सिकल सेल गुर्दा रोग क्या है?
सिकल सेल गुर्दा रोग गुर्दे की एक प्रकार की समस्या है जिसमें सिकल (दराँती/हँसिया) जैसी आकृति वाली लाल रक्त कोशिकाएँ गुर्दों में और उनके आस-पास रक्त तथा ऑक्सीजन के प्रवाह को बाधित कर देती हैं। आपके बच्चे की देखभाल टीम इस रोग को सिकल सेल नेफ्रॉपथी (SCN) या गुर्दा संबंधी रोग कह सकती है। यह स्थिति सिकल सेल रोग से ग्रस्त कुछ लोगों में हो सकती है।
गुर्दों की समस्याएँ अचानक हो सकती हैं। इसे एक्यूट गुर्दे इंजरी (गुर्दे को अचानक चोट) कहते हैं।
कभी-कभी गुर्दा रोग समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होता है। इसे क्रोनिक गुर्दे डिसीज़ (दीर्घकालिक गुर्दा रोग) कहते हैं। गंभीर मामलों में, गुर्दा रोग के कारण गुर्दा विफल हो सकता है। सिकल सेल रोग से ग्रस्त लोगों में जीवन में आगे चलकर दीर्घकालिक गुर्दा रोग होने का अधिक जोखिम होता है।
गुर्दे 2 अंग हैं जो पसली-पिंजर के नीचे रीढ़ के दोनों ओर स्थित होते हैं। इनकी आकृति सेम जैसी होती है और इनका आकार लगभग एक मुट्ठी जितना होता है। आपको रीनल, नेफ्रो- या नेफ्रॉन जैसे शब्द सुनने को मिल सकते हैं जिनका अर्थ है ‘गुर्दों से संबंधित’।
गुर्दे रक्त छानते हैं। रक्त रीनल धमनी के ज़रिए गुर्दों तक जाता है। उसे कई नन्ही रक्त वाहिकाएँ छानती हैं। छना हुआ रक्त रीनल शिरा के ज़रिए गुर्दे से निकलता है।
गुर्दे खून से अपशिष्टों (ऐसे पदार्थ जिनकी ज़रूरत शरीर को नहीं है) और अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालते हैं और मूत्र यानी पेशाब बनाते हैं। मूत्र गुर्दों से 2 नलिकाओं के ज़रिए बाहर निकलता है; इन नलिकाओं को मूत्रवाहिनी कहते हैं और ये मूत्र को मूत्राशय में पहुँचाती हैं। मूत्र मूत्राशय में भंडारित रहता है और मूत्रमार्ग के ज़रिए शरीर से बाहर निकाला जाता है। गुर्दे, मूत्रवाहिनियाँ और मूत्राशय एक तंत्र का भाग होते हैं जिसे मूत्रपथ कहते हैं।
गुर्दे इन कार्यों में मदद करते हैं:
- शरीर में तरल पदार्थों का नियंत्रण
- रक्त से अपशिष्ट निकालना
- लवण, पोटैशियम और अन्य रसायनों का संतुलन
- ऐसे हॉर्मोन बनाना जो रक्तचाप को और लाल रक्त कोशिका के उत्पादन को नियंत्रित करते हैं
सिकल सेल गुर्दा रोग के लक्षण
गुर्दे से संबंधित समस्याओं के संकेत और लक्षणों में शामिल हैं:
- साइड में, कमर में या उदर (पेट) में दर्द: आपके बच्चे को शरीर की साइड में जहाँ गुर्दे होते हैं वहाँ दर्द हो सकता है। सिकल सेल रोग से ग्रस्त लोगों के शरीर के भागों को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने पर दर्द की घटनाएँ हो सकती हैं। इसे पेन एपिसोड (दर्द की घटना) कहते हैं।
- मूत्र में अत्यधिक पानी: सामान्य मूत्र में अपशिष्ट की एक निश्चित मात्रा होती है। यदि मूत्र अधिकांशतः पानी है और उसमें सामान्य से कम अपशिष्ट है तो यह सिकल सेल गुर्दा रोग का संकेत हो सकता है।
- पेशाब में खून निकलना: आपके बच्चे का मूत्र रक्त जैसा, कत्थई या चाय जैसे रंग का दिख सकता है। या फिर खून की मात्रा इतनी कम हो सकती है कि बिना माइक्रोस्कोप के दिखाई न दे।
