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दबाव-जन्य चोटें (प्रेशर सोर)

इसे बेडसोर या प्रेशर अल्सर भी कहते हैं।

दबाव-जन्य चोटें क्या होती हैं?

दबाव-जन्य चोटें त्वचा या ऊतक के क्षतिग्रस्त भाग होती हैं। ये तब होती हैं जब कोई चीज़ त्वचा पर बहुत देर तक दबाव डालती है, जिससे उस जगह पर रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे त्वचा टूट सकती है और घाव बन सकते हैं। 

बच्चों को दबाव-जन्य चोटें तब लग सकती है यदि वे लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहते हैं या जब ब्रेसेज़ या कास्ट जैसे चिकित्सा उपकरण उनकी त्वचा पर दबाव डालते हैं। 

दबाव-जन्य चोटों के लक्षण 

दबाव-जन्य चोटें त्वचा में छोटे बदलावों से शुरू होती है। वे आपके बच्चे की त्वचा की रंगत के आधार पर अलग दिख सकती हैं।

शुरुआती संकेत और लक्षण

शुरुआत में, दबाव-जन्य चोटें त्वचा पर लाल, रंगहीन या काले धब्बों जैसी दिख सकती हैं। वह जगह गर्म, सख्त, छूने पर दर्दनाक या सूजी हुई महसूस हो सकती है।

जिन बच्चों की त्वचा की रंगत हल्की होती है, उनमें उस जगह पर दबाने से वह जगह पीली या सफ़ेद हो सकती है। उसे जल्दी ही अपने सामान्य रंग में वापस आ जाना चाहिए। यदि रंग वापस नहीं आता है, तो यह नुकसान का संकेत हो सकता है।

जिन बच्चों की त्वचा की रंगत गहरी होती है, उनमें संभव है कि लालिमा दिखाई न दे। उसकी बजाए, वह स्थान थोड़ा गहरा, बैंगनी या नीला दिख सकता है। 

बाद में होने वाले संकेत और लक्षण 

जैसे-जैसे घाव बढ़ते हैं, त्वचा फट सकती है, जिससे छाले या खुले घाव बन सकते हैं। ये घाव दर्दनाक हो सकते हैं और इनसे तरल रिस सकता है।

गंभीर मामलों में, दबाव-जन्य चोटें गहरी हो सकती है, जिससे त्वचा, मांसपेशियों और हड्डी की परतों को भी नुकसान पहुँच सकता है। कभी-कभी घाव मृत ऊतक या पीले रंग के पदार्थ से ढका होता है। इससे यह देखना मुश्किल हो जाता है कि चोट कितनी गहरी है।

गहरी ऊतक चोटें 

कुछ दबाव-जन्य चोटों में त्वचा नहीं टूटती है। लेकिन वे बैंगनी या गहरे चोट के निशान जैसी दिखती हैं। इसका अर्थ यह हो सकता है कि गहराई में ऊतक क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन चोटों का तुरंत उपचार ज़रूरी है। 

दबाव से होने वाली चोटों के कारण

दबाव-जन्य चोटें तब होती हैं जब त्वचा और ऊतक दबाव, खिंचाव, खींचने या रगड़ से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे रक्त प्रवाह कम हो जाता है।

कुछ सामान्य कारण इस प्रकार हैं:

  • बहुत लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना, जैसे बिस्तर पर लेटे रहना या कुर्सी या व्हीलचेयर पर बैठना  
  • त्वचा पर दबाव डालने वाले चिकित्सा उपकरण, जैसे:
  • किसी सतह से रगड़ना या बिस्तर या कुर्सी से नीचे फिसलना 

दबाव-जन्य चोटों के जोखिम कारक 

रोगियों को दबाव-जन्य चोटें होने की संभावना अधिक होती है यदि:

  • उन्हें कोई चिकित्सा उपकरण लगा है
  • वे आसानी से हिल नहीं सकते या पोज़िशन नहीं बदल सकते
  • उनकी त्वचा नाज़ुक या रूखी है
  • वे दर्द महसूस नहीं कर सकते
  • उनकी त्वचा नम है
  • उनका पोषण खराब है
  • उनके शरीर का वजन बहुत कम हो
  • वे कुछ दवाएँ लेते हैं 
  • उन्हें कोई ऐसी चिकित्सीय स्थिति हैं जो प्रतिरक्षा तंत्र, तंत्रिकाओं, या रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती हैं
Different stages of pressure injuries

Pressure injuries may worsen over time and move through different stages.

