बचपन के कैंसर और स्टेम कोशिका ट्रांसप्लांट के संज्ञानात्मक प्रभाव
संज्ञानात्मक प्रभाव क्या हैं?
बचपन के कैंसर के कुछ उपचार व्यक्ति के सोचने, सीखने, योजना बनाने और समस्याएँ हल करने के तरीके में समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं। ये समस्याएँ कई वर्षों तक बनी रह सकती हैं। इन्हें संज्ञानात्मक देर से होने वाले प्रभाव के नाम से जाना जाता है।
संज्ञानात्मक प्रभाव उपचार के कई महीनों या वर्षों बाद प्रकट हो सकते हैं।
संज्ञानात्मक का क्या अर्थ है?
संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) का अर्थ चीज़ों को जानने और जागरुकता/सजगता के सभी रूपों से है, जैसे याद रखना/करना, तर्क करना, आँकना, कल्पना करना और समस्याएँ हल करना।
स्रोत: अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन
आकलन देखभाल टीम को बच्चों द्वारा उनके दिमाग के उपयोग के तरीके के बारे में जानकारी एकत्र करने में मदद देते हैं। इसे संज्ञानात्मक कार्यक्षमता कहते हैं।
बचपन के कैंसर से उबरने वाले उत्तरजीवियों में ये प्रभाव अक्सर याददाश्त या कार्यकारी कार्यक्षमता की समस्याओं से संबंधित होते हैं। इस कौशल-समूह में शामिल हैं आत्म-नियंत्रण, कार्यशील स्मृति और मानसिक लचीलापन। कार्यकारी कार्यक्षमता का अर्थ योजना बनाने, याद रखने/करने, ध्यान देने और एक साथ कई चीज़ें करने की योग्यता से है।
संज्ञानात्मक प्रभावों से ग्रस्त व्यक्ति को इन चीज़ों में कठिनाई हो सकती है:
चीज़ों को याद करना या याद रखना
सीखना (स्पेलिंग, पढ़ना, शब्दावली, हस्तलेखन और/या गणित शामिल)
सोचना (ध्यान केंद्रित करना, समय पर कार्य पूरा करना और कई चरणों वाले कार्य करना शामिल)
समस्या को सुलझाना
योजना बनाना और व्यवस्थित करना
ध्यान केंद्रित करना और ध्यान देना
तेज़ी से प्रतिक्रिया देना या सोचना
बचपन में होने वाले कैंसर से बचने वाले ज़्यादातर लोगों में संज्ञानात्मक समस्याएँ कौशल की कमी होने की वजह से नहीं होती हैं। समस्याएँ होने के पीछे का कारण अधिकांश मामलों में नए कौशल विकास की धीमी गति होती है। बच्चे तब भी नए कौशल सीख सकते हैं और विकसित कर सकते हैं। लेकिन वे ऐसा अपने साथियों से कम गति पर कर पाते हैं।
संज्ञानात्मक प्रभाव हल्के से गंभीर तक हो सकते हैं। वे अस्थायी या स्थायी हो सकते हैं।
संज्ञानात्मक देर से होने वाले प्रभाव के जोखिम कारक
संज्ञानात्मक प्रभाव होने की संभावना ऐसे बच्चों में अधिक है जिन्हें दिमाग ट्यूमर, सिर और गर्दन का कैंसर और कुछ प्रकार का लूकीमिया, जिसमें एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक लूकीमिया शामिल है, था।
संज्ञानात्मक प्रभाव के जोखिम कारकों में शामिल हैं:
सिर, गर्दन, ऊपरी रीढ़ या पूरे शरीर पर रेडिएशन। रोगियों को स्टेम कोशिका (बोन मैरो) ट्रांसप्लांट के लिए तैयार करने के हेतु कभी-कभी टोटल बॉडी विकीरण चिकित्सा (TBI) का उपयोग किया जाता है।
बचपन के कैंसर के कुछ रोगियों में उपचार के दौरान सोचने, ध्यान देने या स्मृति में बदलाव होते हैं। इन्हें कीमो ब्रेन फ़ॉग कहते हैं। इन्हें कीमो ब्रेन या कीमो फ़ॉग भी कहते हैं।
