प्रकार के विच्छेदनों में उन लसिका ग्रंथियों को निकालना शामिल होता है जिनकी थायराइड ग्रंथि के संपर्क में आने की सबसे अधिक संभावना होती है और जिनमें वे कैंसर कोशिकाएं होने की संभावना सबसे अधिक होती है जो फैल चुकी हैं।

    सर्जरी एक ऐसे अनुभवी सर्जन द्वारा की जानी चाहिए जो बच्चों में इन प्रक्रियाओं को नियमित रूप से करता है। इलाज संबंधित दिशा-निर्देशों में यह अनुशंसा की जाती है कि सर्जरी एक ऐसे अधिक सर्जरी करने वाले थायराइड सर्जन द्वारा की जाए जो प्रति वर्ष कम से कम 30 समान सर्जरी प्रक्रियाएं करता है। इससे सर्जिकल जटिलताओं का जोखिम कम होता है। सर्जरी के जोखिमों में गर्दन क्षेत्र की संरचनओं की क्षति शामिल है जैसे नसें, विशेषकर रेकररंट लरयंजील नर्व और पैराथाइराइड ग्रंथियां।

    थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी के बाद पैराथाइराइड ग्रंथियों को क्षति पहुँचना

    प्रत्येक व्यक्ति में 4 पैराथाइराइड ग्रंथियां होती हैं, जो कि थायराइड के पीछे स्थित बहुत छोटी-छोटी संरचनाएं होती हैं। ये ग्रंथियां पैराथाइराइड हार्मोन का स्राव करती हैं, एक ऐसा हार्मोन जो शरीर में कैल्शियम के सामान्य स्तर को बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार होता है। कभी-कभी ये पैराथाइराइड ग्रंथियां सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। यहां तक कि सर्जिकल क्षति न होने पर भी ये पैराथाइराइड ग्रंथियां अक्सर थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी के बाद "अचेत" हो जाती हैं। जिसके कारण हाइपो-पैराथाइराइडिज़्म होता है और पैराथाइराइड हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। रोगियों में हाथ, पैर और चेहरे की मांसपेशियों में ऐंठन व सुन्नपन और झुनझुनी सहित कैल्शियम की कमी (या हाइपोकैल्सीमिया) के लक्षण होते हैं। इलाज के लिए अतिप्रभावशाली प्रकार के विटामिन डी (कैल्सिट्रीओल) और कैल्शियम सप्लीमेंट की आवश्यकता होती है। यह अवस्था अस्थायी (“ट्रान्ज़िएंट पोस्ट-सर्जिकल हाइपो-पैराथाइराइडिज़्म”) या स्थायी हो सकती है। जब पैराथाइराइड ग्रंथियों को निकाल दिया जाता है या वे स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो हाइपो-पैराथाइराइडिज़्म में आजीवन इलाज की आवश्यकता हो सकती है।

    थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी के बाद नसों को क्षति पहुँचना

    थायराइड सर्जरी का एक अन्य जोखिम रेकररंट लरयंजील नर्व को चोट पहुँचना है। यह नस वाक्‌ तंतुओं को हिलाने और उच्चारण क्रिया को करने में मदद करती है। कभी-कभी, रेकररंट लरयंजील नर्व को ट्यूमर होने की वजह से निकालना पड़ सकता है।

    सर्जरी से पहले, ओटोलैरिंगोलॉजिस्ट आमतौर पर वाक्‌ तंतु क्रिया की जांच करने के लिए कार्यालय में एक “स्कोप” परीक्षण करते हैं। इस प्रक्रिया में वाक्‌ तंतुओं को देखने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे ठीक से काम कर रही हैं, नाक के जरिए एक लचीला कैमरा डाला जाता है। वाक्‌ तंतु फ़ंक्शन का आकलन करने के लिए सर्जरी के पश्चात् प्रक्रिया को दोहराया जाता है।

