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कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर

अन्य नाम: एटिपिकल कोरॉइड प्लेक्सस पैपिलोमा, कोरॉइड प्लेक्सस कार्सिनोमा, कोरॉइड प्लेक्सस पैपिलोमा

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर क्या है?

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर क्या है? कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर दिमाग के निलयों में आरंभ होते हैं। निलय दिमाग में स्थित गुहाएं होती हैं जो मस्तिष्कमेरु द्रव से भरी होती हैं।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर ऐसे दुर्लभ दिमाग ट्यूमर हैं जो दिमाग में तरल पदार्थ से भरे स्थानों में होते हैं।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर दुर्लभ प्रकार के ट्यूमर हैं जो दिमाग के निलयों (वेंट्रिकल) में आरंभ होते हैं। निलय दिमाग में रिक्त स्थान होते हैं जो तरल पदार्थ से भरे होते हैं। सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर हानिरहित (कैंसर नहीं) या हानिकारक (कैंसर) हो सकते हैं। वे नवजात शिशुओं में सबसे सामान्य हैं लेकिन वे किसी भी उम्र में हो सकते हैं। ये ट्यूमर 15 वर्ष से छोटे बच्चों के दिमाग ट्यूमरों का लगभग 3% अंश हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में हर वर्ष 75–80 बच्चों और 21 वर्ष से छोटे युवा वयस्कों में कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर की पहचान होती है।  

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर का सब से सामान्य उपचार सर्जरी है। कुछ बच्चों को सर्जरी के बाद बच जाने वाली कैंसर कोशिकाओं से छुटकारा पाने के लिए कीमोथैरेपी, विकीरण चिकित्सा, या दोनों की भी ज़रूरत पड़ सकती है। 

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर के लक्षण और संकेत

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर के लक्षण बच्चे की आयु और ट्यूमर स्थान के आधार पर अलग-अलग होते हैं।

जब ट्यूमर बढ़ता है, तो वह दिमाग के तरल पदार्थ, जिसे सेरिब्रोस्पाइनल फ़्लुइड कहते हैं, का प्रवाह अवरुद्ध कर सकता है। इसे हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी आ जाना) कहा जाता है। जब तरल पदार्थ इकट्ठा होता है, तो वह दिमाग पर दबाव डालता है (इंट्राक्रेनियल प्रेशर)। ट्यूमर के कई लक्षण इसी दबाव के कारण होते हैं।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर के संकेत और लक्षण में शामिल हो सकते हैं:  

  • सिरदर्द
    • अक्सर सुबह बुरी स्थिति
    • उल्टी के बाद सुधार हो सकता है
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • असामान्य उनींदापन  
  • संतुलन या चलने में समस्याएँ 
  • दृष्टि-संबंधी परिवर्तन
  • दौरे पड़ना
  • व्यवहार में परिवर्तन या चिड़चिड़ापन
  • नवजात शिशुओं में सिर के आकार में वृद्धि (हाइड्रोसैफलस के कारण) या फ़ॉन्टनैल (खोपड़ी के ऊपर स्थित “नर्म स्थान”) में भरापन

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर के जोखिम कारक

ली-फ़्रॉमिनी सिंड्रोम (LFS) से ग्रस्त बच्चों में एक प्रकार के कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर जिसे कोरॉइड प्लेक्सस कार्सिनोमा कहते हैं, का जोखिम अधिक होता है। LFS अक्सर वंशानुगत होता है, यानी यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है। लेकिन कुछ बच्चों में पारिवारिक इतिहास के बिना ही LFS विकसित हो जाता है।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर रोग की पहचान करना

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर की पहचान के कुछ परीक्षण इस प्रकार हैं:

  • एक शारीरिक परीक्षा और स्वास्थ्य इतिहास 
  • बायोप्सी में, सर्जरी के दौरान ट्यूमर का एक छोटा सा नमूना निकालना शामिल होता है। एक रोगविज्ञानी माइक्रोस्कोप की सहायता से ऊतक का नमूना देखती है। 
  • आण्विक परीक्षण नमूने का। स्वास्थ्य देखभाल टीमें ट्यूमर की जीन में बदलावों की तलाश के लिए आनुवंशिक परीक्षणों का उपयोग करती हैं। इन परीक्षणों से चिकित्सकों को पहचान की पुष्टि करने, उपचार की योजना बनाने और भावी पथ का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलती है। अचूक पहचान के लिए आण्विक परीक्षण आवश्यक है। 
  • न्यूरोलॉजिकल परीक्षण में दिमाग, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं के कार्यों का निरीक्षण किया जाता है। इनमें शामिल हैं स्मृति, दृष्टि, श्रवण, मांसपेशियों की शक्ति, संतुलन, तालमेल और प्रतिवर्ती क्रियाएं। 
  • दिमाग की विस्तृत तस्वीरें पाने के लिए इमेजिंग परीक्षण, जैसे चुंबकीय प्रतिध्वनि इमेजिंग (MRI) और कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी (CT)। 
  • रीढ़ की हड्डी के पानी में कैंसर कोशिकाओं का पता लगाने के लिए लंबर पंक्चर की प्रक्रिया की जा सकती है।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों के प्रकार

