अन्य नाम: ग्लायोन्यूरोनल ट्यूमर, मिक्स्ड न्यूरोनल-ग्लायल ट्यूमर, एनाप्लास्टिक गैंग्लियोग्लायोमा, डेस्मोप्लास्टिक इन्फ़ैन्टाइल गैंग्लियोग्लायोमा
गैंग्लियोग्लायोमा एक दुर्लभ दिमाग ट्यूमर है जो सामान्य तौर पर टेंपोरल लोब में शुरू होता है लेकिन यह दिमाग के अन्य भागों और मेरु रज्जु में भी हो सकता है।
गैंग्लियोग्लायोमा एक दुर्लभ दिमाग ट्यूमर है जो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) और आधारी कोशिकाओं (ग्लायल कोशिकाओं) से विकसित होता है। गैंग्लियोग्लायोमा सामान्य तौर पर टेंपोरल लोब में विकसित होता है, यह दिमाग का वह भाग है जो कानों के पीछे होता है। यह क्षेत्र स्मृति, भाषा को समझने, और भावनाओं का संसाधन करने के लिए महत्वपूर्ण होता है। लेकिन गैंग्लियोग्लायोमा दिमाग के अन्य भागों और मेरु रज्जु में भी हो सकते हैं और दिमाग के विभिन्न कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं।
अधिकांश गांग्लियोग्लिओमा बच्चों और युवा वयस्कों में होते हैं। लगभग 95% गैंग्लियोग्लायोमा लो-ग्रेड ग्लायोमा होते हैं। ये ट्यूमर सामान्य तौर पर धीरे बढ़ते हैं और ये कैंसरग्रस्त नहीं होते हैं, यानी ये शरीर के अन्य भागों तक नहीं फैलते हैं। लेकिन कुछ (5–10%) गैंग्लियोग्लायोमा घातक (कैंसरग्रस्त), उच्च-श्रेणी ट्यूमर होते हैं।
इसके उपचार में ट्यूमर को जितना संभव हो उतना निकालने के लिए सामान्य तौर पर सर्जरी शामिल होती है। यदि पूरा ट्यूमर न निकाला जा सकता हो या वह फिर से बढ़ने लगे, तो चिकित्सक रेडिएशन, कीमोथैरेपी, या टारगेटेड थैरेपी इत्यादि उपचारों का उपयोग कर सकते हैं।
गैंग्लियोग्लायोमा से ग्रस्त अधिकांश लोग उपचार के बाद ठीक हो जाते हैं, विशेष रूप से तब यदि ट्यूमर का पता शुरुआत में ही चल जाए। लो-ग्रेड गैंग्लियोग्लायोमा सर्जरी द्वारा पूरी तरह से निकाल दिए जाने के बाद दुर्लभ मामलों में ही पुनरावर्ती (दोबारा) होते हैं।
गांग्लियोग्लिओमा लक्षण ट्यूमर के आकार और स्थान पर निर्भर करते हैं। क्योंकि ये ट्यूमर अक्सर धीमी गति से बढ़ते हैं, इसलिए लक्षण भी धीमी गति से दिखाई दे सकते हैं।
गैंग्लियोग्लिओमा के संकेतों और लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
गैंग्लियोग्लायोमा का सही-सही कारण ज्ञात नहीं है, और अधिकांश मामले किसी भी स्पष्ट जोखिम कारक के बिना होते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इनकी भूमिका हो सकती है:
ऐसे कोई स्पष्ट पर्यावरणीय, जीवनशैली संबंधी, या वंशानुगत कारक नहीं हैं जो गैंग्लियोग्लायोमा का जोखिम बढ़ाते हों।
चिकित्सक कई तरीकों से गांग्लियोग्लिओमा की जांच करते हैं। इनमें शामिल है:
अधिकांश गैंग्लियोग्लायोमा लो-ग्रेड ट्यूमर होते हैं जो दिमाग या मेरु रज्जु के किसी भी भाग में हो सकते हैं। वे धीरे बढ़ते हैं, कैंसरग्रस्त नहीं होते हैं, और उनके वापस आने (पुनरावर्तन) का जोखिम कम होता है।
लगभग 5–10% गैंग्लियोग्लायोमा उच्च-श्रेणी ट्यूमर होते हैं, जिन्हें एनाप्लास्टिक गैंग्लियोग्लायोमा कहा जाता है। वे तेज़ी से बढ़ा करते हैं और इनके लिए अधिक शक्तिशाली उपचार की ज़रूरत होती है।
डेस्मोप्लास्टिक इन्फ़ैन्टाइल गैंग्लियोग्लायोमा एक दुर्लभ प्रकार का गैंग्लियोग्लायोमा है जो 2 वर्ष कम उम्र के बहुत छोटे बच्चों में होता है। यह अक्सर एक बड़े ट्यूमर के रूप में प्रकट होता है लेकिन यह सामान्य तौर पर लो ग्रेड होता है और उपचार से इसमें अच्छा लाभ मिलता है।