    सर्जरी के दौरान नस को पहुँचने वाली क्षति का जोखिम कम करने के लिए, एक विशेष एंडोट्रेकियल ट्यूब (श्वसन ट्यूब) का उपयोग किया जा सकता है। इस श्वसन ट्यूब में एक इलेक्ट्रोड होता है जो सर्जरी के दौरान नसों का पता लगाता है और उन्हें मॉनिटर करता है।

    यदि सर्जरी के दौरान वाक्‌ तंतु क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो यह अक्सर अस्थायी होता है। हालांकि, इसे ठीक होने में डेढ़ वर्ष तक लग सकता है। यदि रोगी की आवाज़ में बदलाव आ जाता है या उसे सांस लेने अथवा निगलने में कठिनाई होती है, तो उन क्रियाओं को सुधारने के लिए वाक्‌ तंतुओं को एक अस्थायी सामग्री के साथ इंजेक्ट किया जा सकता है। यदि नस ठीक नहीं हो पाती तो फिर से तंत्रिका वितरण प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है। यह प्रक्रिया प्रभावित वाक्‌ तंतु की क्रिया को सुधारने के लिए कार्य नहीं कर रही रेकररंट लरयंजील नर्व को कार्य कर रही नस के साथ को जोड़ती है।

    थायराइड की सर्जरी या थायराइडेक्टॉमी के कारण होने वाली ये तंत्रिका जटिलताएं बहुत कम ही होती हैं और 1.4% - 14% की दर से होती हैं। सर्जन जितना अधिक अनुभवी होता है, जटिलताओं का जोखिम उतना ही कम होता है।

  2. सर्जरी के बाद, फॉलो-अप देखभाल की योजना बनाने के लिए रोगियों की जांचें की जाएंगी। रोग की सीमा के आधार पर, रोगियों को मॉनिटर किया जा सकता है और वे रेडियोधर्मी आयोडीन (131I) थेरेपी या अतिरिक्त सर्जरी सहित अन्य इलाज प्राप्त कर सकते हैं।

    जिन रोगियों की पहचान “निम्न जोखिम” के रूप में की गई थी, उनकी सर्जरी के बाद समय-समय पर स्क्रीनिंग और लेवोथायरोक्सिन दवा के साथ टीएसएच सप्रेशन के साथ निगरानी की जा सकती है। थायराइड स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (टीएसएच) को अवरुद्ध करना इस हार्मोन को ट्यूमर कोशिकाओं की वृद्धि करने से रोकता है। निगरानी करने में थायरोग्लोबुलिन और थायरोग्लोबुलिन एंटीबॉडी स्तरों की जांच के साथ-साथ रोग की पुनरावृत्ति को देखने के लिए अल्ट्रासाउंड इमेजिंग शामिल है।

    कुछ “मध्यम जोखिम” और सभी “उच्च जोखिम” रोगियों का एक नैदानिक संपूर्ण शरीर स्कैन और टीएसएच-स्टिम्युलेटिड थायरोग्लोबुलिन के साथ आकलन किया जाता है। संपूर्ण शरीर स्कैन का उपयोग शरीर के अन्य भागों में थायराइड कैंसर के फैलाव को देखने के लिए किया जाता है। इस जांच में, एक विशेष कैमरा रेडियोधर्मी ट्रेसर, आमतौर पर रेडियोआयोडीन (आरएआई) I-123 का पता लगाता है। क्योंकि थायराइड कोशिकाएं हार्मोन का निर्माण करने के लिए आयोडीन का उपयोग करती हैं, इसलिए यह आयोडीन आइसोटोप विशेष रूप से थायराइड कोशिकाओं द्वारा अवशोषित किया जाता है। स्कैन में बना चित्र पूरे शरीर में थायराइड कैंसर कोशिकाओं को उजागर करता है। इस जांच में 123I रेडिएशन बहुत कम होती है और इसका उपयोग केवल इमेजिंग के लिए किया जाता है।

