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आनुवांशिक विकार और पूर्वप्रवृत्ति सिंड्रोम

आनुवांशिक विकार क्या होता है?

एक शैक्षिक चिकित्सीय/क्लिनिकल मॉडल

आनुवांशिक विकार ऐसी स्वास्थ्य समस्याएँ हैं जो जीन बदलावों यानी उत्परिवर्तनों के कारण होती हैं।

आनुवांशिक विकार तब होता है जब किसी जीन में ऐसा बदलाव (उत्परिवर्तन) होता है जो कोशिका के वृद्धि करने और कार्य करने के तरीकों को प्रभावित करता है। यह बदलाव व्यक्ति की आगामी पीढ़ियों को मिलता है (वंशानुगत होता है)।

माना जाता है कि बचपन के अधिकांश बीमारी वैसे तो वंशानुगत नहीं होते हैं, लेकिन कुछ जीन बदलाव व्यक्ति में कैंसर या अन्य बीमारी होने का जोखिम बढ़ा देते हैं। इन स्थितियों को पूर्वप्रवृत्ति सिंड्रोम कहा जाता है। इसका यह अर्थ नहीं है कि व्यक्ति में वह बीमारी होगा ही होगा, लेकिन उसमें ऐसा होने का जोखिम थोड़ा अधिक होता है। उस जोखिम की मात्रा आनुवांशिक बदलाव के प्रकार पर और अन्य कारकों पर निर्भर करती है।

आनुवांशिक विकारों और पूर्वप्रवृत्ति सिंड्रोमों के कुछ प्रकार ये हैं:

एटाक्सिया-टेलांजिएक्टेसिया

अटेक्सिया-टलेन्जियिअकटेज़ा (A-T) एक दुर्लभ आनुवांशिक स्थिति (जेनेटिक कंडीशन) है जो तंत्रिका तंत्र, बीमारी प्रतिरोधक प्रणाली और शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करती है। इस स्थिति से ग्रस्त बच्चों को चलने-फिरने-हिलने-डुलने में तालमेल बैठाने में समस्या (एटैक्सिया) होती है और उनमें चलने, संतुलन बनाने और अपने हाथों का उपयोग करने में समस्याएँ विकसित हो जाती हैं। उनमें तंत्रिका तंत्र की समस्याएँ भी हो सकती हैं, जिनके कारण इन जैसी चीज़ें हो सकती हैं:

  • अस्पष्ट बोली
  • आँखों को दाईं-बाईं घुमाने में समस्या
  • झटकेदार हलचलें जिन्हें वे नियंत्रित नहीं कर सकते
  • मांसपेशियों का फड़कना
  • तंत्रिकाओं के कार्य करने के तरीके में समस्याएँ, जिसे न्यूरॉपथी कहते हैं

-AT ग्रस्त लोगों में कैंसर होने का लगभग 40% जोखिम होता है, जो आम तौर पर लूकीमिया और लिंफोमा होते हैं। वे रेडिएशन से संपर्क, विशेष रूप से चिकित्सीय एक्स-रे, के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं।

अटैक्सिया-टेलेंजिएक्टेशिया के बारे में ज़्यादा जानें।

बेकविथ-वीडमन स्पेक्ट्रम या आइसोलेटेड लेटरलाइज़्ड ओवरग्रोथ

बेकविथ-वीडमन स्पेक्ट्रम (BWS) एक आनुवांशिक विकार है जिसके कारण शरीर के भाग बहुत अधिक वृद्धि (हाइपरट्रॉफी) कर जाते हैं। यह अतिवृद्धि शरीर के किसी 1 क्षेत्र में, जैसे सिर या पैरों में, या फिर शरीर के कई भागों में हो सकती है। यदि यह शरीर के केवल 1 भाग में होती है तो इसे लेटरलाइज़्ड ओवरग्रोथ (पार्श्वीकृत अतिवृद्धि) कहते हैं। यदि किसी व्यक्ति में लेटरलाइज़्ड ओवरग्रोथ है लेकिन BWS के अन्य कोई संकेत नहीं हैं, तो इसे आइसोलेटेड लेटरलाइज़्ड ओवरग्रोथ या आइसोलेटेड हेमीहाइपरट्रॉफी कहते हैं।

BWS या आइसोलेटेड लेटरलाइज़्ड ओवरग्रोथ से ग्रस्त बच्चे बड़े होकर स्वस्थ वयस्क बन सकते हैं। लेकिन उनमें कैंसर होने का अधिक जोखिम होता है, जैसे एक प्रकार का गुर्दे का कैंसर जिसे विल्म्स ट्यूमर कहते हैं और एक प्रकार का यकृत कैंसर जिसे हैपेटोब्लास्टोमा कहते हैं। यदि ट्यूमर विकसित होते हैं, तो वे अधिकांशतः बचपन में होते हैं। जब तक मरीज अपने किशोर वर्षों में पहुँचते हैं, उनकी वृद्धि अधिक सामान्य हो चुकी होती है और उनका कैंसर का जोखिम गिरकर सामान्य जनसंख्या जितना हो जाता है। BWS ग्रस्त वयस्कों का जीवनकाल आम तौर पर सामान्य होता है।