दबाव-जन्य चोटों की पहचान

स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता शारीरिक जाँच के दौरान दबाव-जन्य चोटों का पता लगाते हैं। वह:

  • दबाव-जन्य चोटों के संकेत तलाशेंगे
  • उस जगह को छूकर देखेंगे कि वह गर्म है, ठंडी है, सख्त है या नर्म है
  • पूछेंगे कि क्या उस जगह पर दर्द या तकलीफ़ है

दबाव-जन्य चोटों की स्टेज (अवस्थाएँ)

यदि कोई दवाब-जन्य चोट पाई जाती है, तो स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता उसे 4 में से 1 स्टेज में रखेगा। ये स्टेज इस बात पर आधारित हैं कि दबाव-जन्य चोट कितनी गंभीर है। स्टेज 1 सबसे कम गंभीर है। स्टेज 4 सबसे अधिक गंभीर है।

  • स्तर 1: लाल या रंगहीन त्वचा जो टूटी नहीं है। वह जगह गर्म, सूजी हुई या नर्म महसूस हो सकती है।
  • स्तर 2: त्वचा फटकर खुल गई है। यह घाव छाले या घाव जैसा दिख सकता है।
  • स्तर 3: घाव गहरा है और त्वचा के नीचे ऊतकों की परतों पर असर डालता है। घाव के नीचे पीले रंग का ऊतक (स्लॉ) है।
  • स्तर 4: घाव गहरा है और मांसपेशियों, हड्डियों या कंडरा तक पहुँच सकता है।

दबाव-जन्य चोटों का उपचार

दबाव-जन्य चोटों का उपचार घाव की तीव्रता पर निर्भर करता है। इसका मुख्य लक्ष्य प्रभावित जगह से दबाव हटाना है। प्रभावित जगह को साफ़ रखने और त्वचा को ठीक करने में मदद के लिए हमेशा अपनी देखभाल टीम के निर्देशों का पालन करें। 

दबाव-जन्य चोटों के उपचार में मदद करने के तरीके ये हैं:

दबाव से राहत दिलाएँ

  • चिकित्सा उपकरण को चेक करके सुनिश्चित करें कि वह त्वचा को नुकसान न पहुँचा रहा हो। जब भी संभव हो तब उपकरण की जगह बदलें या त्वचा को बचाने के लिए पैड का उपयोग करें।
  • अपने बच्चे की पोज़िशन बार-बार बदलें ताकि वह अधिक देर तक एक ही पोज़िशन में न रहे।
  • घाव पर दबाव कम करने के लिए कुशन, फ़ोम पैड या विशेष गद्दे का उपयोग करें।

क्षतिग्रस्त ऊतक को हटाएँ

  • अधिक गहरे घावों (स्टेज 3 या स्टेज 4) के मामले में, स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता को मृत या क्षतिग्रस्त ऊतक निकालने की ज़रूरत पड़ सकती है। इस प्रक्रिया को डीब्राइडमेंट कहा जाता है।

गंभीर घावों के लिए सर्जरी

  • यदि घाव गहरा है और अन्य उपचारों से ठीक नहीं होता है, तो घाव को बंद करने या संक्रमण का उपचार करने के लिए सर्जरी की ज़रूरत हो सकती है। 

