डायरिया ऐसी स्थिति है जिसमें मल बहुत ही पतला, पानी जैसा होता है और रोगी को बार-बार मल-त्याग करना पड़ता है। इसमें व्यक्ति को ऐंठन हो सकती है या वह मल-त्याग पर नियंत्रण नहीं रख पाता है।
सामान्य रूप में, डायरिया को 24 घंटे में 3 से अधिक बार पतला मल-त्याग करने की स्थिति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
गंभीर रोगों के साथ जी रहे बच्चों में दस्त एक आम दुष्प्रभाव है। इसके विभिन्न कारण हो सकते हैं जिसमें कीमोथेरेपी, एंटीबायोटिक दवाएं और संक्रमण शामिल हैं। कुछ मामलों में, डायरिया से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि शरीर में पानी की कमी हो जाना, कुपोषण, चयापचय असंतुलन।
डायरिया को नियंत्रित करने के तरीकों में एंटी-डायरिया दवाएं और खान-पान में बदलाव शामिल हैं। यह भी सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि आपका बच्चा पेय पदार्थों का सेवन करते हुए और IV तरल प्राप्त करते हुए अपने शरीर में पानी की कमी को पूरा करते रहे।
यदि डायरिया किसी वायरस या बैक्टीरिया के कारण हुआ है, तो उस संक्रमण का उपचार करने की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि दस्त की समस्या कीमोथेरेपी जैसे उपचार के कारण होती है, तो आपके बच्चे की देखभाल टीम लक्षणों में सुधार होने तक उपचार की समय-सारणी में बदलाव कर सकती है।
दस्त का आकलन
डायरिया के आकलन में निम्नलिखित बातों पर ध्यान दिया जाता है:
- प्रति दिन घटनाओं की संख्या
- मल का रंग-रूप
- ढीला
- तरल
- पानी-सा
- असंयम
- रात के दौरान जाग जाना
- दैनिक गतिविधियों में बाधा
देखभाल टीम आपसे एक चार्ट का उपयोग करके यह बताने के लिए कह सकती है कि आपके बच्चे का मल कैसा दिखता है। वे अन्य संकेतों और लक्षणों का भी आकलन करेंगे जैसे:
प्रयोगशाला परीक्षण रक्त गणना, इलेक्ट्रोलाइट स्तर और गुर्दे की कार्यप्रणाली की जाँच कर सकते हैं।
वायरस और बैक्टीरिया का पता लगाने के लिए मल की जांच की जा सकती है। दस्त के संक्रमण के आम स्रोत इस प्रकार हैं:
- रोटावायरस
- एडिनोवायरस, नोरोवायरस
- साल्मोनेला
- कैम्पिलोबैक्टर
- शिगैला
- क्लॉस्ट्रिडिऑइड्स डिफ़िसिल
संक्रमण से होने वाले डायरिया में भिन्न उपचार की ज़रूरत पड़ सकती है।
देखभाल टीम डायरिया के अन्य संभावित कारणों का भी आकलन कर सकती है जैसे दवाएं, खान-पान और स्थितिजन्य कारक।
दस्त के मूल्यांकन के लिए कम ही मामलों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को देखने के लिए इमेजिंग जांचों को शामिल किया जाए।
दस्त और कब्ज़ कैंसर आदि गंभीर रोगों से ग्रस्त बच्चों में आम समस्याएँ हैं।
डायरिया से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं
डायरिया जीवन-घातक हो सकता है। डायरिया से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
- शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण)
- कुपोषण
- इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
- किडनी खराब हो जाना
कुछ मामलों में, लक्षणों में सुधार आने तक कीमोथेरेपी और अन्य उपचारों में देरी की जा सकती है।
