मेलेनोमा एक प्रकार का त्वचा का कैंसर है जो ज़्यादातर वयस्क लोगों में देखा जाता है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका में हर वर्ष लगभग 300–400 बच्चों व किशोरों को भी प्रभावित करता है। मेलेनोमा त्वचा के किसी भी भाग में विकसित हो सकता है। यह आँख में भी हो सकता है। यदि इलाज नहीं किया जाता है, तो मेलेनोमा शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है।
मेलेनोमा में, कैंसर त्वचा की कोशिकाओं में निर्मित होता है जिन्हें कहते हैं मेलेनोसाइट्स। ये कोशिकाएं मेलेनिन का उत्पादन करते हैं, जो त्वचा को रंग (वर्णक) प्रदान करता है।
मेलानिन त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन (UV रेडिएशन)से सुरक्षित रखने में मदद देता है। जिन लोगों की त्वचा गहरे रंग की होती है उनमे अधिक मेलेनिन होता है और उनमे मेलेनोमा होने की संभावना कम होती है।
15 वर्ष से छोटे बच्चों में कैंसर के लगभग 1% मामले मेलेनोमा के होते हैं। यह अधिक उम्र के लोगों में अधिक आम है।
मेलेनोमा के लक्षणों में शामिल हैं त्वचा में असामान्य बदलाव, जैसे:
- ऐसा तिल/मस्सा जो बड़ा होता जाता है, जिसका रंग बदलता है, जिससे रक्तस्राव होता है या जिसमें खुजली होती है
- लगभग सफ़ेद या लाल रंग का उभार
मेलेनोमा का इलाज बीमारी के स्तर पर निर्भर करता है। रोगी आम तौर पर कैंसर निकालने के लिए सर्जरी करवाते हैं। अधिक गंभीर बीमारी को अन्य उपचार की ज़रूरत हो सकती है। उसमें टारगेटेड थेरेपी, कीमोथेरेपी और/या इम्यूनोथेरेपी शामिल हो सकते हैं।
समय से पूर्व पता लग जाने पर, मेलेनोमा में ठीक होकर जीवित रहने की दर अच्छी होती है। लेकिन मेलेनोमा मे लसीका ग्रंथियाँ और शरीर के अन्य अंगों में फैल सकता है। इससे इसका उपचार कठिन हो सकता है। इस तरह, मेलेनोमा के बारे में जागरूकता और इसकी जल्दी पहचान करना महत्वपूर्ण होता है।
त्वचा कैंसरों की जल्द-से-जल्द पहचान कर लेना ही सर्वोत्तम है। त्वचा कैंसर की स्क्रीनिंग से आपको ऐसा करने में मदद मिल सकती है।
मेलेनोमा के कुछ संकेत इस प्रकार हैं:
- त्वचा पर तिल या गुमड़ होना जो बढ़ता है या जिसकी आकृति बदल जाती है, विशेष रूप से यदि परिवर्तन लघु अवधि में ही होने लगते हैं।
- अनियमित आकृति वाला या विशाल तिल/मस्सा
- त्वचा पर एक हल्के रंग का या लाल-रंग का गुमड़ होना
- तिल या गुमड़ जिसमें खुजली होती है या खून निकलता है
ABCDE विधि
मेलेनोमा के संकेतों को पहचानने का एक सहायक तरीका ABCDE विधि का उपयोग करना है:
- A: एसिमिट्री (असममिति) – स्पॉट का एक अर्धांश दूसरे अर्धांश से भिन्न होता है।
- B: बॉर्डर (सीमा) – स्पॉट के किनारे या सीमाएँ एकसार न होकर खाँचेदार या दाँतेदार होती हैं।
- C: कलर (रंग) में भिन्नता – स्पॉट के अलग-अलग स्थानों के रंग अलग-अलग होते हैं।
- D: डायमीटर (व्यास/चौड़ाई) – पहचान होने के समय मेलेनोमा अक्सर किसी पेंसिल इरेज़र से बड़ा होता है। लेकिन वह छोटा भी हो सकता है।
- E: इवोलूशन (क्रम-विकास) – मेलेनोमा की आकृति, आकार या रंग समय के साथ बदलता है।
कुछ कारक मेलेनोमा के जोखिम को बढ़ाते हैं। इनमें शामिल है:
- उम्र – मेलेनोमा छोटे बच्चों की तुलना में किशोरों में अधिक आम होता है।
- त्वचा का रंग – जिन लोगों की त्वचा गोरी होती है, बाल हल्के या लाल होते हैं, आँखें हल्के रंग की होती हैं और जिनकी त्वचा आसानी से धूप में झुलस जाती है, उनमें इसके होने का जोखिम अधिक होता है। गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में मेलेनोमा होने की संभावना कम होती है।
- त्वचा की स्थितियाँ – जिन लोगों की त्वचा पर जन्म से ही मेलानोसिटिक नेवी नामक बड़े व काले धब्बे होते हैं उनमें मेलेनोमा होने की संभावना अधिक होती है। कुछ वंशानुगत स्थितियाँ भी जोखिम बढ़ा सकती हैं। इनमें शामिल है ज़ेरोडर्मा पिगमेंटोसम, रेटिनोब्लास्टोमा और वेर्नर सिंड्रोम.