दबाव-जन्य चोटों से कैसे बचें

रोज़ाना त्वचा चेक करें

हर दिन त्वचा चेक करके दबाव-जन्य चोटों से बचा जा सकता है।

  • मोज़े, पजामा, अंडरवियर, डायपर और त्वचा को ढकने वाले अन्य कपड़े/चीज़ें उतार दें। 
  • सभी उपकरणों के नीचे चेक करें। उन जगहों को देखें जहाँ ब्रेसेज़, कास्ट, फ़ीडिंग ट्यूब या अन्य उपकरण त्वचा को छूते हैं। 
  • उन जगहों को चेक करें जहाँ हड्डी त्वचा के बहुत पास होती है। यह भी शामिल है:
    • सिर के पीछे का भाग (यह बच्चों में दबाव से होने वाली चोट लगने का सबसे सामान्य स्थान होता है)
    • कंधे
    • कोहनियां
    • कूल्हे
    • कूल्हे और टेलबोन
    • पैर (एड़ी, टखने और तलवे)

अक्सर पोज़िशन बदलें

जितना हो सके, अपने बच्चे की पोज़िशन बदलवाएँ। यदि आपके बच्चे को बिस्तर पर रहने की ज़रूरत है, तो कम-से-कम हर 2 घंटों में उसे पोज़िशन बदलने में मदद करें। व्हीलचेयर में बैठे बच्चों को हर एक घंटे में अपनी शारीरिक मुद्रा में अनुकूल बदलाव करते रहना चाहिए।

कुशन या स्पेशल गद्दे उन जगहों से दबाव हटाने में मदद दे सकते हैं जहाँ हड्डी त्वचा के बहुत पास होती है। कुछ मामलों में, देखभाल टीम शरीर के हड्डी वाले भागों पर से दबाव को हटाने के लिए सुरक्षात्मक ड्रेसिंग करने या पट्टियां लगाने का सुझाव दे सकती है।

त्वचा की देखभाल करें

  • त्वचा को साफ़ और सूखा रखें: हल्के साबुन से धीरे से धोएँ। तौलिए से थपथपाकर सुखाएँ। यदि डायपर या अंडरगारमेंट्स गीले हो जाएँ तो उन्हें तुरंत बदल दें। 
  • रूखी त्वचा को मॉइस्चराइज़ करें: अपनी देखभाल टीम द्वारा सुझाए गए मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें।
  • उत्तेजना से बचें: त्वचा को घिसने, रगड़ने, या खरोंचने से बचें। त्वचा को कटने या फटने से बचाने के लिए उसे कोमलता से स्पर्श करें। कपड़ों और चादरों को एकसार और सिलवट-रहित रखें।
  • ऐसी चीज़ों से सावधान रहें जो त्वचा को नुकसान पहुँचा सकती हैं: टाइट कपड़े या बटन या ज़िपर वाले कपड़े पहनने से बचें, वे त्वचा को दबाते हैं। सुनिश्चित करें कि व्हीलचेयर और चिकित्सा उपकरण बिल्कुल ठीक से फिट हों और वे त्वचा को न रगड़ें।

स्वस्थ खाएँ और पानी पिएँ

  • त्वचा को स्वस्थ रखने और जल्दी ठीक होने में मदद के लिए प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर चीज़ें खाएँ।
  • त्वचा को पानी की कमी से बचाने के लिए खूब पानी पिएँ।

दबाव-जन्य चोटों का फलानुमान

दबाव-जन्य चोटों का फलानुमान इस बात पर निर्भर करता है कि घाव कितना गंभीर है और उसका उपचार कितनी जल्दी किया जाता है।

