किशोर माइलोमोनोसाइटिक ल्यूकेमिया (JMML) एक खून का दुर्लभ बोन मैरो में कैंसर है जो छोटे बच्चों को प्रभावित करता है।
JMML ज़्यादातर 4 वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चों में होता है। लगभग 10% मामले 3 महीने से छोटे नवजात शिशुओं में होते हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका में हर वर्ष हर 10 लाख में से 1-2 बच्चों में JMML की पहचान होती है। यानी हर वर्ष 25–50 मामले।
JMML में बोन मैरो मोनोसाइट और माइलोसाइट नामक सफ़ेद रक्त कोशिकाएँ बहुत अधिक संख्या में बनाती है। कोशिकाएं जिगर, तिल्ली / प्लीहा, बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) और खून में जमा हो जाती हैं। जब ऐसा होता है, तो रक्त वैसे काम नहीं करता जैसे उसे करना चाहिए। रोगी संक्रमण से ठीक से नहीं लड़ पाते हैं।
JMML आक्रामक हो सकता है। स्टेम सेल ट्रांसप्लांट वह एकमात्र उपचार है जो JMML को ठीक कर सकता है। लेकिन 15% मामलों में, JMML बिना उपचार के अपने-आप ठीक हो जाता है। चिकित्सक ऐसे मामलों की करीबी निगरानी करते हैं।
लड़कों में JMML होने की संभावना लड़कियों से दोगुनी होती है।
JMML ग्रस्त लगभग 90% बच्चों की कुछ जीन में कैंसरकारी बदलाव मौजूद होते हैं। इन बदलावों को उत्परिवर्तन कहते हैं।
ल्यूकेमिया और लिम्फोमा के कारणों, उपचार और दुष्प्रभाव के बारे में और जानें।
सबसे सामान्य उत्परिवर्तित जीन इस प्रकार हैं:
| जीन | मामलों का प्रतिशत | विशेषताएँ | उपचार |
|---|---|---|---|
| PTPN11 जर्मलाइन (माता/पिता से प्राप्त) | 35-40% | - हल्की बीमारी - इस जीन बदलाव का नूनेन सिंड्रोम से संबंध है। |
इंतिज़ार करें और नज़र रखें या हल्की कीमोथैरेपी |
| PTPN11 सोमैटिक (बाद में होता है) | - दोबारा होने की अधिक संभावना
- आक्रामक रोग |
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट | |
| NF-1 (जर्मलाइन) | 10% | - रोग-पहचान के समय बच्चों की उम्र सामान्य तौर पर 5 वर्ष या अधिक होती है। - आक्रामक रोग - JMML के अन्य उप-प्रकारों से ग्रस्त बच्चों की तुलना में उनमें प्लेटलेट की संख्या अधिक हो सकती है और बोन मैरो ब्लास्ट कोशिकाएँ भी अधिक हो सकती हैं। - त्वचा पर कैफ़े-ओ-ले (Café-au-lait) धब्बे (सपाट, भूरे रंग के पैच) |
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट |
| CBL (जर्मलाइन) | 15% | - त्वचा पर 1 या अधिक कैफ़े-ओ-ले स्पॉट हो सकते हैं - कुछ मामलों में, यह रोग उपचार के बिना ठीक हो जाता है। |
- कुछ मामलों में इंतिज़ार करें और नज़र रखें - यदि रोग बढ़ता है तो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एक विकल्प हो सकता है। |
| KRAS(जर्मलाइन) | - हल्की बीमारी | इंतिज़ार करें और नज़र रखें या हल्की कीमोथैरेपी | |
| KRAS (सोमैटिक) | 10% | - अधिकांशतः नवजात शिशुओं में होता है - अक्सर मोनोसोमी 7 (क्रोमोसोम 7 की एक कॉपी अनुपस्थित) से संबंध होता है - आक्रामक रोग - स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद दोबारा होने का कम जोखिम |
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट |
| KRAS (जर्मलाइन) |
15% | कुछ मामलों में, लूकीमिया उपचार के बिना ठीक हो जाता है। यह सामान्य तौर पर नवजात शिशुओं में या G12S उत्परिवर्तन वाले मामलों में होता है। | - अपने-आप ठीक होने की संभावना वाले मामलों में करीबी निगरानी - स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एक विकल्प हो सकता है। |
| NRAS (सोमैटिक) | स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद दोबारा होने की दर अधिक है। यह सामान्य तौर पर अधिक उम्र के ऐसे बच्चों में होता है जिनमें फ़ीटल (भ्रूणीय) हीमोग्लोबिन की अधिक मात्रा होती है। | स्टेम सेल ट्रांसप्लांट |
JMML के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:
JMML की पहचान करना कठिन हो सकता है। JMML के लक्षण वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमणों के लक्षणों और बचपन के अन्य लूकीमिया तथा रक्त विकारों के लक्षणों से मिलते-जुलते होते हैं।
