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डिफ्यूज़ इंट्रिंसिक पोंटाईन ग्लिओमा (DIPG)

अन्य नाम: डिफ्यूज़ मिडलाइन ग्लिओमा (DMG), H3 K27M-म्यूटेंट

DIPG क्या है?

डिफ्यूज़ इंट्रिंसिक पोंटाईन ग्लिओमा (DIPG) एक आक्रामक दिमाग का ट्यूमर है। यह ब्रेनस्टेम में, पॉन्स नामक भाग में शुरू होता है। पॉन्स जीवन की महत्वपूर्ण क्रियाओं के साथ-साथ उन तंत्रिकाओं को भी नियंत्रित करता है जो दृष्टि, सुनने, बोलने, निगलने और गतिविधियों को नियंत्रित करती हैं।

डिफ्यूज़ इंट्रिंसिक पोंटाईन ग्लिओमा (DIPG) एक आक्रामक दिमाग का ट्यूमर है। यह ब्रेनस्टेम में, पॉन्स नामक भाग में शुरू होता है। पॉन्स जीवन की महत्वपूर्ण क्रियाओं के साथ-साथ उन तंत्रिकाओं को भी नियंत्रित करता है जो दृष्टि, सुनने, बोलने, निगलने और गतिविधियों को नियंत्रित करती हैं।

डिफ्यूज़ इंट्रिंसिक पोंटाईन ग्लिओमा या DIPG, एक तेज़ी से फैलने वाला दिमाग का ट्यूमर है। यह दिमाग के आधार में बनता है। DIPG की शुरुआत ब्रेन स्टेममें बनती है। इस भाग को पॉन्स कहते हैं।

पॉन्स जीवन के कई महत्वपूर्ण कार्यों का नियंत्रण करता है, जैसे:

  • श्वसन
  • हृदय की गति
  • रक्तचाप

देखने, सुनने, बोलने, निगलने, संतुलन और हिलने डुलने संबंधी क्रियाओं को नियंत्रित करने वाली नसें भी दिमाग के इसी हिस्से से होकर गुजरती हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका में हर वर्ष DIPG के लगभग 200-300 नए मामलो की पहचान होती है। DIPG अधिकांशतः 5-10 वर्ष की उम्र के बच्चों में होता है। लेकिन यह छोटे बच्चों और किशोरों में भी हो सकता है। DIPG वयस्कों में दुर्लभ है।

DIPG एक प्रकार का हाई-ग्रेड ग्लिओमा है। यह ग्लायल सेल से बढ़ता है, जो दिमाग के सहायक ऊतक का निर्माण करती हैं। DIPG एक डिफ़्यूज़ ट्यूमर है। यानी यह सुपरिभाषित या सीमाबद्ध नहीं होता है। यह ट्यूमर उंगली जैसी शाखाओं के रूप में स्वस्थ ऊतकों के अंदर फैलता है।

ट्यूमर के स्थान और इसके फैलाव के कारण, सर्जरी से DIPG को सुरक्षित रूप से निकाला नहीं जा सकता।

DIPG का उपचार बहुत कठिन है और इसका कोई इलाज नहीं है। इस बीमारी की पहचान होने के बाद अधिकांश बच्चे 2 वर्ष से अधिक समय तक जीवित नहीं रह पाते। DIPG का मुख्य उपचार विकीरण चिकित्सा है। रेडिएशन अधिकांश रोगियों में लक्षणों में अस्थायी तौर पर सुधार करता है, लेकिन यह कोई इलाज नहीं है। परिवार नैदानिक परीक्षणों पर विचार कर सकते हैं, जिसमें यह देखने के लिए नए इलाजों का परीक्षण किया जाता है कि परिणामों में सुधार लाया जा सकता है या नहीं।

बीमारी के शुरुआती दौर में प्रशामक (पैलिएटिव) देखभाल महत्वपूर्ण है। इससे परिवारों को लक्षणों का प्रबंधन करने और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

DIPG पॉन्स में पाए जाने वाले एक प्रकार के डिफ्यूज़ मिडलाइन ग्लिओमा का एक पुराना नाम है। इसे डिफ्यूज़ मिडलाइन ग्लिओमा (DMG), H3 K27M-ऑल्टर्ड, H3 K27-ऑल्टर्ड DMG या ब्रेनस्टेम ग्लिओमा भी कहते हैं।

DIPG के लक्षण

DIPG ट्यूमर तेज़ी से बढ़ते हैं। इसके लक्षण आमतौर पर बहुत ही कम अवधि में (बीमारी की पहचान होने से लगभग 1 महीने पहले) विकसित होने लगते हैं। यह तेज़ी से शुरू होता है और इसकी तेज़ी से प्रगति होती है.