इसके उपचार में ट्यूमर को जितना संभव हो उतना निकालने के लिए सामान्य तौर पर सर्जरी शामिल होती है। यदि पूरा ट्यूमर न निकाला जा सकता हो या वह वापस आ जाए, तो गैंग्लियोग्लायोमा का उपचार रेडिएशन, कीमोथैरेपी, या टारगेटेड थैरेपी से किया जा सकता है। यदि ट्यूमर से लक्षण नहीं हो रहे हैं और वह बढ़ नहीं रहा है, तो चिकित्सक सर्जरी की बजाए नियमित इमेजिंग और निगरानी का सुझाव दे सकते हैं।
सर्जरी का लक्ष्य ट्यूमर को जितना संभव हो उतना अधिक निकालना होता है। अकेले सर्जरी से ही अक्सर गांग्लियोग्लिओमा का उपचार किया जा सकता है।
अगर सर्जरी पूरे ट्यूमर को नहीं निकाल सकती है, तो विकीरण चिकित्सा मदद कर सकती है। ट्यूमर के दोबारा वापस आने पर भी यह मदद कर सकती है चिकित्सक देरी से होने वाले प्रभावों का जोखिम होने के कारण कम श्रेणी के ट्यूमर में रेडिएशन के उपयोग को सीमित करने का प्रयास करते हैं।
यदि सर्जरी ट्यूमर को पूरी तरह से नहीं हटा सकती है, तोकीमोथेरेपीकुछ रोगियों की मदद कर सकती है। कीमोथेरेपी बच्चे की आयु और ट्यूमर की जगह पर निर्भर करती है।
लक्षित उपचारट्यूमर कोशिकाओं के विशिष्ट लक्षणों पर क्रिया करते हुए या उन पर लक्ष्य साधते हुए कार्य करती हैं। ये दवाएँ उन कोशिकाओं में बदलाव तलाशती हैं जो ट्यूमर को बढ़ने में मदद देती हैं। साधारण कीमोथैरेपी के विपरीत, टारगेटेड थैरेपी ट्यूमर के केवल कुछ भागों पर हमला करती है, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं की रक्षा में मदद मिल सकती है।
कुछ गैंग्लियोग्लायोमा में BRAF नामक जीन में बदलाव (उत्परिवर्तन) होते हैं। एक सामान्य बदलाव का नाम है BRAF V600E उत्परिवर्तन। यदि आपके बच्चे के ट्यूमर में यह उत्परिवर्तन है, तो चिकित्सक ट्यूमर को बढ़ने से रोकने में मदद के लिए टारगेटेड थैरेपी का उपयोग कर सकते हैं।
BRAF V600E उत्परिवर्तन वाले गैंग्लियोग्लायोमा के लिए टारगेटेड थैरेपी दवाओं में शामिल हैं वेमुराफ़ेनिब और डब्राफ़ेनिब। इन्हें BRAF इनहिबिटर कहते हैं क्योंकि ये BRAF प्रोटीन को अवरुद्ध करती हैं। कभी-कभी, उपचार की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए किसी BRAF इनहिबिटर के साथ-साथ MEK इनहिबिटर नामक एक अन्य वर्ग की दवा (जैसे ट्रैमेटिनिब) का उपयोग किया जाता है।
गांग्लियोग्लिओमा से पीड़ित बच्चे आमतौर पर अच्छा करते हैं। 90% से अधिक रोगी रोग-पहचान से कम-से-कम 5 वर्ष बाद भी जीवित रहते हैं।
ठीक होने की संभावना को प्रभावित करने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल है:
दौरों की रोकथाम के लिए सर्जरी के बाद अक्सर दौरा-रोधी दवाएँ लिखी जाती हैं। यदि समय के साथ कोई भी दौरा न पड़े, तो चिकित्सक दवा की मात्रा धीरे-धीरे घटाते हुए उसे अंततः रोक सकते हैं।
फ़ॉलो-अप देखभाल में आवश्यकतानुसार पुनर्वास सेवाएँ, मनोवैज्ञानिक सेवाएँ, और तंत्रिकामनोवैज्ञानिक आकलन शामिल हो सकते हैं।
उपचार के बाद मरीजों की निगरानी के लिए नियमित इमेजिंग का उपयोग किया जाता है।
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समीक्षित: सितंबर 2025
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