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अवस्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) / ओस्टियोनेक्रोसिस

इसे इन नामों से भी जाना जाता है: ऑन, एसेप्टिक नेक्रोसिस, इस्केमिक बोन नेक्रोसिस

अवस्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) क्या है?

अवस्कुलर नेक्रोसिस या एवीएन, जिसे ओस्टियोनेक्रोसिस भी कहा जाता है, वह स्थिति है जो तब होती है जब खून की कम आपूर्ति के कारण हड्डी के भाग नष्ट होने लगते हैं। एवीएन, कुछ कैंसरों या कैंसर इलाजों के दुष्प्रभाव के रूप में हो सकता है।

जिन बच्चों को इलाज में ज़्यादा कोर्टिकोस्टेरॉयड दी जाती है (डेक्सामिथेसोनया प्रेडनिसोन), उन्हें यह रोग होने का अधिक खतरा है।

अवस्कुलर नेक्रोसिस हल्का सा भी हो सकता है और कैंसर इलाज समाप्त होने के बाद अपने आप सुधर जाता है या स्थिति गंभीर भी हो सकती है, जिसके कारण सारा ऊमर दर्द और अक्षमता हो सकती है।

अवस्कुलर नेक्रोसिस शब्द की व्याख्या करता हुआ एक चित्र। "अ" का अर्थ है रहित, "वस्कुलर" का अर्थ खून से सिंचित और "नेक्रोसिस" का अर्थ कोशिकाओं या का नष्ट होना। अवस्कुलर नेक्रोसिस / ओस्टियोनेक्रोसिस का अर्थ हड्डी के ऊतक का नष्ट होना है जो खून की अपर्याप्त आपूर्ति के कारण होता है।

कैंसर से पीड़ित बच्चों में एवीएन

अवस्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) ल्यूकेमिया (खून का कैंसर) और लिंफोमा थेरेपी का एक सामान्य दुष्प्रभाव है। एक्यूट लिंफोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (एएलएल) के लिए इलाज किए गए आधे बच्चों में कुछ हद तक एवीएन होता है। जिन बच्चों में बोनमैरो प्रत्यारोपण किया गया है, उनमें भी एवीएन विकसित होने का अधिक खतरा होता है।

एवीएन लंबी हड्डियों के सिरों पर हो सकता है, जैसे फीमर का फेमोरल हैड। यहां, फीमर हड्डी की संरचना को लेबल किया गया है, जिसमें आर्टिकुलर प्रॉक्सिमल एपिफिसिस, मेटाफिसिस, डायफिसिस और डिस्टल एपिफिसिस को दर्शाया गया है।

बचपन में होने वाले कैंसर से पीड़ित रोगियों में, एवीएन अक्सर लंबी हड्डियों के सिरों पर देखा जाता है, वह भाग जिसे एपिफिसिस कहा जाता है।

यह स्थिति किसी भी हड्डी में हो सकती है। हालांकि, बचपन में होने वाले कैंसर से पीड़ित रोगियों में, एवीएन अक्सर लंबी हड्डियों के सिरों पर देखा जाता है, वह भाग जिसे एपिफिसिस कहा जाता है।

एवीएन के कारण दर्द हो सकता है और इससे जोड़ों की क्रिया प्रभावित हो सकती है, विशेषकर घुटनों, कूल्हों, कंधों और टखनों में। हड्डियों और जोड़ों को क्षति पहुंचने से जोड़ निपात और गठिया जैसी दीर्घकालिक समस्याएं हो सकती हैं।

छोटे बच्चों और वयस्कों की तुलना में बड़े बच्चों और किशोरों में कैंसर के इलाज के दौरान एवीएन होने की अधिक संभावना होती है। यह 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कम पाया जाता है।

एवीएन की आरंभिक अवस्थाओं का पता लगाना कठिन हो सकता है। जब तक हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त न हो तब तक रोगियों में दर्द या अन्य लक्षण नहीं दिखाई देते। जिन बच्चों को एवीएन होने का अधिक खतरा है, इलाज के दौरान उनकी निगरानी की जानी चाहिए।