DIPG के संकेतों और लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • संतुलन खोना और चलने में समस्या
  • नेत्र संबंधी समस्याएं जैसे अस्पष्ट दिखना, दोहरा दिखना, पलकों का गिरना, अनियंत्रित नेत्र गति, आंख को पूरी तरह बंद न कर पाना, आंखें एक साथ एक दिशा में नहीं देख पाती हैं या तिरछी दिखती हैं (भेंगापन)
  • चेहरे पर कमज़ोरी या चेहरे का लटक जाना, आमतौर पर 1 ही तरफ
  • लार बहना या निगलने में समस्याएं
  • पैरों और बाजुओं में कमज़ोरी आना, आमतौर पर 1 ही तरफ
  • अनियमित गतिविधि या झटके लगना
  • असामान्य प्रतिवर्ती क्रियाएं
  • बहुत छोटे बच्चों में, पनपने में विफलता

कम सामान्य लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • सिरदर्द, विशेषकर सुबह के समय जो अक्सर उल्टी के बाद बेहतर होता है
  • व्यवहार संबंधी परिवर्तन, स्कूल संबंधी समस्याएं, चिड़चिड़ापन या रात में हँसना (नाइट लाफ़्टर)

DIPG बीमारी की पहचान

डिफ्यूज़ इंट्रिंसिक पोंटाईन ग्लिओमा की पहचान के लिए चुंबकीय प्रतिध्वनि इमेजिंग (MRI) का उपयोग किया जा सकता है।

डिफ्यूज़ इंट्रिंसिक पोंटाईन ग्लिओमा की पहचान के लिए चुंबकीय प्रतिध्वनि इमेजिंग (MRI) का उपयोग किया जा सकता है।

DIPG की पहचान के परीक्षणों में ये शामिल हैं:
  • शारीरिक परीक्षा और चिकित्सा इतिहास से चिकित्सकों को लक्षणों, सामान्य स्वास्थ्य, पिछली बीमारी और जोखिम कारकों के बारे में जानने में मदद मिलती है।
  • एक न्यूरोलॉजिकल या तंत्रिका संबंधी परीक्षण दिमाग की कार्यक्षमता के विभिन्न पहलुओं का मापन करता है। इनमें शामिल हैं स्मृति, दृष्टि, श्रवण, मांसपेशियों की शक्ति, संतुलन, तालमेल और प्रतिवर्ती क्रियाएं।
  • इमेजिंग परीक्षण मदद करते हैं ट्यूमर की पहचान करने में, यह देखने में कि ट्यूमर कितना बड़ा है और यह पता लगाने में कि दिमाग के कौन-कौनसे क्षेत्र प्रभावित हुए हो सकते हैं। चुंबकीय प्रतिध्वनि इमेजिंग (MRI) वह मुख्य इमेजिंग परीक्षण है जिसका उपयोग DIPG की पहचान के लिए किया जाता है।

चिकित्सक DIPG का निदान करने के लिए MRI में ट्यूमर के प्रमुख लक्षणों की तलाश करते हैं:

  • ट्यूमर पॉन्स में स्थित होता है।
  • इसमें आमतौर पर पॉन्स का अधिकांश भाग शामिल होता है और यह अधिकांश भाग तक फैला हुआ होता है (इंट्रिंसिक या अन्तरस्थ)।
  • ट्यूमर के किनारे पूर्णतः स्पष्ट नहीं होते। यह स्वस्थ ऊतकों में पहुँच जाता है (डिफ़्यूज़)।