बेकविथ-वीडमन स्पेक्ट्रम या आइसोलेटेड लेटरलाइज़्ड ओवरग्रोथ के बारे में और पढ़ें।

शार्को-मैरी-टूथ बीमारी

शार्को-मैरी-टूथ (CMT) बीमारी ऐसे आनुवांशिक विकारों का एक समूह है जो व्यक्ति की तंत्रिकाओं के काम करने के तरीके को प्रभावित करते हैं। जीन के ठीक से काम न करने के कारण तंत्रिकाएँ या उनके चारों ओर मौजूद सुरक्षा परत (मायलिन) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। CMT एक प्रकार की वंशानुगत न्यूरॉपथी (तंत्रिकाविकृति) है। यह एक तंत्रिका समस्या है जो शरीर के विभिन्न भागों में दर्द, सुन्नता, झुनझुनी या कमज़ोरी कर सकती है। यह समस्या माता-पिता से बच्चों को मिलती है।

CMT बीमारी दिमाग को बाकी के शरीर से जोड़ने वाली तंत्रिकाओं को प्रभावित करती है। इन तंत्रिकाओं को परिधीय तंत्रिकाएँ कहते हैं। परिधीय तंत्रिकाओं में शामिल हैं गतिक/प्रेरक (मोटर) तंत्रिकाएँ, जो मांसपेशियों को चलाती हैं, और संवेदी (सेंसरी) तंत्रिकाएँ, जो व्यक्ति को गर्मी, ठंड और कंपन महसूस करने में मदद देती हैं।

शार्को-मैरी-टूथ बीमारी के बारे में और जानें।

कार्नी कॉम्प्लेक्स

कार्ने कॉम्प्लेक्स एक ऐसा विकार है जो कई प्रकार के ट्यूमर के जोखिम को बढ़ाता है, जिसमें हृदय में गैर-कैंसर (सौम्य) ट्यूमर शामिल हैं, जिन्हें हृदय संबंधी मायक्सोमा के रूप में जाना जाता है।

मायक्सोमा त्वचा और अंदरुनी अंगों में हो सकता है। कार्ने कॉम्प्लेक्स वाले लोगों में एंडोक्राइन (हार्मोन-उत्पादक) प्रणाली जैसे अधिवृक्क ग्रंथि (एड्रेनल ग्लैंड), थायराइड, वीर्यकोष, अंडाशय और पीयूष ग्रंथि के कैंसर विकसित हो सकते हैं। कार्नी कॉम्प्लेक्स से ग्रस्त लोगों में आम तौर पर त्वचा के रंग (पिगमेंटेशन) में बदलाव होते हैं। इस स्थिति के संकेत और लक्षण अक्सर किशोरावस्था या वयस्कता के शुरुआती दौर में मिलने लगते हैं।

 कार्नी कॉम्प्लेक्स के बारे में और जानें।

कॉन्स्टिटूशनल मिसमैच रिपेयर डेफिसेंसी सिंड्रोम (शारीरिक संरचना असंतुलन की मरम्मत संबंधी कमी से जुड़ा सिंड्रोम)

कॉन्स्टिटूशनल मिसमैच रिपेयर डिफ़िशेंसी सिंड्रोम (CMMRD) एक दुर्लभ स्थिति है जिसमें व्यक्ति में ये होने का जोखिम बढ़ जाता है:

  • मस्तिष्क के ट्यूमर
  • खून का कैंसर और लिंफोमा 
  • आँतों में असामान्य वृद्धियाँ (पॉलिप)
  • में कैंसर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में
  • महिला प्रजनन अंगों, जिनमें गर्भाशय और अंडाशय शामिल हैं, में कैंसर
  • कैफ़े ऊ ले स्पॉट (त्वचा पर चपटे कत्थई धब्बे)
  • त्वचा पर ऐसे चकत्ते जो त्वचा के सामान्य रंग से हल्के होते हैं
  • बचपन के अन्य दुर्लभ कैंसर

CMMRD ग्रस्त बच्चे में एक साथ 1 से अधिक प्रकार के कैंसर हो सकते हैं या उसके जीवनकाल में 1 से अधिक कैंसर हो सकते हैं।

 कॉन्स्टिटूशनल मिसमैच रिपेयर डेफिसेंसी सिंड्रोम के बारे में और जानें।

डायमंड-ब्लैकफ़ैन एनीमिया (खून की कमी)

डायमंड-ब्लैकफ़ैन एनीमिया (DBA) एक दुर्लभ आनुवांशिक रक्त विकार है। यदि किसी व्यक्ति को यह विकार है, तो उसकी बोन मैरो पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएँ नहीं बनाती है।

संभव है कि कोई लक्षण न हों, हल्के लक्षण हों या गंभीर लक्षण हों। DBA ग्रस्त लोगों को शारीरिक लक्षण हो सकते हैं, जैसे त्वचा का रंग फीका पड़ना, चेहरे पर विशिष्ट लक्षण, जन्म के समय कम वज़न और अन्य समस्याएँ। उचित उपचार के साथ वे लंबा जीवन जी सकते हैं, हालाँकि कुछ रोगियों में जीवन में आगे चलकर कुछ कैंसरों का अधिक जोखिम हो सकता है, जैसे:

  • कोलोरेक्टल कैंसर, बड़ी आँत और/या मलाशय का कैंसर
  • ओस्टियोसारकोमा हड्डी का कैंसर।
  • माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम (MDS), एक विकार जिसमें बोन मैरो की कुछ विशिष्ट कोशिकाएँ ठीक से काम नहीं करती हैं। MDS लूकीमिया बन सकता है।
  • तीव्र माइलॉयड ल्यूकेमिया (AML) खून और बोन मैरो में होने वाला एक कैंसर है।

डायमंड-ब्लैकफ़ैन एनीमिया के बारे में और जानें।

DICER1 सिंड्रोम

DICER1 सिंड्रोम एक ऐसा वंशानुगत विकार है जो व्यक्ति में कैंसरयुक्त और गैर-कैंसरयुक्त (सौम्य) ट्यूमर होने का जोखिम बढ़ाता है। फेफड़ों, गुर्दों, अंडाशयों, थाइरॉइड और दिमाग में ट्यूमर सबसे आम हैं।

प्रभावित व्यक्ति में एक या एक से अधिक किस्म के ट्यूमर विकसित हो सकते हैं। उसी परिवार के सदस्यों में अलग प्रकारों के ट्यूमर हो सकते हैं।

 DICER1 सिंड्रोम के बारे में विस्तार से जानें।

डूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी

डूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) एक आनुवांशिक विकार है जिसमें मांसपेशियाँ खराब होने लगती हैं और समय के साथ कमज़ोर होती जाती हैं। यह विकार अधिकांशतः पुरुषों को प्रभावित करता है और इसके कारण मांसपेशियों को नुकसान होता है, उनमें खराबी आती है और वे कमज़ोर हो जाती हैं। DMD ग्रस्त लड़कों का जीवनकाल सामान्य से कम होता है। यह महिलाओं को भी विरासत में मिल सकता है, लेकिन उनके लक्षण कम गंभीर होते हैं।

डूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के बारे में और पढ़ें।

पारिवारिक एडिनोमेटस पॉलीपोसिस 

पारिवारिक एडिनोमेटस पॉलीपोसिस (FAP) एक ऐसी स्थिति है, जो ज़्यादातर पाचन प्रणाली को प्रभावित करती है। FAP ग्रस्त लोगों की बड़ी व छोटी आँतों में अक्सर पॉलिप नामक असामान्य ऊतक वृद्धियाँ विकसित हो जाती हैं। यदि उन्हें हटाया न जाए, तो कुछ पॉलीप्स कैंसरयुक्त हो सकते हैं।

FAP से ग्रसित व्यक्तियों में कम उम्र में ही कोलन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) और पाचन तंत्र के अन्य कैंसर विकसित होने का उच्च जोखिम होता है। उनमें अन्य ट्यूमर, कैंसर या शारीरिक समस्याएँ होने का भी अधिक जोखिम होता है।

 पारिवारिक एडिनोमेटस पॉलीपोसिस के बारे में और जानें।

फ़्रीडराइक एटैक्सिया

फ़्रीडराइक एटैक्सिया (FA) एक दुर्लभ, वंशानुगत बीमारी है जिसके कारण मांसपेशियों के तालमेल और संतुलन में धीमी व निरंतर हानि (एटैक्सिया) होती है। यह बोलने में समस्याओं का, कमज़ोरी का और संवेदना (गर्म, ठंडा) की हानि का भी कारण बन सकता है। यह हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है, स्कॉलियोसिस (रीढ़ का एक ओर का टेढ़ापन) कर सकता है और व्यक्ति में डायबिटीज़ होने की संभावना बढ़ा सकता है।

FA तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचाता है, इसमें मेरु रज्जु और दिमाग के एक भाग (सेरिबैलम) में मौजूद तंत्रिकाएँ शामिल हैं।

फ़्रीडराइक एटैक्सिया के बारे में और जानें।

हीमोफैगोसिटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस

हीमोफैगोसिटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) एक दुर्लभ विकार है जिसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र ठीक से काम नहीं करता है। HLH में, कुछ प्रकार की सफ़ेद रक्त कोशिकाएँ संक्रमणों से ठीक से नहीं लड़ती हैं। इसलिए, HLH ग्रस्त लोगों को संक्रमणों से लड़ने में कठिनाई होती है। उनका प्रतिरक्षा तंत्र आवश्यकता से अधिक सक्रिय हो सकता है, जिससे शरीर के विभिन्न भागों जैसे लिवर (यकृत), स्प्लीन (प्लीहा/तिल्ली), बोन मैरो (अस्थि मज्जा) या दिमाग को नुकसान पहुँचता है। इस स्थिति से ग्रस्त रोगियों को अत्यधिक शोथ के फलस्वरूप बार-बार तेज़ बुखार, अंगों या लसीका ग्रंथियों (लिम्फ नोड) के आकार में वृद्धि, ददोरे और अन्य लक्षण हो सकते हैं।

हीमोफैगोसिटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस के बारे में और जानें।

आनुवांशिक लेयोमायोमैटोसिस और रीनल सेल कार्सिनोमा

हिरेडिटरी लेयोमायोमटोसिस एंड रीनल सेल कार्सिनोमा (HLRCC) एक दुर्लभ आनुवांशिक स्थिति है जो व्यक्ति में गुर्दे और त्वचा के ट्यूमर होने का जोखिम बढ़ा देती है। ट्यूमर मेलिगनेंट (कैंसर वाले) या बेनाइन (बिना कैंसर) वाले हो सकते हैं।

