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गुर्दा संबंधी समस्याएं

गुर्दों की समस्याएँ क्या हैं?

स्वस्थ गुर्दे का आरेख

गुर्दे रक्त से अपशिष्ट निकालते हैं। कभी-कभी कैंसर उपचार गुर्दों को प्रभावित कर सकता है।

जब गुर्दे ठीक से काम नहीं करते तो इसे गुर्दा समस्या कहते हैं। गुर्दों की समस्याएँ अचानक हो सकती हैं। इसे एक्यूट गुर्दे इंजरी (गुर्दे को अचानक चोट) कहते हैं। गुर्दों की अन्य समस्याएँ समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होती हैं। इसे क्रोनिक गुर्दे डिसीज़ (दीर्घकालिक गुर्दा रोग) कहते हैं। गंभीर मामलों में, गुर्दे की बीमारी गुर्दे की विफलता (किडनी फेल्योर) का कारण बन सकती है, जहाँ गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं। 

कुछ रोग या उनके उपचार गुर्दों की समस्याएँ कर सकते हैं और ये समस्याएँ अल्पकालिक या दीर्घकालिक हो सकती हैं। 

अपने बच्चे के गुर्दे की समस्याओं के जोखिम और गुर्दे के स्वास्थ्य की रक्षा के तरीकों के बारे में अपनी देखभाल टीम से बात करें। 

गुर्दे कैसे काम करते हैं

गुर्दे 2 अंग हैं जो पसली-पिंजर के नीचे रीढ़ के दोनों ओर स्थित होते हैं। इनकी आकृति सेम जैसी होती है और इनका आकार लगभग आपकी मुट्ठी जितना होता है। आपको रीनल, नेफ्रो- या नेफ्रॉन जैसे शब्द सुनने को मिल सकते हैं जिनका अर्थ है ‘गुर्दों से संबंधित’।

गुर्दे रक्त छानते हैं। वे खून से अपशिष्टों (ऐसे पदार्थ जिनकी ज़रूरत शरीर को नहीं है) और अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालते हैं और मूत्र यानी पेशाब बनाते हैं। मूत्र गुर्दों से 2 नलिकाओं के ज़रिए बाहर निकलता है; इन नलिकाओं को मूत्रवाहिनी कहते हैं और ये मूत्र को मूत्राशय में पहुँचाती हैं। मूत्र मूत्राशय में भंडारित रहता है और मूत्रमार्ग के ज़रिए शरीर से बाहर निकाला जाता है। गुर्दे, मूत्रवाहिनियाँ और मूत्राशय एक तंत्र का भाग होते हैं जिसे मूत्रपथ कहते हैं।

स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम के लिए गुर्दों की कार्यक्षमता अच्छी रहनी ज़रूरी है। गुर्दे इन कार्यों में मदद करते हैं:

  • शरीर में तरल पदार्थों का नियंत्रण
  • रक्त से अपशिष्ट निकालना
  • लवण, पोटैशियम और अन्य रसायनों का संतुलन
  • बनाना हॉर्मोन बनाना जो रक्तचाप को और लाल रक्त कोशिका के उत्पादन को नियंत्रित करते हैं

गुर्दे से संबंधित समस्याओं के लक्षण

गुर्दों की कई समस्याएँ तब तक लक्षण पैदा नहीं करतीं जब तक गुर्दा रोग बहुत बढ़ न जाए।

गुर्दे से संबंधित समस्याओं के संकेत और लक्षणों में शामिल हैं:

  • मूत्र (पेशाब) में वृद्धि या कमी
  • मूत्र झागदार होना
  • मूत्र का रंग बदलना
  • मूत्र त्याग की तीव्र इच्छा, मूत्र नियंत्रित न कर पाना, बिस्तर गीला करना
  • मूत्रत्याग में दर्द या जलन
  • पेट या कमर में दर्द होना
  • हथेलियों, पैरों, पंजों, या चेहरे पर सूजन
  • थका हुआ या कमज़ोर महसूस करना
  • त्वचा में खुजली होना
  • ज्वर
  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
  • जी मिचलाना या उल्टी होना
  • भूख न लगना
  • वज़न घटना या वृद्धि में देरी होना
  • सांस लेने में तकलीफ या सांस फूलना
  • हृदय की अनियमित धड़कन
  • मूत्रमार्गीय संक्रमण
  • उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)
  • निम्न लाल रक्त कोशिका संख्या (खून की कमी)
  • आपके मूत्र में प्रोटीन
  • आपके मूत्र में रक्त (हिमेटूरिया)

