एप्लास्टिक एनीमिया रक्त का एक दुर्लभ विकार है, जो तब होता है जब अस्थि मज्जा पर्याप्त मात्रा में रक्त कोशिकाओं का निर्माण नहीं कर पाती। यह बोन मैरो फ़ेलियर का एक प्रकार है।
बोन मैरो आपकी हड्डियों के मध्य में स्थित कोमल, स्पंजी ऊतक है। बोन मैरो में मौजूद स्टेम कोशिकाएँ नई रक्त कोशिकाएँ बनाती हैं जिनमें शामिल हैं लाल रक्त कोशिकाएं, श्वेत रक्त कोशिकाएं, और प्लेटलेट्स।
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अधिकांश मामलों में, तीनों प्रकार की रक्त कोशिकाएँ प्रभावित होती हैं (पैनसायटोपीनिया)। इसके कारण:
एप्लास्टिक एनीमिया किसी भी उम्र में हो सकता है। यह एक गंभीर और प्राणघातक रक्त विकार है। इसके उपचारों में शामिल हैं रक्ताधान (रक्त चढ़ाना), दवाएँ और स्टेम कोशिका प्रत्यारोपण (बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन)।
बोन मैरो विभिन्न प्रकार की रक्त कोशिकाएँ बनाती है। इसके लक्षण लाल रक्त कोशिकाओं, सफ़ेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट की संख्या में कमी के कारण होते हैं। आपके बच्चे के संकेत और लक्षण इस बात पर निर्भर हैं कि किस प्रकार की रक्त कोशिकाएँ प्रभावित हुई हैं और उसकी स्थिति कितनी गंभीर है।
रक्त कोशिकाओं की संख्या में गिरावट का प्रकार |
संकेत और लक्षण |
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निम्न लाल रक्त कोशिकाएं (खून की कमी) |
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सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होना (ल्यूकोपीनिया) और न्यूट्रोफिल की संख्या कम होना (न्यूट्रोपीनिया) |
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कम प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) |
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एप्लास्टिक एनीमिया बोन मैरो फ़ेलियर का एक प्रकार है। अधिकांश मामलों में, एप्लास्टिक एनीमिया अर्जित (अक्वायर्ड) होता है (यानी माता-पिता से नहीं मिला होता है)। इसे इडियोपैथिक (अज्ञात कारण वाला) एप्लास्टिक एनीमिया भी कहते हैं।
अक्वायर्ड एप्लास्टिक एनीमिया प्रतिरक्षा तंत्र के किसी हमले के कारण बोन मैरो में मौजूद रक्त-निर्माता स्टेम कोशिकाओं के विनाश के फलस्वरूप होता है। जब ऐसा होता है तो शरीर में कम रक्त कोशिकाएँ बनती हैं। प्रतिरक्षा तंत्र की दोषपूर्ण प्रतिक्रिया का कारण ज्ञात नहीं है।
दुर्लभ मामलों में, कुछ वायरस संक्रमणों, विषाक्त रसायनों के आस-पास रहने, कुछ दवाएँ लेने या कीमोथैरेपी अथवा विकिरण (रेडिएशन) लेने से भी एप्लास्टिक एनीमिया हो सकता है।
कभी-कभी, एप्लास्टिक एनीमिया की पहचान माता-पिता से बच्चों को मिलने वाले वंशानुगत बोन मैरो फ़ेलियर सिंड्रोम की परिस्थिति में होती है। एप्लास्टिक एनीमिया का कारण बन सकने वाले वंशानुगत विकारों में शामिल हैं फ़ैनकोनी एनीमिया, श्वॉचमैन-डायमंड सिंड्रोम, डिसकेरटोसिस कॉन्जेनिटा, SAMD9 और SAMD9L सिंड्रोम, तथा कई अन्य दुर्लभ आनुवंशिक रोग। इन वंशानुगत विकारों का उपचार अक्वायर्ड एप्लास्टिक एनीमिया से भिन्न होता है।
बोन मैरो में रक्त बनाने वाली स्टेम कोशिकाएँ होती हैं जो लाल रक्त कोशिकाएँ, सफ़ेद रक्त कोशिकाएँ और प्लेटलेट बनती हैं।