    स्कैन परिणामों और थायरोग्लोबुलिन के स्तरों के आधार पर, इलाज के तौर पर रेडियोधर्मी आयोडीन का उपयोग किया जा सकता है। यदि बीमारी को दूर करना संभव है तो कुछ रोगियों की अतिरिक्त सर्जरी भी हो सकती है।

  3. मध्यम और उच्च जोखिम के डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर वाले रोगियों को 131I रेडियोधर्मी आयोडीन (आरएआई) के साथ इलाज प्राप्त हो सकता है। रेडियोधर्मी आयोडीन चिकित्सा का उपयोग थायराइड कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है। इस थेरेपी में, थायराइड कोशिकाओं (थायराइड कैंसर कोशिकाओं सहित) को आयोडीन अवशोषित करने के लिए प्रेरित किया जाता है जो विशेषरूप से थायराइड कोशिकाओं में रेडिएशन को पहुँचाता है। रेडिएशन इन कोशिकाओं को नष्ट कर देती है, यहां तक कि उन कोशिकाओं को भी जो शरीर के अन्य भागों तक फैल गई हैं।

    हालांकि, नैदानिक इमेजिंग में उपयोग की गई 123I की निम्न खुराक के विपरीत, I-131 की इलाज खुराकों के संभावित तीव्र और देर से होने वाले दुष्प्रभाव होते हैं। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि 131I आरएआई थेरेपी से दूसरी बार होने वाले कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन बचपन या किशोरावस्था के दौरान इलाज प्राप्त करने वाले रोगियों में इसका अध्ययन बहुत अच्छी तरह से नहीं किया गया है। चिकित्सीय टीम और परिवार को थायराइड कैंसर के जोखिमों, इलाज के जोखिमों और लाभों तथा अलग-अलग रोगी की ज़रूरतों पर विचार करना चाहिए। इलाज की योजनाओं को रोग की अधिकता, पूर्व इलाज की प्रकृति और प्रतिक्रिया तथा अन्य चिकित्सीय स्थितियों जैसे कारक प्रभावित कर सकते हैं।

  4. थायराइड कैंसर के इलाज में लक्षित इलाजों का अध्ययन किया जा रहा है। ये दवाएं कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के लिए उनके विशेष लक्ष्य क्षेत्रों पर कार्य करती हैं। कुछ रोगियों के लिए काइनेज़ इनहिबिटर उपयोगी हो सकते हैं।

    उन्नत स्तर रोग वाले या रोग दुबारा होने वाले रोगी बीमारी के परीक्षण में भाग लेने पर विचार कर सकते हैं।

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर के बाद जीवन

रोग के दुबारा होने और फॉलो-अप देखभाल के लिए निगरानी करना

थायराइड कैंसर के लिए इलाज किए गए रोगियों को एक अंतःविषय चिकित्सीय टीम द्वारा आजीवन निगरानी और फॉलो-अप देखभाल किए जाने की आवश्यकता होती है। जांचों की आवृत्ति और प्रकारों के लिए विशेष सुझाव, रोगी की ज़रूरतों और थायराइड कैंसर के प्रकार व स्तर के अनुसार अलग-अलग होते हैं।

डिफ़रेंशिएटेड थायराइड कैंसर में, थायरोग्लोबुलिन के स्तर निगरानी करने में सहायता के लिए ट्यूमर मार्कर के रूप में कार्य कर सकते हैं। अतिरिक्त विचारों में थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट उपचार और टीएसएच सप्रेशन सहित दवाओं के पालन के लिए सहायता शामिल है।

दीर्घकालिक देखभाल के प्रमुख पहलू:

  • थायराइड और लसिका ग्रंथियों की जांच के लिए नियमित शारीरिक जांच
  • गर्दन/थायराइड अल्ट्रासाउंड इमेजिंग
  • दवाओं के पालन के लिए सहायता के साथ, टीएसएच सप्रेशन और पोस्ट-थायराइडेक्टॉमी हार्मोन रिप्लेसमेंट उपचार (लेवोथायरोक्सिन)
  • रक्त थायरोग्लोबुलिन (टीजी) और टीजी एंटीबॉडी की निगरानी करना

थायराइड कैंसर इलाज के कई वर्षों बाद भी दुबारा हो सकता है। निरंतर निगरानी से देर से होने वाले रोग के दुबारा होने का समय से पूर्व पता लगाने में मदद मिल सकती है।

थायराइड और गर्दन की सर्जरी के बाद देखभाल

रोगियों को इलाज और उत्तरजीविता के दौरान मनोसामाजिक सहायता से लाभ मिल सकता है। मनोविज्ञान, बाल जीवन, सामाजिक कार्य और अन्य विषयों का प्रतिनिधित्व करने वाले देखभाल टीम के सदस्य, रोगियों को जीवन शैली को प्रभावित करने वाले इलाजों के अनुरूप ढलने और उनका पालन करने में सहायता कर सकते हैं। संभावित समस्याओं में दैनिक रूप से दवा का उपयोग करने के प्रति खुद को ढालना, सर्जरी से पड़े घाव के निशानों को लेकर शरीर की छवि से संबंधित समस्याएं और अन्य समायोजन आवश्यकताएं शामिल हैं।

रोगियों की गर्दन की गतिशीलता और उसे हिलाने के विभिन्न स्तरों में सहायता करने के लिए सर्जरी के बाद उन्हें शारीरिक चिकित्सा की भी ज़रूरत पड़ सकती है।

परिवारों के लिए थायराइड कैंसर रोग की पहचान किए जाने की प्रक्रिया के अनुकूल ढलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि रोग का पूर्वानुमान लगाना आमतौर पर अच्छा होता है, फिर भी बीमारी के लिए दवाओं और निगरानी करने के माध्यम से आजीवन प्रबंधन की आवश्यकता होती है। किशोरावस्था और वयस्कता जैसे जीवन के बदलावों के दौरान सहयोग संबंधित आवश्यकताएं बढ़ सकती हैं क्योंकि इस आयु में रोगियों को स्वतंत्रता प्राप्त होती है। उन रोगियों के लिए समायोजन संबंधित चुनौतियां और भी अधिक हो सकती हैं जो थायराइड कैंसर का दुबारा सामना करते हैं।

थेरेपी के देर से दिखाई देने वाले प्रभाव

रेडियोधर्मी आयोडीन चिकित्सा प्राप्त करने वाले रोगियों की इलाज के दीर्घकालिक और देर से दिखाई देने वाले प्रभावों के लिए निगरानी की जानी चाहिए। विचार करने योग्य विशेष बातों में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:

  • मुंह के सुखेपन से जुड़ी लार ग्रंथि की दुष्क्रियता और दांत सड़ने के बढ़े हुए जोखिम की निगरानी के लिए फॉलो-अप देखभाल
  • प्रजनन अंगों और जनन क्षमता पर पड़ने वाले प्रभावों के लिए निगरानी करना
  • फेफड़े की समस्या वाले रोगियों में फेफड़ों के क्रिया की निगरानी करना
  • दूसरी प्राथमिक विकृतियों के लिए निगरानी करना

सामान्य स्वास्थ्य और बीमारी की रोकथाम के लिए, कैंसर से बचे सभी लोगों को स्वस्थ जीवन शैली और खान-पान की आदतों को अपनाना चाहिए, साथ ही उन्हें प्राथमिक चिकित्सक द्वारा नियमित रूप से शारीरिक परीक्षण और जांच भी करवाते रहना चाहिए। उत्तरजीवी लोगों को अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से सभी कैंसर चिकित्साओं सहित अपने चिकित्सकीय इतिहास के बारे में चर्चा करनी चाहिए।


समीक्षा की गई: जून 2018