रोगी की चिकित्सा टीम विशेष रूप से उसी के मामले हेतु उपचार योजना बनाने के लिए लैबोरटरी परीक्षण से प्राप्त विशिष्ट और विस्तृत जानकारी का उपयोग करती है।
रक्त कैंसरों, जैसे लूकीमिया , की पहचान रक्त और बोन मैरो की जाँच द्वारा होती है। अन्य प्रकार के कैंसरों की पहचान आम तौर पर बायोप्सी के दौरान संदिग्ध ट्यूमर से निकाले गए ऊतक की जाँच द्वारा होती है। परीक्षण के लिए निकाले गए ऊतक के नमूने को स्पेसिमेन कहते हैं।
पैथॉलजिस्ट अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि स्पेसिमेन की जाँच वे पैथॉलजिस्ट करें जो कैंसर के उसी विशिष्ट प्रकार, जिसका वे मूल्यांकन कर रहे हैं, में विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्राप्त हों।
ये परीक्षण किसी पैथॉलजी लैब में एक पैथॉलजिस्ट के नेतृत्व में होते हैं; पैथॉलजिस्ट एक चिकित्सक होता है जो कोशिकाओं, ऊतकों और शारीरिक तरल पदार्थों का अध्ययन करके रोगों की पहचान करने में विशेषज्ञता रखता है। अन्य मेडिकल चिकित्सकों की तरह, पैथॉलजिस्ट भी अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं।
यह महत्वपूर्ण है कि स्पेसिमेन की जाँच वे पैथॉलजिस्ट करें जो कैंसर के उसी विशिष्ट प्रकार, जिसका वे मूल्यांकन कर रहे हैं, में विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्राप्त हों।
रक्त के संदिग्ध कैंसर के मामलों में, रोगी से रक्त या बोन मैरो का नमूना (बोन मैरो एस्पिरेशन (चूषण) और/या बायोप्सी) के ज़रिए लिया जाएगा। स्टाफ़ कंटेनर पर रोगी की जानकारी का लेबल लगाता है और स्पेसिमेन को एक पैथॉलजी लैबोरटरी को भेजा जाता है।
जब किसी रोगी के दिमाग में या शरीर के अन्य भागों में संदिग्ध ट्यूमर होता है, तो सर्जरी के दौरान उसे पूर्ण या आंशिक रूप से निकाला जा सकता है। जब ट्यूमर के केवल एक अंश को निकालकर उसका मूल्यांकन किया जाता है, तो इसे सर्जिकल बायोप्सी कहते हैं। अन्य सर्जिकल कार्यविधियों में, सर्जन अधिकतम संभव ट्यूमर को निकाल देते हैं। इसे रिसेक्शन.
निकाले गए ऊतक को पतले-पतले खंडों में काटकर, उन्हें स्लाइडों पर रखकर, डाई से रंगा जाता है, उसके बाद ही वे माइक्रोस्कोप के ज़रिए जाँचे जा सकते हैं। ऊतक को पतले-पतले खंडों में काटने लायक ठोस बनाने के लिए दो विधियों का उपयोग होता है:
ऊतकों के सभी नमूनों को पर्मानेंट सेक्शन के रूप में तैयार किया जाता है, लेकिन कभी-कभी फ़्रोज़न सेक्शन भी तैयार किए जाते हैं।
सर्जिकल बायोप्सियों में, स्टाफ़ फ़्रोज़न सेक्शन इसलिए तैयार कर सकता है ताकि पैथॉलजिस्ट सर्जरी के दौरान बायोप्सी स्पेसिमेन का विश्लेषण कर सके। स्पेसिमेन को तेज़ी से जमाकर तैयार कर दिया जाता है ताकि पैथॉलजिस्ट ऑपरेशन कक्ष के करीब की किसी लैबोरटरी में उसकी जाँच कर सके। इसकी क्वॉलिटी पर्मानेंट सेक्शन जितनी अच्छी तो नहीं होती है, लेकिन पैथॉलजिस्ट आम तौर पर तेज़ी से पता लगा लेते हैं कि ऊतक कैंसर वाला है या नहीं। इस जानकारी से सर्जनों को सर्जरी के संबंध में तुरंत निर्णय लेने में मदद मिलती है।
ठोस ऊतक के संदिग्ध ट्यूमरों के कुछ मामलों में, एक अन्य प्रकार की बायोप्सी - जिसे नीडल बायोप्सी कहते हैं - की जाती है। नीडल बायोप्सी में नीडल की मदद से ऊतक का नमूना निकाला जाता है। बायोप्सी करने वाली टीम का एक सदस्य स्पेसिमेन को एक स्टेराइल कंटेनर में रखता है और उसे संरक्षित करने के लिए उसमें एक विशेष द्रव डाल दिया जाता है। उस पर रोगी की जानकारी का लेबल लगाकर जाँच और परीक्षण के लिए पैथॉलजी लैबोरटरी को भेजा जाता है।
