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क्रेनियोफेरिन्जयोमा

क्रेनियोफेरिन्जयोमा क्या है?

क्रेनियोफेरिन्जयोमा दुर्लभ मस्तिष्क का कैंसर हैं जो आमतौर पर पीयूष ग्रंथि और हाइपोथेलेमस के पास विकसित होता है। ये कैंसर-रहित, धीमी गति से बढ़ने वाले ट्यूमर होते हैं और मस्तिष्क के अन्य भागों में इनके फैलने की संभावना बहुत ही कम होती है। हालांकि, आसपास की मस्तिष्क संरचनाओं पर प्रभाव पड़ने के कारण यह ट्यूमर बहुत हानिकारक हो सकता है। उनके स्थान के कारण, क्रेनियोफेरिन्जयोमा एंडोक्राइन के कार्य और हार्मोन के स्तर को प्रभावित करते हैं। यदि ट्यूमर आंख की नस (तंत्रिका) पर दबाव डालता है, तो इससे आंख संबंधी नस भी प्रभावित हो सकती है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा आमतौर पर पीयूष ग्रंथि और हाइपोथेलेमस के पास विकसित होते हैं। इस भाग में स्थित ट्यूमर एंडोक्राइन फ़ंक्शन को प्रभावित करते हैं। यदि ट्यूमर आंख की नस (तंत्रिका) के बिल्कुल निकट स्थित है, तो इससे दृष्टि भी प्रभावित हो सकती है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा आमतौर पर पीयूष ग्रंथि और हाइपोथेलेमस के पास विकसित होते हैं। इस भाग में स्थित ट्यूमर एंडोक्राइन फ़ंक्शन को प्रभावित करते हैं। यदि ट्यूमर आंख की नस (तंत्रिका) के बिल्कुल निकट स्थित है, तो इससे दृष्टि भी प्रभावित हो सकती है।

बचपन में होने वाला क्रेनियोफेरिन्जयोमा, आमतौर पर 5-14 साल में होता है। यह ट्यूमर 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों में बहुत कम ही होता है। बचपन में होने वाले मस्तिष्क के कैंसर में से क्रेनियोफेरिन्जयोमा का अनुपात लगभग 6% है। अमेरिका में हर वर्ष बाल-रोग क्रेनियोफेरिन्जयोमा के 100-120 के केस पाए जाते हैं।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के इलाज में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी या दोनों शामिल हो सकते हैं। सर्जरी का लक्ष्य, रेडिएशन थेरेपी से पहले, ट्यूमर को पूरी तरह से हटाना या लक्षणों को दूर करने के लिए ट्यूमर के एक हिस्से को हटाना है। रेडिएशन थेरेपी का उपयोग अकेले या सर्जरी के साथ किया जा सकता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा में 10-वर्ष तक जीवित रहने की दर 80-90% है। संभावित दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण, क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद जीवन शैली का समर्थन करने के लिए एक बहु-विषयक देखभाल टीम के साथ मिलकर काम करना परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के लक्षण

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के संकेत और लक्षण ट्यूमर के आकार और स्थान पर निर्भर करते हैं। लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • हार्मोन और एंडोक्राइन फ़ंक्शन में परिवर्तन इसके परिणामस्वरूप धीमा विकास या जवान होने में देरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • दृष्टि से संबंधित समस्याएं या दृष्टि हानि
  • सिरदर्द
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • ऊर्जा में कमी, थकान
  • भ्रम होना
  • सोचने और सीखने में समस्या
  • व्यक्तित्व या व्यवहार में परिवर्तन
  • अधिक प्यास लगना या बार-बार पेशाब करना, जो डायबीटीज़ इनसिपिडस के कारण हो सकता है
  • निम्न रक्त चाप
  • वजन बढ़ना
  • भूख अधिक या कम लगना

हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी आ जाना) के साथ क्रेनियोफेरिन्जयोमा

ट्यूमर के बढ़ने के साथ, रीढ़ की हड्डी में पानी का सामान्य प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है। इसके कारण मस्तिष्क के अंदर द्रव जमा होने लगता है जिसे हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी आ जाना) के रूप में जाना जाता है। तरल पदार्थ मस्तिष्क में द्रव से भरे रास्ते (निलय) को चौड़ा करने का कारण बनता है और मस्तिष्क पर दबाव बढ़ाता है। क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बहुत से लक्षण मस्तिष्क पर बढ़े इस दबाव (इंट्राक्रेनियल दबाव) के कारण उत्पन्न होते हैं।

हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी आ जाना) क्या है? ट्यूमर के बढ़ने के साथ, रीढ़ की हड्डी में पानी का सामान्य प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है। इसके कारण मस्तिष्क के अंदर द्रव जमा होने लगता है जिसे हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी आ जाना) के रूप में जाना जाता है।

ट्यूमर के बढ़ने के साथ, रीढ़ की हड्डी में पानी का सामान्य प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है। इसके कारण मस्तिष्क के अंदर द्रव जमा होने लगता है जिसे हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी आ जाना) के रूप में जाना जाता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा निदान

क्रेनियोफेरिन्जयोमा की पहचान एक शारीरिक जांच, चिकित्सकीय इतिहास, लक्षणों का मूल्यांकन और कभी-कभी खून की जाँच से शुरू होता है। चिकित्सक तब एमआरआई या सीटी स्कैन का आदेश दे सकते हैं। क्रेनियोफेरिन्जयोमा की पहचान इमेजिंग जाँच या ट्यूमर ऊतक या मस्सा तरल पदार्थ के विश्लेषण के आधार पर किया जा सकता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा की पहचान में सहायता के लिए विशिष्ट चिकित्सा परीक्षण शामिल हो सकते हैं:

  • शारीरिक जांच और चिकित्सकीय इतिहास से चिकित्सकों को लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने में मदद मिलती है।
  • रक्त और पेशाब की जाँच का उपयोग हार्मोन, इलेक्ट्रोलाइट्स और ट्यूमर मार्कर सहित रक्त में पदार्थों को मापने के लिए किया जाता है।
    • हार्मोन जैसे कि वृद्धि हार्मोन, थायराइड हार्मोन, एड्रेनोकोर्टिकोट्रोपिक हार्मोन, और गोनैडोट्रोपिन (हार्मोन जो सेक्स हार्मोन को नियंत्रित करते हैं)
    • सोडियम, कैल्शियम, और पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का रक्त और पेशाब स्तर।
    • पेशाब का उत्पादन और पेशाब (विशिष्ट गुरुत्व) की सांद्रता, डायबीटीज़ इनसिपिडस के लिए परीक्षण करने के लिए।
    • एक जर्म सेल ट्यूमर की उपस्थिति का पता लगाने के लिए, अल्फा-फेटोप्रोटीन (α-एफपी) और बीटा-मानव कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (β-एचसीजी) सहित ट्यूमर मार्कर, जो कभी-कभी क्रेनियोफेरिन्जयोमा समझ लिया जाता है।
  • न्यूरोलॉजिकल परीक्षण में मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं के कार्यों का निरीक्षण किया जाता है। ये जांचें, स्मृति, देखने, सुनने, मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, समन्वय और प्रतिवर्ती क्रियाओं सहित मस्तिष्क के कार्यों के विभिन्न पहलुओं को मापती हैं।
  • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) और मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) सहित इमेजिंग जांच का उपयोग क्रेनियोफेरिन्जयोमा की पहचान में मदद करने के लिए किया जाता है। क्रेनियोफेरिन्जयोमा आमतौर पर एक ठोस पिंड और द्रव से भरे हुए मस्से से बने होते हैं। छवियाँ, ट्यूमर के आकार और स्थान के बारे में भी जानकारी देती हैं। अक्सर एमआरआई को वरीयता दी जाती है, चूंकि यह आमतौर पर मस्तिष्क के कैंसर की स्पष्ट तस्वीर प्रदान करता है। मस्सा कैल्सीफिकेशन देखने के लिए सीटी का उपयोग किया जा सकता है, यह बाल चिकित्सा क्रेनियोफेरिन्जयोमा की एक सामान्य विशेषता है। एमआरआई और सीटी का उपयोग ट्यूमर के ठोस और सिस्टिक घटकों की विशिष्ट इमेजिंग विशेषताओं के आधार पर क्रेनियोफेरिन्जयोमा की पहचान के लिए किया जा सकता है।
  • बायोप्सी (टुकड़ा निकालना) या सर्जरी से ट्यूमर के ऊतक का विश्लेषण क्रेनियोफेरिन्जयोमा की पुष्टि कर सकता है। उसके बाद एक रोगविज्ञानी ट्यूमर के विशिष्ट प्रकार का पता लगाने के लिए उस ऊतक के नमूने को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर देखता है। एक विकल्प के रूप में, ट्यूमर मस्सा तरल पदार्थ को क्रेनियोफेरिन्जयोमा की पहचान में सहायता करने के लिए परीक्षण किया जा सकता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के प्रकार

