दूसरा नाम: क्लासिक हीमोपिलिया, फ़ैक्टर VIII की कमी, क्रिसमस रोग, फ़ैक्टर IX की कमी
हीमोफिलिया एक दुर्लभ रक्तस्राव विकार है जिसमें रक्त ठीक से थक्का नहीं जमाता है। यह आम तौर पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है। लेकिन ऐसा भी होता है जब कोई व्यक्ति उसके परिवार में हीमोफिलिया से ग्रस्त होने वाला पहला व्यक्ति होता है।
प्लेटलेट वे रक्त कोशिकाएँ हैं जो रक्त को थक्का जमाने में मदद देती हैं। रक्त में मौजूद कुछ प्रोटीन, जिन्हें क्लॉटिंग फ़ैक्टर कहते हैं, प्लेटलेट कोशिकाओं को साथ चिपककर थक्का जमाने और रक्तस्राव रोकने में मदद देते हैं। हीमोफिलिया रोग क्लॉटिंग फ़ैक्टर बहुत कम या शून्य होने के कारण होता है। इसका यह अर्थ है कि जब ऊतक चोटिल होता है तो रक्त पर्याप्त तेज़ी से थक्का नहीं जमाता है।
रक्त में 12 क्लॉटिंग फ़ैक्टर होते हैं। यदि इनमें से कोई एक क्लॉटिंग फ़ैक्टर का भी अभाव हो तो रक्तस्राव लंबे समय तक होता है। हीमोफिलिया रोग रक्त में थक्का जमाने वाले प्रोटीन बनाने के निर्देश प्रदान करने वाली जीन में एक बदलाव (जिसे उत्परिवर्तन कहते हैं) के कारण होता है।
हीमोफिलिया के फलस्वरूप या तो नर्म और अस्थिर थक्के बनते हैं या थक्के बनते ही नहीं हैं। हीमोफिलिया से ग्रस्त व्यक्ति को इस विकार से मुक्त व्यक्ति की तुलना में अधिक तेज़ी से रक्तस्राव नहीं होता है, बल्कि अधिक समय तक रक्तस्राव होता है। हीमोफिलिया ग्रस्त व्यक्ति को कोई चोट लगने के बाद अधिक समय तक रक्तस्राव हो सकता है या आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है या बिना किसी चोट या आघात के रक्तस्राव हो सकता है। इससे ऊतक, अंग और जोड़ क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
हीमोफिलिया हल्का, मध्यम या गंभीर हो सकता है, जो इस बात पर निर्भर है कि रक्त में कितना क्लॉटिंग फ़ैक्टर मौजूद है। कुछ मामलों में, हीमोफिलिया प्राणघातक हो सकता है।
हीमोफिलिया के उपचारों में फ़ैक्टर रिप्लेसमेंट थैरेपी शामिल है जो रक्त में अनुपस्थित प्रोटीनों की भरपाई करती है।
हीमोफिलिया के लक्षण आम तौर पर इस बात पर निर्भर होते हैं कि फ़ैक्टर के स्तर कितने कम हैं। संकेतों और लक्षणों मे निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
हीमोफिलिया 3 प्रकार का होता है। व्यक्ति को किस प्रकार का हीमोफिलिया है यह बात इस पर निर्भर है कि कौनसा क्लॉटिंग फ़ैक्टर कम या अनुपस्थित है:
हीमोफिलिया A सबसे आम प्रकार का हीमोफिलिया है। हीमोफिलिया के 80% मामले इसी के होते हैं और यह हीमोफिलिया B से 4 गुना अधिक आम है। हीमोफिलिया संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 20,000 लोगों को और दुनिया भर में लगभग 4,00,000 लोगों को प्रभावित करता है।