हालाँकि लक्षण अलग-अलग होते हैं, पर इस स्थिति से ग्रस्त लोगों की त्वचा पर हानिरहित उभार बन सकते हैं। महिलाओं के गर्भाशय में वृद्धियाँ (फ़ाइब्रॉइड ट्यूमर) विकसित हो सकती हैं। HLRCC रोगियों में गुर्दों का कैंसर होने का आजीवन जोखिम अधिक होता है। उनमें तंत्रिका कोशिका ट्यूमर और शरीर की अधिवृक्क ग्रंथियों में ट्यूमर, जिन्हें फियोक्रोमोसाइटोमा कहते हैं, भी हो सकते हैं।

हिरेडिटरी लेयोमायोमटोसिस एंड रीनल सेल कार्सिनोमा के बारे में और जानें।

हिरेडिटरी मल्टिपल ऑस्टियोकॉन्ड्रोमा

हिरेडिटरी मल्टिपल ऑस्टियोकॉन्ड्रोमा ग्रस्त लोगों में एक दुर्लभ स्थिति होती है जिससे उनमें हड्डियों के ट्यूमर, जिन्हें ऑस्टियोकॉन्ड्रोमा कहते हैं, 1 या अधिक संख्या में होने की संभावना बढ़ जाती है। ट्यूमर मेलिगनेंट (कैंसर वाले) या बेनाइन (बिना कैंसर) वाले हो सकते हैं। ये हानिरहित ट्यूमर समय के साथ कैंसरग्रस्त हो जाते हैं। इस स्थिति से ग्रस्त रोगियों में वृद्धि, जोड़ों व तंत्रिकाओं की समस्याएँ तथा चलते समय तकलीफ़ की समस्या भी हो सकती है।

हिरेडिटरी मल्टिपल ऑस्टियोकॉन्ड्रोमा के बारे में और जानकारी देखें।

आनुवांशिक न्यूरोब्लास्टोमा

न्यूरोब्लास्टोमा, तंत्रिका कोशिकाओं के कैंसर को कहते हैं। न्यूरोब्लास्टोमा ग्रस्त बच्चों में से कुछ को यह बीमारी माता या पिता से विरासत में मिला होता है। हिरेडिटरी (वंशानुगत) न्यूरोब्लास्टोमा से ग्रस्त बच्चों में अधिक संख्या में ट्यूमर होने की और इस बीमारी के पारिवारिक इतिहास से मुक्त बच्चों की तुलना में पहले बीमारी-पहचान होने की संभावना अधिक होती है।

हिरेडिटरी न्यूरोब्लास्टोमा ग्रस्त व्यक्तियों में ये होने का अधिक जोखिम होता है:

आनुवांशिक न्यूरोब्लास्टोमा के बारे में और जानें।

आनुवांशिक पैरागैंगलिआ-फियोक्रोमोसाइटोमा सिंड्रोम

हिरेडिटरी पैरागैंग्लियोमा-फियोक्रोमोसाइटोमा सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें परिधीय तंत्रिका तंत्र (सिर, गर्दन और शरीर की तंत्रिकाओं) में ट्यूमर बनते हैं।

ये ट्यूमर तंत्रिकाओं के बंडलों, जिन्हें पैरागैंग्लिया कहते हैं, में बनते हैं। यहाँ होने वाले ट्यूमरों को पैरागैंग्लियोमा कहते हैं। गुर्दों के ठीक ऊपर स्थित अधिवृक्क ग्रंथियों में एक अन्य प्रकार का पैरागैंग्लियोमा बन सकता है। उन्हें फियोक्रोमोसाइटोमा कहते हैं।

ट्यूमर के स्थान और आकार के आधार पर लक्षण अलग-अलग होते हैं।

व्यक्ति की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसमें ट्यूमर होने का जोखिम बढ़ता जाता है। ये ट्यूमर आम तौर पर कैंसरग्रस्त नहीं होते हैं, लेकिन वे कैंसरग्रस्त होकर शरीर के अन्य भागों तक फैल सकते (मेटास्टेटाइज़ हो सकते) हैं। उनमें उनके पाचन मार्ग, गुर्दों और थाइरॉइड ग्रंथि में भी ट्यूमर विकसित हो सकते हैं।

 आनुवांशिक पैरागैंगलिआ-फियोक्रोमोसाइटोमा सिंड्रोम के बारे में और जानें।

आनुवांशिक रेटिनोब्लास्टोमा

रेटिनोब्लास्टोमा आंखों का कैंसर है, जो अक्सर छोटे बच्चों में 5 साल की उम्र से पहले पाया जाता है। यह कैंसर आँख के रेटिना नामक भाग में होता है; रेटिना व्यक्ति को रंग व प्रकाश देखने में मदद देता है।

रेटिनोब्लास्टोमा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल सकता है (हिरेडिटरी/वंशानुगत) या फिर पीढ़ी-दर-पीढ़ी नहीं चल सकता है (स्पोरैडिक/छिटपुट)। वंशानुगत रेटिनोब्लास्टोमा आमतौर पर दोनों आंखों को प्रभावित करता है, लेकिन कुछ मामलों में केवल किसी 1 आंख में विकसित हो सकता है। आनुवांशिक रेटिनोब्लास्टोमा वाले व्यक्ति में त्वचा, हड्डी, कोमल ऊतक और दिमाग समेत शरीर के किसी भी हिस्से में ट्यूमर होने का ख़तरा बढ़ जा सकता है।

