कैंसर उपचार के दौरान कुछ कैंसर रोगियों की संज्ञानात्मक कार्यक्षमता में बदलाव होते हैं। मरीज और परिवार को सोचने, ध्यान देने या याददाश्त में कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। कैंसर रोगी इसे अक्सर “कीमो ब्रेन” या “ब्रेन फ़ॉग” कहते हैं। कैंसर के दौरान होने वाले संज्ञानात्मक दुष्प्रभाव को अभी पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है, और उनके पीछे विभिन्न कारण हो सकते हैं, जैसे कीमोथैरेपी, विकीरण चिकित्सा, सर्जरी, या हाइड्रोसेफेलसकुछ ज्ञान-संबंधी बदलाव अस्थायी होते हैं, जबकि अन्य लंबे समय तक होते हैं।
कुछ कैंसर मरीजों के कैंसर के उपचार के दौरान ज्ञान-संबंधी कार्य में बदलाव आते हैं। मरीज और परिवार को सोचने, ध्यान देने या याददाश्त में कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। कैंसर रोगी इसे अक्सर “कीमो ब्रेन” या “ब्रेन फ़ॉग” कहते हैं।
बचपन में होने वाले कैंसर के कुछ उपचार, जिसमें कीमोथेरेपी और विकीरण चिकित्सा भी शामिल हैं, ज्ञान-संबंधी कार्यशीलता पर दीर्घकालीन समस्याएं बढ़ाते हैं। इन परेशानियों को ज्ञान-संबंधी देर से होने वाले प्रभाव के नाम से जाना जाता है।
कैंसर के बाद जीवन में होने वाले ज्ञान-संबंधी देरी वाले प्रभावों के बारे में और अधिक पढ़ें।कैंसर के दौरान ज्ञान-संबंधी प्रभाव के संकेत और लक्षण अक्सर मरीज की उम्र पर निर्भर करते हैं। मरीजों को ऐसा लग सकता है कि उनके विचार धीमे हैं या उनका दिमाग अंधकारमय है। ज्ञान-संबंधी समस्या या कीमो ब्रेन में ये लक्षण शामिल हो सकते हैं:
कीमो ब्रेन कैसा महसूस होता है? मरीजों को ऐसा लग सकता है कि उनके विचार धीमे हैं या उनका दिमाग अंधकारमय है।
कीमोथेरेपी और विकीरण चिकित्सा के ज्ञान-संबंधी दुष्प्रभावों के बहुत से कारण होने की संभावना है। कैंसर के उपचार, कोशिका के विकास, सूजन और रक्त प्रवाह के माध्यम से सीधे तौर पर दिमाग पर असर डाल सकते हैं।
अन्य कारक भी कैंसर के रोगियों की सोच, ध्यान और याददाश्त को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें शामिल है:
परिवारों के लिए इस बात का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि ज्ञान-संबंधी समस्याओं का होना कैंसर अनुभव से संबंधित नहीं हो सकता है। इसके बजाय लक्षण पारिवारिक जोखिम या विकासात्मक समस्याओं को दिखा सकते हैं, जो उपचार से असंबंधित है। (उदा। डिसलेक्सिया या ADHD)। एक न्यूरोसाइकोलॉजिकल मूल्यांकन विशिष्ट समस्याओं का पता लगाने, संभावित कारणों की पहचान करने और उन हस्तक्षेपों की अनुमति देने में मदद कर सकता है जो मरीज की सबसे अच्छी जरूरतों को पूरा करते हैं।
कैंसर के उपचार के दौरान कुछ ज्ञान-संबंधी परिवर्तन हो सकते हैं, जो लंबे समय तक रह सकते हैं या नहीं भी रह सकते हैं। हालांकि, ऐसी भी चीजें हैं जो परिवार ज्ञान-संबंधी दुष्प्रभावों को प्रबंधित करने और ज्ञान-संबंधी स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए कर सकते हैं।
कई मरीजों के लिए, समय के साथ ज्ञान-संबंधी कार्य में सुधार होगा। हालांकि, कीमो ब्रेन और ज्ञान-संबंधी समस्याओं से प्रतिदिन निपटने के कुछ व्यावहारिक उपाय हैं। मरीज और परिवार के लोग मिलकर अपनी ज़रूरत के हिसाब से कार्यनीति बना सकते है। सुनिश्चित करें कि कार्यनीति आयु के अनुसार होनी चाहिए और इसमें मरीज का सहभागी होना ज़रूरी है।
याददाश्त सहायक और उपकरण का उपयोग करें। कीमो ब्रेन और ज्ञान-संबंधी दुष्प्रभाव में याददाश्त की समस्या सामान्य होती है। कैलेंडर, नोट्स, कार्य सूची और अनुस्मारक, मरीज को अपने दिन को व्यवस्थित रखने और कार्यो को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।
दिनचर्या बनाकर रखें। बहुत से परिवारों को लगता है कि याद रखना और ध्यान केंद्रित करने के लिए निरंतरता महत्वपूर्ण है। एक स्थिर दिनचर्या तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकती है, क्योंकि बच्चे जानते हैं कि उनसे क्या उम्मीद की जानी चाहिए।
एक समय एक ही चीज पर ध्यान दें। कीमो ब्रेन या ज्ञान-संबंधी दुष्प्रभावों से संघर्ष कर रहे रोगियों के लिए एकाधिक कार्य करना मुश्किल हो सकता है। गतिविधियों के दौरान ध्यान को ज़्यादा न भटकाएँ। मरीज के कार्यों को आसान चरणों में बाँटने में मदद करें और एक बार में एक ही चरण पूरा करें।
मानसिक कुशलता का अभ्यास करें। कीमो ब्रेन या ज्ञान-संबंधी दुष्प्रभाव हर इंसान को अलग तरह से प्रभावित कर सकते हैं। कुछ मरीजों में याददाश्त की समस्या हो सकती है, तो कुछ में एकाग्रता की समस्या हो सकती है। कुशलता पर काम करने के लिए मनोरंजक तरीकों का पता लगाएं और खेल, पहेलियां और गतिविधियों के माध्यम से दिमागी कसरत करें। निश्चित करें की उम्र और क्षमता के आधार पर गतिविधियों का चयन किया जाए।
कुछ मरीजों में याददाश्त की समस्या हो सकती है, तो कुछ में एकाग्रता की समस्या हो सकती है। कुशलता पर काम करने के लिए मनोरंजक तरीकों का पता लगाएं और खेल, पहेलियां और गतिविधियों के माध्यम से दिमागी कसरत करें।
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समीक्षित: अप्रैल 2019
बचपन में होने वाले कैंसर के उपचार के बाद ज्ञान-संबंधी प्रक्रियाओं से जुड़ी परेशानियां या इसके देरी से होने वाले प्रभाव उभर सकते हैं। ऐसा हो सकता है कि उपचार के बाद महीनों या सालों बाद कहीं जाकर ये परेशानियां साफ़ तौर पर नज़र आएं।
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