हीमोफिलिया A और B आम तौर पर वंशानुगत होते हैं, यानी वे माता-पिता से जीन के ज़रिए बच्चे को मिलते हैं। हीमोफिलिया जन्म से पहले जीन में किसी नए बदलाव (उत्परिवर्तन) के कारण भी हो सकता है। हीमोफिलिया से ग्रस्त हर 3 में से लगभग 1 व्यक्ति में ऐसा ही होता है।
क्रोमोसोम यानी गुणसूत्र वे संरचनाएँ हैं जो आनुवंशिक जानकारी लेकर चलती हैं। पुरुषों में एक X क्रोमोसोम और एक Y क्रोमोसोम (XY) होता है। महिलाओं में दो X क्रोमोसोम (XX) होते हैं। हीमोफिलिया A और B का कारण बनने वाला जीन X क्रोमोसोम पर स्थित होता है, इसलिए यह विकार आम तौर पर माता से पुरुष संतान को मिलता है।
इस जीन की वाहक कुछ महिलाओं में अधिक रक्तस्राव के लक्षण हो सकते हैं, जैसे नाक से अधिक रक्तस्राव या माहवारी में अधिक रक्तस्राव।
माता से संतान को वंशानुगतता: हीमोफिलिया की महिला वाहक को हर जन्म के साथ जीन अपने बच्चे तक पहुँचने की 50% संभावना होती है, जो इस पर निर्भर है कि बच्चे को कौनसा X क्रोमोसोम मिलता है।
यदि यह जीन उत्परिवर्तन पुरुष संतान को मिलता है, तो उसे हीमोफिलिया होगा।
यदि यह जीन उत्परिवर्तन महिला संतान को मिलता है, तो वह वाहक होगी।
हीमोफिलिया की वाहक माता से उसके प्रत्येक बच्चे तक रोग वाला जीन पहुँचने की 50% संभावना होती है।
पिता से बच्चे तक विरासत का सफर: चूंकि एक पुत्र अपने पिता से Y-गुणसूत्र (Y-chromosome) प्राप्त करता है, इसलिए एक पिता अपने पुत्र को हीमोफीलिया का जीन नहीं दे सकता। हालाँकि, पिता दो में से एक X क्रोमोसम का प्रदाता होता है, इसलिए हीमोफिलिया से ग्रस्त पुरुष की प्रत्येक महिला संतान इस रोग की वाहक होगी।
हीमोफिलिया से ग्रस्त पिता अपनी सभी पुत्रियों को यह जीन पहुँचाएगा।
हीमोफिलिया A या B के विपरीत, हीमोफिलिया C (फ़ैक्टर XI की कमी) माता या पिता, किसी से भी बच्चों तक पहुँच सकता है। फ़ैक्टर XI (11) की कमी से ग्रस्त अधिकांश लोगों में रक्तस्राव के लक्षण बहुत कम या शून्य होते हैं।
यह भली-भाँति ज्ञात नहीं है कि किसी व्यक्ति के रक्त में मौजूद फ़ैक्टर XI (11) की मात्रा लक्षणों की गंभीरता को किस तरह प्रभावित करती है। आम तौर पर, फ़ैक्टर XI (11) की कमी एक हल्का रक्तस्राव विकार होता है, लेकिन यह अलग-अलग लोगों में काफ़ी अलग-अलग हो सकता है, यहाँ तक कि एक ही परिवार के सदस्यों में भी। इस कारण इसकी पहचान कठिन हो सकती है। कुछ लोगों में फ़ैक्टर XI (11) की हल्की कमी होने के बावजूद उनमें गंभीर रक्तस्राव की घटनाएँ हो सकती हैं।
हीमोफिलिया की पहचान आपके बच्चे के पारिवारिक और चिकित्सा इतिहास, शारीरिक परीक्षा और लैब परीक्षणों के आधार पर की जाती है। यदि आपके बच्चे में लक्षण हैं या यदि आपके परिवार में रक्तस्राव विकारों का इतिहास है, तो आपके बच्चे की देखभाल टीम रक्त परीक्षणों का आदेश देगी। आपका चिकित्सक आपसे रक्तस्राव या नील पड़ने में जो भी बदलाव हों उनके बारे में, हालिया अस्वस्थताओं के बारे में या आपका बच्चा जो दवाएँ ले रहा है उनके बारे में पूछ सकता है।
