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हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस

स्फेरोसाइटोसिस का चित्रण

हेरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस रक्त का एक ऐसा विकार है जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं गोल आकार की हो जाती हैं और सामान्य से अधिक तेज़ी से टूटने लगती हैं।

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस क्या होता है?

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस (HS) एक विकार है जो लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। लाल रक्त कोशिकाएं पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाती हैं स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की आकृति चकतियों जैसी होती है और उनके केंद्र चपटे होते हैं। वे लचीली होती हैं और रक्त वाहिकाओं से होकर आसानी से गुज़र जाती हैं।

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस से ग्रस्त लोगों में लाल रक्त कोशिकाएँ किसी गेंद की तरह गोल होती हैं। इन लाल कोशिकाओं को स्फेरोसाइट कहते हैं। स्फेरोसाइट स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की तुलना में कम समय जीती हैं क्योंकि वे स्प्लीन (प्लीहा/तिल्ली) में अधिक आसानी से छिन्न-भिन्न हो जाती हैं। इस कारण लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या घट सकती है (एनीमिया)।

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस के लक्षण

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस से अलग-अलग लोगों में अलग-अलग समस्याएँ हो सकती हैं। इसके संकेत और लक्षण इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं या जटिलताओं पर निर्भर करते हैं।

हीमोलिटिक एनीमिया

हीमोलिटिक एनीमिया एक स्थिति है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं के छिन्न-भिन्न होने की गति, नई कोशिकाएँ बनने की गति से अधिक होती है। हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस में, स्फेरोसाइट सामान्य से अधिक तेज़ी से छिन्न-भिन्न होती हैं, जिसके फलस्वरूप एनीमिया होता है। 

हेमोलिटिक एनीमिया के संकेत और लक्षणों में शामिल हैं:

  • थका हुआ या कमज़ोर महसूस करना
  • त्वचा, मसूढ़े या नाखूनों के आधार पीले/फीके पड़ना
  • सिरदर्द
  • चक्कर आना या सिर घूमना
  • हाथ या पैर ठंडे रहना
  • तेज़ या अनियमित हृदय गति
  • साँस की तकलीफ होना  
  • आँखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
  • पित्ताशय की पथरी
  • के आकार में वृद्धि तिल्ली

पीलिया

यदि आपके बच्चे को पीलिया है, तो उसकी त्वचा और आँखें पीली दिख सकती हैं और उसके मूत्र (पेशाब) का रंग गहरा हो सकता है।

शरीर बिलिरूबिन बनाता है, यह एक पीला पदार्थ है जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के नष्ट या छिन्न-भिन्न होने पर बनता है। हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस में, शरीर लाल रक्त कोशिकाओं को सामान्य से अधिक तेज़ी से नष्ट करता है। इससे अतिरिक्त बिलिरूबिन बन सकता है, जिसके कारण त्वचा और आँखें पीली पड़ सकती हैं। बिलिरूबिन गॉलब्लैडर (पित्ताशय की थैली) के भीतर छोटी-छोटी पथरियाँ (पित्त की पथरियाँ) भी बना सकता है।

बढ़ी हुई तिल्ली

स्प्लीन (तिल्ली) एक अंग है जो पसली-पिंजर के नीचे शरीर की बायीं साइड पर होता है। यह आम तौर पर लगभग एक मुट्ठी के आकार का होता है। तिल्ली कुछ प्रकार के संक्रमणों से लड़ने में मदद देता है और क्षतिग्रस्त तथा असामान्य कोशिकाओं, जिनमें स्फेरोसाइट शामिल हैं, को हटाता है। स्फेरोसाइट गोल होने के कारण और सामान्य लाल रक्त कोशिकाओं से कम लचीली होने के कारण तिल्ली के भीतर फँस सकती हैं। फँसी हुई कोशिकाओं के कारण तिल्ली का आकार सामान्य से बढ़ सकता है।

यदि तिल्ली का आकार सामान्य से बढ़ता है, तो आपके बच्चे को उसके उदर (पेट) में दर्द हो सकता है या थोड़ा ही खाने के बाद उसे पेट भरा महसूस हो सकता है।