एवीएन का प्रबंधन दर्द और हड्डी के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति पर निर्भर करता है। दर्द प्रबंधन और शारीरिक चिकित्सा रोगियों की लक्षणों से निपटने में मदद कर सकते हैं। कुछ रोगियों में खून के प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए और हड्डी के अंदर दबाव को कम करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि क्षति गंभीर है या जोड़ निपात की समस्या होती है, तो रोगियों को अंतत: जोड़ों को बदलवाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

कूल्हे के जोड़ नष्ट होने के लक्षण

कुछ रोगियों में, विशेषकर आरंभिक स्तरों में हो सकता है कि कोई लक्षण दिखाई न दें। लेकिन स्थिति के बिगड़ते ही उन्हें जोड़ों और हड्डी का दर्द हो सकता है। हो सकता है कि परिवारों को यह देखने को मिले कि उनका बच्चा लंगड़ाकर चलता है, प्रभावित जोड़ वाले भाग का उपयोग करने से कतराता है या उसमें अकड़न है या उसकी चलने की गति कम हो गई है। एवीएन से कई बार हड्डी नष्ट भी हो सकती है और दर्द अचानक बहुत अधिक बढ़ भी सकता है।

एवीएन एक ही स्थान तक सीमित भी रह सकता है और हो सकता है कि यह कई हड्डियों को प्रभावित करे (बहुकेंद्रीय)। क्योंकि कीमोथेरेपी पूरे शरीर पर कार्य करती है, इसलिए बाल-रोग कैंसर से पीड़ित रोगियों में एवीएन आमतौर पर एकाधिक जोड़ों में होता है, अक्सर घुटनों और/या कूल्हों में। अन्य जोड़ जो प्रभावित हो सकते हैं उनमें कंधा और टखना शामिल है।

दर्द और अक्षमता आमतौर पर इन पर निर्भर करती है:

  • हड्डी के कौन से भाग प्रभावित हुए हैं
  • एवीएन की उपस्थिति कितनी है
  • क्षति कितनी तीव्रता से हो रही है
  • हड्डी कितनी अच्छी तरह से खुद ठीक हो सकती है

हालांकि, दर्द एवीएन की गंभीरता का एक विश्वसनीय सूचक नहीं है। एवीएन से ग्रस्त छोटे भाग बहुत दर्दनाक हो सकते हैं। अन्य रोगियों में एवीएन बहुत बड़े भाग तक फैला होने पर भी हो सकता है कि उन्हें दर्द न हो।

अवस्कुलर नेक्रोसिस के लक्षण

  • दर्द (आ और जा सकता है या स्थिर हो सकता है)
  • जोड़ में अकड़न या “जकड़न”
  • लंगड़ाहट या चाल परिवर्तन
  • जोड़ों का उपयोग करने या कुछ गतिविधियों को करने से कतराना
  • सीढ़ी चढ़ने या उतरने में समस्याएं

अवस्कुलर नेक्रोसिस: खतरा किसे है?

  • कैंसर इलाज के दौरान उच्च मात्रा में डेक्सामिथेसोन और प्रेडनिसोन की खुराकें
  • 10 वर्ष से अधिक आयु के बच्चे
  • सिकल सेल रोग
  • हड्डी में अधिक मात्रा में रेडिएशन
  • ऐस्परैजिनेस और डेक्सामिथेसोन से इलाज
  • वंशानुगत आनुवंशिक परिवर्तन
 

कूल्हे के जोड़ नष्ट होने के कारण

अवस्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) एक जटिल प्रक्रिया है। एवीएन का प्रमुख कारण हड्डी में खून की आपूर्ति कम होना है। जब रक्त वाहिकाएं बहुत छोटी हो जाती हैं या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं या बंद हो जाती हैं, तब पोषक तत्व और ऑक्सीजन हड्डी तक नहीं पहुंच पाते और हड्डी की कोशिकाएं मरने लगती हैं।