दस्त के कारण
पोषक तत्व और पानी, पाचक नाल से आहार सामग्री के गुजरते समय अवशोषित हो जाते हैं। और अपशिष्ट सामग्री मल के रूप में शरीर से बाहर निकल जाती है। आंतें भोजन को तोड़ने और आगे ले जाने के लिए पाचन रस और म्यूकस स्रावित करती हैं।
पाचक नाल में बैक्टीरिया भी पाए जाते हैं जो भोजन को तोड़ने में मदद करते हैं।
कभी-कभी, यदि तरल अवशोषित नहीं हो पाते या रस का स्राव अधिक होता है तो मल बिल्कुल पानी जैसे हो जाते हैं। दवाएं भी आंतों में मौजूद बैक्टीरिया के संतुलन को बदल सकती हैं। आंतों की गतिविधि बढ़ने से मल भी अधिक जल्दी बाहर निकल सकता है।
इन एक या अधिक पाचन प्रक्रियाओं में परिवर्तन या असंतुलन से डायरिया हो सकता है।
गंभीर रोगों से ग्रस्त बच्चों में दस्त का कारण बन सकने वाले कुछ कारक इस प्रकार हैं:
- कीमोथेरेपी
- पेट या श्रोणि में रेडिएशन देना
- किसी दवा, जैसे एंटीबायोटिक्स (जीवाणु नाशक दवाइयां), लैक्सेटिव, और एंटासिड्स
- वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण
- तनाव या चिंता
- अन्य चिकित्सीय स्थितियां जैसे मधुमेह या प्रदाहक आन्त्र रोग
- एंटरल (ट्यूब) फ़ीडिंग
कीमोथेरेपी-उत्प्रेरित डायरिया
डायरिया कीमोथेरेपी से होने वाला एक आम दुष्प्रभाव है। इसे कई बार कीमोथेरेपी से उत्प्रेरित डायरिया या CID कहा जाता है। कीमोथेरेपी के कारण अलग-अलग तरीके से डायरिया हो सकता है।
कीमोथेरेपी से आंतों की दीवारों पर लगी श्लेषमा झिल्ली को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ दवाओं से आंतों का तरल संतुलन भी बदल सकता है। हो सकता है कि तरल ठीक से अवशोषित न हों या हो सकता है कि अतिरिक्त तरल या म्यूकस स्रावित हो।
कीमोथेरेपी से पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा आ सकती है या आंतों में पाचक एंजाइमों के कार्य करने के तरीके में बदलाव आ सकता है।
डायरिया, बाल-रोग कैंसर से पीड़ित रोगियों में उपयोग की जाने वाली अन्य सामान्य दवाओं का एक दुष्प्रभाव हो सकता है। यह विभिन्न कारणों से हो सकता है। कुछ दवाओं से पेट और आंतों में “अच्छे” और “बुरे” बैक्टीरिया में असंतुलन पैदा हो सकता है। अन्य दवाओं से भोजन का अपघटन या तरल अवशोषित होने या उत्पादित होने की मात्रा प्रभावित हो सकती है।
दस्त कर सकने वाली कुछ दवाएँ इस प्रकार हैं एंटीबायोटिक्स (जीवाणु नाशक दवाइयां) जैसे:
- एम्पिसिलिन
- अमॉक्सिसिलिन,
- एमोक्सिसिलिन-क्लाव्युलानेट
- सिफिक्सिम
- क्लिन्डामाइसिन
- एरिथ्रोमाइसिन
मल नरम करने वाली दवाएं, लैक्सेटिव, एंटासिड्स जिनमें मैग्नीशियम या पोटैशियम क्लोराइड होता है, और प्रोटॉन पंप इनहिबिटर भी दस्त कर सकती हैं।
विकिरण चिकित्सा और डायरिया
पेट, पीठ या पेल्विस में रेडिएशन देने से डायरिया हो सकता है। रेडिएशन तेज़ी से बढ़ने वाली कोशिकाओं में कोशिका नष्ट करने की क्रिया को सक्रिय करती है, जैसे कि आंतों के सतह पर लगी पतली परत की कोशिकाएं। इसे विकिरण आंत्रशोथ के नाम से जाना जाता है।
इसके लक्षणों में मतली, उल्टी, ऐंठन, थकान और डायरिया शामिल हैं। मल पानी जैसा हो सकता है या उसमें रक्त अथवा म्यूकस हो सकता है।