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस के कारण

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस आम तौर पर वंशानुगत होता है (पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है)। इसका यह अर्थ है कि यह विकार जीन के एक बदलाव (उत्परिवर्तन) के ज़रिए माता/पिता से बच्चे को मिलता है। लेकिन आपका बच्चा आपके परिवार में इस स्थिति से ग्रस्त पहला व्यक्ति भी हो सकता है। आपके बच्चे से यह जीन उसके बच्चों को मिल सकता है।

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस की पहचान

आपके बच्चे का चिकित्सक आपके बच्चे को किसी हिमेटॉलजिस्ट को रेफ़र कर सकता है जो एक ऐसा चिकित्सक होता है जो रक्त विकारों की पहचान और उपचार करता है। हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस की पहचान आपके बच्चे के चिकित्सा और पारिवारिक इतिहास, शारीरिक परीक्षा और लैब परीक्षणों के आधार पर की जाती है। 

लैब परीक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं:

  • पूर्ण रक्त गणना (CBC), एनीमिया के संकेत तलाशने के लिए। एक पूर्ण रक्त गणना जांच यह मापती है:
    • लाल रक्त कोशिकाओं, सफ़ेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट की संख्या 
    • लाल रक्त कोशिकाओं का आकार
    • हिमेटोक्रिट, जो दिखाता है कि रक्त का कितना अंश लाल रक्त कोशिकाओं से मिलकर बना है 
    • हीमोग्लोबिन, रक्त में मौजूद एक प्रोटीन जो ऑक्सीजन का वाहक है 
  • पेरिफेरल ब्लड स्मीअर, माइक्रोस्कोप के ज़रिए लाल रक्त कोशिकाओं को देखने के लिए। यदि आपके बच्चे को हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस है तो गोल स्फेरोसाइट मौजूद होंगी। 
  • रेटिकुलोसाइट काउंट, आपके बच्चे के शरीर में नवजात लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या मापने के लिए। रेटिकुलोसाइट काउंट अधिक होने का यह अर्थ है कि बोन मैरो को क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की भरपाई के लिए अधिक कोशिकाएँ बनानी पड़ रही हैं।
  • बिलिरूबिन परीक्षण, बिलिरूबिन का स्तर मापने के लिए। बिलिरूबिन एक पदार्थ है जो लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने पर बनता है और लिवर इसे संसाधित करता है।

ऐसे अन्य परीक्षण भी हैं जो दिखाते हैं कि आपके बच्चे को हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस या कोई अन्य रक्त विकार है या नहीं। आपकी देखभाल टीम उन परीक्षणों के बारे में आपसे बात करेगी।

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस का उपचार

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस से ग्रस्त कुछ लोगों में संभव है कि कोई भी लक्षण न हो या बहुत कम लक्षण हों। हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस का कोई इलाज नहीं है। इस स्थिति की देखभाल, इसके कारण होने वाली समस्याओं की रोकथाम और उपचार पर केंद्रित है। 

शारीरिक परीक्षा और रक्त परीक्षण सहित विभिन्न जाँचों के लिए अपने बच्चे के हिमेटॉलजिस्ट को नियमित रूप से दिखाना महत्वपूर्ण है। आपके बच्चे के स्प्लीन (प्लीहा/तिल्ली) और गॉलब्लैडर (पित्ताशय की थैली) को देखने के लिए अल्ट्रासाउंड इमेजिंग परीक्षणों का उपयोग किया जा सकता है। 

जिन लोगों को हल्के लक्षण हैं उन्हें उपचारों की ज़रूरत नहीं भी हो सकती है। जिन अन्य लोगों में अधिक लक्षण हैं उन्हें हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस की जटिलताओं के प्रबंधन के लिए उपचारों की ज़रूरत हो सकती है। इनमें ये शामिल हो सकते हैं:

रक्ताधान

यदि आपके बच्चे को गंभीर एनीमिया है (लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम है) तो उसे ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न (रक्ताधान/रक्त चढ़ाने) की ज़रूरत हो सकती है। ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न के दौरान आपके बच्चे को उसकी किसी शिरा के ज़रिए रक्त कोशिकाएँ या रक्त के अंश चढ़ाए जाएँगे।

स्प्लीन (प्लीहा/तिल्ली) निकालने की सर्जरी (स्प्लेनेक्टमी)