वंशानुगत रेटिनोब्लास्टोमा के बारे में और जानें।

जुवेनाइल पॉलिपोसिस सिंड्रोम

जुवेनाइल पॉलिपोसिस सिंड्रोम (JPS) एक आनुवांशिक विकार है जिसके कारण लोगों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में (GI) में कैंसर-विहीन वृद्धियों (जिन्हें पॉलिप कहते हैं) के होने का जोखिम अधिक हो जाता है।

पॉलिप आमाशय, छोटी आँत और मलाशय में बन सकते हैं। वे अक्सर कोलोनमें पाए जाते हैं। “जुवेनाइल” का संबंध इस स्थिति में दिखने वाले पॉलिप के प्रकार से है। यदि पॉलिप को निकाला न जाए, तो वे घातक (कैंसरग्रस्त) हो सकते हैं। इस सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों में उनके जीवनकाल में आमाशय, छोटी आँत और अग्न्याशय का कैंसर होने का अधिक जोखिम होता है।

जुवेनाइल पॉलिपोसिस सिंड्रोम के बारे में और पढ़ें।

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम

ली-फ़्रॉमिनी सिंड्रोम (LFS) एक दुर्लभ स्थिति है जिसमें व्यक्ति के जीवनकाल में उसे 1 या अधिक कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है। आमतौर पर यह परिवार के सदस्य से वंशानुगत रूप से प्राप्त होती है। LFS ग्रस्त लोगों को उनके इन भागों में कैंसर हो सकता है:

  • दिमाग
  • स्तन
  • हड्डियां
  • रक्त
  • अधिवृक्क ग्रंथि (हर गुर्दे के ठीक ऊपर स्थित एक नन्ही ग्रंथि)
  • मांसपेशीयाँ
  • शरीर को सहारा व आकृति देने वाले संयोजी ऊतक, जैसे वसा या कार्टिलेज

कम आम मामलों में, उनके शरीर के अन्य भागों में कैंसर हो सकते हैं, जैसे:

  • त्वचा
  • थाइरॉयड ग्रंथि
  • फेफड़े
  • ग्रासनली (भोजन नली), आमाशय (पेट), अग्न्याशय, या कोलन (पाचन तंत्र)
  • गुर्दा या मूत्राशय (मूत्र तंत्र)
  • गर्भाशय, अंडाशय, पौरुष ग्रंथि या वृषण (प्रजनन तंत्र

ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम के बारे में और जानें।

मल्टीपल एंडोक्राइन नियोप्लासिया टाइप 1

मल्टिपल एंडोक्राइन नियोप्लासिया टाइप 1 (MEN1) एक आनुवांशिक विकार है जिसमें व्यक्ति के जीवनकाल में ट्यूमर होने का जोखिम बढ़ जाता है। इनमें से अधिकांश ट्यूमर कैंसर-विहीन (सौम्य) होते हैं, लेकिन कभी-कभी वे कैंसरग्रस्त (घातक) हो सकते हैं।

इनमें से ज़्यादातर ट्यूमर एंडोक्राइन तंत्र में विकसित होते हैं। MEN1 ग्रस्त लोगों के शरीर के अन्य भागों में भी ट्यूमर हो सकते है।

मल्टीपल एंडोक्राइन नियोप्लासिया टाइप 1 के बारे में और जानें।

मल्टीपल एंडोक्राइन नियोप्लासिया टाइप 2

मल्टीपल एंडोक्राइन नियोप्लासिया टाइप 2 (MEN2) एक आनुवांशिक स्थिति है, जो एंडोक्राइन तंत्र में कैंसर विकसित करने के जोखिम को बढ़ा देती है। लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि ट्यूमर कहाँ स्थित है। MEN2 ग्रस्त लोगों में मेडुलरी थाइरॉइड कैंसर और फियोक्रोमोसाइटोमाज़, जो अधिवृक्क ग्रंथि के ट्यूमर हैं। ऐसी स्थिति वाले लोगों के एंडोक्राइन ऊतक या ग्रंथियों में अन्य किस्म की असामान्य वृद्धि हो सकती है।

 मल्टीपल एंडोक्राइन नियोप्लासिया टाइप 2 के बारे में विस्तार से जानें।

न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1

न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1(NF1) एक ऐसा वंशानुगत विकार है, जो शरीर के बहुत से हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। इनमें त्वचा, आंखें, हड्डियां, रक्त वाहिकाएं, दिमाग और तंत्रिका तंत्र शामिल हैं।

NF1 वाले लोगों में ख़ास तरह के कैंसरयुक्त और गैर-कैंसरयुक्त ट्यूमर होने की बहुत अधिक संभावना होती है। इन स्थितियों में न्यूरोफाइब्रोमा, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के ट्यूमर, स्तन कैंसर, फियोक्रोमोसाइटोमा, ल्यूकेमिया और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर (GIST) शामिल हैं। उनमें अन्य समस्याएँ भी हो सकती हैं, जैसे कैफ़े ऊ ले स्पॉट (चिकने, गहरे रंग के, चपटे जन्मजात निशान), झाइयाँ, आँखों में हानिरहित वृद्धियाँ, रीढ़ में टेढ़ापन, सामान्य से बड़ा सिर, उच्च रक्तचाप और हृदय समस्याएँ। इस स्थिति की गंभीरता और शरीर के प्रभावित क्षेत्र अलग-अलग व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं।

