किसी गंभीर रोग से ग्रस्त बच्चों में नींद आने में परेशानी होना सामान्य है। नींद आने में परेशानी होना, रात में जाग जाना, नींद में बैचेनी होना और दिन के समय नींद आना, ये सामान्य शिकायतें हैं। कई मरीजों को थकान होना और सीखने व याददाश्त से जुड़ी समस्याएं जैसे संबंधित दुष्प्रभाव भी होते हैं।
स्वास्थ्य और तंदरुस्ती के लिए पर्याप्त नींद लेना आवश्यक है। अच्छी नींद के बिना, दिन भर के काम करना मुश्किल हो जाता है। मरीजों को स्कूल या काम में समस्याएं आ सकती हैं। भावनात्मक या व्यवहार में बदलाव जैसे चिड़चिड़ापन, मिजाज़, अति सक्रियता या बात न मानना भी सामान्य है।
कभी-कभी, नींद की आदतों को बेहतर बनाने के लिए कुछ कदम उठाकर नींद से जुड़ी समस्याओं का उपचार किया जा सकता है। कुछ मरीजों को नींद संबंधी विशिष्ट विकार के लिए उपचार की ज़रूरत हो सकती है।
कुछ चिकित्सा हालतों से पीड़ित बच्चों और किशोर उम्र के बच्चों में अनिद्रा, हाइपरसोम्निया (अधिक नींद), नार्कोलेप्सी, स्लीप एप्निया और रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम जैसे नींद संबंधी विशिष्ट विकार होने का जोखिम अधिक होता है।
नींद से जुड़ी समस्याओं का आंकलन करने और नींद संबंधी विशिष्ट विकारों की पहचान करने के लिए विभिन्न प्रकार की जांच की जाती है। इनमें शामिल है:
पूरी रात की नींद का अध्ययन या पॉलीसोमनोग्राफ़ी, नींद के दौरान शरीर के विभिन्न कामों का आंकलन करती है। पूरी रात की नींद के दौरान दिमाग की तरंगों, हलचल, हृदय गति, साँस लेना-छोड़ना और ऑक्सीजन स्तर को रिकॉर्ड करने के लिए विशेष मॉनिटर का इस्तेमाल किया जाता है। पॉलीसोमनोग्राफ़ी अक्सर नींद चिकित्सा केंद्र या अस्पताल में की जाती है। एक पोर्टेबल स्लीप मॉनिटर का इस्तेमाल करके घर पर कुछ उपाय किए जा सकते हैं।
अपने बच्चे या किशोर को कैंसर उपचार के दौरान अच्छी नींद लेने में मदद दें
नींद शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में वृद्धि करती है। यह दिमाग, हृदय, और फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह चयापचय, प्रतिरक्षा कार्यक्षमता, मूड और रोग प्रतिरोध को बढ़ाती है। कैंसर ग्रस्त बच्चों के मामले में, स्वस्थ नींद उनके शरीर को कीमोथैरेपी, सर्जरी, और रेडिएशन से रिकवर होने में मदद देती है।
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मल्टीपल स्लीप लेटेंसी टेस्ट (MSLT) से यह पता चलता है कि मरीज को दिन में नींद आने में कितना समय लगता है। मरीज को आठ घंटे की अवधि में 4 या 5 बार झपकी लेने का अवसर दिया जाता है। एक अंधेरे, आरामदायक कमरे में परीक्षण किया जाता है और झपकी की अवधि निर्धारित की जाती है तथा उसका समय मापा जाता है। हर बार झपकी लेने पर, नींद आने में लगने वाले समय (स्लीप लेटेंसी) को रिकॉर्ड किया जाता है। उस समय की आयु के अनुसार सामान्य तौर पर कितना समय लगना चाहिए, उससे तुलना की जाती है।
एक्टिग्राफ़ी में एक छोटे उपकरण (एक्टिग्राफ़) का उपयोग करके समय के साथ होने वाली गतिविधि को मापा जाता है, जिसे आमतौर पर कलाई या टखने पर पहना जाता है। व्यक्ति की गतिविधि और नींद के पैटर्न की जानकारी देने के लिए, उपकरण दिन और रात की पूरी गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। एक्टिग्राफ़ी का उपयोग अक्सर स्लीप लॉग जैसे अन्य उपायों के साथ किया जाता है। मेडिकल एक्टिग्राफ़ उपकरण अधिक सटीक होते हैं और अधिक विस्तार से जानकारी देते हैं। हालांकि नींद को ट्रैक करने के लिए अक्सर सामान्य स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन वे सोने/जागने के पैटर्न के बारे में सटीक जानकारी नहीं देते हैं और मरीज की नींद के बारे में निर्णय लेने के लिए उनका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
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समीक्षित: जून 2019