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फेफड़े और श्वास से संबंधित समस्याएं

बचपन में होने वाले कैंसर के कुछ उपचारों से फेफड़े और श्वास से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। आप अपने फेफड़ों के स्वास्थ्य की रक्षा करने और उसे बढ़ावा देने के कदम उठा सकते हैं।

आप फेफड़ों की समस्याओं की रोकथाम में मदद कर सकते हैं, और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि समस्याओं का पता जल्द चले और उनका उपचार भी जल्द हो।

फेफड़े कैसे काम करते हैं? नाक, एथमॉइड साइनस, जीभ, ग्रसनी,वायु-नली, फेफड़े, ब्रोंकस या श्वसनी और ब्रोन्किओल या श्वसनिका के लेबल दर्शाता हुआ श्वसन प्रणाली का ग्राफ़िक। आकार-वर्धन किया गया एक ग्राफ़िक वायुकोशों और ब्रोन्किओल या श्वसनिका को दर्शाता है, जो लेबल किए हुए है।

वे उपचार जिनसे फेफड़े और श्वास से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं

वे उपचार जिनसे फेफड़े को नुकसान पहुंच सकता है, उनमें कुछ कीमोथेरेपी दवाएं, रेडिएशन, सर्जरी और हेमेटोपोएटिक कोशिका प्रत्यारोपण (जिसे बोन मैरो ट्रांसप्लांट या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के नाम से भी जाना जाता है) की जटिलताएं शामिल हैं। वे फेफड़े में मौजूद छोटे-छोटे वायु कोशों को और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचा सकते हैं। विभिन्न उपचारों से भी वायु मार्गों में सूजन आ सकती है और जलन व संक्रमण के कारण अधिक श्लेष्मा का उत्पादन हो सकता है।

कीमोथेरेपी

  • ब्लीओमाइसिन
  • कार्मुस्टिन (बीसीएनयू)
  • लोमुस्टिन (सीसीएनयू)
  • ब्यूसल्फन

रेडिएशन

  • छाती या बगल पर रेडिएशन
  • संपूर्ण शरीर में रेडिएशन

सर्जरी

ऐसी सर्जिकल कार्यविधियाँ जिनमें छाती या फेफड़े शामिल हैं। इनमें सेंट्रल वीनस एक्सेस डिवाइस लगाने की सर्जरी शामिल नहीं है।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट

ग्राफ्ट वर्सेज होस्ट डिसीज़ से ग्रस्त प्रत्यारोपण वाले रोगियों को जोखिम होता है।

एंथ्रासाइक्लिन वर्ग की दवाएँ हृदय को नुकसान पहुँचा सकती हैं और फेफड़ों की समस्याओं में योगदान दे सकती हैं। यदि रोगियों को फेफड़ों की समस्याएँ करने वाली कीमोथेरेपी और रेडिएशन के साथ एंथ्रासाइक्लिन वर्ग की दवा मिली थी तो यह जोखिम बढ़ जाता है।

फेफड़ों की और श्वसन संबंधी समस्याओं के जोखिम कारक

  • उपचार के समय छोटी आयु का होना
  • फेफड़े से संबंधित समस्याओं का इतिहास
  • तंबाकू का उपयोग
  • सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आना
  • श्वास द्वारा खींचकर लिए जाने वाले नशीले पदार्थ, जैसे मारिजुआना का धुंआ लेना
  • वेपिंग या जूलिंग (JUULing)

कैंसर उपचार के बाद हो सकने वाली फेफड़े की समस्याएँ

  • फेफड़े में घाव होना (फेफड़ो में फाइब्रोसिस)
  • बार-बार फेफड़ों का संक्रमण होना (क्रॉनिक (पुराना) ब्रोंकाइटिस, ब्रोंकिइक्टेसिस या पुनरावर्ती निमोनिया)
  • फेफड़े के ऊतक और वायुपथ मार्गों में सूजन आना (ब्रोंकिओलाइटिस ओब्लिटरेंस या श्वसनिका शोथ लोपक)
  • फेफड़ों में छोटे-छोटे वायु कोशों का टूट जाना या वायुपथ मार्गों का मोटा और अवरुद्ध हो जाना (प्रतिबंधक/अवरोधक फेफड़ों की बीमारी)

फेफड़े और श्वास से संबंधित समस्याओं के लक्षण

  • साँस की तकलीफ होना
  • अक्सर खाँसी
  • घरघराहट
  • छाती में दर्द
  • बार-बार ब्रोंकाइटिस, निमोनिया होना
  • हल्की मेहनत के दौरान थकान या साँस फूलना
फेफड़ो की क्षमता के परीक्षण फेफड़े से संबंधित उन समस्याओं को दर्शा सकते हैं जो नियमित जाँच के दौरान स्पष्ट नहीं होती।