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों के प्रकारों में ये शामिल हैं:

  • कोरॉइड प्लेक्सस पेपिलोमा (CPP)सबसे सामान्य है। लगभग 80% (10 में से 8) कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर CPP होते हैं। ये कैंसर-रहित होते हैं और धीमी गति से बढ़ते हैं। वे बहुत कम फैलते हैं।
  • एटिपिकल कोरॉइड प्लेक्सस पैपिलोमा (aCPP), इसे पूरी तरह कैंसरग्रस्त नहीं माना जाता है, लेकिन यह CPP से अधिक तेज़ी से बढ़ता है और उससे अधिक आक्रामक ढंग से व्यवहार करता है।
  • कोरॉइड प्लेक्सस कार्सिनोमा (CPC)कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर का एक कैंसरकारी रूप है। यह तेजी से बढ़ता है। इसके सेरिब्रोस्पाइनल द्रव के माध्यम से अन्य ऊतकों तक फैलने की संभावना अधिक होती है। लगभग 10–20% कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर CPC होते हैं। अधिकांश कोरॉइड प्लेक्सस कार्सिनोमा शिशुओं और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होते हैं।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर का श्रेणीकरण और उसके स्तर का पता लगाना

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर कैंसर-रहित या कैंसर-युक्त हो सकते हैं। ट्यूमर को माइक्रोस्कोप में उनके दिखने के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। ट्यूमर का ग्रेड इस बात पर आधारित होता है कि माइक्रोस्कोप के नीचे कैंसर कोशिकाएँ कितनी असामान्य दिखती हैं। कोशिकाएं जितनी अधिक असामान्य दिखती हैं, उनकी श्रेणी उतनी ही उच्च होती है। अधिक ऊँचे ग्रेड के ट्यूमरों की तेज़ी से बढ़ने की अधिक संभावना होती है और उन्हें अधिक आक्रामक उपचार की ज़रूरत हो सकती है। 

  • कोरॉइड प्लेक्सस पैपिलोमा ट्यूमर ग्रेड 1 होते हैं। 
  • एटिपिकल कोरॉइड प्लेक्सस पैपिलोमा ट्यूमर ग्रेड 2 होते हैं। 
  • कोरॉइड प्लेक्सस कार्सिनोमा ग्रेड 3 होता है।

स्टेज (अवस्था) यह दिखाती है कि कैंसर कितना फैल चुका है। स्टेजिंग (अवस्था-निर्धारण) में ट्यूमर के प्रसार की जाँच के लिए दिमाग और रीढ़ के इमेजिंग परीक्षण, जैसे MRI स्कैन, और सेरिब्रोस्पाइनल तरल में कैंसर कोशिकाओं की तलाश के लिए लंबर पंक्चर शामिल होते हैं। 

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों का उपचार

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर का प्रमुख उपचार सर्जरी है। कुछ मामलों में, उपचार में कीमोथैरेपी, विकीरण चिकित्सा, या दोनों शामिल हो सकते हैं। 

उपचार इन पर निर्भर करता है:

  • ट्यूमर का प्रकार
  • ट्यूमर का आकार और स्थान  
  • बच्चे की उम्र

कोरॉइड प्लेक्सस पैपिलोमा से पीड़ित बच्चों में यदि ट्यूमर को सर्जरी से निकाल दिया जाता है तो हो सकता है कि उन्हें और अधिक उपचार की आवश्यकता नहीं हो।

कोरॉइड प्लेक्सस कार्सिनोमा से पीड़ित बच्चों में अक्सर सर्जरी के साथ कीमोथेरेपी और रेडिएशन की आवश्यकता पड़ती है।

शंट एक छोटी-सी नली होती है जो दिमाग में द्रव को जमा होने से रोकने के लिए सेरिब्रोस्पाइनल द्रव को बाहर निकालती है। इस द्रव से दिमाग के अंदर दबाव बढ़ जाता है जिससे कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर के अन्य लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर से ग्रस्त बच्चों को दिमाग में तरल पदार्थ इकट्ठा होने से रोकने के लिए शंट की ज़रूरत हो सकती है।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों लिए सर्जरी