विकिरण आंत्रशोथ में आमतौर पर उपचार समाप्त होने के बाद 2-3 सप्ताह में सुधार होने लगता है, लेकिन इसके लक्षण 12 सप्ताह या उससे अधिक समय तक रह सकते हैं। यदि आपके बच्चे को रेडिएशन एंटेराइटिस हुआ है, तो उसे अधिक समय तक दस्त रह सकते हैं या जीवन में आगे चलकर दस्त से संबंधित समस्याएँ हो सकती हैं।
विकिरण चिकित्सा में डायरिया के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- उच्च मात्रा में खुराक या रेडिएशन उपचारों की आवृत्ति
- अधिक उपचार वाले भाग में आंतें शामिल हैं
- कीमोथेरेपी के साथ दी गई रेडिएशन
विकिरण-उत्प्रेरित डायरिया में लोपरामाइड और ऑक्ट्रियोटाइड जैसी दवाओं का उपयोग करना शामिल है।
डायरिया होने के अन्य कारण
दस्त का प्रबंधन करना
दस्त गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ कर सकता है। लक्षणों के प्रबंधन के लिए अपने बच्चे की देखभाल टीम के साथ करीब से काम करना महत्वपूर्ण है। डायरिया के उपचार में मदद करने की रणनीतियों में एंटी-डायरिया दवाएं और खान-पान में बदलाव शामिल हैं।
दस्त से निपटते समय पानी की कमी न होने देना महत्वपूर्ण है। यदि दस्त गंभीर है या आपका बच्चा मुँह से पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं ले सकता है, तो उसे पानी की कमी के उपचार की ज़रूरत हो सकती है।
एंटी-डायरिया दवाएं
डायरिया की संभावित दवाओं में लोपरामाइड (Imodium®) और एंटीबायोटिक शामिल हैं।
विशेष मामलों में, कुछ प्रकार के डायरिया के उपचार के लिए एट्रोपिन और ऑक्ट्रियोटाइड का उपयोग किया जा सकता है।
कुछ मामलों में प्रोबायोटिक मददगार होते हैं। लेकिन आपके बच्चे को इनका उपयोग केवल देखभाल टीम की देखरेख में ही करना चाहिए।
आपके बच्चे की देखभाल टीम आपको सर्वोत्तम उपचार ढूँढने में मदद देगी।
डायरिया होने पर आपको क्या खाना चाहिए
आपके बच्चे की देखभाल टीम आहारीय बदलाव सुझा सकती है, जैसे एक बार के भोजन की मात्रा कम करना, पचने में आसान चीज़ें, और कैफ़ीन-रहित पेय।
आपके बच्चे की देखभाल टीम BRAT (बनाना (केले), राइस (चावल), एपलसॉस, और टोस्ट) भी सुझा सकती है। इस डाइट में आवश्यक पोषक तत्व कम होते हैं, इसलिए इसका पालन केवल कुछ दिन तक ही करें या देखभाल टीम के द्वारा कहे गए अनुसार करें।
अन्य खाद्य पदार्थ में जई या ओट्स, निम्न-शर्करा युक्त अनाज, क्रैकर्स, सॉस रहित पास्ता और नरम, छिले हुए फल जैसे आड़ू या नाशपाती शामिल हो सकते हैं। पकी हुई सब्जियों और मांस के पतले टुकड़ों के साथ शोरबा वाले सूप, ठोस आहार सामग्री शुरू करने और तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाने का एक अच्छा तरीका हो सकता है।
कुछ आहार सामग्रियां डायरिया की समस्या को और बढ़ा सकती हैं। इनमें मसालेदार या चिकनाई युक्त आहार सामग्री, दूध और दूध से बनी चीज़ें, कच्चे फल और सब्जियां, सूखी मेवा, कुछ फल के रस, अधिक वसा और शर्करा युक्त आहार सामग्री और कैफ़ीन शामिल हैं।
यदि GVHD के कारण दस्त हुआ है, तो आपके बच्चे को विशेष आहार की ज़रूरत हो सकती है। इसके बारे में अपने बच्चे की देखभाल टीम से बात करें।