यदि आपको अपने बच्चे में इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत सहायता प्राप्त करें:

  • ज्वर
  • उसकी छाती में या शरीर की एक साइड में दर्द
  • पेट या कमर में दर्द
  • सांस लेने में कठिनाई
  • दौरे पड़ना
  • असामान्य व्यवहार
  • भ्रमित व्यवहार
  • मूत्रत्याग करते समय दर्द या रक्तस्राव
  • सामान्य से कम मूत्र आना या बिल्कुल न आना

गुर्दा समस्याओं के कारण

चिकित्सीय स्थितियाँ और रोग

गुर्दा समस्याएँ कुछ चिकित्सीय स्थितियों के कारण हो सकती हैं, जैसे:

सिकल सेल बीमारी से ग्रस्त बच्चों में सिकल सेल गुर्दा रोग हो सकता है। इस रोग में सिकल (दराँती/हँसिया) जैसी आकृति की हो चुकीं लाल रक्त कोशिकाएँ गुर्दों में और उनके आस-पास रक्त तथा ऑक्सीजन के प्रवाह को बाधित कर देती हैं जिसके कारण गुर्दों को नुकसान होता है।

कैंसर या अन्य गंभीर रोगों से ग्रस्त बच्चों में, रेडिएशन, और कीमोथेरेपी इत्यादि चिकित्सीय उपचार, अन्य दवाएँ, इमेजिंग जाँचों में उपयोग होने वाली कॉन्ट्रास्ट डाई, और सर्जरी गुर्दों की समस्याएँ कर सकती हैं, और कुछ मामलों में गुर्दों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।

रेडिएशन

गुर्दों के स्थान या उदर (पेट) के आस-पास रेडिएशन उपचार, तथा टोटल बॉडी इर्रेडिएशन (पूरे शरीर पर विकिरण डालना) से गुर्दों को नुकसान हो सकता है।

कीमोथेरेपी और अन्य दवाएँ

गुर्दे रक्त को छानते हैं, जिससे दवाओं को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है। कुछ दवाएँ गुर्दों को नुकसान पहुँचा सकती हैं। यदि आपके बच्चे को दवा की हाई डोज़ लंबे समय तक मिलती है, या वह कई दवाएँ एक साथ लेता है, तो नुकसान होने की संभावना अधिक होती है।

जिन दवाओं से गुर्दा समस्याएँ होने की अधिक संभावना है उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

  • सिस्प्लैटिन
  • कार्बोप्लैटिन
  • इफोस्फामाइड
  • मेथोट्रिक्सेट
  • एंटीबायोटिक या जीवाणु नाशक दवाइयां जैसे टोब्रामाइसिन, जेंटामाइसिन और एम्फोटेरिसिन
  • नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इन्फ़्लामेटरी ड्रग (NSAID) वर्ग की दर्दनाशी दवाएँ जैसे एस्पिरिन, आइबुप्रोफ़ेन, और नैप्रॉक्सेन सोडियम
  • ग्राफ्ट-वर्सेज-होस्ट डिसीज़ (हेमेटोपोएटिक कोशिका प्रत्यारोपण की जटिलता) के लिए दवाइयां। इन दवाओं में निम्नलिखित शामिल होती हैं:
    • स्टेरॉयड
    • कैल्सिन्यूरिन इनहिबिटर (साइक्लोस्पोरिन और टैक्रोलिमस)
    • वे दवाएँ जो प्रतिरक्षा तंत्र की अनुक्रिया नियंत्रित करने में मदद करती हैं (इम्यूनोसप्रेसेंट)

सर्जरी

गुर्दे की सर्जरी के बाद मूत्रवाहिनी, मूत्राशय, या आस-पास की रक्त वाहिकाओं में क्षति हो सकती है या क्षत-विक्षत ऊतक (स्कैर टिशू) बन सकता है। इसके कारण कुछ रोगियों में गुर्दा समस्याएँ हो सकती हैं।

जिन रोगियों में पूरे गुर्दे या उसके किसी हिस्से को निकालने की सर्जरी हुई है वे जीवन में आगे चलकर गुर्दा समस्याओं के जोखिम में होते हैं। यह जानना ज़रूरी है कि सिर्फ़ 1 हेल्दी किडनी वाले लोग भी नॉर्मल ज़िंदगी जी सकते हैं और उनकी किडनी भी अच्छी तरह काम करती है।।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट (स्टेम सेल ट्रांसप्लांट)