क्रेनियोफेरिन्जयोमा को 2 मुख्य प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है:

  1. एडमैंटिनोमेटस क्रेनियोफेरिन्जयोमा बच्चों में क्रेनियोफेरिन्जयोमा का सबसे आम प्रकार है। ये ट्यूमर अधिक अनियमित आकार के होते हैं और आमतौर पर मस्सा और कैल्सीफिकेशन के क्षेत्र होते हैं। ट्यूमर की कोशिकाओं में CTNNB1 वंशाणु में बदलाव अक्सर पाया जाता है।
  2. पैपिलरी क्रेनियोफेरिन्जयोमा वयस्कों में सबसे आम है और बच्चों में बहुत कम होता है। ये ट्यूमर अधिक ठोस दिखाई देते हैं और आमतौर पर ट्यूमर की कोशिकाओं में BRAF वंशाणु में परिवर्तन होता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के लिए स्तर का पता लगाने की कोई मानक प्रणाली नहीं है। ट्यूमर को हाल ही में पहचान किए गए या दुबारा होने के रूप में वर्णित किया जाता है।

सीटी स्कैन मस्सा कैल्सीफिकेशन, बाल चिकित्सा क्रेनियोफेरिन्जयोमा की एक सामान्य विशेषता दिखा सकता है।

सीटी स्कैन मस्सा कैल्सीफिकेशन, बाल चिकित्सा क्रेनियोफेरिन्जयोमा की एक सामान्य विशेषता दिखा सकता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा दिखाने वाले चिह्नों के साथ एमआरआई स्कैन। क्रेनियोफेरिन्जयोमा आमतौर पर पीयूष ग्रंथि और हाइपोथेलेमस के पास विकसित होते हैं।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा दिखाने वाले चिह्नों के साथ एमआरआई स्कैन। क्रेनियोफेरिन्जयोमा आमतौर पर पीयूष ग्रंथि और हाइपोथेलेमस के पास विकसित होते हैं।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा दिखाने वाले चिह्नों के साथ एमआरआई स्कैन। क्रेनियोफेरिन्जयोमा धीमी गति से बढ़ते हैं, लेकिन वे असामान्य हार्मोन के स्तर और दृष्टि परिवर्तन सहित समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा दिखाने वाले चिह्नों के साथ एमआरआई स्कैन। क्रेनियोफेरिन्जयोमा धीमी गति से बढ़ते हैं, लेकिन वे असामान्य हार्मोन के स्तर और दृष्टि परिवर्तन सहित समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा पूर्वानुमान

क्रेनियोफेरिन्जयोमा में 10-वर्ष तक जीवित रहने की दर 80-90% है। क्रेनियोफेरिन्जयोमा, कैंसर नहीं है और बहुत कम ही फैलते हैं। हालांकि, इनसे गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं जिसमें एंडोक्राइन फ़ंक्शन में परिवर्तन होना और आंख की नस (तंत्रिका) को क्षति पहुंचना भी शामिल है। इसके अलावा, क्रेनियोफेरिन्जयोमा के इलाज की योजना बनाते समय जीवन की दीर्घकालिक गुणवत्ता पर विचार करना महत्वपूर्ण है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा इलाज

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के इलाज में सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी शामिल है। वर्तमान में, कोई प्रभावी कीमोथेरेपी नहीं है, और कीमोथेरेपी को शायद ही कभी क्रेनियोफेरिन्जयोमा के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। कुछ प्रकार के क्रेनियोफेरिन्जयोमा के लिए लक्षित चिकित्सा का अध्ययन किया जा रहा है।

