मुख्य विषयवस्तु में जाएं

बच्चों और किशोरों में घबराहट

घबराहट या चिंता क्या है?

डर, तनाव या चिंता महसूस होने को एंग्ज़ाइटी कहते हैं। यह अक्सर किसी तनावपूर्ण स्थिति की प्रतिक्रिया में होती है। लेकिन यह किसी विशिष्ट ट्रिगर के बिना भी हो सकती है। एंग्ज़ाइटी में, पूर्व में हुई किसी घटना के बारे में या भविष्य में कुछ बुरा होने के बारे में चिंता हो सकती है।

अधिकांश मामलों में, बच्चे और किशोर इसका सामना अच्छे से कर लेते हैं। अन्य मामलों में, एंग्ज़ाइटी के कारण निरंतर बनी रहने वाली समस्याएँ होती हैं। यह किसी एंग्ज़ाइटी विकार का संकेत हो सकता है।

एंग्ज़ाइटी और एंग्ज़ाइटी विकारों से ग्रस्त लोगों की मदद के लिए संसाधन और सेवाएँ उपलब्ध हैं।

गंभीर रोग के दौरान एंग्ज़ाइटी

गंभीर रोग का सामना कर रहे किसी भी व्यक्ति में एंग्ज़ाइटी आम है। माता-पिता, पारिवारिक देखभालकर्ता और भाई-बहन भी चिंता और एंग्ज़ाइटी से दो-चार हो सकते हैं।

एंग्ज़ाइटी में योगदान कर सकने वाले कुछ तनाव-कारक इस प्रकार हैं:

  • आपका रोग भविष्य में क्या मोड़ लेगा इस बारे में अनिश्चितता
  • जाँच के परिणामों की प्रतीक्षा करना
  • सामान्य दिनचर्याओं में बदलाव
  • चिकित्सीय कार्यविधियों के लिए तैयारी
  • अस्वस्थता का सामना

प्रत्येक व्यक्ति घबराहट या चिंता को अलग तरह से अनुभव करता है। छोटे बच्चों को एंग्ज़ाइटी की भावनाओं को नाम देने और उनके बारे में बात करने में परेशानी हो सकती है। बड़े बच्चे और किशोर हो सकता है अपनी चिंताओं के बारे में इसलिए बात न करना चाहें क्योंकि वे अपने करीबियों को परेशान करना नहीं चाहते या हालात और तनावपूर्ण बनाना नहीं चाहते। भावनाओं के बारे में बात करना कठिन हो सकता है। लेकिन एक-दूसरे से और अपनी देखभाल टीम से खुला संचार करना यह सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है कि आपके पास आपकी ज़रूरत के संसाधन हों।

लहराते टेक्स्ट में स्कैनज़ाइटी शब्द लिखा है

परीक्षणों के बारे में चिंता और इमेजिंग परीक्षण या स्कैन के परिणामों की प्रतीक्षा की चिंता का एक अनौपचारिक नाम है — “स्कैनज़ाइटी।” स्कैन एंग्ज़ाइटी, या स्कैनज़ाइटी, कैंसर या अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए उपयोग किए जाने वाले इमेजिंग परीक्षणों से जुड़े तनाव को कहते हैं। व्यापक अर्थ में, इस शब्द का अर्थ किसी भी चिकित्सीय जाँच या परीक्षण से पहले, के दौरान, और बाद में होने वाली चिंता से है।

स्कैनज़ाइटी के बारे में जानें

 