एप्लास्टिक एनीमिया बहुत दुर्लभ है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका में हर वर्ष प्रति दस लाख में ~2 व्यक्ति को होता है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका में सभी आयु वर्गों को मिलाकर लगभग 600 नए मामलों के बराबर है।
इसकी पहचान में अक्सर अन्य रोगों, जैसे लूकीमिया या वंशानुगत बोन मैरो फ़ेलियर विकारों, को खारिज किया जाना शामिल होता है। जैसे ही एप्लास्टिक एनीमिया की पहचान होती है, उपचार शुरू कर दिया जाता है।
एप्लास्टिक एनीमिया की पहचान आपके बच्चे के चिकित्सा इतिहास, शारीरिक परीक्षा और लैब परीक्षणों के आधार पर की जाती है। एप्लास्टिक एनीमिया के लैब परीक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं:
आपके बच्चे का एप्लास्टिक एनीमिया अगंभीर (जिसे कभी-कभी “मध्यम” कहते हैं), गंभीर या बहुत गंभीर हो सकता है।
आपके बच्चे के लिए सही उपचार उसके एप्लास्टिक एनीमिया के कारण व गंभीरता पर और आपके बच्चे की चिकित्सीय ज़रूरतों पर निर्भर करता है। यदि स्थिति गंभीर नहीं है, तो संभव है कि आपके बच्चे को उपचार न दिया जाए बल्कि नियमित रक्त परीक्षणों के ज़रिए उस पर करीबी नज़र रखी जाए।
एप्लास्टिक एनीमिया के उपचारों में ये शामिल हैं:
एलोजेनिक ट्रांसप्लांट, जिसमें HLA-मैच वाले दाता से स्वस्थ स्टेम कोशिकाएँ ली जाती हैं। HLA (ह्यूमन लूकोसाइट एंटीजन) कोशिकाओं की सतहों पर मौजूद प्रोटीन हैं। बोन मैरो ट्रांसप्लांट को सफल बनाने के लिए, चिकित्सकों को दाता और रोगी के बीच इन मार्करों का सावधानी से मिलान करना होता है ताकि खतरनाक प्रतिरक्षा तंत्र प्रतिक्रियाओं और ट्रांसप्लांट अस्वीकृति की रोकथाम की जा सके। यदि किसी HLA-मैच वाले बोन मैरो दाता सगे भाई/बहन की पहचान हुई हो तो इस उपचार का सुझाव दिया जाता है। यदि सगे भाई/बहन से मिलान (मैच) नहीं हो पाता है, और यदि आपके बच्चे को प्रतिरक्षादमन थैरेपी से लाभ नहीं होता है या उसका रोग गंभीर है, तो किसी असंबंधी, मैच करने वाले दाता पर विचार किया जा सकता है।
स्टेम कोशिका ट्रांसप्लांट एप्लास्टिक एनीमिया को जीवन भर के लिए ठीक कर सकता है। ट्रांसप्लांट कोई आसान प्रक्रिया नहीं है और इसमें कई जटिलताएँ हो सकती हैं, जैसे प्रतिरक्षा तंत्र प्रतिक्रिया, दाता कोशिकाओं को अस्वीकृत किया जाना या संक्रमण।
आपके बच्चे को प्रतिरक्षा तंत्र को स्टेम कोशिकाओं पर हमला करने से रोकने की दवाएँ दी जा सकती हैं। इन दवाों में शामिल हैं सायक्लोस्पोरिन और एंटीथायमोटिक ग्लोबुलिन (ATG)। इस प्रकार की थैरेपी कम-से-कम 1 वर्ष चलती है।
शुरू में, अधिकांश रोगियों को प्रतिरक्षादमन थैरेपी से लाभ होता है और उनकी रक्त कोशिकाओं की संख्या तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है। लेकिन हर 3 में से लगभग 1 रोगी में ही यह लाभ लंबे समय तक टिकता है। जिन रोगियों को प्रतिरक्षादमन थैरेपी से लाभ नहीं होता है या जिनका रोग लौट आता है उन्हें स्टेम कोशिका ट्रांसप्लांट की ज़रूरत पड़ती है।
आपके बच्चे को किसी स्वस्थ दाता से ली गईं लाल रक्त कोशिकाओं या प्लेटलेट के ट्रांसफ़्यूज़न चढ़ाए जा सकते हैं। इससे लक्षणों में राहत मिल सकती है पर यह तरीका रोग ठीक नहीं कर सकता है।
कुछ परिस्थितियों में, एल्ट्रॉम्बोपैग, रोमिप्लॉस्टिम या फ़िलग्रास्टिम (G-CSF) जैसी दवाएँ स्टेम कोशिका उत्पादन को बढ़ा सकती हैं जिससे शरीर को नई रक्त कोशिकाएँ बनाने में मदद मिलती है। ये दवाएँ एप्लास्टिक एनीमिया से ग्रस्त बच्चों को दुर्लभ मामलों में ही दी जाती हैं।