- उच्च रक्तचाप: यदि आपके बच्चे को सिकिल सेल रोग है तो उसका रक्तचाप आम तौर पर कम होगा। सिकल सेल गुर्दा रोग उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गुर्दे ऐसे रसायन बनाते हैं जो रक्तचाप बढ़ा या घटा सकते हैं।
- मूत्र में प्रोटीन: सामान्यतः प्रोटीन गुर्दों के ज़रिए रक्त से बाहर नहीं निकलता है। मूत्र में अधिक प्रोटीन होना सिकल सेल गुर्दा रोग का संकेत होता है।
सिकल सेल गुर्दा रोग के कारण
सामान्य लाल रक्त कोशिकाएँ गोल और लचीली होती हैं। वे शरीर की रक्त वाहिकाओं से होकर आसानी से गुज़र जाती हैं। सिकल सेल रोग से ग्रस्त लोगों में लाल रक्त कोशिकाएँ कठोर, चिपचिपी और केले (सिकल/दराँती/हँसिया) जैसी आकृति की होती हैं।
सिकल कोशिकाएँ साथ में जुड़कर गुच्छा बना लेती हैं और रक्त वाहिकाओं को बाधित करती हैं। ये कोशिकाएँ नन्ही रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध करती हैं जिससे शरीर के अंगों को जाने वाले रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति धीमी पड़ जाती है। सिकल कोशिकाएँ ऑक्सीजन को भी उतने अच्छे से नहीं ले जातीं जितने अच्छे से स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएँ ले जाती हैं, और वे रक्त में उतना जीती भी नहीं हैं जितना सामान्य लाल रक्त कोशिकाएँ जीती हैं।
सिकल कोशिकाएँ गुर्दों में रक्त प्रवाह घटा सकती हैं और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचा सकती हैं। इससे गुर्दों में अल्पकालिक और दीर्घकालिक समस्याएँ हो सकती हैं।
सिकल सेल गुर्दा रोग की पहचान
गुर्दा समस्याओं की जाँच के लिए कई प्रकार के परीक्षणों का उपयोग किया जाता है। इसमें अक्सर आपके बच्चे के मूत्र और रक्त के नमूने की जाँच करना शामिल होता है। सिकल सेल रोग गुर्दा समस्याओं का जोखिम बढ़ाता है, इसलिए आपके बच्चे की नियमित जाँच के भाग के रूप में गुर्दा समस्याओं की नियमित स्क्रीनिंग की जाएगी। ये स्क्रीनिंग आम तौर पर 3 से 10 वर्ष की उम्र में शुरू की जाती हैं।
शारीरिक परीक्षा और स्वास्थ्य इतिहास
आपकी देखभाल टीम आपके बच्चे के गुर्दा रोग के जोखिम कारकों, जैसे दवाओं, डायबिटीज़ और उच्च रक्तचाप, के बारे में जानने के लिए प्रश्न पूछेगी और परीक्षण करेगी।
मूत्र परीक्षण (यूरिनएनालिसिस)
आपका स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता इनके परीक्षण के लिए मूत्र का एक नमूना लेगा:
- पेशाब में खून निकलना
- एल्ब्युमिन: एक प्रोटीन जो मूत्र में तब मिलता है जब गुर्दे क्षतिग्रस्त होते हैं
खून की जाँचें
लैब परीक्षणों में गुर्दा कार्यक्षमता के विभिन्न पहलुओं के मापन के लिए रक्त लेना शामिल है, जैसे:
- रक्त युरिया नाइट्रोजन (BUN): यूरिया नाइट्रोजन, जो तब बनती है जब शरीर भोजन से प्राप्त प्रोटीन को तोड़ता है। सामान्यतः गुर्दे यूरिया नाइट्रोजन को रक्त से छानकर अलग कर देते हैं। BUN का स्तर अधिक होना गुर्दे की समस्या का संकेत हो सकता है।
- सीरम क्रिएटिनिन: क्रिएटिन शरीर की मांसपेशियों से निकला एक अपशिष्ट उत्पाद होता है। क्रिएटिनिन के स्तर यह मापते हैं कि गुर्दे रक्त से अपशिष्ट को कितनी अच्छी तरह छान रहे हैं। यदि आपके बच्चे के गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं तो उसके रक्त में क्रिएटिन बढ़ सकता है।