एंग्ज़ाइटी (दुश्चिंता) के लक्षण

बच्चों और किशोरों में घबराहट के लक्षण और संकेत निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • तनावग्रस्त, चिंतित या डरा हुआ महसूस करना
  • चिड़चिड़ा होना
  • आसानी से परेशान/नाराज़ हो जाना
  • सोचने या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • बेचैनी, या एक जगह टिक कर न बैठ पाना
  • सामान्य से अधिक रोना
  • अकेले न रहना, प्रियजनों से चिपके रहना
  • उन गतिविधियों या स्थितियों से बचना जो घबराहट या चिंता का कारण बनती हैं
  • आश्वासन की बढ़ती आवश्यकता
  • सोने में दिक्कत
  • हृदय गति बढ़ना या तेज सांस लेना
  • तनावग्रस्त मांसपेशियां
  • सिरदर्द
  • खान-पान की आदतों में बदलाव
  • पेट खराब, पेट में दर्द, कब्ज या दस्त
  • घबराहट वाली आदतें जैसे नाखून चबाना या त्वचा नोचना

शारीरिक बीमारी के कारण या किसी कठिन चिकित्सीय निदान के साथ जीने के दुष्प्रभाव के रूप में कई लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। एक मानसिक स्वास्थ्य प्रदाता आपको घबराहट या चिंता के लक्षणों को समझने में और उन्हें प्रबंधित करने के बेहतरीन तरीके बताने में मदद कर सकता है।

एक किशोरी चॉक से ज़मीन पर "हेल्प” लिख रही है

अगर बच्चे में चिंता के लक्षण गंभीर हो रहे हों, उनके रोज़मर्रा के कामों या आपसी रिश्तों पर असर पड़ रहा हो, या तनाव का कारण खत्म होने के बाद भी ये लक्षण बने रहें, तो अपनी देखभाल टीम से सलाह लें।

बच्चों और किशोरों में घबराहट या चिंता संबंधी विकार

घबराहट या चिंता संबंधी विकार लगातार बना रहने वाला वह डर या चिंता है, जो किसी व्यक्ति के दैनिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालती है या अत्यधिक मानसिक कष्ट का कारण बनती है।

आमतौर पर, घबराहट या चिंता विचारों और भावनाओं के सामान्य दायरे का ही एक हिस्सा होती है। लेकिन एंग्ज़ाइटी के ऐसे लक्षण जो दैनिक जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं या जो बेहतर नहीं होते हैं, वे किसी ऐसे एंग्ज़ाइटी विकार या अन्य मानसिक रोग का संकेत भी हो सकते हैं जिसे उपचार चाहिए।

घबराहट या चिंता संबंधी विकार के प्रकार

एंग्ज़ाइटी विकारों की पहचान लक्षणों के आधार पर की जाती है। एंग्ज़ाइटी विकारों में ये शामिल हैं:

बच्चों और किशोरों में घबराहट या चिंता संबंधी विकार की पहचान

हर एंग्ज़ाइटी विकार के ऐसे लक्षण होते हैं जिनके आधार पर एक रोग-विशेष की पहचान होती है। कुछ घबराहट या चिंता संबंधित विकारों के समान लक्षण और उपचार हो सकते हैं।

मदद कर सकने वाले कुछ देखभाल टीम सदस्य इस प्रकार हैं:

किसी प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से बात करने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि आपके बच्चे को सर्वोत्तम संभव उपचार मिले।

बच्चों और किशोरों में घबराहट या चिंता के विकारों का उपचार

एंग्ज़ाइटी के लक्षणों का प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है।

घबराहट या चिंता के उच्च स्तर में ये शामिल हो सकते हैं:

  • स्वास्थ्य समस्याएं और सिरदर्द, पेट दर्द, जी मिचलाना या दस्त जैसे शारीरिक लक्षण
  • चिकित्सीय देखभाल और कार्यविधियों में बाधा डाल सकते हैं
  • व्यक्तिगत संबंधों को प्रभावित करना
  • स्कूल या ऑफ़िस में काम करना मुश्किल होना
  • अन्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं, जैसे डिप्रेशन, एल्कोहॉल या मादक पदार्थ उपयोग, धूमपान, खुद को नुकसान पहुँचाना या खान-पान संबंधी विकार
  • पोषण, नींद, शारीरिक गतिविधि और अन्य स्वास्थ्य व्यवहार का प्रभावित होना