 न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 के बारे में और जानें।

न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 2

न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 2 (NF2) एक आनुवांशिक स्थिति है, जो मुख्यतया तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। NF2 ग्रस्त लोगों की तंत्रिकाओं में ट्यूमर होने का अधिक जोखिम होता है।

NF2 वाले लोगों में सबसे सामान्य किस्म का ट्यूमर वेस्टिबुलर श्वाननोमा, (जो अकूस्टिक न्यूरोमा भी कहलाता है) है। NF2 वाले रोगियों में, वेस्टिबुलर श्वाननोमा आमतौर पर दोनों सुनने से संबंधित तंत्रिकाओं में औसतन 18-24 साल की उम्र में होता है। NF2 से ग्रस्त लगभग सभी रोगियों में 30 की उम्र तक ये ट्यूमर हो जाते हैं। उनमें तंत्रिका तंत्र के अन्य ट्यूमर भी हो सकते हैं, जैसे:

  • मेनिन्जियोमा, जो दिमाग और मेरु रज्जु के चारों ओर मौजूद झिल्लियों पर होते हैं
  • अपेंडिमोमा, जो दिमाग या मेरु रज्जु की उन कोशिकाओं में होते हैं जो सामान्यतः तरल पदार्थ बनाती हैं
  • एस्ट्रोसाइटोमा, जो दिमाग या मेरु रज्जु के सहायक ऊतकों में होते हैं
  • रेटिनल हमार्टोमा, जो आँख के पिछले हिस्से में होते हैं

 न्यूरोफ़ाइब्रोमटोसिस टाइप 2 के बारे में और जानें।

नेवॉइड बेसल सेल कार्सिनोमा सिंड्रोम 

नेवॉइड बेसल सेल कार्सिनोमा सिंड्रोम (NBCCS) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लोगों को किसी ख़ास तरह के घातक (कैंसरग्रस्त) और सौम्य (कैंसर-विहीन) ट्यूमर विकसित होने का बहुत अधिक ख़तरा होता है। सबसे आम प्रकार के कैंसरग्रस्त ट्यूमर हैं मेडुलोब्लास्टोमा और बेसल सेल कार्सिनोमा (त्वचा कैंसर)।

ट्यूमर त्वचा, जबड़ों, दिल, अंडाशय और दिमाग में विकसित हो सकता है। NBCCS वाले लोगों में शारीरिक तौर पर अंतर भी हो सकता है। मसलन दिमाग में बहुत अधिक मात्रा में तरल पदार्थ होने के कारण सिर के आकार का बड़ा होना, चेहरे पर सफ़ेद गांठें, अतिरिक्त अंगुलियां और पैरों के अंगूठे, होंठ और तालू का कटा होना और सीखना चुनौतिपूर्ण हो सकता है।

 नेवॉइड बेसल सेल कार्सिनोमा के बारे में और जानें।

नोनन सिंड्रोम

नोनन सिंड्रोम वाले लोगों में कुछ किस्म के कैंसर और रक्त विकारों के विकसित होने का जोखिम थोड़ा-सा ज़्यादा होता है। इन स्थितियों में मायलोप्रोलिफ़ेरेटिव विकार, किशोर मायलोमानोसाइटिक ल्यूकेमिया (खून का कैंसर), न्यूरोब्लास्टोमा और एम्ब्रायोनल रैब्डोमायोसारकोमा शामिल हैं। नोनन सिंड्रोम वाले लोगों में वृहद् कोशिका घाव और दानेदार कोशिका संबंधी ट्यूमर जैसे कुछ किस्म के गैर-कैंसरयुक्त ट्यूमर के विकसित होने का जोखिम थोड़ा-सा बढ़ जाता है। 

 नोनन सिंड्रोम के बारे में और जानें।

PTEN हमर्टोमा ट्यूमर सिंड्रोम

PTEN हमार्टोमा ट्यूमर सिंड्रोम नामक आनुवांशिक स्थिति से ग्रस्त लोगों के शरीर के विभिन्न भागों में हमार्टोमा नामक कैंसर-विहीन वृद्धियाँ होती हैं। PTEN हमार्टोमा ट्यूमर सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों में निम्नलिखित अंगों के कैंसर विकसित होने का अधिक जोखिम होता है:

  • स्तन
  • थायराइड
  • गुर्दा
  • गर्भाशय
  • कोलोन
  • मलाशय
  • त्वचा

इस सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों में आम तौर पर वयस्क होने तक कैंसर नहीं होता है। लेकिन कुछ में थाइरॉइड कैंसर हो सकता है। उनमें कुछ विशेष लक्षण हो सकते हैं जैसे औसत से बड़ा सिर, त्वचा वृद्धियाँ, पाचन तंत्र में कैंसर-विहीन वृद्धियाँ (पॉलिप), थाइरॉइड ग्रंथि, स्तनों और गर्भाशय (महिलाओं) में कैंसर-विहीन वृद्धियाँ, त्वाच के नीचे कैंसर-विहीन वसामय कोशिकाएँ (लिपोमा), कमज़ोर मांसपेशियाँ और रीढ़ में टेढ़ापन।

