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छोटी आंत के साथ अपर जीआई सीरीज़

अपर जीआई (जठरांत्रीय मार्ग) सीरीज़ परीक्षण रेडियोलॉजी टीम को अपर जीआई मार्ग देखने की सुविधा देती है। इसमें भोजन-नली, पेट और छोटी आंत का ऊपरी भाग (डुओडिनम) शामिल है।

छोटी आंत के साथ अपर जीआई सीरीज़ क्या है?

छोटी आंत सीरीज़ के साथ अपर जीआई सीरीज़ में भोजन-नली, पेट और पूरी छोटी आंत शामिल है।

अपर जीआई (छोटी आंत सीरीज़ के साथ) परीक्षण कैसे कार्य करता है?

यह प्रक्रिया शरीर के अंदर का निरीक्षण करने और आंतरिक गतिमान अंगों को देखने के लिए फ़्लोरोस्कोपी नामक एक प्रौद्योगिकी का उपयोग करती है। यह एक तरह का “लाइव” एक्स-रे होता है जिसे कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा जाता है। रोगी एक कंट्रास्ट तरल पदार्थ को निगलता है जिसमें बेरियम नामक पदार्थ होता है। यह दूधिया-सफ़ेद रंग का तरल पदार्थ भोजन-नली, पेट और आंतों को स्पष्ट रूप से दिखाने में मदद करता है। जब यह बेरियम जठरांत्रीय मार्ग से होकर गुज़रता है तब रेडियोलॉजी टीम उसका निरीक्षण करती है। छवियों को और स्पष्ट करने के लिए कुछ रोगियों को बेकिंग-सोडा के क्रिस्टल (Alka-Seltzer® जैसे) भी दिए जाते हैं। इस प्रक्रिया को एयर-कंट्रास्ट या डबल-कंट्रास्ट अपर जीआई कहा जाता है।

निम्नलिखित कुछ लक्षणों के कारण का पता लगाने में मदद के लिए रोगियों का अपर जीआई सीरीज़ परीक्षण किया जा सकता है:

  • पेट में दर्द
  • जठरांत्रीय रक्तस्राव
  • लगातार उल्टी होना
  • वजन बढ़ाने की कमी
ऊपरी जठरांत्रीय मार्ग में भोजन-नली, पेट और छोटी आंत का ऊपरी भाग (डुओडिनम) शामिल है।

ऊपरी जठरांत्रीय मार्ग में भोजन-नली, पेट और छोटी आंत का ऊपरी भाग (डुओडिनम) शामिल है।

परीक्षण में कितना समय लगता है?

अपर जीआई सीरीज़ परीक्षण में 20 मिनट से 1 घंटे तक का समय लग सकता है।

छोटी आंत के साथ अपर जीआई परीक्षण में 2-6 घंटे या शायद उससे भी अधिक समय लग सकता है। समयावधि, कंट्रास्ट तरल पदार्थ के छोटी आंत से होकर गुज़रने में लगने वाले समय पर निर्भर करती है।

अपर जीआई सीरीज़ जांच कौन करता है?

इस जांच को एक विकिरण चिकित्सक और रेडियोलॉजिकल टेक्नोलॉजिस्ट करते हैं।

क्या अपर जीआई सीरीज़ परीक्षण सुरक्षित है?

अपर जीआई सीरीज़ एक प्रकार का एक्स-रे है। यह परीक्षण छवियां बनाने के लिए एक कम मात्रा में आयनीकृत रेडिएशन का उपयोग करता है। चिकित्सा लाभ, रेडिएशन जोखिम की थोड़ी मात्रा की तुलना में बहुत ज़्यादा हैं। कोई भी समस्या या चिंता होने पर माता-पिता को चिकित्सीय टीम के साथ उसकी चर्चा करनी चाहिए।

तैयारी करने के लिए रोगियों को क्या करना चाहिए?

  • इस परीक्षण के लिए रोगी का पेट खाली होना चाहिए, इसलिए वे जांच से कई घंटे पहले तक कुछ भी खा या पी नहीं सकते।
  • स्टाफ़ परिवार को पालन करने के निर्देश देंगे। निर्देश रोगी की उम्र पर निर्भर करते हैं। परिवारों को ठीक से निर्देशों का पालन करना चाहिए, नहीं तो परीक्षण का समय पुनर्निर्धारित किया जाएगा।

माता-पिता रोगी को तैयार करने में कैसे मदद कर सकते हैं?

माता-पिता को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि रोगी:

  • यह समझता या समझती है कि जांच क्यों हो रही है और इसमें क्या होगा। शिशु जीवन विशेषज्ञ इसे समझाने में मदद कर सकते हैं।
  • ऐसे ढीले, आरामदायक कपड़े पहने जिन्हें पहनना और उतारना आसान हो। रोगी को संभवत: अस्पताल का गाउन पहनना होगा।

परीक्षण से पहले किन विवरणों का ध्यान रखा जाना चाहिए?