लगभग 10-20% बच्चों के ब्रेन ट्यूमर ब्रेनस्टेम में पाए जाते हैं। ब्रेन स्टेम में ट्यूमर आम तौर पर DIPG होता है। लेकिन ब्रेन स्टेम के लगभग 20% (हर 10 में से 2) ट्यूमर लो-ग्रेड एस्ट्रोसाइटोमा होते हैं। इन्हें DIPG नहीं माना जाता है।

DIPG बीमारी की पहचान में बायोप्सी की भूमिका

चिकित्सक DIPG की पहचान करने के लिए कभी-कभी बायोप्सी का उपयोग करते हैं। पहले, बायोप्सी आम तौर पर नहीं की जाती थी। बायोप्सी न करने के कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • MRI और क्लिनिकल मूल्यांकन में DIPG अक्सर कुछ विशिष्ट फ़ीचर दिखाता है। इसका यह अर्थ है कि अन्य परीक्षणों के बिना ही इसकी पहचान की जा सकती है।
  • बायोप्सी से नुकसान होने का जोखिम होता है। ऐसा ट्यूमर के स्थान के कारण है।
  • बायोप्सी से उपचार की योजनाओं या परिणामों में शायद कोई बदलाव न आए।

सर्जरी और उपचारों में हुई प्रगतियों के फलस्वरूप, DIPG के लिए बायोप्सी अधिक आम हो गई है। बायोप्सी के बाद, पैथॉलजिस्ट ट्यूमर के प्रकार और ग्रेड की पहचान करने के लिए ऊतक के नमूने को माइक्रोस्कोप के ज़रिए देखता है। आनुवांशिक बदलावों या मार्करों के लिए ट्यूमर का परीक्षण किया जाता है। आण्विक विशेषताओं को समझने से एक दिन DIPG हेतु बेहतर उपचार संभव हो सकते हैं। इनमें टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी शामिल हो सकती हैं।

डिफ्यूज़ मिडलाइन ग्लिओमा, H3 K27M-म्यूटेंट: लगभग 80% (हर 10 में से 8) DIPG ट्यूमरों में कोई विशिष्ट उत्परिवर्तन, यानी DNA में बदलाव, होता है। यह उत्परिवर्तन H3 K27M के नाम से जाना जाता है। ये ट्यूमर अधिकांशतः पॉन्स में होते हैं। लेकिन वे थैलेमस में, मेरु रज्जु में या दिमाग की मध्यरेखा में स्थित अन्य स्थानों में भी हो सकते हैं। बायोप्सी के बिना भी, यह माना जाता है कि अधिकांश DIPG ट्यूमरों में H3 K27M उत्परिवर्तन होता है। H3 K27M उत्परिवर्तन वाले ट्यूमर के आमतौर पर खराब परिणाम होते हैं भले ही फिर वे किसी भी श्रेणी के हों या माइक्रोस्कोप के नीचे कैसे भी दिखते हों।

DIPG का कारण किसी को नहीं पता। लेकिन वैज्ञानिक इन ट्यूमरों से जुड़े जीन बदलावों के बारे में और जान रहे हैं। न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (NF1) सहित, कुछ आनुवांशिक विकारों के होने से ब्रेन स्टेम ग्लिओमा का खतरा बढ़ सकता है।

DIPG का स्तर का पता लगाना और श्रेणीकरण

DIPG के लिए स्तर का पता लगाने की कोई मानक प्रणाली नहीं है। उपचार 2 मुख्य कारकों पर आधारित होता है:

  1. यदि DIPG केवल ब्रेनस्टेम में पाया गया है या यदि यह दिमाग या रीढ़ के अंदर की नस के अन्य दूरवर्ती भागों में फैल गया है (मेटास्टॅटीक (कैंसर फैला हुआ) बीमारी)
  2. यदि DIPG की हाल ही में पहचान हुई या यह इलाज के बाद वापस हो गया है (वापस आने वाला बीमारी)

ग्लिओमा को माइक्रोस्कोप के नीचे ये कैसे दिखते हैं, इस आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। कोशिकाएं जितनी अधिक असामान्य दिखती हैं, उनकी श्रेणी उतनी ही उच्च होती है। ग्रेड 1 और 2 के ट्यूमर लो-ग्रेड यानी निम्न-श्रेणी के ग्लिओमा होते हैं। इसमें कोशिकाएं अधिक सामान्य कोशिकाओं की तरह दिखती हैं और धीरे-धीरे बढ़ती हैं।