कीमोथेरेपी और रेडिएशन सहित, कैंसर इलाज से हड्डी की कोशिकाएं मर सकती हैं और/या रोगी के ठीक होने में व्यवधान उत्पन्न कर सकती हैं। इस तरह, हड्डी खुद ठीक हो सकने की अपेक्षा तेज़ी से भंग हो सकती है। इलाज हड्डी में खून की आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप एवीएन हो सकता है।

बहुत से बच्चों को कीमोथेरेपी के भाग के रूप में कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं (जैसे प्रेडनिसोन, डेक्सामिथेसोन) प्राप्त होती हैं। इन दवाओं का उपयोग जी मिचलाना और सूजन जैसे दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि, कोर्टिकोस्टेरॉयड खून में वसामय पदार्थों (लिपिड) में वृद्धि कर सकते हैं। वसा के जमा होने से रक्त वाहिकाएं अवरुद्ध हो सकती हैं। इन दवाओं से रक्त वाहिकाओं को कवर करने वाली परत की कोशिकाएं भी बदल सकती हैं, जिससे रक्त वाहिकाएं पतली और कमज़ोर हो जाती हैं।

प्रेडनिसोन या किसी वैकल्पिक डेक्सामिथेसोन योजना की अपेक्षा अत्यधिक मात्रा में, लगातार डेक्सामिथेसोन देना एवीएन के अत्यधिक जोखिम से जुड़ा हुआ है। कुछ दवाएं, जैसे ऐस्परैजिनेस, डेक्सामिथेसोन की क्रिया को भी प्रभावित कर सकती हैं और दवाओं के एक साथ कार्य करने के तरीके की वजह से एवीएन का खतरा बढ़ सकता है। अन्य दवाएं जैसे मेथोट्रिक्सेट (एमटीएक्स) से, विशेषकर कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाओं के साथ उपयोग करने पर, हड्डी को नुकसान पहुंच सकता है और एवीएन का खतरा बढ़ सकता है।

कूल्हे का जोड़ नष्ट होने के रोग की पहचान करना

थेरेपी केंद्रों के जोखिम वाले रोगियों की पहचान करने और उनकी निगरानी करने के तरीके अलग-अलग होते हैं। एवीएन से ग्रस्त भागों, जिन्हें कभी-कभी घाव या विक्षतियां भी कहा जाता है, उनकी पहचान करने के लिए इमेजिंग जांचों का उपयोग किया जाता है। मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई), एवीएन का निदान करने वाली सबसे अधिक सूक्ष्मग्राही इमेजिंग जांच है। एक्स-रे कम सूक्ष्मग्राही होते हैं लेकिन ये सर्जरी के बाद प्रगति की जांच करने में और रोगियों पर निगरानी रखने में मददगार हो सकते हैं। हड्डी के स्कैन औरकंप्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी (सीटी) जैसी अन्य प्रकार की जांचों का भी उपयोग किया जा सकता है, जो अक्सर कम ही होता है।

जोखिम वाले रोगियों के लिए अवस्कुलर नेक्रोसिस की स्क्रीनिंग

कुछ क्लिनिक, बचपन में होने वाले कैंसरसर से पीड़ित एवीएन के उच्च-जोखिम वाले रोगियों में लक्षण उत्पन्न होने से पहले ही उनकी स्क्रीन जांच कर सकते हैं। इस प्रकार की स्क्रीनिंग आमतौर पर बीमारी के परीक्षण या शोध अध्ययन का भाग होती है और मुख्यत: घुटनों और कूल्हों पर केंद्रित होती है। जब उच्च जोखिम वाले रोगियों की स्क्रीन जांच लक्षण होने से पहले की जाती है, तो घुटना वह सबसे अधिक आम जोड़ होता है जो इमेजिंग जांचों में एवीएन के संकेत दर्शाता है। एवीएन आमतौर पर घुटने के जोड़ के दोनों तरफ (फीमर और टिबिया) होता है और हो सकता है कि घुटना ही इससे ग्रस्त एकमात्र जोड़ हो। हालांकि, यदि एवीएन कूल्हें में देखा गया है, तो आमतौर पर इससे घुटने भी प्रभावित होते हैं।