आपके बच्चे का तंत्रिका-मनोवैज्ञानिक आकलन किया जा सकता है ताकि निम्नलिखित इत्यादि दिमाग कार्यक्षमताओं और कौशलों को देखा जा सके:
पठन और गणित
ध्यान और एकाग्रता
प्रोसेसिंग स्पीड
सीखना और याददाश्त
संगठन, योजना बनाना और समस्या-समाधान
भाषा कौशल
दृश्य-स्थान को पहचानने के कौशल
गतिक कौशल
व्यवहारिक, भावनात्मक और सामाजिक कार्यप्रणाली
बुद्धि और अकादमिक उपलब्धि के परीक्षण भी महत्वपूर्ण हैं। माता-पिता और अध्यापकों के प्रेक्षण शक्तियों और कमज़ोरियों को ढूँढने में मदद देते हैं।
“मुझे चीज़ें सोचने में अब मुश्किल होती है जो पहले नहीं होती थी। इसमें अब अधिक समय लगता है; मुझे लगता है कि मेरी याद्दाश्त थोड़ी गड्ड-मड्ड हो गई है… अब मेरी कीमो खत्म होने को है और चीज़ें अब आसान हो रही हैं।”
जे
संज्ञानात्मक समस्याएँ स्कूली और दैनिक जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं
संज्ञानात्मक समस्याएँ इनका कारण बन सकती हैं:
उम्र और विकास के चरण के लिए अपेक्षित से कम कार्यक्षमता
व्यवहार-संबंधी या सामाजिक समस्याएँ, विशेष रूप से समूहों में जहाँ तुरंत प्रतिक्रिया देने या निर्णय लेने की ज़रूरत होती है।
संज्ञानात्मक समस्याओं से ग्रस्त बच्चों को स्कूल में समस्याएँ होने की संभावना अधिक होती है। वयस्क हो जाने पर भी उन्हें रोज़गार, आत्मनिर्भर जीवन-यापन और सामाजिक कौशलों में दिक्कतें आ सकती हैं।
स्कूल बदलने के दौरान समस्याएँ अधिक स्पष्ट हो सकती हैं। जब बच्चे परिपक्व होते हैं, तो उनसे अधिक आत्मनिर्भर बनने की अपेक्षा की जाती है। संज्ञानात्मक समस्याओं से ग्रस्त बच्चों के लिए इन अपेक्षाओं को संभालना अधिक कठिन होता है। उनके साथी उनसे तेज़ गति पर प्रगति कर सकते हैं।
संज्ञानात्मक समस्याओं का सामाजिक और भावनात्मक कौशलों पर तथा संपूर्ण जीवन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।
आप संज्ञानात्मक समस्याओं के प्रबंधन के लिए क्या कर सकते हैं
शिक्षण कार्यक्रम और सहायक देखभाल उपलब्ध हैं। अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से संसाधनों के बारे में पूछें।
जल्द हस्तक्षेप करने और लक्षणों पर करीब से ध्यान देने से मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्यकर आदतें भी दिमाग के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और उसकी रक्षा करने में मदद दे सकती हैं।
दवाएँ
दवाएँ ध्यान देने और एकाग्रता में मदद दे सकती हैं। उदाहरण के तौर पर ऐसी दवाएं जिनका उपयोग अटेंशन डेफ़िसिट हाइपरएक्टिविटी (ADHD) का उपचार करने के लिए किया जाता है। कैंसर से बचने वाले लोगों में संज्ञानात्मक कार्य के लिए जिन दवाओं का अध्ययन किया गया है, उनमें मिथाइलफेनिडेट, डोनेपेज़िल, मोडाफिनिल और मेमनटाइन शामिल हैं।
स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता आपको दवाओं के प्रबंधन में और लक्षणों पर नज़र रखने में मदद दे सकता है।
कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सोचने और व्यवहार पर फ़ोकस करने वाली थेरेपी) और लर्निंग इंटरवेंशन (सीखने के तरीके में बदलाव लाने वाली रणनीतियां)