सर्जरी का उपयोग कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर रोग की पहचान करने और उपचार दोनों के लिए ही किया जाता है। सर्जरी का लक्ष्य ट्यूमर को जितना संभव हो उतना अधिक निकालना होता है। दुर्लभ स्थितियों में, ट्यूमर के स्थान की वजह से हो सकता है कि सर्जरी करना संभव न हो।

कुछ स्थितियों में, दिमाग में तरल को बनने हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी आ जाना) से रोकने के लिए एक शंट लगाया जाता है। यह तरल पदार्थ इंट्राक्रेनियल प्रेशर (खोपड़ी के भीतर का दबाव) बढ़ाता है और ट्यूमर के कई लक्षण इसी बढ़े हुए दबाव के कारण होते हैं।

शंट एक छोटी-सी ट्यूब होती है जो दिमाग से अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालकर लक्षण घटाती है। यह अस्थायी या स्थायी हो सकते हैं।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों लिए कीमोथेरेपी

सर्जरी के बाद बच जाने वाली कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए सर्जरी के साथ-साथ अक्सर कीमोथैरेपी का उपयोग किया जाता है। कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों के उपचार के लिए उपयोग होने वाली कीमोथैरेपी दवाओं में आइफ़ॉस्फ़ामाइड, कार्बोप्लैटिन, इटोपोसाइड, विनक्रिस्टीन, और साइक्लोफॉस्फमाइड शामिल हो सकती हैं।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों लिए विकीरण चिकित्सा

कई बार अन्य उपचारों के साथ ही विकीरण चिकित्सा का उपयोग किया जाता है। उपयोग की जाने वाली विकीरण चिकित्सा का प्रकार ट्यूमर के स्थान पर और इसके फैलने पर निर्भर करता है। रेडिएशन के उपयोग में बच्चे की उम्र भी एक विचार करने योग्य महत्वपूर्ण मुद्दा है।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों लिए क्लिनिकल परीक्षण

जिन बच्चों में कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर रोग वापस हुआ है और जिन्होंने कीमोथेरेपी और रेडिएशन के प्रति पूरी तरह से प्रतिक्रिया नहीं दी है, उन्हें हो सकता है कि क्लिनिकल परीक्षण में उपचार दिया जाए। कोरॉइड प्लेक्सस कार्सिनोमा के लिए अभी तक कोई विशिष्ट दवा नहीं है। लेकिन संभव है कि रोगी इम्यूनोथैरेपी या शुरुआती चरण के क्लिनिकल परीक्षणों में शामिल हो सकें। 

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों लिए सहायक थैरेपी

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर से पीड़ित रोगियों के लिए सहायक देखभाल में पुनर्वास थेरेपी और न्यूरोलॉजिकल देखभाल शामिल हैं। स्टेरॉइड और दौरा रोधी दवाइयां देने की आवश्यकता पड़ सकती है।

अधिक सहायता सीखने की समस्याओं, विकासात्मक मील के पत्थर, और कैंसर के साथ तालमेल बिठाने से संबंधित मुद्दों का समाधान कर सकती है

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर के लिए पूर्वानुमान

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों की दीर्घकालिक संभावनाएँ, यानी ठीक होने की संभावना, ट्यूमर के प्रकार और उसकी स्टेज (अवस्था) पर निर्भर करती हैं:

  • कोरॉइड प्लेक्सस पैपिलोमा: सामान्य तौर पर, CPP के ठीक होने की बहुत अच्छी संभावना होती है। यदि ट्यूमर सर्जरी से पूरी तरह निकाला जा सके, तो जीवित बचने की दर लगभग 100% होती है।
  • एटिपिकल कोरॉइड प्लेक्सस पैपिलोमा: एटिपिकल CPP के ठीक होने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि कितना ट्यूमर निकाला जा सकता है और उपचारों से रोग में कितना लाभ होता है।
  • कोरॉइड प्लेक्सस कार्सिनोमा: CPC अधिक आक्रामक होता है और अधिक तेज़ी से बढ़ता और फैलता है। जीवित बचने की संभावना 50–70% होती है, जो कुछ कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कितना ट्यूमर निकाला जा सकता है और कैंसर फैल चुका है या नहीं।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों से ग्रस्त रोगियों हेतु बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए जल्द पहचान और उपचार बहुत महत्वपूर्ण हैं। रोग के पूर्वानुमान को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बच्चे की आयु। 4 वर्ष से कम आयु के बच्चों में रोग का पूर्वानुमान तुलनात्मक रूप से खराब होता है।
  • क्या कैंसर दिमाग और रीढ़ की हड्डी के अन्य भागों में फैलता है।
  • सर्जरी के बाद कितना ट्यूमर रहता है। पूरी तरह से हटाने से बचने की संभावना में सुधार होता है।
  • यदि कुछ वंशानुगत सिंड्रोम हैं जैसे ली-फ़्रॉमेनी सिंड्रोम
  • ट्यूमर के उपचार के लिए रेडिएशन का उपयोग, बशर्ते बच्चे की उम्र इसकी अनुमति दे। 
  • ट्यूमर में TP53 उत्परिवर्तनों की उपस्थिति
    • ट्यूमर में TP53 जीन उत्परिवर्तनों की उपस्थिति से जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है।
    • उत्परिवर्तित (बदली हुई) TP53 जीन की 2 कॉपी वाले बच्चों में ठीक होने की संभावना कम होती है, इसलिए जल्द निगरानी और आक्रामक उपचार विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर से ग्रस्त रोगियों के लिए सहायता