कोर्टिकोस्टेरॉयड से जुड़े एवीएन को आमतौर पर उच्च-खुराक स्टेरॉयड इलाज के पहले वर्ष में एमआरआई पर देखा जा सकता है। जिन रोगियों में 12 महीने बाद एमआरआई पर एवीएन के प्रमाण नहीं मिलते हैं, उनमें निरंतर स्टेरॉयड इलाज के साथ भी, एवीएन विकसित होने की संभावना नहीं होती।

चिकित्सक अधिक सूक्ष्मग्राही इमेजिंग परीक्षणों के उपयोग से रोग की पहचान में सुधार करने के तरीकों की खोज कर रहे हैं। एवीएन की प्रगति का बेहतर पूर्वानुमान लगाने का तरीका जानने के लिए शोध भी किया जा रहा है।

एवीएन की प्रगति

एवीएन की प्रगति का पूर्वानुमान लगाना कठिन है। घाव दूर हो सकते हैं, स्थिर रह सकते हैं या और खराब हो सकते हैं। रोग की प्रगति धीमी या तीव्र हो सकती है।

इलाजों की योजना बनाने के लिए एवीएन की गंभीरता या स्तर महत्वपूर्ण होती है। चिकित्सक दो मुख्य कारकों को ध्यान में रखते हैं:

  1. घावों का आकार
  2. क्या क्षति जोड़ की सतह को सहारा देने वाली हड्डी में है

यदि क्षतिग्रस्त हड्डी जोड़ की सतह को सहारा नहीं दे सकती, तो कार्टिलेज के नीचे की हड्डी नष्ट होना शुरू हो जाती है। कार्टिलेज की सामान्य रूप से चिकनी परत जो जोड़ों को कवर करती है छिलने लगती है। इससे जोड़ों की समस्याएं होती हैं जैसे गठिया, जिसके कारण दर्द होता है और जोड़ की गति धीमी हो जाती है।

जोड़ निपात की संभावना अधिक हो सकती है यदि घाव:

  • उस हड्डी में होता है जो जोड़ की सतह के निकट स्थित है
  • बड़ा है, 30% या उससे अधिक सतह को कवर कर रहा है
  • वजन को ढोने वाले जोड़ (कूल्हे, घुटने) में होता है

क्योंकि घुटने और कूल्हे वजन को ढोने वाले जोड़ हैं, इसलिए एवीएन गंभीर होने पर जोड़ निपात होना आम है। कूल्हों में, जब एवीएन 30% से अधिक जोड़ की सतह को प्रभावित करता है, तो जोड़ निपात आमतौर पर 2 वर्ष के अंदर होना शुरू हो जाता है।

कूल्हे के जोड़ नष्ट होने के इलाज

एवीएन का प्रबंधन व्यक्तिगत रोगी की आवश्यकताओं पर आधारित होता है। चिकित्सक निम्नलिखित पर विचार करते हैं:

  • रोगी की आयु
  • रोगी का स्वास्थ्य और कैंसर की अवस्था
  • कैंसर इलाज और कीमोथेरेपी योजना
  • एवीएन स्तर
  • प्रभावित हड्डियां और जोड़
  • दर्द की गंभीरता

इलाज के प्रमुख लक्ष्य दर्द नियंत्रण, जोड़ क्रिया को बनाए रखना और अतिरिक्त क्षति होने से रोकना हैं। 

इलाज रणनीतियों में निम्नलिखित शामिल हैं:

दवाएं

चिकित्सक दर्द निवारक दवाएं निर्धारित कर सकता है जैसे एनसैड (मिलोक्सीकैम, सेलेकॉक्सिब) या एसिटामिनोफेन। हालांकि, कुछ दर्द निवारक दवाओं से रोगी को रक्तस्राव होने का, जिगर या गुर्दे की समस्याएं होने का, कीमोथेरेपी से दुष्प्रभावों के बढ़ने का खतरा हो सकता है। परिवारों को बिना पर्ची वाली दवाओं सहित, किसी भी दवा को लेने से पहले अपने चिकित्सक से जांच करनी चाहिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कहीं यह किसी और दवा को प्रभावित तो नहीं करती या दुष्प्रभावों को बढ़ा तो नहीं देती।