यदि आपके बच्चे को मध्यम या गंभीर एनीमिया है या यदि उसका स्प्लीन बहुत बड़ा हो गया है, तो आपकी देखभाल टीम तिल्ली निकालने की सर्जरी का सुझाव दे सकती है। इस कार्यविधि को स्प्लेनेक्टमी कहते हैं।

तिल्ली रक्त को छानता है और असामान्य लाल रक्त कोशिकाओं को शरीर से निकालता है। तिल्ली निकाल देने से लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ेगी और एनीमिया का उपचार होगा। 

यदि आपके बच्चे की तिल्ली निकाल दी जाती है, तो आपकी देखभाल टीम सर्जरी के बाद संक्रमणों की रोकथाम में मदद के लिए अतिरिक्त टीकों और एंटीबायोटिक दवाओं का सुझाव देगी। 

गॉलब्लैडर (पित्ताशय की थैली) निकालने की सर्जरी (कॉलेसिस्टेक्टमी)

यदि आपके बच्चे को दर्द या अन्य समस्याएँ होती हैं तो उसके पित्ताशय की थैली को निकालने की सर्जरी की जा सकती है। इस कार्यविधि को कॉलेसिस्टेक्टमी कहते हैं। 

पित्ताशय की थैली नाशपाती जैसी आकृति का एक अंग होता है जो लिवर के नीचे होता है। यह पाचन तंत्र का एक भाग है और शरीर में भोजन को तोड़ने का काम करता है। जिगर (यकृत) में बाइल (पित्त) नामक एक तरल बनता है जिसमें बिलिरूबिन नामक पदार्थ भी होता है। बाइल (पित्त) को आँतों में निकलने (ड्रेन होने) से पहले पित्ताशय की थैली में भंडारित किया जाता है। यदि यह बाइल कठोर हो जाए तो यह गॉलस्टोन (पित्त की पथरी) नामक कठोर टुकड़े बना सकता है। 

यदि गॉलस्टोन बाइल की निकासी को अवरुद्ध कर रहे हैं तो दर्द हो सकता है। पित्ताशय की थैली को निकालने की सर्जरी, गॉलस्टोन के उपचार का मुख्य तरीका है। 

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस का पूर्वानुमान

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस को लक्षणों के आधार पर हल्का, मध्यम या गंभीर के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। इसका पूर्वानुमान आम तौर पर अच्छा होता है, लेकिन यह स्थिति की गंभीरता पर और इस पर निर्भर करता है कि यह आपके बच्चे के शरीर को कैसे प्रभावित करता है। आपके बच्चे के विशिष्ट पूर्वानुमान के बारे में अपनी देखभाल टीम से पूछें। 

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस के साथ जीवन

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस एक आजीवन रहने वाली स्थिति है, लेकिन ऐसी कुछ चीज़ें हैं जो आप आपके बच्चे को लक्षणों का प्रबंधन करने और स्वस्थ बने रहने में मदद देने के लिए कर सकते हैं।

स्वस्थ आहार लें और तरल पदार्थ भरपूर मात्रा में पिएँ 

शरीर ठीक से काम करे इसके लिए अच्छा पोषण महत्वपूर्ण है। आपके बच्चे को फलों, सब्ज़ियों, साबुत अनाजों और प्रोटीन की अनुशंसित मात्रा का सेवन करना चाहिए। इन खाद्य पदार्थों में आयरन और वे पोषक तत्व होते हैं जिनकी आपके बच्चे को ज़रूरत है। आपकी देखभाल टीम कोई फ़ोलिक एसिड सप्लिमेंट सुझा सकती है। 

सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा पानी की कमी की रोकथाम में मदद के लिए पानी या अन्य तरल पदार्थ पिए। 

यदि आपके पास इस बारे में प्रश्न हों कि आपके बच्चे को क्या-क्या चीज़ें खानी-पीनी चाहिए या उसे तरल पदार्थों की कितनी मात्रा पीनी चाहिए, तो अपनी देखभाल टीम से पूछें।

संक्रमण से बचाव

कुछ आसान उपाय आपके बच्चे का संक्रमण का जोखिम घटा सकते हैं:

  • अक्सर हाथ धोएं।
  • बीमार लोगों के संपर्क में न आएं।
  • आपकी देखभाल टीम जो-जो टीके सुझाए वे सारे टीके लगवाएँ।

