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Together, बच्चों को होने वाले कैंसर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति - रोगियों और उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए एक नया सहारा है.

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लोअर जीआई सीरीज़

लोअर जीआई सीरीज़ क्या है?

लोअर जीआई या कंट्रास्ट एनीमा एक जांच है जो रोगी की बड़ी आंत की छवियां बनाती है, जिसमें आंत और गुदा शामिल है। इस जांच को कभी-कभी बेरियम एनीमा भी कहा जाता है। इसका पूरा नाम निचले जठरांत्रीय मार्ग की रेडियोग्राफ़ी है।

इस जांच में फ़्लोरोस्कोपी नामक एक प्रकार के एक्स-रे और कंट्रास्ट तरल पदार्थ या तो बेरियम नामक दूधिया-सफ़ेद पदार्थ या फिर आयोडीन युक्त एक पारदर्शी तरल पदार्थ का उपयोग किया जाता है। फ़्लोरोस्कोपी कार्य कर रहे सक्रिय आंतरिक अंगों को देखना संभव बनाता है, एक “लाइव” एक्स-रे की तरह। यह आंत और मलाशय तथा वे कैसे कार्य करते हैं, यह देखने की सुविधा देता है। कंट्रास्ट तरल पदार्थ आंत को अवलोकन स्क्रीन पर अधिक स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने में मदद करता है।

रोगियों को यह जांच तब करवानी पड़ सकती है जब उन्हें मल त्याग सबंधी समस्याएं होती हैं, जैसे कि क्रॉनिक (पुराना)दस्त, कब्ज, मल में खून आना, मल त्याग की आदतों में बदलाव आना, अनपेक्षित रूप से वजन घटना या पेट दर्द होना।

परीक्षण में आमतौर पर लगभग 30 मिनट लगते हैं।

निचले जठरांत्रीय मार्ग में बड़ी आंत, अपेन्डिक्स और मलाशय शामिल हैं।

निचले जठरांत्रीय मार्ग में बड़ी आंत, अपेन्डिक्स और मलाशय शामिल हैं।

कंट्रास्ट एनीमा कौन करता है?

इस जांच को एक विकिरण चिकित्सक और रेडियोलॉजिकल टेक्नोलॉजिस्ट करते हैं।

क्या कंट्रास्ट एनीमा एक सुरक्षित जांच है?

बेरियम एनीमा एक प्रकार का एक्स-रे है, इसलिए यह छवियों को बनाने के लिए कम मात्रा में आयनीकृत रेडिएशन का उपयोग करता है। रेडिएशन की मात्रा बहुत कम होती है। चिकित्सा लाभ, रेडिएशन जोखिम की थोड़ी मात्रा की तुलना में बहुत ज़्यादा हैं। कोई भी समस्या या चिंता होने पर माता-पिता को चिकित्सीय टीम के साथ उसकी चर्चा करनी चाहिए।

बचपन में होने वाले कैंसर से पीड़ित रोगी में लोअर जीआई सीरीज़ जांच के फ़्लोरोस्कोपिक पक्ष का दृश्य।

बचपन में होने वाले कैंसर से पीड़ित रोगी में लोअर जीआई सीरीज़ जांच के फ़्लोरोस्कोपिक पक्ष का दृश्य।

छोटे हरे तीर जो एक लोअर जीआई सीरीज़ जांच से प्राप्त छवि पर निचले जठरांत्रीय मार्ग में अवरोध की ओर संकेत करते हैं

छोटे हरे तीर जो एक लोअर जीआई सीरीज़ जांच से प्राप्त छवि पर बड़ी आंत के एक समस्या ग्रस्त भाग की ओर संकेत करते हैं।

तैयारी करने के लिए रोगियों को क्या करना चाहिए?

  • आंत को खाली करें: जांच के लिए रोगी की आंत खाली होनी चाहिए। यदि जांच से पहले आंत खाली नहीं है, तो प्रक्रिया रद्द कर दी जाएगी
  • पारदर्शी तरल पदार्थों के अलावा किसी भी खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ का सेवन न करें: रोगी को जांच से कई घंटे पहले तक साफ तरल पदार्थों के अलावा कुछ भी खाना या पीना नहीं चाहिए। निर्देश, बाल चिकित्सा केंद्र, रोगी की उम्र और जांच के कारण पर निर्भर करते हैं। तैयारी में आमतौर पर मैग्नेशियम साइट्रेट का सेवन करना और बहुत सारा पानी पीना शामिल है। जांच से कई घंटे पहले तक रोगी का मल पानी जैसा पतला होना चाहिए और पेट साफ़ हो जाना चाहिए।

माता-पिता रोगी को तैयार करने में कैसे मदद कर सकते हैं?