शोधकर्ता अध्ययन कर रहे हैं कि एवीएन को रोकने या उसका इलाज करने के लिए खून के प्रवाह, खून के थक्के बनने की क्रिया, जलन या सूजन, लिपिड मेटाबोलिज्म (चयापचय) और/या हड्डी की कोशिकाओं को प्रभावित करने वाली दवाओं का उपयोग कैसे किया जाए। हालांकि, परिणामों से सुसंगत लाभ नहीं दिखा है।

शारीरिक चिकित्सा

एवीएन से पीड़ित रोगियों के लिए शारीरिक चिकित्सा आवश्यक है। एक फिज़िकल थेरेपिस्ट रोगियों को वजन ढोना कम करने और पीड़ादायक गतिविधियों से बचने के उपाय सुझा सकता है। वे विशिष्ट थेरेपी निर्धारित कर सकते हैं जैसे:

  • रोगी द्वारा सामना की जाने वाली मांसपेशियों में कमजोरी, जोड़ों में अकड़न या चलने में कठिनाई जैसी किसी भी रुकावट को दूर करने के लिए व्यायाम।
  • गतिशीलता और पीड़ादायक जोड़ द्वारा वजन ढोना कम करने में मदद करने के लिए सहायक उपकरण (वॉकर, बैसाखी, या बेंत)। फिज़िकल थेरेपिस्ट सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प प्रदान करेगा और मरीज़ को उपकरण के साथ चलने का तरीका सिखाएगा।
  • ऑर्थोटिक्स और ब्रेसिज़ (आर्क सपोर्ट, घुटनों के आवरण या तिकोनी पट्टी) दैनिक गतिविधियों के दौरान दर्द को कम करने के लिए दर्दनाक जोड़ों को सहारा प्रदान करते हैं
  • व्यायाम सहित घर-पर देखभाल के लिए निर्देश, शारीरिक गतिविधि के लिए मार्गदर्शन और हीट और/या आइस थेरेपी

एवीएन और वजन ढोने की गतिविधि

जोड़ों की क्षति को रोकने, दर्द को नियंत्रित करने और सर्जिकल प्रक्रियाओं के बाद ठीक होने के लिए कम वजन ढोने का सुझाव दिया जाता है। हालांकि, बहुत से चिकित्सक और फिज़िकल थेरेपिस्ट दर्द अनुसार कम असर डालने वाले क्रियाकलाप में व्यस्त रहने का सुझाव देते हैं। परिसंचरण को बढ़ाने, हड्डी की मरम्मत को बढ़ावा देने और जोड़ों को सहारा देने वाली मांसपेशियों को ताकतवर बनाने के लिए शारीरिक गतिविधि आवश्यक है।

एवीएन से पीड़ित रोगियों को दौड़ने, कूदने और कॉन्टैक्ट स्पोर्ट जैसी अत्यधिक असर डालने वाली गतिविधियों को करने से बचना चाहिए। यह अत्यधिक गंभीर एवीएन से पीड़ित रोगियों में जोड़ों की चोट और उसका नष्ट होना रोकने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

 

पूरक या एकीकृत इलाज

रोगी मन और शरीर के इलाजों से मदद प्राप्त कर सकते हैं जैसे मालिश, एक्यूपंक्चर, बायोफ़ीडबैक और विश्राम तकनीकें। विशिष्ट तकनीकों से रोगियों को दर्द नियंत्रित करने, तनाव को कम करने, मांसपेशियों का तनाव कम करने और खून के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। परिवारों को कोई भी नई थेरेपी लेने से पहले अपनी देखभाल टीम से बात करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह थेरेपी सुरक्षित है और व्यक्तिगत रोगियों की आवश्यकताओं के अनुसार है।

कीमोथेरेपी का समायोजन

गंभीर एवीएन के मामले में, देखभाल टीम कोर्टिकोस्टेरॉयड से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए कीमोथेरेपी योजना में बदलाव करने का सुझाव दे सकती है। ये निर्णय रोगी के संपूर्ण स्वास्थ्य के जोखिमों के प्रति संतुलित होने चाहिए।