एंग्ज़ाइटी के उपचार से दर्द, उबकाई, और डिप्रेशन में भी मदद मिल सकती है।

एंग्ज़ाइटी विकारों के मुख्य उपचारों में कॉग्निटिव बिहेवरल थेरेपी (CBT) और दवाएँ शामिल हैं।

संज्ञानात्मक व्यवहार-संबंधी थेरेपी (कॉग्निटिव बिहेवरल थेरेपी, CBT)

CBT एक प्रकार की थेरेपी है जो व्यक्ति को विचारों, भावनाओं और व्यवहारों के बीच के संबंध को समझने में मदद देती है। CBT प्रैक्टिशनर खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए विचार और व्यवहार बदलने की रणनीतियाँ प्रदान करता है।

आपका बच्चा शिथिलन तकनीकों की मदद से तनाव और एंग्ज़ाइटी के प्रभाव घटाने के तरीके सीख सकता है। इन तकनीकों में गहरी साँस लेना, मार्गदर्शित मन-चित्र, और मांसपेशी शिथिलन शामिल हो सकते हैं। बच्चों और किशोरों में एंग्ज़ाइटी विकारों के उपचार के लिए CBT अक्सर पहला सुझाव होती है।

बच्चों और किशोरों के लिए घबराहट या चिंता की दवाइयां

स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता एंग्ज़ाइटी के लक्षणों में मदद के लिए दवाएँ लिख सकता है। कुछ रोगियों को घबराहट या चिंता-विरोधी दवाओं की आवश्यकता हो सकती है जो घबराहट या चिंता विकार के उपचार के लिए समय पर काम करते हैं। कुछ रोगियों के लिए कई तरह की दवाइयों को साथ में चलाया जा सकता है।

एंग्ज़ाइटी की दवाएँ ले रहे रोगियों के लिए उनके स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से नियमित मुलाकातें करना ज़रूरी होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दवाएँ ठीक से काम कर रही हैं। स्वास्थ्य देखभाल टीम दुष्प्रभाव, यदि कोई हो, की भी निगरानी करेगी। अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से दवा के संबंध में मिले निर्देशों का हमेशा पालन करें। जितनी लिखी हो उससे अधिक दवा न लें। पहले देखभाल टीम से बात किए बिना दवा लेना न रोकें।

डोज़ में कोई भी बदलाव करने से पहले अपने बच्चे की देखभाल टीम से बात करें। साथ ही, दवाएँ सुरक्षित ढंग से स्टोर करना भी सुनिश्चित करें। बच्चों की पहुँच से बाहर रखें।

यदि आपके बच्चे की एंग्ज़ाइटी के लक्षणों में सुधार न हो या वे बदतर हो जाएँ तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता को बताएँ।

अस्वस्थता के दौरान एंग्ज़ाइटी का सामना करना

एंग्ज़ाइटी का प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है। ऐसी कई रणनीतियाँ हैं जो मदद कर सकती हैं। आपके बच्चे और उसकी विशिष्ट स्थिति के लिए सबसे अच्छे से काम करने वाली योजना बनाने के लिए अपनी देखभाल टीम से बात करें।

खुलकर बात करें: बच्चों से डरों और चिंताओं के बारे में बात करना कठिन हो सकता है। बच्चों के लिए भी वयस्कों को अपनी चिंताएँ बताना मुश्किल हो सकता है।