- पारिवारिक इतिहास – मेलेनोमा या असामान्य तिलों का पारिवारिक इतिहास होना मेलेनोमा के जोखिम को बढ़ा देता है।
- UV प्रकाश से संपर्क – UV रेडिएशन DNA को नुकसान पहुँचाता है त्वचा कोशिकाओं का। यूवी एक्सपोज़र का मुख्य स्रोत धूप है। टैनिंग बेड और UV नेल-पॉलिश ड्रायर अन्य स्रोत हैं। त्वचा को सूरज और यूवी एक्सपोजर से बचाने का तरीका जानें।
- धूप से झुलस जाना या सनबर्न – धूप से त्वचा पर फफोले पड़ने के इतिहास वाले लोगों में मेलेनोमा होने की अधिक संभावना होती है।
- विकीरण चिकित्सा – जिन रोगियों को विकीरण चिकित्सा मिली थी उनमें मेलेनोमा होने का जोखिम अधिक होता है।
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली – गंभीर बीमारी या प्रत्यारोपण के कारण बीमारी प्रतिरोधक शक्ति का कम होना मेलेनोमा होने के जोखिम को बढ़ा सकता है।
मेलेनोमा बीमारी की पहचान करना
चिकित्सक मेलेनोमा बीमारी की पहचान करने के लिए कई प्रकार की प्रक्रियाओं और जांचों का उपयोग करते हैं। इनमें शामिल है:
- स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक परीक्षा
- त्वचा की जाँच
- बायोप्सी , त्वचा की गहरी परतों से ऊतक लेने के लिए और यह देखने के लिए कि ट्यूमर सतह से कितनी दूर तक फैला हुआ है
- यह देखने के लिए और परीक्षण जोड़ सकते हैं कि क्या ऐसी जीन मौजूद हैं जो मेलेनोमा में असामान्य होती हैं, जैसे BRAF या अन्य
यदि चिकित्सकों को यह लगता है कि मेलेनोमा फैल गया हो सकता है तो अन्य परीक्षण ज़रूरी हो सकते हैं। इन जाँचों में शामिल है:
- रक्त परीक्षण - इनमें लैक्टेट डिहाइड्रोजनेज (LDH) के स्तर की जाँच करना शामिल हो सकता है। मेलेनोमा मौजूद होने पर LDH का स्तर अधिक हो सकता है।
- लिम्फ नोड मैपिंग और एक सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी – इनका उपयोग यह देखने के लिए होता है कि क्या मेलेनोमा आस-पास के लिम्फ नोड (लसीका आसंधियों) तक फैल गया है। चिकित्सक मेलेनोमा स्थल के करीब एक विशेष डाई या रेडियोधर्मी पदार्थ का इंजेक्शन लगाते हैं। डाई लसिका तंत्र में होता है से होते हुए मूल ट्यूमर के सबसे करीब वाले लिम्फ नोड (लसीका आसंधियों) तक पहुँच जाती है। सर्जन उन लिम्फ नोड को निकालकर कैंसर के लिए उनका परीक्षण कर सकता है। इससे चिकित्सकों को बीमारी की अवस्था ज्ञात करने और उपचारों की योजना बनाने में मदद मिलती है।
- इमेजिंग परीक्षण – परीक्षण का प्रकार ट्यूमर विशेष पर और लिम्फ नोड शामिल हैं या नहीं इस बात पर निर्भर करता है। इन जांचों में चुंबकीय प्रतिध्वनि इमेजिंग (MRI), पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET) स्कैन, और कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी (CT या CAT स्कैन) शामिल हो सकते हैं।
मेलेनोमा के कई उप-प्रकार होते हैं:
- सुपरफ़िशियल स्प्रेडिंग – मेलेनोमा का सबसे आम प्रकार। यह धीमे फैलता है और दिखने में अधिक सपाट तथा विस्तृत होता है।
- स्पिट्ज़ॉइड (स्पिट्ज़ नेवस) – कम-उम्र रोगियों में सबसे आम प्रकार का मेलेनोमा। यह किसी तिल/मस्से जैसा दिखता है।
- नॉड्युलर – एक उठे हुए स्थान के रूप में शुरू होता है जो तेज़ी से बढ़ता है, अक्सर त्वचा में गहरे।
- लेंटिगो मलिग्ना – एक धीमे बढ़ने वाला प्रकार। यह आम तौर पर वयस्कों के सिर या गर्दन पर होता है।