कोरोइड प्लेक्सस ट्यूमर से लंबे समय तक जीवित रहने वाले व्यक्तियों को उपचार के देरी से पड़ने वाले प्रभावों के लिए निरंतर और लंबे समय तक निगरानी की आवश्यकता होती है।

यदि आपके बच्चे में TP53 जीन उत्परिवर्तन या ली-फ़्रॉमिनी सिंड्रोम है, तो अपनी देखभाल टीम से आनुवंशिक परामर्श के बारे में पूछें। बच्चों पर इस रोग के साथ हो सकने वाले अन्य कैंसरों के विकास के लिए भी नज़र रखने की ज़रूरत हो सकती है।

अपनी देखभाल टीम से पूछे जाने वाले प्रश्न

  • मेरे बच्चे को किस प्रकार का कोरोइड प्लेक्सस ट्यूमर है?
  • क्या ट्यूमर अपने मूल स्थान से फैल चुका है?
  • क्या सर्जरी एक विकल्प है? यदि हाँ, तो कितना ट्यूमर निकाले जा सकने की संभावना है?
  • क्या मेरे बच्चे को कीमोथैरेपी या विकीरण चिकित्सा की ज़रूरत होगी? 
  • क्या मेरे बच्चे के लिए क्लिनिकल परीक्षण उपलब्ध हैं?
  • क्या मेरे बच्चे को हाइड्रोसैफलस के उपचार के लिए शंट की ज़रूरत होगी?
  • क्या हमें हमारे परिवार के लिए आनुवंशिक परामर्श पर विचार करना चाहिए?
  • मेरे बच्चे के ट्यूमर के प्रकार और उपचार योजना के आधार पर उसका रोग-निदान क्या है?
  • किस अनुवर्तन देखभाल या दिर्घकालीन निगरानी की ज़रूरत होगी?

कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों के बारे में मुख्य बिंदु

  • कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर दिमाग में तरल पदार्थ से भरे स्थानों (वेंट्रिकल या निलय) में बनते हैं और वे नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में सबसे सामान्य हैं।
  • कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर के 3 प्रकार हैं: कोरॉइड प्लेक्सस पैपिलोमा, एटिपिकल कोरॉइड प्लेक्सस पैपिलोमा और कोरॉइड प्लेक्सस कार्सिनोमा
  • ली-फ़्रॉमिनी सिंड्रोम या TP53 उत्परिवर्तनों से ग्रस्त बच्चों में कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों का अधिक जोखिम होता है और उन्हें विशेष निगरानी की ज़रूरत होती है।
  • इसके लक्षण दिमाग में दबाव के कारण होते हैं, यह दबाव अक्सर सेरिब्रोस्पाइनल तरल के अवरुद्ध होने (हाइड्रोसैफलस) के कारण होता है।
  • कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमर की पहचान में शामिल हैं इमेजिंग, बायोप्सी, और आनुवंशिक परीक्षण, जिसमें TP53 जीन उत्परिवर्तनों के लिए जाँच शामिल है।
  • कोरॉइड प्लेक्सस ट्यूमरों का प्रमुख उपचार सर्जरी है। कुछ बच्चों को कीमोथैरेपी या रेडिएशन की भी ज़रूरत पड़ सकती है।
  • अनुमानित भावी पथ निर्भर करता है ट्यूमर के प्रकार पर, बच्चे की उम्र पर और इस बात पर कि क्या ट्यूमर फैला है या उसे पूरी तरह निकाला जा सकता है या नहीं।

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समीक्षित: अगस्त 2025

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