यदि आपके बच्चे का स्प्लीन (प्लीहा/तिल्ली) निकाल दिया गया है, तो उसमें संक्रमण होने का जोखिम अधिक है। जब भी कभी आपके बच्चे का तापमान 101°F (38.3°C) या अधिक हो तो तुरंत अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता को कॉल करें।

एप्लास्टिक क्राइसिस के संकेतों को जानें

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस आपके बच्चे में एप्लास्टिक क्राइसिस (एप्लास्टिक संकट) का जोखिम बढ़ा सकता है। एप्लास्टिक क्राइसिस में बोन मैरो लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण अचानक रोक देती है। जब शरीर नई लाल रक्त कोशिकाएँ नहीं बना पाता है, तो वह छिन्न-भिन्न होने वाली कोशिकाओं की भरपाई नहीं कर पाता है। लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बहुत नीचे गिर सकती है। इस कारण गंभीर एनीमिया हो सकता है। 

पार्वोवायरस नामक एक आम संक्रमण एप्लास्टिक क्राइसिस का मुख्य कारण है। यह वायरस आपके बच्चे के शरीर को नई लाल रक्त कोशिकाएँ बनाने से 7-10 दिनों तक रोक सकता है। एप्लास्टिक क्राइसिस के दौरान आपका बच्चा पीला दिख सकता है और सामान्य से अधिक कमज़ोर या अधिक थका हुआ हो सकता है। उसे बुखार हो सकता है, उसकी हृदयगति तेज़ हो सकती है या उसकी साँस फूल सकती है। 

यदि आपके बच्चे में एप्लास्टिक क्राइसिस के लक्षण हैं तो तुरंत चिकित्सा देखभाल प्राप्त करें। एप्लास्टिक क्राइसिस के उपचार में, उपचारों के लिए अस्पताल में रुकने की और अनुवर्तन परीक्षणों की ज़रूरत हो सकती है। आपके बच्चे को ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न (रक्ताधान/रक्त चढ़ाने) की या अन्य चिकित्सा देखभाल की ज़रूरत पड़ सकती है। यदि एप्लास्टिक क्राइसिस का तुरंत उपचार न हो तो यह प्राणघातक हो सकता है।

अपनी देखभाल करने वाली टीम से संपर्क कब करें

यदि आपके बच्चे में इनमें से कोई भी लक्षण हो तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता को कॉल करें:

  • त्वचा पीली पड़ना
  • पीली त्वचा या आंखें
  • बारंबार पेट में दर्द 
  • सामान्य से अधिक थकान महसूस होना
  • साँस की तकलीफ होना
  • ज्वर 

देखभाल टीम से पूछे जाने वाले प्रश्न

  • मेरे बच्चे को किस उपचार की ज़रूरत है?
  • मेरे बच्चे को किन फॉलो-अप अपॉइंटमेंट और चिकित्सा देखभाल की ज़रूरत होगी?
  • मुझे किन संकेतों या लक्षणों पर नज़र रखनी चाहिए?
  • हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस मेरे बच्चे के दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित करेगा?
  • मैं अपने बच्चे को स्वस्थ बने रहने में मदद कैसे दूँ?
  • मेरे बच्चे की दीर्घकालिक संभावनाएँ क्या हैं?
  • क्या परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस स्थिति के परीक्षण की ज़रूरत है?

हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस के बारे में मुख्य बिंदु।

  • हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस एक आनुवंशिक विकार है जो लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है, जिस कारण वे (गेंद जैसी) गोल हो जाती हैं। 
  • ये असामान्य लाल रक्त कोशिकाएँ स्प्लीन (प्लीहा/तिल्ली) में सामान्य लाल रक्त कोशिकाओं की तुलना में अधिक तेज़ी से छिन्न-भिन्न हो जाती हैं।
  • हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस से स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं, जैसे स्प्लीन का आकार बढ़ना, गॉलस्टोन (पित्त की पथरियाँ), पीलिया, हीमोलिटिक एनीमिया और एप्लास्टिक क्राइसिस।
  • हिरेडिटरी स्फेरोसाइटोसिस एक आजीवन रहने वाला विकार है और इसके उपचार में इसके कारण होने वाली समस्याओं का प्रबंधन किया जाता है। 


समीक्षित: अक्टूबर 2024

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