बोन मैरो (स्टेम सेल) ट्रांसप्लांट जीवन में आगे चलकर गुर्दा समस्याओं को जन्म दे सकते हैं।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवा चुके रोगियों को गुर्दा समस्याओं के उनके जोखिम के बारे में अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से बात करनी चाहिए। कैंसर से उबर चुके लोगों को अपनी सर्वाइवर्शिप केयर प्लान की एक प्रति सभी स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं के साथ साझा करनी चाहिए।

अंग विफलता

किसी रोग, संक्रमण, चोट, या बहुत कम रक्तचाप (शॉक) के कारण अन्य अंगों, जैसे हृदय और यकृत, की विफलता के बाद गुर्दा समस्याएँ हो सकती हैं।

गुर्दा समस्याओं के परीक्षण

यदि आपका बच्चा गुर्दा समस्याओं के जोखिम में है, तो आपकी देखभाल टीम यह पता लगाने के लिए परीक्षण करेगी कि क्या उसकी गुर्दा कार्यक्षमता बदल गई है और असामान्य है। जांच में ये शामिल हो सकते हैं:

  • शारीरिक परीक्षा और स्वास्थ्य इतिहास: आपकी देखभाल टीम दवाओं, मधुमेह और उच्च रक्तचाप। गुर्दा रोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल सकता है, इसलिए देखभाल टीम आपके परिवार के स्वास्थ्य इतिहास के बारे में भी प्रश्न पूछेगी।
  • मूत्र परीक्षण (यूरिनएनालिसिस): आपका स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता मूत्र को शर्करा, प्रोटीन, रक्त, और बैक्टीरिया हेतु जाँचने के लिए मूत्र का नमूना लेगा। मूत्र परीक्षण में एल्बुमिन की भी तलाश की जाएगी, एल्बुमिन एक प्रोटीन है जो गुर्दों के क्षतिग्रस्त होने पर मूत्र में उपस्थित होता है।
  • रक्त परीक्षण, जैसे:
    • ग्लोमेर्युलर फिल्ट्रेशन रेट (GFR): GFR यह मापता है कि गुर्दे अपशिष्ट, विषपदार्थों और तरल पदार्थों को निकालने के लिए रक्त को कितनी अच्छी तरह छानते हैं। कम GFR का यह अर्थ हो सकता है कि आपके बच्चे के गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
    • रक्त युरिया नाइट्रोजन (BUN): यूरिया नाइट्रोजन, जो तब बनती है जब शरीर भोजन से प्राप्त प्रोटीन को तोड़ता है। सामान्यतः गुर्दे यूरिया नाइट्रोजन को रक्त से छानकर अलग कर देते हैं। BUN का स्तर अधिक होना गुर्दे की समस्या का संकेत हो सकता है।
    • सीरम क्रिएटिनिन: क्रिएटिन शरीर की मांसपेशियों से निकला एक अपशिष्ट उत्पाद होता है। क्रिएटिनिन के स्तर यह मापते हैं कि गुर्दे रक्त से अपशिष्ट को कितनी अच्छी तरह छान रहे हैं। यदि आपके बच्चे के गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं तो उसके रक्त में क्रिएटिन बढ़ सकता है।
    • इलेक्ट्रोलाइट परीक्षण: इलेक्ट्रोलाइट वे खनिज हैं जो शरीर को काम करने में मदद देते हैं। उनमें शामिल हैं सोडियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्सियम। इनके अधिक या कम स्तर गुर्दे की समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।
    • सिस्टेटिन C: यह परीक्षण आपके बच्चे के रक्त में सिस्टैटिन C प्रोटीन की मात्रा मापता है। सिस्टैटिन C का स्तर अधिक होने का यह अर्थ हो सकता है कि आपके बच्चे के गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
  • इमेजिंग जांचें: गुर्दे का न्यूक्लियर (नाभिकीय) चिकित्सा स्कैन या अल्ट्रासाउंड, कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी स्कैन (CT), अथवा चुंबकीय प्रतिध्वनि इमेजिंग (MRI) स्कैन गुर्दे को हुई क्षति या रक्त वाहिकाओं का अवरोध दिखा सकते हैं।
  • गुर्दा बायोप्सी: यदि आपकी देखभाल टीम को यह संदेह हो कि आपके बच्चे के गुर्दे में ट्यूमर है तो वह गुर्दे की बायोप्सी कर सकती है। यह एक कार्यविधि है जिसमें ऊतक के एक छोटे-से टुकड़े को निकालकर उसे माइक्रोस्कोप के नीचे जाँचा जाता है। दुर्लभ मामलों में, यदि गुर्दे की चोट या क्षति का कारण अज्ञात है तो देखभाल टीम बायोप्सी कर सकती है।