फेफड़ो की क्षमता के परीक्षण फेफड़े से संबंधित उन समस्याओं को दर्शा सकते हैं जो नियमित जाँच के दौरान स्पष्ट नहीं होती।

अपने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को अपने जोखिम के बारे में बताएं। अपनी सर्वाइवर्शिप केयर प्लान की एक प्रति साझा करें, जिसमें उपचार का सारांश शामिल होगा।

अपने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को अपने जोखिम के बारे में बताएं। अपनी सर्वाइवर्शिप केयर प्लान की एक प्रति साझा करें, जिसमें उपचार का सारांश शामिल होगा।

अपने कैंसर विशेषज्ञ से अपने देरी से होने वाले प्रभावों के जोखिम के बारे में पूछें।

अपने कैंसर विशेषज्ञ से अपने देरी से होने वाले प्रभावों के जोखिम के बारे में पूछें।

बचपन के कैंसर को जीतने वाले लोग फेफड़े के स्वास्थ्य के लिए क्या कर सकते हैं

अपने जोखिम को जानें और अपने स्वास्थ्य को मॉनिटर करते रहें।

  • खुद में फेफड़ों की और श्वसन संबंधी समस्याएँ होने का जोखिम जानें। अपने चिकित्सक से पूछें कि क्या आपको दिया गया उपचार, आपमें फेफड़े के रोग का खतरा बढ़ाता है।
  • अपने कैंसर से ठीक हुए लोगों की देखभाल की योजना की एक कॉपी अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ साझा करें। इस प्लान में आपके कैंसर उपचार से संबंधित विवरण और आपके उपचार के कारण हो सकने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जानकारी होती है।
  • किसी स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से वार्षिक जाँच करवाने की सलाह दी जाती है।

फेफड़ों की समस्याओं के लिए सुझावित स्क्रीनिंग

फेफड़े की क्षमता के परीक्षण, जिसमें DLCO और श्वासमिति या स्पाइरोमीट्री शामिल हैं, फेफड़े से संबंधित उन समस्याओं को दर्शा सकते हैं जो नियमित जाँच के दौरान स्पष्ट नहीं होती।

कैंसर का उपचार पूरा होने के कम-से-कम 2 वर्षों बाद, इन परीक्षणों को कम-से-कम एक बार करवाना लाभकारी रहता है, ताकि पता चल सके कि कोई समस्या तो नहीं है। परिणामों के आधार पर, आपका प्रदाता यह तय कर सकता है कि आगे और परीक्षणों की ज़रूरत है या नहीं।

कैंसर-विजेताओं के लिए फेफड़ों के रोगों की रोकथाम

  • न्यूमोकोकल वैक्सीन लगवाएं।
  • वार्षिक रूप से फ़्लू वैक्सीन लगवाएं।
  • स्कूबा डाइविंग से बचें, तब के सिवाय जब किसी पल्मोनॉलजिस्ट (फेफड़ा विशेषज्ञ) ने यह सलाह दी हो कि डाइविंग आपके लिए सुरक्षित है।
  • सिगरेट न पीएं
  • वेपिंग न करें या जूल (JUUL) का उपयोग न करें।
  • आपके आसपास यदि कोई धूम्रपान कर रहा है तो उसके धुएं से बचें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • मारिजुआना का धुंआ न लें या श्वास द्वारा लिए जाने वाले नशीले पदार्थों का सेवन न करें।
  • रसायनों, विलायकों और पेंट के विषाक्त वाष्प में साँस न लें।
  • कार्यस्थल पर सभी सुरक्षा नियमों का पालन करें। जरूरत पड़ने पर सुरक्षात्मक रेस्पिरेटर का उपयोग करें। जो भी असुरक्षित कार्य स्थितियाँ हों उनकी सूचना व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रशासन (ऑक्युपेशनल सेफ़्टी एंड हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन, OSHA) को दें।
  • नियमित जाँचें करवाएँ
  • सुझाई गई स्क्रीनिंग या जाँच परीक्षण करवाएं
  • स्वस्थ जीवनशैली जिएँ

अधिक जानकारी के लिए, चिल्ड्रन्स ऑन्कोलॉजी ग्रुप के कैंसर उपचार के बाद फेफड़ों का स्वास्थ्य' पेज पर जाएँ


समीक्षित: मई 2020