हीमोफिलिया की पहचान के परीक्षणों में ये शामिल हैं:
हीमोफिलिया A और B को बच्चे में फ़ैक्टर VIII (8) या फ़ैक्टर IX (9) की मात्रा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
यदि आपके बच्चे में हीमोफिलिया की पहचान होती है, तो उसका उपचार किसी हिमेटॉलजिस्ट द्वारा किया जाएगा जो एक ऐसा चिकित्सक होता है जो रक्त विकारों के उपचार में विशेषज्ञ होता है।
हीमोफिलिया का उपचार रोग की गंभीरता पर, बच्चे के गतिविधि स्तर पर और ज़रूरी चिकित्सा या डेंटल कार्यविधि पर निर्भर करता है। वर्तमान थैरेपी में ये शामिल हैं:
रिप्लेसमेंट थैरेपी हीमोफिलिया का मुख्य उपचार है। यह उपचार उस क्लॉटिंग फ़ैक्टर की भरपाई करता है जो रक्त में कम है या अनुपस्थित है।
रिप्लेसमेंट थैरेपी के लिए क्लॉटिंग फ़ैक्टर दवाएँ दान किए गए रक्त के प्लाज़्मा से बनाई जा सकती हैं (प्लाज़्मा फ़ैक्टर कॉन्सन्ट्रेट)। प्लाज़्मा रक्त का वह अंश है जिसमें थक्का जमाने वाले प्रोटीन होते हैं। रिप्लेसमेंट थैरेपी के लिए क्लॉटिंग फ़ैक्टर मानव-निर्मित कॉन्सन्ट्रेट भी हो सकते हैं जिन्हें रीकॉम्बिनेन्ट क्लॉटिंग फ़ैक्टर कहते हैं।
हीमोफिलिया के लिए रिप्लेसमेंट थैरेपी किसी शिरा में IV द्वारा दी जाती है और इसे किसी मेडिकल क्लिनिक में या घर पर किसी प्रशिक्षित देखभालकर्ता द्वारा दिया जा सकता है। क्लॉटिंग फ़ैक्टर दिए जाने के बाद, वह तेज़ी से काम करते हुए फ़ैक्टर का स्तर बढ़ाता है।
फ़ैक्टर उत्पादों के साथ उपचार या तो रोकथाम के रूप में दिया जा सकता है (जिसे प्रोफिलेक्सिस या प्रोफि कहते हैं) या फिर रक्तस्राव के लक्षण होने पर आवश्यकतानुसार दिया जा सकता है। प्रोफिलेक्सिस शुरू करने का निर्णय हिमेटॉलजिस्ट और परिवार द्वारा मिलकर लिया जाता है। हालांकि, शोध से यह पता चला है कि हीमोफिलिया ग्रस्त जिन बच्चों का उपचार रक्तस्राव की रोकथाम के उद्देश्य से नियमित रूप से किया गया था उनमें 6 वर्ष की उम्र पर जोड़ों की क्षति उन बच्चों से कम थी जिनका उपचार केवल कोई रक्तस्राव शुरू होने के बाद ही किया जाता था।
एमिसिज़ुमैब (HEMLIBRA®) एक दवा है जिसका उपयोग हीमोफिलिया A, जो एक फ़ैक्टर VIII (8) हीमोफिलिया है, के रोगियों में रक्तस्राव की घटनाओं की रोकथाम में मदद के लिए किया जाता है। एमिसिज़ुमैब फ़ैक्टर VIII (8) की भूमिका की नकल करती है और रक्त को थक्का जमाने में मदद देती है।
एमिसिज़ुमैब कोई वास्तविक फ़ैक्टर VIII (8) नहीं है, इसलिए यह ऐसे रोगियों में भी काम करती है जिनमें प्रावरोधक (इन्हिबिटर) हैं। रक्तस्राव की रोकथाम के लिए एमिसिज़ुमैब को सप्ताह में एक बार, हर दो सप्ताह में एक बार या हर 4 सप्ताह में एक बार त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है।