थैरेपिस्ट आपको चुनौतियों से निपटने की रणनीतियाँ विकसित करने में मदद दे सकते हैं। परेशानी को दूर करने के लिए उन्हें छोटे हिस्सों में बांटना या याददाश्त बढ़ाने के लिए उन्हें दूसरी चीज़ों से जोड़कर याद करना, उदाहरण हो सकते हैं।
वे आपको समस्याओं का सामना करने के लिए आपकी शक्तियों के उपयोग में भी मदद दे सकते हैं।
ज्ञान संबंधी पुनर्सुधार की प्रक्रिया में प्रशिक्षित मनोविज्ञानी (साइकोलॉजिस्ट) ज़रूरतों की पहचान और उन्हें पूरा कर सकते हैं। लर्निंग स्पेशलिस्ट (सीखने के काम को आसान बनाने वाले विशेषज्ञ) और स्कूल प्रोग्राम स्कूल में ही सहयोग और सुविधाएं दे सकते हैं।
दिमाग को चुनौती देने वाली गतिविधियां, दिमाग की प्रक्रिया को बेहतर बना सकती हैं। कंप्यूटर “ब्रेन गेम” उपलब्ध हैं। नए कौशल सीखना, पहेलियां हल करना और याददाश्त या तर्क वाले खेल, दिमाग की सेहत में सुधार कर सकते हैं। कोई ऐसी गतिविधि ढूँढें जिसमें जैसे-जैसे आप कौशलों पर महारत हासिल करें वैसे-वैसे कार्य और कठिन होते जाएँ।
सामाजिक कामों में शामिल होना
शोध से यह संकेत मिलता है कि समृद्ध सामाजिक स्थान दिमाग का स्वास्थ्य बेहतर बना सकते हैं। सामाजिक गतिविधियों से दिमाग के रसायन बदल सकते हैं और तंत्रिका कोशिका को बढ़ने में मदद मिल सकती है।
सामाजिक स्थान संज्ञानात्मक समस्याओं से ग्रस्त लोगों के लिए अधिक कठिन हो सकते हैं। सामाजिक और संचार कौशलों को बेहतर बनाने के हस्तक्षेपों से मदद मिल सकती है। यह उन बच्चों के लिए विशेष रूप से सत्य है जो उपचार या अस्वस्थता के कारण अकेलेपन की लंबी अवधियों से गुज़रे हैं।
सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने और करीबी संबंध विकसित करने से दिमाग कार्यक्षमता की रक्षा में मदद मिल सकती है।
शारीरिक गतिविधि
सक्रिय रहना दिमाग के सीखने और याददाश्त से जुड़े हिस्से की दिमाग कोशिकाओं के विकास में मदद करता है। व्यायाम से तनाव, चिंता और अवसाद का प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है। शारीरिक गतिविधि भी सेहत और तंदरुस्ती को बेहतर बना सकती है। अक्रियता की अवधियों को सीमित करना भी महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, लंबे समय तक बैठे-बैठे TV देखना, व्यायाम के सकारात्मक लाभों को सीमित कर सकता है।
नींद
नींद की अच्छी आदतें महत्वपूर्ण हैं। खराब नींद और निढालता का बदतर दिमाग कार्यक्षमता से संबंध पाया गया है। अपर्याप्त नींद हृदय स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा को भी प्रभावित कर सकती है।
कुछ लोगों में नींद के विकार, जैसे स्लीप एपनिया, विकसित हो सकते हैं। प्राथमिक देखभाल प्रदाता को थकान, जोर-ज़ोर से आने वाले खर्राटे, नींद न आने या बेचैन नींद जैसे लक्षणों के बारे में बताना ज़रूरी होता है।
अच्छा पोषण महत्वपूर्ण है और दिमाग कार्यक्षमता को सहायता देता है। फलों और हरी सब्ज़ियों से भरपूर संतुलित आहार शरीर और दिमाग को महत्वपूर्ण पोषक तत्व प्रदान करता है। यह शोथ को घटाने में भी मदद करता है; शोथ दिमाग की वृद्धि और कार्यक्षमता में हस्तक्षेप कर सकता है।