  • स्टेज 1 और स्टेज 2 के घाव: ये घाव हल्के होते हैं और सामान्य तौर पर उचित देखभाल से कुछ दिनों या सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। 
  • स्टेज 3 और स्टेज 4 के घाव: ये घाव त्वचा में अधिक गहरे होते हैं। वे मांसपेशियों, कंडराओं, या हड्डियों पर असर डाल सकते हैं। यदि सही देखभाल के साथ उपचार किया जाए तो ठीक होने में कुछ सप्ताह से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है।
  • जटिलताएँ: गंभीर घावों से संक्रमण हो सकता है, जिसमें सेप्सिस या हड्डी का संक्रमण (ऑस्टियोमाइलाइटिस) शामिल है। इन्हें तुरंत चिकित्सीय मदद की ज़रूरत होती है।

सही देखभाल से अधिकतर दबाव-जन्य चोटें पूरी तरह से ठीक हो जाती हैं, और त्वचा सामान्य हो जाती है। गंभीर घाव निशान छोड़ सकते हैं या दीर्घकालिक नुकसान पहुँचा सकते हैं, खासकर यदि उन्होंने गहरे ऊतकों को प्रभावित किया हो। 

अपनी देखभाल करने वाली टीम को कॉल कब करें 

यदि आपको इनमें से कुछ भी दिखे तो अपनी देखभाल टीम से संपर्क करें:

  • त्वचा में बदलाव जैसे रंग में बदलाव, दर्द, सूजन, या गर्माहट
  • संक्रमण के संकेत, जैसे बुखार, मवाद, दुर्गंध, सूजन, कोमलता या लालिमा जो बदतर हो या फैले  
  • ऐसा घाव जो बदतर हो जाता है या घर पर देखभाल से ठीक नहीं होता

यदि आपको अपने बच्चे को सही पोज़िशन में रखने में परेशानी हो रही हो या आपको चिकित्सा उपकरणों या डिवाइस के फ़िट होने में कोई दिक्कत दिख रही हो, तो अपनी देखभाल टीम को बताएँ।

आपकी देखभाल टीम से पूछने के लिए प्रश्न

  • क्या मेरे बच्चे को दबाव-जन्य चोटों का जोखिम है?
  • मुझे मेरे बच्चे में दबाव-जन्य चोटों के कौन से शुरुआती लक्षणों पर नज़र रखनी चाहिए?
  • मैं कैसे बताऊँ कि दबाव-जन्य चोट और बिगड़ रही है?
  • मुझे शरीर के किन हिस्सों में दबाव-जन्य चोटों की जाँच करनी चाहिए?
  • कौनसी दवाएँ या क्रीम मेरे बच्चे की त्वचा को तेज़ी से ठीक होने में मदद दे सकती हैं?
  • दबाव-जन्य चोटों से बचने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

दबाव-जन्य चोटों के बारे में मुख्य बिंदु

  • दबाव-जन्य चोटें तब होती है जब लंबे समय तक दबाव, खिंचाव या घर्षण से रक्त प्रवाह कम हो जाता है और त्वचा व ऊतकों को नुकसान पहुँचता है।
  • दबाव-जन्य चोटों के दूसरे नामों में बेडसोर या प्रेशर अल्सर शामिल हैं।
  • चिकित्सा उपकरण बच्चों में दबाव-जन्य चोटों का एक सामान्य कारण हैं।
  • दबाव-जन्य चोटों के शुरुआती लक्षणों में लालिमा, कोमलता, और सूजन शामिल हैं।
  • आप अपने बच्चे की त्वचा को रोज़ चेक करके और उसकी पोज़िशन अक्सर बदलवाकर चोटों से बचा सकते हैं। चिकित्सा उपकरण और उपकरणों की फ़िटिंग चेक करें।
  • दबाव-जन्य चोटों से गंभीर संक्रमण और दूसरी दिक्कतें हो सकती हैं।
  • अधिकांश दबाव-जन्य चोटें दबाव कम करने और उचित देखभाल से ठीक हो जाती हैं, लेकिन शीघ्र पता लगाना और उपचार महत्वपूर्ण है। 
  • त्वचा में जो भी बदलाव या घाव हों उनके बारे में हमेशा अपनी देखभाल टीम को बताएँ। 


समीक्षित: अगस्त 2025

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