एप्लास्टिक एनीमिया के रोगियों में सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बहुत कम हो सकती है और इसलिए उनमें प्राणघातक संक्रमणों का जोखिम अधिक होता है। संक्रमण के उपचार या उसका जोखिम घटाने के लिए, फ़ंगस मारने वाली दवाएँ (एंटीफ़ंगल), वायरस मारने वाली दवाएँ (एंटीवायरल) या बैक्टीरिया मारने वाली दवाएँ (एंटीबायोटिक) दी जा सकती हैं।
उपचार पाने वाले अधिकांश लोगों का एप्लास्टिक एनीमिया ठीक हो जाता है। ठीक होना इन पर निर्भर है:
उपचार के बिना एप्लास्टिक एनीमिया प्राणघातक होता है। इसकी जटिलताओं में शामिल हैं गंभीर संक्रमण, रक्तस्राव और एनीमिया के कारण अंग विफलता। शीघ्र पहचान और उपचार के साथ, एप्लास्टिक एनीमिया ग्रस्त बच्चों में समग्र पंचवर्षीय उत्तरजीविता दर 90% से अधिक है।
पहचान और उपचार में हुई प्रगतियों के साथ, एप्लास्टिक एनीमिया ग्रस्त बच्चों में दीर्घकालिक परिणाम निरंतर बेहतर हो रहे हैं।
एप्लास्टिक एनीमिया ग्रस्त बच्चों को अस्पताल या क्लिनिक अक्सर जाना पड़ता है - सप्ताह में 2 या 3 बार तक।
चिकित्सक को कॉल करें यदि आपका बच्चा:
अक्सर हाथ धोएँ, रोगी स्थानों को साफ़ और व्यवस्थित रखें और अस्वस्थ लोगों से दूर रहें। आपके बच्चे को इनसे बचना चाहिए:
सुनिश्चित करें कि दूसरे लोग आपके बच्चे की चिकित्सा स्थिति से अवगत हों और जानते हों कि यदि कोई दुर्घटना हो जाए या चोट लग जाए तो क्या करना है। सभी स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को अपने बच्चे के निदान के बारे में और वह जो भी दवाएँ लेता हो उनके बारे में बताएँ।
एस्पिरिन या आइबुप्रोफ़ेन (Motrin®, Advil®) जैसी दवाएँ प्लेटलेट को सामान्य ढंग से कार्य करने से रोक सकती हैं। सिरदर्द, दर्द या बुखार के लिए यदि ज़रूरत हो तो एसिटैमिनोफेन (Tylenol®) दें। पहले अपनी देखभाल टीम से संपर्क किए बिना बुखार के लिए कोई भी दवा न दें।
यदि आपके बच्चे में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम है, तो वह अधिक आसानी से थक सकता है या उसकी साँस अधिक आसानी से फूल सकती है। सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा अत्यधिक शारीरिक गतिविधि न करे। जब प्लेटलेट की संख्या कम होती है, तो आपके बच्चे में रक्तस्राव का जोखिम अधिक होता है। आपके बच्चे को संपर्क वाले खेलों से, उछल-कूद वाले खेलों से और ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए जिनमें वह गिर सकता हो या उसे सिर अथवा पेट पर चोट लग सकती हो।
आपका बच्चा यह करे उससे पहले अपनी देखभाल टीम से बात करें:
उपचार के आरंभ में, संभव है कि आपका बच्चा स्कूल न जा पाए। या फिर आपके बच्चे को वैकल्पिक शेड्यूल या अन्य क्लासरूम समायोजनों की ज़रूरत पड़ सकती है।
आपके बच्चे की देखभाल टीम इस बारे में प्रश्नों के उत्तर दे सकती है कि आपके बच्चे को किन गतिविधियों से बचने की ज़रूरत पड़ सकती है।
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समीक्षित: जनवरी 2025
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एनीमिया एक स्थिति है जिसमें आपके शरीर में पर्याप्त संख्या में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएँ नहीं होती हैं। एनीमिया के लक्षणों और उपचार के बारे में जानें।