ग्रेड 3 और 4 के ट्यूमर हाई-ग्रेड यानी उच्च-श्रेणी के ग्लिओमा होते हैं। वे आक्रामक होती हैं और तेज़ी से विकसित होती हैं। ये ट्यूमर पूरे दिमाग में फैल सकते हैं।

DIPG ट्यूमर आमतौर पर उच्च-श्रेणी के होते हैं। दुर्लभ रूप से ही, जब DIPG एक कम-श्रेणी के ट्यूमर (श्रेणी 2) के रूप में दिखाई देता है।

DIPG का उपचार

DIPG तेज़ी से बढ़ता है। इस समय कोई भी इलाज ज्ञात नहीं है। मानक देखभाल विकीरण चिकित्सा पर आधारित है।

DIPG मरीज़ों की अधिकतर देखभाल लक्षणों को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता का समर्थन करने पर केंद्रित होती है। कॉर्टीकोस्टेरॉयड डेक्सामेथासोन जैसी दवाएँ ट्यूमर के कुछ लक्षणों को घटाने में मदद कर सकती हैं। ये दवाएँ आम तौर पर बीमारी-पहचान के समय और ट्यूमर के बढ़ने के समय तंत्रिकीय लक्षणों को संभालने में मदद के लिए दी जाती हैं। लक्षणों का प्रबंधन करना है।

बहुत से क्लिनिकल परीक्षण ऐसे इलाजों की खोज कर रहे हैं जो DIPG से पीड़ित मरीज़ों के लिए परिणामों में सुधार ला सकते हैं।

DIPG से पीड़ित बहुत से मरीजों को क्लिनिकल परीक्षण के माध्यम से देखभाल मिलती है। क्लिनिकल परीक्षण उपलब्ध हैं:

  • बीमारी की पहचान करते समय
  • विकीरण चिकित्सा पूरी होने के बाद लेकिन बीमारी प्रगति से पहले
  • ट्यूमर बढ़ जाने के बाद

कई बार, शुरुआती विकीरण चिकित्सा के बाद ट्यूमर काफ़ी समय के लिए सिकुड़ जाता है। लक्षणों में सुधार आता है और रोगी अपनी सामान्य गतिविधियों के लिए घर जा सकते हैं। इसे कभी-कभी “हनीमून अवधि” कहते हैं।

इस चरण का पूर्वानुमान लगाना कठिन है। इस समय के दौरान कुछ बच्चे बिल्कुल सामान्य हो जाते हैं। कुछ बच्चों में बिल्कुल भी सुधार नहीं होता। परिवार इस समय का उपयोग एक साथ मिलकर बिताने या परिवार के रूप में कुछ विशेष करने के लिए कर सकते हैं। इच्छा पूरी करने वाले संगठन अक्सर इसमें सहायता कर सकते हैं।

DIPG के लिए पूर्वानुमान

वर्तमान में DIPG का कोई भी इलाज नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 10% (हर 10 में से 1) से भी कम बच्चे बीमारी-पहचान के बाद 2 वर्ष से अधिक जीवित रह पाते हैं। बहुत कम-उम्र रोगियों (3 वर्ष या कम) में, और जिनमें बीमारी-पहचान से पहले लंबे समय से लक्षण हैं उनमें थोड़ा बेहतर परिणाम देखने को मिल सकता है।

DIPG में लंबे समय तक जीवित रह पाना आम तौर पर असामान्य ट्यूमर विशेषताओं से या ऐसी गलत पहचान से जुड़ा होता है जिसमें ट्यूमर असल में DIPG था ही नहीं।

जल्द प्रशामक (पैलिएटिव) देखभाल लक्षणों के प्रबंधन में मदद करने और उपचार निर्णय लेने में सहायता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है।

DIPG ग्रस्त बच्चों के लिए सहायता

DIPG में, लक्षण समय के साथ बिगड़ते जाते हैं। सहायक देखभाल अधिकतम संभव समय तक जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करती है। किन समस्याओं की उम्मीद करें और उनके प्रबंधन में मदद किन तरीकों से करें यह जानने के लिए अपनी देखभाल टीम से बात करें।