- इलेक्ट्रोलाइट परीक्षण: इलेक्ट्रोलाइट वे खनिज हैं जो शरीर को काम करने में मदद देते हैं। उनमें शामिल हैं सोडियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्सियम। इनके अधिक या कम स्तर गुर्दे की समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।
- सिस्टेटिन C: यह परीक्षण आपके बच्चे के रक्त में सिस्टेटिन C प्रोटीन की मात्रा मापता है। सिस्टेटिन C का स्तर अधिक होने का यह अर्थ हो सकता है कि आपके बच्चे के गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
- ग्लोमेर्युलर फिल्ट्रेशन रेट (GFR): GFR यह मापता है कि गुर्दे अपशिष्ट, विषपदार्थों और तरल पदार्थों को निकालने के लिए रक्त को कितनी अच्छी तरह छानते हैं। कम GFR का यह अर्थ हो सकता है कि आपके बच्चे के गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
इमेजिंग जांच
आपकी देखभाल टीम गुर्दों के लिए इमेजिंग परीक्षणों, जैसे अल्ट्रासाउंड, कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी (CT) या चुंबकीय प्रतिध्वनि इमेजिंग (MRI) का भी उपयोग कर सकती है। ये स्कैन घटा हुआ रक्त प्रवाह या गुर्दों की क्षति दिखा सकते हैं।
अन्य परीक्षण
- सचल रक्तचाप निगरानी: यदि आपके बच्चे को उच्च रक्तचाप है, तो उसे 24 घंटों के दौरान हृदय गति और रक्तचाप मापने वाला एक डिवाइस पहनना पड़ सकता है।
- गुर्दा बायोप्सी: दुर्लभ मामलों में, माइक्रोस्कोप के ज़रिए देखने हेतु गुर्दा ऊतक का एक छोटा-सा नमूना लेने के लिए बायोप्सी की जा सकती है।
सिकल सेल गुर्दा रोग का उपचार
गुर्दा समस्याओं का उपचार आपके बच्चे की चिकित्सीय ज़रूरतों पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में, आपकी देखभाल टीम नेफ्रॉलजिस्ट या यूरॉलजिस्ट जैसे विशेषज्ञों को शामिल कर सकती है। नेफ्रॉलजिस्ट एक चिकित्सक होता है जो गुर्दा रोग की पहचान और उपचार का विशेषज्ञ होता है। यूरॉलजिस्ट एक चिकित्सक होता है जो मूत्रपथ की स्थितियों की पहचान और उपचार करता है।
सिकल सेल गुर्दा रोग के आम उपचारों में ये शामिल हैं:
- हाइड्रॉक्सीयूरिया जैसी दवाएँ सिकल सेल रोग के प्रबंधन में और गुर्दों के नुकसान को रोकने या धीमा करने में मदद दे सकती हैं।
- रक्तचाप की दवाएँ मूत्र में प्रोटीन की हानि घटा सकती हैं और रक्तचाप घटा सकती हैं।
गंभीर गुर्दा रोग या गुर्दा विफलता से ग्रस्त लोगों को डायलिसिस या गुर्दा ट्रांसप्लांट की ज़रूरत पड़ सकती है।
- डायलिसिस एक कार्यविधि है जिसमें रक्त से अपशिष्ट और तरल पदार्थ छानने के लिए गुर्दों का काम करवाने हेतु एक मशीन का उपयोग किया जाता है।
- गुर्दा ट्रांसप्लांट एक सर्जरी है जिसमें रोगी के खराब हो चुके गुर्दे के स्थान पर किसी दाता से प्राप्त स्वस्थ गुर्दा लगाया जाता है।
सिकल सेल गुर्दा रोग का अनुमानित भावी पथ
सिकल सेल गुर्दा रोग सिकल सेल रोग से ग्रस्त लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में, इसके कारण अनुमानित भावी पथ बदतर हो सकता है और जीवनकाल घट सकता है।