सर्जरी

कुछ रोगियों को एवीएन को नियंत्रित करने के लिए सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है। हड्डी के ठीक होने को बढ़ावा देने और हड्डी की अतिरिक्त क्षति को रोकने में मदद के लिए सर्जरी का उपयोग किया जा सकता है। सर्जरी का उपयोग जोड़ बदलने के लिए भी किया जा सकता है। प्रक्रियाओं में निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं:

  • कोर डिकम्प्रेशन – इस प्रक्रिया का उपयोग हड्डी के ठीक होने को बढ़ावा देने और खून के प्रवाह को बढ़ाने हेतु हड्डी के अंदर दवाब को कम करने के लिए किया जाता है। कोर डिप्रेशन में, सर्जन क्षतिग्रस्त ऊतक को विभाजित करने के लिए प्रभावित हड्डी में ड्रिल से छोटे-छोटे छेद करता है। मृत ऊतक को निकालने के बाद, उस स्थान को भरने के लिए उसमें हड्डी उपरोप सामग्री को जोड़ा जा सकता है। इस सर्जरी में लक्ष्य भाग तक पहुंचने के लिए बहुत ही कम हिस्सा चीरा जाता है और बहुत ही छोटा सा छेद किया जाता है। स्वास्थ्य लाभ में आमतौर पर कई सप्ताह का समय लगता है, जिसमें बिल्कुल भी वजन न उठाना या सीमित वजन उठाना शामिल है। रोगी आमतौर पर जल्दी ठीक हो जाते हैं और बेहतर दर्द और क्रियाशीलता की रिपोर्ट करते हैं।
  • हड्डी उपरोप – एवीएन के इलाज के लिए सर्जरी में क्षतिग्रस्त हड्डी को बदलने और उसके पुनःनिर्माण के लिए हड्डी उपरोप की प्रक्रिया शामिल हो सकती है। इसमें शरीर के अन्य भाग से (ऑटोग्राफ़्ट) या किसी डोनर से (एलोग्राफ़्ट) स्वस्थ हड्डी टिशू का प्रत्यारोपण शामिल है। कृत्रिम सामग्री का भी उपयोग किया जा सकता है। यदि कार्टिलेज क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो उपरोप में हड्डी और कार्टिलेज दोनों को शामिल हो सकते हैं (ऑस्टिओकॉन्ड्रल ग्राफ़्ट)। कुछ मामलों में, हड्डी ऊतक के साथ रक्त वाहिकाएं भी प्रत्यारोपित की जाती हैं। इसे वाहिकावर्धित हड्डी उपरोप कहा जाता है और इससे जोड़ में खून की आपूर्ति बेहतर हो सकती है। एवीएन में, हड्डी उपरोप का उपयोग अक्सर कोर डीकम्प्रेशन के साथ किया जाता है।
  • आर्थ्रोस्कोपी – आर्थ्रोस्कोपी एक मामूली कम चीरे वाली सर्जरी है जिसमें एक महीन कैमरे और छोटे से सर्जिकल उपकरणों को छोटे-छोटे छेदों के माध्यम से शरीर में डाला जाता है। एवीएन से पीड़ित रोगियों के लिए, आर्थ्रोस्कोपी का उपयोग क्षतिग्रस्त उपास्थि की मरम्मत करने, हड्डी की सतह को चिकना करने और हड्डी में ऊतकों के ढीले टुकड़ों को हटाने के लिए किया जा सकता है। इससे जोड़ के दर्द, अकड़न और जकड़न जैसे लक्षणों में मदद मिल सकती है।
  • ऑस्टियोटोमी – इस सर्जरी का उपयोग क्षतिग्रस्त भाग में वजन की मात्रा को कम करने हेतु हड्डी की आकृति को ठीक करने या उसको सही स्थान पर स्थित करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में, हड्डी की एक पच्चर निकाल दी जाती है ताकि हड्डी पर पड़ने वाले भार को बदलने के लिए हड्डी को घुमाया जा सके। प्लेट, स्टेपल या पेंच हड्डी को ठीक होने के लिए उसके नए स्थान पर पकड़े रहते हैं। ऑस्टियोटोमी से हड्डी का नष्ट होना रोकने में मदद मिल सकती है जिससे जोड़ प्रत्यारोपण की सर्जरी से बचा जा सकता है या उसे स्थगित किया जा सकता है।
  • आर्थ्रोप्लास्टी (जोड़ प्रतिस्थापन) – जोड़ प्रतिस्थापन सर्जरी की आवश्यकता गंभीर क्षति होने की स्थिति में पड़ सकती है। इस सर्जरी में क्षतिग्रस्त हड्डी को हटाना और उसकी जगह एक कृत्रिम जोड़ लगाना शामिल है। कुछ छोटे रोगियों में जोड़ निपात के बाद जोड़ प्रतिस्थापन की आवश्यकता पड़ेगी। हालांकि, जोड़ प्रतिस्थापन उन जीवित रहे वयस्क लोगों में भी आम है जिनमें इलाज समाप्त होने के बाद गठिया रोग हुआ है या जोड़ की क्रिया बहुत अधिक खराब हो गई है। जिन रोगियों का जोड़ कम आयु में बदला गया है, उन्हें भविष्य में अतिरिक्त सर्जरी की आवश्यकता होगी। जोड़ प्रतिस्थापन सर्जरी को रोकने या स्थगित करने के लिए एवीएन का समय से पहले पहचान और प्रबंधन आवश्यक है।
कुछ रोगियों को एवीएन को नियंत्रित करने के लिए जोड़ प्रतिस्थापन जैसी सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।