बाद के स्तर वाले DIPG के आम लक्षण

जब DIPG वापस आता है, तब इसके लक्षण तेज़ी से बढ़ सकते हैं। लेकिन, लक्षण और उनकी प्रगति व गंभीरता भिन्न-भिन्न हो सकती है।

DIPG के अंतिम चरण के कुछ संकेतों और लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • संतुलन और गतिक नियंत्रण की हानि। इससे अक्सर व्यक्ति चलने में अक्षम हो जाता है और व्हीलचेयर पर आश्रित हो जाता है।
  • कमज़ोरी और लकवा जो और बिगड़ते जाते हैं, अक्सर शरीर की 1 साइड पर
  • निगलने में कठिनाई। इसके कारण हो सकता है एस्पिरेशन निमोनिया, सामान्य ढंग से खा-पी न पाना और फ़ीडिंग ट्यूब की ज़रूरत पड़ना
  • डेक्सामिथेसोन जैसी कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाओं के सेवन के कारण वजन बढ़ना या चेहरे पर सूजन आना या फूलापन रहना
  • बोलने या बातचीत करने में समस्याएं
  • चिंता, चिड़चिड़ापन या घबराहट
  • अवसाद और उदासी की भावनाएं
  • थकान या उनींदापन
  • नींद की समस्याएँ
  • दृष्टि-संबंधी परिवर्तन
  • सिरदर्द
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • कब्ज
  • मूत्र में कमी, मूत्र का रुकना
  • सांस लेने में समस्याएँ
  • हृदय गति और रक्तचाप संबंधी समस्याएं
  • दौरे पड़ना
  • भ्रम होना, भ्रमावस्था (डेलिरियम)
  • बेहोशी

दवाइयां दर्द, जी मिचलाना और उल्टी, चिंता और अवसाद, तथा ट्यूमर के बढ़ने के साथ-साथ विकसित होने वाली चिकित्सीय समस्याओं का नियंत्रण करने में मदद कर सकती हैं।

कला थेरेपी, संगीत थेरेपी और अन्य  पूरक उपचार भी रोगियों और परिवारों को लक्षणों का प्रबंधन करने में मदद कर सकती हैं।

DIPG के साथ वज़न बढ़ना और चेहरा सूजना

वजन बढ़ना, चेहरे पर सूजन आना और फूलापन रहना मुख्यतया DIPG के लक्षणों के प्रबंधन में मदद करने के लिए दी जाने वाली कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाओं की अधिक खुराकों के कारण होता है। ये लक्षण आम तौर पर खुद ट्यूमर के कारण नहीं होते हैं।

दिमाग के ट्यूमर के कारण मस्तिष्क में तरल पदार्थ और दबाव बढ़ सकता है (हाइड्रोसेफलस)। इस दवाब के कारण सिरदर्द, जी मिचलाना, कमज़ोरी और चलने से संबंधित समस्याओं जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। स्टेरॉयड दवाइयां जैसे डेक्सामिथेसोन दिमाग की सूजन और दवाब को कम करती हैं। लेकिन इन दवाओं के दुष्प्रभाव भी हैं, विशेषकर जब इनकी उच्च खुराकें दी जाती हैं या इन्हें लंबे समय तक दिया जाता है।

कॉर्टिकोस्टेरॉयड से भूख बढ़ सकती है जिससे बीमारी अधिक मात्रा में भोजन करते हैं और इससे उनका वजन बढ़ जाता है। इन दवाओं के कारण शरीर के लिए इन द्रवों से छुटकारा पाना मुश्किल हो सकता है, जिससे सूजन आ सकती है। शरीर वसा का भंडारण भी अलग ढंग से कर सकता है। यह गालों के फूलना या “चंद्र-मुख” होने का कारण बन सकता है।

तेज़ी से वज़न बढ़ने के कारण कभी-कभी त्वचा पर स्ट्रेच मार्क्स पड़ जाते हैं। कॉर्टिकोस्टेरॉयड के कारण रूप-रंग में आने वाला परिवर्तन रोगी और परिवार के लिए चिंताजनक हो सकता है। स्टेरॉयड इलाज के अन्य दुष्प्रभावों में बार-बार मनःस्थिति बदलना, चिड़चिड़ापन और मांसपेशियों का कमज़ोर होना शामिल है।