गुर्दा समस्याओं का उपचार

गुर्दा समस्याओं का उपचार उनके कारणों और आपके बच्चे की चिकित्सीय ज़रूरतों पर निर्भर करता है। कुछ गुर्दा समस्याएँ हल्की और अल्पकालिक होती हैं, वहीं कुछ अन्य गंभीर या दीर्घस्थायी हो सकती हैं।

आपकी देखभाल टीम नेफ्रॉलजिस्ट या यूरॉलजिस्ट जैसे विशेषज्ञों को शामिल कर सकती है। नेफ्रॉलजिस्ट एक चिकित्सक होता है जो गुर्दा रोग की पहचान और उपचार का विशेषज्ञ होता है। यूरॉलजिस्ट एक सर्जन होता है जो मूत्रपथ की स्थितियों की पहचान और उपचार करता है।

अधिकांश मामलों में, गुर्दा समस्याओं की देखभाल समस्या के कारण के उपचार द्वारा की जाती है। गंभीर गुर्दा रोग या गुर्दा विफलता से ग्रस्त लोगों को निम्न की ज़रूरत पड़ सकती है:

  • तरल पदार्थ
  • नई दवाएँ जोड़ना या वे दवाएँ हटाना जिनके कारण गुर्दा समस्याएँ हुई थीं
  • आहार में बदलाव
  • एंटरल पोषण (नली के द्वारा पोषण)
  • डाइलिसिस या गुर्दा ट्रांसप्लांट
    • डाइलिसिस एक कार्यविधि है जिसमें गुर्दों का काम एक मशीन से करवाया जाता है। यह मशीन रक्त से अपशिष्ट और तरल पदार्थ छानकर अलग करती है। यह आम तौर पर किसी विशेष डाइलिसिस केंद्र में की जाती है और नियमित रूप से, अक्सर सप्ताह में कई बार, की जाती है। जब तक समस्या ठीक न हो जाए या जब तक रोगी को गुर्दा ट्रांसप्लांट न मिल जाए तब तक रोगी डाइलिसिस करवाता रहता है।
    • गुर्दा ट्रांसप्लांट एक सर्जरी है जिसमें रोगी के खराब हो चुके गुर्दे के स्थान पर किसी दाता से प्राप्त स्वस्थ गुर्दा लगाया जाता है। गुर्दा ट्रांसप्लांट एक बड़ी सर्जरी है जिसका उपयोग केवल तब किया जाता है जब अन्य उपचारों से अधिक लाभ न हुआ हो या यदि रोगी की स्थिति बिगड़ रही हो।

गुर्दा समस्याओं का अनुमानित भावी-पथ

गुर्दा समस्याओं का अनुमानित भावी-पथ समस्या के कारण पर और उपचार से रोगी को मिले लाभ पर निर्भर करता है। 

दीर्घकालिक गुर्दा समस्याएँ, उपचार, और डाइलिसिस जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। दीर्घकालिक गुर्दा समस्याओं से ग्रस्त बच्चों में सामान्य विकास और वृद्धि से संबंधित समस्याएँ हो सकती हैं। ये चुनौतियाँ वयस्क उम्र में भी जारी रह सकती हैं। गंभीर गुर्दा समस्याएँ आपके बच्चे के जीवनकाल को प्रभावित कर सकती हैं। आपके बच्चे का चिकित्सक, आपके बच्चे के मामले के बारे में जानकारी का सबसे अच्छा स्रोत है।

परिवारों के लिए सलाह

अपने बच्चे के गुर्दे की समस्याओं के जोखिम को जानें

यदि आपके बच्चे को गुर्दा समस्याएँ हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि वह और जटिलताओं की रोकथाम में मदद के लिए चिकित्सीय देखभाल प्राप्त करे। मदद के लिए आप कुछ कदम उठा सकते हैं, जैसे:

  • अपने बच्चे के गुर्दा समस्याओं के जोखिम के बारे में अपनी देखभाल टीम से बात करें।
  • प्रतिवर्ष शारीरिक परीक्षा करवाएं।
  • रक्तचाप की नियमित जाँच करवाएँ।
  • आपकी स्वास्थ्य देखभाल टीम के सुझाव के अनुसार गुर्दा कार्यक्षमता मापने के लिए रक्त परीक्षण और मूत्र परीक्षण करवाएँ।
  • अपने बच्चे के परीक्षण परिणामों पर नज़र रखें और लैब परीक्षणों की सामान्य स्वस्थ रेंज जानें।
  • जिन रोगियों की गुर्दा या मूत्राशय की सर्जरी हुई है उन्हें वर्ष में कम-से-कम एक बार, या सुझावित अंतराल पर, किसी विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।