  • अस्पताल के आधार पर, माता-पिता को अपनी बीमा कंपनी से यह पता लगाने के लिए परामर्श करना पड़ सकता है कि वह इस प्रक्रिया के लिए कितनी राशि का भुगतान करेगी।
  • माता-पिता को ये बातें चिकित्सीय टीम को बताना चाहिए:
    • कोई भी दवा जो रोगी लेता है, जिसमें बिना पर्ची वाली दवाएं भी शामिल हैं।
    • एलर्जी, विशेषकर कंट्रास्ट तरल पदार्थ के प्रति। (बेरियम)
    • अगर रोगी गर्भवती है या हो सकती है।
  • केंद्र पर पहुंचने के लिए पर्याप्त समय दें। मुलाकात के लिए समय पर पहुंचना आवश्यक होता है, भले ही चेक-इन के लिए दिए जाने वाले समय से कुछ समय पहले पहुंच जाएं।
  • माता-पिता और रोगी प्रक्रिया के लिए समय होने तक प्रतीक्षा करने वाली जगह पर प्रतीक्षा करेंगे। प्रतीक्षा अवधि लंबी होने की स्थिति में ही कुछ और करें।
  • जांच के दौरान आमतौर पर रोगी के साथ उसकी मां ठहर सकती है लेकिन केवल तब जब वह गर्भवती न हो। माता-पिता को, ज़रूरत पड़ने पर, रोगी के साथ ठहरने के लिए किसी अन्य वयस्क व्यक्ति की व्यवस्था करनी चाहिए।
  • आमतौर पर एक्स-रे कक्ष में भाई या बहन को जाने की अनुमति नहीं होती है। माता-पिता को भाई या बहन के लिए बाल-संरक्षण की व्यवस्थाएं करनी चाहिए।

अपर जीआई परीक्षा के दौरान क्या होता है?

  • रेडियोलॉजी स्टाफ़ का सदस्य परिवार के साथ इस बारे में बात करेगा कि रोगी को अपर जीआई सीरीज़ परीक्षण की आवश्यकता क्यों है और उन्हें इसकी प्रक्रिया को समझाएगा।
  • स्टाफ़ का एक सदस्य एक्स-रे टेबल पर रोगी की मदद करेगा।
  • रोगी एक बेरियम शेक पीएगा, जिससे एक्स-रे स्क्रीन पर उसकी भोजन-नली, पेट और आंतें दिखाई देंगी। बेरियम का स्वाद खराब और चॉक जैसा होता है। कुछ केंद्र शेक को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें फ़्लेवर मिलाते हैं।
  • स्टाफ़ का सदस्य एक्स-रे मशीन को, जिसे “फ़्लोरो टॉवर” के नाम से भी जाना जाता है, रोगी के ऊपर घुमाएगा।
  • जैसे ही बेरियम जठरांत्रीय मार्ग से होकर गुज़रता है, विकिरण चिकित्सक उसके बहुत सारे एक्स-रे लेगा।
  • स्टाफ़ रोगी को अलग-अलग मुद्राओं में स्थिति परिवर्तन करने में मदद करेगा जिससे मशीन विभिन्न कोणों से चित्र ले सके।

रोगी को कैसा महसूस होगा?

इस जांच से कोई हानि नहीं पहुंचती। एक्स-रे मशीन (फ़्लोरो टॉवर) रोगी को स्पर्श नहीं करती।

हो सकता है कि कंट्रास्ट तरल पदार्थ का स्वाद अच्छा न हो। ऐसे में परिवार उसमें फ़्लेवर मिलाने के लिए कह सकता है।

सिस्टम के माध्यम से बेरियम कितनी तेजी से गुज़रता है, इसके आधार पर परीक्षण में कई घंटे लग सकते हैं। प्रतीक्षा अवधि के दौरान रोगी क्या कर सकता है, माता-पिता को इस बारे में स्टाफ़ से बात करनी चाहिए।

परीक्षण के बाद रोगी को क्या महसूस होगा?

माता-पिता को रोगी को अतिरिक्त तरल पदार्थ देने चाहिए क्योंकि बेरियम से कब्ज हो सकती है।

बेरियम के कारण एक दो दिन तक मल सफेद या स्लेटी रंग का दिखाई दे सकता है।

परिवार को परिणाम, कैसे पता चलेगा?

विकिरण चिकित्सक परिणामों की व्याख्या करेगा और जांच की मांग करने वाले चिकित्सक को उसकी एक रिपोर्ट भेजेगा। चिकित्सीय टीम का एक सदस्य अगली नियोजित मुलाकात पर परिणामों को साझा करेगा।


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समीक्षा की गई: जून 2018