इस दवा का उपयोग केवल रोकथाम के लिए किया जाता है। इसका उपयोग किसी सक्रिय रक्तस्राव के उपचार के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यह केवल फ़ैक्टर VIII (8) हीमोफिलिया में काम करेगी, फ़ैक्टर IX (9) हीमोफिलिया में नहीं। यदि रक्तस्राव की घटना हो, तो रक्तस्राव के उपचार के लिए रोगी को फ़ैक्टर VIII (8) कॉन्सन्ट्रेट (या प्रावरोधक के मामले में फ़ैक्टर VIIa) चढ़वाने की ज़रूरत होगी।
DDAVP एक मानव-निर्मित हॉर्मोन है जिसका उपयोग हल्के हीमोफिलिया A से ग्रस्त कुछ लोगों के उपचार के लिए किया जाता है. इसका उपयोग हीमोफिलिया B या गंभीर हीमोफिलिया के उपचार के लिए नहीं किया जाता है।
DDAVP के कारण वॉन विलीब्रांड फ़ैक्टर अपने भंडारण स्थान से निकलकर रक्त वाहिकाओं के अस्तर में और प्लेटलेट में आ जाता है। रक्त में वॉन विलीब्रांड फ़ैक्टर फ़ैक्टर VIII (8) से बँधा होता है। वॉन विलीब्रांड फ़ैक्टर के बिना, फ़ैक्टर VIII (8) तेज़ी से नष्ट हो जाता है। वॉन विलीब्रांड फ़ैक्टर फ़ैक्टर VIII (8) से बँधा होता है, इसलिए यह फ़ैक्टर रक्त में क्लॉटिंग फ़ैक्टर VIII (8) की मात्रा बढ़ाता है।
DDAVP से उपचार केवल कुछ परिस्थितियों में किया जाता है, जैसे किसी डेंटल कार्यविधि से पहले या रक्तस्राव की रोकथाम के लिए। यदि इस दवा का अक्सर उपयोग किया जाए तो यह इतने अच्छे से काम नहीं करेगी।
कुछ लोगों में DDAVP से उनके फ़ैक्टर VIII (8) स्तर में अच्छी वृद्धि नहीं होती है। आपके बच्चे में अच्छी प्रतिक्रिया होगी या नहीं यह देखने के लिए, आपकी देखभाल टीम DDAVP चैलेंज का आदेश दे सकती है। इसमें दवा दिए जाने से पहले और बाद में रक्त में फ़ैक्टर VIII (8) की मात्रा मापी जाएगी।
एंटीफ़िब्रिनोलिटिक दवाओं का उपयोग रक्त के थक्कों के बन जाने के बाद उन्हें एक साथ बनाए रखने में मदद के लिए किया जाता है। इन दवाओं में शामिल हैं ट्रैनेक्ज़ैमिक एसिड (Lysteda®) और अमीनोकैप्रोइक एसिड (Amicar®)।
कभी-कभी क्लॉटिंग फ़ैक्टर रिप्लेसमेंट थैरेपी या DDAVP के साथ भी एंटीफ़िब्रिनोलिटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है। ये दवाएँ आम तौर पर किसी डेंटल कार्यविधि से पहले और बाद में ली जाती हैं। इनका उपयोग मुँह या नाक से रक्तस्राव रोकने या अधिक रक्तस्राव वाले मासिक धर्म के उपचार के लिए किया जाता है।
वैज्ञानिक हीमोफिलिया के लिए नए जीन थैरेपी उपचारों का अध्ययन कर रहे हैं। जीन थैरेपी में हीमोफिलिया के जनक जीन को ठीक करने के लिए जीन को बदला जाता है या उनकी मरम्मत की जाती है। शोधकर्ता हीमोफिलिया ग्रस्त लोगों में रक्तस्राव की रोकथाम या उसे घटाने के तरीके ढूँढने के लिए क्लिनिकल परीक्षणों में जीन थैरेपी का निरंतर परीक्षण कर रहे हैं।