दुष्प्रभाव होते हुए भी, ये दवाइयां दिमाग के कैंसर से पीड़ित बहुत से रोगियों के लिए प्रशामक देखभाल और जीवन की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण भाग हैं। दुष्प्रभाव के बारे में और देखभाल के लक्ष्यों के बारे में अपनी देखभाल टीम से बात करें।

अमेरिकन दिमाग के कैंसर एसोसिएशन में स्टेरॉयड के बारे में अधिक पढ़ें

अपनी देखभाल टीम के साथ काम करना

DIPG के खराब पूर्वानुमान के साथ, परिवारों के लिए यह आवश्यक है कि वे थेरेपी के लक्ष्यों, प्रशामक देखभाल और जीवन के अंत तक की देखभाल के बारे में अपनी देखभाल टीम से बात करें। ये बातचीत देखभाल प्रक्रिया के आरंभ में ही कर ली जानी चाहिए।

देखभाल के लक्ष्य बीमारी के दौरान रोगी और परिवार की बदलती आवश्यकताओं के अनुसार बदलते रहते हैं।

जैसे-जैसे DIPG बढ़ता है, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं (health care providers) की एक टीम रोगी की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद कर सकती है।

प्रशामक (पैलिएटिव) देखभाल या जीवन की गुणवत्ता सेवाएँ रोगियों और परिवारों को निम्नलिखित में मदद देती हैं:

  • दर्द और अन्य लक्षणों का प्रबंधन
  • जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना
  • कठिन निर्णय लेना, जिसमें उपचार चुनना और जीवनांत देखभाल का निर्णय लेना शामिल है 

हॉस्पाइस देखभाल जीवन के अंत के करीब पहुँच रहे रोगियों को चिकित्सा और व्यावहारिक सहायता प्रदान करती है। पुनर्सुधार सेवाएं गतिवाही क्रियाओं, बोलने, सुनने या निगलने की समस्याओं के लिए देखभाल प्रदान करती हैं। बाल जीवन, सामाजिक कार्य, आध्यात्मिक देखभाल और मनोविज्ञान पूरे परिवार के लिए कैंसर यात्रा के दौरान भावनात्मक और व्यावहारिक ज़रूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।

अपनी स्वास्थ्य देखभाल टीम से पूछे जाने वाले प्रश्न

  • DIPG के लिए उपचार विकल्प क्या हैं?
  • क्या हमें DIPG के लिए किसी क्लिनिकल परीक्षण पर विचार करना चाहिए?
  • मेरे बच्चे की बीमारी जैसे-जैसे बढ़ती है, हम क्या उम्मीद कर सकते हैं?
  • हमें प्रशामक (पैलिएटिव) देखभाल टीम को कब शामिल करना चाहिए?
  • लक्षणों और दुष्प्रभावों को प्रबंधित करने के लिए क्या किया जा सकता है?
  • आराम और जीवन की गुणवत्ता के मामले में कौनसे सहायक देखभाल विकल्प मदद दे सकते हैं?

DIPG के बारे में मुख्य बिंदु

  • DIPG एक आक्रामक ब्रेन ट्यूमर है जो ब्रेन स्टेम में स्थित एक संरचना, जिसे पॉन्स कहते हैं, में बनता है।
  • DIPG का उपचार कठिन है, और इसका कोई इलाज नहीं है। 
  • विकीरण चिकित्सा सबसे आम उपचारों में से एक है।
  • DIPG की पहचान होने के बाद अधिकांश बच्चे 2 वर्ष से अधिक समय तक जीवित नहीं रह पाते।
  • DIPG के लक्षण तेज़ी से बढ़ सकते हैं। उनमें संतुलन और गतिक कौशलों की हानि, सिर दर्द, वज़न बढ़ना और निगलने में कठिनाई शामिल हो सकते हैं।
  • प्रशामक (पैलिएटिव) देखभाल टीम की ओर से जल्द सहायता परिवारों को लक्षणों का प्रबंधन करने और देखभाल व उपचार संबंधी निर्णय लेने में मदद दे सकती है।

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समीक्षित: जुलाई 2025

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