अधिकांश स्थितियों में, बाल चिकित्सा क्रेनियोफेरिन्जयोमा के इलाज की पद्धति का निर्धारण उत्तरजीविता पर कम और बेहतर जीवन शैली पर अधिक निर्भर होता है। यह आवश्यक है कि बच्चों का इलाज रेडिएशन कैंसरविज्ञान, न्यूरोसर्जरी, एंडोक्रिनोलॉजी, तंत्रिकाविज्ञान / स्नायुविज्ञान और नेत्र विज्ञान के विशेषज्ञों सहित एक अनुभवी चिकित्सीय टीम के द्वारा किया जाए। चिकित्सकों को परिवारों के साथ प्रत्येक इलाज के जोखिम और लाभों के बारे में चर्चा करनी चाहिए, ताकि वे विचारपूर्ण निर्णय ले सकें।

  1. क्रेनियोफेरिन्जयोमा वाले ज्यादातर बच्चों में उनकी इलाज योजना के हिस्से के रूप में सर्जरी की जाती है। सर्जरी को रोग की पहचान करना में मदद करने, लक्षणों से राहत देने और ट्यूमर को जितना संभव हो उतना सुरक्षित निकालने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। क्रेनियोफेरिन्जयोमा के लिए सर्जरी का विस्तार-क्षेत्र ट्यूमर के आकार और स्थान के साथ-साथ सर्जरी के संभावित जोखिमों पर निर्भर करता है। कुछ स्थितियों में, अकेले सर्जरी से ही ट्यूमर पर लंबे समय तक नियंत्रण रखना संभव होता है।

    सर्जिकल तकनीकों में सुधार जारी है, ताकि आस-पास की संरचनाओं को कम जोखिम के साथ अधिक सटीक और पूर्ण सर्जरी की जा सके। हालांकि, सर्जरी अक्सर ट्यूमर को पूरी तरह से निकालने में सक्षम नहीं होती है। इसके अतिरिक्त, आवश्यक मस्तिष्क-संबंधी और एंडोक्राइन फ़ंक्शन पर संभावित प्रभाव पड़ने के कारण अधिक व्यापक सर्जरी (रेडिकल सर्जरी) के साथ गंभीर उलझन/जटिलताएं हो सकती हैं।

    चिकित्सक सीमित या अपरिवर्तनवादी सर्जरी की योजना बना सकते हैं जिसमें ट्यूमर को पूरी तरह से नहीं निकाला जाता है। इसके बजाय, सीमित सर्जरी में प्राथमिक लक्ष्य लक्षणों या समस्याओं का इलाज करना होता है। सीमित सर्जरी में, सर्जन रोग की पहचान करने, ट्यूमर में मौजूद मस्से से द्रव को बाहर निकालने और आंख की नस (तंत्रिका) पर दवाब को दूर करने पर ध्यान देता है। सीमित सर्जरी के बाद अक्सर रेडिएशन थेरेपी दी जाती है।

    रेडिकल सर्जरी बनाम क्रेनियोफेरिन्जयोमा के लिए सीमित सर्जरी

      लाभ हानि
    रेडिकल सर्जरी
    रेडिएशन थेरेपी से संबद्धित जटिलताओं से बचें

    सर्जरी आसपास के मस्तिष्क संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है और तत्काल और दीर्घकालिक दोनों प्रभाव पैदा कर सकती है:

    • तीव्र चोट जिसमें आघात, दृष्टि हानि, डायबीटीज़ इनसिपिडस और हार्मोन की कमी और दर्दनाक मस्तिष्क की चोट शामिल हैं।
    • व्यक्तित्व परिवर्तन, डायबीटीज़ इनसिपिडस, हार्मोन की कमी और मोटापा सहित दीर्घकालिक प्रभाव हैं
    सीमित सर्जरी + रेडिएशन
    व्यक्तित्व के प्रति कम जोखिम

    रेडिएशन थेरेपी, दीर्घकालिक और देर से प्रभाव पैदा कर सकती है:

    • संज्ञानात्मक प्रभाव, हार्मोन की कमियां, बहरापन, रक्त वाहिकाएं और ऊतकों का खत्म होना, आघात, माध्यमिक ट्यूमर (जो कैंसर नहीं है और जो कैंसर हैं)