 PTEN हमर्टोमा ट्यूमर सिंड्रोम के बारे में और जानें।

पोएत्ज़-जेगर्स सिंड्रोम

पोएत्ज़-जेगर्स सिंड्रोम (PJS) एक ऐसी आनुवांशिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति में कुछ विशेष प्रकार के कैंसर विकसित होने का ख़तरा बढ़ जाता है, जिनमें निम्नलिखित कैंसर शामिल हैं:

  • पाचन तंत्र
  • फेफड़ा
  • स्तन
  • गर्भाशय
  • गर्भाशय ग्रीवा
  • अंडाशय और वृषण

PJS वाले लोगों में पाचन प्रणाली में पॉलीपस नामक गैर-कैंसरयुक्त वृद्धि का ख़तरा कहीं अधिक बढ़ सकता है। कैंसरयुक्त और गैर-कैंसरयुक्त वृद्धि गुर्दों, फेफड़ों, पित्ताशय की थैली, नाक की नलियों, मूत्राशय या मूत्रवाहिनियों में भी दिखाई दे सकती हैं। PJS वाले लोगों की त्वचा के कुछ हिस्सों में अक्सर दिखने में झाइयों जैसे छोटे, गहरे रंग के धब्बे होते हैं।

 पोएत्ज़-जेगर्स सिंड्रोम के बारे में और जानें।

रैबडॉइड ट्यूमर प्रीडिस्पोज़िशन सिंड्रोम

जिन्हें रैबडॉइड ट्यूमर प्रीडिस्पोज़िशन सिंड्रोम है, उनमें रबडॉइड ट्यूमर के विकसित होने का ख़तरा बढ़ जाता है। तेज़ी से विकसित होने वाले ये ट्यूमर अक्सर दिमाग, मेरुरज्जु और गुर्दे में होते हैं।

कोमल ऊतक, फेफड़ों, त्वचा और दिल में भी कैंसर विकसित हो सकते हैं। ऐसे ट्यूमर ज़्यादातर बच्चों में आम हैं। इस सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों में तंत्रिकाओं में वृद्धि करने वाले कैंसर-विहीन ट्यूमरों, जिन्हें श्वनोमा कहते हैं, विकसित होने का अधिक जोखिम होता है। ये ट्यूमर वयस्कों में अधिक आम हैं। कुछ लोगों में ट्यूमर कभी नहीं होते हैं।

 रैबडॉइड ट्यूमर प्रीडिस्पोज़िशन सिंड्रोमके बारे में और जानें।.

स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी

स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) एक आनुवांशिक स्थिति है जिसके कारण मांसपेशियों में कमज़ोरी होती है और यह कमज़ोरी समय के साथ बढ़ती जाती है। ऐसा दिमाग और मेरु रज्जु में स्थित गतिक/प्रेरक (मोटर) तंत्रिका कोशिका नामक तंत्रिका कोशिकाओं की हानि के कारण होता है।

SMA ऐसी मांसपेशियों को प्रभावित करता है जो व्यक्ति को बोलने, साँस लेने और निगलने में मदद देती हैं। यह ऐसी मांसपेशियों को भी प्रभावित करता है जो दैनिक गतिविधियों, जैसे चलने, को निष्पादित करती हैं। जब तंत्रिका कोशिकाएँ मर जाती हैं, तो इन मांसपेशियों को तंत्रिका कोशिकाओं से संकेत नहीं मिलते हैं, इसलिए उनका क्षय होने लगता है। इसे मसल एट्रॉफी (मांसपेशी का क्षय) कहते हैं। यह बीमारी नवजात शिशुओं और बच्चों में अधिक आम है।

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टूबेरौस स्क्लेरोसिस कॉम्प्लेक्स

टूबेरौस स्क्लेरोसिस कॉम्प्लेक्स एक ऐसा आनुवंशिक विकार है, जिससे त्वचा, मस्तिष्क, किडनी और अन्य अंगों में गैर-कैंसरयुक्त ट्यूमर हो सकते हैं। कभी-कभी ये ट्यूमर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या को जन्म देते हैं। ट्यूबरस स्क्लेरोसिस कॉम्प्लेक्स व्यक्ति के विकास में भी समस्याएँ पैदा करता है।

इस स्थिति के संकेत और लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। इस विकार से ग्रस्त अधिकांश लोगों में त्वचा संबंधी असामान्यताएँ होती हैं, जिनमें त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे, त्वचा पर ऐसे स्थान जो अधिक मोटे या उभरे हुए हों और नाखूनों के नीचे वृद्धियाँ शामिल हैं। इस स्थिति से ग्रस्त लोगों में बचपन में चेहरे पर ट्यूमर हो सकते हैं, जिन्हें फ़ेशियल एंजियोफ़ाइब्रोमा कहते हैं।