क्रोमोसोमल (गुणसूत्रीय) और आनुवंशिक परीक्षण महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उत्परिवर्तन का प्रकार उपचार तय करने में मदद दे सकता है।
JMML रोग की पहचान करने में निम्नलिखित जांचें शामिल हैं:
उपचार में करीबी निगरानी से लेकर हिमेटोपोएटिक सेल ट्रांसप्लांटेशन तक शामिल होते हैं।
चिकित्सक इस आधार पर उपचार तय करते हैं कि रोगियों को कितना लाभ होने का अनुमान है। इस पद्धति को जोखिम-अनुकूलित या जोखिम-स्तरीकृत कहा जाता है।
रोग का भावी पथ और उपचार से लाभ काफ़ी अलग-अलग होते हैं। चिकित्सक इन चीज़ों के अनुमान में मदद के लिए उम्र, फ़ीटल (भ्रूणीय) हीमोग्लोबिन के स्तर और प्लेटलेट्स की संख्या का आंशिक रूप से उपयोग कर सकते हैं। अधिकांश बच्चों को ट्रांसप्लांट की ज़रूरत पड़ती है। लगभग 15% मामलों में, रोग बिना उपचार के अपने-आप ठीक हो जाता है।
ऐसे रोगी लो-रिस्क रोगी होते हैं जिनमें PTPN11 का वंशानुगत उत्परिवर्तन (नूनेन सिंड्रोम) या CBL का वंशानुगत उत्परिवर्तन (CBL सिंड्रोम) होता है। कभी-कभी इन मामलों में उपचार के बिना ही संकेतों और लक्षणों में कमी आने लगती है।
चिकित्सक ऐसे रोगियों की करीबी निगरानी करते हैं। यदि रोगियों में स्प्लीन (प्लीहा/तिल्ली) का आकार बढ़ना आदि लक्षण और बारंबार संक्रमण विकसित हों तो उन्हें कीमोथैरेपी दी जा सकती है।
ऐसे रोगी इंटरमीडिएट (मध्यवर्ती) रिस्क वाले रोगी होते हैं जिनमें सोमैटिक NRAS उत्परिवर्तन होता है और जिनकी उम्र 1 वर्ष से कम है।
चिकित्सक ऐसे रोगियों की करीबी निगरानी करते हैं या कीमोथैरेपी से उनका उपचार करते हैं। अज़ासिटिडीन नामक दवा JMML में उपयोग के लिए स्वीकृत है।
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट भी एक विकल्प हो सकता है। यह हाई-रिस्क JMML का वह एकमात्र उपचार है जिससे इसके ठीक होने की आशा होती है। यह उपचार पाने के लिए रोगियों के पास उपयुक्त दाता होना चाहिए।
ऐसे रोगी हाई-रिस्क रोगी होते हैं जिनमें सोमैटिक KRAS, NF1, या PTPN11 उत्परिवर्तन होते हैं। इन मामलों का अनुमान यह है कि या तो ये उपचार-प्रतिरोधी (रिफ्रैक्टरी) होते हैं या इनके दोबारा होने की संभावना होती है (पुनरावर्तन)।
चिकित्सक फ्लुडेराबिन और साइट्राबाइन दवाओं के साथ कीमोथैरेपी सुझा सकते हैं।
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एक संभव उपचार है। कभी-कभी इस प्रक्रिया के बाद नेचुरल किलर कोशिकाओं का इन्फ़्यूज़न किया जाता है, जो एक प्रकार की सफेद रक्त कोशिका है। कीमोथैरेपी एक विकल्प हो सकती है। सीमित मामलों में, लक्षित चिकित्सा एक विकल्प हो सकती है।
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट रोग-पहचान के बाद जल्द-से-जल्द किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि कम-उम्र बच्चों में ट्रांसप्लांट सफल होने की दर सबसे अधिक है। यदि JMML वापस आ जाए, तो दूसरा स्टेम सेल ट्रांसप्लांट और नेचुरल किलर सेल इन्फ़्यूज़न सफल हो सकते हैं।
नाभिरज्जु रक्त प्रत्यारोपण भी एक उपचार विकल्प है।
अन्य इलाजों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
वंशानुगत सिंड्रोम से ग्रस्त बच्चों का उपचार सोमैटिक उत्परिवर्तनों वाले बच्चों से अलग हो सकता है।
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट 50% से अधिक मामलों का सफल उपचार करता है।
ट्रांसप्लांट के साथ लक्षण-मुक्त हो जाने वाले लगभग 35–40% बच्चों में JMML वापस आ जाता है। चिकित्सक दूसरा ट्रांसप्लांट सुझा सकते हैं।
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं। उनमें शामिल हैं वृद्धि, यौवनारंभ, प्रजनन क्षमता, और अंग कार्यक्षमता से संबंधित समस्याएँ। आपकी देखभाल टीम और विवरण दे सकती है।
नियमित फ़ॉलो-अप अपॉइंटमेंट में भाग लेना महत्वपूर्ण है। रोगियों की अच्छी स्वास्थ्य आदतें भी होनी चाहिए। उनमें शामिल हैं स्वास्थ्यकर आहार लेना, नियमित शारीरिक गतिविधियाँ करना, और पर्याप्त नींद लेना।
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समीक्षित: अप्रैल 2023
खून का कैंसर (ल्यूकेमिया), खून और बोन मैरो (हड्डी के अंदर जहां खून बनता है) में होने वाला कैंसर है। यह बच्चों और किशोरों में पाया जाने वाला सबसे आम कैंसर है।