    ट्यूमर तक पहुंचने के लिए विभिन्न सर्जिकल तकनीकों का उपयोग किया जाता है। सर्जन, ट्रांसस्फेनोइडल सर्जरी (एंडोनेज़ल सर्जरी) के माध्यम से ट्यूमर तक पहुंचने में सक्षम हो सकते हैं। यह न्यूनतम इन्वेसिव सर्जरी ट्यूमर तक पहुंचने के लिए नासिका मार्ग और साइनस गुहा के माध्यम से की जाती है। अथवा, सर्जन कपालछेदन (क्रेनियोटॉमी) या खोपड़ी में शल्य क्रिया द्वारा छेद कर सकता है। सर्जिकल तकनीक ट्यूमर के स्थान और सर्जरी के लक्ष्यों पर निर्भर करती है। सर्जिकल तकनीकों में सुधार जारी है, ताकि आस-पास की संरचनाओं को कम जोखिम के साथ अधिक सटीक और पूर्ण सर्जरी की जा सके।

    मस्सा प्रबंधित करने के लिए सर्जरी - क्रेनियोफेरिन्जयोमा आमतौर पर एक ठोस पिंड और द्रव से भरे हुए मस्से से बने होते हैं। कुछ स्थितियों में, सर्जरी में मस्सा से तरल पदार्थ को बाहर निकालने के लिए ट्यूमर के सिस्टिक भाग में एक नली लगाई जाती है। इस द्रव को निकालने से बीमारी से जुड़े बहुत से लक्षणों में मदद मिल सकती है। नली (कैथेटर) अस्थायी या स्थायी हो सकती है। इसमें ओम्माया रेज़रवॉयर लगाना शामिल हो सकता है, जो तरल पदार्थ को खोपड़ी के नीचे रखे एक छोटे, गुंबद के आकार के संग्रह उपकरण में सूखा देती है। रेज़रवॉयर में द्रव एकत्र होने के बाद, द्रव को निकालने के लिए एक सुई का उपयोग किया जा सकता है।

    हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी आ जाना) को प्रबंधित करने के लिए सर्जरी - क्रेनियोफेरिन्जयोमा वाले कुछ रोगियों में हाइड्रोसिफ़लस का प्रबंधन करने में मदद करने के लिए सर्जरी हो सकती है। इसमें मस्तिष्क (तीसरे वेंट्रिकुलोस्टॉमी) में तीसरे वेंट्रिकल की सतह में छेद करना शामिल हो सकता है, ताकि तरल पदार्थ का निर्माण किया जा सके। अन्य स्थितियों में चिकित्सक एक शंट लगा सकता है, शंट एक छोटी सी नली जैसा होता है जो रीढ़ की हड्डी में पानी (सीएसएफ) को खींच लेता है, ताकि उसे मस्तिष्क से निकाला जा सके। शंट अस्थायी या स्थायी हो सकता है।

  2. क्रेनियोफेरिन्जयोमा के लिए सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है, खासकर अगर सीमित सर्जरी की गई थी। उपयोग की जाने वाली रेडिएशन थेरेपी का प्रकार ट्यूमर के स्थान पर निर्भर करता है। रेडिएशन के उपयोग में बच्चे की आयु एक विचार करने योग्य महत्वपूर्ण मुद्दा है। रेडिएशन थेरेपी का उपयोग भी किया जाता है यदि ट्यूमर पिछली सर्जरी के बाद वापस आता है। रेडिएशन के कारण होने वाले प्रभाव संभावित रूप से देरी से दिखाई दे सकते हैं इसलिए उनकी निगरानी की जानी चाहिए।

    एक्स-रे का उपयोग करने वाली पारंपरिक रेडिएशन थेरेपी की तुलना में एक नए प्रकार की रेडिएशन थेरेपी, प्रोटॉन थेरेपी के कई लाभ हो सकते हैं। हालांकि, इस प्रकार के इलाज का अध्ययन अभी भी किया जा रहा है और यह हर चिकित्सा केंद्र पर उपलब्ध नहीं है।