अपने बच्चे के गुर्दों को स्वस्थ रखने के कदम उठाएँ

  • आपका बच्चा क्या खा और पी सकता है, इस बारे में अपनी देखभाल टीम के निर्देशों का पालन करें।
  • अपने बच्चे को कोई भी नई दवा, विटामिन, या अन्य सप्लिमेंट देने से पहले अपनी देखभाल टीम से पूछें।
  • खूब पानी पियें। शारीरिक गतिविधि के दौरान या गर्म मौसम में ऐसा करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
  • कैफ़ीन और एल्कोहॉल के सेवन को सीमित करें।
  • यदि आपके बच्चे में गुर्दे या मूत्र तंत्र के संक्रमण के कोई लक्षण हों तो अपनी देखभाल टीम से तुरंत संपर्क करें। लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:
    • पेट या कमर में दर्द
    • मूत्रत्याग में दर्द या जलन
    • सामान्य से अधिक मूत्रत्याग
    • मूत्रत्याग की अविलंब इच्छा महसूस होना।
  • नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इन्फ़्लमेटरी ड्रग्स (NSAID) के उपयोग से पहले अपने चिकित्सक से पूछेंNSAIDs। इन दवाइयों में एस्पिरिन, आइबुप्रोफ़ेन और नैप्रोक्सेन शामिल हैं। इनसे गुर्दे खराब हो सकते हैं। ऐसा तब विशेष रूप से सत्य है जब डोज़ अधिक हो, जब उनका अक्सर उपयोग हो या जब वे अन्य दवाओं के साथ ली जाएँ।
  • स्वास्थ्यकर शौचालय दिनचर्या को बढ़ावा दें। मूत्र लंबे समय तक रोकने से या मूत्राशय खाली नहीं करने से गुर्दों की समस्याएँ हो सकती हैं।
  • सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा पर्याप्त व्यायाम करे और अपनी उम्र के अनुसार स्वस्थ वज़न बनाए रखे।
  • आपकी देखभाल टीम के सुझाए अनुसार टीकाकरण करवाएँ।

अपनी देखभाल टीम से पूछे जाने वाले प्रश्न

  • क्या मेरा बच्चा गुर्दा समस्याओं के जोखिम में है?
  • मेरे बच्चे को किस तरह की निगरानी या जाँच की ज़रूरत होगी?
  • मुझे किन संकेतों और लक्षणों पर नज़र रखनी चाहिए?
  • मुझे मेरे स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता को कब कॉल करना चाहिए?
  • मेरे बच्चे का गुर्दा समस्याओं का जोखिम होने को कम करने के लिए मैं क्या करूँ?
  • मेरे बच्चे को किन दवाओं से बचना चाहिए?
  • खान-पान में किन बदलावों की ज़रूरत है? क्या मुझे मेरे बच्चे के तरल पदार्थों के सेवन की निगरानी करनी चाहिए?

गुर्दा समस्याओं के बारे में मुख्य बिंदु

  • गुर्दे अपशिष्ट और तरल पदार्थों को निकालने के लिए रक्त को अच्छी तरह छानते हैं। खून में तरल और अपशिष्ट पदार्थ जमा हो सकते हैं, यदि गुर्दे अच्छी तरह काम नही करते। इस जमा से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगती हैं।
  • कुछ दवाएँ, रेडिएशन, सर्जरी, और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट गुर्दा समस्याएँ कर सकते हैं। समस्याएँ अस्थायी या दीर्घस्थायी हो सकती हैं।
  • बचपन में होने वाले कैंसर के कुछ उपचारों से बाद में जीवन में गुर्दे से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। इन समस्याओं को देर से दिखाई देने वाले प्रभाव के रूप में जाना जाता है।
  • सिकल सेल बीमारी से ग्रस्त बच्चों में गुर्दों में और उनके आस-पास रक्त प्रवाह घटने के कारण सिकल सेल गुर्दा रोग हो सकता है।
  • अपने बच्चे के गुर्दा समस्याओं के जोखिम को जानना, नियमित निगरानी और जाँच करवाना, और गुर्दा स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उपाय करना महत्वपूर्ण है।


समीक्षित: नवंबर 2024

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