- एक्रल लेंटिजिनस – गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में सबसे आम। यह पंजों के तलवों पर, हाथों की हथेलियों पर और नाखूनों के नीचे हो सकता है।
मेलेनोमा को अवस्था 1-4 में वर्गीकृत किया जाता है। ये अवस्थाएँ कुछ कारकों पर आधारित होती हैं जिनमें ये शामिल हैं:
- ट्यूमर की मोटाई या त्वचा में मेलेनोमा कितनी गहराई में स्थित है
- यदि ट्यूमर फट कर या टूटकर त्वचा की ऊपरी परत से बाहर निकल आया है (अल्सरयुक्त)
- क्या ट्यूमर लसिका ग्रंथियों में फैला है या नहीं
- यदि कैंसर शरीर के अन्य भागों तक फैल गया है
मेलेनोमा का उपचार इन पर निर्भर है:
- मेलेनोमा का स्थान
- ट्यूमर की विशेषताएँ (जीन बदलाव और हिस्टोलॉजी)
- रोग का चरण
मेलेनोमा के लिए पूर्वानुमान
मेलेनोमा से स्वास्थ्य लाभ की संभावना विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है जैसे:
- ट्यूमर की मोटाई
- ट्यूमर का स्थान
- क्या कैंसर लिम्फ नोड या शरीर के अन्य भागों तक फैल गया है और वह जितने क्षेत्रों तक फैल गया है उन क्षेत्रों की संख्या
- क्या सर्जरी ट्यूमर को पूरी तरह निकाल सकती है
- रक्त में लैक्टेट डिहाइड्रोजनेज (LDH) का स्तर
कुल मिलाकर, पूर्वानुमान के लिए रोग का चरण सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है। जिन रोगियों में जो मेलेनोमा फैला नहीं है उसका पूर्वानुमान बहुत अच्छा होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में उत्तरजीविता की दरें 90% से अधिक हैं। लेकिन जिन मरीजों में बीमारी फैल गई है उनका उपचार अधिक कठिन होता है।
मेलेनोमा के मरीजों के लिए सहयोग
मेलेनोमा की रोकथाम
मेलेनोमा से जीत चुके लोगों में कैंसर के लौटने का जोखिम अधिक होता है। मेलेनोमा से ठीक होकर जीवित रहने वाले लोगों को कम से कम हर 6 महीने में एक त्वचा विशेषज्ञ द्वारा नियमित रूप से जांच करवाते रहना चाहिए। उनकी त्वचा की नियमित रूप से जांच करें और परिवर्तन का कोई भी संकेत दिखने पर चिकित्सक को दिखाएं।
मेलेनोमा की रोकथाम करने में मदद के लिए यहां कुछ सरल तरीके दिए गए हैं:
- धूप के संपर्क में कम आएं।
- सनस्क्रीन लगाएं।
- टैनिंग बेड का उपयोग न करें।
- अपनी त्वचा को जानें।
- धूप के प्रति संवेदनशीलता के लिए दवाइयों की जांच करें।
इलाज के बाद देरी से दिखाई देने वाले प्रभाव
बचपन के कैंसर से जीतने वालों को दीर्घकालिक अनुवर्तन स्वास्थ्य देखभाल करवानी चाहिए। कुछ उपचारों से विलंबित प्रभाव हो सकते हैं। ये ऐसी स्वास्थ्य समस्याएँ हैं जो उपचार समाप्त हो चुकने के कई महीनों या वर्षों बाद होती हैं।
किसी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से नियमित जाँच और स्क्रीनिंग करवाना महत्वपूर्ण है। आपके बच्चे को उपचार पूरा करने के बाद एक उत्तरजीविता देखभाल योजना होना चाहिए। इसमें इन पर मार्गदर्शन शामिल होता है:
- स्वास्थ्य जांच
- बीमारी के जोखिम कारक
- स्वास्थ्य सुधार कैसे करें
यह योजना अपने बच्चे के देखभाल प्रदाताओं से साझा करें।
कैंसर से जीत चुके लोगों को अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए स्वस्थ आदतें अपनानी चाहिए। इसमें शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ खानपान शामिल हैं।
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