    रेडिएशन थेरेपी का उपयोग सर्जरी क्रेनियोफेरिन्जयोमा के साथ किया जाता है , विशेषकर तब जब सीमित सर्जरी की गई हो। यह थेरेपी, ट्यूमर को छोटा करने और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रेडिएशन की बीम का उपयोग करती है। रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को क्षति पहुंचाते हुए कार्य करता है।

    रेडिएशन थेरेपी का उपयोग सर्जरी क्रेनियोफेरिन्जयोमा के साथ किया जाता है , विशेषकर तब जब सीमित सर्जरी की गई हो। यह थेरेपी, ट्यूमर को छोटा करने और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रेडिएशन की बीम का उपयोग करती है। रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को क्षति पहुंचाते हुए कार्य करता है।

    रेडिएशन थेरेपी को अक्सर छोटी-छोटी खुराकों में दिया जाता है जिन्हें फ़्रैक्शन कहा जाता है। क्रेनियोफेरिन्जयोमा के लिए फ़्रैक्शन रेडिएशन थेरेपी में, अधिकांश रोगियों को लगभग 6 सप्ताह के लिए सोमवार से शुक्रवार तक, 5 दिन प्रति सप्ताह इलाज प्राप्त होता है। रेडिएशन थेरेपी को आमतौर पर एक-बारगी इलाज माना जाता है। ऐसा बहुत ही कम होता है कि रेडिएशन थेरेपी का एक कोर्स दुबारा दिया जाए।

    विशेष स्थितियों में, जिनमें वे रोगी शामिल हैं जिनके ट्यूमर रेडिएशन थेरेपी के बाद बढ़ जाते हैं, क्रेनियोफेरिन्जयोमा का इलाज करने के लिए रेडिएशन थेरेपी (रेडियोसर्जरी) की एकल खुराक का उपयोग किया जा सकता है। रेडियोसर्जरी में, ट्यूमर के केंद्रित भाग में रेडिएशन की एक उच्च खुराक दी जाती है। यदि सर्जरी ट्यूमर को पूरी तरह से निकाल नहीं पाती तो ऐसे में रेडिएशन थेरेपी के बाद बढ़ने वाले ट्यूमर का इलाज करना कठिन होता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद का जीवन

क्रेनियोफेरिन्जयोमा से बचने वाले अधिकांश लोग, ट्यूमर या उसके इलाज के कारण, उलझन / जटिलताओं से ग्रस्त रहते हैं जो उनकी जीवन शैली को प्रभावित करती हैं। इनमें निम्नलिखित समस्याएं शामिल हो सकती हैं:

  • एंडोक्राइन तंत्र की समस्याएं और असामान्य हार्मोन का स्तर पीयूष ग्रंथि और हाइपोथेलेमस को नुकसान पहुंचाता है
  • मोटापा
  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम
  • डायबीटीज़ इनसिपिडस
  • अत्यधिक दिन की नींद (ईडीएस) सहित नींद संबंधी विकार
  • आंखों की रोशनी खो जाना
  • व्यक्तित्व, भाव या व्यवहार में परिवर्तन
  • मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं को नुकसान और धमनियों में सूजन और स्ट्रोक जैसे विकार
  • सीखने और स्मृति की समस्याएं
क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद के जीवन में एंडोक्राइन तंत्र से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। एंडोक्राइन तंत्र ग्रंथियों का एक समूह है जो शरीर के कई कामों जैसे विकास, जवान होने के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों, ऊर्जा स्तर, मूत्र उत्पादन और तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद के जीवन में एंडोक्राइन तंत्र से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। एंडोक्राइन तंत्र ग्रंथियों का एक समूह है जो शरीर के कई कामों जैसे विकास, जवान होने के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों, ऊर्जा स्तर, मूत्र उत्पादन और तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद हार्मोन का असंतुलन

