रक्त का थक्का जमाने वाले कारक कहलाने वाले प्रोटीन, रक्तस्राव को रोकने के लिए प्लेटलेट्स को आपस में चिपकने में मदद करते हैं।
वॉन विलेब्रांड बीमारी (VWD) एक आनुवांशिक रक्तस्राव विकार है जो रक्त की थक्का जमाने की क्षमता को प्रभावित करता है। वॉन विलेब्रांड बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति में नील पड़ने में वृद्धि, लंबे समय तक नकसीर (नाक से रक्तस्राव), मुँह से रक्तस्राव, मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या किसी चोट अथवा कार्यविधि के बाद ऐसा अधिक रक्तस्राव जिसे रोकना कठिन हो, जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
प्लेटलेट नामक रक्त कोशिकाओं को रक्त को थक्का जमाने में मदद देने के लिए क्लॉटिंग फ़ैक्टर नामक प्रोटीनों की ज़रूरत होती है। इन्हीं में से एक प्रोटीन को वॉन विलेब्रांड फ़ैक्टर कहते हैं। यह प्लेटलेट को आपस में चिपककर रक्त का मज़बूत थक्का जमाने में मदद करता है जिससे रक्तस्राव रुकता है। वॉन विलेब्रांड फ़ैक्टर रक्त को थक्का जमाने में मदद करने वाले एक और महत्वपूर्ण प्रोटीन से भी बँधा होता है जिसे क्लॉटिंग फ़ैक्टर VIII (8) कहते हैं।
वॉन विलेब्रांड बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति में या तो वॉन विलेब्रांड फ़ैक्टर का स्तर कम होता है या फिर यह फ़ैक्टर ठीक से काम नहीं करता है। वॉन विलेब्रांड बीमारी के मुख्य रूप से 3 प्रकार होते हैं: टाइप 1, 2 और 3। टाइप 1 या टाइप 2 वॉन विलेब्रांड बीमारी से ग्रस्त लोगों में संभव है कि कई रक्तस्राव समस्याएँ न हों। टाइप 3 वॉन विलेब्रांड बीमारी अधिक गंभीर होता है।
उपचारों में डेस्मोप्रेसिन एसिटेट, फ़ैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी और रक्त को थक्का जमाने में मदद देने वाली दवाएँ शामिल हैं।
संकेत और लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति को किस प्रकार का वॉन विलेब्रांड बीमारी है और विकार कितना गंभीर है।
टाइप 1 या टाइप 2 वॉन विलेब्रांड बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति में हल्के से मध्यम रक्तस्राव के संकेत और लक्षण हो सकते हैं:
टाइप 3 वॉन विलेब्रांड बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति में हल्के से मध्यम रक्तस्राव के साथ-साथ ये भी हो सकते हैं:
महिलाों में, मासिक धर्म के दौरान बहुत अधिक रक्तस्राव वॉन विलेब्रांड बीमारी का अक्सर मुख्य संकेत होता है। हालाँकि, यदि किसी महिला को मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होता है तो इसका यह अर्थ नहीं है कि उसे यह विकार है।
वॉन विलेब्रांड बीमारी आम तौर पर एक वंशानुगत विकार होता है, जिसका यह अर्थ है कि यह विकार एक विशिष्ट जीन बदलाव (उत्परिवर्तन) के ज़रिए माता या पिता से बच्चे को मिलता है। यह सबसे आम वंशानुगत रक्तस्राव विकार है।
टाइप 1 बीमारी और कुछ टाइप 2 के कुछ सब-टाइप (उप-प्रकार) केवल 1 माता-पिता से बच्चे को मिल सकते हैं। टाइप 3 और टाइप 2N वॉन विलेब्रांड बीमारी केवल तब होते हैं जब बच्चे को माता और पिता, दोनों से यह जीन मिले। यदि किसी व्यक्ति में यह जीन है, तो वह इसे अपने बच्चे को दे सकता है, भले ही उस व्यक्ति में रक्तस्राव समस्याओं के कोई संकेत या लक्षण न हों।
कभी-कभी कोई व्यक्ति वॉन विलेब्रांड बीमारी के साथ जन्म नहीं लेता है, बल्कि जीवन में आगे चलकर उसे यह बीमारी हो जाती है। इस मामले में, व्यक्ति के इस बीमारी को अक्वायर्ड (अर्जित) वॉन विलेब्रांड सिंड्रोम कहते हैं और यह बीमारी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का परिणाम होता है।
वॉन विलेब्रांड बीमारी के मुख्य रूप से 3 प्रकार होते हैं:
वॉन विलेब्रांड बीमारी की पहचान करना कठिन हो सकता है। टाइप 1 या टाइप 2 वॉन विलेब्रांड बीमारी से ग्रस्त लोगों में संभव है कि कई रक्तस्राव समस्याएँ न हों। इसकी पहचान संभव है कि तब तक न हो पाए जब तक बहुत अधिक रक्तस्राव वाला मासिक धर्म न हो या चोट अथवा सर्जरी के बाद ऐसा रक्तस्राव न हो जिसे रोकना कठिन हो।
वहीं दूसरी ओर, टाइप 3 वॉन विलेब्रांड बीमारी नवजात-अवस्था और बचपन में रक्तस्राव की बड़ी समस्याएँ कर सकता है। इस विकार के गंभीर रूप के साथ जन्मे शिशुओं में इसकी पहचान आम तौर पर जीवन की शुरुआत में ही हो जाती है।
वॉन विलेब्रांड बीमारी की पहचान आपके बच्चे के चिकित्सा इतिहास, शारीरिक परीक्षा और लैब परीक्षणों के आधार पर की जाती है। आपका चिकित्सक आपसे रक्तस्राव या नील पड़ने में जो भी बदलाव हों उनके बारे में, हालिया अस्वस्थताओं के बारे में या आपका बच्चा जो दवाएँ ले रहा है उनके बारे में पूछ सकता है।
लैब परीक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं:
आपकी देखभाल टीम वॉन विलेब्रांड फ़ैक्टर और अन्य क्लॉटिंग फ़ैक्टरों की गतिविधि मापने के लिए और रक्त को थक्का जमाने में कितना समय लगता है यह देखने के लिए अन्य रक्त परीक्षण कर सकती है।
वॉन विलेब्रांड बीमारी का उपचार, विकार की गंभीरता पर निर्भर करता है। अधिकांश लोगों में टाइप 1 वॉन विलेब्रांड बीमारी होता है, जो इस विकार का सबसे हल्का रूप है। यदि आपके बच्चे को टाइप 1 है, तो संभव है कि उसे कोई सर्जरी या डेंटल कार्यविधि करवाते समय या कोई आघातपूर्ण चोट लगने पर उपचार की ज़रूरत पड़े। यदि आपके बच्चे को वॉन विलेब्रांड बीमारी का कोई अधिक गंभीर प्रकार है, तो उसे प्राणघातक रक्तस्रावों की रोकथाम करने या को रोकने के लिए अधिक बार उपचार की ज़रूरत पड़ सकती है।
वर्तमान थेरेपी में ये शामिल हैं:
DDAVP चैलेंज: कुछ लोगों में DDAVP से उनके फ़ैक्टर स्तरों में अच्छी वृद्धि नहीं होती है। आपके बच्चे में अच्छी प्रतिक्रिया होगी या नहीं यह देखने के लिए, आपकी देखभाल टीम DDAVP चैलेंज का आदेश दे सकती है। यह परीक्षण दवा दिए जाने से पहले और बाद में रक्त में वॉन विलेब्रांड फ़ैक्टर की मात्रा को मापेगा।
वॉन विलेब्रांड बीमारी अधिकांश मामलों में एक हल्का विकार होता है। हल्के प्रकारों के वॉन विलेब्रांड बीमारी से ग्रस्त बच्चों में आम तौर पर रक्तस्राव के कम लक्षण होते हैं और उन्हें कम गहन उपचार की ज़रूरत पड़ती है। गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों में अपने-आप रक्तस्राव या गंभीर रक्तस्राव की घटनाओं का अधिक जोखिम हो सकता है।
वॉन विलेब्रांड बीमारी की जटिलताओं में जोड़ों में रक्तस्राव, आयरन डेफ़िशिएंसी एनीमिया या गंभीर रक्तस्राव की घटनाएँ शामिल हो सकती हैं। अपनी देखभाल टीम के साथ काम करके एक ऐसी उपचार व निगरानी योजना बनाना महत्वपूर्ण है जो आपके बच्चे के लिए सही हो।
अपने बच्चे को सुरक्षित रखने और समस्याओं का जोखिम घटाने में मदद के उपाय करें। इनमें शामिल है:
यदि आपके बच्चे को कोई गंभीर चोट लगे, विशेष रूप से ऐसी चोट जिसमें सिर या पेट से कुछ टकराया हो, या ऐसा रक्तस्राव होता है जो रुकता नहीं है, तो तुरंत अपने डॉक्टर को कॉल करें या इमरजेंसी (आपातकालीन कक्ष) में जाएँ।
परिवार में वॉन विलेब्रांड बीमारी के इतिहास वाले जो लोग बच्चा करने की सोच रहे हैं उनके लिए आनुवांशिक परामर्श मददगार हो सकता है।
उचित चिकित्सीय देखभाल के साथ, वॉन विलेब्रांड बीमारी से ग्रस्त अधिकांश बच्चे, जिनमें टाइप 3 वॉन विलेब्रांड बीमारी से ग्रस्त बच्चे भी शामिल हैं, एक सामान्य व सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
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समीक्षित: मई 2024
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