सुनिश्चित करें कि आप सभी चिकित्सा अपॉइंटमेंट पर जाएँ और समस्याओं की रोकथाम में मदद के लिए आपकी देखभाल टीम से मिले निर्देशों का पालन करें।
यदि आपको इन जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सा देखभाल प्राप्त करें:
- ज्वर
- छाती, साइड, पेट या कमर में दर्द
- सांस लेने में कठिनाई
- भ्रम या बेहोशी
- मूत्रत्याग में दर्द या रक्तस्राव
- सामान्य से कम मूत्र आना या बिल्कुल न आना
जो भी प्रश्न या चिंताएँ हों उनके बारे में हमेशा अपनी देखभाल टीम से बात करें।
यदि आपके बच्चे को सिकल सेल रोग है तो यह महत्वपूर्ण है कि उसे आजीवन उसकी स्वास्थ्य ज़रूरतों की पूर्ति के लिए नियमित चिकित्सीय देखभाल मिले।
गुर्दों की स्वास्थ्य-रक्षा के लिए आप जो कदम उठा सकते हैं उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
- अपने बच्चे के गुर्दा समस्याओं के जोखिम के बारे में अपनी देखभाल टीम से बात करें।
- सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा रक्तचाप जाँचने और गुर्दा कार्यक्षमता की निगरानी के लिए नियमित जाँच करवाए।
- अपने बच्चे के परीक्षण परिणामों पर नज़र रखें और लैब परीक्षणों की सामान्य स्वस्थ रेंज जानें।
- सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा पर्याप्त तरल पदार्थ पीता हो, विशेष रूप से शारीरिक गतिविधि के दौरान या गर्म मौसम में।
- अपने बच्चे की दवाओं, विटामिन और सप्लिमेंट के बारे में अपने चिकित्सक से बात करें, विशेष रूप से कुछ भी नया शुरू करने से पहले। कुछ दवाओं से गुर्दों को नुकसान होने का जोखिम अधिक होता है, विशेष रूप से तब जब उनका अक्सर उपयोग हो या अन्य दवाओं के साथ उपयोग हो।
- यदि आपके बच्चे में गुर्दे या मूत्र तंत्र के संक्रमण के कोई लक्षण हों तो अपनी देखभाल टीम से तुरंत संपर्क करें। लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:
- ज्वर
- पेट या कमर में दर्द
- मूत्रत्याग में दर्द या जलन
- सामान्य से अधिक मूत्रत्याग
- मूत्रत्याग की अविलंब इच्छा महसूस होना।
- नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इन्फ़्लमेटरी ड्रग्स (NSAID) के उपयोग से पहले अपने चिकित्सक से पूछें। इन दवाइयों में एस्पिरिन, आइबुप्रोफ़ेन और नैप्रोक्सेन शामिल हैं। वे गुर्दों को नुकसान पहुँचा सकती हैं और यदि आपके बच्चे में गुर्दों की क्षति के संकेत पहले से हैं तो उनसे बचने की ज़रूरत होती है। ऐसा तब विशेष रूप से सत्य है जब डोज़ अधिक हो, जब उनका अक्सर उपयोग हो या जब वे अन्य दवाओं के साथ ली जाएँ।
- स्वास्थ्यकर शौचालय दिनचर्या को बढ़ावा दें। मूत्र लंबे समय तक रोकने से या मूत्राशय खाली नहीं करने से गुर्दों की समस्याएँ हो सकती हैं।
- स्वास्थ्यकर आदतों को बढ़ावा दें। सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा पर्याप्त व्यायाम करे और अपनी उम्र के अनुसार स्वस्थ वज़न बनाए रखे। स्वास्थ्यकर आहार लें और कैफ़ीन का सेवन घटाएँ। धूमपान और एल्कोहॉल सेवन से बचें।
- आपकी देखभाल टीम के सुझाए अनुसार टीकाकरण करवाएँ।
अपनी देखभाल टीम से पूछे जाने वाले प्रश्न