  • नियमित रूप से विचारों और भावनाओं पर चर्चा करने के तरीके तलाश करें। इससे मुश्किल बातचीत करना आसान हो जाता है, जब कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है
  • बच्चों को भावनाओं को संसाधित करने और घबराहट या चिंता के बारे में बात करने में मदद करने के लिए, अलग-अलग तरह के भावनाओं के शब्दों (जैसे कि गुस्सा, खुशी, डर या घबराहट) का उपयोग करें।
  • मान लेने के बजाय पूछें। अपने बच्चे का नज़रिया समझने के लिए खुले छोर वाले प्रश्नों का उपयोग करें।
  • अपने बच्चे की चिंताओं को पहचानें और उनका सम्मान करें, भले ही आप उनसे सहमत न हों।
  • यह स्वीकार करें कि कभी-कभी आपको भी वैसी ही एंग्ज़ाइटी वाले विचार और एहसास आते हैं। इससे आपके बच्चे को यह जानने में मदद मिलती है कि वह अकेला नहीं है।
  • विचारों और भावनाओं को ट्रैक करने के लिए एक रोजनामचा रखें।

एंग्ज़ाइटी के प्रबंधन में मदद के लिए सामना करने के कौशलों और संसाधनों का उपयोग करें: सामना करने के कौशलों का उपयोग करने (तब भी जब चीज़ें अच्छी चल रही हों) को एक आदत बनाएँ। इससे जब आवश्यक हो, रणनीतियों का उपयोग करना आसान हो जाएगा। घबराहट या चिंता से निपटने के लिए 1 से अधिक तरीका होना भी ज़रूरी है। कभी-कभी, सामना करने की किसी आम रणनीति का उपयोग नहीं किया जा सकता है या उससे मदद नहीं मिलती है।

  • ध्यान बँटाने की तकनीकें: बच्चों को उनकी प्रिय गतिविधियों में लगा देने से, चिंता पैदा करने वाले विचारों से उनका ध्यान हटाया जा सकता है। उनमें आर्ट थेरेपी, म्यूज़िक थेरेपी, और प्ले थेरेपी शामिल हो सकती हैं।
  • सचेतनता (माइंडफ़ुलनेस) और शिथिलन (रिलैक्सेशन) की रणनीतियाँ: आपका बच्चा तनाव और एंग्ज़ाइटी के प्रभाव घटाने के तरीके सीख सकता है। विश्राम तकनीकों के उदाहरणों में गहरी सांस लेना, निर्देशित कल्पना करना, और मांसपेशी को क्रमिक आराम देना शामिल हैं।
  • मानसिक और शारीरिक अभ्यास: कुछ बच्चों को तन-मन के अभ्यासों, जैसे बायोफ़ीडबैक, मसाज थेरेपी, योग, और शारीरिक व्यायाम, से मदद मिलती है। रिसर्च से पता चलता है कि ये उपचार, घबराहट या चिंता को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए दिमाग में तंत्रिका संकेतों और रासायनिक संदेशों को बदल सकते हैं।

दोस्तों और परिवार से संपर्क करें: गंभीर रोगों का सामना कर रहे रोगियों और परिवारों के लिए सामाजिक सहयोग महत्वपूर्ण होता है। बच्चों और किशोरों को दोस्तों से जुड़े रहने में और अपनी प्रिय आम गतिविधियाँ करते रहने में मदद दें।

सहायता समूहों पर विचार करें: मरीज और उनके परिवार अक्सर यह महसूस करते हैं कि अपने अनुभवों को किसी ऐसे व्यक्ति के साथ साझा करना आसान होता है जो स्वयं उस स्थिति से गुजर चुका हो। एक सहायता समूह में शामिल होना, समूह की गतिविधियों में भाग लेना या अस्पताल में नए दोस्त बनाना रोगियों को घबराहट या चिंता के बारे में बात करने और सामना करने के तरीके खोजने के लिए एक सुरक्षित स्थान दे सकता है।

खुद की एंग्ज़ाइटी और तनाव का प्रबंधन करें: जब आपका बच्चा बेचैन हो तो शांत रहें। बच्चे अपने करीबी लोगों के मूड को भांप लेते हैं। वे दूसरों को देखकर सामना करने की रणनीतियाँ भी सीखते हैं। माता-पिता और देखभालकर्ता को अपने स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने की आवश्यकता है। अपनी घबराहट या चिंता को प्रबंधित करने के तरीके खोजें, ताकि आपका बच्चा यह जान सके कि वह भी ऐसा कर सकता है।