कुछ रोगियों को एवीएन को नियंत्रित करने के लिए आर्थ्रोप्लास्टी (जोड़ प्रतिस्थापन) जैसी सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है। आर्थ्रोप्लास्टी (जोड़ प्रतिस्थापन) सर्जरी में क्षतिग्रस्त हड्डी को हटाना और उसकी जगह एक कृत्रिम जोड़ लगाना शामिल है।

एवीएन से निपटना - रोगियों और परिवारों के लिए सुझाव

अपने जोखिम को जानें। अपनी देखभाल टीम से कैंसर इलाजों (प्राप्त खुराक सहित) और अन्य कारकों के बारे में बात करें।

लक्षणों पर नज़र रखें और अनुशंसित स्क्रीनिंग जांचे करवाएं। अपनी देखभाल टीम को दर्द और जोड़ संबंधित समस्याओं, विशेषकर नए या और खराब होते लक्षणों के बारे में बताएं। इलाज के बाद, सुनिश्चित करें कि हड्डी का स्वास्थ्य आपकी ठीक हुए लोगों की देखभाल की योजना का भाग है।

शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। वजन ढोने के लिए शारीरिक क्रियाकलापों को संशोधित करें और दर्द को अपना मार्गदर्शक बनाएं। अपने जोड़ों और हड्डियों को सुरक्षित रखने के लिए बहुत ज़्यादा असर वाली गतिविधियों और कॉन्टैक्ट स्पोर्ट से बचें। यदि आप किसी गतिविधि के बारे में सुनिश्चित नहीं हैं, तो अपने चिकित्सक या फिज़िकल थेरेपिस्ट से पूछें।

सहायक जूते पहनें और निर्देशानुसार आर्थोटिक्स और सहायक उपकरणों का उपयोग करें। यह जोड़ के संरेखण और क्रिया में मदद करने के लिए आवश्यक हैं। उपयुक्त जूते चप्पल पहनने से गिरने और जोड़ों में चोट लगने से बचा जा सकता है।

हड्डी के स्वास्थ्य और संपूर्ण सेहत के लिए एक स्वस्थ शैली अपनाना आवश्यक है:
स्वास्थ्यवर्धक आहार लें, शारीरिक रूप से सक्रिय रहें, स्वास्थ्यकर वजन बनाए रखें और धुम्रपान न करें।


समीक्षा की गई: जनवरी 2019