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद के जीवन में एंडोक्राइन तंत्र से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। एंडोक्राइन तंत्र ग्रंथियों का एक समूह है जो शरीर के कई कार्यों जैसे कि विकास, जवानी, प्रजनन, मेटाबोलिज्म (चयापचय), मूत्र उत्पादन, नींद, शरीर का तापमान, भावनाओं और तनाव की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए हार्मोन बनाता है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद अधिकांश समस्याएं असामान्य हार्मोन के स्तर से संबंधित हैं जो पीयूष ग्रंथि या हाइपोथेलेमस को नुकसान के कारण होती हैं। हार्मोन जो प्रभावित हो सकते हैं उनमें वृद्धि हार्मोन, थायराइड स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (टीएसएच), एड्रेनोकोर्टिकोट्रोपिक हार्मोन (एसीटीएच), फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (एफएसएच), ल्यूटिनकारी हार्मोन (एलएच), प्रोलैक्टिन और एंटीडायरेक्टिक हार्मोन (एडीएच) शामिल हैं। हार्मोन रिप्लेसमेंट उपचार की अक्सर जरूरत होती है।

  • पीयूष विकार: पीयूष ग्रंथि को “मास्टर ग्रंथि” कहा जाता है क्योंकि यह बहुत से हार्मोन और अन्य ग्रंथियों के नियंत्रण के लिए ज़िम्मेदार होती है। असामान्य पीयूष कार्य से मोटापा, खराब लिपिड प्रोफ़ाइल, हड्डियों के खनिज घनत्व में कमी और प्रजनन समस्याओं सहित कई समस्याएं हो सकती हैं। ये समस्याएं रोगी द्वारा हार्मोन प्रतिस्थापन दवाइयों का सेवन किए जाने पर भी उत्पन्न हो सकती हैं।
  • हाइपोथेलेमस विकार - हाइपोथेलेमस को क्षति पहुंचने के परिणामस्वरूप भी हार्मोन परिवर्तन होते हैं जो जीवन शैली को प्रभावित करते हैं। इन समस्याओं में भूख में वृद्धि और वजन बढ़ना गंभीर मोटापे का कारण है। व्यवहार और भावनाओं में परिवर्तन भी आम है, और रोगियों में मिजाज, गतिविधियों में रुचि की हानि, सामाजिक मेल-मिलाप न करना और थकान हो सकती है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद मोटापा

क्रेनियोफेरिन्जयोमा अक्सर हाइपोथेलेमस के कारण होता है, हाइपोथेलेमस को नुकसान के कारण अत्यधिक वजन बढ़ जाता है। यह मेटाबोलिज्म (चयापचय) में परिवर्तन (आराम से कम कैलोरी जलना), भूख में वृद्धि और कम शारीरिक गतिविधि के स्तर सहित कारकों की एक जटिल बातचीत के कारण होने की संभावना है। मोटापा तब भी हो सकता है जब रोगी सामान्य से अधिक नहीं खाते हैं। हाइपोथेलेमस मोटापे का इलाज करना कठिन है, और यह रोगियों, परिवारों और चिकित्सक के लिए निराशाजनक हो सकता है। मोटापा हृदय रोग, मधुमेह/डायबीटीज़, आघात और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के साथ-साथ खराब शारीरिक कार्य, जोड़ों की समस्याओं और कम फिटनेस स्तर के जोखिम को बढ़ाता है। क्रेनियोफेरिन्जयोमा से बचे लोगों की जीवन शैली के लिए, अच्छे पोषण और शारीरिक गतिविधि जैसी स्वस्थ आदतों का महत्व और भी बढ़ जाता है।

बचपन के क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद मेटाबॉलिक सिंड्रोम

मेटाबॉलिक सिंड्रोम एक आम स्वास्थ्य समस्या है जो बचपन में हुए क्रेनियोफेरिन्जयोमा से जीवित बचने वाले लोगों की जीवन शैली और आयुकाल को प्रभावित करती है। यह सिंड्रोम स्थितियों का एक समूह है जिसमें मोटापा, उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा का स्तर, उच्च ट्राइग्लिसराइड का स्तर और निम्न एचडीएल स्तर (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) शामिल हैं। मेटाबॉलिक सिंड्रोम हृदय रोग, आघात और मधुमेह/डायबीटीज़ से जुड़ा हुआ है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद नींद की समस्या