दिमाग के स्वास्थ्य का नियंत्रण अपने हाथों में लेना
रोगी और परिवार दिमाग के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उपाय कर सकते हैं।
अपना जोखिम जानें। संज्ञानात्मक विलंबित प्रभावों के जोखिम के बारे में अपने देखभाल प्रदाता से बात करें।
संज्ञानात्मक समस्याओं के संकेतों पर नज़र रखें। समस्याएँ किसी भी समय विकसित हो सकती हैं। सोचने और प्रतिक्रिया देने की गति धीमी पड़ना कुछ शुरुआती संकेतों में से एक है।
नियमित जाँच करवाएँ। नियमित आकलनों से समस्याओं को शुरू में ही पकड़ने में मदद मिल सकती है।
मदद के लिए कहें। मनोवैज्ञानिक और शिक्षा विशेषज्ञ संज्ञानात्मक विलंबित प्रभावों का सामना करने के लिए रणनीतियां दे सकते हैं। जॉब और जीवन कौशल प्रशिक्षण से मदद मिल सकती है। वैवाहिक और पारिवारिक परामर्श से संबंधों से जुड़ी मुश्किलों में मदद मिल सकती है।
अच्छी स्वास्थ्यकर आदतों का अभ्यास करें। कई आदतें जो शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अच्छी हैं वे दिमाग के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी होती हैं। सक्रिय रहें, पर्याप्त नींद लें, लोगों से जुड़े रहें, तनाव नियंत्रित करें और स्वास्थ्यकर भोजन लें।
संज्ञानात्मक प्रभावों के बारे में पूछने के लिए प्रश्न
क्या मैं संज्ञानात्मक प्रभावों के जोखिम में हूँ?
यदि मुझमें लक्षण हों तो मैं किसे कॉल करूँ?
मेरे कैंसर और उपचार के फलस्वरूप मैं किन दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं की उम्मीद कर सकता/ती हूँ?
मैं स्वस्थ रहने के लिए क्या करूँ?
फ़ॉलो-अप देखभाल के लिए मुझे किन प्रदाताओं को दिखाना चाहिए?
मेरे उपचार के बारे में मुझे क्या-क्या रिकॉर्ड रखने की ज़रूरत है?
संज्ञानात्मक प्रभावों के बारे में मुख्य बिंदु
बचपन के कैंसर के उपचार संज्ञानात्मक प्रभावों का जोखिम, यानी आपके सोचने, सीखने, योजना बनाने और समस्याएँ हल करने के तरीके में समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
संज्ञानात्मक प्रभावों के जोखिम कारकों में सिर और रीढ़ पर रेडिएशन, कुछ दवाएँ और दिमाग की सर्जरी शामिल हैं।
उपचारों में दवाएँ, संज्ञानात्मक-व्यवहार-संबंधी (कॉग्निटिव-बिहेवरल) थैरेपी, मानसिक व्यायाम, सामाजिक जुड़ाव और स्वास्थ्यकर आदतें शामिल हैं।
संज्ञानात्मक प्रभाव स्थायी हो भी सकते हैं और नहीं भी। वे हल्के से गंभीर तक हो सकते हैं।
संज्ञानात्मक समस्याओं से निपटने में आपकी मदद के लिए संसाधन उपलब्ध हैं।
कैंसर का उपचार करने वाले उपचारों के लंबे समय तक बने रहने वाले और देर से दिखाई देने वाले दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। देरी से दिखाई देने वाले प्रभावों से जुड़े उपचारों के बारे में जानें।
दिमाग के ट्यूमर और मेरुरज्जु के ट्यूमर सुदम्य (कैंसर नहीं) या घातक (कैंसर) हो सकते हैं। बच्चों और किशोरों में दिमाग के ट्यूमर के लक्षणों, रोग की पहचान और उपचार के बारे में जानें।