हल्के हीमोफिलिया से ग्रस्त व्यक्ति को संभव है कि केवल किसी सर्जरी या आघातपूर्ण चोट के बाद ही रक्तस्राव संबंधी समस्याएँ हों। यदि क्लॉटिंग फ़ैक्टर का स्तर बहुत कम है, तो व्यक्ति के साथ मामूली चोट या बिना किसी चोट के रक्तस्राव होने की घटनाएँ भी हो सकती हैं, ऐसे रक्तस्राव अक्सर मांसपेशियों और जोड़ों में होते हैं।
हीमोफिलिया एक आजीवन रहने वाला रोग है जिसका कोई इलाज नहीं है। हालाँकि, हीमोफिलिया से ग्रस्त अधिकांश लोगों की जीवन प्रत्याशा सामान्य होती है। सही उपचार और खुद की उचित देखभाल के साथ, आपका बच्चा स्वस्थ व सक्रिय जीवन जी सकता है।
परिवारों के लिए कुछ सुझाव:
फ़ैक्टर दवा और संबंधित ज़रूरी सामान हमेशा साथ में तैयार रखें। यह आपातकालीन और गैर-आपातकालीन, दोनों परिस्थितियों में महत्वपूर्ण है। हमेशा पहले फ़ैक्टर दवा इन्फ़्यूज़ करें (दवा रक्त में चढ़ाएँ)।
आपातकालीन उपचार: आपातस्थिति में, जैसे सिर की चोट लगने पर, अपने बच्चे को और आपके पास जो फ़ैक्टर दवा है उसे निकटतम आपातस्थिति कक्ष ले जाएँ। आपातस्थिति कक्ष की देखभाल टीम फ़ैक्टर उपचार को मिलाकर आपके बच्चे की बाँह में एक IV के ज़रिए इन्फ़्यूज़ करेगी (चढ़ाएगी)। इससे आपके बच्चे को वह फ़ैक्टर मिल जाएगा जो रक्तस्राव रोकने के लिए ज़रूरी है। आपातस्थिति कक्ष में भी, एक्स-रे, लैब परीक्षणों या अन्य परीक्षणों की तुलना में इन्फ़्यूज़न को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
गैर आपातकालीन उपचार: यदि आपके बच्चे को कोई मामूली चोट लगी है, तो फ़ैक्टर दवा घर पर खुद ही इन्फ़्यूज़ करें। यदि आप पहले दवा इन्फ़्यूज़ करते हैं और फिर RICE उपचार (रेस्ट, आइस, कंप्रेशन और एलिवेशन, यानी आराम, बर्फ़, पट्टी-बँधाई और ऊँचा उठाना) देते हैं तो आप दर्द, सूजन और जोड़ों की संभावित क्षति की रोकथाम में मदद कर सकते हैं।
हीमोफिलिया से ग्रस्त लोगों में होने वाले रक्तस्रावों में जोड़ों में होने वाले रक्तस्राव सबसे आम हैं। ये रक्तस्राव किसी भी जोड़ में हो सकते हैं, पर घुटनों, कोहनियों और टखनों में ये सबसे आम हैं। इन रक्तस्रावों का उपचार अत्यावश्यक है क्योंकि ये जोड़ को क्षति पहुँचा सकते हैं।
किसी जोड़ में रक्तस्राव के शुरुआती संकेत और लक्षण:
किसी जोड़ में रक्तस्राव के देर से दिखने वाले संकेत और लक्षण:
यदि आपको किसी जोड़ में रक्तस्राव का संदेह हो, तो हमेशा आपकी उपचार योजना में जोड़ों में रक्तस्राव के लिए दिए गए निर्देशों का पालन करें। यदि आप आपके अगले चरणों के बारे में अनिश्चित हों तो अपने बच्चे की देखभाल टीम को कॉल करें।
तुरंत अपने बच्चे को घर पर फ़ैक्टर का उपचार दें। उसके बाद:
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समीक्षित: दिसंबर 2024
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