माता-पिता को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि रोगी:

  • समझता या समझती है कि परीक्षण क्यों हो रहा है और इसमें क्या होगा. शिशु जीवन विशेषज्ञ इसे समझाने में मदद कर सकते हैं।
  • ऐसे ढीले, आरामदायक कपड़े पहने जिन्हें पहनना और उतारना आसान हो।

परीक्षण से पहले किन विवरणों का ध्यान रखा जाना चाहिए?

  • माता-पिता को अपनी बीमा कंपनी से यह पता लगाने के लिए परामर्श करना पड़ सकता है कि वह इस प्रक्रिया के लिए कितनी राशि का भुगतान करेगी।
  • माता-पिता को ये बातें चिकित्सीय टीम को बताना चाहिए:
    • कोई भी दवा जो रोगी लेता है, जिसमें बिना पर्ची वाली दवाएं भी शामिल हैं।
    • एलर्जी, विशेषकर कंट्रास्ट तरल पदार्थ के प्रति। (यह संभावना है कि इसमें या तो बेरियम या आयोडीन शामिल होंगे।)
  • केंद्र पर पहुंचने के लिए पर्याप्त समय दें। मुलाकात के लिए समय पर पहुंचना आवश्यक होता है, भले ही चेक-इन के लिए दिए जाने वाले समय से कुछ समय पहले पहुंच जाएं।
  • माता-पिता और रोगी प्रक्रिया के लिए समय होने तक प्रतीक्षा करने वाली जगह पर प्रतीक्षा करेंगे। प्रतीक्षा अवधि लंबी होने की स्थिति में ही कुछ और करें।

कंट्रास्ट एनीमा के दौरान क्या होता है?

  • रेडियोलॉजी स्टाफ़ का एक सदस्य परिवार के साथ इस बारे में बात करेगा कि रोगी को बेरियम एनीमा की आवश्यकता क्यों है और उन्हें इसकी प्रक्रिया समझाएगा।
  • स्टाफ़ का एक सदस्य एक्स-रे टेबल पर रोगी की मदद करेगा। इस जांच के लिए रोगी पेट के बल या एक ओर करवट लेकर लेटेगा। शिशुओं या छोटे बच्चों को स्थिर रखने में मदद के लिए एक विशेष उपकरण का उपयोग किया जा सकता है।
  • टेक्नोलॉजिस्ट या विकिरण चिकित्सक रोगी के मलाशय में एक छोटी सी नली डालेगा। रोगी के माप और उम्र के अनुसार विभिन्न आकार की नलियां उपलब्ध होती हैं।
  • टेक्नोलॉजिस्ट इस नली को सही जगह पर रखने के लिए किसी चीज़ का उपयोग करेगा, संभवत: टेप या किसी छोटे फुलाए हुए गुब्बारे का। नली को कंट्रास्ट तरल पदार्थ से भरे एक बैग से जोड़ा जाएगा।
  • विकिरण चिकित्सक एक्स-रे मशीन को, जिसे “फ़्लोरो टॉवर” के नाम से भी जाना जाता है, रोगी के ऊपर घुमाएगा। कंट्रास्ट तरल पदार्थ नली के द्वारा प्रवाहित होगा। जब यह कंट्रास्ट आंत में जाता है, तो टेक्नोलॉजिस्ट अच्छी छवियां लेने के लिए रोगी को धीरे से एक ओर से दूसरी ओर घुमाएगा।
  • जांच के बाद, टेक्नोलॉजिस्ट उस नली को निकाल देगा और रोगी को बाथरूम जाने देगा या रोगी को डायपर पहना कर रखेगा जब तक कि उसे मल त्याग नहीं होता है। टीम उसके बाद अतिरिक्त छवियां ले सकती है।

रोगी को कैसा महसूस होगा?

रोगी के मलाशय में लगी नली से उसे असुविधा महसूस होगी। रोगी को लगेगा कि उसे मल त्याग करने की ज़रूरत है। इसमें कुछ ऐंठन भी महसूस हो सकती है। ये एहसास केवल थोड़े समय तक ही रहेंगे।

परीक्षण के बाद रोगी को क्या महसूस होगा?

  • जांच के बाद, रोगी को कुछ अतिरिक्त पेय पदार्थ लेने चाहिए क्योंकि कंट्रास्ट से कब्ज की शिकायत हो सकती है।
  • पहली बार में, यदि कंट्रास्ट तरल पदार्थ के रूप में बेरियम का उपयोग किया गया है तो रोगी का मल सफ़ेद या स्लेटी रंग का दिखाई दे सकता है।

परिवार को परिणाम, कैसे पता चलेगा?

विकिरण चिकित्सक परिणामों की व्याख्या करेगा और जांच की मांग करने वाले चिकित्सक को उसकी एक रिपोर्ट भेजेगा। चिकित्सीय टीम का एक सदस्य अगली नियोजित मुलाकात पर परिणामों को साझा करेगा।


समीक्षा की गई: जून 2018