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वॉन हिप्पल लिंडौ सिंड्रोम

वॉन हिप्पल लिंडौ सिंड्रोम (VHL) एक ऐसी दुर्लभ स्थिति है, जिसके कारण व्यक्ति में विशेष किस्म का ट्यूमर विकसित होने की संभावना अधिक होती है। ये ट्यूमर मेलिगनेंट (कैंसर वाले) या बेनाइन (बिना कैंसर) वाले हो सकते हैं।

VHL ग्रस्त लोगों के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (दिमाग और मेरु रज्जु) और रेटिना में ट्यूमर विकसित हो सकते हैं, जिन्हें हीमएंजियोब्लास्टोमा कहते हैं। उनके भीतरी कान में भी ट्यूमर हो सकते हैं, जिन्हें एंडोलिम्फैटिक सैक ट्यूमर कहते हैं। अन्य प्रकार के ट्यूमरों में शामिल हैं गुर्दा सिस्ट या कैंसर, अग्नाशय सिस्ट या कैंसर, अधिवृक्क ग्रंथि के ट्यूमर जिन्हें फियोक्रोमोसाइटोमा कहते हैं और जननांग पथ के ट्यूमर जिन्हें पैपिलरी सिस्टेडिनोमा कहते हैं।

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WT1-संबंधी सिंड्रोम्स

WT1-रिलेटेड सिंड्रोम्स ऐसी स्थितियाँ हैं जो गुर्दा कैंसर होने के जोखिम को बढ़ा देती हैं। इन स्थितियों से ग्रसित व्यक्तियों में जीवन के पहले 3 से 5 वर्षों में विल्म्स ट्यूमर के रूप में जाने वाले गुर्दे के कैंसरयुक्त ट्यूमर विकसित होने का अधिक जोखिम होता है। WT1-संबंधी सिंड्रोम्स वाले लोगों में चिकित्सा संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इनमें प्रजनन से जुड़े अंगों, जननांगों, आंखों और कभी-कभी आचरण या विकास से जुड़ी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।

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एक्स-लिंक्ड लिंफ़ोप्रोलिफ़रेटिव सिंड्रोम

X-लिंक्ड लिम्फोप्रोलिफ़रेटिव सिंड्रोम (XLP) प्रतिरक्षा तंत्र का एक दुर्लभ विकार है जो आम तौर पर केवल पुरुषों को प्रभावित करता है। इससे ग्रस्त लोगों में एक असामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया होती है। उनमें फ़ल्मिनेंट इन्फ़ेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस (FIM) नामक स्थिति विकसित हो जाती है। उनमें वायरस संक्रमण के विरुद्ध सक्रिय प्रतिरक्षा कोशिकाओं की अधिक संख्या होती है। ये सक्रिय प्रतिरक्षा कोशिकाएँ शरीर के विभिन्न भागों, जैसे लिवर (यकृत), स्प्लीन (प्लीहा/तिल्ली), बोन मैरो और दिमाग में इकट्ठा हो सकती हैं। इस प्रतिक्रिया को हेमोफ़ेगोसिटिक लिंफ़ोहिस्टोसाइटोसिस (HLH) कहते हैं।

उपचार न लेने पर HLH अंगों को नुकसान पहुँचा सकता है और मृत्यु का कारण भी बन सकता है। XLP 2 प्रकार के होते हैं: XLP-1 और XLP-2। XLP-1 ग्रस्त लोगों के जीवनकाल में लिंफोमा विकसित होने का अधिक जोखिम होता है। दोनों प्रकारों से ग्रस्त लोगों में अन्य समस्याएँ भी हो सकती हैं, जैसे उनकी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में समस्याएँ, पर्याप्त रक्त कोशिकाएँ न बनना (एप्लास्टिक एनीमिया) और असामान्य सूजन होना।

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ज़ेरोडर्मा पिगमेंटोसम

ज़ेरोडर्मा पिगमेंटोसम (XP) एक वंशानुगत स्थिति है जिसके कारण लोग धूप में उपस्थित अल्ट्रावॉइलेट (UV) किरणों और कुछ अन्य प्रकार के प्रकाश के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाते हैं। यह स्थिति ज़्यादातर आंखों और सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने वाली त्वचा के हिस्सों को प्रभावित करती है। इस स्थिति से ग्रस्त लोगों में उनके तंत्रिका तंत्र हो सकती हैं।.

XP ग्रस्त लोगों में त्वचा कैंसर होने का अधिक जोखिम होता है और उनके लिए धूप से सुरक्षा का उपयोग आवश्यक है। धूप से बचाव के बिना, इस स्थिति से ग्रसित लगभग आधे बच्चों में शुरुआती बचपन में ही पहला त्वचा कैंसर (स्किन कैंसर) विकसित हो जाता है। XP ग्रस्त लोगों में उनके जीवनकाल में अक्सर कई त्वचा कैंसर विकसित हो जाते हैं। उनके चेहरे, होंठों, पलकों, सिर की त्वचा पर, आँखों में और उनकी जीभ के सिरे पर कैंसर हो सकता है। XP ग्रस्त लोगों में अन्य प्रकार के कैंसरों, जैसे दिमाग ट्यूमर, रक्त कैंसर और थाइरॉइड कैंसर, का भी अधिक जोखिम होता है। यदि XP ग्रस्त लोग धूमपान करते हैं तो उनमें फेफड़ों का कैंसर होने का अधिक जोखिम होता है।

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समीक्षित: अगस्त 2024

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