क्रेनियोफेरिन्जयोमा से बचे लोगों में नींद की अधिकता जैसे कि दिन के समय नींद आना आम है। यह अक्सर हाइपोथेलेमस की खराबी की वजह से होता है। नींद की बीमारी थकान, भावनात्मक और व्यवहार संबंधी समस्याओं और सीखने या स्मृति संबंधी समस्याओं जैसे लक्षणों में योगदान कर सकता है। थकान महसूस करना भी स्वस्थ खाने या शारीरिक रूप से सक्रिय होने को कठिन बनाता है, जिससे आगे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। नींद की बीमारी का संदेह होने पर रोगियों के लिए स्वस्थ नींद की आदतें और मदद लेना महत्वपूर्ण है।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद मस्तिष्क स्वास्थ्य

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के लिए इलाज, जिसमें सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी शामिल हैं, दीर्घकालिक मस्तिष्क स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। क्रेनियोफेरिन्जयोमा से बचे लोगों को अक्सर मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में समस्याओं के विकास का अधिक खतरा होता है। इन परिवर्तनों से कभी-कभी इस्किमिया या आघात हो सकता है। रोगियों में दौरे पड़ने के जोखिम में भी वृद्धि होती है। क्रेनियोफेरिन्जयोमा वाले बच्चों में संज्ञानात्मक समस्याएं (संज्ञानात्मक देरी से प्रभाव) हो सकती हैं। कक्षा में सामंजस्य और स्कूल सहायता सेवाएं छात्रों और परिवारों को किसी भी शैक्षिक चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकती हैं।

क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद जीवन शैली: परिवार के लिए सुझाव

हालांकि, क्रेनियोफेरिन्जयोमा वाले अधिकांश बच्चे अपनी बीमारी से बचे रहते हैं, दीर्घकालिक प्रभाव आम हैं। रोगियों और परिवार को जीवन शैली को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए कुछ चीजें हैं:

  • एक बहु-विषयक देखभाल टीम से मदद लें। क्रेनियोफेरिन्जयोमा वाले बच्चों के रोग की प्रगति की निगरानी करने, हार्मोन के स्तर और कार्य का मूल्यांकन करने और स्वास्थ्य समस्याओं का प्रबंधन करने के लिए चल रही चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। रोगियों को इलाज और उत्तरजीविता के दौरान मनोसामाजिक सहायता से भी लाभ मिल सकता है। मनोविज्ञान, बाल जीवन, सामाजिक कार्य और अन्य विषयों का प्रतिनिधित्व करने वाले देखभाल टीम के सदस्य सामाजिक अलगाव और निराशा की बीमारी और संज्ञानात्मक समस्याओं के जोखिम सहित परेशानियों से निपटने और उनके अनुकूल ढलने में सहायता कर सकते हैं।
  • स्वस्थ भोजन और व्यायाम को प्रोत्साहित करें। स्वस्थ आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि वजन घटाने, हृदय रोग और मधुमेह/डायबीटीज़ जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने और जीवन शैली और शारीरिक कार्य को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये आदतें नींद और सीखने को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकती हैं। क्रेनियोफेरिन्जयोमा के भावनात्मक और व्यवहार प्रभाव भी रोगियों और परिवारों के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। एक आहार विशेषज्ञ, परिवारों को पौष्टिक भोजन और स्नैक्स की योजना बनाने, भूख को नियंत्रित करने, और स्वस्थ खाने की आदतों को विकसित करने में मदद करने के लिए रणनीति ढूंढने में मदद कर सकता है। एक लाइसेंस प्राप्त पुनर्सुधार चिकित्सक या एक प्रमाणित फिटनेस पेशेवर एक मरीज की विशिष्ट स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए अनुकूलित व्यायाम की मदद कर सकता है।
  • अच्छी नींद लेने की आदत डालें। कैंसर से ठीक हुए लोगों में नींद संबंधी विकार आम हैं, खासकर क्रेनियोफेरिन्जयोमा के बाद। दिन में अत्यधिक नींद का सामना करने के तरीकों में कभी-कभी झपकी, बढ़ती शारीरिक गतिविधि और स्कूल में सामंजस्य शामिल हैं। नींद की आदतों को सुधारने और संभालने की कला विकसित करने के लिए एक चिकित्सक सतर्कता से मदद करने या संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी की सिफारिश करने के लिए दवा लिख सकता है। स्वस्थ नींद दिनचर्या, नींद की गुणवत्ता और सतर्कता में सुधार करने में मदद कर सकती है।

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समीक्षा की गई: फरवरी, 2020