पैथॉलजी स्टाफ़ नमूने को तैयार करता है और ऊतक के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए विभिन्न प्रकार के परीक्षण करता है। पैथॉलजिस्ट इस जानकारी को ऑनकॉलजिस्ट के लिए तैयार की जाने वाली रिपोर्ट में शामिल करता है। पैथॉलजिस्ट और ऑनकॉलजिस्ट साथ मिलकर काम करते हुए रोग-पहचान करते हैं।
सबसे पहले, एक पैथॉलजिस्ट स्पेसिमेन की जाँच करता है और यह वर्णन करता है कि स्पेसिमेन नंगी आँखों से कैसा दिखता है। इसे स्थूल जाँच (ग्रॉस एक्ज़ैमिनेशन) कहते हैं। इस वर्णन में स्पेसिमेन का रंग, आकार और अन्य विशेषताएँ होती हैं।
इसके बाद लैबोरटरी स्टाफ़ स्पेसिमेन को तैयार करता है ताकि पैथॉलजिस्ट उसे माइक्रोस्कोप से देख सके। स्पेसिमेन को एक मशीन में प्रोसेस किया जाता है; वह मशीन ऊतक को पैराफ़िन वैक्स के एक ब्लॉक में रख देती है। स्टाफ़ ऊतक ब्लॉक को पतली-पतली फाँकों में काटता है जिन्हें स्लाइडों पर लगाया जाता है (ऊतक सेक्शन)। स्लाइडें काँच के छोटे व चपटे टुकड़े होती हैं जिनका उपयोग वस्तुओं को माइक्रोस्कोप के ज़रिए देखने के लिए किया जाता है।
इस प्रोसेस के बाद एक तकनीशियन ऊतक सेक्शन को डाई (आम तौर पर हिमेटोज़ाइलिन और इओसिन) से रंगता है जो माइक्रोस्कोप के नीचे ऊतक की विभिन्न विशेषताओं को अधिक स्पष्टता से दिखाने में मदद करती है। हर कोशिका का केंद्रक नीला दिखेगा। कोशिका का बाकी भाग (कोशिकाद्रव्य) गुलाबी दिखेगा।
नमूना हिस्टॉलजी स्लाइड माइक्रोस्कोप के नीचे ऊतक की विभिन्न विशेषताओं को स्पष्टता के साथ दिखाने के लिए हिमेटोज़ाइलिन और इओसिन से रंगा हुआ ऊतक दिखाती है।
पैथॉ़लजिस्ट ऊतक को माइक्रोस्कोप से देखकर पता लगाता है कि वह सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैसा है। स्पेसिमेन को इस प्रकार से देखने को ऊतकविज्ञान (हिस्टोलॉजी) कहते हैं। हिस्टॉलजी का अर्थ कोशिकाओं और ऊतकों की संरचनाओं के अध्ययन से है।
पैथॉलजिस्ट माइक्रोस्कोप में जो देखता है उसके आधार पर और ऊतक पर किए गए अन्य परीक्षणों के परिणामों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करता है। इसे तकनीकी, चिकित्सीय भाषा में लिखा जाता है जिसे समझना कठिन हो सकता है। यदि आपके कोई प्रश्न हैं, तो अपनी देखभाल टीम से पूछें।
आम तौर पर, पैथॉलजिस्ट स्पेसिमेन की इन विशेषताओं का वर्णन करता है:
माइक्रोस्कोप से मूल्यांकन के साथ-साथ, स्पेसिमेन कई अन्य परीक्षणों और विश्लेषण से भी गुज़र सकता है। उन परिणामों को भी पैथॉलजी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
कभी-कभी सारे परीक्षण और विश्लेषण उस चिकित्सा केंद्र में होते हैं जहाँ बायोप्सी हुई थी। अन्य मामलों में, स्पेसिमेन को अन्यत्र स्थित लैबोरटरी भेजना पड़ता है। कुछ परीक्षणों के लिए चरणों और कार्यविधियों की एक शृंखला की ज़रूरत पड़ती है और परिणाम मिलने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं।
पैथॉलजिस्ट इन परीक्षणों से प्राप्त जानकारी को पैथॉलजी रिपोर्ट में शामिल करेगा। उसे ऑन्कॉलजिस्ट (कैंसरविज्ञानी) से साझा किया जाता है। ऑन्कॉलजिस्ट किसी क्लिनिक मुलाकात में पैथॉलजी रिपोर्ट के परिणाम साझा करेगा।
कैंसर के बारे में चिकित्सकों के पास जितनी अधिक जानकारी होगी, वे कैंसर के उस विशिष्ट मामले के लिए सबसे अधिक प्रभावी थैरेपी उतने ही अधिक बेहतर ढंग से विकसित कर पाएँगे।
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समीक्षित: जुलाई 2018
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बायोप्सी, जाँच के लिए शरीर से ऊतक या कोशिकाएँ निकालने की कार्यविधि है। जानें कि कैंसर और अन्य रोगों की पहचान के लिए बायोप्सी का उपयोग कैसे किया जाता है।