अपने बच्चे को उसके डरों का सामना करने को प्रेरित करें: एंग्ज़ाइटी ग्रस्त बच्चे और किशोर उन स्थितियों से अक्सर बचते हैं जिनसे उन्हें डर लगता है। शुरुआत में, इससे उनकी एंग्ज़ाइटी कम हो सकती है। लेकिन समय के साथ, दूर भागने का यह तरीका एंग्ज़ाइटी को बनाए रख सकता है या उसे बढ़ा भी सकता है। कठिन स्थिति से होकर गुज़रने के लिए अपने बच्चे की तारीफ़ करें।

सुरक्षा दें, अत्यधिक सुरक्षा नहीं: माता-पिता अपने बच्चों को शारीरिक और भावनात्मक, दोनों प्रकार की चोट से बचाना चाहते हैं। अपने बच्चे को आत्मनिर्भर बनने के उम्र-उपयुक्त तरीके प्रदान करें। यह बच्चों को समस्याओं को हल करने के लिए अपनी क्षमताओं में आत्मविश्वास विकसित करने में मदद करता है।

यदि एंग्ज़ाइटी के लक्षण बिगड़ने लगें तो अपने बच्चे या अपने लिए मदद प्राप्त करें: जब कोई बच्चा गंभीर रूप से अस्वस्थ होता है तो चिकित्सीय ज़रूरतें अक्सर सबसे महत्वपूर्ण चिंता होती हैं। लेकिन घबराहट या चिंता शारीरिक स्वास्थ्य और चिकित्सा परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। मदद मांगना कमजोरी का संकेत नहीं है। अपनी देखभाल टीम या मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करें।

घबराहट या चिंता के बारे में अपनी देखभाल टीम से पूछे जाने वाले प्रश्न

  • मुझे मेरे बच्चे में एंग्ज़ाइटी के किन संकेतों या लक्षणों पर नज़र रखनी चाहिए?
  • मैं मेरे बच्चे को एंग्ज़ाइटी से निपटने में किन तरीकों से मदद दे सकता/ती हूँ?
  • मुझे किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर को कब दिखाना चाहिए?
  • आप एंग्ज़ाइटी के किन उपचारों का सुझाव देते हैं?
  • हम एंग्ज़ाइटी के लिए सामना करने के किन कौशलों का उपयोग कर सकते हैं?

एंग्ज़ाइटी के बारे में मुख्य बिंदु

  • किसी तनावपूर्ण स्थिति की प्रतिक्रिया में एंग्ज़ाइटी महसूस करना बच्चों और किशोरों के लिए सामान्य है।
  • यदि आपके बच्चे की एंग्ज़ाइटी बढ़ जाए, वह दैनिक गतिविधियों या संबंधों में दख्ल दे, या तनावपूर्ण घटना खत्म होने के बाद भी बनी रहे, तो संभव है कि उसे ऐसा एंग्ज़ाइटी विकार है जिसे उपचार की ज़रूरत है।
  • एंग्ज़ाइटी विकारों के उपचार में थेरेपी और दवाएँ शामिल हो सकती हैं।
  • एंग्ज़ाइटी का सामना करने में आपके बच्चे की मदद करने के अन्य तरीकों में खुलकर संचार करना, सामाजिक सहयोग प्राप्त करना, अपने खुद के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना, और सामना करने के कौशलों का विकास व उपयोग करना शामिल हो सकते हैं। 

अधिक जानकारी प्राप्त करें


टुगेदर by St. Jude™ ऑनलाइन संसाधन इस लेख में उल्लिखित किसी भी ब्रांडेड उत्पाद का समर्थन नहीं करता है।


समीक्षित: नवंबर 2023

संबंधित सामग्री